samacharsecretary.com

आज से MP में हेलमेट नियम सख्त, पीछे बैठने वालों को भी पहनना होगा, इन 5 जिलों पर फोकस

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क हादसों में बढ़ती मौतों को देखते हुए आज से प्रदेशभर में हेलमेट अनिवार्यता को लेकर पुलिस का विशेष अभियान शुरू हो गया है. अब न केवल दोपहिया वाहन चालक, बल्कि पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी हेलमेट पहनना जरूरी होगा. राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 6 नवंबर से पूरे प्रदेश में यह अभियान शुरू किया गया है. इस दौरान ट्रैफिक पुलिस हेलमेट न पहनने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी. पुलिस का कहना है कि यह अभियान केवल चालान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी फोकस किया जाएगा. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन इन पांच जिलों में अभियान को लेकर विशेष सख्ती बरती जाएगी. कारण यह है कि पूरे प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में से 58 प्रतिशत मौतें इन्हीं जिलों में दर्ज हुई हैं.  2 व्हीलर्स पर अगर एक शख्स ने हेलमेट पहना है और दूसरे ने नहीं तो 300 रुपए का चालान होगा और अगर दोनों ने हेलमेट नहीं पहना तो 500 रुपए का जुर्माना होगा.  4 साल की उम्र से बड़े पिलियन राइडर (दोपहिया पर ड्राइवर के पीछे बैठने वाले) के हेलमेट न पहनने पर 300 रुपए का चालान बनता है। डीआईजी टीके विद्यार्थी ने कहा- फिलहाल 5 बड़े शहरों में इसे लागू किया गया है। अगले चरण में इसे पूरे प्रदेश में लागू करेंगे। इस अभियान के पहले दिन गुरुवार को भोपाल में ट्रैफिक पुलिस 20 पॉइंट्स पर चालानी कार्रवाई कर रही है। इस दौरान अलग-अलग नजारे सामने आ रहे हैं। कोई कह रहा है कि पुलिसकर्मी सामने से गुजरा, तब चालान क्यों नहीं किया? किसी ने कहा- बच्ची एडमिट है। जल्दी में हेलमेट भूल गया।  एक नजर आंकड़ों पर:- – 2024 में प्रदेशभर में 14 हजार 791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई  – इंदौर: शहर में 2 हजार 425 और ग्रामीण क्षेत्र में 290 मौतें – भोपाल: शहर में 945 और ग्रामीण क्षेत्र में 235 मौतें – जबलपुर: 2,035 मौतें – उज्जैन: 1,536 मौतें – ग्वालियर: 1,049 मौतें – इन पांच जिलों में कुल 8 हजार 515 लोगों की जान गई, जो राज्य की कुल मौतों का 58 प्रतिशत है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद का भविष्य

सीहोर  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने वहां के दौरे के अनुभव बताए. शिवराज ने बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम और मुख्यमंत्री पद को लेकर दावा किया. शिवराज सिंह चौहान का कहना है "इसमें एक परसेंट भी शक नहीं कि बिहार में किसकी सरकार बनने जा रही है. उन्होंने खुद बिहार का दौरा किया और और वह दावे से कह सकते हैं कि एनडीए बहुत से सरकार बनाने जा रही है." राहुल गांधी के मछली पकड़ने पर चुटकी ली सीहोर में शिवराज सिंह चौहान ने कहा "बिहार में महागठबंधन तो वोटिंग से पहले ही उखड़ गया. उनका आत्मविश्वास हिल गया है. उनको पता है कि जंगलराज आज भी लोगों को याद है. महागठबंधन के नेता हथियार डाल चुके हैं. यहां तक कि राहुल गांधी चुनाव प्रचार छोड़कर मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं. जलेबी तल रहे हैं, उनको पता है कि चुनाव NDA भारी बहुमत से जीतेगा. परिणाम स्पष्ट है कि NDA की महाविजय होने वाली है. इस बात को महागठबंधन के नेता भी एक प्रकार से स्वीकार कर चुके हैं." दो दिन पहले पटना में थे शिवराज केंद्रीय कृषि शिवराज सिंह चौहान 4 अक्टूबर को पटना में ही थे. उन्होंने पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में आयोजित मखाना महोत्सव 2025 में भाग लिया. इससे पहले भी शिवराज सिंह चौहान लगातार बिहार का दौरा कर चुके हैं. उनका कहना है "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 64 हजार करोड़ करोड़ रुपये की सौगात दी है. एनडीए के कार्यकाल में बिहार में विकास हुआ है. इस बात को बिहार की जनता भी कह रही है. बिहार की जनता आज भी लालू के जंगलराज को याद करके डर जाती है." बिहार में सबसे बड़ा मुद्दा सुशासन शिवराज का कहना है "बिहार में इस बार चुनाव के मुद्दे विकास के अलावा सुशासन भी है. नीतीश कुमार के कार्यकाल कानून व्यवस्था दुरुस्त है. राज्य में हर ओर विकास किया गया है. एनडीए ने जन कल्याण की कई योजनाएं बनाई हैं. महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया है. बिहार में लखपति दीदी बनाने का अभियान सारहनीय है. हर बहन के खाते में 10,000 रुपये डाले गए हैं." बिहार में मुख्यमंत्री को लेकर कोई गफलत नहीं बिहार में मुख्यमंत्री के सवाल पर शिवराज ने साफ किया "कहीं कोई भ्रम नहीं है. एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है. मुख्यमंत्री के पद को लेकर विपक्षी दल भ्रम फैला रहे हैं. लेकिन बिहार की जनता विपक्षी दलों की बातों में नहीं आने वाली. बिहार में महागठबंधन का मतलब डर है और एनडीए यानी भरोसा है. बिहार की जनता महागठबंधन की सच्चाई जान चुकी है." 

अचानक बिगड़ी ADJ तपेश कुमार दुबे की तबियत, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

आमला बैतूल जिले के आमला में पदस्थ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) तपेश कुमार दुबे के निधन से न्याय जगत के साथ ही प्रशासनिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई. वह आमला क्षेत्र के लादी गांव में विजिट करने गए थे. अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई. तुरंत ही मौके पर डॉक्टर्स को बुलाया गया. डॉक्टर्स ने चेकअप करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. माना जा रहा है कि उन्हें अचानक हार्ट अटैक पड़ा. वह 55 वर्ष के थे. तबियत बिगड़ते ही डॉक्टर्स को बुलाया मौके पर मौजूद अफसरों ने लादी गांव में विजिट के दौरान एडीजे तपेश कुमार दुबे को अचानक अस्वस्थता महसूस हुई. दौरे में साथ चल रहे अफसरों ने तुरंत मौके पर चिकित्सकों को बुलाया. लेकिन डॉक्टरों ने जांच करने के बाद उन्हें मृत बताया. इससे सभी न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा कर्मचारी स्तब्ध रह गए. एसडीएम बडोनिया ने बताया "एडीजे तपेश कुमार दुबे एक अत्यंत समर्पित और ईमानदार अधिकारी थे. यह पूरी न्यायिक सेवा के लिए एक बड़ी क्षति है. प्रशासन इस घटना से गहराई से स्तब्ध हैं.” छिंदवाड़ा में हुआ अंतिम संस्कार अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) तपेश कुमार दुबे मूल रूप से छिंदवाड़ा शहर के पटेल कॉलोनी के रहने वाले थे. उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. शासन की ओर से उनके पार्थिव शरीर को उनके गृह ग्राम छिंदवाड़ा भेजने की आवश्यक व्यवस्था की गई. उनका अंतिम संस्कार छिंदवाड़ा के पातालेश्वर मोक्षधाम में हुआ. एडीजे तपेश दुबे ने वकील के रूप में छिंदवाड़ा में कई वर्षों तक काम किया. हार्ट अटैक के लक्षण हार्ट अटैक आने से पहले हार्ट की मांसपेशियों में रक्त संचार रुक जाता है. इस पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. हार्ट अटैक आने से पहले इन संकेतों को समझें.     सीने में दर्द या बेचैनी     शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द     सांस लेने में कठिनाई     पसीना आना     मतली या उलटी     थकान     चक्कर आना

कलेक्टर बनकर शिक्षक: पार्थ जैसवाल ने बच्चों को दी गणित की क्लास और किया चौंकाने वाला सवाल

छतरपुर छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो गया है. इस वायरल वीडियो में कलेक्टर पार्थ जैसवाल कक्षा सातवीं के छात्र राजाराम लोधी को पढ़ाते हुए नजर आ रहे हैं. इसके अलावा कलेक्टर कक्षा आठवीं के छात्र सरोज रजक से आकाश का पर्यायवाची और छात्र ज्योति आदिवासी से अश्व का पर्यायवाची भी पूछते नजर आते हैं. वीडियो में आप देख सकते हैं कि कलेक्टर पार्थ जायसवाल मैथ्स टीचर बनकर छात्र को गणित का गुणनखंड सिखाते नजर आ रहे हैं. कलेक्टर का ये अंदाज देखकर सोशल मीडिया में लोग अब उनकी प्रशंसा कर रहे हैं. शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ाया कलेक्टर के इस अंदाज को देखकर ऐसा लग रहा है कि मानो ये कोई कलेक्टर नहीं एक साधारण शिक्षक हैं, जो बच्चों को बहुत प्यार से समझा कर पढ़ा रहे हैं. बता दें, बीते  छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल बड़ामलहरा अंतर्गत ग्राम वीरों के शासकीय माध्यमिक शाला का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे. इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री नमः शिवाय अरजरिया, एसडीएम आयुष जैन, जनपद सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. शिक्षकों से की बातचीत इस दौरान कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने शाला में शिक्षकों की सार्थक ऐप पर और बच्चों की उपस्थिति रजिस्टर में जांची. शाला में छात्रों की संख्या कम होने पर होने पर नाराजगी भी व्यक्त की और छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए शिक्षकों को छात्रों के अभिभावकों से संपर्क स्थापित करने के निर्देश दिए और उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश भी दिए. कलेक्टर ने छात्रों से किया संवाद कलेक्टर ने कक्षा 7वीं और 8वीं के छात्रों के साथ संवाद भी स्थापित किया और उनको मिलने वाले दोपहर के भोजन और गणवेश के पैसे प्राप्त हो रहे या नहीं इसके बारे में छात्रों से पूछा. जिसमें छात्रों द्वारा बताया गया कि 600 रुपए खातों में गणवेश के लिए प्राप्त हो रहे है. कलेक्टर ने शिक्षकों से कहा कि छात्र शाला में ड्रेस पहनकर आएं. साथ ही कलेक्टर ने कक्षा 7वीं के छात्र राजाराम लोधी से बात करते हुए उन्हें गुणनखंड करना सिखाया और कक्षा 8वीं को छात्र सरोज रजक से आकाश का पर्यायवाची, छात्र ज्योति आदिवासी से अश्व का पर्यायवाची पूछा गया.

सुभाश्री मोदक पर आरोप: होटल में संबंध और बिजनेस पार्टनर का झांसा देकर एयरफोर्स जवान से ऐंठे 14 लाख

ग्वालियर  भारतीय वायुसेना के एक जवान से सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर लाखों रुपये ठग लिया गया। महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में पदस्थ लीडिंग एयरक्राफ्ट मैन अमित ने ग्वालियर एसपी क और महाराजपुरा थाने में आवेदन देकर 14 लाख रुपए की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल की रहने वाली सुभाश्री मोदक नामक युवती के हनीट्रैप का शिकार हुआ है। पश्चिम बंगाल की युवती से हुई दोस्ती मामला फरवरी 2025 का है, जब पीड़ित की पहचान “Qwack-Qwack” नामक सोशल मीडिया ऐप के जरिए सुभाश्री से हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद युवती ने खुद को इवेंट ऑर्गेनाइजर बताया और निवेश पर मुनाफा देने का लालच दिया। उसके झांसे में आकर अमित ने 28 फरवरी से 11 मार्च तक अलग-अलग किश्तों में करीब तीन लाख रुपए ट्रांसफर किए। युवती ने सिलीगुड़ी में “होली इवेंट” के आयोजन का बहाना बनाकर उसे बुलाया और होटल में बुलाकर शारीरिक संबंध बनाए। सिक्योरिटी कंपनी खोलने का प्रस्ताव दिया इसके बाद आरोपी युवती ने अपने बॉस के नाम पर सिक्योरिटी कंपनी खोलने का प्रस्ताव दिया और अमित को 20 प्रतिशत पार्टनरशिप देने का झांसा दिया। अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच वायुसैनिक ने बैंक से लोन लेकर करीब 10 लाख रुपये और भेज दिए। जब अगस्त में उसे शक हुआ तो उसने जांच की, जिससे पता चला कि युवती के खिलाफ पहले से कई धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। हालांकि युवती ने उस कंपनी के नाम से शोशल मीडिया पर ग्रुप भी बनाया था। इस ग्रुप में हुई बातचीत में भी संबंधित युवक के नाम से ट्रांजेक्शन होने की बात की जा रही है। रेप केस में फंसाने की धमकी दी पीड़ित ने जब पैसे वापस मांगे तो युवती ने उसे झूठे दुष्कर्म केस में फंसाने की धमकी दी। युवक ने बताया कि युवती ने उसे यह कहकर डराया कि वो पुलिस को बताएगी कि उसे बेहोश करते युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। परेशान वायुसैनिक ने अपने परिवार को घटना बताई और 4 नवंबर को ग्वालियर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जवारी मंदिर के सामने बगलामुखी हवन: मूर्ति याचिका लगाने वाले राकेश दलाल ने विधि विधान से किया पूजा-अर्चन

छतरपुर  सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई पर जूता उछालने वाले वकील राकेश किशोर इस समय खजुराहो में हैं। जिन्होंने बुधवार को मंदिर के दर्शन कर ध्यान लगाया था। गुरुवार को खजुराहो के जवारी मंदिर की मूर्ति को लेकर याचिका लगाने वाले राकेश दलाल ने जवारी मंदिर के सामने बगलामुखी हवन किया, जहां विधि विधान से पूजा अर्चना की गई है। साथ ही वकील राकेश किशोर ने खजुराहो मंदिर देखे। अब वो मातंगेश्वर महादेव की पूजा करने भी जा सकते हैं। उनकी गतिविधियों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम भी नजर बनाए हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण खजुराहो के अधिकारियों ने बताया कि जहां हवन पूजन किया गया है वह क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र के दायरे में नहीं है।

तीनों दरिंदों के खिलाफ हिम्मत दिखा छात्रा ने खुद को छुड़ाया, ग्वालियर में दिनदहाड़े किडनैपिंग की कोशिश नाकाम

ग्वालियर  ग्वालियर जिले में महिला सुरक्षा को शर्मसार कर देने वाली घटना, लेकिन साथ ही एक छात्रा की बहादुरी ने पूरे शहर को झकझोर दिया। दिनदहाड़े महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज और महिला थाने के बीच तीन बदमाशों ने छात्रा को ऑटो में जबरन बैठाने की कोशिश की। लेकिन छात्रा ने ऐसी हिम्मत दिखाई कि आरोपी भाग खड़े हुए। घटना  सुबह 11 बजे की है जब ऑटो में सवार दो युवकों ने छात्रा का हाथ पकड़ उसे उठाने की कोशिश की। तीसरा ऑटो चालक उसे गाड़ी में बैठाने के लिए कह रहा था। छात्रा ने पूरे दम से विरोध किया और भागकर महिला पुलिस थाने की ओर दौड़ पड़ी। डर के मारे आरोपी ऑटो छोड़कर फरार हो गए। अद्भुत साहस दिखाते हुए, नाबालिग छात्रा ने खुद को उनके चंगुल से छुड़ाया और मदद के लिए महिला पुलिस थाने की ओर दौड़ी। हालांकि, मदद पहुंचने से पहले ही, आरोपी ऑटोरिक्शा छोड़कर पैदल ही भाग गए। दिनदहाड़े हुए इस घटनाक्रम से छात्रा दहशत में है। पुलिस ने केस दर्ज कर तीन आरोपितों बीरेंद्र सिंह, हरेंद्र गुर्जर और गौरव रावत को गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। घटना महिला थाना से चंद कदम की दूरी पर हुई। पड़ाव थाना क्षेत्र में साया होटल के पास रहने वाली 17 वर्षीय बालिका ने बताया कि वह पॉलीटेक्निक गर्ल्स कालेज में पढ़ती है। सुबह पौने 11 बजे कॉलेज जा रही थी। महिला थाने से थोड़ा आगे ऑटो खड़ा था। उसके पीछे वाली सीट पर बैठे दो युवक उसके हाथ-पैर पकड़कर जबरन बैठाने लगे और ड्राइवर को आटो चालू को कहा। पीड़िता जैसे-तैसे खुद को उनके चंगुल से छुड़ाते हुए पड़ाव चौराहे की ओर भागी। कुछ देर बाद ऑटो ड्राइवर और उसमें सवार आरोपित भी भाग गए। पुलिस ने ऑटोरिक्शा जब्त कर लिया है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पड़ाव पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर शैलेंद्र भार्गव ने कहा कि हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए उनकी पहचान करके तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना महिला थाने से महज 50 कदम की दूरी पर हुई और पूरी वारदात CCTV में कैद है। पुलिस ने ऑटो जब्त कर लिया है और आरोपियों को भी पुलिस ने पकड़ लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। 

विशप हाउस, ग्वालियर में धर्मांतरण जांच, 23 स्टूडेंट्स में 18 ओडिशा से; फादर का बयान – माता-पिता ईसाई

ग्वालियर ग्वालियर में एक क्रिश्चियन संस्था द्वारा संचालित एक विशप परिसर में कथित तौर पर धर्मांतरण का मामला सुलझ गया है. हिंदूवादी संगठनों ने आरोप लगाया था कि ग्वालियर के   मुरार-बड़ागांव इलाके में ईसाई मिशनरी एक सेंट जोसेफ स्कूल परिसर का संचालन करती है, उसी स्कूल परिसर में बिशप के निवास पर 26 बच्चों का धर्मांतरण कर धार्मिक शिक्षा दी जा रही है.  विश्व हिंदू परिसर (विहिप) नेता पप्पू वर्मा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि बड़ागांव के पास क्रिश्चियन मिशनरी सेंट जोसेफ स्कूल में कुछ गरीब बच्चों को लाकर उनका धर्मांतरण कराया गया है. वह बच्चे छत्तीसगढ़, झासखंड, केरल, उड़ीसा आदि राज्यों के हैं. दरअसल, सूचना मिली थी कि चर्च के फादर की निगरानी में विशप हाउस के अंदर छात्रों को धर्मगुरु बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन छात्रों में ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के निवासी शामिल हैं। जिनमें से कई आदिवासी हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम सक्रिय हुई और तत्काल विशप हाउस पहुंची। अधिकारियों ने बच्चों से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच की। चर्च प्रबंधन से फंडिंग, भूमि रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई और सभी आवश्यक दस्तावेज लिए गए। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि विशप हाउस में कुल 23 छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें से 18 छात्र ओडिशा, 3 मध्य प्रदेश (झाबुआ से 2, मोहना से 1) और 2 छत्तीसगढ़ से हैं। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में धर्मांतरण की बात सामने नहीं आई है। फिर भी मामले की बारीकी से जांच की जा रही है कि कही दूर-दूर तक इसका धर्मांतरण से नाता तो नहीं है। बच्चों से जुड़े कागजात किए चेक हिंदू संगठनों की शिकायत पर जिला प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई. उन्होंने वहां मौजूद विशप, स्टाफ और सभी 26 बच्चों से भी बातचीत की. वहां सभी के डॉक्युमेंट भी चेक किए. टीम को वहां धर्मांतरण जैसा कुछ नहीं मिला. वहां मिले विशप डेनियल फ्रांसिस का कहना था कि यहां सिर्फ कैथोलिक बच्चों की पढ़ाई होती है, जिन्हें भाषा की शिक्षा दी जाती है. धर्मांतरण जैसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने हर तरह की जांच में सहयोग करने की बात कही. कई घंटे की जांच पड़ताल के बाद एसडीएम एनसी गुप्ता और मुरार के सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि यहां धर्मांतरण के आरोप गलत और भ्रामक हैं. जांच से पता चला कि यहां पढ़ रहे सभी के माता पिता कृश्चियन हैं और ये सब कैथोलिक हैं, जिनकी पुष्टि डॉक्युमेंट से हो गई है. हाई स्कूल के बाद बच्चे अपनी स्किल डेवलपमेंट और भाषा की ट्रेनिंग के लिए पहुंचे थे. यहां बच्चों को ट्रेनिंग के दौरान हिंदी और अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई कराते हैं. ग्वालियर अंचल में कुल 18 स्कूल संचालित हो रहे हैं. जांच में पता चला कि बड़ागांव स्थित ईसाई मिशनरी के हॉस्टल में बच्चों के परिजन भी समय-समय पर मिलने आते हैं.

दहेज न मिलने पर इंदौर में पत्नी को दिया तीन तलाक, पति ने करवाई जबरन हलाला, फिर भी नहीं रखा साथ

इंदौर  इंदौर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां दहेज की मांग पूरी न होने पर पति ने पत्नी को तीन तलाक दे दिया और फिर जबरन हलाला करवाया. इसके बाद भी आरोपी पति ने महिला को अपने साथ रखने से इंकार कर दिया. पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद पति और सास को हिरासत में ले लिया गया. खजराना थाना क्षेत्र की रहने वाली 29 वर्षीय फरहाना खान की शादी साल 2010 में वसीम पठान से हुई थी. फरहाना ने बताया कि शादी के बाद से ही पति वसीम और सास गुड्डो बी दहेज की मांग को लेकर उसे परेशान करते थे. उनका कहना था कि परिवार चलाने के लिए मायके से पैसे लाकर दो. तीन बच्चे होने के बाद दबाव और बढ़ गया. दहेज की मांग पूरी ना होने पर तीन तलाक  फरहाना के अनुसार अक्टूबर 2024 में वसीम ने मारपीट कर उसे तीन बार तलाक कहा और घर से निकाल दिया. उसने दो बच्चों को अपने पास रख लिया और एक बच्चा फरहाना के साथ रह गया. महिला ने परिवार के माध्यम से सुलह की कोशिश की, तब वसीम ने कहा कि मुस्लिम धर्म के अनुसार हलाला करना होगा. पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया  दिसंबर 2024 में वसीम ने रिश्तेदार सईद के साथ फरहाना का हलाला करवाया. इसके लिए 500 रुपये के स्टाम्प पर कागज तैयार किए गए. हलाला पूरा होने के बाद भी वसीम ने साथ रखने से साफ इंकार कर दिया. मजबूर होकर महिला ने सोमवार को खजराना थाने में शिकायत दर्ज कराई. थाना प्रभारी के अनुसार मुस्लिम विवाह संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है.

जबलपुर से सिहोरा की 2 दिन की बच्ची एयर एंबुलेंस से जाएगी मुंबई, बाल हृदय योजना के तहत इलाज

जबलपुर जबलपुर से दो दिन की बच्ची को एयर एंबुलेंस से मुंबई ले जाया जा रहा है. बच्ची के दिल में छेद है और उसका इलाज मुंबई के नारायण अस्पताल में होगा. बच्ची को मुंबई तक पहुंचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों ने बुधवार को छुट्टी के दिन भी कागजी तैयारी पूरी की. गुरुवार को दोपहर 12:00 बजे बच्ची जबलपुर से मुंबई के लिए रवाना हुई . बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन सरकार की बाल हृदय योजना के तहत उसे यह सुविधा दी जा रही है. दो दिन पहले जन्में जुड़वा बच्चे, 1 के दिल में छेद सिहोरा के रहने वाले सत्येंद्र दहिया और शशि दहिया को जबलपुर के एक निजी अस्पताल में 2 दिन पहले जुड़वा बच्चे हुए थे. जब बच्चे हुए तब तक सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन कुछ ही देर में जब बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तो पता लगा कि इनमें से एक बच्ची के दिल में छेद है. इस बात की जानकारी तुरंत सरकारी अस्पताल को भी पहुंचा दी गई. बाल हृदय योजना के तहत होगा इलाज मध्य प्रदेश सरकार की बाल हृदय योजना के तहत जिन बच्चों के दिल में छेद होता है, उनका इलाज राज्य सरकार करवाती है. इसके लिए राज्य सरकार ऐसे बच्चों के इलाज के साथ उनके परिवहन की व्यवस्था भी करती है. लेकिन गुरु नानक जयंती की वजह से बुधवार को अवकाश था, ऐसी स्थिति में सरकार ने एक टीम बनाई है जो छुट्टी के दिन भी आपात स्थिति में लोगों की मदद करे. इस टीम ने एक बार फिर तत्परता से काम किया और सत्येंद्र दहिया और शशि दहिया के 2 दिन की बेटी को मुंबई ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था करवाई. मुंबई पहुंचते ही शुरु हो जाएगा इलाज स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि, ''यह एयर एंबुलेंस गुरुवार दोपहर 12:00 बजे जबलपुर से मुंबई के लिए रवाना होगी. इसके लिए पेपर वर्क पूरा कर लिया गया है और जैसे ही बच्ची मुंबई पहुंचेगी तुरंत उसका इलाज भी शुरु हो जाएगा. सत्येंद्र दहिया एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं और उनके लिए यह इलाज संभव नहीं था. सरकार की योजना की वजह से अब सत्येंद्र की बच्ची को जीवन भर कष्ट नहीं भोगना होगा.'' वहीं, डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि, ''यह पहला मौका है जब 2 दिन की बच्ची के लिए सरकार एयर एम्बुलेंस उपलब्ध करवाने जा रही है.'' सत्येंद्र को जिस तत्परता से मदद मिली, उसकी जरूरत हर उस आदमी को है जो सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए जा रहा है. क्योंकि सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने वहीं पहुंचता है जिसके पास निजी अस्पतालों में इलाज करवाने का पैसा नहीं है. स्वास्थ्य विभाग में जो कोशिश सत्येंद्र की बच्ची के लिए की है इस तरह की कोशिश यदि हर आम आदमी के लिए हो जाए तो सच में राम राज्य की कल्पना साकार हो जाएगी.