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घर-घर दस्तक देने जाएंगे जनगणना कर्मचारी, प्रशासन ने साफ किया – यह 1 चीज पूछी नहीं जाएगी

भोपाल  एमपी के भोपाल जिले में अब जनगणना 2027 की हलचल तेज हो गई है। जिले में लोग मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए प्रशासन को दस्तावेज देने की जद्दोजहद करते नजर आए थे, लेकिन अब जनगणना में स्थिति पूरी तरह से उलट होगी। यह मौखिक होगी। कोई दस्तोवज नहीं लिया जाएगा। आधार नंबर मांगा जा सकता हैं। हालांकि ये केंद्र की सूची में नहीं है, इसलिए वैकल्पिक ही रहेगा। मोबाइल नंबर जरूर जनगणना के लिए लिया जाएगा। जनगणना फार्म डिजिटली भरा जाएगा। इसके बाद आप डिजिटल रसीद दी जाएगी। ये 1 चीज नहीं पूछेगा प्रशासन अभी पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक कार्यालयों में ट्रेनिंग-तैयारियों के तौर पर हो रही है। अप्रैल से हर घर दस्तक देना शुरू होगी। एसआइआर में साढ़े चार लाख मतदाताओं के नाम हटाए थे, जनगणना में सिर्फ 33 हजार को ही मृत श्रेणी में रखा जाएगा। जनगणना में बैकिंग की डिटेल नहीं मांगी जाएगी। जनधन खातों व यूपीआइ के तहत हर व्यक्ति की बैकिंगग डिटेल सरकार के पास है। इंटरनेट की पहुंच, स्मार्टफोन के साथ घरेलू उपयोग में एलपीजी/पीएनजी की उपलब्धता व कनेक्शन को लेकर सवाल जरूर होंगे। स्वगणना के लिए 15 दिन मिलेंगे जनगणना में एक अप्रेल 2026 से सितंबर 2026 तक घर का सर्वे-मैपिंग होगी। 30 दिन गहन काम होगा। इससे पंद्रह दिन पहले लोगों को खुद ही ऑनलाइन फार्म भरकर स्वगणना का विकल्प खोला जाएगा। यानी नागरिक खुद ही अपना डिजिटल फार्म डिटेल के साथ जमा कर सकेंगे। 10 लाख घरों होगी मैपिंग 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर मध्यप्रदेश में तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने इस महाअभियान के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है। इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नागरिक इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन कर अपनी जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे। इसके साथ ही पारंपरिक तरीके से डोर-टू-डोर सर्वे भी किया जाएगा। जनगणना कार्य के लिए करीब 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 16 फरवरी से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। अभियान के तहत लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग और मैपिंग की जाएगी। मैपिंग पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सर्वे कार्य के लिए तैनात किया जाएगा। कितने सवाल पूछे जाएंगे 2 मई से 31 मई 2026 के बीच लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों का सही और स्पष्ट जवाब देना अनिवार्य होगा. सबसे पहले घर से जुड़े सवाल होंगे, जैसे मकान नंबर, मकान की स्थिति, दीवार और छत की सामग्री, घर का उपयोग और फर्श की स्थिति आदि. इसके बाद परिवार से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे. इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में रहने वाले लोगों की जानकारी, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जाति (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य) जैसी जानकारी ली जाएगी. साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि घर अपना है या किराए का, कितने कमरे हैं और कितने विवाहित परिवार उसमें रहते हैं. घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं. जैसे पीने के पानी का सोर्स, शौचालय है या नहीं, बिजली की सुविधा, खाना पकाने का ईंधन और गंदे पानी के निकालने की व्यवस्था. इसके अलावा घरेलू समानों की जानकारी भी ली जाएगी. जैसे घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप या कंप्यूटर, मोबाइल फोन, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार है या नहीं. मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा, लेकिन यह केवल जनगणना से जुड़ी सूचना के लिए होगा. ये 33 प्रमुख सवाल पूछे जाएंगे? जनगणना के दौरान नागरिकों से घर की स्थिति, निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति व प्रकार, रसोई और ईंधन का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता, वाहन, मुख्य खाद्यान्न और मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारियां ली जाएंगी। जनगणना-2027 पर सीएम का बयान? भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश इस प्रक्रिया में देश के लिए आदर्श मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसी के आधार पर सरकारी योजनाएं, संसाधनों का वितरण और विकास की रणनीतियां तय की जाती हैं। एसआइआर में इन्हें हटाया, जनगणना में शामिल होंगे -1.01 लाख के फार्म संग्रहित नहीं किए जा सके -2.86 लाख स्थायी तौर पर शिफ्ट हो गए -14171 दोहरे नाम थे -33791 मृत हो गए नोट नोट: मृत पाए मतदाताओं को छोड़े तो परिजनों के कहने पर बाकी का नाम जनगणना में शामिल रहेगा। धूप तीखी हुई तो बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब पर सन्नाटा पसर गया। आग से फैक्ट्री खाक होने के बाद संचालक के बेटा और बेटी विलाप करते हुए।

एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देकर ही चीन की चुनौतियों का सामना कर पायेगें : मंत्री काश्यप

पाञ्चजन्य के अभ्युदय मध्यप्रदेश, इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026 में की सहभागिता भोपाल विकसित भारत और विकसित मध्यपप्रदेश बनाने में एमएसएमई सेक्टर की महती भूमिका होगी। इसी सेक्टर से हम चीन की चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना कर पायेगें। पुरातन काल में भी छोटे-कुटीर उद्योगों के कारण ही भारत सोने की चिडि़या कहलाता था। इसी को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले दो वर्षो में कई महत्ववपूर्ण कदम उठाये है, जिनके सकारात्मकक परिणाम भी आने लगे है। नई नीतियां बनाई गई है, जिनमें निवेशकों और नवउद्यमियों को अनुदान सहायता से लेकर अन्य कई तरह की रियायतें दी गई है। समागम में आर्गनाइजर के वरिष्ठ सहायक संपादक निशांत कुमार और उद्यमियों के सवालों के जवाब में एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने उक्त बातें कही। मंत्री काश्यप सोमवार को कुशाभऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पाञ्चजन्य के अभ्युदय मध्यप्रदेश कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे थे। मंत्री काश्यप ने भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश में अनेक नवाचार किये जा रहे हैं, जिनका अनुसरण दूसरे राज्यय भी कर रहे है। ग्लो बल इन्वेस्टर्स समिट के साथ-साथ रीजनल इंडस्ट्रीरयल कॉन्लेकर व किये गये। इनमें स्था नीय उद्यमियों के साथ-साथ बड़े उद्यगपतियों को बुलाकर उनके अनुभव साझा कराये गये। रीजनल कॉन्क्लेव का एक उद्देश्य औद्योगिकरण का विस्तार प्रदेश के आदिवासी बहुल दूर-दराज इलाकों में भी हो सके। शहडोल, मंडला, डिंडोरी, अलीराजपुर के साथ-साथ बुंदेलखण्ड क्षेत्र में भी औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही नहीं प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी ठोस काम कर उसे स्थारयित्व देने के प्रयास हो रहे है। प्रदेश के लगभग एक लाख से अधिक स्वसहायता समूहों को चिन्हित कर उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, उन्हें तकनीकि सहायता भी दी जा रही है। उद्योगों में महिलाओं को 48 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। उनकी सुविधा के लिये फ्लेटेड इंडस्ट्रीयल क्षेत्र निर्मित किये जा रहे है। एमएसएमई क्षेत्र में वित्तीय समावेशिता बढ़ाने के लिये क्रेडिट गारंटी का विस्तारीकरण किया जा रहा है। बैंकिग सिस्टम को आधुनिक तकनीक से समृद्ध कर सरल और व्यवहारिक बनाया जा रहा है, जिससे उद्यमियों को कर्ज लेने में आसानी हो। एआई को हम चुनौती के बजाय अवसर मानकर उसका लाभ उठाने की दिशा में काम कर रहे है। एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री काश्यप ने बताया कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के बंद होने का प्रतिशत बहुत कम है। पिछले समय में बंद हुए उद्योगों को पुन: प्रारंभ करने के लिये उद्यमियों को हर संभव सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल समिट में प्राप्त 30 लाख करोड़ रूपयों के निवेश प्रस्तावों में से 8 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर आ गये है। इनका या तो भूमि-पूजन हो चुका है या फिर उद्घाटन।  

पात्र हितग्राहियों को समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया से मिले योजनाओं का लाभ – मंत्री चौहान

अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई आयोजित भोपाल अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से उपलब्ध कराया जाए और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ कर विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग एवं फील्ड स्तर पर सतत समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।मंत्री चौहान अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक ले रहे थे। बैठक में समिति के सदस्य जतारा विधायक हरिशंकर खटीक, पानसेमल विधायक श्याम बरडे, प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति कल्याण ई. रमेश कुमार और आयुक्त सौरभ के. सुमन सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में अनुसूचित जाति वर्ग के समग्र विकास के लिए विभिन्न  योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।विधायकगण द्वारा जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में सुझाव प्रस्तुत किए गए।बैठक में अनुसूचित जाति बस्ती विकास,भवन विहीन छात्रावासों के निर्माण, छात्रावासों के रख-रखाव एवं अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, विभाग में रिक्त पदों की पूर्ति, प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, स्वरोजगार योजनाएँ और सिविल सेवा प्रोत्साहन राशि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

दीन-दुखियों की सेवा का संकल्प प्रेरणादायी और अनुकरणीय : राज्यपाल पटेल

राज्यपाल बड़वानी के ग्राम नागलवाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल हर ग्राम–एक काम अभियान का किया शुभारंभ सिकल सेल शिविर का अवलोकन और हितलाभ वितरण किया भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा का संकल्प प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय है। खरगौन-बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने माता-पिता के संस्कारों से प्रेरित होकर जो सेवा का संकल्प लिया है, वह अत्यंत पुण्य का कार्य है। उन्होंने सुशीला देवी उमराव सिंह पटेल सेवा संस्थान द्वारा पीड़ित मानवता की सेवा के लिये निरंतर किए जा रहे कार्यों की सराहना की। राज्यपाल पटेल सोमवार को बड़वानी के भिलट देव धाम, ग्राम नागलवाड़ी में सुशीला देवी उमरावसिंह पटेल सेवा संस्थान द्वारा सिकल सेल एनिमिया उन्मूलन एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर एवं पोषण आहार वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम से पूर्व स्थानीय भिलट देव धाम पहुँचकर पूजा-अर्चना भी की। राज्यपाल पटेल ने कहा कि संस्था द्वारा टी.बी. रोगियों को पोषण आहार वितरण, सिकल सेल जांच, व्यापक जागरूकता तथा विभिन्न प्रकार की जांच-परामर्श आदि सेवाएँ निःशुल्क प्रदान करना गरीब, वंचित और जरूरतमंदों की बड़ी मदद है। इससे ग्रामीण क्षेत्र की जनता को सीधा लाभ मिल रहा है। 'हर ग्राम–एक काम' जनकल्याण की सार्थक पहल राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर सांसद अभियान अंतर्गत 'हर ग्राम–एक काम' का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत प्रत्येक पंचायत में केंद्र एवं राज्य शासन की योजनाओं के माध्यम से जनकल्याणकारी कार्य करना सार्थक पहल है। यह अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाने का विशेष प्रयास है। राज्यपाल पटेल को बताया गया कि अभियान में सांसद प्रत्येक पंचायत में युवाओं, महिलाओं एवं नागरिकों से संवाद करेंगे। उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों एवं नवीन अवसरों का सृजन करेंगे। स्वरोजगार-रोजगार के नवाचार करेंगे। स्थानीय उद्योगों एवं लघु व्यवसायों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा। राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम में सिकल सेल मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत निक्षय मित्र योजना के टी.बी. मरीजों को पोषण आहार वितरित किया। स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा हृदय रोग, कैंसर, स्त्री रोग, स्तन कैंसर, नाक-कान-गला, हड्डी रोग, शिशु रोग, मूत्र रोग, नेत्र रोग एवं जनरल मेडिसिन संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। ईको, ई.सी.जी., शुगर, हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, मोतियाबिंद एवं नेत्र परीक्षण, सर्वाइकल कैंसर, कोल्पोस्कोपी, पैप स्मियर तथा मैमोग्राफी आदि जांचें भी की गईं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य, सांसद रतलाम-झाबुआ श्रीमती अनिता नागरसिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष बड़वानी बलवंतसिंह पटेल, पूर्व मंत्री प्रेमसिंह पटेल सहित श्रीमती नंदा ब्राह्मणे, अजय यादव, संस्था अध्यक्ष श्रीमती बसंती गजेंद्रसिंह पटेल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, चिकित्सक, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में खरगोन-बड़वानी संसदीय क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कुरवाई विधानसभा क्षेत्र के किसानों ने माना आभार

कोठा डैम बैराज परियोजना 83 गांव को सिंचाई और 325 गांव को मिलेगी पेयजल की सुविधा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और विधायक श्री हरि सिंह सप्रे के नेतृत्व में विदिशा जिले के कुरवाई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोठा के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में भेंट की। किसानों ने कोठा बैराज डैम परियोजना के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने बताया कि इस परियोजना से क्षेत्र के लगभग 83 गांवों को सिंचाई सुविधा और 325 गांवों को पेयजल का लाभ प्राप्त होगा। ग्रामीणों द्वारा बैराज डैम पर लगभग 10 फीट ऊंचा पुल निर्माण कर वाहनों के आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

सीएचसी को एफआरयू के रूप में उन्नत करने के लिए मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित करें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास और चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में उन्नत करने के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि इन इकाइयों में चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एफआरयू का सुचारू संचालन अत्यंत आवश्यक है। चयनित मैनपावर की समयबद्ध जॉइनिंग के निर्देश उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने चयनित हो चुके स्टाफ की जॉइनिंग प्रक्रिया को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पतालों में मानव संसाधन की कमी को दूर कर सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।बैठक में स्वास्थ्य जांच की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रदेश की टेस्टिंग लैब्स के सुदृढ़ीकरण कार्यों पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और पैथोलॉजी सेवाओं के विस्तार हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को किया जाए प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में मानव-वन्य जीव सह अस्तित्व के लिए उपयुक्त वातावरण निर्मित करना आवश्यक प्रदेश में अन्य प्रदेशों के साथ आदान-प्रदान से बढ़ रही है वन्य जीवों की विविधता विद्यार्थियों को वन और वन्य जीवों से परिचित कराने वाले अनुभूति कार्यक्रम का किया जाए विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण के दिशा में हो रहे बेहतर कार्य के परिणाम स्वरूप प्रदेश में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस स्थिति में मानव-वन्य जीव सह अस्तित्व को प्रोत्साहित करने के लिए जनता को जागरूक करने तथा उन्हें आवश्यक सतर्कता बरतने के उपायों की जानकारी देना आवश्यक है। इसके साथ ही वन विभाग द्वारा पर्यटन विभाग से समन्वय करते हुए प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूली बच्चों को वन और वन्य जीवों से परिचित कराने के लिए संचालित किऐ जा रहे अनुभूति कार्यक्रम का विस्तार करने और इस गतिविधि में अधिक से अधिक शालाओं को शामिल करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की मंत्रालय में हुई 31वीं बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में वन राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव वन श्री संदीप यादव सहित वन विभाग के अधिकारी और वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश से अन्य राज्यों को वन्य जीव उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बदले में उन राज्यों से भी वन्य जीव मध्यप्रदेश लाए जाएं। इससे प्रदेश में वन्य जीवों की विविधता बढ़ेगी। उन्होंने वन्य जीव प्रबंधन में अन्य राज्यों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और बेस्ट प्रेक्टिसेस को अपनाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों तथा अन्य संस्थाओं को जोड़कर वन और वन्य जीव के संबंध में अध्ययन प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में विद्यमान पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण की श्रेष्ठ व्यवस्था हो, वन और पुरातत्व विभाग तथा इस क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं की कार्यशाला भी आयोजित की जाए। बैठक में प्रदेश में बढ़ रही हाथियों की संख्या को दृष्टिगत करते हुए हाथियों पर केंद्रित पर्यटन गतिविधियां संचालित करने के संबंध में चर्चा हुई। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने हाथी प्रबंधन पर विश्वविद्यालय द्वारा आलेख लेखन का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्पदंश की घटनाओं में प्रभावितों की जान बचाने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 2 व्यक्तियों को सांप पकड़ने तथा प्रभावित को बचाने के लिए प्रारंभिक रूप में सहायता करने संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। सांपों के संबंध में आवश्यक जागरूकता और सर्तकता बरतने के उपायों का भी प्रचार-प्रसार आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉग स्क्वाड में देशी नस्ल के डॉग शामिल करने के लिए भी पहल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वन्य प्राणी संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उपलब्धियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि गांधी सागर अभयारण्य, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और कूनो नेशनल पार्क में 846 कृष्ण मृग और 67 नीलगायों का सफल पुनर्स्थापन किया गया। वन विहार नेशनल पार्क भोपाल से 6 मगरमच्छों को ओंकारेश्वर क्षेत्र में उनके प्राकृतिक अवास में सफल रूप से छोड़ा गया। पेंच टाइगर रिजर्व से राम टाइगर रिजर्व राजस्थान के लिए एक मादा टाइगर भेजी गई है। इसी प्रकार असम से 50 जंगली भैंसें 3 समूह में 3 साल में गेंडे का जोड़ा और किंग कोबरा मध्यप्रदेश लाए जाएंगे और मध्यप्रदेश से टाइगर, मगरमच्छ तथा गौर असम को सौंपे जाएंगे। नामीबियाई मादा चीता आशा द्वारा दूसरी बार मां बनकर एक साथ 5 स्वस्थ चीता शावकों को जन्म दिया गया है। प्रदेश में अब चीतों की कुल संख्या 35 हो गई है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो नई दिल्ली की संयुक्त कार्यवाही के परिणाम स्वरूप 10 साल से वांछित अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर यांगचेन लाचुंगपा को भारत-चीन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास उत्तर सिक्किम में गिरफ्ता किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बगदरा अभयारण्य, संजय टाइगर रिजर्व, सीधी के बफर जोन क्षेत्र विस्तार करने के संबंध में प्रस्ताव, पन्ना टाइगर रिजर्व, पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल अभयारण्य, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, श्योपुर, सतपुड़ा-पेंच टाइगर रिजर्व कॉरीडोर से संबंधित वन्य जीव अनुमतियों को अनुमोदन प्रदान किया गया।

आगामी 25 वर्ष में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 22.50 लाख रुपए करने का है लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में प्रदेश की होगी अहम भूमिका, 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लक्ष्य एमएसएमई औद्योगिक विकास की बैक बोन, मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में है अग्रणी मध्यप्रदेश नक्सलवाद से मुक्त होने वाला पहला राज्य, 31 मार्च की डेडलाइन से पहले हुआ मुक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव अभ्युदय इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026 में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं विद्मान हैं। औद्योगिक निवेश प्राप्त करने, सोलर एनर्जी उत्पादन, कृषि उत्पादन सहित अनेक मामलों में मध्यप्रदेश, देश का अग्रणी राज्य है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 में मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हमारी सरकार ने मध्यप्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी क्षेत्रों के लिए 25 वर्षों का दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय अभी 1 लाख 55 हजार रुपए है। अगले 25 साल में इसे 22 लाख 50 हजार करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम कृषि क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी है, लेकिन एमएसएमई प्रदेश के औद्योगिक विकास की रीढ़ (बैक बोन) है। राज्य सरकार एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित 'अभ्युदय इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026' में एक निजी मीडिया संस्थान के संपादक प्रफुल्ल केटकर के साथ चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान प्रदेश की प्रगति, औद्योगिक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित प्रश्नों का बेबाकी से उत्तर दिया। प्रदेश में लागू की 18 नई औद्योगिक नीतियों की विशेषताओं पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों तक भी पहुंचे, इसके लिए संभागीय स्तर पर अलग-अलग सेक्टर्स पर केंद्रित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की गई हैं। माइनिंग, टेक्सटाइल, टूरिज्म सहित अनेक क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं। कटनी और शहडोल में माइनिंग सेक्टर में निवेश के लिए देश के शीर्ष उद्योगपति आगे आए हैं। नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स तैयार करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है, जहां उद्योग शुरू करने के लिए तेजी से निवेशक आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का युवा रोजगार देने वाले बनें, इसलिए स्वरोजगार और युवा उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है। होम-स्टे से पर्यटकों को सुविधा मिलने के साथ ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर तेजी से घट रही है। अब मध्यप्रदेश मात्र 1 से डेढ़ प्रतिशत बेरोजगारी दर वाला राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहन देने के साथ ही रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर निवेशकों को विशेष अनुदान दिया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों की समृद्धि का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए कृषि उत्पादन के साथ फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष में हमारा संकल्प है कि प्रदेश के किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध हों। पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजनाओं को लागू कर रहे हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश में दूध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। राज्य का सिंचाई रकबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले डेढ़ साल में ही 7.5 लाख हैक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ा है, इसे 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। नर्मदा का जल क्षिप्रा नदी में पहुंचने से मालवा अंचल के किसानों को भी लाभ मिला है। नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन में बन रहे आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर आ चुका है। उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर मुरैना में सोलर एनर्जी का बड़ा प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। दोनों राज्य 6-6 महीने इससे निर्मित बिजली का उपयोग करेंगे। किसानों को सोलर पंप देकर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। ग्रीनगो कंपनी ने आंध्र प्रदेश के बाद देश में दूसरा पंप स्टोरेज मंदसौर के गांधी सागर बांध में लगाया है, जिसे 2 साल की अल्प अवधि में पूर्ण किया गया है। मध्यप्रदेश पड़ौसी राज्यों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करते हुए जल बंटवारे, नदी जोड़ो अभियान और नशे के खिलाफ अभियान चला रहा है। प्रदेश के समग्र विकास को गति प्रदान करेगा बजट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है। राज्य सरकार ने 5 साल में प्रदेश का बजट दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। आगामी 18 फरवरी को राज्य सरकार बजट पेश करेगी, जो प्रदेश के समग्र विकास को गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए शहरीकरण और औद्योगिकरण दोनों आवश्यक हैं। इंदौर और भोपाल में मेट्रोपोलिटन एरिया विकसित किए जा रहे हैं। सरकार ने पहले औद्योगिकरण पर जोर दिया, क्योंकि जब उद्योग स्थापित होंगे तो शहर भी विकास करते जाएंगे।  

बीएलओ से सीईओ तक सभी इलेक्शन कमीशन हैं, सभी की भूमिका महत्वपूर्ण: पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त रावत

हर वोट है महत्वपूर्ण : पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त परशुराम म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग को निर्वाचन आयोगों का कहा जाता है वर्ल्ड बैंक : राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में वक्ताओं ने रखे विचार भोपाल बीएलओ से लेकर चीफ इलेक्शन ऑफिसर तक सभी इलेक्शन कमीशन हैं। निर्वाचन में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत ने यह बात सोमवार को प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में कही। रावत ने "वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका" विषय पर बोलते हुए कहा कि इस पर चर्चा 2015 में शुरू हई थी। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इसमें सहमति व्यक्त की गयी थी। राज्य निर्वाचन आयोग जरूरी रावत ने कहा कि "वन नेशन-वन इलेक्शन" को लागू करने पर भी राज्य निर्वाचन आयोग जरूरी होंगे। पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव इनके माध्यम ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी उम्मीद है कि "वन नेशन-वन इलेक्शन" का ड्राफ्ट जरूर मंजूर होगा। रावत ने माडल कोड ऑफ कंडक्ट के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। चुनाव, चुनाव होता है, चाहे वह लोकसभा का हो या पंचायत का पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम ने "स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौती"  विषय पर कहा कि 'हर वोट-हर निकाय' महत्वपूर्ण है। परशुराम ने कहा कि चुनाव, चुनाव होता है, चाहे वह लोकसभा का हो या पंचायत का। उन्होंने कहा कि निर्वाचन में प्रिपेयर, प्रिपेयर और प्रिपेयर के फार्मूले का हमेशा पालन करना चाहिए। नवीनतम तकनीकों के उपयोग से घबराना नहीं चाहिए। म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग तुलनात्मक रूप से अधिक अधिकार संपन्न है। विभागाध्यक्ष दैनिक भास्कर स्कूल ऑफ जर्नलिज्म नरेन्द्र कुमार सिंह ने "जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव " विषय पर 1952 के प्रथम लोकसभा निर्वाचन से लेकर वर्तमान लोकसभा निर्वाचन तक के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि सन 1977 के चुनावों ने सिद्ध कर दिया कि देश में मतदाता बहुत हुए जागरूक हैं और लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई। सिंह ने बताया कि ब्रिटेन में वर्ष 1928 में सभी को मताधिकार मिला जबकि भारत ने स्वतंत्र होने के साथ ही सभी को मताधिकार (युनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइज) दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने "स्थानीय निर्वाचन में न्यायालीन सबक" विषय पर विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि संविधान एक जीवंत ग्रंथ है। उन्होंने निर्वाचन से संबधित कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोगों की पिछली बैठक में मध्यप्रदेश को राज्य निर्वाचन आयोगों का वर्ल्ड बैंक कहा गया। उन्होंने रावत, परशुराम, सिंह और सेठ के द्वारा किये गये कार्यों का उल्लेख किया। श्रीवास्तव ने कहा कि यह समारोह विशेष इसलिए भी है, क्योंकि सभी उपस्थित अतिथियों ने निर्वाचन की यात्रा को प्रेरणा और दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल टेक्नॉलोजी में परशुराम ने मध्यप्रदेश को पॉयनियर बना दिया है। श्रीवास्तव ने कहा कि मैदानी अधिकारियों ने आयोग में नवाचारों को लागू करने में निष्ठा और मनायोग से काम किया। इससे हमारे आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। अतिथियों ने आयोग के 'निर्वाचन साहित्य ई-बुक' का विमोचन और 'प्रेक्षा मोबाइल ऐप' का शुभारंभ किया। उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलेक्टर्स, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग दीपक सिंह ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान आयोग अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

शहीद निरीक्षक आशीष शर्मा के भाई अंकित को मिली एसआई पद पर नियुक्ति

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस ने शहादत का सम्मान करते हुए बालाघाट में नक्कल आपरेशन के दौरान पिछले दिनों शहीद हुए है हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर स्वर्गीय आशीष शर्मा के भाई अंकित शर्मा को उपनिरीक्षक पद पर नियुक्ति प्रदान की है। अंकित शर्मा ने जिला नरसिंहपुर में उपनिरीक्षक पद का पदभार ग्रहण कर लिया है। अमर शहीद स्वर्गीय आशीष शर्मा पुलिस-नक्सल मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार अमर शहीद के भाई अंकित को उपनिरीक्षक पद पर विशेष अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है।