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3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी

 प्रमुख सचिव श्री नरहरि ने जल जीवन मिशन की समीक्षा की भोपाल प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने जल जीवन मिशन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। श्री नरहरि ने कार्यों में शिथिलता और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 3 अधीक्षण यंत्रियों एवं 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट किया कि कार्यों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के समस्त जिलों के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं सहायक यंत्री स्तर तक के अधिकारी से जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं की अद्यतन स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। समीक्षा बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की गई। प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति निर्धारित लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है, जिससे मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत शेष बचे कार्यों को निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से प्रगति की निगरानी की जाएगी। प्रमुख सचिव श्री नरहरि ने कहा कि जल जीवन मिशन राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कार्यों की प्रगति में किसी प्रकार की शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि फील्ड स्तर पर समन्वय बढ़ाते हुए गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता के साथ कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लांच की मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026

एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति एआई पर मिशन मोड पर होगा कार्य प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन को दृष्तिगत रखकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश जन-कल्याणकारी योजनाओं में एआई का प्रभावी उपयोग करेगा मध्यप्रदेश प्रदेश में जल्द लाई जाएगी राज्य एआई नीति मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026’ का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य जी की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक श्री आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है।  स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी।   आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव श्री जैन मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव श्री जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव श्री जैन  ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य ने बनाये 4 प्रमुख स्तंभ : एसीएस श्री दुबे अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने “AI for People, Planet, and Progress” के … Read more

नशा करने वालों को न दें सामाजिक सम्मान : ऊर्जा मंत्री तोमर

स्वच्छ, हरे-भरे, प्रदूषण मुक्त और नशामुक्त शहर के लिए हुआ सुंदरकांड पाठ भोपाल नशा संपूर्ण समाज के लिए एक बड़ी समस्या है। नशे के नाश के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आकर प्रयास करना चाहिए। यह बात ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने गुरुवार को जनकल्याण समिति के नवीन भवन निर्माण के भूमिपूजन समारोह में कही। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा नशा मुक्त ग्वालियर बनाने के लिए युवाओं को आगे आकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आहवान किया कि आज यह शपथ लें कि मैं भविष्य में किसी भी प्रकार का नशा नहीं करुंगा। साथ ही अपने वार्ड ,गली, मोहल्ले के लोगों, साथियों, परिवार के सदस्यों एवं समाज के स्वजनों को भी इससे दूर रखूंगा जिससे नशा मुक्त समाज के निर्माण का सच्चा सेवक बन सकूं। नशा करने वाले व्यक्तियों को सम्मान देना बन्द करें। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि नशा एक गंभीर समस्या है। नशा न केवल व्यक्ति का जीवन बर्बाद करता है बल्कि परिवार के लिए भी संकट पैदा करता है। उन्होंने कहा कि हमें अच्छी संगत में रहना चाहिए, हम जैसे लोगों के साथ रहेंगे, हम वैसे संस्कार सीखेंगे। नशा मुक्ति से न केवल नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य होगा, बल्कि हमारे शहर का भी विकास होगा। नशा एक बुरी आदत है, जो व्यक्ति को तन, मन और धन से खोखला कर देती है। इसलिए इस प्रवृत्ति का सामाजिक बहिष्कार करें। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने सुन्दरकाण्ड पाठ में शामिल श्रद्धालुओं को अपने शहर को स्वच्छ और भरा बनाने के लिए डस्टबिन प्रदान करते हुए शपथ दिलाई कि ग्वालियर को स्वच्छ, हरा-भरा, प्रदूषण मुक्त और नशा मुक्त बनाने के अभियान के लिए खुद समय दें। साथ ही अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने और साफ-सफाई रखने के लिए प्रेरित करें। उल्लेखनीय है कि ऊर्जा मंत्री श्री तोमर की पहल पर ग्वालियर शहर को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त, नशा मुक्त बनाने के लिए आरंभ हुई संगीतमय रामधुन की श्रृंखला में जन कल्याण समिति ग्वालियर द्वारा गुरुवार को गणेश कॉलोनी, गोवर्धन बिहार, खरगेश्वर मंदिर चार शहर का नाका में संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया। इस दौरान जनकल्याण समिति के सभी सदस्य और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

इको पर्यटन क्षेत्र गिदली घुघरा में अनुभूति कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रकृति से सीखा जीवन का पाठ

भोपाल मध्यप्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड एवं मध्यप्रदेश वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में पश्चिम (सामा.) वनमंडल मंडला अंतर्गत वन परिक्षेत्र बम्हनी के इको-पर्यटन क्षेत्र गिदली घुघरा में अनुभूति कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया, जिसकी थीम "मैं भी बाघ", "हम हैं बदलाव" और "हम हैं धरती के दूत" रही। वन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिये शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति, वन एवं जैव विविधता के प्रति जागरूक करना तथा पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम में शासकीय सांदीपनि विद्यालय चिरईडोंगरी के कुल 135 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मास्टर ट्रेनर श्री सी.एम. शर्मा, प्रशिक्षु आईएफएस श्री आकाश साहू तथा वन परिक्षेत्र बम्हनी का समस्त स्टॉफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान प्रकृति पथ भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को वन क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न वृक्षों, वनस्पतियों एवं औषधीय महत्व की जड़ी-बूटियों की पहचान कराई गई तथा उनके उपयोग और महत्व की जानकारी भी दी गई। इसके साथ वनक्षेत्र में विचरण करने वाले वन्य-जीवों जैसे बाघ, तेंदुआ, सांभर और चीतल के अप्रत्यक्ष साक्ष्यों के माध्यम से वन्य-प्राणियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। विद्यार्थियों को मृदा अपरदन एवं मृदा संरक्षण, वन्य-जीवों और उनके प्राकृतिक पर्यावास के पारस्परिक सह-सम्बन्ध, वनों की पारिस्थितिकीय भूमिका एवं वनों में पाए जाने वाले लघु वनोपज जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी गई। बच्चों ने प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति को देखकर सीखने का अनूठा अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम को और अधिक रोचक बनाने के लिये पर्यावरण आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री आशुतोष महादेव ठाकुर और प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर श्री संस्कार बावरिया उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रोत्साहित किया। इसके अलावा ग्राम पंचायत डुंगरिया सरपंच श्री धूपसिंह मरकाम और अध्यक्ष वन सुरक्षा समिति झाँगुल श्री श्याम उइके भी उपस्थित रहे।  

अभी तक 49 लाख 87 हजार मीट्रिक टन से अधिक हुई धान की खरीदी

20 जनवरी तक होगी धान खरीदी भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 7 लाख 40 हजार 914 किसानों से 49 लाख 87 हजार 147 मीट्रिक टन धान की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा चुकी है। उन्होंने बताया है कि गत वर्ष 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रूपये प्रति क्विंटल है। धान की खरीदी 20 जनवरी 2026 तक की जायेगी। किसानों को 8291 करोड़ रूपये से अधिक राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि धान विक्रय के लिये 8 लाख 59 हजार 822 किसानों ने पंजीयन कराया है। एक दिसम्बर से शुरू हुई धान खरीदी के लिये विभिन्न जिलों में 1436 केन्द्र बनाये गये हैं। क्रय की गयी धान की 79 प्रतिशत मात्रा 39 लाख 19 हजार 277 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है।  

3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी

3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी प्रमुख सचिव नरहरि ने जल जीवन मिशन की समीक्षा की भोपाल  प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी नरहरि ने जल जीवन मिशन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। नरहरि ने कार्यों में शिथिलता और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 3 अधीक्षण यंत्रियों एवं 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट किया कि कार्यों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के समस्त जिलों के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं सहायक यंत्री स्तर तक के अधिकारी से जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं की अद्यतन स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। समीक्षा बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की गई। प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति निर्धारित लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है, जिससे मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत शेष बचे कार्यों को निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से प्रगति की निगरानी की जाएगी। प्रमुख सचिव नरहरि ने कहा कि जल जीवन मिशन राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कार्यों की प्रगति में किसी प्रकार की शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि फील्ड स्तर पर समन्वय बढ़ाते हुए गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता के साथ कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।  

नेपानगर में 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष का आह्वान

नेपानगर (बुरहानपुर) मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने कहा है कि इस देश में आदिवासियों का भी अलग धर्म कोड होना चाहिए और इसके लिए अब एकजुट होकर निर्णायक आंदोलन की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ही डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं, यदि यह समाज संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करे तो सरकार को अधिकार देना ही पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार बुरहानपुर जिले के नेपानगर में आयोजित 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस महासम्मेलन में सहभागी बनना उनके लिए गौरव और आत्मीय अनुभव है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से आए हजारों आदिवासी प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस महासम्मेलन को एकता, चेतना और संस्कृति का जीवंत उत्सव बना दिया है। सम्मेलन में आदिवासी समाज के भाई-बहनों और बुजुर्गों से मिला स्नेह और आशीर्वाद उनकी ऊर्जा और संकल्प को और मजबूत करता है। श्री सिंघार ने कहा कि आदिवासियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी विभिन्न समाजों के साथ मिलकर जातिगत जनगणना की मांग उठाई है और आज आदिवासी समाज के पास यह अवसर है कि वह इसे पूरे देश का जन आंदोलन बनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यहां राजनीति से दूर रहकर समाज के अधिकार की बात कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस तरह झारखंड के आदिवासियों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, उसी तरह मध्यप्रदेश के आदिवासी समाज को भी आगे आना होगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अलग कोड के लिए राष्ट्रपति को आदिवासी समाज की ओर से ज्ञापन भेजा जाना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट मांग हो कि आदिवासियों को भी अलग धर्म कोड दिया जाए, यह उनका संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है। अपने संबोधन के अंत में श्री उमंग सिंघार ने कहा, मैं उमंग सिंघार जल, जंगल, जमीन, हमारी संस्कृति और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण की लड़ाई में हमेशा अपने आदिवासी समाज के साथ खड़ा रहूंगा।

CM यादव का ऐलान: एआई को कुशल शासन और पारदर्शिता के लिए अहम बनाती है राज्य सरकार

राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति एआई पर मिशन मोड पर होगा कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लांच की मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 प्रधानमंत्री मोदी के विजन को दृष्तिगत रखकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश जन-कल्याणकारी योजनाओं में एआई का प्रभावी उपयोग करेगा मध्यप्रदेश प्रदेश में जल्द लाई जाएगी राज्य एआई नीति मुख्यमंत्री ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026’ का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य जी की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है। स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी।   आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव जैन  ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी … Read more

मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों के लिए UPPSC और PSC तैयारी, 2 नए छात्रावास बनाने की योजना

जबलपुर  अपने अटपटे बयानों के लिए पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री आजकल बहुत नापतौल कर बयान दे रहे हैं. जनजातीय मंत्री विजय शाह ने जबलपुर में अपने विभाग के अलावा किसी दूसरे सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने बताया कि आदिवासी छात्र-छात्राओं को यूपीएससी और पीएसी की तैयारी के लिए जबलपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा. जिसमें छात्र-छात्राओं को सरकारी खर्च पर विशेष कोचिंग करवाई जाएगी. जबलपुर में बनेंगे 2 नए छात्रावास मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह जबलपुर पहुंचे. जहां उन्होंने दो नए छात्रावासों के निर्माण की घोषणा की है. जिन्हें 8 करोड़ 18 लख रुपए की लागत से बनाया जाएगा. एक छात्रावास जबलपुर के महाकाल में और दूसरा कुडम में बनेगा. मंत्री कुंवर विजय शाह का कहना है कि "आदिवासी जनजाति के छात्रों को लेकर जबलपुर में एक नया प्रयोग किया जा रहा है, जो अगले शिक्षा सत्र से शुरू होगा. आदिवासी छात्रों को सरकार कराएगी कोचिंग इसके तहत 100 लड़के और 100 लड़कियों को यूपीएससी और पीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग करवाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग की ओर से 18 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. उन्होंने बताया इसी तरह अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए नीट, आईआईटी, जेईई और करंट अफेयर्स की तैयारी के लिए भी जबलपुर में व्यवस्था की जा रही है. इन छात्रों के लिए हॉस्टल बनाया जा रहा है. यह हॉस्टल सुरक्षा के नजरिए से अत्यधिक व्यवस्थाओं से लैस होगा. राज्यसभा सीट और इंदौर मामले पर जवाब देने से बचे विजय शाह मंत्री विजय शाह का कहना है कि मध्य प्रदेश में 5000 अनुसूचित जाति जनजाति छात्रावास हैं. इनमें स्थाइ वार्डन नहीं है और वार्डन का चार्ज किसी शिक्षक को दिया गया है. ऐसी स्थिति में शिक्षक छात्रावास को 100% समय नहीं दे पाता. इसलिए इन सभी छात्रावास में स्थाइ वार्डन की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है." इसके बाद कांग्रेस दिग्विजय सिंह के स्थान पर राज्यसभा में आदिवासी नेता को राज्यसभा सदस्य बनना चाहती है. इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलेंगे. इंदौर में गंदे पानी के मुद्दे पर भी कुंवर विजय शाह ने कुछ नहीं कहा.

अब जब मैं बाहर हूं, समझ आया दिग्विजय सिंह क्या चाहते थे” – सिंधिया का खुलासा

ग्वालियर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों ग्वालियर दौरे पर हैं। जहां उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति पर अपनी राय रखी। सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के राज्यसभा न जाने की वजह पूछे जाने पर एक सवाल का जवाब देते हुए तीखा तंज कसा। इतना ही नहीं उन्होंने राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर भी बयान दिया। सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के राज्यसभा न जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी और उनका अंदरूनी निर्णय है। जब मैं कांग्रेस में था, तब नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते हैं, अब तो मैं बाहर हूं तो भला कैसे जान पाऊंगा कि वे क्या चाहते हैं। उनके फैसलों पर टिप्पणी करना और भी मुश्किल है। दरअसल, दिग्विजय सिंह द्वारा राज्यसभा में न जाने के फैसले को लेकर सिंधिया से सवाल किया गया था। इस पर सिंधिया ने किसी भी तरह की सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया और बात को वहीं विराम दे दिया। वहीं दिग्विजय सिंह की आरएसएस की तारीफ करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- देर आए दुरुस्त आए। वहीं, जब सिंधिया से 17 तारीख को राहुल गांधी के इंदौर आगमन को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि देश में प्रजातंत्र है और कोई भी नेता कहीं भी आ-जा सकता है। गौरतलब है कि साल 2020 में मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने के पीछे राज्यसभा चुनाव एक बड़ी वजह थी। उस समय लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा जाने की चर्चा थी, लेकिन दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने पर 'राजा दिग्गी' और 'महाराजा सिंधिया' के बीच तल्खियां बढ़ गई थीं। दिग्विजय सिंह द्वारा वर्तमान कार्यकाल पूरा होने पर राज्यसभा न जाने की इच्छा जाहिर किए जाने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि यह उनकी और कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी बात है। उन्होंने कहा, "मैं इस पर क्या टिप्पणी करूं? मैं क्या जानूं वह क्या चाहते हैं? जब मैं कांग्रेस में था तब भी मैं नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते थे और अब मैं बाहर हूं तो मैं कैसे जानूंगा कि वह क्या चाहते हैं?" वहीं, बीते दिनों दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की तारीफ किए जाने पर सिंधिया ने टिप्पणी की, "देर आए पर दुरुस्त आए, यह अच्छी बात है।" राहुल गांधी के 17 तारीख को इंदौर दौरे के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि वह जरूर जाएं, इसमें कोई कठिनाई नहीं है, यह प्रजातंत्र है। आपको बता दे सिंधिया कटारे फार्म के पास स्मार्ट सिटी द्वारा निर्मित थीम पार्क का जायजा लेने पहुंचे थे।उन्होंने कहा कि आज शौर्य स्मारक का भी निरीक्षण किया है,एक बहुत अच्छा भविष्य की पीढ़ी के लिए एक नया स्थल बन रहा है और भविष्य की पीढ़ी भी अपने पूर्वजों के बलिदान याद रखें इसलिए यह स्मारक भी बनाया जा रहा है,बहुत सुंदर डिजाइन ग्वालियर के पत्थर से हम लोग बनाने की कोशिश कर रहे हैं,इसकी आकृति में भी ग्वालियर की संस्कृति और परंपरा रहे सारे शहीदों जिन्होंने पिछले हजार वर्षों से अपने जीवन का बलिदान दिया है उनके लिए यह स्मारक यहां बनेगी, ग्वालियर चंबल की धरती ने भी बहुत सारे वीर सूरमाओं को जन्म दिया है जिन्होंने सरहद पर देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान दिया है,उनको भी याद किया जाएगा और भविष्य यहां प्रवेश करेगा तो वह भविष्य अपने पूर्वजों को सामने माथा टेक कर फिर अपने भविष्य का भी निर्माण करेगा।