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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- इन्दौर स्वच्छता और स्वाद के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बनाएगा विशेष पहचान

फिटनेस, सामूहिक चेतना और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित "वन इन्दौर-रन इन्दौर" मैराथन इन्दौर के लिए गर्व का विषय अपने शहर के लिए बेहतर करने की इन्दौरवासियों की ऊर्जा, भावना और सामूहिक संकल्प शक्ति सराहनीय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर ने स्वच्छता और स्वाद के क्षेत्र में विश्व में विशेष पहचान बनाई है। आज की मैराथन, इंदौर को स्वास्थ्य क्षेत्र में भी विशेष पहचान देगी। स्वास्थ्य की मूल आधार दौड़ है और दौड़ के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हैं। यह इन्दौरवासियों की ऊर्जा और सामूहिक संकल्प शक्ति से शहर के लिए कुछ बेहतर करने की उनकी भावना को प्रकट करती है। सकारात्मक पहल के परिणाम सदैव बेहतर होते हैं। इंदौर इस मैराथन के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिकॉर्ड स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को प्रात: 7 बजे "वन इन्दौर-रन इन्दौर" मैराथन के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित इन्दौरवासियों को मुख्यमंत्री निवास भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मैराथन के सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए मैराथन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फिटनेस, सामूहिक चेतना और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित "वन इन्दौर-रन इन्दौर" मैराथन का यह भव्य आयोजन इन्दौर शहर के लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन यूनाइटेड इन्दौर की भावना को सशक्त करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य इन्दौरवासियों में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, सामुदायिक एकता को मजबूत करना और फिटनेस को एक जनआंदोलन का रूप देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपने शहर के लिए इतने संवेदनशील विषय पर आयोजित मैराथन में भौतिक नहीं पर भावनात्मक रूप से वे स्वयं भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि इस कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है। मैराथन की 3, 5 और 7 किलोमीटर रन की श्रेणियों में दौड़ने के लिए उनकी उपस्थिति इन्दौर की जागरूकता और उत्साह का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इन्दौर की जनता हमेशा से सकारात्मक पहल में अग्रणी रही है। यह कार्यक्रम शहर की ऊर्जा, उमंग और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को नई दिशा प्रदान करेगा। स्वच्छता में देश का निरंतर नेतृत्व करने वाला हमारा इन्दौर, अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी देश में नम्बर 1 बने, यह हम सभी का सामूहिक संकल्प है। "वन इन्दौर-रन इन्दौर" उसी दिशा में एक सशक्त पहल है। यह कार्यक्रम इन्दौरवासियों में फिटनेस के प्रति उत्साह को और अधिक बढ़ाएगा, साथ ही स्वस्थ समाज निर्माण का संदेश पूरे प्रदेश में प्रसारित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास के साथ प्रदेशवासियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। युवाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य के आधार, खेल को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि अब प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से प्रदेश के खिलाड़ी पदक लेकर ही लौट रहे हैं। इसका हाल का उदाहरण सुश्री क्रांति गौड हैं, जिन्होंने महिला वर्ल्ड कप में विश्व में अपनी प्रतिभा स्थापित की। राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप उन्हें एक करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई। इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री रमेश मैंदोला, श्री मधु वर्मा सहित बड़ी संख्या में युवा वर्ग उपस्थित रहा।  

उमा बोलीं, नमाज पढ़ना नहीं बनाता मुस्लिम, राहुल गांधी पर भी निशाना साधा

भोपाल मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हिंदू एकता, हिंदू राष्ट्र, आरक्षण, शासन–प्रशासन, धर्मांतरण और भ्रष्टाचार जैसे कई मुद्दों पर बेबाक बयान दिए। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र की बात खुलकर कही है और बुंदेलखंड से हमेशा ऐसी विभूतियाँ सामने आती रही हैं। भारत हिंदू राष्ट्र है- उमा भारती उमा भारती ने कहा ‘भारत हिंदू राष्ट्र है, इसे सभी को स्वीकार करना चाहिए। हिंदू राष्ट्र इसलिए सेक्युलर है क्योंकि हिंदू ने हर मज़हब को स्थान दिया है। जब इस्लाम, जैन, बौद्ध और ईसाई धर्म नहीं थे, तब भी सनातन था। हिंदू विविधता में एकता का प्रतीक है।’ उन्होंने जाति-भेद और सामाजिक विभाजन को हिंदू एकता का सबसे बड़ा बाधक बताया और कहा कि हिंदू समाज की मजबूती का आधार आर्थिक समानता है। धर्म परिवर्तन और लव जिहाद पर कड़ा रुख उन्होंने धर्म परिवर्तन को गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ‘धर्म परिवर्तन और लव जिहाद राष्ट्रद्रोह है। भारत में हर धर्म का सम्मान है, लेकिन धोखे से धर्मांतरण अपराध है। घुसपैठियों को एक मिनट भी देश में रहने का अधिकार नहीं।’ उमा भारती ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सभी को भारत की सांस्कृतिक आत्मा को समझना होगा। ‘सियाराम में सब जग जानी यही भारत की पहचान है। Jihad और Kafir जैसे शब्दों की इस देश में कोई जगह नहीं है।’ उन्होंने अंत में कहा कि वे न तो हाशिए पर हैं और न ही किसी पद की इच्छुक, लेकिन गंगा और गौ माता से जुड़ी किसी भी जिम्मेदारी के लिए हमेशा तैयार हैं। मैं नमाज पढ़ूं, तो मुस्लिम नहीं बन जाऊंगी उमा ने कहा कि धर्म परिवर्तन और लव जिहाद देशद्रोह है। यदि मैं कुरान पढ़ लूं दरगाह में चली जाऊं या अल्लाह बोल दूं इसे मेरा धर्म परिवर्तन नहीं होगा। भारत में बहुसंख्यक सभी धर्म का सम्मान करते हैं और यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो यह जगन्य अपराध राष्ट्र और देशद्रोह है। राहुल गांधी पर निशाना राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए उमा ने कहा कि ‘राहुल जनेऊ पहनने का नाटक करते हैं। कल गाय का मुद्दा बढ़ गया तो गोबर का टीका लगा लेंगे और जेब में गौमूत्र रखकर घूमेंगे। नाटक करने में नंबर वन हैं।’

जब जज ही सुरक्षित नहीं… MP HC के CJI की चिंता बढ़ी, मोहन सरकार को नोटिस

जबलपुर  मध्य प्रदेश में प्रदेश की निचली अदालतों में पदस्थ जजों पर हो रही घटनाओं पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सख्त रुख अपनाया। इस पर हाई कोर्ट ने जजों पर हो रहे हमलों को लेकर राज्य सरकार से जबाब मांगा है। अभी तक मिले जबाब से कोर्ट ने असंतोष जताया है और नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि जब जज ही सुरक्षित नहीं तो न्याय व्यवस्था कैसे सुरक्षित मानी जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से लेकर 2025 तक 5 जजो पर धमकी और हमले के 5 मामले हुए हैं जिसमें एक में थाना प्रभारी को निलंबित किया गया और 4 आरोपी जेल पहुंचाए गए हैं। इन 9 सालों में प्रदेश के मंदसोर, ग्वालियर, रीवा, अनूपपुर,और इंदौर में जजों को धमकी मिल चुकी है। कोर्ट ने 4 दिसम्बर को अगली सुनवाई तय की है और राज्य सरकार से जबाब मंगा है।   जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश में जजों पर हो रहे हमलों और अपराधों पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने सरकार से इन घटनाओं पर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट प्रदेश के सभी जिला सत्र न्यायालयों और वहां पदस्थ जजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है,और जिला स्तरीय निगरानी समिति की रिपोर्टों के आधार पर सरकार को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। हालिया मामलों को देखते हुए कोर्ट ने सुझाव दिए और अगली सुनवाई की तारीख 4 दिसंबर रखी है। कोर्ट ने कहा कि जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। जब वे खुद सुरक्षा की मांग करने को मजबूर हैं, तो प्रदेश में आम जनता की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। बता दें मंदसौर में 23 जुलाई 2016 को एक जज पर हमला हुआ था, जिस पर तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी। इसके बाद बालाघाट के जज पर हमला, और भोपाल गैस प्राधिकरण के पीठासीन अधिकारी पर एसिड अटैक जैसी घटनाएं सामने आईं। जजों पर हो रहे ये लगातार हमले न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाल ही में दो जजों के घर चोरी की घटनाएं हुईं, दो मामलों में घर में घुसने का प्रयास किया गया और एक जिला जज पर हमला भी हुआ। उन्होंने कहा, इन घटनाओं को देखकर बिल्कुल नहीं लगता कि सब ठीक है। यहां लॉ एंड ऑर्डर का कम्पलीट ब्रेकडाउन दिख रहा है। सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के सभी 52 जिला सत्र न्यायालयों में बाउंड्रीवाल बनाकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर निगरानी समितियों की रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य स्तरीय कार्यशाला और वाटर शेड महोत्सव का करेंगे शुभारंभ

बड़ी संख्या में जुटेंगे जनप्रतिनिधि व अधिकारी कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंन्वेंशन सेंटर में 24 से 26 नवम्बर तक होगा आयोजन भोपाल प्रदेश की पंचायतों को आत्मनिर्भर व समृद्ध बनाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा तीन दिन तक मंथन किया जाएगा। राज्य स्तरीय कार्यशाला होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंन्वेंशन सेंटर, भोपाल में होने वाली राज्य स्तरीय कार्यशाला और वाटरशेड महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, श्री जगदीश देवड़ा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह सहित जनप्रतिनिधि, विषय-विशेषज्ञ व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे। संचालक सह आयुक्त पंचायत राज श्री छोटे सिंह ने बताया कि भोपाल में 24, 25 एवं 26 नवंबर को तीन दिवसीय “आत्‍मनिर्भर पंचायत समृद्ध मध्‍यप्रदेश’’ पर केन्द्रित कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्‍य पंचायतों को आत्‍मनिर्भर के साथ समृद्ध बनाना है। कार्यशाला में त्रि-स्तरीय पंचायत से जुड़े जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाली कार्यशाला में पंचायतों के लिए “स्‍वनिधि से समृद्धि’’ अभियान की अवधारणा, शहरीकरण के साथ सामंजस्‍य, वाटरशेड परियोजना का क्रियान्‍वयन एवं शुद्ध पेयजल की उपलब्‍धता, स्‍वच्‍छ ग्राम, विभिन्न शासकीय योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम पोषण एवं पेसा ग्राम सभाओं की वर्तमान स्थिति एवं सफल क्रियान्वयन सहित प्रशासनिक रूप से सक्षम पंचायत, प्रश्‍न-उत्‍तर इत्‍यादि विषयों पर विस्‍तृत रूप से चर्चा की जायेगी। 2000 से अधिक जनप्रतिनिधि व अधिकारी होंगे शामिल तीन दिन तक चलने वाली राज्य स्तरीय कार्यशाला में 2000 से अधिक लोग शामिल होंगे। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यापालन अधिकारी, जिला पचांयत, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत के सरपंच एवं अन्य राज्य स्तरीय पदाधिकारी शामिल होंगे। राज्य स्तरीय कार्यशाला में जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य वाले जिलों के साथ ही जिला एवं जनपद स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। जल गंगा संवर्धन अभियान में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले जिलों में खंडवा प्रथम, रायसेन द्वितीय एवं बालाघाट तीसरे नंबर रहा। खेत तालाब निर्माण में श्रेष्ठ कार्य वाले प्रथम जिले को दो श्रेणियों 'ए' और 'बी' में पुरस्कृत किया जाएगा। 'ए' श्रेणी में अनूपपुर जिला एवं 'बी' श्रेणी में बालाघाट जिला शामिल है। इसी तरह से जल गंगा संवर्धन अभियान में खेत तालाब निर्माण में विकासखंड स्तर पर श्रेष्ठ कार्य करने वाली जनपद पंचायतों को 'ए' और 'बी' श्रेणी में पुरस्कृत किया जाएगा। 'ए' श्रेणी में बालाघाट जिले की बिरसा जनपद एवं 'बी' श्रेणी में अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत शामिल है। साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मनरेगा परिषद के राज्य स्तरीय अधिकारी-कर्मचारियों को भी सम्मानित किया जाएगा। इसमें राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन के अतिरिक्त संचालक श्री विवेक दवे, टेक्नीकल एक्सपर्ट सुश्री शिल्पी अधोलिया के साथ मनरेगा परिषद के सिस्टम एनालिस्ट श्री ओबेस अहमद, अधीक्षण यंत्री श्री सोमन सिंह डाबर, परियोजना अधिकारी श्रीमती आकांक्षा सिंह, सहायक प्रबंधक श्री पियूष प्रताप सिंह, नॉलेज पार्टनर टीम लीड श्री सुमेंद्र पुनिया, जीआईएस मैनेजर श्री राजेंद्र स्वामी, प्रोजेक्ट मैनेजर सुश्री नुपुन नवानी शामिल हैं। साथ ही परियोजना संचालक स्वान श्री अंशुमन राज सहित एमपीएसईडीसी के हेड डॉ. श्री राकेश दुबे, जनरल मैनेजर जीआईएस श्री अशोक पैडी, टेक्नीकल लीड श्री पुलकेश दास, एसोसिएट इंजीनियर श्री सागर तंतुवाय को भी सम्मानित किया जाएगा। कार्यशाला का उद्देश्य कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को प्रशासनिक, वित्तीय एवं सामुदायिक स्तर पर मजबूत बनाते हुए उन्हें आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना है। इसके अंतर्गत स्थानीय शासन की पारदर्शिता व जवाबदेही, मनरेगा, आजीविका मिशन, सामाजिक अंकेक्षण, डिजिटल ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग, वित्तीय प्रबंधन एवं पंचायत शासन, "स्‍वनिधि से समृद्धि" अभियान, वाटरशेड परियोजनाओं का क्रियान्वयन, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ ग्राम तथा विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं का प्रभावी संचालन, पेसा ग्राम सभाओं की वर्तमान स्थिति एवं सफल क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा और प्रशिक्षण दिया जाएगा। पैनल डिस्कशन एवं तकनीकी सत्र कार्यशाला के इन सत्रों में मंत्री, अपर मुख्य सचिव, विषय-विशेषज्ञ एवं विभाग के प्रमुख अधिकारियों की सहभागिता से उच्च स्तरीय पैनल डिस्कशन होगा। प्रत्येक दिन तकनीकी सत्रों में केस स्टडी, समूह गतिविधियाँ, फील्ड आधारित उदाहरण, अनुभव-साझा सत्र द्वारा प्रतिभागियों को व्यावहारिक सीख प्रदान की जाएगी।

देशभर के मेधावी व आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को UGC का सहारा, मिलेगी भारी वित्तीय मदद

ग्वालियर आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों के लिए आशा छात्रवृत्ति कार्यक्रम 2025 शुरू किया गया है। इस योजना के तहत देशभर के 23 हजार 230 छात्रों को शिक्षा के स्तर के अनुसार 15 हजार रुपये से 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। छात्रवृत्ति का लाभ स्कूली शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा के छात्रों को भी मिलेगा। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे इस योजना की जानकारी छात्रों तक व्यापक रूप से पहुंचाएं, ताकि कोई भी जरूरतमंद छात्र आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। UGC ने SBI के साथ शुरू की योजना दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भारतीय स्टेट बैंक के साथ इस योजना को शुरू किया है। यह छात्रवृत्ति योजना भारतीय स्टेट बैंक की प्लेटिनम जुबली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शुरू की गई है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। एसबीआई फाउंडेशन की इस योजना के अंतर्गत कुल 23 हजार 230 विद्यार्थियों को चयनित किया जाएगा, जिनमें से 20 हजार छात्र स्कूल स्तर (कक्षा नौ से 12) के होंगे और तीन हजार 230 विद्यार्थी देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों के होंगे।  बता दें कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों को शिक्षा जारी रखने में सहायता देना है जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने की स्थिति में आते हैं। एसबीआई फाउंडेशन ने इस वर्ष लगभग 90 करोड़ रुपये का फंड स्कालरशिप के लिए निर्धारित किया है। छात्र sbiashascholarship.co.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पात्रता और आवेदन की शर्तें यूजीसी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस स्कॉलरशिप के लिए-आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए। पिछली कक्षा में न्यूनतम 75% अंक या 7.0 सीजीपीए अनिवार्य है। स्कूल छात्रों की पारिवारिक वार्षिक आय तीन लाख या उससे कम होनी चाहिए। कॉलेज/विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों की आय सीमा छह लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है। किन छात्रों को लाभ मिलेगा यह स्कॉलरशिप कई स्तरों पर दी जाएगी कक्षा नौ-12 के छात्र। देश के एनआईआरएफ टॉप 300 या नैक ए रेटेड संस्थानों में पढ़ रहे स्नातक,स्नातकोत्तर और एमबीबीएस छात्र। आईआईटी और आईआईएम के छात्र। एससी/एसटी छात्र जो विदेश के टॉप 200 विश्वविद्यालयों में मास्टर डिग्री कर रहे हों। यूजीसी ने दिए ये निर्देश यूजीसी सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे स्कॉलरशिप से संबंधित जानकारी छात्रों और संकाय सदस्यों तक पहुंचाएं।-संस्थान की वेबसाइट, नोटिस बोर्ड, इंटरनेट मीडिया, न्यूजलेटर आदि पर इसे प्रमुखता से प्रकाशित करें।-एसबीआई फाउंडेशन द्वारा भेजी गई स्कालरशिप सामग्री, पोस्टर और क्यूआर कोड को छात्रों में वितरित करें।

MP में पराली संकट गहराया: सख्ती के बावजूद नहीं थम रही आग, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी

भोपाल सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और कई शहरों में प्रदूषण का खतरनाक स्तर होने के बाद भी पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं। स्थिति यह है कि नवंबर माह में अब तक इसके लिए संवेदनशील पांच बड़े राज्यों में पराली जलाने के 21 हजार 266 मामले सामने आए हैं। इनमें अकेले मध्य प्रदेश में 11 हजार 442 यानी 50 प्रतिशत से अधिक मामले हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा सैटेलाइट से लिए गए चित्रों के अनुसार, चौंकाने वाली बात यह है कि गत 16 नवंबर को एक ही दिन में 1520 मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। पराली जलाने वालों पर कार्रवाई में ढिलाई इसी माह नवंबर में उत्तर प्रदेश में 3780, पंजाब में 3434, राजस्थान में 2104, हरियाणा में 3218 और दिल्ली में दो मामले दर्ज किए गए। बता दें कि सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से पराली जलाने के मामलों की निगरानी और पुष्टि की जाती है, लेकिन ऐसे मामले लगातार सामने आने के बाद भी पराली जलाने वालों पर कार्रवाई में ढिलाई की जा रही है। मध्य प्रदेश का उदाहरण लें तो राजधानी भोपाल तक में एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा रही है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश के चार महानगर- भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर की हवा में आए दिन प्रदूषण गहरा जाता है।   इन महानगरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक या मध्यम श्रेणी में है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा सभी कलेक्टरों को पराली जलाने के मामले में कार्रवाई के निर्देश के बाद कुछ दिन प्रशासन ने सतर्कता दिखाई लेकिन फिर ढिलाई शुरू हो गई। पिछले पांच दिन में सिर्फ दतिया में एक किसान के विरुद्ध एफआईआर की जानकारी सामने आई है। अन्य सालों से तुलना करें तो नवंबर अंत तक पराली जलाने के मामलों की यही स्थिति रह सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे कमी आएगी। हालांकि, तब तक आंकड़ा 15 हजार से अधिक पहुंच जाएगा, जो मध्य प्रदेश में अब तक की सर्वाधिक संख्या होगी। यह अच्छी बात है कि अभी कोहरा नहीं पड़ रहा है नहीं तो पराली के धुआं से प्रदूषण का स्तर वर्तमान से डेढ़ से दो गुना तक बढ़ सकता था। मध्य प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में एक्यूआई का स्तर शहर — एक्यूआई– श्रेणी भोपाल- 289 – खराब ग्वालियर – 289 – खराब जबलपुर -207 – खराब सागर – 236 – खराब इंदौर – 133 – मध्यम देवास – 178 – मध्यम नोट : एक्यूआई का स्तर 0 से 50 को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक माना जाता है। इस माह पिछले सात दिन में पांच राज्यों में पराली जलाने के मामले तिथि– मप्र– उप्र — पंजाब– राजस्थान — हरियाणा 21 —1125 — 250 — 30 — 82 — 11 20 — 625 — 98 — 12 –58– 2 19 — 658 — 115 — 16 — 90– 11 18 — 641 — 377– 15– 65 — 6 17 — 822 — 384 — 31 — 103 — 10 16 — 1520 — 461 — 95 — 125 — 47

वंदे भारत अपग्रेड: इंदौर–नागपुर रूट पर 16 कोच की नई ट्रेन, सीट क्षमता दोगुनी

इंदौर रेलवे बोर्ड ने इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस में कोचों की संख्या बढ़ाकर 16 कर दी है। 24 नवंबर से यह ट्रेन दोगुनी सीटों के साथ चलेगी, जिससे लगभग 1200 यात्री यात्रा कर सकेंगे। व्यस्त मार्ग पर यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा।     इंदौर-नागपुर वंदे भारत में कोच बढ़े।     सीट क्षमता हुई दोगुनी, 1200 यात्री।     24 नवंबर से नया बदलाव होगा लागू।  इससे प्रतिदिन 600 अतिरिक्त यात्रियों को आरामदायक और तेज यात्रा का अवसर मिलेगा—जो त्योहारों और भीड़भाड़ के समय राहत का बड़ा कारण बनेगा। व्यस्ततम रूट, मांग लगातार बढ़ रही थी इंदौर–भोपाल–नागपुर रेल मार्ग मध्य भारत के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूटों में शामिल है। विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और ट्रैवलर्स की भारी आवाजाही के कारण वंदे भारत में सीटें अक्सर फुल रहती थीं। वेटिंग लिस्ट भी लगातार बढ़ रही थी। इंदौर और भोपाल शिक्षा व व्यापार केंद्र हैं, वहीं नागपुर एक बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब है। ऐसे में 16 कोच का स्थायी विस्तार यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस दिन से मिलेगा नई सुविधा का लाभ ट्रेन नंबर 20911 इंदौर-नागपुर व ट्रेन नंबर 20912 नागपुर-इंदौर में 24 नवंबर से इस सुविधा का लाभ यात्रियों को मिलेगा। वंदे भारत ट्रेन की एग्जीक्यूटिव क्लास के कोच में 52 तो चेयरकार कोच में 78 सीटें होती हैं। कोच बढ़ने से सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। वंदे भारत (Indore Nagpur Vande Bharat Train) का 16 कोच वाला अपग्रेडेड रैक बुधवार को दिल्ली से इंदौर पहुंचा है। त्योहारी सीजन में फुल थी ट्रेन कोचिंग डिपो में इसका (Indore Nagpur Vande Bharat Train) मेंटेनेंस किया जा रहा है। मालूम हो, पहले यह ट्रेन इंदौर से भोपाल चल रही थी। यात्रियों की संख्या कम होने से इसे नागपुर तक कर दिया गया। त्योहारी सीजन में यह ट्रेन फुल रही। यात्रियों को वेटिंग मिली। कोच दोगुना होने से यात्रियों को आसानी से सीट मिल जाएगी। वंदे भारत ट्रेन में बीते चार माह से सीटें फुल जा रही थी। इस कारण रेलवे ने वंदे भारत के कोच बढ़ा दिए है। इंदौर से नागपुर तक ट्रेन चलाने की मांग हमेशा से उठती रहती है। दो साल पहले इंदौर से भोपाल के बीच वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू किया था। यह ट्रेन सुबह सवा छह बजे जाती है। इंदौर से भोपाल तक के लिए इस ट्रेन को कम यात्री मिलते थे। बाद में वंदेभारत ट्रेन का विस्तार इंदौर से नागपुर तक किया गया। इसके बाद ट्रेन को अच्छे यात्री मिलने लगे। त्यौहार के समय इस ट्रेन में सीट नहीं मिलती है। पहले दिल्ली भेज दिए थे रैक वंदे भारत के लिए सितंबर माह में रैक आए थे, लेकिन उसका उपयोग रेलवे ने दिल्ली पटना ट्रेन के लिए कर दिया था। अब वे रैक वापस इंदौर भेजे है। दो दिन पहले रैक इंदौर लाए गए। अब 24 नवंबर से 16 कोच के साथ ट्रेन इंदौर से नागपुर के लिए रवाना होगी। उधर इंदौर नगर निगम ने भी इंदौर से नागपुर के लिए बस सेवा शुरू की है। पिछले दिनों हरी झंडी देकर मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने बस को रवाना किया था।  

राज्य के 15 अफसरों को IAS–IPS में प्रमोशन, पांच पुलिस अफसरों का चयन IPS अवॉर्ड के लिए

भोपाल मध्यप्रदेश में राजधानी दिल्ली में हुई डीपीसी (Departmental Promotion Committee) की अहम बैठक में राज्य सेवा के 1997-98 बैच के 15 अधिकारियों के प्रमोशन पर विचार किया गया। इसमें राज्य पुलिस सेवा के पांच अफसरों को IPS अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दो वरिष्ठ अफसर अटके जांच के कारण वरिष्ठता सूची में शीर्ष पर आए सीताराम ससत्या और अमृत मीणा के नाम पर प्रारंभिक स्तर पर पेच फंस गया, क्योंकि दोनों पर विभागीय जांच लंबित है। सूत्रों के अनुसार, अमृत मीणा को प्रोविजनल IPS बनाया गया है — यानी दो माह बाद होने वाली अगली डीपीसी तक उन्हें क्लीनचिट लेनी होगी, वरना प्रमोशन स्वतः निरस्त माना जाएगा। वहीं सीताराम ससत्या को प्रोविजनल सूची में भी स्थान नहीं मिला। पहले नोटिफिकेशन निरस्त, अब दोबारा डीपीसी इससे पहले 12 सितंबर को डीपीसी हुई थी, लेकिन नोटिफिकेशन जारी न होने और तकनीकी कारणों से प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद 21 नवंबर को दोबारा डीपीसी की गई, जिसमें प्रमोशन को लेकर अंतिम विचार हुआ। इन अधिकारियों को मिला IPS अवॉर्ड सूत्रों के मुताबिक इस डीपीसी में निम्न अफसरों का नाम IPS अवॉर्ड सूची में शामिल किया गया है: अमृत मीणा (प्रोविजनल) विक्रांत मुराब सुरेंद्र कुमार जैन आशीष खरे राजेश रघुवंशी हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। डीपीसी में शामिल प्रमुख अधिकारी डीपीसी की बैठक में MP मुख्य सचिव अनुराग जैन, एसीएस होम शिव शेखर शुक्ला, डीजीपी कैलाश मकवाना शामिल हुए।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा- भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग

भोपाल  भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग था। हमारे पूर्वजों ने खेलों को हजारों वर्षों पूर्व स्थापित किया था और अतीत के उन कालखंडों में हम खेलों के क्षेत्र में अग्रणी थे। खेल के परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टि व्यापक थी। भारतीय दृष्टि में खेल, केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शारीरिक और बौद्धिक विकास के माध्यम होते थे। मनुष्य के समग्र विकास की दृष्टि से भारत में खेल खेले जाते थे। यह बात उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने शनिवार को भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान भवन में क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति द्वारा आयोजित "खेल सृष्टि-भारतीय दृष्टि" विषय पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ कर कही। मंत्री श्री परमार ने संगोष्ठी में "भारतीय दर्शन में खेलों के पुरातन इतिहास एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में खेलों में भारतीय दृष्टि के महत्व" के आलोक में अपने विचार व्यक्त किए। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि विश्व एक परिवार है। "वसुधैव कुटुंबकम्" का दृष्टिकोण विश्व को भारत की देन है। कोविड के संकटकाल में भारत ने आत्मानुशासन का पालन करते हुए, विश्व के विभिन्न देशों को निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध करवाकर इसी दृष्टिकोण का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि खेल के मैदानों से सेवा का संकल्प पूरा होगा। खेल से शरीर और मन स्वस्थ होता है और स्वस्थ मन से खिलाड़ी समाज में सेवा का संकल्प पूरा करेंगे और प्रेरणा का केंद्र बनेंगे। मंत्री श्री परमार ने संवेदना के साथ खेलों को आगे बढ़ाने और वैचारिक प्रवाह को सतत् जारी रखने का आह्वान भी किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में, परंपरागत खेलों का समावेश किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि हर खेल की अपनी अलग दृष्टि होती है। उन्होंने तीरंदाजी का उदाहरण देकर कहा कि इस खेल में एकाग्रता की आवश्यकता होती है। यह तीरंदाजी के खेल की अपनी विशिष्ट दृष्टि है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि समय के सापेक्ष हमने विभिन्न विदेशी खेलों को भी हमने अपनाया है, जो भारतीयता के साथ आत्मसात करने की सीख देता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि क्रीड़ा भारती "क्रीड़ा से निर्माण चरित्र का, चरित्र से निर्माण राष्ट्र का" के विचार को चरितार्थ कर रही है। मंत्री श्री परमार ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए समिति को बधाई भी दी। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में क्रीड़ा भारती श्री अशोक अग्रवाल ने कहा कि खेल से राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव सुदृढ़ होता है। खेलों में भारतीय दृष्टि केंद्रित शुचिता एवं चरित्र निर्माण की आवश्यकता हैं। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी, पारम्परिक एवं ग्रामीण खेलों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना, खिलाड़ियों में खेल भावना, नैतिक आचरण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ खेल संस्कृति का विकास करना एवं खेलों के माध्यम से खिलाड़ी रूपी नागरिकों में भारतीय दृष्टि केंद्रित राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना था। क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति के अध्यक्ष श्री दीपक सचेती, राष्ट्रीय नियामक मंडल सदस्य श्री भीष्म सिंह राजपूत, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन, कुलसचिव डॉ अनिल शर्मा एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आलोक मिश्रा सहित क्रीड़ा भारती के विभिन्न पदाधिकारीगण, खेल विधा से जुड़े विविध विषयविद, प्राध्यापकगण, क्रीड़ा अधिकारी एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित थे।  

भावी वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण स्थापित करने का कार्य करें प्राध्यापक

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। आने वाले समय में, प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा अग्रणी स्थान पर होगी और इसमें हमारे प्राध्यापकों एवं चिकित्सकों के समर्पण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। मंत्री श्री परमार शनिवार को, भोपाल के मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के सभागृह में, फैकल्टी डेवलपमेंट को लेकर आयोजित एकदिवसीय "फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला" का शुभारम्भ कर, संबोधित कर रहे थे। आयुष मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने, प्रदेश में विश्वस्तरीय आयुर्वेद महाविद्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है और इसके लिए चिकित्सकों और प्राध्यापकों के पद भी सृजित होंगे। मंत्री श्री परमार ने समस्त आयुर्वेद प्राध्यापकों से आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन "वसुधैव कुटुंबकम्" के मंत्र को आयुर्वेद की पैथी के माध्यम से विश्वमंच तक पहुंचाएं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भावी आयुर्वेद चिकित्सकों एवं वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने का कार्य करें। विश्व आयुर्वेद परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. महेश कुमार व्यास ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सही चिकित्सा तभी संभव है जब चिकित्सकों और प्राध्यापकों को सही निर्देशन मिले। प्रमुख वक्ता के रूप में महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंस के बोर्ड ऑफ रिसर्च के सदस्य डॉ. किरण टवलारे ने योग्यता एवं उत्कृष्टता के परिप्रेक्ष्य में, मुख्य मानचित्रण प्रस्तुत किया। आईजीपी आयुर्वेद कॉलेज, नागपुर की प्राध्यापक डॉ. कल्पना टवलारे ने खेती और उद्देश्यों की दक्षता पर प्रकाश डाला। मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह एकदिवसीय कार्यशाला; श्री साईं ग्रामोत्थान समिति, मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन और विश्व आयुर्वेद परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई है। कार्यशाला में विश्व आयुर्वेद परिषद् के संरक्षक वैद्य गोपाल दास मेहता, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. ए एस यादव, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्य डॉ. मनीषा राठी, फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद के प्राचार्य डॉ. श्रीकांत पटेल, मानसरोवर समूह के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सचिन जैन सहित देश भर से पधारे 300 से अधिक प्राध्यापक उपस्थित थे।