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बड़वाह-धामनोद 4 लेन मार्ग मय पेव्हड शोल्डर के निर्माण कार्यों के लिए 2,508 करोड़ 21 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति

सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 अंतर्गत योजनाओं एवं कार्यक्रमों के लिए 5 वर्षों की निरंतरता की स्वीकृति मध्यप्रदेश धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जबलपुर के द्वितीय चरण के भवन निर्माण के लिए 197 करोड़ 13 लाख रूपये स्वीकृत तहसील स्तर पर स्वचालित मौसम केन्द्र एवं ग्राम पंचायत स्तर पर स्वचालित रेनगेज स्थापना के लिए 434 करोड़ 58 लाख रुपये स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक सोमवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा बड़वाह-धामनोद 4-लेन मार्ग मय पेव्हड शोल्डर (लंबाई 62.795 किमी) के साथ हाइब्रिड एज्युटी मॉडल के अंतर्गत भू-अर्जन सहित उन्नयन एवं निर्माण के लिए 2,508 करोड़ 21 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। परियोजना अंतर्गत 10 बायपास, 5 वृहद पुल, 23 मध्यम पुल, 12 VUP/SVUP, 7 वृहद जंक्शन एवं 56 मध्यम जंक्शन का निर्माण किया जायेगा। निर्माण की लागत का 40 प्रतिशत हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के अंतर्गत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से जीएसटी सहित वहन किया जाएगा। शेष 60 प्रतिशत राशि का प्रावधान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक 6 माही एन्युटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा। सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 अंतर्गत योजनाओं एवं कार्यक्रमो को आगामी 5 वर्षों की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 अंतर्गत योजनाओं एवं कार्यक्रमो को भारत सरकार द्वारा स्वीकृत मापदण्ड के अनुक्रम में 16वां वित्त आयोग निर्धारित अवधि वर्ष 2026-27 से 2030-31 में आगामी 05 वर्षों की निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस योजना में आंगनवाड़ी सेवा योजना (पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, शाला पूर्व शिक्षा, आंगनवाड़ी भवन निर्माण सक्षम आंगनवाड़ी सहित), पोषण अभियान, किशोरी बालिकाओं के लिए योजना, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण आदि सम्मिलित है। यह योजना प्रदेश के सभी 55 जिलों की 453 बाल विकास परियोजनाओं अंतर्गत 97 हजार 882 आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से संचालित की जाती है। मध्यप्रदेश धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जबलपुर के द्वितीय चरण के भवन निर्माण के लिए 197 करोड़ 13 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा मध्यप्रदेश धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जबलपुर के द्वितीय चरण के भवन निर्माण के लिए 197 करोड़ 13 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। द्वतीय चरण के अंतर्गत एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक, एकेडमिक ब्लॉक, कुलगुरु और कुल सचिव आवास तथा 12 मल्टीस्टोरी स्टाफ क्वार्टर्स, कैंपस बाउंड्रीवाल आदि का निर्माण किया जाएगा। इस विधि विश्वविद्यालय में BA LLB (Hons), LLB(Hons) एवं PhD पाठ्यक्रम में 1,272 सीट्स स्वीकृत हैं और वर्तमान में 720 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। तहसील स्तर पर स्वचालित मौसम केन्द्र एवं ग्राम पंचायत स्तर पर स्वचालित रेनगेज स्थापित के लिए 434 करोड़ 58 लाख रुपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के WINDS (वेदर इंर्फोमेशन नेटवर्क एंड डाटा सिस्टम) कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार प्रत्येक तहसील स्तर पर स्वचालित वेदर स्टेशन और ग्राम पंचायत स्तर पर स्वचालित रेनगेज स्थापित किए जायेंगे। मंत्रि-परिषद् ने इसके लिए 434 करोड़ 58 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। WINDS कार्यक्रम के संचालन से मौसम आधारित आंकडे उपलब्ध होंगे, जिससे प्रदेश के कृषकों के हित में फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन तेज गति से किया जा सकेगा। मौसम के उच्च गुणवत्ता आंकड़े एकल डिजिटल प्लेटफार्म पर भारत सरकार को उपलब्ध कराए जाएँगे। पाँच वर्षों की योजना पर अनुमानित व्यय 434 करोड़ 58 लाख रुपये संभावित है।  

मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया

मध्यप्रदेश को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ वेस्टर्न रीजन में सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस के लिए एमपी ट्रांसको को मिला सम्मान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने दी बधाई भोपाल  मध्यप्रदेश ने विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) को वेस्टर्न रीजन में सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस दर्ज करने के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर एमपी ट्रांसको के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पुरस्कार प्रदेश की मजबूत ट्रांसमिशन व्यवस्था, तकनीकी दक्षता और सतत सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम ट्रांसमिशन लॉस के साथ निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त इस प्रतिष्ठित मंच से एमपी ट्रांसको की ओर से कार्यपालन अभियंता लोकेश द्विवेदी ने यह सम्मान प्राप्त किया। मूल्यांकन का आधार पुरस्कार के लिए यूटिलिटीज़ का चयन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) के डेटा तथा विभिन्न राज्य विद्युत कंपनियों की आधिकारिक रिपोर्टों के आधार पर किया गया। अवॉर्ड की श्रेणियों में सबसे अधिक लाइन लेंथ मे वृद्धि, ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी में वृद्धि, बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस जैसे महत्वपूर्ण मानक शामिल रहे। ट्रांसटेक इंडिया–2025 में हुआ सम्मान यह सम्मान नई दिल्ली स्थित यशोभूमि इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर, द्वारका में आयोजित ‘ट्रांसटेक इंडिया–2025’ कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदान किया गया। यह कॉन्फ्रेंस विद्युत मंत्रालय से मान्यता प्राप्त एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच है, जहां नीति निर्माता, रेगुलेटरी संस्थाएं, डेवलपर्स, मैन्युफैक्चरर्स और ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर्स आपसी समन्वय के साथ भाग लेते हैं। इस आयोजन में देशभर से 2500 से अधिक ट्रांसमिशन यूटिलिटीज़ के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।  

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: टाइगर रिज़र्व में रिसॉर्ट्स और होटलों में नए साल पर अलाव पर रोक

भोपाल सुप्रीम कोर्ट ने वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए कोर एरिया में मोबाइल फोन के बाद अब टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के आसपास के इलाकों में लकड़ी के 'अलावा' जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। PCCF स्तर से इस आशय का आदेश जारी किया गया है। जानकारी अनुसार मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ शुभ रंजन सेन ने प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क व वन्य प्राणी अभयारण्य के लिए आदेश जारी किया है, जिसमें उल्लेख है कि इनके आसपास लकड़ी के 'अलाव' जलाना प्रतिबंधित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में यह आदेश दिया गया गया है। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि ईको सेंसिटिव जोन में होटल, रिसोर्ट और बिजनेस सेंटर्स में लकड़ी के अलाव नहीं जलाए जा सकेंगे। यहां लकड़ी जलाने पर पूरी तरह मनाही है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कमर्शियल उपयोग के लिए फायरवुड जलाने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें पर्यटकों के नाम पर व्यावसायिक सेंटर में होने वाले आयोजनों में अलाव भी प्रतिबंधित रहेगा। किचिन में भी लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाएगा। प्रदेश में टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वन्य प्राणी अभयारण्य के अधिकारियों को इसके उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। क्रिसमस और न्यू ईयर पार्टियों में खूब अलाव जलते हैं बता दें कि क्रिसमस और न्यू ईयर के मौके पर टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क के अधीन बने होटल-रिसोर्ट में विशेष आयोजन रखे जाते हैं, पार्टियों का भव्य आयोजन होता है। इसमें अलाव भी खूब जलाए जाते हैं। लेकिन अब प्रतिबंध के बाद लकड़ी नहीं जलाई जा सकेगी।

भोपाल में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना: NHAI ने जताई जन-सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता

भोपाल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को सुरक्षित, सुगम एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। NHAI का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित न होकर आम नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं निर्बाध आवागमन उपलब्ध कराना है, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो तथा आर्थिक एवं सामाजिक विकास को गति मिले। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहरी विस्तार, नए आवासीय क्षेत्रों के विकास तथा यातायात गतिविधियों में निरंतर वृद्धि के साथ एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। इस परिप्रेक्ष्य में शहर की प्रमुख सड़कों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी दिशा में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना एक महत्वपूर्ण एवं आवश्यक पहल है। वर्तमान में अयोध्या बायपास की यातायात वहन क्षमता लगभग 40,000 वाहनों प्रतिदिन है, जबकि इस मार्ग पर वर्तमान में ही लगभग 45,000 वाहन प्रतिदिन आवागमन कर रहे हैं। आसपास विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों से यातायात सीधे मुख्य मार्ग पर आने के कारण इस खंड पर यातायात दबाव बढ़ता जा रहा है तथा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इस मार्ग पर वर्तमान में तीन ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं। यह परियोजना आम नागरिकों के लिए क्यों आवश्यक है ? * अयोध्या बायपास पर चिन्हित तीन प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं निराकरण किया जा रहा है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी एवं जन-सुरक्षा सुनिश्चित होगी। * सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे कॉलोनियों से आने-जाने वाले स्थानीय वाहनों को पृथक मार्ग उपलब्ध होगा और मुख्य कैरिज-वे पर यातायात दबाव कम होगा। * पूरे बायपास को छह लेन में विकसित किया जा रहा है। इसका डिज़ाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह वर्ष 2050 तक के अनुमानित यातायात दबाव को सुचारु रूप से संभाल सके। * बेहतर एवं चौड़ी सड़क उपलब्ध होने से यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत तथा प्रदूषण में कमी आएगी। * उन्नत लेआउट एवं सुरक्षित डिज़ाइन से वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आएगी।  पर्यावरण संरक्षण के प्रति NHAI की संवेदनशीलता एवं ठोस पहल  NHAI का यह प्रयास केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास एवं पर्यावरण संतुलन को समान प्राथमिकता देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्राधिकरण प्रारंभ से ही ग्रीन हाईवे की अवधारणा में विश्वास रखता है। परियोजना के अंतर्गत जिन वृक्षों की कटाई प्रस्तावित है, उनमें से लगभग 5,000 वृक्ष टिम्बर श्रेणी के हैं। वृक्ष कटाई के विकल्पों एवं प्रतिपूरक उपायों के संबंध में केंद्रीय अधिकार समिति (CEC) को NHAI द्वारा विभिन्न विकल्प प्रस्तुत किए गए हैं।  प्रतिपूरक,विकल्प एवं अतिरिक्त पौधारोपण के प्रमुख बिंदु :  * वृक्ष कटाई के प्रतिपूरक उपाय के रूप में कुल 81,000 पौधों का रोपण किया जाएगा। * ये पौधे भोपाल शहर एवं इसके आसपास विभिन्न चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे। * अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना के साथ-साथ 10,000 पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत एवेन्यू प्लांटेशन का पुनः सघनीकरण (Re-densification) किया जाएगा, जिसमें छायादार, फलदार एवं शेड-बेयरिंग प्रजातियों के वृक्ष दोनों ओर रोपे जाएंगे। * इन सभी पौधों की 15 वर्षों तक देखरेख, संरक्षण एवं अनुरक्षण की पूर्ण जिम्मेदारी NHAI द्वारा वहन की जाएगी, जिस पर लगभग ₹20 करोड़ का अनुमानित व्यय प्रस्तावित है। इस संबंध में केंद्रीय अधिकार समिति को पूर्व में अवगत कराया जा चुका है। * इसके अतिरिक्त, नगर निगम के सहयोग से 10,000 अतिरिक्त पौधों का रोपण किया जाएगा। नगर निगम द्वारा NHAI को विभिन्न पार्क, रिक्त भूमि एवं सड़क किनारे की उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां स्थानीय, छायादार एवं उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।  झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में वृहद पौधारोपण :  * पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत, भोपाल जिला प्रशासन द्वारा झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराई गई है। * यह भूमि राजस्व वन (Revenue Forest) की है, जो वर्तमान में रिक्त अवस्था में है। * यहां 61,000 से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा तथा इस क्षेत्र को विकसित वन क्षेत्र (Developed Forest Area) के रूप में विकसित किया जाएगा। * इस संबंध में भी केंद्रीय अधिकार समिति को जानकारी प्रदान की जा चुकी है। समिति के निर्देशानुसार जून 2026 तक सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली जाएंगी, ताकि अगले मानसून  के दौरान पौधारोपण कार्य समयबद्ध रूप से किया जा सके। NHAI यह भी स्पष्ट करता है कि वृक्षों की कटाई को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से परियोजना के डिज़ाइन में आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिससे पहले की तुलना में कम वृक्षों की कटाई की जा रही है। यह सीमित कटाई यातायात एवं सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के दृष्टिगत आवश्यक है।  पूर्व में किए गए पौधारोपण कार्य  यह उल्लेखनीय है कि NHAI निरंतर पौधारोपण करता रहा है और इसे अपनी सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी मानता है। पिछले मानसून सत्र में भोपाल के समीप झिरनिया ग्राम के पास सोनकच्छ टोल प्लाज़ा क्षेत्र में लगभग 50,000 पौधे मियावाकी तकनीक से लगाए गए, जो वर्तमान में 10–12 फीट तक विकसित हो चुके हैं। यह पौधारोपण कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन का भाग नहीं, बल्कि ग्रीन हाईवे पहल के अंतर्गत NHAI की नियमित जिम्मेदारी के तहत किया गया था। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि NHAI पर्यावरण संरक्षण को केवल नीतिगत स्तर पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी प्रभावी रूप से लागू करता है। NHAI यह स्पष्ट करता है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना की योजना बनाते समय हरित आवरण का विकास प्राधिकरण की प्राथमिकता होती है। परियोजना के क्रियान्वयन से पूर्व एवं उसके साथ-साथ अफॉरेस्टेशन, पौधारोपण एवं हरियाली विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। NHAI का मानना है कि सड़क विकास के साथ-साथ ग्रीन हाईवे का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे। NHAI आम नागरिकों को आश्वस्त करता है कि अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना को पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है, जिससे जन-सुरक्षा सुनिश्चित हो, यात्रा सुगम बने, समय की बचत हो और पर्यावरण संरक्षित रहे।

नितिन नवीन बने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, सीएम मोहन यादव ने किया स्वागत और बधाई

भोपाल  मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की है। साथ ही सीएम ने उन्हें यशस्वी कार्यकाल के लिए बधाई भी दी है। नितिन नवीन के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सीएम मोहन यादव की यह पहली मुलाकात है। इस मुलाकात को लेकर सीएम ने एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए जानकारी दी है। मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी में यह एक नए दौर की शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने नई पीढ़ी को अवसर दिया है। भारत युवाओं का देश है और विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष यदि युवा बनता है, तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है और उसी दिशा में मध्यप्रदेश भी सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस दौरान सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं, केंद्रीय विधि एवं न्याय और संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल से भी सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात की है।  

नया हवाई कनेक्शन: इंदौर-रीवा फ्लाइट आज से शुरू, पहले दिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हुए सवार

इंदौर/रीवा    रीवा से अब इंदौर का सफर तय करने के लिए 15 घंटे नहीं, बल्कि 2 घंटे ही लगेंगे. क्योंकि, इंदौर से रीवा के बीच सीधी फ्लाइट सेवा शुरू हो चुकी है. सोमवार को पहली फ्लाइट उड़ी. ऐसे में विंध्य क्षेत्र के लोगों के लिए यह बड़ी सौगात मानी जा रही है. इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट इंदौर से रीवा के बीच उड़ेगी, जहां पहले ही दिन फ्लाइट पूरी तरह फुल थी. माना जा रहा कि यह फ्लाइट सफल रहेगी, क्योंकि रीवा से इंदौर के बीच बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं. इंदौर से रीवा के बीच सीधी फ्लाइट का किराया 4700 रुपये रखा गया है. यह विमान 70 सीटर है, जिसके लिए बुकिंग लगातार चल रही है. क्योंकि रीवा से सतना, सीधी, सिंगरौली के साथ-साथ मैहर जाना भी आसान होगा. यहां के लोग भी रीवा से आसानी से आ जा सकते हैं. रीवा से इंदौर के बीच लंबे समय से सीधी उड़ान की मांग चल रही थी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है. अब तक प्रदेश में इंदौर से जबलपुर के बीच ही सीधी फ्लाइट चलती थी, लेकिन अब रीवा ऐसा दूसरा जिला बन गया है, जिसके लिए इंदौर से सीधी प्लाइट सेवा शुरू हो गई है. विंध्य के विकास की नई उड़ान रीवा एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय ने इस उपलब्धि को विंध्य क्षेत्र के व्यापार, शिक्षा और विकास की एक बड़ी छलांग बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विमान का आगमन नहीं है, बल्कि यह रीवा के लिए "लक्ष्मी" लेकर आया है। इंदौर, जो मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी है, अब सीधे रीवा से जुड़ गया है, जिससे पूरे विंध्य क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा। जानें फ्लाइट का शेड्यूल रीवा से इंदौर के बीच चलने वाली सीधी फ्लाइट का शेड्यूल कुछ ऐसा रहेगा. सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर इंदौर से रीवा के लिए 6E 7363 फ्लाइट उड़ान भरेगी. यह फ्लाइट दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर रीवा पहुंच जाएगी. वहीं, वापसी में रीवा से दोपहर 1 बजकर 35 मिनट पर फ्लाइट 6E 7364 इंदौर के लिए उड़ान भरेगी और 3 बजकर 25 मिनट पर इंदौर पहुंच जाएगी. कैलाश विजयवर्गीय ने क्षेत्रीय नेता राजेंद्र शुक्ल और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें "जिद्दी नेता" बताया, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इस परियोजना को धरातल पर उतारा। उन्होंने कहा कि विंध्य अब "टेक ऑफ" कर रहा है और हवाई सेवा शुरू होने से क्षेत्र की प्रगति की गति कई गुना बढ़ जाएगी। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा इस हवाई सेवा का सबसे बड़ा लाभ धार्मिक पर्यटन को मिलेगा। कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि अब श्रद्धालु मैहर में शारदा माता के दर्शन और चित्रकूट में भगवान राम की तपोस्थली की परिक्रमा आसानी से कर सकेंगे। साथ ही, विंध्य के लोग भी अब उज्जैन के महाकाल, ओंकारेश्वर, मांडव और महेश्वर जैसे मालवा के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक सुगमता से पहुँच पाएंगे। यह सेवा माता शारदा और भगवान भोलेनाथ के भक्तों को जोड़ने का एक सेतु बनेगी। हवाई चप्पल वाले भी अब हवाई जहाज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में घूमे" के विजन को चरितार्थ करते हुए, इस पहली उड़ान में 40 ऐसे बुजुर्गों और नागरिकों को लाया गया जिन्होंने कभी विमान की यात्रा नहीं की थी। बुजुर्ग यात्रियों ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे अपने जीवन में हवाई जहाज में बैठ पाएंगे । भविष्य की संभावनाएं और वैश्विक कनेक्टिविटी राजेंद्र शुक्ल ने इस अवसर पर बताया कि रीवा एयरपोर्ट का निर्माण एक लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 12 साल पहले जब उन्होंने इसके लिए पत्र लिखा था, तब इसे असंभव माना जाता था । लेकिन अब यह सपना हकीकत है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रीवा की कनेक्टिविटी अब केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। इंडिगो की वेबसाइट पर अब रीवा से सीधे सिंगापुर, दुबई और मैनचेस्टर जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों की बुकिंग की संभावनाएं भी दिखने लगी हैं। आने वाले समय में यहां से बॉम्बे, हैदराबाद, अहमदाबाद और चेन्नई जैसे शहरों के लिए भी 4-5 घंटे के भीतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इस हवाई सेवा की शुरुआत से न केवल व्यापार और पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विंध्य अब हिंदुस्तान के सबसे विकसित इलाकों में शामिल होने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है। 70 सीटर विमान, 4700 रुपए किराया यह फ्लाइट 70 सीटर विमान से संचालित की जा रही है। इसका किराया करीब 4700 रुपए रखा गया है। इस हवाई सेवा से केवल रीवा ही नहीं, बल्कि सतना, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, मऊगंज और मैहर जैसे विंध्य क्षेत्र के अन्य जिलों को भी सीधा लाभ मिलेगा। अब तक इंदौर से प्रदेश में केवल जबलपुर के लिए सीधी उड़ान थी, अब रीवा दूसरी सीधी प्रादेशिक हवाई सेवा बन गई है। लोगों में दिखा काफी उत्साह फ्लाइट के शुरू होने से इंदौर और रीवा के लोगों में भी खुशी देखी जा रही है. क्योंकि दोनों शहर व्यापारिक तौर पर भी जुड़े हैं, जबकि दोनों शहरों में बड़ी संख्या में लगातार यात्रा करने वाले लोग रहते हैं. ऐसे में विंध्य अंचल के लिए यह बड़ी सौगात मानी जा रही है. माना जा रहा है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने पर फ्लाइट की संख्या बढ़ाई जा सकती है. फिलहाल, दोनों शहरों के बीच सीधी फ्लाइट सेवा शुरू होना बड़ी सौगात मानी जा रही है. लोगों में फ्लाइट को लेकर काफी उत्साह है. यात्रियों के उत्साहवर्धन के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी रीवा-इंदौर की बीच उड़े पहले विमान में यात्रा की. ये रहेगा फ्लाइट का शेड्यूल     इंदौर से रीवा (6E 7363): सुबह 11:30 बजे रवाना, दोपहर 1:15 बजे आगमन।     रीवा से इंदौर (6E 7364): दोपहर 1:35 बजे रवाना, शाम 3:25 बजे आगमन। डिप्टी सीएम बोले- विकास को मिलेगी नई दिशा डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि यह पल सपने को साकार करने जैसा है। रीवा इंदौर फ्लाइट शुरू होने से न केवल इंदौर बल्कि बेंगलुरु,मुंबई अहमदाबाद,कलकत्ता और चेन्नई जैसे शहरों से भी कनेक्टिविटी काफी बढ़ जाएगी। इंडिगो का नेटवर्क विदेशों में भी है,जिससे धीरे-धीरे कनेक्टिविटी बढ़ती चली जाएगी। पहले … Read more

जुन्नारदेव में दुर्लभ घटना: महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म, जिला अस्पताल में तैयारियां शुरू

छिंदवाड़ा  जुन्नारदेव में प्रसूति का एक दुर्लभ केस हुआ। यहां एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया। इनमें एक बेटा और तीन बेटियां हैं। प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव में यह दुर्लभ मामला सामने आया। जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं हालांकि उन्हें बेहतर देखभाल के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। चारों बच्चे को अभी छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एसएनसीयू में रखने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि महिला ने सरकारी अस्पताल में सामान्य डिलीवरी में इन चारों को जन्म दिया। जुन्नारदेव के सिविल अस्पताल में यह अनोखा प्रसव हुआ। यहां एक आदिवासी महिला ने एक साथ एक बेटा और तीन बेटियों को जन्म दिया। प्रसूता और चारों बच्चों की हालत भी सामान्य है। एक साथ चार बच्चों की किलकारियां सुनकर परिवार के लोगों के साथ ही अस्पताल में उपस्थित अन्य लोगों ने भी खुशी जाहिर की। जुन्नारदेव सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स ने बताया कि बरेलीपार निवासी महिला प्रसव के लिए यहां आई थी। प्रसूता की नॉर्मल डिलीवरी 28 वर्षीय महिला कुन्नू इवनाती ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया। डॉक्टर्स ने बताया कि बरेलीपार निवासी प्रसूता ने नॉर्मल डिलीवरी के बाद एक बेटे और तीन बेटियों को जन्म दिया है। चारों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य और खतरे से बाहर प्रसव के बाद बेहतर देखभाल के लिए चारों नवजातों को जुन्नारदेव सिविल अस्पताल से छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के लिए रिफर किया गया है। तीन 108 एम्बुलेंस की मदद से जच्चा बच्चा को जिला अस्पताल ले जाया गया है। वर्तमान में चारों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य और खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, जिन्हें डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है। सभी को जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करने की प्रक्रिया चल रही है।

भोपाल मेट्रो: एक गलती पर 10 हजार का जुर्माना, स्टेशन और ट्रेन में थूकने पर 200 का फाइन

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आमजन के लिए शुरु हुई मेट्रो ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेल प्रबंधन की ओर से सख्त गाइडलाइन जारी की गई है। आप में से कई लोग जानतें होंगे कि, जिस तरह हवाई यात्रियों के लिए नियम होते हैं, करीब-करीब वैसे ही नियम भोपाल मेट्रो के लिए भी लागू होंगे। ऐसे में शहरवासियों से अपील है कि, मेट्रो में यात्रा करने से पहले इन नियमों को जान लें वरना छोटी से चूक भी बड़ी भारी पड़ सकती है। मेट्रो रेल प्रबंधन की ओर से जारी गइडलाइन के अनुसार, कोई भी यात्री मेट्रो में पालतू पशु या पक्षी साथ लेकर सफर नहीं कर सकेगा। ऐसे में बेवजह इमरजेंसी बटन दबाने वाले को 10 हजार रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यात्री अपने साथ पेट्रोल-डीजल, हथियार, खुले बीड़ी-सिगरेट, माचिस-लाइटर, गुटखा, तंबाकू, सूखा नाश्ता भी नहीं ले जा सकते। मोबाइल या स्मार्ट वॉच ले जाने की परमिशन तो है, लेकिन ड्रोन, सैटेलाइट फोन, पोर्टेबल और रेडियो संचार उपकरण, कैमरा आदि ले जाना वर्जित है। मेट्रो में ये काम करना पड़ेगा भारी अगर आप मेट्रो में सफर कर रहे हैं, तो सबसे पहले ये समझ लीजिए कि थूकना या कचरा फेंकना अब सीधे जेब पर भारी पड़ेगा. प्लेटफॉर्म या ट्रेन के अंदर गंदगी फैलाने पर जुर्माना तय किया गया है. मेट्रो प्रशासन का साफ कहना है कि सार्वजनिक परिवहन को साफ रखना यात्रियों की भी जिम्मेदारी है. ये खेल उपकरण पैक कर ले जा सकेंगे मेट्रो में सफर करने वाले यात्री तीरंदाजी, मार्शल आर्ट, तलवारबाजी या नानचाकू जैसे खेल उपकरण सक्रिय खिलाड़ी या संचालक की अनुमति से ढककर या पैक कर ले जा सकते हैं। पेट्स के साथ नो एंट्री अब आप पालतू जानवर (Pets) के साथ मेट्रो में सफर नहीं कर सकेंगे. चाहे छोटा डॉग हो या कोई और पेट, मेट्रो ट्रेन में उन्हें ले जाने की अनुमति नहीं होगी. नियम का उल्लंघन करने पर कार्रवाई तय है. ये सामान ले गए तो पकड़े जाएंगे मेट्रो में सफर के दौरान कई चीजों पर पूरी तरह पाबंदी है. सभी 8 स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों से नजर भोपाल में मेट्रो का प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स तक है। इस दौरान कुल 8 स्टेशन- सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स हैं। इन सभी स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो यात्रियों पर नजर रखे हुए हैं। मेट्रो ट्रेन में भी सीसीटीवी सर्विलांस है। हर हरकत कैमरे में कैद हो रही है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की सिक्योरिटी कंपनी के ढाई सौ गार्ड भी तैनात किए गए हैं। पहले और दूसरे दिन कुछ यात्रियों ने गार्ड्स के गलत व्यवहार की शिकायत भी मेट्रो अफसरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की है। 25 किलो वजनी सामान ही ले जा सकेंगे यात्री संक्रामक रोग से ग्रसित व्यक्ति, मानसिक रूप से परेशान और असंयमी, शराबी पैसेंजर सफर नहीं कर सकेगा। विमान की तरह ही इसमें सामान लेजाने का नियम निर्धारित किा गया है। एक यात्री मेट्रो में अधिकतम 25 किलो वजन का सामान ही ले जा सकता है। इसी तरह स्टेशन परिसर या मेट्रो ट्रेन के भीतर थूकने वाले पर 200 रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। इनमें शामिल हैं पेट्रोल और डीजल, हथियार, माचिस और ज्वलनशील पदार्थ, गुटखा, पान, तंबाकू, खाने-पीने का सामान और नाश्ता. सुरक्षा के लिहाज से इन चीजों को खतरनाक माना गया है, इसलिए चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर जुर्माना या कार्रवाई हो सकती है. इमरजेंसी बटन से मजाक पड़ेगा भारी अगर किसी ने बेवजह इमरजेंसी बटन दबाया, तो सीधे 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. यह बटन सिर्फ आपात स्थिति के लिए है, न कि मजाक या प्रयोग के लिए. प्रशासन का कहना है कि फर्जी अलर्ट से यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. हर हरकत पर CCTV की नजर मेट्रो स्टेशन और ट्रेन के अंदर CCTV कैमरों से 24×7 निगरानी की जा रही है. हर गतिविधि रिकॉर्ड हो रही है, इसलिए नियम तोड़कर बच निकलना अब आसान नहीं होगा. क्यों जरूरी हैं ये नियम? मेट्रो प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का मकसद यात्रियों को परेशान करना नहीं, बल्कि सुरक्षित, साफ और अनुशासित सफर देना है. नियम मानेंगे तो सफर आसान और आरामदायक रहेगा, वरना चालान और कार्रवाई तय है.

हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस सुरक्षा में पत्नी को पति के घर भेजा, मायके वालों से मुक्त कराया

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महिला को उसके परिवार से सुरक्षा देते हुए पति के घर पहुंचाने का आदेश दिया है। यह फैसला छिंदवाड़ा की एक महिला के मामले में आया, जिसने अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई लेकिन परिवार के हस्तक्षेप का डर भी जताया। उसके पति ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कहा था कि उसकी पत्नी को बंधक बनाया गया है। महिला को कोर्ट में पेश करने के आदेश जस्टिस विवेक अग्रवाल और राम कुमार चौबे की बेंच ने महिला को कोर्ट में पेश करने के बाद यह आदेश दिया। महिला ने कहा कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है, लेकिन उसे डर है कि उसके परिवार वाले उनकी जिंदगी में 'अनुचित और अवैध हस्तक्षेप' कर सकते हैं। इसलिए उसने पुलिस सुरक्षा मांगी। कोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे महिला को सुरक्षित रूप से उसके पति के घर, जो कि सीहोर जिले में है, पहुंचाएं। साथ ही, सीहोर के एसपी को जोड़े की सुरक्षा का जायजा लेने और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का भी आदेश दिया। कोर्ट ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा, 'महिला की दलीलों को सुनने और यह संतुष्ट होने के बाद कि वह वयस्क है, जैसा कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी सबूतों से पुष्टि होती है, हम पुलिस कर्मियों से अनुरोध करते हैं जिन्होंने बंदी को लाया है, उसे सुरक्षित हिरासत में याचिकाकर्ता के घर ले जाएं, क्योंकि शादी विधिवत पंजीकृत है और वे विधिवत विवाहित पति-पत्नी हैं।' एसपी को दिए आदेश कोर्ट ने आगे कहा, 'हम सीहोर के अधीक्षक पुलिस से भी अनुरोध करते हैं कि वे खतरे की आशंका का परीक्षण करें और उचित सुरक्षा प्रदान करें और सीहोर के संबंधित पुलिस स्टेशन बारघाट को निर्देश दें कि जब भी याचिकाकर्ता या बंदी किसी अनुचित घटना की रिपोर्ट करें, तो पुलिस स्टेशन बारघाट, सीहोर को उचित संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और उनके मामले को सहानुभूतिपूर्वक निपटाना चाहिए।'

7 समंदर पार कर ओरछा पहुंचे स्पेन के जोड़े ने वैदिक रीतियों से किया विवाह, बतेश्वर मंदिर में हुई पूजा

निवाड़ी मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन नगर ओरछा में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। स्पेन से आए विदेशी जोड़े ने सात समंदर पार कर हिन्दू वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार बतेश्वर मंदिर में विवाह रचाया। स्पेन निवासी 54 वर्षीय चीरो और 50 वर्षीय ऑडरा लंबे समय से एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन दोनों की दिली इच्छा थी कि उनका विवाह भारतीय सनातन परंपराओं के अनुसार हो। इसी भावना के चलते उन्होंने रामराजा की नगरी ओरछा को अपनी शादी के लिए चुना। बतेश्वर मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंडितों द्वारा पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न कराया गया। जयमाला, सप्तपदी और अन्य सभी रस्में पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से निभाई गईं। पीले जोड़े में सजी दुल्हन ऑडरा और सेहरे से सजे दूल्हा चीरो भारतीय विवाह की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर रहे थे, जो मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे। शादी के दौरान मंदिर में उपस्थित लोगों ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया। वैदिक मंत्रों की गूंज और सनातन संस्कारों के बीच विदेशी जोड़े ने सात जन्मों तक पति-पत्नी के रूप में साथ निभाने की शपथ ली। विवाह के बाद दूल्हा- दुल्हन ने कहा कि वे हिन्दू संस्कृति, वैदिक परंपराओं और भारतीय संस्कारों से अत्यंत प्रभावित हैं। उन्होंने रामराजा सरकार से सात जन्मों तक सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद लिया। जोड़े ने कहा, “रामराजा की नगरी में एक-दूसरे का हाथ थामने की हमारी अभिलाषा आज पूरी हो गई।” विदेशी जोड़े को पूरा विश्वास है कि सनातन संस्कारों से प्रेरित यह वैदिक पाणिग्रहण संस्कार उनका दांपत्य जीवन अटल और सफल बनाएगा। यह विवाह न केवल प्रेम की, बल्कि भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता की भी एक सुंदर मिसाल बन गया।