samacharsecretary.com

डुमना एयरपोर्ट पर आज आएंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव, ट्रांजिट विजिट का कार्यक्रम तय

जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आज रविवार 7 दिसम्बर को ट्रांजिट विजिट पर डुमना एयरपोर्ट जबलपुर आगमन होगा। मुख्यमंत्री मंत्री डॉ यादव दोपहर 2.35 बजे भोपाल से वायुयान द्वारा डुमना एयरपोर्ट आयेंगे और और दोपहर 2.40 बजे हेलीकॉप्टर से बालाघाट प्रस्थान करेंगे। आप दोपहर 3.20 बजे बालाघाट पहुँचेंगे और वहाँ स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम 4.20 बजे हेलीकॉप्टर द्वारा वापस डुमना एयरपोर्ट जबलपुर के लिये रवाना होंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शाम 5 बजे डुमना एयरपोर्ट पहुँचेंगे तथा शाम 5.05 बजे यहाँ से वायुयान द्वारा भोपाल प्रस्थान करेंगे।

रेलवे का इंतजाम: 7 व 9 दिसंबर को गोरखपुर–लोकमान्य तिलक स्पेशल ट्रेन

भोपाल यात्रियों की बढ़ती भीड़ और मांग को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने गोरखपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह स्पेशल ट्रेन 07 दिसंबर 2025 को गोरखपुर से तथा 09 दिसंबर 2025 को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से संचालित होगी। ट्रेन मंडल के महत्वपूर्ण स्टेशनों- बीना, रानी कमलापति और इटारसी- से होकर गुजरेगी, जिससे मध्यप्रदेश के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने वाली है। स्पेशल ट्रेन संख्या 05587 गोरखपुर-एलटीटी 07 दिसंबर को रात 23.25 बजे गोरखपुर से रवाना होगी। यह दूसरे दिन बस्ती, गोंडा, गोमतीनगर, ऐशबाग, कानपुर, उरई और झांसी होते हुए शाम 16.40 बजे बीना, 19.25 बजे रानी कमलापति, 21.12 बजे इटारसी पहुंचेगी। इसके बाद खंडवा, भुसावल और नासिक रोड से गुजरते हुए तीसरे दिन सुबह 09.00 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।   वापसी में गाड़ी संख्या 05588 एलटीटी-गोरखपुर 09 दिसंबर को सुबह 11.00 बजे प्रस्थान करेगी। यह कल्याण, इगतपुरी, नासिक रोड, भुसावल और खंडवा से होते हुई दूसरे दिन तड़के 00.25 बजे इटारसी, 02.40 बजे रानी कमलापति और 04.50 बजे बीना पहुंचेगी। इसके बाद झांसी, कानपुर, ऐशबाग, गोंडा और बस्ती से गुजरते हुए शाम 20.15 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। इस विशेष ट्रेन में कुल 21 कोच लगाए जाएंगे, जिनमें प्रथम एवं द्वितीय वातानुकूलित, तृतीय एसी, स्लीपर और साधारण कोच शामिल हैं। रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे ट्रेन के ठहराव, समय और संरचना संबंधी विस्तृत जानकारी www.enquiry.indianrail.gov.in पर प्राप्त कर सकते हैं।

पेयजल संकट से मिली राहत: बोंदर गांव में शुरू हुई नल जल आपूर्ति, ग्रामीणों के खिले चेहरे

डिंडोरी  मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को साकार कर रही है। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को नल से शुद्ध जल उपलब्ध कराया जा रहा है। डिंडोरी जिले के बोंदर गांव में जल जीवन मिशन से बड़ा बदलाव आया है। इस बदलाव से ग्रामीण बहुत खुश नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पहले यह गांव दूर पानी के स्रोतों पर निर्भर था और गर्मियों में पानी की भारी किल्लत झेलता था, लेकिन अब गांव में एक पानी की टंकी, मोटर और पाइपलाइन नेटवर्क बन चुका है। इसके चलते सभी घरों में नल कनेक्शन हो गए हैं और रोजाना पीने का साफ पानी मिल रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “जब से जल जीवन मिशन शुरू हुआ है, हमारे गांव में पानी की समस्या खत्म हो गई है। पहले बहुत परेशानी होती थी, लेकिन अब ज्यादातर लोगों को नियमित रूप से साफ और अच्छी गुणवत्ता वाला पानी मिल रहा है।” एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “नल का सिस्टम लगने से बहुत सुविधा हो गई है। पहले एक बाल्टी पानी लाने में आधा से एक घंटा लग जाता था, जो बहुत मुश्किल काम था। अब घर बैठे पानी मिल जाता है।” ग्रामीण मथिलेश साहू ने खुशी जताते हुए कहा, “अब पानी की कोई दिक्कत नहीं है। पहले हैंडपंप या नदी से पानी लाना पड़ता था, लेकिन अब भरपूर पानी घर में ही मिल रहा है।” उन्होंने कहा कि शादी के 18 साल हो चुके हैं और स्वच्छ जल के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। हम पीएम मोदी और प्रदेश की सरकार का धन्यवाद करते हैं कि अब घर पर ही स्वच्छ जल नल से मिल रहा है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि डिंडोरी जिले में कुल 461 नल-जल योजनाएं स्वीकृत हैं, जिनमें से अब तक लगभग 212 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार की मंशा है कि जिले के हर घर तक शुद्ध और स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित पेयजल पहुंचे। पिछले महीने 48 योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य था, जिसमें 30 योजनाएं (बोंदर सहित) पूरी हो सकीं। दिसंबर में 50 योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। ठेकेदारों से सख्ती के साथ काम लिया जा रहा है ताकि समय पर लक्ष्य हासिल हो सके। बोंदर गांव में 1 लाख लीटर क्षमता की टंकी बनाई गई है और लगभग 300 घरों में नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

9 दिसंबर को खजुराहो में कैबिनेट बैठक और सम्मेलन, सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय

खजुराहो मध्य प्रदेश में शासन और प्रशासनिक कार्यों की व्यापक समीक्षा को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 और 9 दिसंबर को सभी विभागों की खजुराहो में विस्तृत समीक्षा बैठकें लेंगे। इन बैठकों में विभागों द्वारा पिछले दो वर्षों में किए गए कार्यों, सामने आई चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन-किन विभागों ने नवाचार (Innovation) के माध्यम से बेहतर कार्य किया है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। सूत्रों के अनुसार, इस बड़े समीक्षा अभियान के साथ ही अगले वर्ष राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना भी तेज हो गई है। वर्तमान में राज्य कैबिनेट में चार पद रिक्त हैं। लंबे समय से प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही है। माना जा रहा है कि विभागों की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार तथा विभागों को बदला जा सकता है। भाजपा में कई वरिष्ठ विधायक मंत्री बनने की राह देख रहे हैं। डॉ. मोहन यादव सरकार को दो साल हो गए हैं। सरकार ने निगम मंडलों में भी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह समीक्षा प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लक्ष्य के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आगामी चुनावों से पहले सभी विभाग निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन करें और जनता से किए गए वादों का प्रभावी रूप से पालन हो। 9 दिसंबर को खजुराहो में अगली कैबिनेट बैठक  कैबिनेट की बैठक भी 9 दिसंबर को खजुराहो में आयोजित की जाएगी। हर गतिविधि केन बेतवा लिंक परियोजना और बुंदेलखंड के विकास को समर्पित होगी।  ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले खजुराहो में होने वाली यह बैठक विकास योजनाओं, निवेश, पर्यटन और प्रशासनिक सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर केंद्रित रहेगी। बता दें इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग शहरों में कैबिनेट बैठक आयोजित की जा चुकी हैं।  अपर कलेक्टर श्री मिलिंद नागदेवे ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इंटरनेट सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इस पर पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने जनता से समझदारी और सहयोग की अपील की है ताकि ये महत्वपूर्ण कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के संपन्न हो सकें। जिला प्रशासन के इन कदमों से खजुराहो एक सुरक्षित और व्यवस्थित प्रांतीय केंद्र के रूप में स्थापित होगा, जिससे सभी सरकारी बैठकों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सकेगा। महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर का वैश्विक महत्व है और यह प्रदेश का प्रमुख सम्मेलन स्थल है, जो जिले की छवि को भी मजबूत कर रहा है।   

PM आवास योजना में 1.14 करोड़ का घोटाला: बालाघाट नगरपालिका की वसूली प्रक्रिया पर संकट

बालाघाट  प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बालाघाट नगरपालिका की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अक्टूबर में खुलासा हुआ कि 1 करोड़ 14 लाख 10 हजार रुपए की राशि 133 हितग्राहियों को जारी कर दी गई। हालांकि उन्होंने आवास निर्माण शुरू ही नहीं किया था। शासन के निर्देश के बाद नपा ने इन लोगों के नाम सरेंडर तो कर दिए, लेकिन अब राशि की वसूली सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। नगर पालिका के सीएमओ बीडी कतरोलिया के अनुसार, कई हितग्राही अपने मकानों को छोड़कर दूसरी जगह चले गए। वहीं, कुछ ने आवास बेच दिए। ऐसे में उनसे वसूली करना मुश्किल हो गया है। कलेक्टर मृणाल मीणा मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने वसूली अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं। वसूली के लिए लगे होर्डिंग नपा सीएमओ ने बताया कि डिफॉल्टर हितग्राहियों के नाम सार्वजनिक करने के लिए बाजार में होर्डिंग लगाई गई थीं। इसके बाद कार्रवाई करते हुए छह लोगों पर मामला दर्ज कराया गया। अब 17 और हितग्राहियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाना कोतवाली में आवेदन दिया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इसी के साथ 56 हितग्राहियों के खिलाफ आरआरसी (राजस्व वसूली प्रमाण पत्र) जारी करने की प्रक्रिया तहसील कार्यालय में चल रही है। वहीं, 20 से 22 हितग्राहियों की संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जा रही है। सीएमओ कतरोलिया ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही शत-प्रतिशत राशि वसूलकर शासन को भेज दी जाएगी। पति-पत्नी को भी दे दिया लाभ, नपा की बड़ी चूक जांच में यह भी सामने आया कि जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पति-पत्नी दोनों को पीएम आवास योजना का लाभ दे दिया गया। बिना पड़ताल के वार्ड नंबर 09 लोहार गली निवासी सुरेश सहारे और सुनीता सहारे को अलग-अलग हितग्राही बताते हुए पूरी राशि जारी की गई थी। जब इस पर सवाल किया गया कि इन अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हो रही है, तो सीएमओ कतरोलिया कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।  

केले के रेशे से बना पैड, गांव की महिलाओं का नया इनोवेशन, दो साल तक खराब नहीं होगा

बुरहानपुर.  अकसर गांव की महिलाओं की जब बात होती है तो लोग सुनते हैं और कहते हैं खेत में काम करने के लिए जाती होगी या कहीं पर मजदूरी करती होगी या ग्रहणी होगी. लेकिन मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के छोटी खकनार की 20 से अधिक महिलाएं इतनी टैलेंटेड है कि वह पढ़ी-लिखी नहीं है लेकिन उन्होंने ऐसा प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है कि अब वह केले के रेशे से सेनेटरी पैड बना रही हैं. इस पैड की खासियत है कि यह 2 साल तक खराब नहीं होता है. एक पैड की कीमत ₹300 है. महिलाएं पीरियड्स के समय इसको इस्तेमाल करती हैं. नारी शक्ति समूह की सुनीता राम प्रसाद मार्को ने जानकारी देते हुए बताया कि हम महिलाएं पहले गृहणी थी कोई काम नहीं था लेकिन जब हमने यह प्रशिक्षण प्राप्त किया अब 3 सालों से हम यह सेनेटरी पैड बनाने का काम कर रहे हैं. हमारे यहां के सेनेटरी पैड कई महानगरों में जाते हैं हमको आर्डर मिलते हैं रोजाना एक महिलाएं 35 तैयार कर लेती है 20 महिला यह काम कर रही है जिससे हमको रोजगार मिल रहा है. महिला ने दी जानकारी   जब गांव की सुनीता रामप्रसाद मार्को से बात की तो उन्होंने बताया कि पहले हम गांव की महिलाएं गृहणी थी कोई काम नहीं था केवल खेत में जाने का ही काम रहता था. लेकिन जब हमको स्वयं सहायता समूह के माध्यम से इस तरह के प्रशिक्षण के बारे में जानकारी लगी तो हमने भी यह प्रशिक्षण प्राप्त किया. अब हम तीन वर्षों से केले के रेशे के सेनेटरी पैड तैयार कर रहे हैं. यह पैड बनाना हमने केरल की महिलाओं से सीखा है. केरल में यह बहुत बड़ी मात्रा में बनाए जाते हैं अब हम बुरहानपुर में भी बना रहे हैं. एक महिला प्रतिदिन 35 पैड सील लेती है हम एक पैड ₹300 में बेचते हैं. इसे महिलाएं 2 साल तक इस्तेमाल कर सकती है. एक्सपर्ट ने दी जानकारी   जब एक्सपर्ट संत मती सलखों से बात की तो उन्होंने बताया कि यह सेनेटरी पैड सरकार की मान्यता और मापदंड के आधार पर सही है. इसको महिलाएं 2 साल तक इस्तेमाल कर सकती है यह वॉशेबल होता है. एक पैड की कीमत ₹300 है इसको महिलाएं दो साल तक इस्तेमाल कर सकती हैं. इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होते हैं यह पूरी तरीके से स्वास्थ्य विभाग के गाइडलाइन के अनुसार ही बनाया जा रहा है. इसमें केले का रेशा और कपड़े का इस्तेमाल होता है.

गोहर महल में 8 से 10 दिसंबर तक हस्त शिल्प हैकेथॉन में शामिल होगी प्रविष्टि

10वीं शताब्दी की धरोहर गौरी कामदा की स्टोन डस्ट कास्टिंग का सांस्कृतिक पुनर्जीवन गोहर महल में 8 से 10 दिसंबर तक हस्त शिल्प हैकेथॉन में शामिल होगी प्रविष्टि भोपाल रफतांड रीजन स्टार्टअप नर्मदापुरम द्वारा 10वीं शताब्दी की दुर्लभ ऐतिहासिक मूर्ति गौरी कामदा की स्टोन डस्ट कास्टिंग के माध्यम से भारतीय धार्मिक और शिल्प विरासत को पुनर्जीवित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है। यह कास्टिंग केवल एक प्रतिकृति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति का पुनर्संस्कार है। गोहर महल में 8 से 10 दिसंबर तक हस्त शिल्प हैकेथॉन में यह प्रविष्टि शामिल होगी। यह कलाकृति धार्मिक आस्था, पुरातात्त्विक महत्व और समकालीन डिज़ाइन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। बीजावाड़ा क्षेत्र जिला देवास की मूल 10वीं शताब्दी की प्रतिमा से प्रेरित यह 15 x 6 इंच आकार की कास्टिंग उस कालखंड की सौंदर्य चेतना, मूर्तिकला परंपरा और आध्यात्मिक भावनाओं को आज के समय में पुनः प्रासंगिक बनाती है। इस पहल का उद्देश्य केवल एक ऐतिहासिक कला रूप को संरक्षित करना ही नहीं, बल्कि उसे समकालीन सांस्कृतिक, संग्रहणीय और डिज़ाइन स्पेस में स्थापित करना भी है। यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को भारत की मूर्तिकला परंपरा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम है। गौरी कामदा की यह पुनर्रचना उस दृश्य भाषा को पुनर्जीवित करती है जो समय के साथ विस्मृत हो चुकी थी। यह कलाकृति न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि शिल्प कौशल, शोध और समर्पण की भी सजीव मिसाल है। संचालनालय  हस्तशिल्प एवं हाथकरघा के स्टार्ट अप प्रतियोगिता आयोजन, सांस्कृतिक नवाचार भारतीय हस्तशिल्प, विरासत संरक्षण और रचनात्मक उद्योगों के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में सामने आया है। राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह 8-14 नवंबर 2025 के एक भाग के रूप में और माय हैंडीक्राफ्ट माय प्राउड तथा माय प्रोडक्ट माय प्राउड के समन्वय में, कोलार डायनेमिक्स स्टार्टअप ने मध्यप्रदेश के कारीगरों के साथ मिलकर एक विशेष ब्रास म्यूज़िशियन सेट तैयार किया है। यह चार टुकड़ों वाली पीतल की कलाकृति है जिसकी चौड़ाई 20 इंच और लंबाई 6 इंच है। शहनाई और तबले पर प्रस्तुति देते दो पुरुष और दो महिला कलाकारों को दर्शाते हुए, यह कृति ग्वालियर घराने की समृद्ध संगीत विरासत का सार प्रस्तुत करती है। इस सांस्कृतिक धरोहर को कला, हस्तशिल्प और शास्त्रीय संगीत के वैश्विक प्रशंसकों तक पहुँचाने में गर्व महसूस करते हैं।  

केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यसभा में किया एलान, MSP पर किसानों को मिलेगी कानूनी गारंटी की दिशा में काम

भोपाल  राज्यसभा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का मुद्दा छाया रहा। कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कृषि उपज की एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग उठाई, तो केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए दावा किया कि “किसानों का कल्याण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” केंद्र का दावा, दालों की 100% खरीद होगी कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने पूछा कि जब किसान एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो सरकार की क्या योजना है? सवालों के जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार पहले ही लागत पर 50% लाभ जोड़कर एमएसपी तय कर रही है और अब तुअर, मसूर और उड़द जैसी दलहन फसलों की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने तो 50% लाभांश देने के फार्मूले को ही “मंडी में विकृति पैदा करने वाला” बताया था, जबकि मोदी सरकार किसानों के हित में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कर रही है। राज्य सरकारों पर ढिलाई का आरोप चौहान ने कई राज्यों पर एमएसपी पर खरीद में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष तौर पर कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने 2024-25 के लिए जितनी तुअर खरीदने की अनुमति ली, उतनी खरीद भी नहीं की। कृषि मंत्री ने साफ कहा कि यदि कोई राज्य सरकार दालों की खरीद नहीं करती है, तो केंद्र सरकार नैफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से सीधे खरीद करेगी, ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। कांग्रेस का पलटवार मुकुल वासनिक ने आरोप लगाया कि सरकार उनके सवालों का सीधा जवाब नहीं दे रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 1 लाख 12 हजार किसानों ने आत्महत्या की, जो ग्रामीण संकट का गंभीर संकेत है। जब खरीद प्रक्रिया के फार्मूले पर दोबारा प्रश्न पूछा गया, तो चौहान ने जवाब दिया कि “किसानों का कल्याण ही हमारा एकमात्र फार्मूला है।”  

भोपाल मेट्रो का शुभारंभ 13 दिसंबर को, पीएम मोदी देंगे हरी झंडी, पहला कॉमर्शियल रन भी दिसंबर में

भोपाल.  मेट्रो के सबसे अहम प्रायोरिटी कॉरिडोर को आखिरकार कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) से हरी झंडी मिल गई है. मंजूरी के बाद राजधानी में मेट्रो के परिचालन की उम्मीदों ने रफ्तार पकड़ ली है. 13 दिसंबर को मेट्रो शुरू होने की संभावित तारीख बताई जा रही है, हालांकि प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां अभी पूरी नहीं हैं. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं. शहर में महीनों से इस फैसले का इंतजार था, लेकिन क्लियरेंस के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है. पूरे कॉरिडोर के किसी भी स्टेशन पर लंबी अवधि की पार्किंग उपलब्ध नहीं होगी, जिससे नियमित यात्रियों को परेशानी हो सकती है. स्टेशनों पर केवल पिक एंड ड्रॉप की व्यवस्था रहेगी. ऐसे में वाहन लेकर आने वाले यात्रियों को निजी या सार्वजनिक पार्किंग स्थानों पर निर्भर होना पड़ेगा. उद्घाटन की तैयारियां तेज हैं, लेकिन पार्किंग का अभाव इस कॉरिडोर के शुरुआती संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है-और यही इस पूरी कहानी का मुख्य बिंदु है. टिकटिंग सिस्टम भी शुरुआती चरण में एडवांस्ड नहीं होगा. तुर्की कंपनी के साथ अनुबंध रद्द होने के बाद भोपाल में भी इंदौर की तरह मैनुअल टिकटिंग से शुरुआत करनी पड़ेगी. CMRS टीम ने 12 से 15 नवंबर के बीच तीन चरणों में ट्रैक, डिपो, ट्रेनों और स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण किया था. जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है और अंतिम आदेश के बाद राजधानी का पहला मेट्रो कॉरिडोर जनता के लिए खोला जा सकता है. पहले कॉरिडोर में 8 स्‍टेशन, 6.2 किमी लंबाई 6.22 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर आठ स्टेशनों को जोड़ता है. सबसे अधिक भीड़-भाड़ वाले रूट को प्राथमिकता देते हुए यह पहला सेक्शन बनाया गया. 2018 में शुरू हुए काम का अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है. रानी कमलापति और अलकापुरी स्टेशनों पर अंतिम कार्य जारी है. फिलहाल स्टेशन के 1 गेट से ही एंट्री-एग्जिट होगी। यानी, जो भी यात्री स्टेशन पर पहुंचेंगे, वे स्टेशन के एक तरफ से ही अंदर-बाहर आ-जा सकेंगे। जिन स्टेशनों पर अभी फिनिशिंग या अन्य काम बचे हैं, उन्हें अगले 3 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 10 दिसंबर से सभी स्टेशन बंद कर दिए जाएंगे। ये वीआईपी-वीवीआईपी की सिक्योरिटी के चलते होगा। यदि पीएम भोपाल आएं तो पहले यात्री भी बनेंगे मेट्रो सूत्रों के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री मोदी भोपाल आकर मेट्रो का लोकार्पण करते हैं तो वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। इसलिए स्टेशनों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन पर कार्यक्रम होगा, क्योंकि यही पर डिपो और सबसे ज्यादा स्पेस है। ऐसे में कार्यक्रम को लेकर किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। अक्टूबर 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तीन महीने पहले वर्तमान मंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सुभाषनगर स्टेशन से ही मेट्रो में सफर व निरीक्षण किया था। लोकार्पण के दौरान बंद रहेंगे स्टेशन जानकारी के अनुसार, मेट्रो का जब भी कमर्शियल रन होगा, तब सुभाषनगर को छोड़ बाकी सभी स्टेशन बंद रखे जाएंगे। यह सब सुरक्षा के मद्देनजर होगा। वीआईपी-वीवीआईपी के जाने के बाद आम लोगों के लिए स्टेशन खोल दिए जाएंगे। ताकि, वे मेट्रो का सफर कर सके। प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किमी लंबा, 8 स्टेशन आएंगे ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इनमें कुल 8 स्टेशन- सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। इंदौर में वर्चुअली तरीके से किया था लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी ने 31 मई को भोपाल में हुए कार्यक्रम से ही इंदौर मेट्रो का वर्चुअली तरीके से लोकार्पण किया था। तब उन्होंने भोपाल मेट्रो के लोकार्पण के लिए अक्टूबर में आने की बात कही थी। हालांकि, बिहार में विधानसभा चुनाव के चलते मेट्रो का कमर्शियल रन अक्टूबर में नहीं हो सका। नवंबर में सीएमआरएस की टीम ने निरीक्षण किया और हाल ही में एनओसी दी। इसलिए कमर्शियल रन अब दिसंबर में किया जा रहा है। टिकट मैन्युवली सिस्टम से ही मिलेगी खास बात ये है कि मेट्रो के कमर्शियल रन के दौरान टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होते हुए मैन्युवली रहेगा। टिकट कलेक्शन करने वाली तुर्किए की कंपनी का ठेका मेट्रो कॉरपोरेशन कैंसिल कर चुका है। नई एजेंसी आने तक मैन्युवली टिकट कलेक्शन सिस्टम रहेगा। इंदौर में भी यही सिस्टम लागू है। साल 2018 से शुरू हुआ था मेट्रो का काम भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर पर प्राथमिकता कॉरिडोर के तौर पर 2018 में काम शुरू किया गया था। सबसे पहले सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति स्टेशन के काम पूरे हुए। इसके बाद रेलवे ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज बनाए गए। वहीं, आगे के 3- डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स स्टेशनों का काम शुरू हुआ। कुछ महीने पहले ही इनका काम भी पूरा हो गया और अब ये यात्रियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। दो साल पहले हुआ था पहला ट्रायल राजधानी में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।  

मुरैना की कैलारस शुगर मिल जल्द होगी शुरू, जौरा विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

मुरैना मुरैना की राजनीति  दिन फिर गरमा गई, जब जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में सरकार को उनके ही वादों की याद दिलाई. उन्होंने नारा लगाते हुए कहा, ''किसान तैयार, जमीन तैयार, गन्ना तैयार…तो फिर कैलारस शक्कर कारखाना कब तैयार होगा?'' मुख्यमंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक कई बार भरोसा दिलाया गया कि यदि किसान गन्ना उगाएंगे तो कारखाना शुरू होगा. अब तो 10 हजार किसान 50 हजार हेक्टेयर में गन्ना उगाने को तैयार खड़े हैं. विधानसभा में उठाया शुगर मिल का मुद्दा पंकज उपाध्याय ने सरकार से सीधा सवाल किया है, ''जब किसान वादा निभा रहे हैं, तो सरकार कब निभाएगी? विधानसभा में उन्होंने कैलारस शक्कर कारखाना चालू करो, किसानों को उनका हक दो का नारा बुलंद किया.'' मुरैना जिले के किसानों की सालों पुरानी मांग कैलारस शुगर मिल को चालू कराने की, एक बार फिर पूरे जोर से उठ खड़ी हुई है. जौरा विधानसभा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने शुक्रवार को विधानसभा में इस मुद्दे को अत्यंत दबंग अंदाज में उठाते हुए सरकार को उसके ही वादों का आईना दिखा दिया. 10 हजार किसानों की जगी उम्मीद उनके सवाल ने पूरे जिले के 10 हजार किसानों के बीच फिर से नई उम्मीद जगा दी है, जो वर्षों से अपने हक और उद्योग के पुनर्जीवन का इंतज़ार कर रहे हैं. विधानसभा के प्रश्नकाल में विधायक उपाध्याय ने सरकार को स्पष्ट कहा कि, ''मुरैना के 10 हजार किसान 50 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन यदि सरकार समय पर अपना वादा नहीं निभाती तो यह तैयारियां व्यर्थ हो जाएंगी.'' उन्होंने बताया कि, ''किसान लंबे समय से आंदोलन कर चुके हैं, धरना दे चुके हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार सिर्फ आश्वासन न दे, बल्कि वास्तविक कदम उठाए.'' कैलारस शुगर मिल अर्थव्यवस्था की कुंजी विधायक पंकज उपाध्याय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने 27 नवंबर को मुरैना दौरे के दौरान घोषणा की थी कि यदि किसान गन्ना उगाएंगे तो शुगर मिल चालू की जाएगी. इसके साथ ही कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी कई बार वही भरोसा दिला चुके हैं. उपाध्याय ने कहा कि, ''जब प्रदेश के शीर्ष नेता खुद किसानों को आश्वासन दे चुके हैं, तो अब देरी का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने जोर देकर कहा कि कैलारस शुगर मिल का ताला खुलना सिर्फ किसानों की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे जिले की अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन की कुंजी है. लाइनों में लगे धक्के खा रहे किसान जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में कैलारस शुगर मिल के मुद्दे के साथ-साथ मुरैना जिले में खाद की भारी किल्लत का मामला भी जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि, ''जिले का किसान खाद के लिए लाइन में खड़ा होकर लाठी–डंडे तक खा रहा है, फिर भी उसे पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही. वहीं कृषि मंत्री बार-बार खाद उपलब्ध होने का दावा करते हैं, जो जमीन की हकीकत से बिल्कुल उलट है.'' उपाध्याय ने कहा कि, ''किसान गन्ना उगाने को तैयार बैठा है, लेकिन सरकार न तो शुगर मिल शुरू कर रही है और न ही खाद की समस्या दूर कर रही है.'' उन्होंने विधानसभा में साफ शब्दों में मांग की कि मुरैना जिले के किसानों को तत्काल खाद उपलब्ध कराई जाए और उनकी परेशानियों का समाधान किया जाए. विधानसभा में उठे इस प्रखर मुद्दे ने किसानों को एक बार फिर आंदोलन की ऊर्जा और उम्मीद दोनों दे दी हैं. अब मुरैना की जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आखिर कब वह ऐतिहासिक फैसला लेगी, जिसका इंतज़ार वर्षों से किया जा रहा है. अशोक तिवारी किसान नेता मध्य प्रदेश किसान सभा के अध्यक्ष एवं शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति के सदस्य अशोक तिवारी ने बताया कि, ''जौरा विधायक की मांग बिलकुल सही है, क्योंकि इस शक्कर कारखाने से 20 हजार किसान और 1500 श्रमिक जुड़े हुए थे. हम तो कई वर्षो से इस शक्कर कारखाना चालू कराने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. चालू होने पर इस क्षेत्र का विकास होगा और कई बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा. इसके साथ ही इस क्षेत्र के किसानों को भी खुशी होगी.'' शक्कर कारखाना चालू कराने को लेकर बीते दिनों विधानसभा सत्र के दौरान शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति जिला मुरैना का एक वृहद डेलीगेशन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना से मिला था. उन्होंने तसल्ली से प्रतिनिधि मंडल को सुना और शक्कर कारखाना चलाने के लिए हर तरह का सहयोग करने का आश्वासन दिया.