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लाड़ली बहनों को बड़ी खुशखबरी: इस महीने से 1500 रुपये मिलेंगे

अब तक 44 हजार करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और नेतृत्व में प्रदेश में नारी सशक्तिकरण का अभियान द्रुतगति जारी है। प्रदेश की लाड़ली बहनों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का किया हुआ वादा 12 नवम्बर 2025 को पूरा होने जा रहा है। एक करोड़ 26 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को सिवनी में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बड़ी हुई राशि उनके खाते में अंतरित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रत्येक लाड़ली बहना के खाते में 1500 रूपये देने की शुरूआत करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस पहल पर प्रदेश की लाड़ली बहनों ने अपने भैया मोहन के प्रति आभार जताते हुए कहा है कि वे ठीक उसी प्रकार हमारा ध्यान रख रहे हैं, जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बहन सुभद्रा का ध्यान रखा था। प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में चल रही मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। जून 2023 से अक्टूबर 2025 तक योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिलाओं को कुल 29 किस्तों में नियमित आर्थिक सहायता राशि का अंतरण किया गया है। रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। योजना से महिलाएं न केवल अपनी छोटी-छोटी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं, बल्कि बैंकिंग में प्रणाली से भी सीधे जुड़ रही हैं। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में प्रदेशभर में महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का सीधा लाभ मिल रहा है। योजना की अब तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250)  महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417 और जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 महिलाओं को लाभ मिला है। योजना के तहत बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, और मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 बहनों को लाभ मिला है। छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। इसी क्रम में राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, और बेतुल में 2 लाख 71 हजार 474 लाभार्थी पंजीकृत हुई हैं। सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है। बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, तथा नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 लाभार्थी महिलाओं को योजना की राशि प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं। दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की भावना को सशक्त किया है। महिलाओं ने इस राशि का उपयोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, और छोटे व्यापार के लिए पूंजी के रूप में किया है। लाड़ली बहना योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है बल्कि परिवारिक निर्णयों में भी उनकी भूमिका को भी सुदृढ़ कर रही है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का व्यापक प्रभाव अब प्रदेश के हर कोने में देखा जा सकता है। गाँवों से लेकर शहरों तक महिलाएँ “आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश” के निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका निभा रही हैं।  

स्वास्थ्य शिविर में 7,170 जनजातीय बंधुओं को मिला नि:शुल्क परीक्षण और उपचार

जनजातीय गौरव दिवस स्वास्थ्य शिविर में 7170 जनजातीय बंधुओं का हुआ नि:शुल्क परीक्षण एवं उपचार दिव्यांग प्रमाण-पत्र और सहायक उपकरण किये वितरित भोपाल जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर, 1 नवम्बर से 15 नवम्बर तक चल रहे विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला में वृहद जनकल्याणकारी एवं मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन डिंडोरी जिले के बरगाँव, शहपुरा में किया गया। जिले की 364 पंचायतों से जनजातीय वर्ग के लोगो को शिविर स्थल तक लाया गया। शिविर में 7170 जनजातीय भाई-बहनों ने स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और निःशुल्क उपचार का लाभ प्राप्त किया। जनजाति वर्ग के 1734 हितग्राही की  सिकल सेल एनीमिया की जाँच, 986 की एक्स-रे, 1230 के नेत्र परीक्षण उपरांत 738 चश्मे वितरण, रक्त जांच, दंत परीक्षण एवं 2195 हितग्राहियों की आयुष जाँच जैसी अनेक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। शिविर परिसर में विभिन्न विभागों के सेवा एवं सूचना शिविर भी लगाए गए, जिनमें महिला एवं बाल विकास, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जनपद पंचायत, राजस्व, शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित कई विभागों ने सहभागिता की। नागरिकों के लिए आधार अद्यतन, ई-केवाईसी, यूडीआईडी प्रमाण-पत्र, पेंशन संबंधी कार्य, पात्रता जाँच तथा विभिन्न योजनाओं के आवेदन जैसी सुविधाएँ भी एक ही स्थान पर प्रदान की गईं। शिविर में दिव्यांगजन न्यायालय का आयोजन भी किया गया, जिसमें मौके पर ही 482 दिव्यांगजनो को 201 दिव्यांग प्रमाण-पत्र और 1856 सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इसके लिए प्रशासन ने पिछले 15 दिवस से जनपद स्तर पर आयोजित दिव्यांग शिविर के माध्यम से दिव्यांगनों को चिह्नांकित किया एवं प्रमाण-पत्र एवं किट उपकरण आदि भी वितरण किए। दिव्यांग कोर्ट के माध्यम से दिव्यांगजन के क्लेम का निराकरण भी किया गया।

जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में करेंगे पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में भाषण

भोपाल  पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम रवीन्द्र भवन में आयोजित किया जाएगा। आयोजन की जानकारी सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने दी।  उन्होंने बताया कि इस अवसर पर वृंदावन-मथुरा के आनंदम आश्रम के प्रमुख ऋतेश्वर जी महाराज भी उपस्थित रहेंगे।यह पहला अवसर होगा जब धनखड़ उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। उन्होंने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया था। त्यागपत्र के बाद वे केवल उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में नजर आए थे। उधर, कांग्रेस ने धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने कहा था कि पिछले महीने कहा था कि धनखड़ को उनके सभी पूर्ववर्तियों की तरह विदाई समारोह मिलना चाहिए था, जो अब तक नहीं हुआ। 

विकसित भारत बिल्डाथॉन में मध्यप्रदेश से आए 20 हजार आइडिया, नवाचार में दिखी युवाओं की चमक

विकसित भारत बिल्डाथोन में मध्यप्रदेश से 20 हजार आइडिया किये गये अपलोड मध्यप्रदेश रहा देश में 57 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल कर चौथे स्थान पर मध्यप्रदेश के एक लाख 38 हजार 582 विद्यार्थियों ने सहभागिता की भोपाल देश में विकसित भारत बिल्डाथोन-2025 का आयोजन केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और साक्षरता विभाग द्वारा किया गया। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को सहभागीता करने का अवसर प्रदान किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग प्रतियोगिता आयोजन में मुख्य रूप से सहयोग कर रहा है। बिल्डाथोन में मध्यप्रदेश के एक लाख 38 हजार 582 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विद्यार्थियों के समूह बनाकर 34 हजार 655 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने 20 हजार से अधिक आइडिया और प्रोजेक्ट अपलोड किये। यह आइडिया पूरे देश के 46.73 प्रतिशत के विरूद्ध 57.73 प्रतिशत रहा। मध्यप्रदेश इस मामले में देश में चौथे स्थान पर रहा। देश में पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश, दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र और तीसरे स्थान पर असम रहा। नवाचार को किया जा रहा है प्रोत्साहित बिल्डाथोन का अर्थ एक ऐसी प्रतियोगिता है, जहां प्रतिभागी एक निश्चित समय-सीमा में किसी समास्या को हल करने के लिये मिलकर काम करते है और कुछ नया बनाते है। विकसित भारत बिल्डाथोन एक राष्ट्रीय नवाचार आंदोलन है जिसका उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता ओर उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह प्रतियोगिता अटल इनोवेशन मिशन एवं नीति आयोग के सहयोग से आयोजित की गई है। इसका शुभारंभ केन्द्रीय शिक्षा मंत्री  धर्मेन्द्र प्रधान ने सितम्बर माह के चौथे सप्ताह में किया था। विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में 4 विषयों आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल और समृद्ध भारत विषय दिये गये थे। जूरी का गठन बिल्डाथोनप्रतियोगिता के अगले चरण में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रत्येक जिले के लिये जूरी गठित की गई है, जो जिले से सर्वश्रेष्ठ 2 प्रोजेक्ट या प्रोटोटाइप का चयन करेगी। इस प्रकार प्रत्येक जिले के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 2 पुरस्कार दिये जायेंगे। जिला स्तर प्रतियोगिता में विजेता रहे प्रोजेक्ट अथवा प्रोटोटाइप में से राज्य स्तर पर चयन किया जायेगा। राज्य स्तर पर विजेता छात्र अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिता में सहभागिता करेंगे।  

सीएम डॉ. मोहन यादव 12 नवंबर को भोपाल में नेशनल कॉन्क्लेव का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नेशनल कॉन्क्लेव का भोपाल में 12 नवंबर को करेंगे शुभारंभ राज्यपाल  पटेल समापन सत्र के होंगे मुख्य अतिथि स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, प्रशासन पर विशेषज्ञ करेंगे चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजाति कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और मध्यप्रदेश जनजाति कार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जनजाति कल्याण के लिए कार्य कर रहे अशासकीय संगठनो की नेशनल कॉन्क्लेव का भोपाल में 12 नवंबर को शुभारंभ करेंगे। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल नेशनल कॉन्क्लेव के समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे। जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह मुख्य अतिथि होंगे। कॉन्क्लेव का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया है। इसमें देश के 500 से ज्यादा विषय विशेषज्ञ जनजातीय कल्याण से जुड़े हुए विषयों पर चर्चा करेंगे। नेशनल कॉन्क्लेव में विषय विशेषज्ञ स्वैच्छिक संस्थाओं एवं प्रयासों के माध्यम से जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। जनजाति समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने-अपने विचार रखेंगे। जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में शैक्षिक संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में शैक्षिक संगठनों की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी। जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमो की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार होगा। कॉन्क्लेव में जनजातीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विचार विमर्श होगा। इसमें स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका तय की जाएगी, साथ ही वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों पर भी चर्चा होगी। कॉन्क्लेव में जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर भी चर्चा होगी।  

मोहन सरकार ने महिलाओं को दी बड़ी राहत, लाडली बहना योजना की रकम बढ़ाई, आज खाते में आएंगे पैसे

भोपाल  अब लाड़ली बहनों के खाते में कितने पैसे आएंगे? यदि आप मध्य प्रदेश के निवासी हैं तो ये सवाल जरूर आपके मन में आ रहा होगा. तो बता दें कि मध्यप्रदेश सरकार ने लाडली बहना योजना की मासिक सहायता बढ़ा दी है. इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है. मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए नवंबर का महीना खास है, क्योंकि इस महीने से उन्हें बढ़ी हुई किस्त मिलेगी. यह योजना 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी. पहले महिलाओं के खाते में 1000 आते थे. अब हर महिला को सरकार की ओर से हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे. नवंबर 2025 से यह दूसरी बार है जब बढ़ी हुई राशि दी जा रही है, जो आगे भी जारी रहेगी. मध्यप्रदेश सरकार ने सोमवार को लाडली बहना योजना के तहत मासिक मदद को 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये करने को मंजूरी दी है. 12 नवंबर को महिलाओं के खाते में आएगा पैसा एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना की 1.26 करोड़ से ज्यादा महिला लाभार्थियों को इस महीने से बढ़ी हुई राशि मिलनी शुरू होगी. इसके लिए सरकार को 1793.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा. अब 2025-26 में योजना का कुल अनुमानित व्यय बढ़कर 20,450.99 करोड़ रुपये हो गया है. मुख्यमंत्री यादव 12 नवंबर को सिवनी जिले में एक कार्यक्रम के दौरान बढ़ी हुई राशि का वितरण शुरू करेंगे. सरकारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में लाड़ली बहना योजना की मासिक सहायता 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये करने को मंजूरी दी गई. मुख्यमंत्री यादव ने 12 अक्टूबर को श्योपुर में एक कार्यक्रम में कहा था कि भाई दूज और दिवाली पर महिलाओं के लिए खुशखबरी आएगी, क्योंकि योजना की राशि बढ़ाई जाएगी. योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी इस योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान 10 जून, 2023 को हुई थी, तब इसके तहत सहायता राशि 1000 रुपये थी. सरकार ने सितंबर 2023 में ही इसे संशोधित कर 1,250 रुपये कर दिया था. इस योजना को मध्यप्रदेश में बीजेपी के लिए चुनावी बाजी पलटने वाला माना जाता है.

मध्यप्रदेश में नई पहल: टीचर अब डांस-ड्रामा के जरिए समझाएंगे कठिन विषय

 भोपाल  सरकारी स्कूलों में अब अगर नृत्य-नाटक करते शिक्षक दिखें तो यह मत सोचिएगा कि वे पढ़ाई छोड़कर मस्ती कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्रदर्शन कलाओं के जरिए पढ़ाने की तैयारी चल रही है। योजना है कि कठपुतली नृत्य, मुखौटा, मूर्तियों, कविता, गीत और चित्रों के जरिए गणित-विज्ञान के गूढ़ संदर्भों को समझाया जाए, ताकि कक्षा का वातावरण आनंददायक बना रहे और बच्चों को कठिन विषय आसानी से समझ आ जाए। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) समृद्धि-2025 में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रदेश के 30 जिलों के 65 शिक्षकों का चयन इसके लिए किया गया है। इनके बीच प्रतियोगिता भी कराई गई। ये शिक्षक अपने जिले में मुख्य प्रशिक्षक होंगे और अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। हर विषय को कला से जोड़ने का प्रयास स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम के तहत उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एनसीईआरटी की ओर से प्रशिक्षक शिक्षकों का प्रशिक्षित कर रहे हैं। स्कूलों में इसकी अधिकारी निगरानी भी करेंगे, ताकि हर विषय को कला से जोड़ते हुए पढ़ाया जा सके। इस विषय में ये गतिविधि जीव विज्ञान – सांदीपनि विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने पाचन तंत्र के ऊपर नुक्कड़ नाटक तैयार किया है। इसमें उन्होंन 35 बच्चों को लिया था और उन्हें भोजन और एंजाइम बनाया था। इसमें कुछ बच्चों ने मिट्टी से पाचनतंत्र के माडल बनाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया था। गणित – शासकीय नवीन कन्या उमावि की शिक्षिका प्रेरणा बर्डे ने गणित के कठिन प्रमेय और सूत्र को आकृति बनाकर समझाया। इसमें वह सालिड व प्लेन आकृति को थ्रीडी माडल से समझा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने त्रिशंकु व गोला को भी आकृति के माध्यम से पढ़ा रही हैं। साथ ही त्रिकोणमिति के कठिन सूत्र को भी आसान तरीके से कविता के माध्यम से बता रही हैं। कठिन विषयों को पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा     एनसीईआरटी का आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को गीत-संगीत व कला के माध्यम से कठिन विषयों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। – दिनेश शर्मा, नोडल अधिकारी, समृद्धि कार्यक्रम।  

हर नर्मदा परिक्रमावासी को मिलेगा सरकारी प्रमाणपत्र, परिक्रमा के दौरान आसान होगा प्रबंधन

भोपाल  प्रदेश में अब हर नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की जानकारी सरकार के पास होगी। इसके लिए राज्य सरकार ने नर्मदा नदी और नर्मदा परिक्रमा मार्ग से जुड़े जिलों की ग्राम पंचायतों को आदेश दिए हैं कि वे परिक्रमावासियों को प्रमाण पत्र जारी करें। इसके जरिये सरकार डेटा अपडेट करेगी।  सरकार ने पंचायतों से कहा है कि वे परिक्रमावासियों की समस्याओं का समाधान करने में मदद करें। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने जनपद पंचायतों से 31 अक्टूबर तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी तलब की है। प्रदेश में नर्मदा नदी को मां नर्मदा के रूप में पूजा जाता है। हर साल कई श्रद्धालु अमरकंटक से लेकर अरब सागर और फिर वापस अमरकंटक तक नर्मदा की परिक्रमा करते हैं। अब प्रमाण पत्र होने से ग्रामीण इलाकों में परिक्रमा करते समय परिक्रमावासियों को पहचान दिखाने में आसानी होगी। प्रमाण पत्र लेने वाले परिक्रमावासियों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं होना चाहिए। अब आपराधिक प्रकरण वाले लोग नर्मदा की परिक्रमा नहीं कर सकेंगे  प्रदेश के नर्मदा नदी वाले सोलह जिलों यथा अनूपपुर, डिण्डौरी, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बड़वानी, आलीराजपुर, धार, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास, खण्डवा एवं खरगौन से नर्मदा परिक्रमा की जाती है तथा अब यह परिक्रमा वही लोग कर पायेंगे जिनके विरुध्द कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा। परिक्रमा के दौरान पडने वाली ग्राम पंचायतों में प्रवेश के दौरान परिक्रमावासी को अपने नाम, पते एवं मोबाइन नंबर के साथ आवेदन देना होगा जिसमें उसे अण्डरटेकिंग देनी होगी कि उसके विरुध्द कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। इस आवेदन के साथ उआईडी यथा आधार या वोटर या समग्र आईडी लगाना होगी जिस पर संबंधित ग्राम पंचायत आवेदक को एक प्रमाण-पत्र जारी करेगी कि आवेदक जीवन दायिनी मांग नर्मदा की यात्रा कर रहा है। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने संबंधित कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परिपत्र जारी कर दिया है। ग्राम पंचायत द्वारा जारी नर्मदा परिक्रमावासी होने का प्रमाण-पत्र पुलिस एवं प्रशासन भी पहचान के रुप में मान्य करेगी। ऐसे जारी होंगे प्रमाणपत्र     परिक्रमावासियों को ग्राम पंचायत को आवेदन देना होगा, जिसमें दो फोटो और एक पहचान पत्र लगाना होगा।     आवेदन मिलने पर ग्राम पंचायत तय फॉर्मेट में प्रमाण पत्र जारी करेगी।     ग्राम पंचायत को परिक्रमावासियों के लिए एक रजिस्टर बनाना होगा।     प्रमाण पत्र दिखाकर परिक्रमावासी नर्मदा परिक्रमा के दौरान किसी भी गांव में आसानी से प्रवेश कर सकेंगे।     स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी इस प्रमाण पत्र को परिक्रमावासी की पहचान के रूप में मानेंगे।     सभी ग्राम पंचायतें भविष्य में इसी आधार पर कार्य करेंगी।     अब तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी पंचायतें 15 दिन के भीतर संचालनालय को भेजेंगी। इस निर्णय से नर्मदा परिक्रमा वासियों को पहचान के लिए दस्तावेज की कमी से होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकेगा और उनकी यात्रा आसान होगी।    

भोपाल में इज्तिमा की बड़ी तैयारी, बुधवार को पहुंचेंगी जमाअतें, 600 एकड़ में हो रही तैयारी

भोपाल राजधानी भोपाल से करीब 15 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड स्थित घासीपुरा में 14 नवंबर से शुरू होने जा रहा 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा (Aalmi Tablighi Ijtema) पूरी तरह से तैयार है। चार दिवसीय यह धार्मिक आयोजन 17 नवंबर तक चलेगा। इस बार इज्तिमा कमेटी ने व्यवस्थाओं में कई बड़े बदलाव किए हैं, ताकि लाखों जायरीनों (Pilgrims) को किसी तरह की दिक्कत न हो।भोपाल स्टेशन परिसर में करीब 50 हजार लोगों के लिए खाना तैयार किया गया है। इज्तिमा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बुधवार से देश के अलग-अलग हिस्सों से जमाअतें भोपाल पहुंचना शुरू करेंगी। सबसे ज्यादा भीड़ शुक्रवार से रविवार के बीच रहने की संभावना है, जिसके लिए रेलवे और प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यवस्था मजबूत की है। इस बार कमेटी की अपनी 300 बसें इज्तिमा कमेटी के मीडिया प्रभारी उमर हफीज खान ने बताया कि इस वर्ष कमेटी ने पहली बार आरटीओ (RTO) से बसों की मांग नहीं की है। इसके बजाय समिति ने खुद की 300 बसों का प्रबंध कर लिया है। यह व्यवस्था खास तौर पर अंतिम दिन होने वाली सामूहिक दुआ (Mass Prayer) के लिए की गई है। पहले यात्रियों को बस न मिलने पर 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था, लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं रहेगी। इज्तिमा स्थल पर आने वाले सभी प्रवेश द्वारों (Entry Points) पर मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। चारों गेट्स पर 10 बेड वाले अस्थायी अस्पताल भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। 600 एकड़ में फैला इज्तिमागाह, 71 पार्किंग जोन तैयार इस बार इज्तिमा स्थल करीब 600 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 300 एकड़ सिर्फ पार्किंग (Parking Zones) के लिए आरक्षित रखे गए हैं। 71 पार्किंग जोन बनाए गए हैं, जो पिछले साल से दो अधिक हैं। इन पार्किंग स्थलों में लगभग डेढ़ लाख दोपहिया वाहन, 50 हजार चारपहिया, 1000 बसें, 1000 ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और 1000 ऑटो खड़े हो सकेंगे। कमेटी ने बताया कि इस बार करीब 12 लाख जायरीनों के आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए सभी व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं और तैयारियों का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।     बुधवार से देशभर से जमाअतें पहुंचना शुरू होंगी।     50 हजार लोगों का खाना तैयार।     भोपाल–इटारसी और भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस में एक्स्ट्रा कोच लग सकते हैं।     4 नए टिकट काउंटर और 6 एटीवीएम मशीनें।     स्टेशन पर सुरक्षा, मेडिकल और स्टाफ की अतिरिक्त व्यवस्था।     इज्तिमा की अवधि में प्लेटफॉर्म 6 की पार्किंग बंद रहेगी। रेलवे स्टेशन पर विशेष इंतजाम भोपाल रेलवे स्टेशन (Bhopal Railway Station) पर भी इज्तिमा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार स्टेशन परिसर में करीब 50 हजार लोगों के लिए खाना तैयार किया गया है। भीड़ को देखते हुए स्टेशन परिसर में अतिरिक्त टिकट काउंटर (Ticket Counters) भी खोले जाएंगे। 2 दिसंबर से चार नए टिकट काउंटर शुरू किए जाएंगे, जिनमें से दो प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर बने पंडाल में और दो स्टेशन परिसर में रहेंगे। इसके अलावा रेलवे दो ट्रेनों में एक्स्ट्रा कोच (Extra Coaches) जोड़ने की तैयारी कर रहा है- भोपाल–इटारसी एक्सप्रेस (Train No. 11272) और भोपाल–जोधपुर एक्सप्रेस (Train No. 14814)। जीआरपी और आरपीएफ की टीमें तैनात इज्तिमा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जीआरपी (GRP), आरपीएफ (RPF) और स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया है। स्टेशन और इज्तिमा स्थल दोनों जगह निगरानी के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। भीड़ नियंत्रण (Crowd Control) के लिए दोनों फुटओवर ब्रिज (FOB) पर अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं ताकि आवाजाही व्यवस्थित ढंग से हो सके। ट्रैफिक विभाग और रेलवे ने किए इंतजाम इज्तिमा के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने 150 से अधिक ट्रेनों के कोच बंद रखने का निर्णय लिया है। बिना आरक्षण वाले यात्रियों के लिए मोबाइल टिकट वैन की व्यवस्था की गई है। मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा और आम नागरिकों के लिए वैकल्पिक रास्ते तय किए गए हैं, ताकि सामान्य यातायात बाधित न हो। फायर टीम और वालंटियर्स की तैनाती श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता के लिए दमकल विभाग की विशेष टीमों को इज्तिमा स्थल पर तैनात किया जा रहा है। इसके अलावा, प्रति शिफ्ट 500 वालंटियर्स ड्यूटी पर रहेंगे, जो आगंतुकों को दिशा-निर्देश देने और आपातकालीन सहायता प्रदान करने का काम करेंगे। प्रशासन ने 4,500 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग की है, जिन्हें ट्रैफिक, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा निगरानी में लगाया जाएगा। निगरानी और बैरिकेडिंग की पुख्ता व्यवस्था इज्तिमा स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे, चेकिंग प्वाइंट्स और बैरिकेडिंग की जा रही है। प्रशासन ने छह प्रमुख मार्गों को केवल इज्तिमा यातायात के लिए आरक्षित किया है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू बनी रहे।     आयोजन तिथि : 14 से 17 नवंबर 2025     स्थान : ईटखेड़ी (घासीपुरा), भोपाल     सुरक्षा बल : 850 पुलिसकर्मी + 4,500 अतिरिक्त जवान     फायर टीम : प्रति शिफ्ट 500 वालंटियर्स     रेलवे सुविधा : मोबाइल टिकट वैन, सीमित ट्रेन संचालन प्रशासन का उद्देश्य : श्रद्धा के साथ शांति और अनुशासन नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और रेलवे मिलकर अस्थायी शौचालय, पीने के पानी, मेडिकल सहायता और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रयास यही है कि भोपाल का यह इज्तिमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बने, बल्कि अनुशासन और प्रबंधन की मिसाल भी पेश करे। 120 एकड़ में विशाल पंडाल इज्तिमा स्थल पर 120 एकड़ में विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है। हजारों वॉलंटियर्स (Volunteers) खानपान, जलापूर्ति और प्रकाश व्यवस्था में जुटे हुए हैं। बुधवार से देश के अलग-अलग हिस्सों से जमाअतें (Delegations) भोपाल पहुंचना शुरू करेंगी। भीड़ सबसे ज्यादा शुक्रवार से रविवार के बीच रहने की उम्मीद है। 17 नवंबर को सामूहिक दुआ के साथ चार दिवसीय इज्तिमा का समापन होगा। 20% बढ़े इंतजाम, 350 एकड़ में पार्किंग पिछले वर्ष की तुलना में इस बार तैयारियों में 20% की वृद्धि की गई है। पार्किंग एरिया को बढ़ाकर 350 एकड़ तक किया गया है। पिछले साल जहां 66 पार्किंग जोन थे, वहीं इस बार 71 पार्किंग जोन … Read more

मध्यप्रदेश में खास खबर: एक्सपर्ट्स को उम्मीद, इंदौर जू में जन्मेगा दुर्लभ ब्लैक टाइगर

इंदौर दुनिया भर में रहस्य बने दुर्लभ ब्लैक टाइगर भविष्य में पूरी तरह काले नजर आ सकते हैं. जिनकी उत्पत्ति के लिए इंदौर में दुर्लभ काले और सफेद टाइगर के मेल से देश के पहले पूरी तरह काले दुर्लभ टाइगर की उत्पत्ति के लिए वंशावली खंगाली जा रही है. लंबे समय से ब्लैक टाइगर दुनिया भर के लिए रहस्य बने हुए हैं खास बात यह है कि अपने शरीर पर गहरे काले रंग की पट्टिका वाले ब्लैक मेलेनिस्टिक टाइगर सिर्फ भारत में ही पाए जाते हैं, जो फिलहाल नंदनकानन अभ्यारण के अलावा इंदौर के चिड़ियाघर में मौजूद हैं. टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में नए साल 2026 में एक नया मेहमान जन्म ले सकता है। प्रदेश के लिए यह पहला मौका होगा जब मेलानिस्टिक टाइगर (ब्लैकधारी वाला बाघ) का जन्म होगा। दरअसल इसके लिए इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में कुछ समय पहले मेलानिस्टिक टाइगर की व्हाइट फीमेल टाइगर से मेटिंग कराई है। इसके बाद एक्सपर्ट्स ने उम्मीद जताई है कि इंदौर जू में पूरी तरह काले रंग के टाइगर का जन्म हो सकता है। खास बात यह कि देश में संभवत: यह पशु मेटिंग में एक तरह अलग प्रयोग है। यह देश का एकमात्र ऐसा टाइगर हो सकता है जिसका रंग पूरी तरह से काला होगा। देश में उड़ीसा के नंदन कानन चिड़ियाघर के अलावा इंदौर जू में ऐसा दुर्लभ टाइगर मौजूद है, जिसकी धारियां काले रंग की है। जिसे मेलानिस्टिक टाइगर (काला बाघ) कहा जाता है। ब्लैक टाइगर की कोई विशिष्ट प्रजाति या भौगोलिक उप प्रजाति नहीं है, बल्कि यह दुर्लभ रंग वाला टाइगर होता है. जिनकी त्वचा बाल और फर आदि में गहरे काले पिगमेंट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे उसका रंग काला हो जाता है. प्राणी विज्ञान के अनुसार, मिलेनिज्म एक जेनेटिक म्यूटेशन है जो स्तनधारी सरीसृप और कीड़ों की अलग-अलग संततियों में देखने को मिलता है, लेकिन खास बात यह है कि दुनिया भर में सिर्फ भारत के टाइगर में ही इस तरह का म्यूटेशन दिखाई देता है. इंदौर ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश में अलग मामला जू प्रभारी डॉ.उत्तम यादव के मुताबिक यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ ही माह में इंदौर के चिड़ियाघर में देश का पहला काले रंग का बाघ जन्म ले। इन दोनों अलग-अलग प्रजातियों के टाइगर के बीच सितंबर में मेटिंग हुई थी। इसमें ब्लैक टाइगर का जीन डोमिनेटिंग जीन रहता है। इसमें गर्भकाल 300 से 310 दिनों के बीच का होता है। अभी मादा व्हाइट टाइगर की बदलती प्रकृति से पूरे संकेत हैं कि नया मेहमान कंसिव हो चुका है। अगर सबकुछ अच्छा रहा तो संभव है कि 2026 में मप्र में पहली बार मेलानिस्टिक टाइगर प्रजाति का नया मेहमान इंदौर में जन्म ले। यह सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि मप्र में एक अलग मामला होगा। ऐसे होते हैं मेलानिस्टिक टाइगर मेलानिस्टिक टाइगर के शरीर पर चौड़ी और मोटी काली धारियां होती हैं। ये धारियां गहरी और फैली हुई होती हैं जिससे बाघ पूरी तरह ब्लैक नजर आता है। सामान्य रूप से टाइगर के शरीर पर येलो या चॉकलेटी रंग की धारियां नजर आती है। चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक मेलानिस्टिक टाइगर इंदौर जू में आकर्षण का केंद्र है जो अपनी खास कुदरती संरचना के चलते सभी का ध्यान आकर्षित करता है। वंशावली और हेटेरो जेनेसिस प्रक्रिया का पालन इंदौर प्राणी उद्यान के प्राणी विशेषज्ञ डॉ उत्तम यादव बताते हैं कि, ''देश के पहले पूरी तरह ब्लैक टाइगर की उत्पत्ति हो सके इसके लिए यहां पहली बार ब्लैक मेलोनेस्टिक टाइगर का व्हाइट टाइगर से क्रॉस कराया गया है. इसी तरह प्राणी उद्यान में मौजूद येलो टाइगर की भी क्रॉस ब्रीडिंग कराई गई है, जिससे कि दुर्लभ रंगों वाले शावकों को प्राप्त किया जा सके.'' फिलहाल यहां दुर्लभ प्रजाति के जो टाइगर मौजूद हैं जिनके बीच F1-f2 जेनरेशन के लिहाज से क्रॉस कराने के बाद 100 प्रतिशत काले ब्लैक मेलेनिस्टिक टाइगर की उत्पत्ति के प्रयास हो रहे हैं. माना जा रहा है कि अगले कुछ माह में यहां जो टाइगर जन्म लेंगे उनमें देश का पहला पूरी तरह से ब्लैक टाइगर भी जन्म ले सकता है. ब्लैक के अलावा व्हाइट और पीले रंग के शावकों का भी जन्म होगा. डॉ यादव के मुताबिक, ''इंदौर में जो ब्लैक टाइगर हैं वह फिलहाल 70% ब्लैक हैं लेकिन आने वाली जनरेशन में प्रयास किया जा रहे हैं कि जो भी ब्लैक टाइगर पैदा हों, उसका रंग 100 फीसदी काला हो, जो अपने आप में दुर्लभ होकर देश का पहले पूरी तरह ब्लैक टाइगर के रूप में जन्म ले सके. क्या होती है पेडिग्री शीट जिस प्रकार इंसानों में जेनेटिकली एकरूपता और एक दूसरे से अंतर होता है ठीक उसी प्रकार टाइगर में भी अलग-अलग जीन के मिलने से उन्नत प्रजाति विकसित होती है. जैसे परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच रिश्तों और वंश को अलग-अलग दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है. वंशावली के आधार पर ही संबंधित प्राणी के आनुवांशिक लक्षणों उनकी बीमारी और जीवन की स्थिति का आकलन किया जाता है. यही वजह है कि इंसानों में ब्लड ग्रुप गोत्र जैसी अन्य व्यवस्था की तरह ही टाइगर में भी उन्नत नस्ल प्राप्त करने के लिए उनकी क्रॉसिंग में वंशावली का ध्यान रखना जरूरी है. अलग-अलग वंशावली की क्रॉसिंग से उत्पन्न होने वाले टाइगर अपने खास गुण और रंग के अलावा स्वस्थ्य शरीर वाले होते हैं. जबकि एक ही जीन की क्रॉसिंग से उत्पन्न प्राणियों की प्रजाति के बीमार होने के अलावा विलुप्त होने की आशंका ज्यादा रहती है.