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उज्जैन की 200 साल पुरानी तकिया मस्जिद हटाने पर इंदौर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

उज्जैन  उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक परिसर की तकिया मस्जिद को हटाए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ दायर की गई अपील को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की दलील याचिकाकर्ता मोहम्मद तैयब और कुछ अन्य लोगों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि तकिया मस्जिद लगभग 200 साल पुरानी थी और इसकी जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे तोड़ने का कोई अधिकार नहीं था। याचिका में मस्जिद का पुनर्निर्माण कराने और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी। सरकारी पक्ष का जवाब शासन की ओर से पैरवी कर रहे वकील आनंद सोनी ने कोर्ट को बताया कि जमीन का अधिग्रहण पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन के बदले में संबंधित पक्ष को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है और अब यह भूमि पूर्ण रूप से सरकार के स्वामित्व में है। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि वक्फ बोर्ड ने इस मामले को लेकर भोपाल स्थित वक्फ ट्रिब्यूनल में पहले से ही एक केस दायर कर रखा है। न्यायालय की टिप्पणी और फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के दावों को अपर्याप्त माना। कोर्ट ने कहा कि अपील करने वालों के पास मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग करने का कोई कानूनी आधार (हक) नहीं है। न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का उल्लेख करते हुए कहा, "किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी विशेष स्थान से नहीं जुड़ा है। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।" इसी आधार पर, कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया। 

श्रीकृष्ण पाथेय योजना से जुड़ेगा उज्जैन का सांस्कृतिक पुनरुत्थान, पांच मंदिरों का होगा संरक्षण और विकास

उज्जैन  आस्था की नगरी उज्जैन में देवस्थानों के विकास का क्रम जारी है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूसीटीएसएल) ने शहर के पांच ऐतिहासिक मंदिरों को श्रीकृष्ण पाथेय योजना से जोड़ते हुए उनके विकास और सुंदरीकरण का खाका तैयार किया है। उद्देश्य, आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ-2028 से पहले उज्जैन को एक समग्र धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में राष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इस योजना में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली महर्षि सांदीपनि आश्रम, चिंतामन गणेश मंदिर, हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर, श्रीकाल भैरव मंदिर, भूखी माता मंदिर और नारायणा धाम शामिल हैं। ‘श्रीमहाकाल महालोक’ परियोजना की सफलता और श्रद्धालुओं की बेमिसाल आमद को देखते हुए अब शहर के अन्य मंदिरों का भी विकास उसी माडल पर किए जाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद विस्तृत योजना बन रही है। यूसीटीएसएल का कहना है कि इससे न केवल आस्था के केंद्रों का वैभव बढ़ेगा बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा अवधि में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और टूरिज्म सेक्टर को गति मिलेगी। यह योजना केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उज्जैन की विरासत, आस्था और पर्यटन को एक सूत्र में जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे शहर विश्व पटल पर और उज्जवल चमक बिखेरेगा। आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन की नई रेखा सांदीपनि आश्रम और नारायण धाम इस योजना के केंद्र में रहेंगे। धार्मिक मान्यता है कि सांदीपनि आश्रम वही पवित्र स्थल है जहां योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने 16 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित कर संपूर्ण जगत को धर्म, कर्म, नीति और प्रेम का संदेश दिया था। नारायण धाम में श्रीकृष्ण और सुदामा के वन विहार का प्रसंग जुड़ा है। इस धार्मिक पृष्ठभूमि को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर इन स्थलों को आकर्षक धार्मिक-पर्यटन केंद्रों में बदला जाएगा। सिंहस्थ 2028 से पहले दिखेगा असर सरकार और प्रशासन ने इस योजना को मिशन मोड में लागू करने का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री द्वारा 30 दिसंबर 2027 तक सभी प्रमुख प्रोजेक्ट पूरे करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। शासन से स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ कर दिए जाएंगे ताकि सिंहस्थ से पहले पांचों मंदिरों का कायाकल्प पूर्ण हो जाए। परियोजना में मंदिर परिसरों का सौंदर्यीकरण, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, पहुंच मार्गों का विस्तार, सूचना एवं व्याख्या केंद्र, गाइड मैप और सांस्कृतिक प्रस्तुति स्थल शामिल किए जाएंगे। इनसे श्रद्धालुओं को सहजता के साथ धार्मिक अनुभूति और उज्जैन की विरासत का गहन परिचय मिल सकेगा।

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने सरकार की पहल: MP में नस्ल सुधार को लेकर संपर्क अभियान शुरू

ग्वालियर  पशुओं के नस्ल सुधार कार्यक्रम की धीमी रफ्तार से मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसका उदाहरण है- दो साल पहले सेक्स शार्टेड सीमन जैसी उन्नत तकनीक शुरू की जा चुकी है लेकिन प्रदेश का पशु पालन विभाग इस तकनीकी को पशु पालकों तक नहीं पहुंचा पा रहा है। नतीजतन, वे परंपरागत तकनीकी से ही पशुओं का गर्भाधान करा रहे हैं। चूंकि नई तकनीकी न सिर्फ पशुओं के नस्ल सुधार के लिए कारगर है, जो मादा पशुओं के जन्म हो ही सुनिश्चित करती है और इस नस्ल के पशु अधिकाधिक दुग्ध भी देते हैं। ऐसे में, राज्य सरकार ने इस तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान संचालित करने का निर्देश दिया है। गत दो अक्टूबर से शुरू हो चुके इस अभियान के तहत ऐसे पशुपालकों का सर्वे किया जा रहा है, जो 10 या 10 से अधिक दुधारू पशु पालते हैं। राज्य सरकार का मानना है कि यदि पशु पालकों ने यह तकनीकी अपनाई तो बहुत जल्द दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। नई तकनीकी भी, इंफ्रास्ट्रक्चर भी फिर भी नस्ल सुधार में पीछे कम दुग्ध उत्पादन वाले पशुओं में नस्ल सुधार का काम कृत्रिम गर्भाधान से हो सकता है। इसके बाद उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। इसके साथ ही नई तकनीकी से गर्भाधान के दौरान दुधारू पशुओं के 90 प्रतिशत मादा पशु होने की संभावना रहती है। ऐसे में निराश्रित पशुओं की समस्या भी हल हो सकती है। गौरतलब है कि पशुओं की नस्ल सुधार के लिए संसाधन कम नहीं हैं। पशु अस्पताल और डिस्पेंसरी भी हैं। कृत्रिम गर्भाधान केंद्र भी संचालित हैं। इन सभी केंद्रों पर सेक्स शार्टेड सीमन की नई तकनीकी भी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में अधिकतर पशु पालक परंपरागत तरीके से ही पशुओं का गर्भाधान कराते हैं। इससे नस्ल सुधार नहीं हो पाता। गोवंशीय पशु औसतन एक बार में सामान्यत: दो से चार लीटर दूध देते हैं। इसके साथ ही सड़कों भी निराश्रित गोवंश रहता है। उसके लिए तकनीकी अधिक कारगर होगी। क्या होगा अभियान में     अभियान के तहत पशु पालकों का सर्वे किया जाएगा।     पहले चरण में 10 पशुओं से अधिक का पालन करने वाले, दूसरे चरण में 10 से कम पशु पालने वालों का डाटा एकत्रित किया जाएगा।     हर घर से संपर्क के दौरान हर पशु पालक की समस्याएं सुनी जाएंगी और निराकरण भी किया जाएगा। नस्ल सुधारने के फायदे बताए जा रहे     पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान तो बहुत पहले से किया जाता रहा है। सेक्स शार्टेड सीमन तकनीकी दो साल पहले ही आई है। अधिकतर पशु पालक जानकारी न होने से परंपरागत तरीके से ही पशुओं का गर्भाधान कराते हैं, लेकिन अब अभियान में सभी पशु पालकों से संपर्क करके उन्हें नस्ल सुधार के फायदे बताए जा रहे हैं। – डॉ. अनिल अग्रवाल, उप संचालक, पशु पालन व डेयरी विभाग  

महाकाल मंदिर में दीपावली की शुरुआत: 20 अक्टूबर को भस्म आरती में होगी विशेष पूजा

उज्जैन  शीत ऋतु शुरू होने को है, जिसका असर 8 अक्तूबर से विश्व प्रसिद्ध श्री महाकाल मंदिर में भी देखने को मिलेगा। 8 अक्तूबर से बाबा महाकाल की दिनचर्या में भी बदलाव होगा। इसके चलते बाबा का अब गर्म जल से स्नान (अभिषेक) करवाया जाएगा और तीन आरती का भी समय बदल जाएगा। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि साल में दो बार बाबा महाकाल की दिनचर्या बदलती है। अभी बाबा महाकाल की दिनचर्या गर्मी के अनुसार होने से प्रतिदान ठंडे जल से स्नान करवाया जा रहा है, लेकिन परंपरानुसार सर्दी का मौसम शुरू होने से अब चार माह तक भगवान का गर्म जल से अभिषेक करवाया जाएगा। वहीं, इस मौसम में सूर्यास्त जल्द होने के कारण 8 अक्तूबर से तीन आरतियां तय समय से आधे घंटे पहले होंगी। इन आरतियों का बदलेगा समय पुजारी महेश शर्मा के अनुसार श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्री महाकाल भगवान की होने वाली आरती का समय परम्परानुसार परिवर्तित होगा। 8 अक्तूबर 2025 बुधवार कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक श्री महाकालेश्वर भगवान की तीन आरतियों में परिवर्तन होगा। जिसमें प्रातः होने वाली द्दयोदक आरती 7:30 से 8:15 तक, भोग आरती प्रातः 10:30 से 11:15 तक व संध्या आरती सायं 6:30 से 07:15 बजे तक होगी। इसी प्रकार भस्मार्ती प्रातः 4 से 6 बजे तक सायंकालीन पूजन सायं 5 से 5:45 तक एवं शयन आरती रात्रि 10:30 से 11 बजे तक अपने निर्धारित समय पर ही होगी। गर्म जल से स्‍नान कराने के पीछे यह है मान्‍यता चूंकि सर्दियां शुरू हो गई हैं, मान्यता है कि ठंड के इस मौसम में बाबा महाकाल को सर्दी न लगे इसलिए चार माह भगवान को भस्म आरती में गर्म जल से स्नान कराया जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है।इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन लगाकर स्नान करने की शास्त्रीय मान्यता है। लौकिक जगत में भगवान महाकाल उज्जैन के राजा माने जाते हैं इसलिए लोकाचार की समस्त परंपराओं का मंदिर में निर्वहन होता है। इस दिन को कहते हैं रूप चतुर्दशी मालूम हो कि दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को ही रूप चौदस, छोटी दिवाली, काली चतुर्दशी या कार्तिक कृष्‍ण चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। 18 से होगी दीपोत्सव की शुरुआत श्री महाकालेश्वर मंदिर में 18 अक्टूबर 2025 शनिवार के दिन धनतेरस पर्व मनाया जावेगा।जिसमें श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित चिकित्सालय में भगवान श्री धनवंतरी का पूजन किया जावेगा। इसके अतिरिक्त मंदिर के पुरोहित समिति द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर का अभिषेक पूजन किया जावेगा। 20 अक्टूबर 2025 सोमवार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को श्री महाकालेश्वर भगवान को अभ्यंग स्नान करवाया जाएगा तथा इसी दिन से श्री महाकालेश्वर भगवान का गर्म जल से स्नान प्रारंभ होगा, जो फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक चलेगा। 20 अक्तूबर 2025 सोमवार को श्री महाकालेश्वर भगवान की प्रातः 7:30 बजे होने वाली आरती में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। सायं में दीपोत्सव पर्व मनाया जाएगा। राजा को सबसे पहले लगता है अन्नकूट कार्तिक मास में देवालयों में अन्नकूट लगाने की परंपरा है। विशेषकर श्रीकृष्ण मंदिरों में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा के साथ अन्नकूट लगाए जाते हैं, लेकिन महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को अन्नकूट भी सबसे पहले लगाने की परंपरा है। भस्म आरती करने वाले पुजारी परिवार की ओर से रूप चतुर्दशी के दिन ही अन्नकूट लगा दिया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से भगवान महाकाल की सवारी निकाले जाने का क्रम शुरू होगा, जो अगहन मास की अमावस्या तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक सोमवार पर भगवान महाकाल रजत पालकी में सवार होकर तीर्थ पूजन के लिए शिप्रा तट जाएंगे। कार्तिक-अगहन मास में सवारी कब-कब     27 अक्टूबर : कार्तिक मास की प्रथम सवारी     03 नवंबर : कार्तिक मास की द्वितीय सवारी     03 नवंबर : रात 11 बजे हरि हर मिलन की सवारी     10 नवंबर : अगहन मास की पहली सवारी     17 नवंबर : कार्तिक अगहन मास की राजसी सवारी

भरत मिलाप कार्यक्रम में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि इतिहास का ज्ञान होने पर ही हम विषम परिस्थिति में अपनी सही भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे। सनातन की पुनर्स्थापना से देश को मजबूत करने का वातावरण चल रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल पद्मधर पार्क रीवा में भरत मिलाप कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ और सनातन की पुनर्स्थापना हुई। कोठारी बंधुओं के बलिदान से मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने दशहरा उत्सव समिति द्वारा प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए दशहरा एवं भरत मिलाप कार्यक्रम आयोजन के लिए साधुवाद दिया तथा अपेक्षा की कि आगे भी यह कार्यक्रम कुशलतापूर्वक परंपरा अनुसार संचालित होते रहेंगे। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की भाव विभोर करने वाली मंचीय प्रस्तुति दी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सराहना करते हुए कहा कि इस प्रस्तुति से उपस्थित लोग अभिभूत हुए। उन्होंने श्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के स्वरूप का पूजन किया। इस अवसर पर कलाकारों का सम्मान भी किया गया। 

लखनऊ में क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट कला का प्रदर्शन

भोपाल  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को लखनऊ की ऐतिहासिक सफेद बारादरी में “क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी” का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक और क्राफ्टरूट की संस्थापक श्रीमती अनारबेन पटेल भी उपस्थित रहीं। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्रदर्शनी के भ्रमण के दौरान मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग गाँव से आए प्रसिद्ध बाग प्रिंट शिल्पकार मोहम्मद आरिफ खत्री एवं मोहम्मद अली खत्री से पारंपरिक कला के बारे में विस्तार से जानकारी भी ली। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बाग प्रिंट की जटिल प्रक्रिया को बड़े ध्यान से समझा। श्री खत्री ने उन्हें बताया कि बाग प्रिंट एक प्राचीन हस्तकला है, जो पूरी तरह हाथ से की जाती है। इसमें कपास और रेशम के कपड़ों पर लकड़ी के ब्लॉकों से छपाई की जाती है, और प्राकृतिक रंगों, पौधों, फूलों और जड़ों से बने रंगों का उपयोग होता है। बाग क्षेत्र की विशिष्ट नदी का पानी इन रंगों को और गहराई तथा चमक प्रदान करता है। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि इस तरह की पारंपरिक कलाएँ भारत की असली पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी को इन कलाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।  

डॉ. यादव के फैसलों से खुश किसान, कहा—सरकार ने हमारी सुनी आवाज़

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रतलाम आगमन पर बंजली हवाईपट्टी पर जिले के किसानो ने भावांतर योजना लागू किए जाने और क्षतिग्रस्त फसलों के लिए राहत राशि दिए जाने पर स्वागत कर आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को किसानों ने ही बताया कि ग्राम गणेशगंज तहसील पिपलोदा के श्री दशरथ पिता परमानन्द को 1,20,000 रूपए, ग्राम कमलाखेड़ा तहसील पिपलोदार के श्री बलबहादुर सिंह पिता रतन सिहं को 99,798 रूपए, ग्राम सेजावता तहसील रतलाम शहर के श्री अरूण पिता प्रहलादचंद्र पुरोहित को 42,230 रूपए, ग्राम कालुखेड़ी तहसील रतलाम शहर के श्री बसंतीलाल पिता शंकरलाल को 35,040 रूपए, ग्राम कमालिया तहसील जावरा के श्री फूलचंद पिता अंकारलाल को 41,814 रूपए एवं ग्राम टोलखेड़ी तहसील जावरा के श्री अमृत पिता भंवरलाल चौधरी को 38,000 रूपए की राहत राशि बैंक खाते में प्राप्त हुई है। किसानो ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर राहत राशि मिलने से संकट की घड़ी में आर्थिक संबल मिला है। मुख्यमंत्री ने किसानो से कहा कि आप चिंता नहीं करें, सरकार हर मुसीबत की घड़ी में किसानों के साथ है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- समाज के सहयोग और सामाजिक संस्थाओं की सक्रियता से संभव हुए हैं सामुदायिक महत्व के कई कार्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाजिक संस्थाएं समाज के सहयोग से सामुदायिक महत्व के कार्यों का संपादन और अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करती हैं। समाज के सहयोग से कई स्थानों पर मंदिर, शालाओं और अन्य सामुदायिक महत्व के भवनों का निर्माण और अन्य महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हुए हैं। सरस्वती विद्या मंदिर द्वारा इस दिशा में की जा रही पहल और जनसामान्य द्वारा इसके लिए दिया जा रहा सहयोग सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रतलाम के काटजू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में नव निर्मित ‘संघ शताब्दी सभागार’ का लोकार्पण करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया में कई देश सैन्य और आर्थिक रूप से मजबूत है, लेकिन भारत दुनिया का इकलौता देश है, जहां सनातन संस्कृति से समाज चल रहा है। हम शक्ति में विश्वास न करते हुए संस्कारों में विश्वास करते हैं और सर्वे भवन्तु सुखिनः के भाव के साथ चलते हैं। भारत हजारों सालों से विश्व गुरू रहा है हमने तक्षशिला, नालंदा, विक्रमादित्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी। दुनिया के कई देशों के लोग सुशासन की स्थापना के लिए अपने देश के नागरिकों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए भारत भेजते थे। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री श्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के आधुनिक विश्वकर्मा हैं। उनके नवाचार और विकास के कार्य आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रदेश में नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन हुआ है, हमें इसे विस्तार देना है। कार्यक्रम को विद्या भारती के मध्य क्षेत्र के संगठन मंत्री श्री अखिलेश मिश्रा, विद्यालय के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सखलेचा, विद्या भारती मालवा प्रांत के अध्यक्ष श्री प्रकाश धनखड़ ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छात्राओं ने स्वागत गीत पर आकर्षक नृत्य एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी, महापौर प्रहलाद पटेल, निगम अध्यक्ष मनीषा शर्मा, गोपाल काकानी सहित जनप्रतिनिधि, स्कूल स्टॉफ एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभागार के निर्माण के लिए राशिदान देने वाले दानदाताओं को भी सम्मानित किया। 

अमृत हरित महाअभियान में नगरीय क्षेत्रों में 35.59 लाख पौधे लगाये गये

अधिकारी एवं विशेषज्ञ कर रहे है स्थल निरीक्षण अमृत मित्रों का प्रशिक्षण जारी भोपाल  मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय में 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से अब तक 35 लाख 59 हजार पौधे लगाये जा चुके हैं। लगाये गये पौधों की सुरक्षा के लिये प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने अमृत हरित महाअभियान में सघन पौध रोपण के लिये जनभागीदारी की पहल की थी। इस महाअभियान में एक पेड़ माँ के नाम और वूमेन फॉर ट्रीज जैसे कार्यक्रम शामिल थे। जल संरक्षण एवं प्रशिक्षण के कार्य जारी विभाग द्वारा हरित क्षेत्र विकास के अंतर्गत पौध रोपण के बाद उनकी सुरक्षा की गतिविधियों की समीक्षा के लिये अधिकारियों और विशेषज्ञों के द्वारा स्थल निरीक्षण और सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी जा रही है। प्रदेश में 1123 महिला अमृत मित्रों को पौधो की निगरानी की जिम्मेदारी सौपी गयी है। इनकी संख्या बढ़ाने के लिये महिला स्व-सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी चयन के बाद प्रशिक्षण दिये जाने की व्यवस्था की गई है। अब तक सांची, औबेदुल्लागंज,मंडीदीप, उज्जैन, बदनावर, पीथमपुर, महू, इंदौर, देवास, दतिया सहित कई अन्य नगरीय निकायों में स्थल निरीक्षण और प्रशिक्षण का कार्य किया जा चुका है। सागर, ग्वालियर, मुरैना, रायसेन, विदिशा, भिंड और दतिया जिलों में वॉटर टेस्टिंग और पौध रोपण की समीक्षा के लिये निगरानी कार्यक्रम तैयार कर लिये गये है। जल संरचनाओं का जीर्णोंद्वार देवास एवं धार जिलों में जल संरचनाओं के जीर्णोंद्वार के उल्लेखनीय कार्य किये गये है। जल संरचनाओं के संरक्षण के लिये नागरिकों एवं युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश में अमृत मित्र महिला समूहों को पौध रोपण के संरक्षण और पार्कों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौपी गयी है।  

राज्यपाल पटेल ने कहा- गौरव दिवस का आयोजन सभी जिलों में हो

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय कल्याण के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी समुदाय को उपलब्ध कराने के प्रयासों पर विशेष बल दिया जाये। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में गौरव दिवस का आयोजन किया जाए। राज्यपाल श्री पटेल शुक्रवार को राजभवन में गृह, जेल, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में चर्चा कर रहे थे। बैठक का आयोजन 2 सत्रों में किया गया था। प्रथम सत्र में राज्यपाल ने गृह, जेल और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की। द्वितीय सत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जन-मन योजना की समीक्षा की। जनजातीय गौरव दिवस पर भी रिहा होंगे बंदी राज्यपाल श्री पटेल ने अच्छा आचरण करने पर बंदियों को रिहा करने के वर्ष में नियत 4 अवसरों में देश में पहली बार 15 नवम्बर जनजातीय गौरव दिवस को शामिल करने की राज्य सरकार की पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जेल विभाग मुक्त बंदियों के लिये सामाजिक स्वीकार्यता और आश्रित परिवारों के पुनर्वास प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये समाज कल्याण विभाग के साथ दायित्वों की नीतिगत व्यवस्था तैयार करें। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति आकस्मिकता राहत योजना के प्रावधानों पर तत्काल कार्यवाही की व्यवस्था की निरंतर मॉनिटरिंग कर फास्ट-ट्रेक प्रक्रिया में प्रकरणों के निराकरण के प्रयास करने के लिये कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना के घरों में प्रकाश आदि की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है। राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, 14 अप्रैल डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और 2 अक्टूबर के अवसर पर कुल 523 बंदियों को रिहा किया है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर 29 बंदियों जिसमें 8 अनुसूचित जनजाति वर्ग के बंदियों को रिहा किया जाना प्रस्तावित है। अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध चिन्हित प्रकरणों को वापस लेने के लिये शासन द्वारा तय किया गया है कि जिन प्रकरणों में अतिक्रमण हटा लिया गया है, वह सभी मामले वापस ले लिये जायेंगे। अनुसूचित जनजातीय वर्ग के व्यक्तियों के विरूद्ध 3 मार्च 2009 की स्थिति में वन अपराध के पंजीबद्ध कुल 87 हजार 549 प्रकरण शासन द्वारा वापस लिये गये हैं। विगत 10 वर्षों में दर्ज 35 हजार 807 प्रकरणों में से 28 हजार 645 निराकृत हो गये हैं। न्यायालय में 4 हजार 396 प्रकरण विचाराधीन हैं। बैठक में बताया गया कि पेसा एक्ट के तहत गठित 492 ग्राम सभाओं के साथ ही 735 ग्राम सभा के लिये नये आवेदन प्राप्त हुए हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, महानिदेशक जेल श्री वरूण कपूर, विशेष महानिदेशक जेल श्री जी. अखितो सेमा और वन, गृह, जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।