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जबलपुर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से राहत! मार्च 2027 तक पूरा होगा 113 किमी आउटर रिंग रोड का काम

 जबलपुर  जबलपुर में यातायात का दबाव कम करने और शहर के बाहर से वाहनों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित आउटर रिंग रोड का निर्माण पांच पैकेज में किया जा रहा है। बरेला से मानेगांव सहित अलग-अलग हिस्सों में विभाजित इस 113 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना पर करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना को पहले दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर मार्च 2027 कर दी गई है। पांच पैकेज में होगा निर्माण परियोजना को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर निर्माण की योजना बनाई गई है। इसमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45 यानी बेलखाड़ू क्षेत्र, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर और अमझर से वापस बरेला तक का हिस्सा शामिल है। इन पांचों पैकेज के माध्यम से पूरी रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा। इन प्रमुख मार्गों से जुड़ेगी रिंग रोड रिंग रोड का एक हिस्सा बरेला से मानेगांव तक रहेगा। इसके बाद सड़क मानेगांव से एनएच-45 तक पहुंचेगी। आगे एनएच-45 से कुशनेर तक का हिस्सा होगा, जहां से वाराणसी-सिरोनाबाद मार्ग की ओर संपर्क मिलेगा। कुशनेर से अमझर तक का हिस्सा अमरकंटक मार्ग से जुड़ेगा। इसके बाद अमझर से बरेला तक सड़क का अंतिम हिस्सा होगा। दिसंबर 2025 की जगह अब मार्च 2027 की समयसीमा परियोजना को मूल रूप से दिसंबर 2025 तक पूरा करने की योजना बनाई गई थी। अब संशोधित लक्ष्य के अनुसार मार्च 2027 तक निर्माण पूरा करने की बात कही गई है। करीब 3500 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पूरा होने से शहर के बाहर से गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलने और प्रमुख मार्गों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।  

दिवाली से पहले मेट्रो यात्रियों को सौगात, भोपाल और इंदौर में टिकट पर 25% डिस्काउंट

इंदौर/भोपाल   भारी भरकम खर्च और यात्रियों की बेरुखी से जूझ रही मेट्रो रेल कंपनी ने त्योहार के अवसर पर ट्रेन के टिकट पर 25% तक की छूट देने का ऐलान किया है. इतना ही नहीं अब ट्रेन के ग्रुप टिकट लेने की प्रक्रिया को भी आसान किया गया है. नवरात्रि के दिन से यह ऑफर शुरू हो रहा है।  त्योहार के अवसर पर डिस्काउंट का ऐलान मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने यात्रियों को मेट्रो यात्रा पर सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भोपाल और इंदौर मेट्रो में टिकट पर त्योहारों के अवसर पर डिस्काउंट का ऐलान किया है. इस विशेष प्रमोशनल डिस्काउंट व्यवस्था के तहत यात्रियों को मौजूदा छूट के अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा. यह व्यवस्था 11 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक लागू होगी।  ग्रुप टिकट की सुविधा को भी यात्रियों के लिए आसान बनाया गया है. पहले ग्रुप टिकट लेने के लिए कम से कम 8 यात्रियों का होना आवश्यक था, जिसे अब घटाकर केवल 2 यात्री कर दिया गया है. इससे परिवार और दोस्तों के साथ यात्रा करने वाले यात्री भी ग्रुप टिकट का लाभ ले सकेंगे. 20 रुपए के सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट लागू नहीं होगी।  रिटर्न टिकट पर 30% और ग्रुप टिकट पर कुल 35% छूट     सिंगल जर्नी टिकट (SJT): टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट.     रिटर्न जर्नी टिकट (RJT): पहले मिलने वाली 5 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 30 प्रतिशत छूट.     ग्रुप टिकट (GT): पहले मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 35 प्रतिशत छूट. नई छूट से यात्रियों को होगा दोहरा फायदा MPMRCL मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर यात्रियों को पहले से ही रिचार्ज राशि के अनुसार 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक बोनस राशि का लाभ दिया जा रहा है. इसके अंतर्गत ₹200 से ₹499 तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, ₹500 से ₹999 तक पर 10 प्रतिशत, ₹1000 से ₹1499 तक पर 12 प्रतिशत और ₹1500 से ₹2000 तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है।  अब इस मौजूदा ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल टिकट छूट का लाभ मिलने से यात्रियों को टिकट पर अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत का लाभ प्राप्त हो सकता है. इस पहल के साथ भोपाल और इंदौर मेट्रो में यात्रियों को देश की अन्य मेट्रो सेवाओं की तुलना में आकर्षक अतिरिक्त किराया छूट का लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है. डिजिटल टिकटिंग और ई-वॉलेट का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से लाभदायक होगी।      डिजिटल टिकटिंग और कैशलेस भुगतान से स्मार्ट यात्रा भोपाल एवं इंदौर मेट्रो में यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन प्रणाली पहले से संचालित है। यात्री MPMRCL के मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट प्राप्त कर सहज, सुरक्षित और कैशलेस यात्रा कर सकते हैं. टिकट का भुगतान यूपीआई, क्यूआर कोड, ई-वॉलेट और एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा सकता है।  इस डिजिटल व्यवस्था से टिकट खरीदने की प्रक्रिया सरल और तेज होती है और नकद भुगतान की आवश्यकता भी नहीं रहती. मौजूदा डिजिटल टिकटिंग और ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल छूट यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। 

रीवा के सरई कला-रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट पर विवाद, ग्रामीणों से बैठक बेनतीजा

रीवा  रीवा जिले की सिरमौर तहसील के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर आज कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। बोरहोल का काम कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परियोजना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विरोध की स्थिति बनी। सरई कला, रोझौही और आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि जब वे परमाणु बिजलीघर के पक्ष में नहीं हैं, तो उनकी आपत्तियों का निराकरण किए बिना आगे की प्रक्रिया क्यों की जा रही है। अधिकारियों ने समझाया, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े मौके पर सिरमौर तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर चाहिए, लेकिन परमाणु बिजलीघर से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर भी उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में दूसरे उद्योग स्थापित करने का विकल्प देने की मांग की। कथित फर्जी एनओसी की जांच कराने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का मामला उठाया। उन्होंने पत्र क्रमांक 170/2026 की जांच कराने की मांग की। द्विवेदी के मुताबिक, ग्राम सभा में 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने कहा कि जब ग्राम सभा और स्थानीय ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो उनकी सहमति और आपत्तियों को स्पष्ट किए बिना आगे की प्रक्रिया कैसे की जा सकती है। ग्रामीणों ने भी ग्राम सभा के प्रस्तावों और एनओसी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। विकास चाहिए, लेकिन रेडिएशन का खतरा नहीं! प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, रेडिएशन और परमाणु कचरे को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से उनके स्वास्थ्य, खेती, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारी, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े बोरहोल की प्रक्रिया के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल, एमपीआईडीसी, एनपीसीआईएल और टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और उनकी आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। मौके पर सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन तथा टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। स्थानीय सरपंच, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी विरोध के दौरान उपस्थित थे। कथित फर्जी एनओसी का मामला उठा, निष्पक्ष जांच की मांग प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी बताए जा रहे पत्र क्रमांक 170/2026 की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका सवाल है कि यदि संबंधित ग्रामसभा और ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो फिर एनओसी किस आधार पर जारी की गई? शिवानंद द्विवेदी ने दावा किया कि 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को ग्रामसभा में इस परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामसभा के निर्णयों और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लेने की मांग की। हालांकि, एनओसी के फर्जी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों की चेतावनी—परियोजना निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन लगातार विरोध के बीच अब प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा स्थानीय स्तर पर और अधिक गरमा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक परियोजना को निरस्त नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों, ग्रामसभा के प्रस्तावों और कथित एनओसी विवाद की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर परियोजना को लेकर टकराव आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल, रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर विरोध जारी है। ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और ग्रामसभा के अधिकारों पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन जारी रखने की चेतावनी विरोध प्रदर्शन में सरई कला की सरपंच कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच पति संजय सिंह,सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों के विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर उनकी आपत्तियों का निराकरण और मांगों पर निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी है। अब परियोजना की आगे की प्रक्रिया और ग्रामीणों की आपत्तियों पर प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।

82 साल में 13वीं बार सर्वपितृ अमावस्या पर दुर्लभ संयोग, उज्जैन में जूते-चप्पलों का विसर्जन और तेल की नीलामी

उज्जैन  82 साल में 13वीं बार बने तीन दुर्लभ संयोग के साथ सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर शनिवार को शिप्रा और नर्मदा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। गजछाया योग में पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध के लिए उज्जैन के सिद्धवट घाट पर रात से ही लोग पहुंच गए। उज्जैन में भक्तों द्वारा शनिश्चरी अमावस्या पर भगवान शनि को चढ़ाए गए तेल की 24 घंटे बाद नीलामी होगी। वहीं, घाटों पर जूते-चप्पल और कपड़े भी भक्त छोड़ रहे हैं। इन्हें री-साइकिल कर फाइल कवर और तेल जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। उज्जैन के सिद्धवट घाट पर देशभर से लोग सुबह 5 बजे से ही पितरों के निमित्त तर्पण और पूजन के लिए पहुंचे। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने चार पहिया वाहनों के लिए मंगलनाथ से भैरवगढ़ और भैरवगढ़ से सिद्धवट जाने वाले मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया है। तीन योग एक साथ, पितृ कर्म का विशेष महत्व पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में अलग-अलग ग्रह योग और संयोग बनते हैं। जो लोग श्राद्ध के 15 दिनों में घाटों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना नहीं कर पाते, वे सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण करने आते हैं। इस बार अमावस्या के शनिवार को पड़ने के साथ गजछाया योग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस योग में पितरों के निमित्त किए गए कर्मों का विशेष महत्व है। सूर्य और चंद्रमा को पितरों से जुड़े वैदिक कर्मों का साक्षी माना गया है। त्रिवेणी शनि मंदिर में आधी रात से लगी कतारें शनिश्चरी अमावस्या के चलते त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात 12 बजे से ही पहुंचने लगे थे। यहां शिप्रा नदी के पानी से स्नान की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के लिए नदी में फव्वारे लगाए गए हैं, इसलिए डुबकी लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। शनि मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु तेल, काली उड़द, फूल और प्रसाद लेकर भगवान शनि के दर्शन कर रहे हैं। केडी पैलेस पर भी पहुंचे श्रद्धालु सर्वपितृ अमावस्या पर केडी पैलेस स्थित शिप्रा नदी के घाट पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। यहां कुछ श्रद्धालु भूत-प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की धार्मिक मान्यता के चलते नदी में स्नान करते नजर आए। कई लोग हाथों में जंजीरें और तलवारें लिए तथा अलग-अलग तरह की आवाजें निकालते हुए भी पहुंचे। यह स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी परंपरा है। कन्या राशि, सूर्य-चंद्र और हस्त नक्षत्र से बनता है गजछाया योग पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, जब अमावस्या हस्त नक्षत्र में आती है, तो उसे गजछाया या कुंजरछाया योग कहा जाता है। इस बार सूर्य और चंद्रमा का कन्या राशि में गोचर तथा हस्त नक्षत्र का संयोग इस योग का निर्माण कर रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यह योग पितृ कर्म के लिए विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान ग्रह स्थिति में शनि मीन राशि में और बृहस्पति कर्क राशि में हैं। बृहस्पति की नौवीं दृष्टि शनि पर पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में दोनों ग्रहों को धर्म और अध्यात्म से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस संयोग के दौरान किए जाने वाले धार्मिक कर्मों को विशेष महत्व दिया जाता है।

इंदौर में क्रिकेट का रोमांच, भारत-वेस्टइंडीज की टीमें आज होलकर स्टेडियम में करेंगी अभ्यास

इंदौर होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले को लेकर इंदौर में तैयारियां तेज हो गई हैं। शनिवार को दोनों टीमों के खिलाड़ी चार्टर्ड फ्लाइट से दोपहर करीब 2:40 बजे इंदौर पहुंचेंगे। एयरपोर्ट से दोनों टीमें सीधे अपने-अपने होटलों के लिए रवाना होंगी। भारतीय टीम रेडिसन होटल में ठहरेगी, जबकि वेस्टइंडीज की टीम के लिए मैरिएट होटल में व्यवस्था की गई है। खिलाड़ियों की आवाजाही, सुरक्षा, अभ्यास और मैदान की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मैच को लेकर शहर में क्रिकेट का माहौल बनने लगा है। होलकर स्टेडियम के बाहर टीम इंडिया की जर्सी, टी-शर्ट और कैप की दुकानें सज गई हैं। क्रिकेट प्रेमी खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। वहीं, आयोजन से जुड़े विभाग खिलाड़ियों की सुरक्षा और दर्शकों की सुविधाओं को लेकर तैयारियों में जुटे हैं। मैदान के बाहर भी तैयार कीं दो पिचें भारत और वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों के अभ्यास को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। बल्लेबाजों की नेट प्रैक्टिस के लिए मैदान के बाहर अमय खुरासिया एकेडमी में दो पिचें तैयार की गई हैं। इन्हें होलकर स्टेडियम की पिचों के समान परिस्थितियां देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि बल्लेबाजों को अभ्यास के दौरान मैच जैसी स्थिति मिल सके। इसके अलावा होलकर स्टेडियम के अंदर गेंदबाजों के अभ्यास के लिए भी दो अलग पिचें तैयार की गई हैं। जरूरत के अनुसार खिलाड़ी इनका उपयोग कर सकते हैं। दोनों टीमों के लिए कोई अनिवार्य आधिकारिक अभ्यास सत्र निर्धारित नहीं है। ऐसे में अभ्यास करने या नहीं करने का फैसला खिलाड़ी और टीम मैनेजमेंट अपनी सुविधा के अनुसार लेंगे। एयरपोर्ट से होटल तक तय रूट, खिलाड़ियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दोनों टीमों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए एयरपोर्ट से होटल और होटल से स्टेडियम तक का रूट निर्धारित किया गया है। एयरपोर्ट से खिलाड़ियों को सुपर कॉरिडोर और एमआर-10 के रास्ते होटल पहुंचाया जाएगा। अभ्यास के लिए स्टेडियम जाते समय एबी रोड का इस्तेमाल किया जाएगा। खिलाड़ियों के ठहरने वाले होटलों और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। स्टेडियम में भी खिलाड़ियों की सुरक्षा के साथ दर्शकों की आवाजाही और प्रवेश व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। सुरक्षा प्रबंधन में सीसीटीवी कैमरों के साथ टर्नस्टाइल और फेस रिकॉग्निशन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की तैयारी की जानकारी भी सामने आई है। इन व्यवस्थाओं के वास्तविक संचालन और लागू प्रोटोकॉल की पुष्टि संबंधित अधिकारियों से किया जाना जरूरी है। ओस की चुनौती से निपटने की कोशिश होलकर स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है। यहां कई मुकाबलों में बड़े स्कोर बने हैं। ऐसे में भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 मैच में भी बल्लेबाजों के प्रदर्शन के साथ गेंदबाजों की रणनीति और दूसरी पारी की परिस्थितियां अहम रहेंगी। मैदान की तैयारी में घास और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, मैदान पर विशेष प्रकार की घास लगाई गई है, जिसका उद्देश्य ओस के असर को कम करना है। रात के टी-20 मुकाबलों में ओस गेंदबाजों के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि गीली गेंद को नियंत्रित करना मुश्किल होता है। हालांकि, घास के कारण ओस का असर कितना कम होगा, यह मैदान की वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। टीम इंडिया में इंदौर का कोई खिलाड़ी नहीं भारतीय टीम में इस मुकाबले के लिए इंदौर का कोई खिलाड़ी शामिल नहीं है, लेकिन मैच के तकनीकी संचालन में शहर की भागीदारी रहेगी। इंदौर के अंतरराष्ट्रीय अंपायर नितिन मेनन को भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सीरीज में जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह होलकर स्टेडियम में होने वाले मुकाबले में थर्ड अंपायर की भूमिका निभाएंगे। थर्ड अंपायर टीवी रीप्ले और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मैदानी अंपायरों को फैसले लेने में सहायता करते हैं। पांच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज में मेनन अलग-अलग भूमिकाओं में भी नजर आ सकते हैं। इस तरह भारतीय टीम में स्थानीय खिलाड़ी नहीं होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के संचालन में इंदौर का प्रतिनिधित्व रहेगा। स्कोरिंग से लेकर DLS तक, मध्य प्रदेश के चार लोगों को जिम्मेदारी मुकाबले के आयोजन में मध्य प्रदेश के चार लोगों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बीसीसीआई ने इंदौर के जयंत वानखेड़े और मयंक थनवार को स्कोरर नियुक्त किया है। एमपीसीए ने इंदौर के अमित पारखे को मीडिया बॉक्स की जिम्मेदारी दी है, जबकि ग्वालियर के सुनील गुप्ता डीएलएस से जुड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे। डीएलएस यानी डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति का इस्तेमाल बारिश या अन्य कारणों से प्रभावित सीमित ओवरों के मुकाबलों में संशोधित लक्ष्य तय करने के लिए किया जाता है। स्कोरिंग, मीडिया प्रबंधन और मैच की तकनीकी प्रक्रियाओं में प्रदेश के प्रतिनिधियों की भागीदारी आयोजन में स्थानीय योगदान को दर्शाती है। भारत की टीम में ये 15 खिलाड़ी शामिल भारत की घोषित टीम में संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, श्रेयस अय्यर, ईशान किशन, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, अर्शदीप सिंह, तिलक वर्मा, रवि बिश्नोई, नितीश कुमार रेड्डी, मयंक यादव, नमन धीर, प्रिंस यादव और वैभव सूर्यवंशी के नाम शामिल हैं। स्टेडियम के बाहर सजीं जर्सी और कैप की दुकानें मैच से पहले होलकर स्टेडियम के बाहर क्रिकेट का उत्साह दिखाई देने लगा है। फुटपाथ पर टीम इंडिया की टी-शर्ट, जर्सी और कैप की दुकानें सज गई हैं। बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी यहां खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। मुकाबले को लेकर प्रशंसकों में उत्साह है और शहर में क्रिकेट का माहौल बनने लगा है। स्टेडियम की 30 हजार दर्शकों की क्षमता होलकर स्टेडियम का नाम मराठा होलकर राजवंश के नाम पर रखा गया है। इसकी स्थापना 1990 में हुई थी। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के स्वामित्व और संचालन वाले इस स्टेडियम की दर्शक क्षमता करीब 30 हजार बताई जाती है। फ्लडलाइट्स और जल निकासी की व्यवस्था इसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के महत्वपूर्ण मैदानों में शामिल करती है। यहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा घरेलू क्रिकेट के कई मुकाबले भी आयोजित हो चुके हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 2016 में यहां पहला टेस्ट मैच खेला गया था। इसके साथ ही होलकर स्टेडियम भारत का 22वां टेस्ट स्थल बना। वर्ष 2017 में यहां भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे और भारत-श्रीलंका के बीच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले भी खेले गए। कई रिकॉर्ड का गवाह रहा … Read more

भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट पर इंदौर में बवाल, हजारों समर्थक थाने पहुंचे; 7 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

इंदौर  इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात जमकर हंगामा हुआ। पुलिसकर्मियों ने थाने के अंदर पंडित और भाजपा कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। मामला विधायक गोलू शुक्ला के पंडित जयदीप दुबे और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे से जुड़ा है। घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा कार्यकर्ता और विधायक समर्थक थाने पहुंच गए। देर रात तक थाने के बाहर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चलता रहा।  हालात को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। शुरुआती जांच के बाद थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह, एक सब-इंस्पेक्टर समेत 7 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया। पड़ोसियों से विवाद के बाद थाने पहुंचे थे पंडित मामले की शुरुआत जयदीप दुबे और उनके पड़ोसियों के बीच हुए विवाद से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो मारपीट और अभद्र व्यवहार तक पहुंच गई। घटना के बाद जयदीप ने दोपहर करीब 3 बजे विधायक गोलू शुक्ला को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद विधायक ने एरोड्रम थाने के टीआई वीरेंद्र सिंह कुशवाह से चर्चा की। बताया जा रहा है कि टीआई ने शाम करीब 6 बजे जयदीप को थाने आने के लिए कहा था। इसके बाद जयदीप दुबे अपने साथी और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे के साथ शाम करीब 7 बजे थाने पहुंचे। शिकायत सुनने के बजाय की मारपीट  आरोप है कि थाने पहुंचने के बाद जयदीप दुबे और पंकज चौबे के साथ कुछ पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की और मारपीट की। दोनों को थाने में ही बैठा लिया गया। घटना की जानकारी बाहर पहुंचने के बाद विधायक समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता थाने पहुंचने लगे। रात होते-होते थाने के बाहर लोगों की भीड़ बढ़ गई। सूत्रों के मुताबिक, रात करीब 11 बजे तक 500 से 1,000 लोग जमा हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की। सीसीटीवी फुटेज से जांच के दावे थाने के अंदर हुई घटना को लेकर सीसीटीवी फुटेज की भी चर्चा रही। सूत्रों का दावा है कि थाने में लगे कैमरों में घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में क्या दिखाई दे रहा है और उसमें मारपीट के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए फुटेज का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा मामला  घटना को लेकर देर रात तक पुलिस थाने के बाहर विरोध जारी रहा। बताया जा रहा है कि मामला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक भी पहुंचा।  विधायक गोलू शुक्ला और अन्य नेताओं ने भी वरिष्ठ स्तर पर संपर्क किया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मामले में कार्रवाई की। रात करीब 3 बजे डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत और एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और शुरुआती जांच के बाद कार्रवाई की जानकारी दी। TI समेत सात पुलिसकर्मी निलंबित मामले में एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह और एक सब-इंस्पेक्टर समेत कुल सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। देर रात तक थाने के बाहर समर्थकों की मौजूदगी बनी रही। पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई। 

नागरिक शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति रहें जागरूक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी सजग हों नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मानसिक स्वास्थ्य दिवस,10 अक्टूबर पर नागरिकों से अपील की है कि सभी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग हों और "तनाव मुक्त मध्यप्रदेश- स्वस्थ मन, स्वस्थ समाज और सशक्त मध्यप्रदेश" के निर्माण की दिशा में एक सामाजिक और सामूहिक संकल्प लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि चिकित्सक  समुदाय और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी लोगों को  मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। ये आवश्यक है कि तनाव मुक्त और स्वस्थ मध्यप्रदेश के लिए सम्मिलित प्रयास हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज तनाव हमारे जीवन के लिए  एक चुनौती बनता जा रहा है। व्यक्तिगत जीवन, परिवार, कार्यस्थल और समाज में बढ़ता तनाव शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ हमारे संबंधों और जीवन शैली को भी प्रभावित कर रहा है। विशेष रूप से युवाओं में तनाव, अकेलापन, चिंता और भावनात्मक असंतुलन कई चुनौतियों को जन्म दे सकता है और उन्हें नशे, हिंसा जैसी हानिकारक प्रवृत्तियों की ओर भी ले जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर से वर्षभर चलने वाली "तनाव मुक्त मध्यप्रदेश" की पहल को सराहनीय  बताते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को  हमेशा शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हार्टफुलनेस संस्था के स्वयं सेवकों द्वारा कमलेश पटेल (दाजी)के मार्गदर्शन में नि:शुल्क ध्यान और आंतरिक संतुलन की सरल पद्धति लोगों तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। 

मध्यप्रदेश का मौसम बदलेगा, रीवा संभाग में बारिश के आसार; पचमढ़ी में सबसे कम तापमान

भोपाल मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और ट्रफ लाइन के सक्रिय रहने से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की संभावना बनी हुई है। रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में शनिवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के कई शहरों में धूप खिलने की संभावना है। मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।मौसम विभाग के अनुसार, बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, दिन के समय गर्मी का असर अब भी बना हुआ है। बड़वानी के तालुन में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रीवा संभाग में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में धूप मानसून की विदाई के बाद भी मौसम प्रणालियों के सक्रिय रहने से पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है। रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, भोपाल और इंदौर में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।आने वाले तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। ऐसे में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक हाल के दिनों में हुई बारिश का असर रात के तापमान पर भी पड़ा है। अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई शहरों में रातें अपेक्षाकृत ठंडी हो गई हैं। प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान पचमढ़ी: 16.4°C अमरकंटक: 17.9°C इंदौर: 17.9°C छिंदवाड़ा: 18.1°C कटनी (करौंदी): 18.8°C शाजापुर: 19°C वहीं, दिन के तापमान में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी जिले के तालुन में सबसे ज्यादा 37 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। 3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश? मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश होने की वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसी मौसम प्रणालियां हैं।अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता है। इस दौरान सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण मानसून की विदाई के बाद भी कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।इसलिए मानसून खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि प्रदेश में बारिश की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस बार सामान्य से 4% कम हुई बारिश मध्यप्रदेश में जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश का वितरण अलग-अलग रहा। पूर्वी मध्यप्रदेश: सामान्य से करीब 4% अधिक बारिश। पश्चिमी मध्यप्रदेश: औसत से करीब 12% कम बारिश। जून में बारिश का कोटा 14 प्रतिशत कम रहने से पूरे मानसून सीजन के आंकड़ों पर असर पड़ा। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से काफी हद तक भरपाई हुई, लेकिन शुरुआती सूखे के कारण कुल बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी। 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर। इन प्रमुख जिलों में सामान्य से कम बारिश इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार सहित कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। आगे कैसा रहेगा मध्यप्रदेश का मौसम? मौसम के मौजूदा रुख के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में मौसम साफ रह सकता है। अगले तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में धूप निकलने का अनुमान है।रात के तापमान में गिरावट से सुबह और देर रात हल्की ठंडक महसूस हो सकती है, जबकि दिन में गर्मी बनी रहने की संभावना है। स्थानीय मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए।  

स्वामित्व योजना को सफल बनाने में पूरा सहयोग करेंगे पटवारी, CM डॉ. यादव से मिले संघ के पदाधिकारी

स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग करेंगे पटवारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले पटवारी संघ के पदाधिकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में मध्यप्रदेश पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने भेंट की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश शर्मा और भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रस्तावित सम्मेलन के लिए भी आमंत्रित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के पश्चात मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव से उनकी सार्थक चर्चा हुई है। स्वामित्व योजना में आवश्यक न्यायिक संरक्षण की व्यवस्था कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सहृदयतापूर्वक आवश्यक आदेश जारी करने की बात कही है। मध्यप्रदेश प्रांतीय पटवारी संघ के अश्विन सैनी ने कहा कि स्वामित्व योजना से जुड़े कार्यों को सभी निष्ठा से करने के लिए तत्पर रहेंगे। भारतीय मजदूर संघ के प्रांतीय मंत्री कुलदीप सिंह ने कहा कि स्वामित्व योजना से संबंधित कार्य राज्य सरकार की प्राथमिकता है। पटवारी बंधु अपने दायित्व निर्वहन में पीछे नहीं रहेंगे। जनकल्याण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रत्येक निर्णय में सभी सहभागी होंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने पटवारी संघ के पदाधिकारियों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का परिचय करवाया।  

कोर्ट के निर्णय के अनुरूप होगी अगली विधिक कार्रवाई, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही बड़ी बात

न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में आगामी विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने ओबीसी को 27% आरक्षण देने से जुड़े प्रकरण में वर्ष 2019-22 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्‍वपूर्ण निर्णय दिया है। राज्‍य सरकार मान. उच्‍च न्‍यायालय के इस निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगामी विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि माननीय न्‍यायालय ने 13% अतिरिक्‍त नियुक्तियों को संरक्षित करते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। माननीय न्‍यायालय ने वर्ष 2022 के पश्‍चात निर्णय दिनांक तक की गई भर्तियों के संबंध में 13% होल्‍ड किए पदों पर सामान्‍य वर्ग के अभ्‍यर्थियों को नियुक्ति प्रदान करने का निर्देश दिया है। तत्‍कालीन सरकार द्वारा अध्‍यादेश के माध्‍यम से लागू 27% आरक्षण का नोटिफिकेशन लचर और त्रुटिपूर्ण था। यह माननीय न्‍यायालय के इस निर्णय से सिद्ध हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तत्‍कालीन सरकार ने कतिपय कारणों से अत्‍यंत जल्‍दबाजी में यह अध्‍यादेश लाने का कार्य किया था। इस संबंध में राष्‍ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी सलाह नहीं ली गई थी। माननीय न्‍यायालय के फैसले से तत्कालीन सरकार के 27% आरक्षण देने की मंशा पर संदेह उत्‍पन्‍न हुआ है।