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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए निर्देश — कार्बाइड गन से घायल बच्चों और नागरिकों का उपचार सर्वोच्च प्राथमिकता पर हो

कार्बाइड गन से घायल बच्चों और नागरिकों का उपचार सर्वोच्च प्राथमिकता में हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्बाइड गन पर जीरो टालरेंस से प्रदेशव्यापी सख्त कार्रवाई के निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्बाइड गन से हुई दुर्घटनाओं को अत्यंत गंभीर से लेते हुए निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी घायल बच्चे और नागरिक के उपचार में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि घायलों के उपचार, ऑपरेशन और नेत्र चिकित्सा सहित सभी चिकित्सीय सेवाएँ सर्वोच्च प्राथमिकता से उपलब्ध कराई जाएं। उपचार के लिये मरीजों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से आवश्यक सहयोग दिया जाये। गंभीर मरीजों को उन्नत उपचार के लिए आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध कराई जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों की स्थिति की सतत मॉनिटरिंग की जाए और आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमों को तत्काल तैनात किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्बाइड गन घातक विस्फोटक उपकरण है, जो नागरिक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा उत्पन्न करता है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश में इस यंत्र के अवैध निर्माण, विक्रय और उपयोग पर तत्काल रोक लगाई जाए। जीरो टालरेंस के साथ सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा कि भोपाल एवं अन्य जिलों में कार्बाइड गन के कारण घायलों—विशेषकर बच्चों—को हुई आँख, चेहरे और हाथ की गंभीर चोटें अत्यंत चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव कठोर कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने शुक्रवार को मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की वृहद समीक्षा की। मुख्य सचिव  जैन ने निर्देश दिए कि कार्बाइड गन प्रतिबंधित श्रेणी का उपकरण है और इसके विरुद्ध कार्रवाई शस्त्र अधिनियम 1959, विस्फोटक अधिनियम 1884 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 के तहत की जाये। उन्होंने कहा कि यह उपकरण एसीटिलीन गैस के विस्फोट से तेज आवाज और दाब लहर उत्पन्न करता है, जिससे गंभीर शारीरिक चोटें, जलन और स्थायी नेत्र क्षति तक हो सकती है। मुख्य सचिव  जैन ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के अंतर्गत आदेश पारित कर कार्बाइड गन के निर्माण, विक्रय, स्वामित्व और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। किसी भी व्यक्ति द्वारा निर्माण या विक्रय करते पाए जाने पर उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कार्बाइड गन या उसके घटकों की बिक्री को रोकने हेतु साइबर शाखा से निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई की जाए। नागरिकों, विशेषकर अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाकर बताया जाए कि यह "खिलौना" नहीं बल्कि एक "विस्फोटक यंत्र" है। मुख्य सचिव  जैन ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में मैदानी अधिकारी संदिग्ध दुकानों, विक्रेताओं और ऑनलाइन प्लेटफार्मों की जांच कर अवैध लिस्टिंग हटवाने, जब्ती, प्रमाण-संग्रह और फोटोग्राफिक रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करें। जब्त वस्तुओं की फोरेंसिक जांच, चेन ऑफ कस्टडी और पीईएसओ के समन्वय से विधिक निपटान किया जाए। पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण, नागरिक जागरूकता अभियान, स्कूलों और पंचायतों में चेतना सत्र तथा हेल्पलाइन व्यवस्था की जाये जिससे नागरिक इस खतरनाक प्रवृत्ति के प्रति सतर्क रहें और पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दे सकें। बैठक में अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन  संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य  संदीप यादव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सहित प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। पुलिस मुख्यालय द्वारा इस विषय में विस्तृत परिपत्र जारी किया गया है, जिसमें कार्बाइड गन के वैज्ञानिक स्वरूप, कानूनी स्थिति, दंडात्मक प्रावधानों तथा कार्रवाई की चरणबद्ध प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। इसके अनुसार, कार्बाइड गन विस्फोटक अधिनियम 1884 की धारा 4(घ), 5, 6(क)(i) और शस्त्र अधिनियम 1959 की धारा 2(ख)(iii), 2(ग), 9(ख) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। बिना लाइसेंस निर्माण, विक्रय या स्वामित्व की स्थिति में तीन से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। बताया गया कि प्रदेश में कार्बाइड गान के अवैध व्यवसायिओं पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। अब तक भोपाल में 6, विदिशा में 8 और ग्वालियर में 1 एफआईआर दर्ज की गई हैं। अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज प्रदेश में दीपावली के अवसर पर पटाखों एवं अवैध कार्बाइड गन से घायल व्यक्तियों की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त रिपोर्ट अनुसार अधिकांश मरीज उपचार प्राप्त कर स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, चिकित्सालय में उपचाररत केवल 2 मरीज ऐसे हैं, जिनकी आंखों में गंभीर चोट है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलों को गंभीर मामलों की सतत निगरानी करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की जिला अस्पताल और जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सतना जिला अस्पताल में बनने वाले 150 बिस्तर वाले नवीन हास्पिटल के भवन का निर्माण अक्टूबर 2026 में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि जिला अस्पताल से लेकर उप स्वास्थ्य केन्द्र तक स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार कर मातृ-मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कम करने के लगातार प्रयास करें।  शुक्ल शुक्रवार को सतना में जिला अस्पताल सहित मैहर और सतना जिले की स्वास्थ्य संस्थाओं की उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी, सांसद सतना गणेश सिंह, महापौर योगेश ताम्रकार, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एलके तिवारी, डीन मेडीकल कॉलेज डॉ. एसपी गर्ग, सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला और पीआईयू के अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने जिला चिकित्सालय सतना के परिसर में 32 करोड 54 लाख 97 हजार रूपये की लागत से बनने वाले 150 बिस्तर वाले अस्पताल के एकीकृत भवन के निर्माण कार्य की समीक्षा की। पीआईयू के अधिकारियों ने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में 32 करोड 54 लाख 97 हजार रूपये की लागत से 100 बिस्तरीय वार्ड, 50 बिस्तरीय क्रिटिकल केयर हास्पीटल ब्लाक (सीसीएचबी) एवं एन्टीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (आईपीएचएल) के एकीकृत भवन का निर्माण किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर और पैरामेडीकल स्टाफ प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में बहुत बेहतर है। कलेक्टर और सीएमएचओ एयर एम्बुलेंस की सुविधा की मानीटरिंग करें। उप मुख्यमंत्री ने सेवा पखवाडा के दौरान आयोजित स्वास्थ्य शिविरों और जिले की सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थाओं, प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थाओं, उप स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य सेवाओं तथा गतिविधियों की विकासखण्डवार समीक्षा की।  

महिला सशक्तिकरण की मिसाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश बना राष्ट्रीय मॉडल

नारी शक्ति से आत्मनिर्भर भारत का संकल्प साकार कर रहा है मध्यप्रदेश गांव से लेकर ग्लोबल मंच तक उभर रहीं महिलाएं भोपाल  जब किसी राज्य का नेतृत्व केवल योजनाएं नहीं बनाता, बल्कि स्वयं जनभावनाओं के साथ जुड़कर उन्हें सशक्त करता है, तब एक नई क्रांति जन्म लेती है। मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की यही क्रांति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आकार ले रही है। एक ओर जहां राज्य की महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश पूरे देश के लिए “महिला सशक्तिकरण मॉडल” के रूप में उभर कर सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्पष्ट मानना है कि जब तक नारी सक्षम नहीं होगी, समाज समृद्ध नहीं हो सकता। यही सोच आज प्रदेश की नीतियों, योजनाओं और जमीनी बदलावों में साफ नजर आती है। उन्होंने ग्रामीण स्व-सहायता समूहों से लेकर शहरी महिला उद्यमिता, सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा तक, बहुआयामी हस्तक्षेपों के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाने की मजबूत आधारशिला रखी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शी सोच और समाज के हर वर्ग को जोड़ने की रणनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो परिवर्तन संभव है। आज मध्यप्रदेश की महिलाएं घरेलू भूमिकाओं से निकलकर उद्यम, प्रशासन, शिक्षा, और नवाचार के हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। ‘लाड़ली बहना’ से आत्मनिर्भरता की ओर कदम मध्यप्रदेश में ‘लाड़ली बहना योजना’ सबसे प्रभावशाली पहल बन चुकी है। इस योजना के तहत अब तक 1.26 करोड़ महिलाओं को प्रतिमाह 1551.86 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली बहनों को भाई दूज से 1500 रुपये की राशि देने का निर्णय लिया है। अब तक 43 हज़ार 376 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के साथ-साथ डिजिटल लेन-देन में दक्ष बन रही हैं। ‘लखपति दीदी’ से बदली गांव की तस्वीर मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शुरू की गई ‘लखपति दीदी योजना’ के अंतर्गत प्रदेश की 1 लाख से अधिक महिलाएं प्रति वर्ष ₹1 लाख से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। लक्ष्य है कि 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 62 लाख महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए। ये महिलाएं अब लघु उद्योग, कृषि, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र में नए अवसर सृजित कर रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता में महिला केंद्रित योजनाएं राज्य की लोकप्रिय ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ के तहत 2024-25 में 2.73 लाख बालिकाओं का पंजीकरण किया गया और 223 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियाँ वितरित की गईं। अब तक इस योजना से 50 लाख से अधिक बेटियाँ लाभान्वित हो चुकी हैं।  स्वच्छता क्षेत्र में, किशोरियों के लिए 19 लाख से अधिक सैनिटेशन किट्स वितरित की गईं और 57 करोड़ रुपये की सहायता दी गई, जिसे यूनिसेफ ने भी सराहा है। महिला सुरक्षा बनी प्राथमिकता राज्य में महिला हेल्पलाइन 181, 112 आपात सेवा, महिला पुलिस थाने, साइबर हेल्पलाइन, और महिला आरक्षी भर्ती जैसे कदमों ने महिला सुरक्षा की दिशा में ठोस बदलाव लाए हैं। अब तक 1.5 लाख से अधिक महिलाओं को समय पर सहायता प्रदान की जा चुकी है। राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व में बढ़त राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में 35% और स्थानीय निकायों में 50% आरक्षण देकर महिलाओं को निर्णयात्मक भूमिकाओं में आगे बढ़ाया है। वर्ष 2025-26 के जेंडर बजट में 19,021 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है और महिला कल्याण पर कुल 1.21 लाख करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन: परंपरा से भविष्य की दिशा लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती पर आरंभ देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन महिलाओं को स्टार्टअप, निवेश, और कौशल विकास से जोड़ रहा है। अब तक 8.10 करोड़ रुपये के निवेश पत्र वितरित किए जा चुके हैं। उद्यमिता को मिली उड़ान एमएसएमई क्षेत्र में 850 से अधिक इकाइयों को 275 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिससे महिला उद्यमिता को मजबूत आधार मिला है। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में कार्यरत महिलाओं को प्रतिमाह ₹5000 की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। मध्यप्रदेश अब केवल भूगोलिक दृष्टि से देश के हृदय में नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की धड़कन भी यहीं से तेज़ हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में यह राज्य आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में “नारी शक्ति” को केंद्र में रखते हुए नई इबारत लिख रहा है — जो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय नहीं, वैश्विक मॉडल बन सकता है।  

हमीदिया हॉस्पिटल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों व नागरिकों के स्वास्थ्य प्रबंधन का जायजा लिया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमीदिया हॉस्पिटल में बच्चों और नागरिकों के स्वास्थ्य का हाल-चाल जाना मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से सहायता के दिए निर्देश कार्बाइड गन प्रभावितों से मिले अस्पताल में भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्बाइड गन से प्रभावितों से भोपाल हमीदिया हॉस्पिटल के ब्लॉक 2 की 11वीं मंजिल स्थित नेत्र रोग वार्ड में भेंट की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चिकित्सा विशेषज्ञों से रोगियों के उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त कर समुचित इलाज के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी कार्बाइड गन से प्रभावित बच्चों और नागरिकों के उचित इलाज के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से भी सहायता के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे प्रकरणों की निरंतर मॉनीटरिंग की जा रही है। घातक कार्बाइड गन के निर्माण और विक्रय को अवैध होने के नाते थाना स्तर पर छापामारी और जाँच की कार्यवाही भी सुनिश्चित की जा रही है। अधिकांश घायलों ने स्वयं उपयोग की कार्बाइड गन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नारियलखेड़ा निवासी  प्रशांत मालवीय, गरीब नगर छोला के  करण पंथी, भानपुर के  आरिश और परवलिया सड़क के  अंश प्रजापति से भेंट की। इनमें अधिकांश किशोर हैं।  अंश प्रजापति ने बताया कि वे अन्य युवकों के कार्बाइड गन उपयोग करने से घायल हुए हैं। वहीं  प्रशांत,  करण और  आरिश ने स्वयं कार्बाइड गन का उपयोग करते हुए घायल होने की बात स्वीकार की। परिजन ने उपचार पर संतोष व्यक्त किया हमीदिया अस्पताल में दाखिल इन रोगियों के अभिभावकों ने भी परिवार के सदस्यों द्वारा कार्बाइड गन के उपयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। रोगियों के परिजन ने हमीदिया अस्पताल में किए जा रहे उपचार पर संतोष व्यक्त किया।  करण पंथी के परिवार ने कहा कि उन्होंने गरीब नगर में अन्य परिवारों को भी कार्बाइड गन का उपयोग न करने का परामर्श दिया है। अब सभी जागरूक हो चुके हैं और बस्ती में कोई भी इसका उपयोग नहीं कर रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के हमीदिया अस्पताल के अवलोकन के अवसर पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग  संदीप यादव और आयुक्त जनसंपर्क  दीपक कुमार सक्सेना उपस्थित थे।  

सर्विस क्वालिटी सर्वे में पुणे ने मारी बाज़ी, इंदौर एयरपोर्ट चौथे स्थान पर, चूहे ने गिराई रैंकिंग

इंदौर  इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट की रैंकिंग में इस तिमाही में गिरावट दर्ज की गई है। एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी (एएसक्यू) सर्वे की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) की रिपोर्ट के अनुसार इंदौर एयरपोर्ट देश में एक पायदान नीचे खिसककर चौथे स्थान पर पहुंच गया है। पिछली तिमाही में यह तीसरे स्थान पर था, जबकि पहली तिमाही में भी चौथे स्थान पर रहा था। यात्री को चूहे द्वारा काटने की घटना का भी एयरपोर्ट की छवि पर असर पड़ा है। इसके पहले दूसरे तिमाही के बराबर 4.93 अंक रहने के बावजूद इंदौर को चौथी रैंकिंग से संतोष करना पड़ा। वाराणसी एयरपोर्ट ने अपनी रैंकिंग में 0.02 अंकों का सुधार कर 4.94 अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान हासिल किया। एशिया पैसेफिक की इंटरनेशनल रैंकिंग में भी इंदौर एयरपोर्ट को पांच पायदान का नुकसान हुआ है। अब यह 98 एयरपोर्ट में 58वें से 63वें स्थान पर पहुंच गया है। पुणे एयरपोर्ट नंबर वन देश में इस समय पुणे एयरपोर्ट 4.96 अंकों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि गोवा दूसरे और वाराणसी को 4.94 अंक के साथ तीसरा स्थान पर रहा। इंदौर एयरपोर्ट को 4.93 अंक प्राप्त हुए हैं। अच्छी बात यह है कि गोवा और वाराणसी से इंदौर के अंक में केवल 0.1 का ही अंतर है। एएसक्यू सर्वे एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) द्वारा किया जाता है, जिसमें सालाना 18 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही वाले एयरपोर्ट शामिल किए जाते हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि यात्रियों की शिकायतों और सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। लक्ष्य है कि आने वाली तिमाही में इंदौर एयरपोर्ट फिर से शीर्ष में अपनी जगह बनाए। सफाई और शॉपिंग सुविधाओं पर कम अंक इस तिमाही में यात्रियों से 31 बिंदुओं पर प्रतिक्रिया ली गई, जिनमें से 24 बिंदुओं पर इंदौर एयरपोर्ट के अंक घटे हैं। सबसे कम स्कोर शॉपिंग व वैल्यू फॉर मनी, वाशरूम की स्वच्छता और टॉयलेट्स की मेंटेनेंस पर मिला। हालांकि, सुरक्षा जांच और कर्मचारियों की मददगार प्रवृत्ति के बिंदुओं पर एयरपोर्ट को बेहतर अंक मिले हैं। चूहे के काटने की घटना का असर सितंबर 2025 में एयरपोर्ट पर एक यात्री को चूहे के काटने की घटना ने भी इंदौर एयरपोर्ट की छवि को नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद प्रबंधन ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को हटाया और सफाई व पेस्ट कंट्रोल कंपनियों पर जुर्माना लगाया था। देश के शीर्ष 10 एयरपोर्ट पुणे, गोवा, वाराणसी, इंदौर, चेन्नई, गुरुग्राम, कोलकाता, रायपुर, बस्तर और पटना एयरपोर्ट इस तिमाही के टॉप-10 में शामिल हैं। इन पाइंट पर होता है सर्वे     एयरपोर्ट पहुंचने में आसानी।     टर्मिनल पर प्रवेश के लिए साइन बोर्ड।     हवाई अड्डे पर पहुंचने के लिए परिवहन साधन की कीमत।     अपने चेक इन क्षेत्र को आसानी से खोजें।     चेक इन पर प्रतीक्षा समय।     सुरक्षा प्रस्ताव में प्रतीक्षा समय।     सुरक्षा जांच कर्मचारियों की निष्ठा और मदद करना।     कस्टम और पासपोर्ट काउंटर पर प्रतीक्षा।     काउंटर स्टाफ की निष्ठा और मदद करने का उद्देश्य।     रेस्तरां, बार, कैफे की कीमत के अनुरूप होना।     दुकान व रेस्तरां के कर्मचारियों का मदद करना।     टर्मिनल में अपना रास्ता तलाशने में आसानी।     उड़ान की जानकारी के डिस्पले।     टर्मिनल में चलने की दूरी और कनेक्ट करने में आसानी।     चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता।     मनोरंजन और विश्राम के विकल्प।     टॉयलेट की उपलब्धता।     टॉयलेट की स्वच्छता।     स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा स्वच्छता।     माहौल और वातावरण।     स्टाफ की शिष्टता और मदद करने का रवैया।  

ऐतिहासिक धरोहर की वापसी: देपालपुर की सूरजकुंड बावड़ी का हुआ जोर्णोद्धार

देपालपुर की ऐतिहासिक सूरजकु़ंड बावड़ी का हुआ जोर्णोद्धार प्राचीन बावड़ी का देवी अहिल्याबाई होल्कर के काल में भी हुआ था जोर्णोद्धार भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने राज्य सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों की जल संरचनाओं के संरक्षण और जोर्णोद्धार की पहल जनभागीदारी से की थी। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आये हैं। आज नगरीय निकायों के नागरिकों विशेषकर युवाओं ने जल संरचनाओं के संरक्षण का संकल्प लिया है। देपालपुर की सूरजकुंड बावड़ी इंदौर जिले के देपालपुर में मंगलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक सूरजकुंड बावड़ी अब एक बार फिर अपने प्राचीन स्वरूप में लौट आई है। यह बावड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में परमार वंश के शासन काल के दौरान किया गया था। इसके बाद लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर सूरजकुंड बावड़ी का पुननिर्माण कराया, जिससे यह बावड़ी नगर वासियों के लिये स्वच्छ जल का प्रमुख स्त्रोत बन गई। समय के साथ इस ऐतिहासिक बावड़ी की देख-रेख में कमी आयी और यह बावड़ी सूखने की कगार पर पहुंच गई। बावड़ी की उपेक्षा के कारण इसकी सीढ़ियां और मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गये। अमृत 2.0 में हुआ कार्य नगरीय विकास की अमृत 2.0 योजना में ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ किया गया। ग्रामीण वासियों के उत्साह ने भी इस कार्य को गति दी। अब यह जल संरचना केवल देपालपुर के लिये ही नहीं बल्कि प्रदेशभर के लिये प्रेरणा स्त्रोत बनकर उभरी है। जल संरक्षण का उद्देश्य पानी के साथ पर्यावरणीय स्थिरता, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकि तंत्र के सुदृढ़ीकरण का भी है। बावड़ी के संरक्षण से जल गुणवत्ता एवं मात्रा में सुधार, क्षतिग्रस्त सीढ़ियों एवं मार्गों का पुनर्निमाण, प्लास्टिक एवं ठोस अपशिष्ट की सफाई, हरियाली एवं लैंडस्केपिंग कार्य के साथ स्थानीय समुदाय की सहभागिता और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की गई है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी जल संरक्षण के क्षेत्र में जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार पर जोर दिया है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी एवं संकल्प सूरजकुंड बावड़ी के संरक्षण में स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने संकल्प के साथ काम किया है। उनका कहना है कि हम सब ऐतिहासिक बावड़ी को अब कभी गंदा नहीं होने देंगे। यह हमारी ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे हमारे बुजुर्गों ने देखा और संजोया है, हम सब चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी ऐतिहासिक बावड़ी पर गर्व करें।  

आदिवासी बेटी का कमाल: 12वीं साइंस टॉपर वैष्णवी को मिलेगा बालिका विज्ञान पुरस्कार

छिंदवाड़ा  पांढुर्णा जिले के सिवनी गांव की वैष्णवी ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में विज्ञान संकाय के विषयों में पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया था. जिसके चलते उन्हें बालिका विज्ञान पुरुस्कार मिलने जा रहा है. वैष्णवी का सपना है कि वह आईआईटी में जाकर पढ़ाई करें और एक सफल इंजीनियर बन सके. लेकिन गांव में ना तो पढ़ाई का स्तर इतना बेहतर था और ना ही आर्थिक स्थिति मजबूत. लेकिन अपने सपनों को पूरा करने के लिए वैष्णवी ने जी जान लगा दी थी. जिसके चलते अब प्रदेश स्तर पर वैष्णवी को सम्मानित किया जाएगा. प्रदेश में किया टॉप, मिलेगा बालिका विज्ञान पुरस्कार जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह मरकाम ने बताया कि, ''वैष्णवी सरियाम ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में विज्ञान संकाय के विषयों में पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 'मेधावी छात्रा पुरस्कार योजना' के अंतर्गत 'बालिका विज्ञान पुरस्कार' से सम्मानित करते हुए, 50000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी.'' 10 जनजातीय बालिकाओं को दिया जाता है सम्मान मध्य प्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा यह पुरस्कार उन 10 जनजातीय वर्ग की बालिकाओं को दिया जाता है. जिन्होंने विज्ञान संकाय के विषयों (भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान एवं गणित) में 90% से अधिक अंक प्राप्त किए हों और प्रदेश में सबसे ज्यादा अंक अर्जित किए हों. राज्य स्तरीय चयन समिति द्वारा मूल अंक सूची और जाति प्रमाण-पत्र जांच करने के बाद वैष्णवी को प्रथम स्थान के साथ पुरस्कार के लिए चुना गया है. 300 में से लिए 284 नंबर, अब जेईई मेन्स की तैयारी वैष्णवी सरियाम के पिता विनोद सरियाम किसान हैं और माता गृहिणी होने के साथ सिलाई का काम करती हैं. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वैष्णवी ने अपनी लगन, मेहनत और आत्मविश्वास से यह मुकाम हासिल किया है. वैष्णवी ने 300 में से 284 अंक लेकर विज्ञान संकाय के विषयों में प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है. फिलहाल वह घर पर रहकर जेईई मेन्स की तैयारी कर रही हैं. इस उपलब्धि पर कलेक्टर हरेंद्र नारायन और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सतेन्द्र सिंह मरकाम ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है.

नौरादेही में बनेगा तीसरा चीते का घर, केंद्र ने दिए 4 करोड़, कूनो और गांधी सागर के बाद नई पहल

भोपाल  चीता रीइंट्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत नमीबिया से लाए गए चीते अब भी एमपी की पहचान बने रहे रहेंगे। इनको एमपी के बाहर नहीं बसाया जा रहा है, बल्कि इनके लिए प्रदेश में ही नया ठिकाना तैयार किया जा रहा है। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व ( नौरादेही ) को चीतों का नया घर बनने जा रहा है। दरअसल, नौरादेही अभ्यारण को चीतों का नया ठिकाना बनाने की केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही एनटीसीए ( नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ) ने तैयारियों के लिए सेंट्रल कैंपा फंड से 4 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह तैयारियों की पहली किस्त है। इसके बाद जल्दी ही 3 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की जाएगी। तैयार होगा चीतों का ठिकाना एनटीसीए की तरफ से जारी किए गए फंड से नौरादेही में चीतों के लिए नया घर तैयार होगा। इसमें सागर और दमोह जिले में फैले नौरादेही अभ्यारण में 4 क्वारेंटाइन बोमा और एक सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार किया जाएगा। साथ ही फेंसिंग सहित इंफ्रास्ट्रक्चर के अन्य जरूरी काम जल्द शुरू होंगे। वहीं, दूसरे फंड मिलने के बाद 2339 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व नौरादेही में चीते बसाए जाएंगे। एनटीसीए की टीम करेगी दौरा केंद्र सरकार से नौरादेही अभ्यारण बनाने की मंजूरी मिलने के बाद यहां चीतों को बसाने की कवायद तेज हो गई है। 4 महीने पहले किए गए निरीक्षण में नौरादेही के सिंघपुर, मोहली और झापा फॉरेस्ट रेंज को चीतों के सबसे बेस्ट माना गया। जल्दी ही एनटीसीए की टीम इन तीनों इलाकों का दौरा करने के लिए आएगी। फॉरेस्ट रेंज से कई गांव होंगे विस्थापित नौरादेही में जिन तीन क्षेत्रों सिंघपुर, झापा और मोहली को चीतों को उपर्युक्त माना है। उसके अंदर 13 गांव आते हैं। चीतों को बसाने से पहले यहां के लोगों को पुनर्वासित किया जाएगा। चीतों को लाने से पहले 30 किमी के रेंज पर बाड़ेबंदी की जाएगी। राजस्थान और गुजरात नहीं जाएंगे चीते चीतों की अगली बसाहट राजस्थान या गुजरात में करने की तैयारी थी। हालांकि एनटीसीए ने स्पष्ट कर दिया है कि चीतों को कहीं और नहीं बसाया जाएगा। एमपी में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसी संभावना है कि नए साल 2026 में अफ्रीका से आने वाले चीतों की नई खेप को नौरादेही में बसाया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हो पाया तो कूनो में पले बढ़े और जवान हो चुके शावकों को शिफ्ट किया जाएगा। 1952 से विलुप्त हो गए थे चीते देश में चीतों को आखिरी बार 1952 में देखा गया था। इसके बाद से विलुप्त हो चुके चीतों को रीइंट्रोडक्शन करने के लिए साल 2022 में नामीबिया से 8 चीतों की पहली खेप लाई गई। इनको कूनो में बसाया गया। फिर फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया। इन्हें भी कूनो में ही रखा गया। दो खेप में कुल 20 चीतों को भारत में लाया गया। कूनो में पिछले दो सालों में इन चीतों ने कुल 26 शावकों को जन्म दिया। हालांकि बीमारी, हमलों और अन्य कारणों के चलते केवल 19 ही जीवित बच पाए हैं।

वाहन नंबर पोर्टिंग की सुविधा जल्द, मोबाइल नंबर की तरह अब रजिस्ट्रेशन बदल पाएंगे मालिक

भोपाल  मोबाइल नंबर की तरह अब वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर भी पोर्ट हो सकेगा। यदि कोई वाहन मालिक पुराने वाहन का नंबर चाहता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। केवल एक आवेदन के जरिए पुराने वाहन का नंबर नए वाहन में मिल जाएगा। हाल ही में परिवहन विभाग ने यह सुविधा शुरू की है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए वाहन मालिक को स्क्रैप सेंटर में अपना पुराना वाहन बेचना होगा। वहां से वाहन को डिस्मेंटल करने का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। यदि वाहन मालिक चाहता है कि उसके पास वही रजिस्ट्रेशन नंबर रहे, तो उसे परिवहन विभाग में स्क्रैप सेंटर से प्राप्त सर्टिफिकेट के साथ आवेदन करना होगा। इसके आधार पर उसे उसके वाहन का पुराना नंबर नए वाहन के लिए आवंटित कर दिया जाएगा। पसंदीदा नंबर के लिए देनी पड़ती थी शुल्क यदि वाहन मालिक मनचाहा नंबर चाहते हैं तो उन्हें एमपी ऑनलाइन या वाहन डीलर के माध्यम से परिवहन विभाग की वेबसाइट पर नंबर का चयन करना होता है। उसे ढाई हजार से पांच हजार रुपए फीस चुकानी पड़ती है। जबकि वीआइपी नंबर के लिए वेवसाइट पर ऑक्शन में भाग लेना होता है। जिसकी बिड अधिक होती है उसे नंबर आवंटित कर दिया जाता है। स्क्रैप पॉलिसी को मिलेगा बढ़ावा 2021-22 के आम बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि 15 साल पुराने सरकारी और प्राइवेट तथा 20 साल पुराने कमर्शियल वाहन को सड़कों से हटाया जाना है। इस योजना को स्क्रैप पॉलिसी नाम दिया गया था। पिछले एक दशक में लाखों नई गाड़ियां सड़क पर आईं। अब इस व्यवस्था के लागू होने से स्क्रैप पॉलिसी को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने कहा तुरंत अपडेट करें अपना फोन नंबर, घर बैठे मोबाइल से हो जाएगा काम आधार कार्ड या फिर पैन कार्ड, सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ मोबाइल नंबर अपडेट होना बहुत जरूरी है। क्या आपने कभी सोचा है कि ड्राइविंग लाइसेंस के साथ भी मोबाइल लिंक होना कितना जरूरी है। MORTH India ( भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से ट्वीट करके ड्राइविंग लाइसेंस धारकों और पंजीकृत वाहन मालिकों से आग्रह किया है कि वे अपना मोबाइल नंबर वाहन और सारथी पोर्टल पर अपडेट करवा लें। लोगों को इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप ऑनलाइन ही अपना नंबर अपडेट करा सकते हैं। पूरा प्रोसेस जानने के लिए नीचे पढ़ें। मोबाइल से ही हो जाएगा काम RTO ऑफिस में जाकर लंबी लाइन में लगे बिना ही आप ड्राइविंग लाइसेंस को अपडेट करा सकते हैं। इसका यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि विवरण पूरी तरह सटीक है। ट्वीट में एक QR कोड भी दिया गया है, जिसे मोबाइल से स्कैन करते ही आप सीधा वाहन और सार्थी पोर्टल पर पहुंच जाएंगे। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नंबर अपडेट करना का प्रोसेस बहुत ही आसान है। मोबाइल मंबर अपडेट कराने के लिए आपके पास होनी चाहिए ये जानकारियां परिवाहन और सार्थी पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए आपके पास कुछ जानकारियां होनी चाहिए।     व्हीकल का रजिस्ट्रेशन नंबर     रजिस्ट्रेशन की तारीख     वाहन का चेसिस नंबर     ड्राइविंग लाइसेंस नंबर     ड्राइविंग लाइसेंस जिसके नाम पर है उसकी जन्म तिथि     ऐसे और भी कई डिटेल की जरूरत होगी। एक टैप में पहुंच जाएंगे वेबसाइट     आप जैसे ही परिवहन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएंगे। वेबसाइट पर जाते ही आपको एक पॉप-अप स्क्रीन दिखेगी।     इस स्क्रीन पर नंबर अपडेट करने के कहा जाएगा। साथ ही दो QR कोड दिए जाएंगे     कोड के नीचे वेबसाइट के लिए लिंक भी दिया जाता है।     एक लिंक परिवाहन पोर्टल और दूसरा लिंक सार्थी परिवहन पोर्टल का है।     इन लिंक पर क्लिक करते ही आप दोनों वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे।     यहां आपको नंबर अपडेट करने के लिए अपने व्हीकल की कुछ डिटेल भरनी होगी।     इसमें व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर , रजिस्ट्रेशन डेटा आदि शामिल है।     इन डिटेल को भरने के बाद मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए आवेदन सबमिट हो जाएगा। हालांकि, ध्यान रखें कि इसके लिए आपके मोबाइल में इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए। अगर आप मोबाइल से ऑनलाइन नंबर अपडेट नहीं पा रहे हैं तो RTO ऑफिस जाकर भी ऐसा करा सकते हैं।    

पथ विक्रेताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वितरित किए जायेंगे ऋण : मंत्री विजयवर्गीय

पीएम स्वनिधि योजना में पहला स्थान रहने पर मिली बधाई केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने की योजना की समीक्षा भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा कि मध्यप्रदेश में पीएम स्वनिधि योजना में शहरी क्षेत्र के अधिक से अधिक जरूरतमंद पथ विक्रेताओं को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। इस संबंध में प्रदेश के प्रत्येक नगरीय निकाय को आवश्यक निर्देश दिये जा चुके हैं। मंत्री श्री विजयवर्गीय शुक्रवार को वीसी के माध्यम से केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय की बैठक में शामिल हुए। बैठक में केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने पीएम स्वनिधि पुनर्गठन के संबंध में विभिन्न राज्यों के मंत्रियों के साथ बैठक की। बैठक में राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने पीएम स्वनिधि योजना में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। पीएम स्वनिधि में देश में पहले स्थान पर बैठक में बताया गया कि पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठन कर इसकी अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दी गयी है। पथ विक्रेताओं को योजना का लाभ देने के मामले में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में शहरी पथ विक्रेताओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिये योजना में करीब 9 लाख हितग्राहियों को 2 हजार 78 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। हितग्राहियों को ब्याज सब्सिडी के रूप में 80 करोड़ रुपये की राशि दी गयी है। हितग्राहियों को प्रशिक्षण आयुक्त नगरीय विकास श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि प्रदेश में पथ विक्रेता अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक करने के लिये नगरीय निकायों के माध्यम से क्षमता निर्माण प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गयी है। हितग्राहियों को वित्तीय और डिजिटल साक्षरता, ई-कॉमर्स, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता का भी प्रशिक्षण दिलाये जाने की व्यवस्था की गयी है। पथ विक्रेताओं और उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिये जन-धन, पीएम सुरक्षा बीमा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति और पीएम श्रम योगी मानधन योजना, वन नेशन-वन राशन कार्ड, जननी सुरक्षा, श्रमिक कल्याण और पीएम मातृत्व वंदना योजना से भी जोड़ा गया है। पीएम स्वनिधि योजना के हितग्राहियों को समय पर ऋण राशि किस्त जमा कराने के लिये भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।