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ग्वालियर के अफसर का डिजिटल कमाल: एक क्लिक में मिलेगी किसान की पूरी जानकारी, खत्म होगा खाद संकट

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में किसान खाद की किल्लत से परेशान हैं. कई जिलों में रात रात भर किसान लाइन में लगकर खाद लेने के लिए परेशान होते रहते हैं, तो कहीं किसान बार बार लाइन में लगकर खाद खरीदते दिखाई देते हैं, इस तरह के हालात प्रदेश में खाद संकट पैदा करते हैं. अब इस खाद की समस्या का भी हल ढूंढ लिया गया है. इसका हल ढूंढने वाला कोई आईएएस स्तर का अफसर या नेता नहीं, बल्कि प्रदेश के एक ब्लॉक में पदस्थ एक सरकारी कर्मचारी है. उसने ये करनामा अपनी पढ़ाई और ट्रेनिंग के बलबूते पर कर दिखाया है. किसानों को मिल सकेगा जरूरत के अनुसार खाद असल में खाद को लेकर होने वाली समस्याओं को देखते हुए कृषि विभाग के एक युवा कृषि विस्तार अधिकारी ने एक ऐसा सिस्टम डेवलप किया, जिससे हर किसान को उसकी असल जरूरत के अनुसार पर्याप्त खाद मिल सकेगी. साथ ही खाद की कालाबाजारी भी रुकेगी. ये एक तरह का वेब आधारित एप्लिकेशन है, जिसे ग्वालियर के विशाल यादव ने तैयार किया है.  कृषि विभाग का नया प्रयोग विशाल यादव ग्वालियर के डबरा ब्लॉक में कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं. उन्होंने खुद से कोडिंग कर एक वेब ऐप बनाया है. जिसे नाम दिया गया है फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन डेटाबेस. ये एक ऐसा ऐप है जिसे ऑनलाइन ही उपयोग किया जा सकता है और इसका एक्सेस सिर्फ कृषि विभाग के पास है. और यह सिस्टम ग्वालियर के डबरा और भितरवार ब्लॉक में लागू भी कर दिया गया है.  कैसे आया खाद वितरण के लिए सिस्टम बनाने का आईडिया? विशाल यादव ने बताया कि, "हम हर साल खाद की किल्लत और परेशान होते किसानों को देखते थे. कई बार कुछ किसान तो खाद ले ही नहीं पाते थे, तो कई किसान बार बार लाइन में लगकर 4 से 5 बार खाद इशू करा लेते थे. इस तरह की स्थिति ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि हम क्या ऐसा कर सकते हैं, जिससे जरूरतमंद किसानों को खाद मिल सके. इसके लिए हमने इस बारे में डबरा एसडीएम से बात की और उनके सहयोग से ये वेब ऐप तैयार किया."  ग्वालियर में किया लागू, प्रदेश की तैयारी इस वेब ऐप के डेवलप होने के बाद शासन ने ग्वालियर अंचल में इसे लागू भी कर दिया गया है. डबरा और भितरवार क्षेत्र में इसी सिस्टम के जरिए किसानों को खाद का वितरण भी किया जा रहा है. अगर यह ऐप इस क्षेत्र में सही से काम किया तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में इसे अपनाया जा सकता है.  कैसे काम करता है खाद वाला 'वेब ऐप' विशाल यादव से बातचीत में इस वेब ऐप के काम करने का तरीका भी पता चला. उन्होंने बताया कि, "ये ऐप कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करता है. इसे किसी भी कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम से एक्सेस किया जा सकता है. इसका सर्वर भी गूगल शीट पर आधारित है, जहां सारा डेटा सेव होता है. इस ऐप के जरिए किसानों की पहचान उनके समग्र आईडी और आधार कार्ड से की जाती है. साथ ही उसकी जमीन का रकबा भी दर्ज कर दिया जाता है, उसी के आधार पर उसकी पात्रता निर्धारित की जाती है. 2 बीघा जमीन पर किसान को एक बैग डीएपी दी जाती है और एक बीघा जमीन पर एक बैग यूरिया के हिसाब से पात्रता दर्ज होती है.  कैसे तय होगा रकबा, कितना खाद ले सकेंगे किसान? अब सवाल आता है कि "इस वेब ऐप सिस्टम में किसान का रकबा कैसे निर्धारित होगा, तो आपको बता दें कि जब खाद वितरण केंद्र पर किसान अपनी किताब लेकर पहुंचता है. उसी समय उसकी किताब में लिखा जमीन का रकबा सिस्टम में मैनुअली एंट्री कर अपलोड कर दिया जाता है. ऐसे में उसकी जमीन का जितना रकबा है. उसके हिसाब से खाद की मात्रा भी निर्धारित कर एंट्री कर दी जाती है. किसान जितनी खाद लेता है, उसकी तय पात्रता खाद पात्रता में सिस्टम घटा देता है और वह तब तक खाद ले सकता है जब तक उसका खाद कोटा पूरा नहीं होता. एक बार उसने पात्रता के हिसाब से खाद कोटा पूरा कर दिया तो फिर आगे उसे खाद नहीं दिया जाएगा.  कैसे कृषि अधिकारी बना वेब डेवलपर? एक कृषि विस्तार अधिकारी आखिर एक वेब डेवलपर का काम कैसे कर सका? तो इसका जवाब यह है कि, विशाल यादव ने मूल रूप से एग्रीकल्चर में बीएससी स्नातक किया था. इसी बीच उन्होंने केंद्र सरकार के प्रोग्राम के तहत जावा (JAVA) लैंग्वेज, जो एक तरह की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लैंग्वेज है. वो भी सीखी थी और खाद समस्या को दूर करने में उनका यह कौशल कारगर सिद्ध हुआ है. 

खजुराहो से बनारस तक वंदे भारत एक्सप्रेस, बुंदेलखंड में बढ़ेगा पर्यटन और कनेक्टिविटी

 खजुराहो  मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल को इस दिवाली एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र सरकार ने खजुराहो से बनारस के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की मंजूरी दे दी है। यह घोषणा खजुराहो के सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा (वी.डी. शर्मा) की रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से हुई फोन पर बातचीत के बाद हुई। सांसद शर्मा ने इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा बुंदेलखंड को दिया गया “दीवाली गिफ्ट” बताया है। सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि खजुराहो से बनारस के बीच वंदे भारत ट्रेन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने कुछ माह पूर्व रेल मंत्री से दिल्ली में मुलाकात कर इस विषय पर पत्र सौंपा था। शर्मा के आग्रह पर रेल मंत्री ने सकारात्मक पहल करते हुए इस मार्ग पर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की सहमति दी थी। मंगलवार को फोन पर हुई चर्चा के दौरान रेल मंत्री ने उन्हें जानकारी दी कि ट्रेन शुरू करने के आदेश एक-दो दिन में जारी कर दिए जाएंगे। सांसद शर्मा ने कहा कि यह ट्रेन बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विकास और समृद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी। उन्होंने कहा कि बाबा मतंगेश्वर की नगरी खजुराहो से बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी बनारस को जोड़ने वाली यह वंदे भारत एक्सप्रेस न केवल धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगी, बल्कि रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ाएगी। उन्होंने आगे कहा कि खजुराहो विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अब वंदे भारत ट्रेन के शुरू होने से भारतीय यात्रियों के लिए भी खजुराहो की यात्रा अधिक सुगम और सुलभ हो जाएगी। इससे बुंदेलखंड के आर्थिक विकास में तेजी आएगी और स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस घोषणा पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेन शुरू होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और मध्यप्रदेश का गौरवशाली पर्यटन नक्शे पर और अधिक चमकेगा। सांसद वी.डी. शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री के “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के विकास की नई रफ्तार है।    

कोलार में पानी में मिली लाश के अंग, हत्या कर बोरे में फेंकने का मामला सामने आया

भोपाल राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर बाद एक खाली पड़े प्लाट में मानव अंग मिलने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। जिस खाली प्लाट में भरे पानी के अंदर मानव अंग मिले हैं, उससे 100 मीटर की दूरी पर ही पूरी कॉलोनी बसी हुई है। लाश किसकी है, किसने और कब हत्या की, इसका खुलासा नहीं हो सका है। कोलार पुलिस के अनुसार डी मार्ट के पास पुलिस हाउसिंग की कॉलोनी के पास एक खाली प्लाट में पानी के अंदर एक पैर दिखा। लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो पैर निकाला तो किसी मनुष्य का निकला। इसके बाद तलाशी शुरू हुई तो एक बोरी के अंदर कुछ और मानव अंग मिले हैं। लेकिन सिर और धड़ देर रात तक नहीं मिला था। प्लॉट का पानी खाली करा रही पुलिस कोलार पुलिस के अनुसार प्लॉट में पानी अधिक होने के कारण तलाशी अभियान नहीं चलाया जा सका था। इसलिए मोटर लगाकर पानी बाहर फेंका जा रहा है। पानी निकालने के बाद बुधवार सुबह से प्लॉट के अंदर मानव अंगों की तलाश शुरू की जाएगी। फिलहाल पुलिस इतना ही बता पा रही है कि किसी व्यक्ति की हत्या करने के बाद उसकी लाश को बोर में भरकर पानी के अंदर करीब 25 से दिन पहले फेंका गया होगा। क्योंकि शव पूरी तरह से डिकंपोज हो चुका है। सिर्फ हड्डियां बची हैं, जो नहीं गल सकी थीं। पुलिस का मानना है कि हत्या को किसी दूसरे स्थान पर अंजाम देने के बाद शव को यहां छिपाया गया होगा। क्योंकि जिस क्षेत्र में घटना हुई है वहां से कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं है। हालांकि घटना स्थल के आसपास करीब दो किलोमीटर के अंदर बड़ी संख्या में बाहरी मजदूर भी रहते हैं। पुलिस उन मजदूरों से भी पूछताछ कर जानकारी जुटाने में लगी है कि कोई व्यक्ति उनका परिचित लापता तो नहीं है।

मछली परिवार के खाते डीफ्रीज करने का आदेश, भोपाल हाईकोर्ट ने कलेक्टर और डीसीपी को किया निर्देशित

भोपाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने गैंगस्टर यासीन अहमद उर्फ मछली के परिजनों के बैंक खाते डिफ्रीज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि भोपाल कलेक्टर और डीसीपी (क्राइम) ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्वीकार किया है कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, इसलिए उनके बैंक खाते डिफ्रीज किए जाएं। साथ ही अदालत ने कहा कि राशि का उपयोग आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जा सकेगा। गौरतलब है कि यासीन अहमद के परिजनों ने मकान तोड़ने और बैंक खाते फ्रीज करने की कार्रवाई को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि प्रशासन ने केवल उनकी संपत्ति ध्वस्त की, जबकि सरकारी भूमि पर बने अन्य मकानों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं है, फिर भी खाते फ्रीज, शस्त्र लाइसेंस निलंबित और ईमेल आईडी ब्लॉक कर दी गई, जिससे व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप हो गईं। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने तर्क दिया कि एक याचिकाकर्ता के खाते से बड़ी राशि मुख्य अभियुक्त के खाते में ट्रांसफर हुई थी। इसलिए सीआरपीसी की धारा 102 के तहत जांच के लिए खाते फ्रीज किए गए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संबंधित लेनदेन पर टीडीएस का भुगतान किया गया था, और वे उस फर्म के साझेदार हैं, इसलिए रकम का लेनदेन वैध था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि फिलहाल बैंक खाते डिफ्रीज किए जाएं, लेकिन यदि आगे जांच में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री मिलती है, तो कानून अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रांसफर आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, 200 शिक्षक नहीं होंगे स्थानांतरित

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने जबलपुर सहित राज्य के अन्य जिलों के एकलव्य आवासीय विद्यालयों में पदस्थ 200 शिक्षकों को सामूहिक रूप से खंडवा स्थानांतरित करने के आदेश को अनुचित पाया। इसी के साथ आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। कोर्ट ने शिक्षकों को वर्तमान एकलव्य विद्यालय में पदस्थ रखने की व्यवस्था दी है। याचिकाकर्ता एकलव्य आवासीय विद्यालय, रामपुर छापर में पदस्थ उपमा शांडिल्य की ओर से अधिवक्ता सुधा गौतम ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 23 सितंबर, 2025 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता सहित जबलपुर सहित राज्य के अन्य जिलों के विभिन्न एकलव्य आवासीय विद्यालयों में पदस्थ 200 शिक्षकों को सामूहिक रूप से खंडवा स्थानांतरित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता 2024 में उच्च पद प्रभार पर रामपुर छापर के एकलव्य आवासीय विद्यालय में पदस्थ हुई थी। दरअसल, 11 नवंबर, 2024 को संभागायुक्त, जबलपुर ने एक पत्र जारी किया था, जिसके जरिये साफ किया गया था कि एकलव्य विद्यालयों में स्थान नहीं है, इसलिए शिक्षक स्थानांतरण के विकल्प पेश करें। जिसके बाद याचिकाकर्ता ने एकलव्य विद्यालय, रामपुर छापर, रांझी व सदर के विकल्प भरे थे। इसके बावजूद इन विकल्पों को दरकिनार कर खंडवा भेजने का आदेश जारी कर दिया गया। इसी लिए हाई कोर्ट की शरण ली गई। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद 23 सितंबर, 2025 के आदेश को अनुचित पाकर स्थानांतरण पर रोक लगा दी।

जहरीले कफ सिरप से मासूमों की मौत का सिलसिला जारी, MP में21 बच्चों की गई जान

छिंदवाड़ा  जहरीले कफ सिरप और दवाइयों ने मध्यप्रदेश के चार और मासूमों की जान ले ली। इन सभी की जान 24 घंटे के भीतर गई। इनमें छिंदवाड़ा जिले की दो साल की जायूशा यदुवंशी, डेढ़ साल की धानी डेहरिया, ढाई साल का वेदांत पंवार और वेदांश काकोडिय़ा शामिल हैं। दावा है कि इनमें से तीन बच्चों का इलाज परासिया के आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी ने किया था। जहरीली कोल्ड्रिफ सिरप लिखी गई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद ये बच्चे नागपुर के अस्पतालों में भर्ती थे। काकोड़िया के मामले की जांच की जा रही है। इस तरह मध्यप्रदेश अब तक 21 मासूमों को खो चुका है। इनमें 19 छिंदवाड़ा के हैं और दो बैतूल के हैं। इसमें से काकोड़िया की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है।  बैतूल जिले के अधिकारी कफ सिरप को नहीं मान रहे मौतों का कारण बैतूल जिले के अधिकारी बच्चों की मौत जहरीली कफ सिरप से होना नहीं मान रहे, जबकि दोनों का इलाज परासिया के डॉ. सोनी ने ही किया था। इनके पास दवा के पर्चे भी मिल चुके हैं। अभी जहरीली सिरप व दवाओं का खतरा टला नहीं है। नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती पांच बच्चों की हालत नाजुक है। कुछ तो कोमा जैसी स्थिति में हैं। कुछ को लगातार डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है। इस बीच बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। पांच बच्चों का इलाज नागपुर के अस्पतालों में चल रहा है. दो बच्चे सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH), दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और एक बच्चा एक निजी अस्पताल में भर्ती है. कई दिन से वेंटिलेटर पर थी धानी डहरिया तामिया के वार्ड 15 की डेढ़ वर्षीय धानी पुत्री नवीन डेहरिया कई दिन से वेंटिलेटर पर थी। सोमवार रात 11 बजे दम तोड़ दिया। किडनी फेल होने के बाद ब्रेन में गंभीर संक्रमण से जूझ रही थी। 10 लाख खर्च के बाद भी नहीं बचा वेदांत परासिया के रिधोरा के वेदांत की जान मंगलवार दोपहर गई। उसे सितंबर के पहले सप्ताह में डॉ. सोनी ने देखा था। 11 सितं. को रेफर किया था। उसे बचाने परिजन ने 10 लाख खर्च किए। दो साल की जायूशा ने भी तोड़ा दम जुन्नारदेव की दो वर्षीय जायूशा ने भी मंगलवार को एम्स नागपुर में दम तोड़ दिया। पिता राजेश ने बताया कि डॉ. सोनी ने कोल्ड्रिफ सिरप दी थी। इलाज में करीब 5 लाख रुपये खर्च किए। 3 साल के वेदांश की भी मौत लहगडुआ के 3 साल के वेदांश की तबीयत रविवार शाम बिगड़ी। टेस्ट में किडनीलिवर को नुकसान का पता चला। नागपुर में मंगलवार सुबह मौत हो गई। कौन सा सिरप दिया गया था, इसकी जांच की जा रही है। दवाओं की जांच हो, दो सप्ताह में जवाब मांगा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिवों को कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत को लेकर नोटिस जारी किया है। दवाओं की व्यापक जांच की जरूरत बताई। आयोग ने स्वत: संज्ञान भी लिया। दोनों किडनी फेल, बच्चा वेंटिलेटर पर बैतूल. आमला ब्लॉक में जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से दो बच्चों की मौत के बाद अब टीकाबर्री गांव के साढ़े तीन साल के हर्ष यदुवंशी की हालत गंभीर है। किडनी फेल हो चुकी हैं। नागपुर के निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर है। परिजन के अनुसार एक माह पहले डॉ. सोनी से इलाज कराया था। सर्दी-खांसी के लिए दी गई दवा के बाद तबीयत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर नागपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने किडनी फेल होने की पुष्टि की। दिल्ली से जाएगी टीम दिल्ली से जाएगी टीम स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कफ सिरप की प्रयोगशाला जांच में डायथिलीन ग्लाइकॉल का खतरनाक रूप से उच्च स्तर पाया गया है, जो अत्यधिक जहरीला होता है। जांच के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), दिल्ली से एक विशेष टीम जल्द नागपुर जा सकती है। जिम्मेदारों पर एक्शन और जांच डिप्टी CM शुक्ला ने बताया कि मौतों के लिए जिम्मेदार सिरप तमिलनाडु स्थित एक कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी के मालिक, दवा देने वाले डॉक्टर और संबंधित खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में कार्रवाई की गई है. सोमवार को, राज्य सरकार ने दो औषधि निरीक्षकों और FDA के एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया और जांच के बीच राज्य के औषधि नियंत्रक का तबादला कर दिया. छिंदवाड़ा के डॉ. प्रवीण सोनी को कथित लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मध्य प्रदेश पुलिस ने मौतों की जांच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है और कोल्ड्रिफ के तमिलनाडु स्थित निर्माता के खिलाफ मामला दर्ज किया है. घर-घर जाकर कोल्ड्रिफ बोतलें इकट्ठा करने का निर्देश छिंदवाड़ा में लगभग 600 कफ सिरप की बोतलें मिली हैं, जिनमें से 443 बोतलें पहले ही बरामद की जा चुकी हैं. उन्होंने बताया कि मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर बची हुई बोतलें इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें से कोई भी इस्तेमाल में न रहे. उनके अनुसार, सरकार इस घटना की गहन जांच कर रही है. नए ड्रग कंट्रोलर ने शुरू करवाई दवा की जांच औषधि प्रशासन कार्यालय ने प्रदेश में कफ सिरप की जांच शुरू कराई है। नवनियुत नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश श्रीवास्तव ने बताया, मंगलवार को पदभार संभालने के बाद प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप और प्रतिबंधित कॉिबनेशन वाली दवाओं की जांच शुरू करा दी है। बिकते हुए पाए जाने पर तत्काल जत किए जाएंगे। विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गूगल से मिला सुराग, जबलपुर पुलिस ने पकड़ा इसाफ बैंक डकैती का 11वां आरोपी

जबलपुर  जबलपुर के खितौला बैंक डकैती के मामले में पुलिस ने बिहार गिरोह से जुड़े 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी सागर जिले के देवरी क्षेत्र से पकड़े गए। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी ने बैंक डकैती के पहले और बाद में गिरोह को मोटरसाइकिल और भागने में मदद की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र सिंह ने बताया कि 11 अगस्त की सुबह करीब 8:50 बजे खितौला थाना क्षेत्र स्थित इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में तीन युवक हेलमेट पहनकर दाखिल हुए और पिस्टल की नोक पर 20 मिनट में डकैती को अंजाम दिया। बैंक के बाहर उनके दो साथी मोटरसाइकिल पर इंतजार कर रहे थे। वारदात के बाद आरोपी बैंक से 15 किलो सोना और 5 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। जांच में पता चला कि पाटन निवासी रईस सिंह लोधी पहले छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जेल में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के मामले में बंद था। वहीं उसकी मुलाकात बिहार गिरोह के सदस्यों से हुई। जेल में ही दोनों ने बैंक डकैती की योजना बनाई। गिरोह का मास्टरमाइंड राजेश दास उर्फ आकाश दास (38 वर्ष) 18 जून को रायगढ़ जेल से जमानत पर रिहा हुआ था। योजना के तहत वह अपने पांच साथियों के साथ जबलपुर आया और डकैती को अंजाम दिया।  बबलू ने ही पार कराया था जंगल का रास्ता 11 अगस्त की सुबह बैंक से साढ़े 14 करोड़ रुपए के जेवरात और करीब साढ़े पांच लाख रुपए लूटकर फरार होने के बाद 2 बाइक में सवार होकर पांचों डकैतों इंद्राना के पास स्थित मुरैथ-लमकना रोड पहुंचे थे। वहां बबलू इंतजार कर रहा था। सभी लोग मेन रोड से करीब 10 किलोमीटर दूर घने जंगल में गए, जहां लूट का सोना और रुपए आपस में बांट लिए। बैंक के बैग को वही पर जला दिया। गैंग के सरगना राजेश दास ने प्लान के मुताबिक बबलू को मदद करने के लिए 50 हजार रुपए नकद दिए। इसके बाद 2 डकैत बस में बैठकर दमोह के लिए रवाना हो गए। मदद के लिए बबलू बाइक में जंगल के रास्ते आगे-आगे चल रहा था। बबलू का काम था कि अगर पुलिस कहीं भी नजर आती तो फौरन वह बस में बैठे डकैतों को सूचना देता। 11 अगस्त की रात को बबलू 2 डकैतों को दमोह रेलवे स्टेशन में छोड़कर वापस अपने घर आ गया। अब तक पुलिस ने रईस सिंह लोधी, हेमराज, सोनू वर्मन और दमोह निवासी विकास चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा मास्टरमाइंड राजेश दास, उसके सहयोगी इंद्रजीत दास उर्फ सागर दास (जिला गया), जहांगीर आलम अंसारी (48 वर्ष, गया), गोलू उर्फ रविकांत पासवान (24 वर्ष, बेलखेड़ा, गया), उमेश पासवान (31 वर्ष, पांडेयपुरा, चतरा, झारखंड) और हरिओम ज्वेलर्स के संचालक हरि प्रसाद सोनी (बिहार) को भी गिरफ्तार किया गया है। डकैती से पहले और बाद में मोटरसाइकिल की व्यवस्था करने तथा फरार होने में मदद करने वाला आरोपी बबलू उर्फ बाबू सिंह लोधी, पिता शिवराज सिंह लोधी, निवासी उडना करैया, पाटन, को सागर जिले के देवरी से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसके पास से 40 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। अब तक पुलिस केवल 3 किलो 400 ग्राम सोना ही बरामद कर पाई है। बाकी सोने की तलाश जारी है। जंगल के रास्ते का किया उपयोग 12 अगस्त की सुबह बबलू ने अपनी बाइक में सुनील पासवान को बैठाया, जबकि उसके साथी रईस लोधी ने दो डकैतों को बाइक में बैठाकर जंगल के रास्ते निकल गया। 10वीं तक पढ़ा बबलू बहुत ही शातिर था, उसे पता चल गया था, बैंक डकैती के बाद पुलिस एक्टिव हो गई है। ऐसे में उसने सभी के मोबाइल फोन बंद किए और फिर जंगल का रास्ता अपनाया। इंद्राना, मुरैठ से लमखैरी, उमरिया, लमकना के जंगल से होते हुए करीब 70 किलोमीटर के जंगल को डकैतों ने डेढ़ से दो घंटे में पार कर लिया। इसके बाद सभी लोग दमोह रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से तीनों डकैत बिहार के लिए रवाना हो गए, जबकि बबलू और रईस वापस इंद्राना आ गए। घर दिलाया-बाइक दिलवाई बैंक में डकैती डालने के दौरान क्या-क्या समान की जरूरत पड़ेगी, इसका पूरा प्लान बन चुका था। बबलू ने डकैती में शामिल अपने साथी रईस लोधी के साथ मिलकर सबसे पहले डकैतों को रहने के लिए इंद्राना में किराए का मकान दिलवाया। डकैती के बाद भागने के लिए बाइक की भी जरूरत थी, लिहाजा बबलू ने एक बाइक पाटन से फाइनेंस करवाई। जिसके लिए उसने अपने एक साथी हेमराज के फर्जी दस्तावेज लगाए थे। बाइक खरीदने के बाद बबलू ने डकैतों को उसे दे दी थी। बैंक में डकैती डालने के पहले डकैतों ने आसपास रेकी की थी, जिसमें बबलू भी शामिल था।  

जिलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में करें प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जिले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं का अध्ययन कर बनायें कार्ययोजना: मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में करें प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक निवेश, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को दिया जाये बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार्मिक पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा से रोजगार सृजन की दिशा में करें प्रयास जिलों की बंद औद्योगिक इकाइयों के प्रकरणों का हो शीघ्र निराकरण स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन सत्र को किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि जिले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं का गहराई से अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना बनायें। ऐसे प्रयास हों कि जिले में उद्योगों के साथ रोजगार के अवसर सृजित हों, जिससे जिले आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल करें और स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित किया जाए जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा को भी रोजगार से जोड़ने की बात कही जिससे युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हों। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में "रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन" सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की जेसी मिल, रतलाम की सज्जन मिल और उज्जैन की विनोद मिल से संबंधित समस्याओं का समाधान जिस तत्परता से किया गया है उसी तरह अन्य जिलों में बंद औद्योगिक इकाइयों का भी शीघ्र निराकरण किया जाए। मुरैना जिले की कैलारस स्थित शुगर मिल से जुड़े मामले का समाधान भी प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के औद्योगिक विज़न को ज़मीनी स्तर पर साकार करने में कलेक्टर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिलों की सक्रियता और विभागों के समन्वित प्रयास ही मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध अनुपयोगी भूमि का उपयोग कर लैंड बैंक विकसित किए जाएं। जिलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और स्व-सहायता समूहों को एमएसएमई सेक्टर से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल की जाए जिससे स्थानीय उत्पादन और विपणन गतिविधियों में वृद्धि हो। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास एवं निवेश प्रोत्साहन  राघवेंद्र कुमार सिंह, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा एमएसएमई विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से प्रेजेंटेशन दिया गया। राज्य सरकार के वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को विकसित, औद्योगिक और रोजगार-समृद्ध प्रदेश के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि जिला निवेश सुविधा केंद्र (IFC) को सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाया जाए। औद्योगिक भूमि की पहचान कर अतिक्रमण मुक्त किया जाए तथा विभिन्न विभागों द्वारा समयबद्ध अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला कौशल समिति को सक्रिय कर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और वैकल्पिक रोजगार अवसरों से जोड़ा जाए। उद्योगों को पीएम विश्वकर्मा और अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया जाए। कलेक्टर्स से यह भी कहा गया कि एक जिला-एक उत्पाद के तहत उत्पादों की पहचान, ब्रांडिंग और विपणन पर प्रभावी कार्य किया जाए। टैग किए गए उत्पादों को योजनाओं जैसे PMFME और DEH-OSOP से जोड़ा जाए और एमएसएमई इकाइयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा ई-कॉमर्स माध्यमों से जोड़ा जाए। बंद रेशम केंद्रों का पुनर्जीवन कर खादी, हस्तशिल्प और रेशम उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उपकरण स्वीकृति और वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जाए। इसके साथ ही, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग सहयोग के क्षेत्र में DLCC एवं DLRC बैठकों का समय पर आयोजन करने, जन धन, मुद्रा और अटल पेंशन योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा वार्षिक लक्ष्य पूर्ति हेतु बैंकों की सक्रिय भूमिका तय करने के निर्देश भी दिए गए।  

वर्ष 2047 को लक्ष्य बनाकर नगरीय विकास की कार्ययोजना तैयार करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिये वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर बनाएं कार्ययोजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कमजोर वर्ग की आवास योजनाओं पर दें विशेष ध्यान मेट्रोपालिटन सिटी के विकास पर संबंधित कलेक्टर्स दें अपने सुझाव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में नगरीय क्षेत्र के मुद्दों पर हुई चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने विजन-2047 में आबादी के हिसाब से नगरों के सुनियोजित विकास पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है। उनकी मंशा के अनुरूप प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का विकास भी सुनियोजित तरीके से हो सके इसके लिये जिलों में भी वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार कर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर की पीएम स्वनिधि योजना और स्वच्छ वायु इन्डेक्स में उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिल्डर्स द्वारा कॉलोनी डेवलपमेंट के समय तैयार किये गये ईडब्ल्यूएस आवास आवंटन में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिये कि कलेक्टर्स इस पर शीघ्र निर्णय लेकर इनका शत-प्रतिशत आवंटन सुनिश्चित कराएं। आधुनिक सुविधाओं के साथ बने गीता भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन तैयार करने का निर्णय लिया है। यह भवन धार्मिक रूप से तैयार नहीं किये जा रहे हैं बल्कि इनका निर्माण आधुनिक टाउन हॉल के तौर पर किया जा रहा है। यह टाउन हॉल शहर की सामुदायिक आवश्यकताओं को पूरा करें, साथ ही इनमें डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी हो। भवनों का निर्माण एक निश्चित समय-सीमा में पूरा किया जाये। धार्मिक स्थलों का तैयार हो मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सतना जिले में चित्रकूट के समग्र विकास के लिये कार्ययोजना मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर साडा (स्पेशल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के साथ मिलकर चित्रकूट का विकास करें। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर समेत अनेक धार्मिक स्थलों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ नर्मदा परिक्रमा मार्ग का भी विकास किया जा रहा है। इन धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं इसलिये आवश्यक है कि इनका समग्र विकास निर्धारित समय में पूरा हो। टीडीआर में मुआवजा राशि का भुगतान जल्द हो शहरी क्षेत्रों में टीडीआर के तहत अधिग्रहण भूमि पर मुआवजा दिया जा रहा है। इनमें शहरी क्षेत्र की सड़कों के चौड़ीकरण का मुद्दा भी है। उन्होंने कहा कि टीडीआर में अधिग्रहित भूमि के बदले संबंधित को मुआवजा राशि का भुगतान समय पर किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किये जाने पर जोर दिया। मेट्रोपालिटन सिटी का समग्र विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में भोपाल इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र तैयार करने का निर्णय लिया है। इन क्षेत्रों के कलेक्टर्स प्लान तैयार करें कि कैसे रोजगार, औद्योगिकीकरण, एजुकेशन और मेडिकल हब के रूप में मेट्रोपालिटन क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार बिजली,पानी और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को सुदृढ़ करने के निर्देश दिये हैं। मध्यप्रदेश विजन@2047 नगरीय विकास एवं आवास के अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे ने बताया‍कि वर्ष 2047 तक प्रत्येक नागरिक को सर्वसुविधा युक्त पक्का आवास और शहरों को मलिन बस्ती मुक्त किया जाना है। स्वच्छता के मामले में अपशिष्ट प्रबंधन, नवकरणीय ऊर्जा तथा सर्कुलर इकोनॉमी का समावेश किया जाना है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन द्वारा सुरक्षित एवं सतत जल आपूर्ति और असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 में 8 लाख 69 हजार 531 आवास तैयार किये जा चुके हैं। योजना में 76 हजार 300 से अधिक आवास पूर्ण किये जाने हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स अधूरे पड़े आवासों को जल्द पूरा करें। प्रदेश में पीएमएवाय 2.0 में 10 लाख आवास तैयार किये जायेंगे। स्वच्छ भारत मिशन में प्रदेश के 100 प्रतिशत आवासों और व्यावसायिक क्षेत्रों में कचरा संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। निकायों को 7115 कचरा संग्रहण वाहन दिये गये हैं। क्लीन एयर प्रोग्राम में अच्छे काम के लिये इंदौर, जबलपुर और देवास को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। पीएम स्वनिधि योजना में वर्ष 2023-24 में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिला है। कॉन्फ्रेंस में एयर क्वालिटी सुधार कार्यक्रम पर इंदौर कलेक्टर, पीएमएवाय पर ग्वालियर कलेक्टर और जल संवर्धन में श्रेष्ठ कार्य पर कलेक्टर खंडवा ने अपने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतियां दी।  

जन कल्याण को लेकर कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुई गहन चर्चा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुआ जन कल्याण के लिए मंथन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति और सुशासन की व्यवस्था लागू करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस जन कल्याण के विषयों पर मंथन की दृष्टि से सार्थक रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए सुशासन की व्यवस्था लागू करते हुए हम सभी कदम से कदम मिलाकर चलें। मध्यप्रदेश में जहां मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, सांदीपनि विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ बनाने और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के माध्यम से बेहतर शिक्षा के कदम उठाए गए हैं, वहीं प्रदेश में अनेक नवाचार भी हुए हैं। गत दो वर्ष में प्रदेश में अनेक प्रमुख नवाचार हुए इनमें एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत, स्वतंत्रता दिवस पर जिला स्तर पर मंत्रीगण द्वारा जिले के विकास पर केंद्रित भाषण की प्रस्तुति, प्रदेश में औद्योगीकरण को प्राथमिकता, केन बेतवा परियोजना और पार्वती काली सिंध परियोजनाओं की बाधाएं समाप्त कर नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए पहल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही जनसुविधा के लिए पर्यटन हवाई सेवा, ड्रोन तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन और ई पंजीयन सहित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन के अंतर्गत विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कांफ्रेंस के प्रथम दिन समस्त सत्रों के पश्चात कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को जन कल्याण की अपेक्षा के साथ आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।     सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।     जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।     किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।     जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।     जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।     गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।     साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।     उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।     पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।     धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।     लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।     भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।     राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।     कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।     प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।     गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।     ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।     स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।     कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।     जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।     नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।     बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।     अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।