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मौसम की मार से बिगड़ रही सेहत, इंदौर के अस्पतालों में रोज पहुंच रहे सैकड़ों मरीज

इंदौर मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिन में तेज धूप और गर्मी बढ़ी जबकि रात में ठंडक के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर वायरल फीवर के रूप में सामने आ रहा है। एमवाय अस्पताल में ही एक दिन में करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मौसम का उतार-चढ़ाव संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। दिन में पसीना और रात में ठंडी हवा चलने से लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो देर रात तक बाहर रहते हैं या ठंड-गर्मी के बीच लापरवाही बरतते हैं।   शादियों का सीजन भी बढ़ा रहा खतरा इन दिनों शादी समारोह का सीजन चल रहा है। देर रात तक कार्यक्रमों में शामिल होना, ठंडी चीजें खाना, नींद पूरी न होना और भीड़भाड़ में समय बिताने से भी वायरल संक्रमण फैलने की बड़ी वजह सामने आई है। डाक्टरों के अनुसार कई लोग हल्का बुखार या सर्दी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो रही है। संक्रमण परिवार के अन्य लोगों तक भी फैल रहा है। गंभीर बीमारियों वाले मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम शुगर, बीपी, कैंसर, ह्दय रोग, लिवर, अस्थमा, गर्भवती महिलाओं और किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। वायरल फीवर होने पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की रिकवरी धीमी हो जाती है। कई बार उनकी स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण का असर ज्यादा समय तक बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी वायरल फीवर के मामले बढ़ रहे हैं। तापमान में अचानक बदलाव से उनकी इम्युनिटी जल्दी प्रभावित होती है, जिससे बुखार और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज इस मौसम में हल्के गर्म कपड़े साथ रखना, ठंडी चीजों से परहेज करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, फल-सब्जियां और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

जर्जर शास्त्री ब्रिज को अलविदा! इंदौर में 140 करोड़ की लागत से बनेगा नया ब्रिज

इंदौर 72 साल पुराना लालबहादुर शास्त्री ब्रिज तोड़कर इसके स्थान पर रेलवे 140 करोड़ रुपये खर्च कर नया ब्रिज बनाएगा। नए ब्रिज की चौड़ाई वर्तमान के मुकाबले डेढ़ गुना और ऊंचाई दो मीटर अधिक होगी। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों ने शास्त्री ब्रिज का दौरा किया। देर शाम सांसद शंकर लालवानी ने अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बताया कि ब्रिज निर्माण की लागत तो रेलवे वहन करेगा, लेकिन सीवेज, पानी की लाइन, बिजली के पोल इत्यादि मूलभूत सुविधाएं नगर निगम जुटाएगा। सांसद के अनुसार नया ब्रिज संभागायुक्त कार्यालय के पास से शुरू होकर खादीवाला पेट्रोल पंप के पास खत्म होगा। वर्तमान के मुकाबले इसकी लंबाई 38 मीटर अधिक होगी।   रेलवे तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा आमतौर पर जब भी किसी रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) को दोबारा बनाना होता है तो खर्च स्थानीय निकाय को वहन करना होता है, लेकिन नया शास्त्री ब्रिज बनने से रेलवे इंदौर से लक्ष्मीबाई नगर तक तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा और प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ जाएगी, यही वजह है कि रेलवे इस आरओबी को दोबारा बनाने का खर्चा वहन करने को तैयार हो गया है। शास्त्री ब्रिज की बिगड़ती स्थिति और इस पर यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए सांसद शंकर लालवानी ने पिछले दिनों रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा की थी। इसके बाद रेलवे इस ब्रिज का खर्चा वहन करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों के शास्त्री ब्रिज के संयुक्त दौरे में इस बात का आकलन किया गया कि नया ब्रिज बनाने की स्थिति में किन-किन सीवेज लाइन, पानी की लाइन और बिजली के पोल की शिफ्टिंग करनी होगी और इस पर कितना खर्चा आएगा। नगर निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने बताया कि निगम के इंजीनियरों ने रेलवे के इंजीनियरों को लाइनों की ड्राइंग दे दी है। जल्द ही निगम आर्थिक आकलन तैयार कर लेगा। 12 जनवरी 1953 को हुआ था शुरू वर्तमान शास्त्री ब्रिज का लोकार्पण 12 जनवरी 1953 को हुआ था। तत्कालीन परिवहन मंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इसे लोकार्पित किया था। यह ब्रिज पिछले 72 वर्ष से पूर्व और पश्चिम इंदौर को जोड़ने के लिए रीढ़ की हड्डी बना हुआ है। टूटने पर आएगी आवागमन की परेशानी इस ब्रिज से शहर के लगभग सभी मुख्य बाजार सीधे-सीधे जुड़े हैं। शास्त्री ब्रिज के टूटने से आवागमन की भारी परेशानी आएगी। एमजी रोड पर मेट्रो अंडर ग्राउंड प्रस्तावित है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में कोई विशेष दिक्कत नहीं आएगी। पिछले दिनों चूहों ने कुतर दिया था वर्ष 1953 में जब यह ब्रिज शुरू हुआ था उस वक्त यह मध्य भारत का पहला टू-टू लेन रेलवे ओवरब्रिज था। हाल ही में शास्त्री ब्रिज को चूहों ने कुतर दिया था। इस वजह से बड़ा गड्ढा हो गया था। जीर्ण-शीर्ण हो चुका है रखरखाव के अभाव में शास्त्री ब्रिज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। हालांकि रेलवे ने इसे अब तक अनफिट घोषित नहीं किया है। टेंडर में लगेंगे छह माह, 15 माह में होगा निर्माण रेलवे सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित ब्रिज के लिए सर्वे, डिजाइन और ड्राइंग तैयार कर टेंडर होने में कम से कम छह माह लगेंगे। टेंडर तय होने के बाद रेलवे ने इस ब्रिज को 15 माह में तैयार करने का लक्ष्य रखा है।  

डॉक्टरों और छात्रों के लिए खास पहल: AIIMS Bhopal में आर्ट थैरेपी से मिलेगा स्ट्रेस से राहत

भोपाल चिकित्सा और पढ़ाई के तनावपूर्ण माहौल के बीच एम्स भोपाल ने अपने संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए एक पहल की है। संस्थान का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आगामी 16 से 18 फरवरी तक 'पेपर माचे' कला पर कार्यशाला आयोजित करेगा। लोगों को तनावमुक्त करना है टारगेट इसका उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं, बल्कि 'आर्ट थैरेपी' के माध्यम से संस्थान से जुड़े लोगों को तनावमुक्त वातावरण और मानसिक शांति प्रदान करना है। 'पेपर माचे' एक ऐसी प्राचीन विधा है, जिसमें पुराने अखबारों, गोंद और पानी के मिश्रण का उपयोग कर आकर्षक मूर्तियां, मुखौटे और सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं।   एम्स प्रशासन का मानना है कि जब हाथ किसी सृजनात्मक कार्य में व्यस्त होते हैं, तो मस्तिष्क को गहरा विश्राम मिलता है। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानने और दैनिक भागदौड़ से इतर कुछ नया रचने का अवसर देगी। एम्स भोपाल इन दिनों अपने कर्मचारियों और छात्रों के समग्र स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान के अनुसार एक स्वस्थ चिकित्सक या कर्मचारी ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकता है। इसी सोच के साथ इस रचनात्मक गतिविधि को डिजाइन किया गया है। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा पेपर माचे की बारीकियां सिखाई जाएंगी, जिससे प्रतिभागी शून्य लागत में घर की रद्दी से खूबसूरत कृतियां बनाना सीख सकेंगे।

रेलवे का बड़ा अपडेट: अब भोपाल-खजुराहो और आरकेएमपी-आधारताल ट्रेनों में मिलेगा प्रीमियम सफर का अनुभव

भोपाल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षित सफर को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। गाड़ी संख्या 22163/22164 भोपाल-खजराहो महामना एक्सप्रेस तथा 22187/22188 रानी कमलापति-आधारताल एक्सप्रेस के पारंपरिक आईसीएफ कोचों को अब आधुनिक एलएचबी कोचों में परिवर्तित किया जा रहा है। भोपाल-खजुराहो-भोपाल महामना एक्सप्रेस आज से तथा रानी कमलापति–आधारताल–रानी कमलापति एक्सप्रेस 16 फरवरी से एलएचबी रैक के साथ संचालित होगी। एलएचबी कोच पारंपरिक आईसीएफ कोचों की तुलना में अधिक सुरक्षित, आरामदायक और तेज गति के अनुकूल माने जाते हैं। इन कोचों में झटके कम लगते हैं और दुर्घटना की स्थिति में एंटी-टेलिस्कोपिक डिजाइन यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाता है।   दोनों ट्रेनों की संशोधित कोच संरचना में दो एसी चेयरकार, दो थर्ड एसी, नो द्वितीय श्रेणी, छह सामान्य श्रेणी, एक एसएलआरडी और एक जनरेटर कार सहित कुल 21 कोच शामिल रहेंगे। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पूर्व कोच संरचना और आरक्षण स्थिति की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि सफर सुगम और सुविधाजनक रहे।

किसानों के लिए बड़ा बदलाव: KCC के नए नियम और RBI का मास्टर प्लान 2026

भोपाल  भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को और ज्यादा आसान, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के लिए नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी कर दिए हैं। इन बदलावों का मकसद है कि खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए किसानों को एक ही नियम, एक जैसा लोन ढांचा और ज्यादा लचीलापन मिल सके। इस फैसले से देश के करोड़ों किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। अब खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि गतिविधियों के लिए कर्ज लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा। किन बैंकों पर लागू होंगे नए नियम? RBI के नए ढांचे के तहत ये नियम इन सभी बैंकों पर लागू होंगे: कॉमर्शियल बैंक,स्मॉल फाइनेंस बैंक,रीजनल रूरल बैंक (RRBs),ग्रामीण सहकारी बैंक ,मतलब देश के लगभग हर किसान तक KCC सुविधा की पहुंच और बढ़ेगी। KCC के लिए एक जैसा नियम – देशभर में एक ही सिस्टम अब KCC लोन के लिए Single Framework लागू करने का प्रस्ताव है। इससे: सभी बैंकों के नियम एक जैसे होंगे ,किसानों में कन्फ्यूजन कम होगा,लोन प्रक्रिया तेज और सरल बनेगी। फसल चक्र भी होगा एक जैसा: छोटी अवधि की फसलें: 12 महीने ,लंबी अवधि की फसलें: 18 महीने ,इससे लोन चुकाने की तारीखें पूरे देश में एक समान होंगी। KCC लोन की अवधि बढ़ाकर 6 साल करने का प्रस्ताव अब तक KCC लोन की अवधि कम होने से लंबी अवधि वाली फसल उगाने वाले किसानों को दिक्कत होती थी। लेकिन नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक: KCC लोन अब 6 साल तक के लिए मिल सकता है। इससे बागवानी, गन्ना, फलदार फसलें उगाने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। अब खेती की असली लागत के हिसाब से मिलेगा लोन अब किसानों को मिलने वाली KCC ड्रॉइंग लिमिट सरकार द्वारा तय की गई वास्तविक खेती लागत पर आधारित होगी। इससे: कम लोन मिलने की शिकायत खत्म होगी,किसानों को जरूरत के मुताबिक पैसा मिलेगा,महंगाई के असर को भी ध्यान में रखा जाएगा।आधुनिक खेती के लिए भी मिलेगा KCC से पैसा, अब KCC लोन का इस्तेमाल सिर्फ बीज-खाद तक सीमित नहीं रहेगा। नए नियमों में शामिल: मिट्टी की जांच,मौसम की जानकारी से जुड़ी सेवाएं ,ऑर्गेनिक खेती के सर्टिफिकेट ,आधुनिक खेती के उपकरण ,फसल देखभाल के लिए अतिरिक्त 20% फंड, यानी अब किसान Smart Farming की ओर आसानी से बढ़ सकेंगे। क्यों है यह बदलाव किसानों के लिए गेमचेंजर? आसान नियम, लंबी अवधि तक लोन, सही लागत के अनुसार पैसा, आधुनिक खेती के लिए फंड, सभी बैंकों में एक जैसा सिस्टम RBI का यह कदम KCC योजना को सच में “किसानों का सच्चा साथी” बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

जनगणना 2026: डिजिटल तरीके से खुद भरें डेटा, एक मई के बाद 33 प्रश्नों का जवाब तैयार रखें

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन की एक मांग को जनगणना निदेशालय मान लेता है तो मजरे-टोलों में रहने वालों लोगों की अलग से जानकारी सामने आ जाएगी। इसका लाभ जल जीवन मिशन जैसी कई योजनाओं को लेकर नीति बनाने में होगा। उन्होंने शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 को लेकर आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर प्रशिक्षण कार्यक्रम में रजिस्ट्रार जनरल व जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के समक्ष यह बात कही। अनुराग जैन ने कहा कि जनगणना में मजरे-टोलों का कालम अलग से जोड़ दिया जाए तो मध्य प्रदेश ही नहीं आदिवासी बहुल जनसंख्या वाले दूसरे राज्यों को भी उतना ही लाभ होगा। बता दें, प्रदेश में एक लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं। ये अधिकतर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही होते हैं। प्रशिक्षण कार्यशाला को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मृत्युंजय कुमार ने संबोधित किया। अनुराग जैन ने कहा कि जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तभी जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। आमजन भी सही जानकारी दें। कई बार लोगों को लगता है कि संपत्ति संबंधी जानकारी नहीं बताने पर वह लाभ में रहेंगे। सरकारी योजनाओं से सहायता मिल सकती है, पर ऐसा नहीं है। इनबिल्ड एप गलतियां भी बताएंगे मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी, इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार किया गया है। जनगणना में स्व-गणना का विकल्प भी पहली बार उपलब्ध कराया जा रहा है। नागरिक मोबाइल, लैपटाप और डेस्कटाप से जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस बार जातिगत जनगणना भी होगी। जानकारी बहुत सावधानी से अंकित की जाए जिससे किसी तरह की गलती की आशंका नहीं रहे। उन्होंने बताया जनगणना के सॉफ्टवेयर में कुछ इनबिल्ड एप्लीकेशन भी हैं, जो कुछ हद तक फीडिंग की गलतियों से सतर्क करेंगे। दो चरणों में जानकारियां एकत्र की जाएंगी निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रथम चरण में मकानों की सूची तैयार करने का कार्य एक से 30 मई के बीच होगा। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों का विवरण प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर एकत्रित किया जाएगा। द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य फरवरी, 2027 में कराया जाना तय किया गया है। जनसंख्या की गणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी। साथ ही, व्यक्तियों के संबंध में अन्य बिंदु जैसे आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक क्रियाकलाप, प्रवास और संतानों की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह 33 सवाल पूछे जाएंगे भवन संख्या (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण या जनगणना संख्या), घर संख्या, फर्श की प्रमुख सामग्री, भवन की दीवार की प्रमुख सामग्री, भवन की छत, घर का उपयोग, घर की स्थिति, परिवार संख्या, घर में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, क्या परिवार का मुखिया एससी/एसटी/अन्य से संबंधित है, स्वामित्व की स्थिति, परिवार के स्वामित्व वाले आवासीय कमरों की संख्या, घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, पीने के पानी का मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय है या नही, शौचालय का प्रकार, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, रसोई और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता, खाना बनाने में मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट तक पहुंच किस तरह है। लैपटाप/कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन, साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड, कार/जीप/वैन, घर में मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज और मोबाइल नंबर।

होली के त्यौहार पर यात्रा तनाव, ट्रेनों में सीटों की भारी कमी

भोपाल  होली का त्योहार नजदीक आ रहा है। ऐसे में त्योहारी सीजन में अपने घर जाने की इच्छा दूसरे शहरों में रह रहा हर कोई करता है। लेकिन, इस बार आपका ये सफर बड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दिल्ली, मुंबई, बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिल पाना अभी से काफी मुश्किल हो गए हैं। इंदौर-पटना, कर्नाटका और हमसफर एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और रिग्रेट की स्थिति बनी हुई है। सीट न मिलने से यात्रियों को वैकल्पिक साधन तलाशने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च और परेशानी ज्यादा बढ़ रही है। हर बार त्योहारी दौर में आने लगी समस्या होली हो या दिवाली… अब तो देश में मनाए जाने वाले किसी भी बड़े त्योहार पर ट्रेनों में कंफर्म सीट न मिल पाना अब आम समस्या बन चुकी है। यात्रा की तारीख से करीब एक महीने पहले ही ज्यादातर ट्रेनों में 'नो रूम' की स्थिति दिखाई देने लगती है। वेटिंग लिस्ट लंबी हो जाती है और कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल होता जाता है। यात्रियों का कहना है कि, हर साल त्योहारों के समय ऐसे हालात बनते जा रहे हैं। खास बात ये है कि, समस्या के समाधान पर किसी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है। अन्य विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है मजबूरी में लोगों को तत्काल टिकट का सहारा लेते हैं। उससे भीड़ और बढ़ जाती है। कई यात्रियों को घर पहुंचने के लिए अन्य माध्यमों जैसे- बस, फ्लाइट या निजी वाहन जैसे महंगे विकल्पों का चुनाव करना पड़ता है। यात्रियों की मांग है कि त्योहारों से पहले रेलवे को अतिरिक्त या स्पेशल ट्रेनों की घोषणा करनी चाहिए, ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। साथ ही, यात्रियों को कंफर्म सीट मिल सके। होली स्पेशल : भोपाल मंडल से चलेंगी 4 जोड़ी विशेष ट्रेनें होली पर्व पर यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे द्वारा देशभर में 1410 विशेष ट्रेनों का संचालन किया है, जिनमें पश्चिम मध्य रेल से 43 ट्रेनें शामिल हैं। भोपाल मंडल से रीवा-रानी कमलापति (02192/02191, 02186/02185), भोपाल–रीवा (01704/01703) तथा रानी कमलापति–दानापुर (01667/01668) स्पेशल ट्रेनें निर्धारित तिथियों पर चलाई जाएंगी। इन ट्रेनों के संचालन से त्योहार के दौरान अतिरिक्त भीड़ कम होगी और यात्रियों को सुगम यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। इन ट्रेनों में 'रिग्रेट व नो रूम' की स्थिति -श्रीनगर-शिरड़ी-कालका सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22455) 28 फरवरी से 5 मार्च तक इस ट्रेन में कंफर्म टिकट उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को 'नो रूम' की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। -कर्नाटका एक्सप्रेस (12627) 28 फरवरी से 5 मार्च तक सभी प्रमुख श्रेणियों में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं। -अहमदाबाद-सहरसा एक्सप्रेस (19483) 25 फरवरी से 2 मार्च तक स्लीपर, 2एसी और 3एसी श्रेणियों में 'रिग्रेट' की स्थिति है। -इंदौर-पटना एक्सप्रेस (19321) 25 फरवरी से 1 मार्च तक स्लीपर, 2एसी और 3एसी में सीटें फुल हैं और रिग्रेट दिखा रहा है। -अहमदाबाद-आसनसोल एक्सप्रेस (19435) 25 फरवरी से 5 मार्च तक सभी प्रमुख श्रेणियों में टिकट उपलब्ध नहीं है। -मंगला लक्षद्वीप सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12618) 26 फरवरी से 2 मार्च तक रिग्रेट की स्थिति बनी हुई है। -हमसफर एक्सप्रेस (19092) 25 फरवरी से 5 मार्च तक टिकट बुकिंग में 'रिग्रेट' स्थिति दर्शाई जा रही है।

मासूमों की मौतों का रहस्य उजागर, कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर विसरा रिपोर्ट में नया खुलासा

छिंदवाड़ा  साल 2025 में जहरीला कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. छिंदवाड़ा सहित मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौतें हुईं थी. इस मामले की विसरा रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें इस बात की पुष्टि हो गई है कि बच्चों की मौत जहरीले केमिकल डाई एथिलीन ग्लाइकॉल की वजह से हुई है. इस मामले में पुलिस चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था. सितंबर 2025 में कफ सिरफ से हुई बच्चों की मौतों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. 'डाई एथिलीन ग्लाइकॉल से खराब हुईं किडनी' छिंदवाड़ा और बैतूल के बच्चों को मामूली सर्दी जुकाम और बुखार की शिकायत के बाद परासिया के सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज कराया गया था. जांच के बाद डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप बच्चों को पिलाने के लिए लिखा था. इस दवा के इस्तेमाल से बच्चों की लगातार मौतें हो रहीं थीं. जांच में पाया गया था कि सिरप में जरूरत से ज्यादा मात्रा में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया था. जिसके बाद मृतक बच्चों की विसरा रिपोर्ट भी जांच के लिए भेजी गई थी. परासिया के एसडीओपी और SIT प्रभारी जितेंद्र सिंह जाट ने  बताया कि "बच्चों के आंतरिक अंगों में भी डाई एथिलीन ग्लाइकॉल दवा पाई गई है. जिसकी वजह से किडनी खराब हुईं थी. कोल्ड्रिफ कफ सिरप में भी यह ज्यादा मात्रा में पाई गई है." 'सप्लीमेंट्री चार्जशीट फिर से की जाएगी पेश' एसआईटी प्रभारी जितेंद्र सिंह जाट ने बताया, "बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साबित हो गया है कि बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से हुई है. इसमें पाया जाने वाला केमिकल खतरनाक था. इस आधार पर सप्लीमेंट्री चार्ज शीट फिर से पेश की जाएगी, जिसमें इन तथ्यों को शामिल कर उन लोगों को आरोपी बनाया जाएगा जो इसमें शामिल हैं." 11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की धीरे-धीरे किडनी खराब हो रही थीं. इसके चलते छिंदवाड़ा और बैतूल के कुल 24 बच्चों की मौत हो गई थी. इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार और छिंदवाड़ा पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था. टीम ने कार्रवाई करते हुए कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन सहित कफ सिरप बच्चों को प्रिसक्राइब करने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी, स्टॉकिस्ट और केमिकल एनालिस्ट सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. फिलहाल, सभी आरोपी जेल में हैं. प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं परिजन पीड़ित परिजनों की पैरवी कर रहे एडवोकेट संजय पटेरिया का कहना है, "जिस तरीके से इस मामले की जांच की गई और कुछ लोगों को ही आरोपी बनाया गया है. इस कार्रवाई से पीड़ितों के परिजन नाखुश हैं. इससे नाराज परिजनों ने 17 फरवरी से प्रदर्शन करने की प्रशासन से अनुमति मांगी है." परिजनों का कहना है कि डॉ. अमन सिद्दीकी और डॉ. अमित ठाकुर ने भी कोल्ड्रिफ सिरप से बच्चों का इलाज किया था. उन दोनों पर मामला दर्ज नहीं किया गया है, जबकि पुलिस का कहना है की जांच अभी जारी है, जो भी दोषी होंगे उनको सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शामिल कर आरोपी बनाया जाएगा.

मध्यप्रदेश पुलिस की पिछले तीन दिनों की प्रमुख कार्यवाहियाँ

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, अपराध नियंत्रण एवं जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विगत तीन दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने डकैती, नकबजनी एवं लूट जैसे संगीन अपराधों का सफल खुलासा कर  79 लाख रूपए से अधिक का चोरी व लूट की संपत्ति जब्‍त की है। विदिशा: अरिहंत ज्वैलर्स डकैती कांड में बड़ी सफलता, 15 लाख रूपए की चांदी बरामद थाना कोतवाली, जिला विदिशा क्षेत्रांतर्गत अरिहंत ज्वैलर्स, खरीफाटक रोड पर घटित डकैती के प्रकरण में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रकरण में फरार चल रहे आरोपी को थाना बजरंगगढ़ जिला गुना क्षेत्रांतर्गत ग्राम गड़ला गिर्द के जंगल से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से चोरी गया लगभग सवा 5 किलो चांदी का सामान बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रूपए है, साथ ही घटना में प्रयुक्त औजार भी जप्त किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि दिनांक 03.01.2026 को फरियादी द्वारा इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिस पर पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में गठित 08 विशेष टीमों द्वारा तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज एवं सतत पतारसी के आधार पर अब तक कुल 03 आरोपी एवं 02 विधि विरुद्ध बालकों की गिरफ्तारी कर लगभग 13 लाख रूपए की संपत्ति बरामद किया था। अलीराजपुर: नकबजनी का खुलासा 10 लाख के सोने के हार एवं औजार जप्त, आरोपी गिरफ्तार थाना जोबट, जिला अलीराजपुर क्षेत्र में घटित नकबजनी की वारदात का सफल पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी के दो सोने के हार, अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपए तथा घटना में प्रयुक्त लोहा काटने का कटर जप्त किया है। मुरैना: अम्बाह डकैती कांड का खुलासा, 05 इनामी आरोपी गिरफ्तार, 16 लाख 77 हजार रुपए की संपत्ति जब्त थाना अम्बाह क्षेत्रांतर्गत हुई सनसनीखेज डकैती की घटना का सफल खुलासा करते हुए पुलिस ने 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण एवं तकनीकी जांच के आधार पर 10-10 हजार रुपए के इनामी 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लूटी गई नगदी, सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन एवं घटना में प्रयुक्त कार सहित कुल 16 लाख 77 हजार की संपत्ति जब्त की है। सतना: चित्रकूट पुलिस की बड़ी सफलता, 14 लाख रूपये की चोरी का पर्दाफाश थाना चित्रकूट, जिला सतना पुलिस द्वारा घर में घुसकर चोरी करने वाले 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 लाख 26 हजार रुपए नगद एवं लगभग 4 लाख रुपए के सोने के आभूषण सहित कुल 14 लाख 26 हजार की सामग्री जब्त की  है। दतिया: 12 घंटे में चोरी का खुलासा थाना कोतवाली पुलिस ने मात्र 12 घंटे के भीतर चोरी की घटना का खुलासा करते हुए फरियादी के घर कार्यरत महिला आरोपिया को गिरफ्तार किया। आरोपिया के कब्जे से लगभग 17 लाख रुपए मूल्य के सोने के जेवरात जब्त किए हैं। उज्जैन: लूट गिरोह का भंडाफोड़, 6 लाख रुपए की सामग्री जब्त थाना बिरलाग्राम, नागदा क्षेत्रांतर्गत उज्जैन पुलिस ने चाकू एवं लोहे के पाइप से लूट की वारदात को अंजाम देने वाले 03 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से लगभग 6 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल फोन, हथियार एवं मोटरसाइकिल जप्त की है। मध्यप्रदेश पुलिस अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाते हुए नागरिकों में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण सुदृढ़ कर रही है। पुलिस की यह प्रतिबद्धता आने वाले समय में भी प्रदेश को सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं अपराधमुक्त बनाए रखने की दिशा में निरंतर जारी रहेगी।

‘वंदे मातरम्’ विवाद: उज्जैन के इमाम की मुस्लिम अभिभावकों से स्कूल बदलने की अपील

उज्जैन वंदे मातरम् वाले स्कूलों से निकाल ले बच्चे; मुसलमानों से उज्जैन ईमाम की अपील केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य करने का निर्णय किया है। इसको लेकर गृह मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों को खड़ा होना जरूरी होगा। इस फैसले का उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कड़ा विरोध किया है। उनकी दलील है कि वंदे मातरम् इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है क्योंकि इसमें मातृभूमि की पूजा की बात की गई है। उन्होंने मुस्लिमों से अपने बच्चों को उन स्कूलों से निकालने की अपील की है जहां वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है। इस्लाम नहीं देता इजाजत उज्जैन के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि भारत में हर धर्म और मजहब के लोग रहते हैं। हम किसी को यह नहीं कह सकते हैं कि आप किसी एक खुदा को मानें… हम यह भी किसी से नहीं कह सकते हैं कि आप कई खुदा को मानें। हिन्दुस्तान एक ऐसा चमन है जहां हर तरह के फूल को रखा गया है। यही इसकी ब्यूटी है। वंदे मातरम् में साफ लिखा गया है कि हम इस धरती की पूजा करते हैं। इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। इस्लाम का आधार ही एकेश्वरवाद है। हम तो पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी नहीं पूजते मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने आगे कहा कि हम खुदा के साथ किसी को शामिल नहीं कर सकते हैं। हम ना तो हिन्दुस्तान की जमीन को पूज सकते हैं ना ही मक्का और मदीना की जमीन को पूज सकते हैं। हम पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी पूजते नहीं हैं। हम उनकी तालीम पर चलते हैं। इस्लाम एक ही ईश्वर पर आधारित है। हम इसे छोड़ नहीं सकते हैं। हम हुकूमत से यह गुजारिश करते हैं कि आगे से इस तरह का कोई प्रोग्राम ना चलाए जो किसी धर्म को चोट पहुंचाते हों। जिन स्कूलों में वंदे मातरम् वहां से बच्चों को निकाल लें मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार इस फैसले को वापस ले। हम अपने बच्चों को ऐसी किसी भी संस्था में नहीं भेज सकते जहां उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ होता हो। हमारे यहां हिन्दुस्तान की पूजा का कोई जिक्र नहीं है। इस्लाम तो इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं देता है। हम कहेंगे कि जिन स्कूलों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है, मुसलमान वहां से सभी अपने बच्चों को निकाल लें। कानून नहीं मानने वालों को देश में रहने की कोई जरूरत नहीं मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी के बयान पर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। हिन्दू संगठनों ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। संतों ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। महामंडलेश्वर अतुलेशनन्द ने कहा कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम गाना होगा। यह भारत भूमि है और कानून सबके लिए एक है। इस कानून को जो नहीं मानता या नहीं स्वीकार करता है उसको इस देश में रहने की कोई जरूरत नहीं है। इस देश में रहने वाले कुछ लोग हमारे संविधान को मानते नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए बांग्लादेश या पाकिस्तान के रास्ते खोल देने चाहिए।