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रीवा-सतना में दृश्यता सिर्फ 50 मीटर, घने कोहरे और ठंड से बढ़ी यात्रा कठिनाई

भोपाल मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड के साथ घने कोहरे का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार सुबह रीवा और सतना में हालात इतने खराब रहे कि ‘ब्लाइंड मॉर्निंग’ जैसी स्थिति बन गई।  प्रदेश के कुछ जिलों में इन दिनों न्यूनतम तापमान में हल्की उछाल देखी जा रही है. इसमें मुख्य रूप से भोपाल संभाग के जिलों में न्यूनतम तापमान बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. पिछले 24 घंटे की बात की जाए तो नरसिंहपुर जिले में शीतल दिन देखा गया. वहीं रीवा, सतना, छतरपुर और दतिया जैसे जिलों में शीतल दिन रहा. नर्मदापुरम के पचमढ़ी हिल स्टेशन में न्यूनतम तापमान सबसे कम 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस दौरान अधिकतम तापमान अपने निचले स्तर पर रिकॉर्ड हुआ. आगर-मालवा में दिन का अधिकतम तापमान सबसे कम 13.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ. बड़े जिलों की न्यूनतम तापमान की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. इसके अलावा जबलपुर में 9 डिग्री और ग्वालियर में 11.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के ग्वालियर, चंबल और रीवा संभाग के जिलों में घने कोहरे और ठंड का अलर्ट है. कोहरे की वजह से मालवा एक्सप्रेस करीब 4 घंटे देरी से चली, जबकि शताब्दी, सचखंड, पंजाब मेल और झेलम एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों पर भी असर देखा गया। रीवा और सतना के अलावा दमोह, खजुराहो, नौगांव, ग्वालियर, मुरैना और सीधी में भी सुबह घना कोहरा छाया रहा। इन जिलों में विजिबिलिटी 50 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई। वहीं भोपाल, दतिया, इंदौर, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, मंडला, गुना, रायसेन, शिवपुरी, सागर, शाजापुर, भिंड और धार में भी कोहरे का असर देखा गया। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, वर्तमान समय में एक पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ के रूप में पश्चिम क्षेत्र में बना हुआ है. साथ ही सब ट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम हवाएं उत्तर भारत के राज्यों में चल रही है. प्रदेश के उत्तर पूर्वी जिलों में ठंड के साह ही मध्यम से घने कोहरे और कड़ाके की ठंड की संभावना बनी हुई है. इसमें मुख्य रूप से ग्वालियर, रीवा और शहडोल संभाग के जिले शामिल है. इन जिलों में कोहरे का अलर्ट मौसम विभाग ने प्रदेश के 14 जिलों में मध्यम कोहरे का अलर्ट जारी किया है. इसमें मुख्य रूप से भिंड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और मैहर में मध्यम कोहरे की चेतावनी जारी है. इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा, पारा 5 डिग्री से नीचे इससे पहले रविवार-सोमवार की रात में कई शहरों में पारे में गिरावट का दौर बना रहा। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल-इंदौर में 8.8 डिग्री, ग्वालियर में 11.3 डिग्री, उज्जैन में 11.4 डिग्री और जबलपुर में पारा 9 डिग्री रहा। प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री पहुंच गया। रीवा में 5.6 डिग्री, शहडोल के कल्याणपुर में 5.9 डिग्री, राजगढ़-खजुराहो में 7 डिग्री, सतना के चित्रकूट में 7 डिग्री, मलाजखंड में 7.4 डिग्री, बैतूल में 7.5 डिग्री, नौगांव में 7.6 डिग्री, खंडवा-सतना में 8 डिग्री, मंडला में 8.2 डिग्री, नरसिंहपुर, खरगोन-उमरिया में 8.4 डिग्री, दमोह में 8.5 डिग्री, रायसेन में 8.8 डिग्री, सागर में 8.9 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री और दतिया में पारा 9.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। MP में इतना रहा तापमान… नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर के बाद दिसंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। दूसरी ओर, दिसंबर में इंदौर में पारा सबसे कम रहा। भोपाल में भी यह 5 डिग्री से नीचे पहुंच चुका है। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहती है ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही हो रहा है। शुरुआत से अब तक कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं। इस वजह से एमपी में कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर का असर है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आ रही हैं। कोहरे का असर भी इन जिलों में ज्यादा देखा जा रहा है। सागर और रीवा संभाग भी प्रभावित है।     भोपाल संभाग के सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा में ठंड का जोर है। राजगढ़ में पारा 4 डिग्री तक पहुंच चुका है।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड है।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस जिले का तापमान सबसे कम न्यूनतम तापमान: पचमढ़ी (नर्मदापुरम) – 4.6°C (सबसे कम), रीवा – 5.6°C, कल्याणपुर (शहडोल) – 5.9°C, राजगढ़/खजुराहो (छतरपुर) – 7°C, चित्रकूट (सतना) – 7.1°C बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान उज्जैन – 11.4°C ग्वालियर – 11.3°C जबलपुर – 9°C भोपाल – 8.8°C इंदौर – 8.8°C  

बच्चों की असामयिक मौतों ने मचाई चिंता, छतरपुर में NHM जांच में जुटा

 छतरपुर मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर देशभर में सुर्खियां बटोर रहा है। इस बार चर्चा का मुख्य कारण बच्चों की मौत से जुड़ा है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों से रिपोर्ट तलब की है। दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली घटना उजागर हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई। इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन  विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।  छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई. इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आरपी गुप्ता ने इस गंभीर स्थिति की पुष्टि की और बताया, ''अप्रैल से अब तक अस्पताल में 409 बच्चों की मौत हो चुकी है और हमें सीनियर अधिकारियों से इन मौतों की जांच करने का नोटिस मिला है. मैंने इसके लिए एक टीम बनाई है. हमने जांच लगभग पूरी कर ली है.'' कर्मचारियों से हो रही पूछताछ सीएमएचओ ने कहा- एसएनसीयू और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है। हमारी टीम मृत बच्चों की वर्बल आटोप्सी कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं। उन्होंने यह भी दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6 फीसदी से नीचे आ गया है। जरूरतमंद को नहीं मिल रही एंबुलेंस इधर, प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं। दावा- अब घट गया मौत का प्रतिशत वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद आपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है। सीएमएचओ ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है। CMHO के अनुसार, "SNCU और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है. हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है. हमारी टीम मृत बच्चों की 'वर्बल ऑटोप्सी' कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं.'' विभाग का दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6% से नीचे आ गया है. प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं. वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद ऑपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है. स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. और अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है.

भगवान महाकाल के दर्शन के दौरान जेपी नड्डा और सीएम मोहन यादव ने किया अभिषेक और प्रसादी ग्रहण

उज्जैन  BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे. उनके साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी थे. दोनों नेताओं ने गर्भगृह में जाकर विधि-विधान से बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया और भगवान महाकाल की आरती उतारी. इस दौरान जेपी नड्डा ने कुछ समय नंदी हाल में बिताया और यहां षोडशोपचार पूजन किया. यह पूजन करने से यश, कीर्ति और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है.  महाकाल के आंगन में हर भक्त बराबर है, इसी संदेश को सार्थक करते हुए जेपी नड्डा और मोहन यादव महाकाल मंदिर की ओर से संचालित अन्नक्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने पोहा-जलेबी का नाश्ता किया. दर्शनार्थियों को भी परोसा और खुद भी ग्रहण किया. प्रसादी ग्रहण करने के बाद केंद्रीय मंत्री नड्डा और सीएम यादव खुद अपनी जूठी थाली उठाकर डस्टबिन में डालने गए.  गर्भगृह में दोनों ने महाकाल का अभिषेक किया और पुजारी आकाश ने 20 मिनट तक षोडशोपचार पूजन कराया। यह पूजन यश-कीर्ति के लिए किया जाता है। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री, मध्य प्रदेश के प्रभारी महेंद्र सिंह ने महाकाल मंदिर अन्न क्षेत्र में श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरण की और खुद भी ग्रहण की। प्रसादी में पोहे खाने के बाद वे खुद ही अपनी थाली उठाकर रखने गए। नड्‌डा और सीएम सिंहस्थ में होने वाले कार्यों का भी निरीक्षण करेंगे। उन्होंने स्वच्छता अभियान में सभी की सहभागिता निभाते हुए सभी श्रद्धालुओं को भी संदेश दिया कि महाकाल क्षेत्र में सभी श्रद्धालु एक समान हैं.  बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सोमवार की देर रात उज्जैन पहुंच गए थे. रात्रि 10:30 बजे होने वाली शयन आरती से पहले मंदिर पहुंचे नड्डा ने नंदी हाल में बैठकर भगवान महाकाल का ध्यान लगाया और शयन आरती देखी. श्रद्धापूर्वक परंपरागत शयन आरती में सम्मिलित हुए नड्डा ने भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन कर देश व दुनिया की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की. भक्ति पूजन के साथ स्वछता का संदेश प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री ने महाकाल अन्न क्षेत्र में प्रसादी ग्रहण करने के बाद डिस्पोजल को डस्टबिन में डाला। स्वच्छता अभियान मे सभी की सहभागिता निभाते हुए सभी श्रद्धालुओं को भी संदेश दिया कि महाकाल क्षेत्र में सभी श्रद्धालु एक समान है। उन्होंने सबके साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की और उसके उपरांत नाश्ते की प्लेट को डस्टबिन में स्वयं ले जाकर डाला। नड्डा के आगमन को लेकर मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. आम श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की गई. रात्रि में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बाबा महाकाल की तस्वीर, प्रसाद और शॉल भेंटकर पारंपरिक तरीके से स्वागत व सम्मान किया. इस दौरान क्षेत्रीय भाजपा नेता समेत विधायक भी उपस्थित थे. मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि आज दो नए मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी जा रही है. धार और बैतूल में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जाएगा. इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हमारे बीच आए हैं, हमने बाबा महाकाल का पूजन कर आशीर्वाद लिया है.

MP विधानसभा में डिजिटल बदलाव: विधायकों को ऑनलाइन काम करने की खास ट्रेनिंग आज

भोपाल  मध्य प्रदेश की विधानसभा अब पूरी तरह डिजिटल होने वाली है. सारा कामकाज पेपरलेस होगा. ये व्यवस्था अगले विधानसभा सत्र से लागू की जाएगी. इस नए सिस्टम से प्रदेश के 230 विधायकों को रूबरू कराने के लिए मंगलवार (23 दिसंबर) को ट्रेनिंग दी जाएगी. ई-विधान के तहत प्रशिक्षण एमपी विधानसभा के मानसरोवर सभागार में मंगलवार (23 दिसंबर) को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधायकों को ट्रेनिंग दी जाएगी. ये ट्रेनिंग राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन के तहत दी जाएगी. संसदीय कार्य मंत्रालय के अधिकारी माननीयों को प्रशिक्षण देंगे. देश की विधायी व्यवस्था को मॉडर्न, ट्रांसपेरेंट और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में इस शुरू किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय संसद और देश के सभी राज्यों की विधानसभा को पेपरलेस बनाया जा रहा है. भोपाल पहुंचेंगे सभी विधायक  एमपी के सभी विधायक आज से भोपाल पहुंचना शुरू हो जाएंगे. क्योंकि विधानसभा मानसरोवर सभागार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधायकों को  संसदीय कार्य मंत्रालय दिल्ली के एक्सपर्ट की तरफ से ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर समेत बीजेपी कांग्रेस के सीनियर विधायक शामिल होंगे. एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम को लेकर नरेंद्र सिंह तोमर लगातार जोर दे रहे हैं. क्योंकि यह आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. यह परियोजना देश के कई राज्यों की विधानसभाओं में लागू हो रही है, क्योंकि इसके जरिए विधानसभा को पूरी तरह से पेपरलेस बनाना है, ताकि कागज के उपयोग को बचाया जा सके.  विधायकों को होगा फायदा  एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम से सबसे ज्यादा फायदा विधायकों का ही होने वाला है. विधायकों को कागज के बड़े बंडल अपने साथ नहीं ले जाने होंगे. वहीं प्रस्ताव और चर्चा के लिए प्रश्न आसानी से जाएंगे. पुराने सवालों का जवाब और उसके दस्तावेज एक ही जगह पर आसानी से मिलेंगे. वहीं किसी भी बिल या अन्य मुद्दों पर वोटिंग के लिए भी अपनी आसानी से दे सकेंगे. पर्यावरण संरक्षण यानि कागजों की बचत में भी उपयोगी काम होगा. डिजिटल काम विधायी रिकॉर्ड भी सुरक्षित होगा. वही विधानसभा के काम भी तेजी आएगी और सारी जानकारी आम आदमी को भी ऑनलाइन विधानसभा की साइड पर मिलेगी.  मध्य प्रदेश विधानसभा में अगला विधानसभा का सत्र ऑनलाइन ही होगा, ऐसे में पूरी कार्रवाई के लिए लगातार इस प्रक्रिया में काम किया जा रहा है, जिसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से भी लगातार सहयोग हो रहा है. क्योंकि एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम की तैयारियां लंबे समय से चल रही है, जिस पर अब तेजी से अमल किया जा रहा है. जो राज्य सरकार के आम लोगों के लिए भी उपयोगी साबित होगी.   कैसे काम करता है NeVA प्लेटफॉर्म NeVA यानी नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है, जिसमें विधानसभा की पूरी कार्यवाही रियल-टाइम में दर्ज होती है। विधायकों को लॉगिन के माध्यम से सभी दस्तावेज, प्रस्ताव और रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं। यह परियोजना “वन नेशन, वन एप्लिकेशन” की अवधारणा पर आधारित है, जिससे देशभर की विधानसभाओं में एकरूपता लाई जा सके। आगे की योजना विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण के बाद चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस कार्यप्रणाली को पूरी तरह लागू किया जाएगा। शुरुआती दौर में तकनीकी सहायता टीम भी मौजूद रहेगी, ताकि विधायकों को किसी तरह की असुविधा न हो। क्यों अहम है यह पहल विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विधानसभा की कार्यक्षमता और जवाबदेही बढ़ाने में भी सहायक होगा। मध्य प्रदेश विधानसभा का यह डिजिटल बदलाव अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। इस व्यवस्था से क्या फायदा होगा? बजट सत्र से मध्य प्रदेश की विधानसभा को पेपरलेस करने की योजना है, यानी सारे कार्य डिजिटल तरीके से किए जाएंगे. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद विधायकों, सचिवालय और आम लोगों को फायदा होगा. विधायकों को कागजों के भारी बंडल से मुक्ति मिलेगी. प्रश्न को आसानी से पूछा जा सकेगा. मतदान और उपस्थिति दर्ज कराने में आसानी होगी. वहीं, सचिवालय के कामकाज में तेजी आएगी. फाइल मैनेजमेंट आसान और तेज होगा. कर्मचारियों का समय और मेहनत भी बचेगी. आम जनता को भी इससे लाभ होगा. विधानसभा की कार्यवाही में पारदर्शिता आने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा. क्या है ई-विधान प्रोजेक्ट? नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (National E-Vidhan Application) एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है. इसकी मदद से संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही को ऑनलाइन और रियल टाइम तरीके से संचालित की जाती है. ये पूरे देश की विधानसभाओं और संसद को एक करती है.

भोपाल को मिली मेट्रो की सौगात, प्रदेश के दो प्रमुख शहरों में मेट्रो सेवा प्रारंभ: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल को मेट्रो की सौगात, मध्यप्रदेश के दो बड़े शहरों में चल रही है मेट्रो ट्रेन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के पहले भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया का मैप भी हुआ लांच, पड़ोसी पांच जिलों का क्षेत्र होगा शामिल केंद्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले सभी मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बीते सप्ताह मध्यप्रदेश को कई नई सौगातें मिली हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल की विशिष्ट उपस्थिति में न केवल भोपाल में मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ हुआ वरन् प्रदेश के पहले भोपाल महानगरीय क्षेत्र (मेट्रोपोलिटन एरिया) का मैप (मानचित्र) भी लांच कर दिया गया। उन्होंने बताया कि भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया में भोपाल जिले सहित सीमावर्ती 5 जिलों रायसेन, विदिशा, राजगढ़, सीहोर और नर्मदापुरम का क्षेत्र शामिल किया गया है। इस एरिया में कुल 12 नगरीय क्षेत्र और 30 तहसीलें शामिल की गई हैं। मेट्रोपोलिटन एरिया में लगभग 2524 गांव शामिल होंगे और इस क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 12,099 वर्ग किलोमीटर रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मध्यप्रदेश को दिन-ब-दिन मिल रही नई-नई सौगातों के लिए सभी मंत्रीगण ने मेंजें थप-थपाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय अभिनंदन कर आभार व्यक्त किया। भोपाल को मिली मेट्रो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि भोपाल को मेट्रो की सौगात मिली है। केन्द्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल द्वारा 20 दिसम्बर को भोपाल में मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ किया गया। पहले चरण में 7 किमी का मेट्रो ट्रेक सुभाष नगर से एम्स तक का है। इसमें कुल 8 स्टेशन हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के दो बड़े शहर इन्दौर और भोपाल अब मेट्रो ट्रेन अल्ट्रा माडर्न पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में शामिल हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने इन्दौर में 3.3 किमी के अंडरग्राउंड मेट्रो ट्रेन ट्रेक के निर्माण के लिए भी स्वीकृति दे दी है। मुख्यमंत्री ने इन सभी सौगातों के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त किया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा 23 दिसम्बर को करेंगे धार एवं बैतूल में मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर चार मेडिकल कॉलेज तैयार किए जाएंगे। इनमें से धार एवं बैतूल जिले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का भूमिपूजन 23 दिसम्बर को धार एवं बैतूल में सम्पन्न होगा। मंगलवार (23 दिसम्बर) को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा पीपीपी मॉडल पर बनने वाले दो मेडिकल कॉलेजों का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नड्डा पूर्वान्ह में धार में मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन एवं अन्य विकास कार्यों के लोकार्पण करने के बाद वहीं से बैतूल रवाना होंगे। नड्डा अपरान्ह में बैतूल में मेडिकल कॉलेज एवं अन्य विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सौगातों के लिये भी प्रधानमंत्री मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री नड्डा का आभार माना। केंद्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर एवं रीवा आएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 25 दिसम्बर को मध्यप्रदेश आएंगे। गृहमंत्री शाह भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती पर ग्वालियर एवं रीवा में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि गृहमंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में भाग लेंगे। केंद्रीय मंत्री शाह ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ से अधिक के कामों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करने के साथ-साथ निवेशकों को आशय पत्र/आवंटन आदेश का वितरण भी करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री यहां एक मेले का उद्घाटन भी करेंगे। इसके बाद वे रीवा पहुंचेगे और वहां आयोजित कृषि एवं किसान सम्मेलन में भाग लेंगे। 11वां अंतर्राष्ट्रीय वन मेला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 11वां अन्तर्राष्ट्रीय वन मेला भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है। यह मेला 23 दिसम्बर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि इस मेले में नेपाल और भूटान सहित अन्य देशों ने भी अपने स्टॉल लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ ने भी मेले में सहभागिता की है। इसमें हर्बल एवं आयुर्वेदिक दवाओं के 350 से अधिक स्टॉल लगाये गये है। 80 आयुर्वेदिक डॉक्टर और 100 से अधिक वैद्य सेवाएं दे रहे हैं। वन मेले में 26 फूड स्टॉल भी है। जिसमें आलीराजपुर का दाल पानिया, छिंदवाड़ा की वन रसोई और बांधवगढ़ के गोड़ी व्यंजनों का स्वाद भी आगंतुकों को मिल रहा है। मंत्रीगण दे रहे हैं दो साल की उपलब्धियों की जानकारी – 30 दिसम्बर तक मंत्रीगण करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार के दो साल पूरे होने पर प्रदेश के सभी मंत्रीगण दो साल की उपलब्धियों की विभागीय जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जनता तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रेस कांफ्रेंस का यह क्रम 30 दिसम्बर तक चलेगा। अभी तक वित्त एवं वाणिज्यिक कर, जनजातीय कार्य विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, श्रम विभाग, लोक निर्माण विभाग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, राजस्व विभाग एवं ऊर्जा विभाग की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो चुकी है। उन्होंने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने-अपने विभागों की सभी उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण भी कर लें और पूरी तैयारी से अपने विभाग की विगत दो सालों की उपलब्धियों को मीडिया को बतायें, ताकि सरकार की उपलब्धियां अधिक से अधिक जन सामान्य तक पहुंचें। 230 विधानसभा क्षेत्रों में से 193 विधानसभा क्षेत्रों में वृन्दावन ग्राम चयनित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृन्दावन ग्राम के संबंध में मंत्रीगण को बताया कि सरकार ने प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक वृन्दावन ग्राम बनाने की महती योजना प्रारंभ की है। इसमें ऐसे गांव का चयन करना है, जिसकी वर्तमान जनसंख्या कम से कम 2000 हो और गौवंश की न्यूनतम संख्या 500 तक हो। इन गांवों का चयन हर विधानसभा क्षेत्र में जिला कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री एवं विधायकगण से परामर्श लेकर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल 230 विधानसभा क्षेत्रों में से अबतक 193 विधानसभा क्षेत्रों में का वृन्दावन … Read more

अभ्युदय मध्यप्रदेश: आईटीआई में रिकॉर्ड प्रवेश और युवाओं का हुआ वैश्विक प्लेसमेंट

अभ्युदय मध्यप्रदेश कौशल और रोजगार से गढ़ी जा रही आत्मनिर्भरता की नई इबारत : मंत्री गौतम टेटवाल आईटीआई में रिकॉर्ड प्रवेश और युवाओं का हुआ वैश्विक प्लेसमेंट भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पत्रकार वार्ता में विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियां को साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने कौशल और रोजगार के क्षेत्र में ठोस, परिणाममुखी और राष्ट्र स्तर पर प्रशंसित उपलब्धियाँ हासिल की हैं।मंत्री टेटवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ और आगामी तीन वर्षों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का प्रमाण हैं। सत्र 2025 में प्रदेश के आईटीआई में एक लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थी परीक्षाओं में सम्मिलित हुए और विभिन्न ट्रेडों में दस प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। विगत दो वर्षों में शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाना तथा शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई, बैतूल की प्रशिक्षणार्थी कु. त्रिशा तावड़े को 4 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में सम्मानित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। विश्व कौशल प्रतियोगिता 2024 में प्रदेश के प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 4 कांस्य और 11 मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस (लियॉन) में एक मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस अर्जित किया गया, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता का प्रमाण है। वर्ष 2025 में शासकीय आईटीआई के प्रवेश में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई; कुल सीटें बढ़ाकर 52,248 की गईं और 94.55% सीटें भरी गईं, जो वर्ष 2024 के 86.33% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है। महिला आरक्षण बढ़ाकर 35% करने तथा समावेशी प्रवेश नीतियों के कारण महिला प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़कर 12,191 हुई, जबकि वर्ष 2024 में यह 9,655 थी। समावेशिता और नवप्रवर्तन विभाग की प्राथमिकता है । इस वर्ष 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों और बाल देखरेख संस्थाओं के 16 बच्चों ने आईटीआई में प्रवेश लिया। आठवीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए ट्रेडों की संख्या 5 से बढ़ाकर 10 की गई तथा इन ट्रेडों में 8,041 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। प्रदेश के आईटीआई की गुणवत्ता और आकर्षण का प्रमाण यह है कि इस वर्ष बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित आठ राज्यों के विद्यार्थियों ने मध्यप्रदेश के आईटीआई में प्रवेश लिया। आईटीआई ग्रेडिंग में प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई ने 10 में से 9 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए और शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन ने नौ दशमलव तीन अंक के साथ प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से उज्जैन, भोपाल और जबलपुर में एआई, आईओटी, ब्लॉकचेन तथा एआर-वीआर पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं तथा टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल द्वारा फाइव-जी टेक्नोलॉजी में 400 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत नौ आईटीआई में एआई डेटा लैब्स स्थापित करने के अनुबंध सुनिश्चित किए गए हैं। उद्योग-सीएसआर साझेदारी से प्रशिक्षण अवसंरचना सुदृढ़ हुई है; मारुति सुजुकी द्वारा आईटीआई भोपाल व जबलपुर में आधुनिक लैब का निर्माण पाँच करोड़ रु. की लागत से किया गया, सिमेंस ने आईटीआई उज्जैन में साठ लाख रुपए. की मेन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब स्थापित की, जैगुआर फाउंडेशन ने आईटीआई भोपाल में पंद्रह लाख रु. की प्लम्बिंग स्किल लैब विकसित की तथा श्री-ट्रस्ट ने 20 आईटीआई में इलेक्ट्रिकल, सोलर और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन लैब स्थापित कीं। वाधवानी फाउण्डेशन, क्वेस्ट अलाईंस और इग्नाइट परियोजना के माध्यम से हजारों प्रशिक्षणार्थियों को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इंडस्ट्री-अकादेमिया कंसल्टेशन वर्कशॉप 14 स्थानों पर आयोजित कर प्रशिक्षण एवं उद्योग आवश्यकताओं का बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में वर्ष 2025 में 1,100 प्रशिक्षणार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित किया गया, जिनमें 80% आईटीआई प्रशिक्षणार्थी और 20% पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग प्रशिक्षणार्थी हैं; ग्लोबल स्किल पार्क से अब तक 600 प्रशिक्षणार्थियों का सफल प्लेसमेंट हुआ है जिनमें 29 को विदेशी नियोजन प्राप्त हुआ और यह पार्क उच्च प्लेसमेंट प्रतिशत के साथ प्रदेश की पहचान बन चुका है। विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण, हब-एंड-स्पोक मॉडल और उद्योगों के साथ समन्वय के तहत अधिकारियों तथा अभ्यर्थियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विगत दो वर्षों में विभागीय संस्थागत क्षमता मजबूत करने हेतु अनेक नियुक्तियाँ की गईं तथा अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट को प्रोत्साहन देते हुए आईटीआई उत्तीर्ण 113 प्रशिक्षणार्थियों को अबूधाबी, जापान, स्लोवाकिया, कुवैत सहित विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराया गया। प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार, रोजगार और अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के लिए प्रतिमाह युवा संगम आयोजित किए जा रहे हैं; विगत दो वर्षों में 656 युवा संगमों के माध्यम से कुल 1,56,767 आवेदकों को रोजगार से जोड़ा गया। राज्यमंत्री टेटवाल ने जानकारी दी किआगामी तीन वर्षों की समग्र रूपरेखा में प्रदेश के आईटीआई विहीन 51 विकासखंडों में नये शासकीय आईटीआई की स्थापना, रिक्त पदों की पूर्ति, पीएम सेतु योजना के तहत क्लस्टर विकास, सीएसआर सहयोग से आधुनिक स्किल लैब का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट का बढ़ावा, विश्व कौशल प्रतियोगिताओं में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन और प्रशिक्षकों के लिए पुरस्कार प्रोत्साहन प्रमुख उद्देश्य होंगे। साथ ही, ग्रीन एनर्जी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अनुरूप नए कोर्स और प्रशिक्षण शुरू कर प्रदेश के युवाओं को आने वाले हरित व स्वचालित रोजगार बाजार के लिये तैयार किया जा रहा है। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि ये उपलब्धियाँ हमारे सामूहिक परिश्रम, समर्पण और साझेदारी का नतीजा हैं और कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का उद्देश्य मध्यप्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए प्रदेश को रोजगार का नया मानक बनाना है।  

अनुशासन और नेतृत्व निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल: द्वितीय सोपान टेस्टिंग कैंप सम्पन्न

अनुशासन, सेवा और नेतृत्व की ओर एक सशक्त कदम : द्वितीय सोपान टेस्टिंग कैंप का सफल आयोजन ग्वालियर पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 5, ग्वालियर में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के तत्वावधान में स्काउट–गाइड द्वितीय सोपान (Dwitiya Sopan) टेस्टिंग कैंप का सफल आयोजन दिनांक 19 एवं 20 दिसंबर 2025 को किया गया। यह द्विदिवसीय कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मनीष तिलक के मार्गदर्शन में हुआ। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने स्काउट–गाइड आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन, सेवा-भावना, नेतृत्व क्षमता एवं आत्मनिर्भरता जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने हेतु प्रेरित किया। इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान स्काउट एवं गाइड विद्यार्थियों को द्वितीय सोपान से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें प्रमुख रूप से— स्काउट–गाइड नियम एवं प्रतिज्ञा गांठें एवं बंधन प्राथमिक उपचार ध्वज शिष्टाचार टोली व्यवस्था सेवा एवं अनुशासन आधारित गतिविधियाँ शामिल रहीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन स्काउट मास्टर श्री मोहन दीक्षित एवं श्री शंकर लाल मीणा के निर्देशन में संपन्न हुआ। वहीं गाइड कैप्टन सुश्री प्रीति सिंह एवं सुश्री सुमन पाल ने गाइड विद्यार्थियों को पूर्ण निष्ठा, समर्पण एवं दक्षता के साथ प्रशिक्षण प्रदान किया। सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह एवं अनुशासन के साथ गतिविधियों में भाग लिया तथा स्काउट–गाइड के मूल सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती सुमन पाल द्वारा किया गया। समग्र रूप से यह आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सेवा-भावना, अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के विकास की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

मध्यप्रदेश में बड़ा बदलाव: 6 जिलों और 15 औद्योगिक क्षेत्रों को मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल किया जाएगा

भोपाल  भोपाल शहर को मेट्रोपॉलिटन रीजन (बीएमआर) में बदलने की तस्वीर साफ होते ही अब विकास को गति मिलेगी। एक ओर आर्थिक विकास तो दूसरी ओर करीब 10 लाख रोजगार पैदा होंगे। केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते दिन बीएमआर का मैप जारी किया। इसमें साफ हो गया कि करीब 12,099 वर्ग किमी में फैले बीएमआर में 6 जिलों के कुछ हिस्से शामिल होंगे। इनमें 12 नगरीय क्षेत्र, 30 तहसील व 2524 गांव शामिल होंगे। इसमें 15 बड़े औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ बड़ी संख्या में पर्यटन क्षेत्रों तक इसका विस्तार किया है। रोजगार के द्वार खुलेंगे इससे औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेगी और पर्यटन स्थल सीधे जुड़ेगे। हालांकि बीएमआर में शामिल 6 जिलों में से किसी भी जिले के सभी नगरों को शामिल नहीं किया है। इससे उन्हें ट्रांसपोर्टेशन और अन्य विकास कार्यों का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन यहां के लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे, क्योंकि इसमें शामिल नगरों में आइटी पार्क व स्पेशल इकोनोमिक जोन का विकास होगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल, रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, सीहोर, राजगढ़ व आसपास के कस्बों को मध्यभारत के प्रमुख आर्थिक केंद्र में बदलेगी। ये औद्योगिक क्षेत्र शामिल बीएमआर में गोविंदपुरा, अचारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, टेक्सटाइल पार्क, बगरौदा और आइटी पार्क शामिल हैं। सीहोर जिले के बड़ियाखेड़ी, बुधनी, औद्योगिक क्षेत्र और रायसेन जिले के आष्टा एग्रो प्रोसेसिंग, पचामा मंडीदीप व प्लास्टिक पार्क तामोट को शामिल किया है। नर्मदापुरम जिले के फूड पार्क बाबई और मोहासा बाबई एनर्जी पार्क व राजगढ़ के पीलूखेड़ी औद्योगिक और विदिशा का जांबर बांगरी औद्योगिक क्षेत्र को शामिल किया है। 6 से अधिक एमएसएमई के औद्योगिक पार्क और क्लस्टर शामिल हैं। इससे विनिर्माण, आइटी, लॉजिस्टिक्स, वस्त्र उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, आइटी, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण व पर्यटन क्षेत्रों में करीब 10 लाख रोजगार पैदा होंगे। मेट्रोपॉलिटन रीजन में निगम का नया सेटअप भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन संचालनालय ने एक कदम और आगे बढ़ाया है। संचालनालय ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र जारी कर शहर में मौजूद बीएमसी के सभी प्रकार के इंजीनियर्स की लिस्ट तैयार करने कहा है। इंजीनियर वर्ग को मेट्रोपॉलिटन रीजन में अलग-अलग जिम्मेदारी दी जानी हैं। एमपीआर में चार बिल्डिंग परमिशन सेल बनाई जानी है जिसके लिए सिविल कैडर से चार सिटी प्लानर बनेंगे। सीवेज, पार्किंग, रोड, ट्रैफिक, लाइटिंग जैसे कामों के लिए अलग-अलग कार्यपालन यंत्री निर्धारित किए जाएंगे जिनके निर्देशन में टीम काम करेगी। केबिनेट में होगी चर्चा अभी नगर 85 वार्ड में काम चलाऊ व्यवस्था पर टिका है। नगरीय प्रशासन विभाग के मसौदे पर केबिनेट में चर्चा होगी। मंजूरी मिलते ही इसे नए सिस्टम में शामिल कर लिया जाएगा। इसका सीधा फायदा नगर निगम के लंबित प्रोजेक्ट में तेजी आने के रूप में मिलेगा। नगर निगम में सीएम हेल्प लाइन की शिकायतों में एक बार फिर सबसे नीचे आया है। इसी प्रमुख वजह कम इंजीनियर, विकास कार्य ठप होने को माना जा रहा है। नगर परिषद की बैठक में पार्षदों ने इस बात को प्रमुख से सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया था।

1 जनवरी 2026 से बदल रहा छुट्टियों का पूरा कैलेंडर, एमपी में सिंगल फादर के लिए बड़ी राहत

भोपाल  प्रदेश सरकार ने 48 साल पुराने सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन कर दिया है। अब सरोगेट या कमीशनिंग मां (सरोगेसी के माध्यम से पैदा हुई संतान की मां) को मातृत्व और एकल (अकेले) पुरुष शासकीय सेवक को संतान पालन अवकाश मिलेगा। दत्तक संतान ग्रहण के लिए 15 दिन का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। शिक्षकों को प्रतिवर्ष 10 अर्जित अवकाश मिलेंगे तो सेवानिवृत्ति के बाद अवकाश नकदीकरण में जो अर्जित अवकाश बच जाते हैं, उनका भी नकदीकरण किया जाएगा। यह प्रविधान एक जनवरी 2026 से लागू होंगे। नए नियमों के मुताबिक अब बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना ज्यादा सुविधाजनक होगा, वहीं इनके दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा। सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन वित्त विभाग ने अवकाश नियम 2025 अधिसूचित कर दिए हैं। अर्जित अवकाश सेवाकाल में 300 दिन से अधिक नहीं होंगे। प्रदेश में मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 लागू था। इसमें वर्तमान स्थितियों को देखते हुए परिवर्तन किए गए हैं। इससे प्रदेश के साढ़े सात लाख नियमित कर्मचारी लाभान्वित होंगे। संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) प्रथम 365 दिन पूर्ण वेतन के साथ मिलेगी। जबकि, दूसरी बार में 80 प्रतिशत वेतन का भुगतान होगा। 18 वर्ष तक के बच्चे के लिए अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा। सरोगेट और सिंगल पिता को अवकाश अभी तक दो साल का अवकाश लेने तक वेतन कटौती का प्रविधान नहीं था लेकिन संशोधित नियम में रखा गया है। एक वर्ष में तीन बार से अधिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। एकल महिला को एक कैलेंडर वर्ष (एक जनवरी से 31 दिसंबर) में छह बार अवकाश की पात्रता रहेगी। दत्तक संतान ग्रहण अवकाश की पात्रता उस दत्तकग्राही मां को नहीं होगी, जिसकी दत्तक लेते समय एक से अधिक जीवित संतान हो। शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश नकदीकरण पितृत्व अवकाश पत्नी के प्रसव होने की संभावित तिथि के 15 दिन पूर्व या प्रसव की तारीख से छह माह तक की अवधि में 15 दिनों का स्वीकृत किया जा सकेगा। इस अवधि का वेतन मिलेगा। सरोगेसी के द्वारा जन्मे संतान के कमीशनिंग (वह पुरुष जो सरगोसी के माध्यम से संतान का पिता होता है) पिता को भी छह महीने के भीतर 15 दिनों का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। असाधारण अवकाश पर रहने किसी भी प्रकार के अवकाश वेतन की पात्रता नहीं रहेगी। इसके तहत चिकित्सकों को पीजी योग्यता प्राप्त करने के लिए 36 माह का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इससे सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा। इन पर लागू नहीं होंगे नियम आकस्मिक, दैनिक दर या अंशकालीन नियोजन में नियुक्त कर्मचारी- आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारी- कार्यभारित स्थापना में नियुक्त कर्मचारी- संविदा पर नियुक्त कर्मचारी जानिए नए नियमों के 10 बड़े बदलाव 1. साल की शुरुआत में ही खाते में आ जाएगी EL (अर्निंग लीव) यह सबसे बड़ा और सुविधाजनक बदलाव है। अभी तक अर्जित अवकाश (EL) साल भर की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी के खाते में दर्ज होता था। अब ऐसा नहीं होगा। 1 जनवरी को 15 EL: साल की शुरुआत में ही 15 दिन की EL खाते में क्रेडिट हो जाएगी। 1 जुलाई को 15 EL: साल के मध्य में फिर 15 दिन की EL जुड़ जाएगी। नए कर्मचारियों को भी फायदा: नई जॉइनिंग करने वाले कर्मचारी को भी जॉइनिंग के साथ ही आनुपातिक रूप से EL मिल जाएगी। यह सुविधा काम शुरू करने से पहले ही कर्मचारियों को अवकाश की सुरक्षा देगी। 2. शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी मिलेगी 10 दिन की EL अध्यापन कार्य में लगे सरकारी कर्मचारी, जिन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता है, उन्हें अभी तक अर्जित अवकाश की पात्रता नहीं थी। इससे उन्हें साल के बीच में जरूरी काम आने पर परेशानी होती थी। अब मिलेगा 10 दिन का अर्जित अवकाश: नए नियमों के तहत अब इन कर्मचारियों को भी साल में 10 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। 5 दिन की EL जनवरी में और 5 दिन की जुलाई में उनके खाते में जुड़ जाएगी। 4. ड्यूटी पर घायल होने पर 2 साल का विशेष अवकाश प्रदेश में कर्मचारियों और अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान बढ़ते हमलों और दुर्घटनाओं को देखते हुए यह विशेष प्रावधान किया गया है। स्पेशल मेडिकल लीव: यदि कोई कर्मचारी कर्तव्य पालन करते हुए हमले या दुर्घटना में घायल होता है, तो उसे मेडिकल ऑफिसर की अनुशंसा पर 2 साल तक का विशेष अवकाश मिल सकेगा। वेतन: इस अवकाश के पहले 180 दिनों में पूरा वेतन मिलेगा। शेष अवधि में आधा वेतन मिलेगा। कर्मचारी चाहे तो इस अवधि में अपनी EL समायोजित कराकर पूरा वेतन ले सकता है। यह छुट्टियां कर्मचारी के अवकाश खाते से नहीं काटी जाएंगी। 5. CL के साथ जुड़ जाएगी मेडिकल लीव अभी तक आकस्मिक अवकाश (CL) के तुरंत बाद मेडिकल लीव लेने पर तकनीकी समस्या होती थी। यदि कोई कर्मचारी बीमार होने पर 1-2 दिन की CL ले लेता है और बाद में उसे मेडिकल लीव की जरूरत पड़ती है, तो उसकी CL बर्बाद हो जाती थी। अब मिलेगी राहत: नए नियमों के तहत, कर्मचारी जॉइनिंग के 15 दिन के अंदर अपनी शुरुआती CL को मेडिकल लीव में बदलवा सकेगा। इससे उसकी CL बच जाएगी और पूरी छुट्टी मेडिकल लीव में गिनी जाएगी। 7. प्रोबेशनर्स के लिए भी स्पष्ट हुए छुट्टी के नियम अभी तक प्रोबेशन पीरियड में रहने वाले कर्मचारियों के लिए अवकाश के नियम स्पष्ट नहीं थे। अब मिलेगी पात्रता: नए नियमों में स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रोबेशनर्स को भी नियमानुसार अवकाश की पात्रता होगी। प्रशिक्षु कर्मचारियों को मेडिकल सर्टिफिकेट पर अधिकतम 1 महीने का अवकाश मिल सकेगा। 8. चाइल्ड केयर लीव: दूसरे साल 80% वेतन चाइल्ड केयर लीव के तहत 730 दिनों के अवकाश की पात्रता पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन वेतन के नियम में बदलाव किया गया है। पहले 365 दिन: पूरा वेतन मिलेगा। अगले 365 दिन: वेतन का 80 प्रतिशत भुगतान होगा। 10. अवकाश अधिकार नहीं, लेकिन मनमानी भी नहीं नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि अवकाश अधिकार नहीं है और इसे लोकहित में निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसका उद्देश्य कर्मचारियों के अवकाश के अधिकार को कम करना नहीं है। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न … Read more

1 जनवरी 2026 से बदल रहा छुट्टियों का पूरा कैलेंडर, एमपी में सिंगल फादर के लिए बड़ी राहत

भोपाल  प्रदेश सरकार ने 48 साल पुराने सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन कर दिया है। अब सरोगेट या कमीशनिंग मां (सरोगेसी के माध्यम से पैदा हुई संतान की मां) को मातृत्व और एकल (अकेले) पुरुष शासकीय सेवक को संतान पालन अवकाश मिलेगा। दत्तक संतान ग्रहण के लिए 15 दिन का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। शिक्षकों को प्रतिवर्ष 10 अर्जित अवकाश मिलेंगे तो सेवानिवृत्ति के बाद अवकाश नकदीकरण में जो अर्जित अवकाश बच जाते हैं, उनका भी नकदीकरण किया जाएगा। यह प्रविधान एक जनवरी 2026 से लागू होंगे। नए नियमों के मुताबिक अब बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना ज्यादा सुविधाजनक होगा, वहीं इनके दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा। सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन वित्त विभाग ने अवकाश नियम 2025 अधिसूचित कर दिए हैं। अर्जित अवकाश सेवाकाल में 300 दिन से अधिक नहीं होंगे। प्रदेश में मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 लागू था। इसमें वर्तमान स्थितियों को देखते हुए परिवर्तन किए गए हैं। इससे प्रदेश के साढ़े सात लाख नियमित कर्मचारी लाभान्वित होंगे। संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) प्रथम 365 दिन पूर्ण वेतन के साथ मिलेगी। जबकि, दूसरी बार में 80 प्रतिशत वेतन का भुगतान होगा। 18 वर्ष तक के बच्चे के लिए अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा। सरोगेट और सिंगल पिता को अवकाश अभी तक दो साल का अवकाश लेने तक वेतन कटौती का प्रविधान नहीं था लेकिन संशोधित नियम में रखा गया है। एक वर्ष में तीन बार से अधिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। एकल महिला को एक कैलेंडर वर्ष (एक जनवरी से 31 दिसंबर) में छह बार अवकाश की पात्रता रहेगी। दत्तक संतान ग्रहण अवकाश की पात्रता उस दत्तकग्राही मां को नहीं होगी, जिसकी दत्तक लेते समय एक से अधिक जीवित संतान हो। शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश नकदीकरण पितृत्व अवकाश पत्नी के प्रसव होने की संभावित तिथि के 15 दिन पूर्व या प्रसव की तारीख से छह माह तक की अवधि में 15 दिनों का स्वीकृत किया जा सकेगा। इस अवधि का वेतन मिलेगा। सरोगेसी के द्वारा जन्मे संतान के कमीशनिंग (वह पुरुष जो सरगोसी के माध्यम से संतान का पिता होता है) पिता को भी छह महीने के भीतर 15 दिनों का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। असाधारण अवकाश पर रहने किसी भी प्रकार के अवकाश वेतन की पात्रता नहीं रहेगी। इसके तहत चिकित्सकों को पीजी योग्यता प्राप्त करने के लिए 36 माह का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इससे सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा। इन पर लागू नहीं होंगे नियम आकस्मिक, दैनिक दर या अंशकालीन नियोजन में नियुक्त कर्मचारी- आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारी- कार्यभारित स्थापना में नियुक्त कर्मचारी- संविदा पर नियुक्त कर्मचारी जानिए नए नियमों के 10 बड़े बदलाव 1. साल की शुरुआत में ही खाते में आ जाएगी EL (अर्निंग लीव) यह सबसे बड़ा और सुविधाजनक बदलाव है। अभी तक अर्जित अवकाश (EL) साल भर की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी के खाते में दर्ज होता था। अब ऐसा नहीं होगा। 1 जनवरी को 15 EL: साल की शुरुआत में ही 15 दिन की EL खाते में क्रेडिट हो जाएगी। 1 जुलाई को 15 EL: साल के मध्य में फिर 15 दिन की EL जुड़ जाएगी। नए कर्मचारियों को भी फायदा: नई जॉइनिंग करने वाले कर्मचारी को भी जॉइनिंग के साथ ही आनुपातिक रूप से EL मिल जाएगी। यह सुविधा काम शुरू करने से पहले ही कर्मचारियों को अवकाश की सुरक्षा देगी। 2. शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी मिलेगी 10 दिन की EL अध्यापन कार्य में लगे सरकारी कर्मचारी, जिन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता है, उन्हें अभी तक अर्जित अवकाश की पात्रता नहीं थी। इससे उन्हें साल के बीच में जरूरी काम आने पर परेशानी होती थी। अब मिलेगा 10 दिन का अर्जित अवकाश: नए नियमों के तहत अब इन कर्मचारियों को भी साल में 10 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। 5 दिन की EL जनवरी में और 5 दिन की जुलाई में उनके खाते में जुड़ जाएगी। 4. ड्यूटी पर घायल होने पर 2 साल का विशेष अवकाश प्रदेश में कर्मचारियों और अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान बढ़ते हमलों और दुर्घटनाओं को देखते हुए यह विशेष प्रावधान किया गया है। स्पेशल मेडिकल लीव: यदि कोई कर्मचारी कर्तव्य पालन करते हुए हमले या दुर्घटना में घायल होता है, तो उसे मेडिकल ऑफिसर की अनुशंसा पर 2 साल तक का विशेष अवकाश मिल सकेगा। वेतन: इस अवकाश के पहले 180 दिनों में पूरा वेतन मिलेगा। शेष अवधि में आधा वेतन मिलेगा। कर्मचारी चाहे तो इस अवधि में अपनी EL समायोजित कराकर पूरा वेतन ले सकता है। यह छुट्टियां कर्मचारी के अवकाश खाते से नहीं काटी जाएंगी। 5. CL के साथ जुड़ जाएगी मेडिकल लीव अभी तक आकस्मिक अवकाश (CL) के तुरंत बाद मेडिकल लीव लेने पर तकनीकी समस्या होती थी। यदि कोई कर्मचारी बीमार होने पर 1-2 दिन की CL ले लेता है और बाद में उसे मेडिकल लीव की जरूरत पड़ती है, तो उसकी CL बर्बाद हो जाती थी। अब मिलेगी राहत: नए नियमों के तहत, कर्मचारी जॉइनिंग के 15 दिन के अंदर अपनी शुरुआती CL को मेडिकल लीव में बदलवा सकेगा। इससे उसकी CL बच जाएगी और पूरी छुट्टी मेडिकल लीव में गिनी जाएगी। 7. प्रोबेशनर्स के लिए भी स्पष्ट हुए छुट्टी के नियम अभी तक प्रोबेशन पीरियड में रहने वाले कर्मचारियों के लिए अवकाश के नियम स्पष्ट नहीं थे। अब मिलेगी पात्रता: नए नियमों में स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रोबेशनर्स को भी नियमानुसार अवकाश की पात्रता होगी। प्रशिक्षु कर्मचारियों को मेडिकल सर्टिफिकेट पर अधिकतम 1 महीने का अवकाश मिल सकेगा। 8. चाइल्ड केयर लीव: दूसरे साल 80% वेतन चाइल्ड केयर लीव के तहत 730 दिनों के अवकाश की पात्रता पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन वेतन के नियम में बदलाव किया गया है। पहले 365 दिन: पूरा वेतन मिलेगा। अगले 365 दिन: वेतन का 80 प्रतिशत भुगतान होगा। 10. अवकाश अधिकार नहीं, लेकिन मनमानी भी नहीं नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि अवकाश अधिकार नहीं है और इसे लोकहित में निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसका उद्देश्य कर्मचारियों के अवकाश के अधिकार को कम करना नहीं है। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न … Read more