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MP में जमीन विवादों को लेकर नई व्यवस्था, संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज होगी, रजिस्ट्री से पहले आपत्ति दिखेगी

भोपाल मध्य प्रदेश में जमीन से जुड़े विवादों के लिए अब आपत्ति दर्ज करवाना आसान हो गया है। राज्य सरकार ने संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन सुविधा शुरू कर दी है। जिसके तहत कोई भी किसी भी जिले से जमीन पर आनलाइन आपत्ति दर्ज करवा सकेगा। इसका फायदा यह होगा कि लोगों को पंजीयन कार्यालय में नहीं जाना पड़ेगा। ऑनलाइन आपत्ति दर्ज होते ही उसका रिकार्ड सब-रजिस्ट्रार के पास उपलब्ध होगा। भविष्य में यदि उस जमीन की रजिस्ट्री कराने कोई उप-पंजीयक कार्यालय पहुंचेगा, तो सिस्टम में दर्ज आपत्ति दिखाई देगी। इसकी सूचना तत्काल संबंधित पक्षों को दी जाएगी। आपत्ति दर्ज करवाने के लिए यह जरूरी आपत्ति दर्ज कराने के लिए जमीन की यूनीक ID या रजिस्ट्री नंबर देना अनिवार्य होगा। केवल स्थान, कालोनी या जमीन का सामान्य विवरण देने पर शिकायत दर्ज नहीं होगी। पंजीयन विभाग के अनुसार जमीन का सटीक रिकॉर्ड यूनीक आईडी या रजिस्ट्री नंबर से ही खोजा जा सकता है। सब रजिस्ट्रार का निर्णय होगा अंतिम आपत्ति के साथ लगाए गए दस्तावेजों की वैधता पर अंतिम निर्णय सब-रजिस्ट्रार करेंगे। वे संबंधित अधिनियम के तहत तय करेंगे कि मामले में क्या कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के अनुसार पहले कुछ लोग फर्जी कोर्ट आदेश लगाकर आपत्तियां दर्ज करा देते थे। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और रिकॉर्डेड होने से ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। इनका कहना है     संपदा पोर्टल पर 250 रुपये शुल्क और दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। संपत्ति के घरेलू मामलों में यह महत्वपूर्ण रहेगा, एक पक्ष समझौते के विपरीत जमीन बेचने की कोशिश करता है, तो दूसरा पक्ष पोर्टल पर आपत्ति दर्ज कर सकता है।     -स्वप्नेश शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक, भोपाल  

रीवा अमहिया मार्ग के चौड़ीकरण के लिए 165 अतिक्रमणकारियों को नोटिस, सिरमौर से अस्पताल चौराहा तक कार्रवाई तय

रीवा रीवा के व्यस्त अमहिया मार्ग को चौड़ा करने की कवायद अब तेज हो गई है। प्रशासन ने सिरमौर चौराहे से अस्पताल चौराहे तक चिन्हित किए गए 165 अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर दिया है। इस मार्ग पर कभी भी अतिक्रमण गिराने की कार्यवाही की जा सकती है। इस मार्ग के चोड़ीकरण के लिए पिछले दिनों सड़क की नापजोख की गई थी और नापजोख के बाद अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। संयुक्त टीम द्वारा राजस्व रिकार्डों के अनुसार की गई। इस नाप में कई जगह 5-6 मीटर तक कब्जा पाया गया है।  राजस्व रिकार्ड के मुताबिक सिरमौर चौराहा से लेकर अमहिया नाले तक सड़क की चौड़ाई 18 मीटर दर्ज है। इसके बाद गोस्वामी एक्सरे से लेकर गुरुद्वारा तक इस सड़क की चौड़ाई राजस्व नक्शे में 22 मीटर से लेकर 28 मीटर तक दर्ज है। इसके अलावा गुरुद्वारा से लेकर अस्पताल चौराहा तक सड़क की चौड़ाई 18 मीटर नक्शे में दर्ज है।  अतिक्रमणकारियों को लेकर विवाद सिरमौर चौराहा से अस्पताल चौराहा तक चिन्हित किये गये अतिक्रमणकारियों की भी समझ में आ चुका है कि अंतत: उन्हें खाली करना ही पड़ेगा। लिहाजा अब अतिक्रमण करने वाले एवं अतिक्रमित जमीन में दुकानों एवं मकानों को खरीदने वाले लोग सूची में अपना नाम होने की पुष्टि करने में लगे हुए हैं।  चिन्हित की गई अतिक्रमण की कई दुकानों को खरीदा एवं बेचा जा चुका हे जिससे अब उन दुकानों के मालिकान मालिकान बदल गये हैं लेकिन सूची में उनका नाम नहीं है। ऐसे लोग अब सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए तहसील एवं नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।  नापजोख के दौरान यह बात भी सामने आई कि कई दुकानदारों द्वारा 5-6 मीटर तक सड़क की जमीन पर कब्जा किया गया है। नापजोख के दौरान सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के सामने की सभी दुकाने अतिक्रमण में पाई गई है।  छोटी दरगाह परिसर में निर्मित दुकानों भी 5 फिट बढ़ाकर बनाई गई हैं। इसके अलावा अमहिया मोड़ के पास तिराहे में सर्वाधिक अतिक्रमण पाया गया है। कलेक्टर के आदेश पर सिरमौर चौराहे से अस्पताल चौराहे तक सड़क विस्तारीकरण के लिए अतिक्रमण टूटना तय हो गया है। 

कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान

उद्यानिकी स्टोरी:पारंपरिक खेती से प्रगतिशील बागवानी तक का सफर  कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान कुशवाह बने भोपाल के पहले किसान, जिन्होंने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती शुरू की भोपाल  भोपाल जिले के फन्दा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के  रामसिंह कुशवाह  कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहकर सीमित आय अर्जित करने वालेकिसान रहे है। आज वे फूलों और फलों की आधुनिक खेती से प्रतिमाह लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि किसान सशक्तिकरण और नवाचार की प्रेरक मिसाल है।  कुशवाह कहते हैं, “मैं प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।सरकार की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है और समाज में एक नई पहचान दी है।”  कुशवाह का परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था,जिसमें बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण आर्थिक चुनौतियाँ बनी रहती थीं। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना के अंतर्गत इस योजना का लाभ लेते हुए एक हजार स्क्यायर फिट में पॉली हाउस बनाकर फूलों (गुलाब और जरबेरा) की खेती प्रारंभ की। राज्य योजना में उद्यानिकी विभाग से एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में उन्होंने एक एकड़ भूमि में पॉली हाउस सरकार के लिए सब्सिड़ी लेते हुए गुलाब, जरबेरा, गेंदा के 30 हजार पौधें रोपे, जिससे  कुशवाह प्रतिदिन 4 हजार कट फ्लावर बेच कर प्रतिदिन 4 से 6 हजार रूपये तक की आमदनी प्राप्त कर रहे है। फूलों का उत्पादन बढ़ाने एवं लागत को कम करने के लिए उन्होंने इस वर्ष एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम अपने पॉली हाउस में स्टॉल करवाया जिसकी लागत 4 लाख रूपये है। इसमें 2 लाख रूपये की सब्सिड़ी सरकार द्वारा प्राप्त हुई है। ऑटोमेशन सिस्टम से एक एकड़ की खेती में पानी, खाद, दवाइयों की संतुलित मात्रा 24 x 7 बिना किसी मेन्युअल सिस्टम से दी जा रही है। जिससे पानी, खाद के समय एवं लागत की भी बचत हो रही है, वर्तमान में  कुशवाह पारंपरिक खेती से ऑटोमेटिक सिस्टम से बागवानी करने वाले भोपाल के पहले किसान बन गए है। उनके गुलाब, जरबेरा की सप्लाई लखनऊ, दिल्ली, जयपुर तक हो रही है। किसान  कुशवाह ने एक एकड़ में विगत वर्षों में 30 हजार जरबेरा के हाइब्रिड पौधों का रोपण किया तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाया, जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप वे मात्र एक वर्ष में ही प्रतिदिन 1500 से 2000 फूलों का उत्पादन कर बाजार में विक्रय कर रहे हैं। वे प्रतिदिन 4 हजार फूल स्पाईक प्राप्त कर प्रतिदिन 4 से 5 हजार रूपये की आमदनी भी प्राप्त कर रहे है। फूलों और फलों की खेती ने  कुशवाह की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना दिया है।  कुशवाह की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।  

MP में दाल प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाई शुरू करने पर किसानों को मिलेगा 33% की सब्सिडी, 25 लाख का लोन

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश को दलहन उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश भर में कुल 55 खाद्य प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग यूनिटें स्थापित की जानी हैं। ग्वालियर जिले के किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए यह खुद का उद्यम शुरू करने का मौका है। क्योंकि दलहन यूनिट की स्थापना के लिए सरकार आर्थिक रूप से बड़ी सहायता प्रदान कर रही है। एक यूनिट लगाने के लिए पात्र आवेदकों को 25 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस लोन पर सरकार की ओर से 33 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। यानी लगभग 8.25 लाख रुपये की सीधी बचत होगी, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा। यहां बता दें कि ग्वालियर-चंबल संभाग में गेहूं, सरसों व धान के अलावा तूअर यनि अरहर, चना जैसी दलहनी फसलों की पैदावार होती है। साथ ही मूंग व उड़द की भी कुछ क्षेत्रों में खेती की जाती है। ऐसे में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के किसान दलहन प्रसंस्करण इकाई लगाकर खेती के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा चयन पूरे प्रदेश के लिए केवल 55 यूनिटों का लक्ष्य रखा गया है, इसलिए इसमें चयन की प्रक्रिया काफी कड़ी हो सकती है। जिले के जो भी युवा या किसान इस योजना का लाभ उठाकर अपनी दाल प्रसंस्करण इकाई लगाना चाहते हैं, उन्हें बिना देरी किए सबसे पहले आवेदन करना होगा। आवेदन में देरी होने पर यह मौका हाथ से जा सकता है। किसानों को क्या होगा फायदा वर्तमान में ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों के किसान अपनी दालें जैसे चना, तुअर, मूंग को कच्ची फसल के रूप में मंडी में बेच देते हैं। खुद की पैकेजिंग और प्रसंस्करण यूनिट होने से किसान दालों की सफाई और ग्रेडिंग करके उन्हें ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे। यह इकाई न केवल उद्यमी किसान को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह करना होगा किसानों को यदि कोई किसान इस योजना के तहत अनुदान प्राप्त करना चाहते हैं, तो स्थानीय कृषि अभियांत्रिकी विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। योजना के तहत यूनिट लगाने के लिए पात्रता और आवेदन से जुड़ी विस्तृत जानकारी विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी। खुद का व्यवसाय लगाने की अच्छी संभावना     दलहन प्रसंस्करण व पैकेजिक इकाई लगाने के लिए किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। जिले में दलहन प्रसंस्करण इकाई लगाने की अच्छी संभावनाएं हैं। सरकार ने इस योजना में 33 प्रतिशत अनुदान देने की घोषणा की है। इसलिए यह किसानों के लिए खेती के साथ खुद का व्यवसाय लगाने की अच्छी संभावना है। चूंकि पूरे प्रदेश का टारगेट 55 इकाई का हैं, इसलिए पहले आवेदन करने वाले किसानों के लिए मौका रहेगा। – टीसी पाटीदार, कार्रकारी इंजीनियर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग  

MP में अवैध खनिज परिवहन रोकने के लिए 40 ई-चेक पोस्ट की व्यवस्था, मोबाइल पर मिलेगा E-Challan

भोपाल  मध्य प्रदेश में अवैध खनिज परिवहन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक आधारित नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। प्रदेश में 40 ई-चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जहां से फिलहाल वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। इन ई-चेक पोस्ट के माध्यम से खनिज परिवहन में गड़बड़ी पाए जाने पर जल्द ही ऑनलाइन ई-चालान जारी किए जाएंगे। ई-चालान से संबंधित नियम बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं। जैसे ही नियम लागू होंगे, ई-चेक पोस्ट पर दर्ज अनियमितताओं के आधार पर संबंधित वाहन मालिक को सीधे मोबाइल पर ई-चालान भेजा जाएगा। आधुनिक कैमरे पहचानेंगे वाहनों में लदा खनिज ई-चेक पोस्ट पर अत्याधुनिक तकनीक से लैस कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहनों में लोड खनिज की पहचान करने में सक्षम होंगे। यह भी पता लगाया जा सकेगा कि वाहन में कौन सा खनिज परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसे आधुनिक कैमरों से जोड़ा गया है। इस तकनीक की मदद से खनिज परिवहन की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी और अवैध गतिविधियों को चिन्हित किया जा सकेगा। AI आधारित तकनीक से होगी वाहनों की जांच अवैध परिवहन को रोकने के लिए स्थापित इन ई-चेक पोस्ट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यहां वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी लीडर और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर जैसे उपकरण लगाए गए हैं। इन उपकरणों की सहायता से खनिज परिवहन में लगे वाहनों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जांच की जाएगी। इससे अवैध खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगरानी के लिए बनाए गए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर अवैध परिवहन की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर भोपाल में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है। इसके अलावा भोपाल और रायसेन में जिला स्तर पर भी कमांड सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ई-चेक पोस्ट से प्राप्त डेटा की निगरानी की जाएगी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। प्रदेश में वैध और अवैध रेत खदानों की स्थिति प्रदेश में वर्तमान में 728 रेत खदानें वैध रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि 200 से अधिक अवैध रेत खदानों के संचालन की जानकारी भी सामने आई है। यही कारण है कि सरकार ने अवैध उत्खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अवैध उत्खनन और परिवहन के हजारों मामले दर्ज मध्य प्रदेश में वर्ष 2024-2025 के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन के 10,956 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में फिलहाल केवल जुर्माने की कार्रवाई की गई, जबकि कानून में गंभीर मामलों में सजा का भी प्रावधान है। अप्रैल 2024 से अब तक दर्ज मामलों के अनुसार अवैध उत्खनन के 1565, अवैध परिवहन के 8540 और अवैध भंडारण के 851 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कुल 83 करोड़ 74 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। कार्रवाई के दौरान हमलों की घटनाएं भी सामने आईं अवैध खनन रोकने के दौरान कई बार अधिकारियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में उत्खननकर्ता खनिज विभाग या कार्रवाई करने पहुंचे अमले पर हमला कर देते हैं। पिछले वर्ष भिंड में अवैध उत्खनन रोकने गए एक प्रशिक्षु पुलिस अधिकारी की मौत तक हो चुकी है। CM के निर्देश पर चला था विशेष अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2024 में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत देवास, सीहोर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, खरगोन, हरदा और शहडोल सहित प्रदेश के कई जिलों में लगभग 200 प्रकरण दर्ज किए गए। कार्रवाई के दौरान डंपर, पोकलेन मशीन और पनडुब्बी जैसे उपकरण जब्त किए गए तथा 1.25 करोड़ रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

कॉन्टेंट क्रिएटर लैब की अवधारणा पर संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

भोपाल एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र के विकास तथा ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 9 मार्च 2026 को “ऑरेंज इकोनॉमी के लिए एवीजीसी कॉन्टेंट क्रिएटर लैब” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का पोस्ट बजट वेबिनार आयोजित किया जाएगा। वेबिनार का आयोजन भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग और नीति आयोग के समन्वय से केंद्रीय बजट 2026-27 में ऑरेंज इकोनॉमी के लिए आवंटन: स्कूलों और कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब विषय पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र में संबंधित मंत्रालयों के मंत्री भागीदारी करेंगे। वेबिनार को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी विशेष संबोधन देंगे और एवीजीसी कॉन्टेंट क्रिएटर लैब की अवधारणा पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। केंद्र सरकार द्वारा देश के 15 हजार स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कॉन्टेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने की पहल की गई है। विद्यार्थियों में रचनात्मक और डिजिटल कौशल को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। वेबिनार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, सूचना एवं प्रसारण मंत्री  अश्विनी वैष्णव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल, शिक्षा मंत्री  धर्मेन्द्र प्रधान तथा राज्य मंत्री (योजना)  राव इन्द्रजीत सिंह भी संबोधित करेंगे। वेबिनार के उद्घाटन सत्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव  संजय जाजू, सचिव उच्च शिक्षा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीति आयोग, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सचिव उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन तथा सचिव दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में “एवीजीसी कॉन्टेंट क्रिएटर लैब इन स्कूल्स एंड कॉलेजेज” विषय पर ब्रेक आउट सत्र भी आयोजित होगा। इस सत्र में व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल के वीपी एवं सीटीओ  चैतन्य चिंचलीकर मॉडरेटर की भूमिका निभाएंगे। पैनल में  दीपक साहू (अतिरिक्त सचिव, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग), डॉ. आशीष कुलकर्णी (चेयरमैन, फिक्की एवीजीसी फोरम),  राजन नवानी (ग्रुप सीईओ, जेटसिंथेसिस), सु सोनम भगत (सीईओ, वाइग्र) तथा सु रीथ गुप्ता (आईआईसीटी छात्रा) शामिल रहेंगी। इसके साथ ही  मुंजाल श्रॉफ (ग्राफिटी मल्टीमीडिया),  बीरेन घोष (टेक्नीकलर ग्रुप),  मानवेन्द्र शुक्ल (लक्ष्य डिजिटल) तथा सु प्रतिवा मोहपात्रा भी सत्र में अपने विचार रखेंगे। एक अन्य सत्र की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग के सचिव  विनीत जोशी द्वारा की जाएगी। इसमें  चंद्रजीत बैनर्जी (डीजी, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री),  प्रताप बोस (एनआईडी एलुमनस, महिंद्रा एंड महिंद्रा ऑटोमोबाइल), प्रो. गोविंदन रंगराजन (निदेशक, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु), प्रो. शुचि सिन्हा (एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी दिल्ली), प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमणियम (निदेशक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स) तथा डॉ. अनुपमा खन्ना (सीनियर ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट, एनआइईपीआइडी रीजनल सेंटर, नोएडा) अपने विचार रखेंगे। यह वेबिनार देश में रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने, युवाओं को नई डिजिटल और क्रिएटिव स्किल से जोड़ने तथा एवीजीसी क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वेबिनार में विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत तथा एवीजीसी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और हितधारकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई है। केंद्रीय बजट में देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एव्हीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने की घोषणा की गई है, जिसमें आईआईसीटी राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी होगी। इस पहल का उद्देश्य औपचारिक शिक्षा प्रणाली में रचनात्मक और डिजिटल कौशल को शामिल करना तथा भारत की ऑरेंज इकोनॉमी को सशक्त बनाना है। प्रदेश के सम्बंधित विभागों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, स्कूलों और संबंधित संस्थानों से आग्रह किया गया है कि वे अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें। साथ ही प्रतिक्रिया और सुझाव claygo@gov.in पर भेज सकेंगे ताकि आवश्यक आँकड़ों का संकलन किया जा सके। उल्लेखनीय है कि एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) क्षेत्र को केंद्रीय बजट 2022-23 में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक नीति प्राथमिकता के रूप में मान्यता दी गई थी। इसके तहत घरेलू क्षमता निर्माण और वैश्विक बाज़ारों की सेवा के लिए AVGC टास्क फोर्स का गठन किया गया। वेबिनार में मानव संसाधन और क्षमता संबंधी विषयों पर चर्चा की जाएगी. एनीमेशन, गेमिंग, VFX और XR जैसे क्षेत्रों में उद्योग अनुभव वाले प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या बढ़ाने, फैकल्टी डेवलपमेंट, उद्योग विशेषज्ञों को शिक्षा संस्थानों को मज़बूत करने विषयों पर चर्चा होगी। उल्लेखनीय हैं कि पिछले दशक में देश में AVGC-XR पारिस्थितिकी तंत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। AVGC-XR क्षेत्र को राष्ट्रीय रणनीतिक विकास क्षेत्र के रूप में मान्यता मिली। टास्क फोर्स का गठन और राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया गया है। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र – IICT की स्थापना और WAVES जैसे वैश्विक मंचों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिला। डिजिटल कंटेंट, क्रिएटर इकोनॉमी और स्टार्टअप गतिविधियों में वृद्धि हुई। 

नीतिगत प्रोत्साहन, मजबूत औद्योगिक आधार और सस्ती बिजली से ईवी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) मैन्युफेक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से उभरते केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत औद्योगिक आधार, उन्नत परीक्षण अधोसंरचना, ऊर्जा उपलब्धता और निवेश अनुकूल नीतियों के माध्यम से एक सशक्त ईको सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 और इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के माध्यम से ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को व्यापक प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश में उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। वैश्विक बदलाव के साथ बढ़ती ईवी की संभावनाएं वैश्विक स्तर पर ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में बढ़ रहा है और भारत भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और यह क्षेत्र राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत का योगदान देता है। इलेक्ट्रिक वाहन आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बैटरी तकनीक, अनुसंधान एवं विकास, सॉफ्टवेयर, मेंटेनेंस और संबंधित सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं। मजबूत ऑटोमोबाइल क्लस्टर और परीक्षण अधोसंरचना मध्यप्रदेश इस परिवर्तन को अवसर के रूप में लेते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वयं को एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। राज्य में पीथमपुर देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स में से एक है, जहां 200 से अधिक ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट निर्माता संचालित हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिला है। इसके साथ ही एशिया का सबसे बड़ा ऑटोमोटिव परीक्षण ट्रैक नैट्रैक्स उद्योगों को अत्याधुनिक परीक्षण और अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल और ईवी उद्योग के लिए मजबूत तकनीकी आधार उपलब्ध हुआ है। इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी से मैन्यूफेक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट के लिए संपूर्ण सप्लाई चेन विकसित करने पर केंद्रित है। इस नीति के माध्यम से बैटरी निर्माण, वाहन असेंबली से लेकर रीसाइक्लिंग तक के क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिक ट्रकों जैसे उभरते सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए मोटर व्हीकल टैक्स और पंजीयन शुल्क में छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। औद्योगिक प्रोत्साहन और निवेश में बढ़ेंगे अवसर इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के अंतर्गत उद्योगों को पूंजी अनुदान, भूमि रियायत, निर्यात परिवहन सहायता तथा हरित और अनुसंधान निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इन नीतियों के माध्यम से राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल और उससे जुड़े उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। मध्यप्रदेश ऊर्जा के मामले में अधिशेष राज्य है और यहां बिजली दरें देश में अपेक्षाकृत कम हैं, जिससे ईवी विनिर्माण इकाइयों और चार्जिंग अधोसंरचना के संचालन के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक परिस्थितियां उपलब्ध होती हैं। भारत में ईवी की बढ़ती मांग भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो पहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 6.1 प्रतिशत, तीन पहिया में 23.4 प्रतिशत, यात्री कारों में 2 प्रतिशत और बसों में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस प्रकार कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। औद्योगिक अधोसंरचना, आधुनिक परीक्षण सुविधाएं, निवेश अनुकूल नीतियां और ऊर्जा उपलब्धता जैसे कारकों के कारण मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 

नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग की स्वीकृति से बड़नगर के समग्र विकास के खुलेंगे द्वार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व पटल पर नई ऊंचाइयां को छू रहा है। देश में मध्यप्रदेश का विशेष महत्व है। विकास के इस कारवां को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार समाज के हर वर्ग और प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। उज्जैन जिले का बड़नगर भी विकास में अग्रणी रहेगा। बड़नगर अब इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया का भाग बनेगा। बड़नगर पर बाबा महाकाल सहित चंबल, शिप्रा और गंभीर नदियों का भी आशीर्वाद है। प्रधानमंत्री  मोदी ने धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन किया है। टेक्सटाइल सेक्टर के इस मेगा इंडस्ट्रियल पार्क का लाभ भी बड़नगरवासियों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़नगर क्षेत्र में संचालित गौशालाओं को नरवाई प्रबंधन के लिए मशीनें लेने में सहायता के उद्देश्य से स्वेच्छानुदान से अंश राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे नरवाई के निराकरण के साथ ही गौशालाओं को पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़नगर क्षेत्र के व्यायाम शालाओं को प्रोत्साहन स्वरूप एक-एक लाख रूपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग की स्वीकृति प्रदान करने के लिए उनका आभार प्रकट करने मुख्यमंत्री निवास पहुंचे बड़नगर विधानसभा क्षेत्र के निवासियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़नगरवासियों ने साफा और गजमाला पहनाकर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से उज्जैन और बड़नगर अब 3 प्रमुख मार्गों के माध्यम से रतलाम से जुड़ गया है। तीसरा नया 2 लेन रास्ता गंभीर डैम के पास से नागदा होकर निकलने वाला है। लगभग 150 करोड़ रूपए का नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी सौगात है। इससे रतलाम की दूरी 40 किलोमीटर कम हो जाएगी। नई सड़क से सिंहस्थ : 2028 के आयोजन में भी सुविधा होगी। उज्जैन में विमानतल भी बनाया जा रहा है, इसका लाभ भी बड़नगर को मिलेगा। आगामी वर्षों में रतलाम सहित राजस्थान और गुजरात से भी बड़नगर का संपर्क सुगम और सशक्त होगा। सड़कें विकास का आधार हैं, इन सड़कों से बड़नगर सहित सम्पूर्ण क्षेत्र के विकास के द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ : 2028 को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रस्तावित मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वर्तमान में रतलाम से उज्जैन आने वाले श्रद्धालु मुख्यत: बदनावर-बड़नगर मार्ग से आवागमन करते हैं, जिसकी कुल लंबाई लगभग 115 कि.मी. है। प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग की कुल लंबाई लगभग 74 कि.मी. है, जो वर्तमान प्रचलित मार्ग की तुलना में लगभग 40 कि.मी. कम है। इस मार्ग के विकसित होने से यात्रा की दूरी एवं समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें मित्र की सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासी हमारे लिए भगवान  हनुमान की तरह हैं, जिन्हें केवल जनभागीदारी की शक्ति का भान कराना होता है। सरकार के कार्य अपने आप होते चले जाते हैं। अभिनंदन समारोह में बड़नगर विधायक  जितेंद्र पंड्या,  अंतर सिंह देवड़ा,  उमराव सिंह,  विजय चौधरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

मध्यप्रदेश में नया कॉलोनाइजर एक्ट: शहर और गांव के लिए एक कानून की तैयारी

भोपाल प्रदेश में शहरों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में कालोनियों का निर्माण तेजी के साथ हो रहा है। निगरानी की कमी के कारण अवैध कालोनियां भी बन रही हैं, जहां रहवासियों को आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। यही स्थिति शहरी क्षेत्र में भी है। उधर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लिए कालोनाइजर अधिनियम अलग-अलग हैं। इन्हें एक करके कड़े प्रावधान लागू करने का प्रारूप तैयार किया गया है, जिससे पंचायत एवं ग्रामीण व नगरीय विकास एवं आवास विभाग सहमत हैं। अध्यादेश के माध्यम से लागू होगा नया नियम एकीकृत कालोनाइजर अधिनियम बजट सत्र में प्रस्तुत करना प्रस्तावित था लेकिन वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक नहीं हो पाई। अब इसे अध्यादेश के माध्यम से लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में तेजी के साथ शहरीकरण हो रहा है। शहरों में भूखंड का मूल्य अधिक होने से पास की पंचायतों में तेजी के साथ नई-नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। अवैध निर्माण और पंचायतों की चुनौतियां दरअसल, पंचायत क्षेत्र में कालोनाइजर को आसानी से अनुमतियां मिल जाती हैं। कालोनाइजर कालोनी बनाकर निकल जाते हैं लेकिन आवश्यक सुविधाओं का विकास नहीं करते हैं। पंचायतें भी ध्यान नहीं देती हैं और जब यह कालोनियां नगरीय निकायों में शामिल होती हैं तो फिर विकास से जुड़े मुद्दे खड़े हो जाते हैं। अवैध कालोनियों को नियमित करने का प्रविधान कुछ समय के लिए किया गया था लेकिन वर्तमान में यह बंद हैं। सरकार का कड़ा रुख और विधानसभा में चर्चा विधानसभा के बजट सत्र में पूर्व विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा सहित अन्य विधायकों ने भी अवैध कालोनी का विषय उठाया था। इस पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माना था कि अवैध कालोनियां बड़ी समस्या हैं। ये बने ही न, इसके लिए कड़े प्रविधान करने जा रहे हैं। विधेयक तीन माह बाद होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। सिंगल विंडो सिस्टम और समान लाइसेंस नीति उधर, सरकार ने तय किया है कि नगरीय क्षेत्रों के लागू कालोनाइजर नियम जैसे ही पंचायत क्षेत्र में भी लागू किए जाएंगे। एक ही लायसेंस से कालोनाइजर कहीं भी काम कर सकेंगे। इसमें नक्शा पास कराने से लेकर अन्य अनुमतियां सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी। निर्धारित अधोसंरचना विकास करना होगा और इसके उल्लंघन पर कार्रवाई होगी। सिंहस्थ क्षेत्र में बनीं कालोनियों को लेकर चिंता उधर, सरकार इस प्रावधान को जल्द से जल्द लाना चाहती है क्योंकि सिंहस्थ क्षेत्र में कई अवैध कालोनियां बन गई हैं। एक प्रावधान होने से समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। इसके बाद भी यदि अवैध कालोनी बनती है तो जिसके क्षेत्र में ऐसा पाया जाएगा, उस अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होगी। नगरीय निकाय और पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ एसडीएम, अपर कलेक्टर और कलेक्टर की भी जिम्मेदारी तय होगी। एक पोर्टल भी बनाया जाएगा, जिसमें कालोनी से संबंधित सभी स्थिति स्पष्ट रहेगी ताकि जो कोई भी उसमें संपत्ति खरीदे, उसे स्थिति स्पष्ट हो जाए।  

राज्यसभा चुनाव का असर संगठन पर भी? MP के कई दिग्गजों को राष्ट्रीय टीम में मिल सकता है बड़ा रोल

भोपाल राज्यसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के संगठन में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि 16 मार्च के बाद भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हो सकता है, जिसमें मध्य प्रदेश के कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद से ही नई टीम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राज्यसभा चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार बिहार, छत्तीसगढ़ समेत करीब दस राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा संगठन में फेरबदल पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर मंथन भी शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि संगठन को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत बनाने के उद्देश्य से अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी टीम में जगह दी जा सकती है। राष्ट्रीय संगठन में पहले से मजबूत है मध्य प्रदेश भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश को पहले से ही खास महत्व मिलता रहा है। वर्तमान में प्रदेश से कई नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें सत्यनारायण जटिया संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं, जबकि ओमप्रकाश धुर्वे राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति मोर्चा में भी प्रदेश के नेताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। यही वजह है कि नई टीम में भी मध्य प्रदेश की मजबूत भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। नड्डा की टीम में भी था प्रदेश का प्रभाव पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की टीम में भी मध्य प्रदेश के चार नेताओं को जगह मिली थी। उस समय कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव के पद पर थे। बाद में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और जीत के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया। इससे पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव—बावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर—रह चुके हैं।   चार से पांच नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी भाजपा सूत्रों का कहना है कि नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश से चार से पांच नेताओं को जगह मिल सकती है। इनमें एक-दो वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी अवसर मिलने की संभावना है। कुछ नेताओं को विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों में भी जिम्मेदारी दी जा सकती है। दरअसल, मध्य प्रदेश को भाजपा के लिए लंबे समय से एक मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। संघ और जनसंघ की जड़ों से जुड़ा यह प्रदेश पार्टी के लिए प्रयोगशाला की तरह रहा है। मजबूत संगठन और अनुभवी कार्यकर्ताओं के कारण यहां के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार अवसर मिलता रहा है। ऐसे में नई टीम में मध्य प्रदेश की भूमिका फिर अहम रहने की संभावना है।