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दशहरे के दिन मध्यप्रदेश में बारिश की संभावना, तवा डैम के 5 गेट खुले, धार-बड़वानी प्रभावित

भोपाल  मध्यप्रदेश में जहां एक ओर मानसून विदाई की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई जिलों में बारिश का सिलसिला अभी भी जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ट्रफ और निम्न दबाव क्षेत्र के सक्रिय होने से अगले 24 घंटों में प्रदेशभर में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।1 अक्टूबर से एक नया सिस्टम सक्रिय होने जा रहा है, जिससे 2 अक्टूबर को दशहरे के दिन भी बारिश की संभावना जताई जा रही है। इसको लेकर रावण दहन समितियां तैयारियों में जुट गई हैं ताकि बारिश के चलते पुतलों को नुकसान न पहुंचे।मानसून ट्रफ और लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) के एक्टिव होने से मध्यप्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो रही है। सोमवार को भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। कई जिलों में हुई बारिश रविवार को नरसिंहपुर में आधा इंच से ज्यादा पानी बरस चुका है। बैतूल, पचमढ़ी, रतलाम, उज्जैन, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, मंडला, सागर और सिवनी जैसे जिलों में भी बारिश दर्ज की गई है। नर्मदापुरम जिले के तवा डैम में भी जलस्तर बढ़ने के चलते इसके पांच गेट खोल दिए गए हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए पूरे प्रदेश में हल्की बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। लोकल सिस्टम की वजह से कहीं-कहीं तेज बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, 1 अक्टूबर से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। इससे 2 अक्टूबर को दशहरे के दिन भी बारिश हो सकती है। ऐसे में दशहरा उत्सव समिति रावण के पुतलों को बचाने के लिए उपाय कर रही हैं। इससे पहले रविवार को धार के मनावर और बड़वानी के सेंधवा में पानी गिरा। सेंधवा में तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया, जिससे मक्के की फसल को नुकसान पहुंचा है। यहां एक कच्चा मकान भी गिर गया। नर्मदापुरम जिले के तवा डैम के पांच गेट खोले गए। नरसिंहपुर में आधा इंच से ज्यादा बारिश हो गई। बैतूल, इंदौर, पचमढ़ी, रतलाम, उज्जैन, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, मंडला, सागर, सिवनी में भी पानी गिरा। 12 जिलों से विदा हो चुका है मानसून प्रदेश के 12 जिलों  ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और शाजापुर से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्सों में भी मानसून लौटने लगा है। हालांकि नया सिस्टम बनने से इसकी पूरी विदाई की प्रक्रिया थोड़ी देर से पूरी हो सकती है। गुना सबसे अधिक भीगा, ये जिले रहे सूखे 16 जून को प्रदेश में दस्तक देने वाले मानसून ने अब तक औसतन 45 इंच बारिश दी है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.2 इंच है। यानी अब तक प्रदेश में 122% बारिश हो चुकी है।अब तक सबसे ज्यादा बारिश गुना जिले में दर्ज की गई है यहां कुल 65.5 इंच पानी गिरा है। वहीं मंडला और रायसेन में 62 इंच से ज्यादा पानी बरस चुका है। इसके विपरीत, शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सबसे कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं।  इंदौर संभाग की तस्वीर भी सुधरी इस मानसूनी सीजन में शुरुआत से ही इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं रही। एक समय तो इंदौर में प्रदेश की सबसे कम बारिश हुई थी। ऐसे में अटकलें थीं कि क्या इस बार इंदौर में सामान्य बारिश भी होगी? लेकिन सितंबर महीने में तेज बारिश की वजह से इंदौर में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया। संभाग के सभी जिलों में भी बारिश की बेहतर तस्वीर हो गई। दूसरी ओर, उज्जैन जिले में अब भी कोटा पूरा नहीं हुआ है। सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर पहले नंबर पर है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। सबसे ज्यादा बारिश वाले 49 में से भोपाल संभाग के 5, इंदौर के 8, जबलपुर के 8, ग्वालियर के 5, सागर के 6, उज्जैन के 4, चंबल के सभी 3, शहडोल के 3, रीवा के 5 और नर्मदापुरम संभाग के 3 जिले शामिल हैं। एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 4 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है, जो साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है। इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिन तक बारिश हो सकती है। ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी। सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले तीन साल से इससे अधिक बारिश हो रही है। ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी। जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का … Read more

सिवनी सड़क चौड़ीकरण परियोजना की टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू, काम में होगा तीन-चार माह का इंतजार

सिवनी  सिवनी शहर के भीतर सड़क चौड़ीकरण का कार्य तीन से चार माह बाद ही शुरु हो पाएगा। हालांकि शासन की तरफ से रिवाइज बजट स्वीकृत कर दिया गया है। टेंडर की प्रक्रिया जल्द शुरु होगी। जिसके बाद शहर के भीतर मुख्य मार्ग की सुरत बदलेगी। वहीं यातायात सिग्नल भी सुधरेगी। सड़कों का होगा चौड़ीकरण, लगेंगे 3 महीने बता दें कि, नगर पालिका चौक से लेकर छिंदवाड़ा चौक तक सड़क की चौड़ाई कम होने एवं लगातार अतिक्रमण बढ़ने से यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। वहीं चौक चौराहे पर लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल भी वर्षों से बंद पड़े हुए हैं। ऐसे में मनमर्जी से लोग वाहन को चौराहे से लेकर निकल जाते हैं। इससे कई बार जाम की स्थिति निर्मित होती है। वहीं बेतरतीब वाहन चलाने से लोग घायल भी हो रहे हैं और कई बार तो लड़ाई-झगड़े तक की नौबत आ रही है। शाम के समय हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। लाखों रुपए की लागत से चौराहों पर लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल वर्षों से धूल खा रहे हैं। नगर पालिका चौराहे जैसे व्यस्ततम इलाके का ट्रैफिक सिग्नल भी बंद है। इसके अलावा छिंदवाड़ा चौक, कचहरी चौक सहित अन्य जगह ट्रैफिक सिग्नल की यही स्थिति है। वर्ष 2020 के अक्टूबर माह में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सात दिनों के भीतर नगर के ट्रैफिक सिग्नलों को शुरु करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक कार्य पूरा नहीं हुआ। पांच चौराहे पर लगा था यातायात सिग्नल नगर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए वर्ष 2013-14 में नगर पालिका ने लाखों रुपये की लागत से कचहरी चौक, नगर पालिका चौक, छिंदवाड़ा चौक, सर्किट हाउस चौक, बाहुबली चौक में ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। हालांकि कुछ ही दिनों में सिग्नल बंद हो गए। इसके बाद जिम्मेदारों ने सुधारने को लेकर जहमत नहीं उठाई। बड़ी बात यह है कि क जगह लगे ट्रैफिक सिग्नल के पो भी गायब हो गए हैं। पुलिस कंट्रो रूम, सर्किट हाउस एवं बाहुबल चौक के तरफ लगे सिग्नल के पो गायब हैं। लगेगा तीन माह से अधिक समय एमपीआरडीसी द्वारा शहर के भीतरी हिस्से में नगझर से सीलादेही तक फोरलेन का काम कराया जा रहा है। विभाग ने सड़क चौड़ीकरण को लेकर दोबारा प्रस्ताव शासन को भेजा था। जिसे मंजूर कर लिया गया है। टेंडर की प्रक्रिया भी शुरु हो गई है। सड़क चौड़ीकरण के बाद ही सिग्नल का भी सुधार कार्य होगा या फिर नए सिग्नल लगेंगे। दरअसल वर्ष 2022 में नगर पालिका परिषद ने बंद पड़े ट्रैफिक सिग्नल को सुधारने के लिए प्रस्ताव रखा गया था। 22 लाख 56 हजार रुपए से सिग्नलों को सुधारने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। इस बीच एमपीआरडीसी ने नगर पालिका को पत्र लिखकर सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा होने के बाद ही सिग्नल का सुधार कार्य करने का आग्रह किया था। तब से मामला ठंडे बस्ते में है।

दशहरा की धूम नटेरन में, रावण पूजा और राम-रावण सेना के बीच पत्थर युद्ध का महा नाटक

विदिशा विजयादशमी पर्व (Dussehra) में अब केवल तीन दिन शेष है। शहर से लेकर गांव तक बड़े आयोजनों को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। देश भर में जहां दशहरा पर्व पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया जाता है। वहीं जिले के नटेरन तहसील पूजा की जाती है। दूसरी ओर वर्षों में स्थित रावण गांव में रावण बाबा की पुरानी परंपरा के अनुसार आनंदपुर क्षेत्र के कालादेव गांव में राम-रावण सेना के बीच पत्थर युद्ध होगा। विदिशा शहर में जैन कॉलेज मैदान में बड़े मेले का आयोजन होगा। मेले में 35 फीट के रावण के पुतला का दहन किया जाएगा। राम-रावण दृश्य का मंचन भी किया जाएगा। यहां रावण की होती है पूजा नटेरन के रावण गांव में लंकापति रावण की पूजा की परंपरा है। मान्यता है कि गांव के पास स्थित बूधों की पहाड़ी में प्राचीन काल में एक दानव रहा करता था। स्थानीय निवासी उससे परेशान थे। रावण ने इस दानव का वध कर ग्रामीणों की रक्षा की थी। इसके बाद से गांव के लोग रावण को रावण बाबा के नाम से बुलाते है। दशहरा पर जहां पूरे देश में रावण का पुतला दहन किया जाता है। वहीं इस गांव में रावण बाबा की पूजा की जाती है। गांव में करीब 40 वर्ष पहले मंदिर का निर्माण कराया गया, जहां आराम की मुद्रा में लेटे हुए रावण की 8 फीट की लंबी प्रतिमा है। दशहरा पर्व पर मंदिर में भंडारा का आयोजन भी होता है। मंदिर के पुजारी सुमित तिवारी ने बताया कि आयोजन को लेकर मंदिर में तैयारी शुरू कर दी गई है। ग्रामीण संतोष धाकड़ बताते है कि रावण बाबा के प्रति पूरा गांव श्रद्धाभाव रखता है। सभी शुभ कार्यों में उन्हें पहला निमंत्रण दिया जाता है। बच्चों के जन्म पर सबसे पहले रावण बाबा के ही दर्शन कराए जाते हैं। गांव के युवा भी हाथों पर जय लंकेश का टैटू बनवाते हैं। गांव के घरो व वाहनों में भी जय लंकेश लिखा देखने को मिलता है।  राम व रावण सेना में पत्थर मार युद्ध आनंदपुर क्षेत्र के पास ग्राम कालादेव में भी रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है। वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार इस बार भी कालादेव गांव में राम व रावण सेना के बीच पत्थर मार युद्ध (Patthar Maar Yudh) का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीणों की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। मान्यता के अनुरूप पत्थर मार युद्ध में गोफन से पत्थर राम सेना पर फेंके जाते हैं। गांव के सरपंच प्रतिनिधि रामेश्वर शर्मा ने बताया कि नवदुर्गा के प्रारंभ से ही कालादेव में रामलीला का मंचन स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जाता है। दशहरे पर रामलीला के अंतिम दिन राम-रावण सेना के बीच युद्ध होता है। दशहरे के दिन हजारों दर्शकों के सामने यह पत्थर युद्ध होता है। इसमें दशहरे मैदान के बीच में राम दल का ध्वज गाड़ा जाता है। उससे करीब 200 मीटर दूरी पर रावण सेना में भील व बंजारा समूह के लोग शामिल होकर गोफान से पत्थर मारने के लिए तैयार खड़े रहते हैं। राम सेना के रूप में कालादेव के स्थानीय निवासी होते हैं, जो ध्वज से लगभग 200 मीटर दूर खड़े रहते हैं। वे राम की जय-जयकार करते हुए जब ध्वज की परिक्रमा करते हैं। तभी रावण सेना के लोग गोफान से पत्थर मारते हैं। राम सेना ध्वज का तीन चक्कर लगाती है। दूसरी ओर रावण सेना उन पर पत्थर बरसाती रहती है। ध्वज के तीन चक्कर पूरे होने के बाद रावण वध होता है। इसके बाद भगवान राम का राजतिलक किया जाता है।

मंत्री टेटवाल का बयान: मंगलसूत्र पहनकर, तिलक लगाकर आएं लव जिहाद करने वाले’ – गरबा को लेकर उठी बहस

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने अजीबो गरीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लव जिहाद वाले भी दुर्गा पंडाल में आ सकते हैं। शर्त है कि वह गंगा मैया और गाय को गो माता मानें, साथ ही तिलक लगाकर,पत्नी के साथ लाल साड़ी पहनकर,कलावा बांधकर,मंगलसूत्र और मांग भर कर और एक सनातनी की तरह बनकर आएं। इसके साथ उन्होंने चेतवानी दी कि दुर्गा पंडाल में आएं,लेकिन किसी बहू-बेटी,बहन को गलत निगाह से देखा तो उसे छोड़ेंगे नहीं। उसकी जगह जेल में होगी। उनका यह वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। शाजापुर जिले के सारंगपुर में  त्रिपोलिया बाजार स्थित अम्बे माता मंदिर से भैंसवा माता बिजासन धाम के लिए चुनरी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में मध्य प्रदेश शासन के तकनीकी कौशल विकास मंत्री और उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल शामिल हुए। इस दौरान भक्तों ने लगभग 21 किलोमीटर पैदल चलकर माता के दरबार में 51 मीटर लंबी चुनरी अर्पित की। इस दौरान पूरे मार्ग पर मंत्री पैदल चलकर मां भैंसवा बिजासन के दरबार पहुंचे। यात्रा में नगर और आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल थे। चुनरी यात्रा का मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। लव जिहाद को लेकर बोले गौतम टेटवाल एमपी के मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि लव जिहाद के बढ़ते मामलों को देखते हुए हमारे समाज के बहनों-भाइयों को समझाना होगा,उनसे भी मेरा निवेदन है। लव जिहाद वाले भी आएं, वह भी दर्शन करें,वह भी गरबा करें, उनकी पत्नी को लेकर आएं, लाल साड़ी पहनें, मंगलसूत्र पहन कर आएं, मांग भर कर आएं, कलावा पहन कर आएं, माथे पर तिलक लगाएं और बिजासन मैया का जयकारा करें। वो हमारे साथ आ सकते हैं। गो माता और गंगा को मैया माने गौतम टेटवाल ने आगे हा कि एक बार गंगा मैया को, गो माता को माता मानें, हमारे दरवाजे सबके लिए खुले हैं। मां का दरबार सबके लिए खुला है। आइए। जनेऊ पहन के शिखा रख के ,भगवा पहन के, गंगा जी में स्नान करने के बाद आपका स्वागत है। सनातनी बनकर आए। हम तो आपको सनातनी बनाना चाहते हैं। हिंदू उत्सव समिति और आयोजकों के अनुसार, यह यात्रा प्रतिवर्ष नवरात्रि के अवसर पर निकाली जाती है। इस वर्ष 51 मीटर लंबी चुनरी अर्पित कर नगर वासियों ने सुख-समृद्धि की कामना की। भैंसवा माता बिजासन धाम पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने विधिविधान से पूजा-अर्चना की और चुनरी अर्पित की। मंदिर प्रांगण में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जिसमें श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली और समाज की उन्नति की कामना की।

इंदौर की यातायात पुलिस ट्रैफिक ही नहीं संभालती, लोगों की जान भी बचाती है…

इंदौर इंदौर में बेतरतीब यातायात और जवानों द्वारा चालानी कार्रवाई और अवैध वसूली की खबरें तो आए दिन सामने आती ही हैं, लेकिन कुछ यातायात जवान ऐसे भी हैं जो अपना मूल कर्त्तव्य तो निभाते ही हैं, साथ ही समय-समय पर मानवीयता का परिचय देने से भी नहीं चूकते… ऐसा ही एक मामला नवलखा चौराहे का सामने आया, जब यातायात आरक्षक 1622 सुरेन्द्रसिंह गुर्जर बीच सड़क पर खड़ी एक लोडिंग रिक्शा को हटवाने के लिए चालक के पास पहुंचे… जब उसे वाहन रास्ते में से हटाने को कहा तो विजय नगर चालक ने गुर्जर से कहा – ''सर मुझे बचा लीजिए, मैंने जहर खा लिया है…'' इस पर आरक्षक ने तुरंत सब इंस्पेक्टर संत बहादुर सहित महिला आरक्षक ज्योति, भूली रडार, आरक्षक शैलेन्द्र त्यागी को ना सिर्फ इसकी जानकारी दी, बल्कि एक वैन को रूकवाते हुए उसे तुरंत एमवायएच तक भी ले गए और उसका तुरंत इलाज शुरू करवाया… बताया जाता है कि लोडिंग चालक का उसकी पत्नी से विवाद चल रहा है, जिस वजह से उसने यह कदम उठाया… लेकिन यातायात आरक्षक सुरेन्द्रसिंह गुर्जर और उनकी टीम की तत्परता से ऑटो चालक बच गया और उसका इलाज एमवाय अस्पताल में जारी है तथा उसका मोबाइल संयोगितागंज थाने में जमा है और पुलिस मामले की जांच में भी जुटी है..!

IIT इंदौर के विस्तार पर खर्च होंगे 624 करोड़, हाईटेक कैंपस में छात्र पाएंगे ग्लोबल लेवल की सुविधाएं

 इंदौर देश में प्रौद्योगिकी शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आईआईटी इंदौर समेत देश के 8 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में विस्तार परियोजनाओं का वर्चुअली शिलान्यास किया है। इस पहल के तहत आईआईटी इंदौर को 624.57 करोड़ रुपये की क्षमता विस्तार एवं आधारभूत संरचना विकास परियोजना की सौगात मिली है। इसका उद्देश्य संस्थान को विश्वस्तरीय बनाना है।  प्रौद्योगिकी शिक्षा में नए युग का सूत्रपात : मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आईआईटी इंदौर को मिली इस बड़ी सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है "केंद्र सरकार का यह कदम अब प्रदेश में प्रौद्योगिकीय शिक्षा में एक नए युग का सूत्रपात करेगा। इससे हमारे युवाओं को अध्ययन, शोध एवं नवाचार करने के लिए व्यापक और बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।" विश्वस्तरीय बनेंगी सुविधाएं आईआईटी इंदौर में इस विस्तार परियोजना को उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन एवं फंडिंग एजेंसी (HEFA) द्वारा तीसरे चरण के अंतर्गत मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं: 1. अत्याधुनिक शैक्षणिक भवन: 374.38 करोड़ रुपये 2. आवासीय परिसर एवं अन्य सुविधाएं: 123.15 करोड़ रुपये 3. उन्नत उपकरण: 27.04 करोड़ रुपये इनके अलावा, एक औद्योगिकीय अनुसंधान पार्क, डिजाइन विभाग, विद्यार्थी गतिविधि केंद्र, व्याख्यान कक्ष परिसर और एक आगंतुक छात्रावास का भी निर्माण किया जाएगा। लैब विस्तार के लिए 100 करोड़ अतिरिक्त मुख्य परियोजना के अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने आईआईटी इंदौर की लैब को और अधिक बहुआयामी बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी मंजूर की है। इस राशि का उपयोग भौतिकी, रसायन विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में जटिल प्रयोगों और डेटा विश्लेषण के लिए उच्च-स्तरीय एवं अत्याधुनिक उपकरण खरीदने में किया जाएगा। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, "आधारभूत संरचना में इस विकास से न केवल हमारा शैक्षणिक और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा, बल्कि छात्रों और शिक्षकों को नवाचार, सहयोग और समग्र विकास के लिए एक विश्वस्तरीय परिवेश भी मिलेगा।" 

AIIMS भोपाल में नई तकनीक की शुरुआत, एक ही मशीन से 230+ बीमारियों की होगी जांच, रिपोर्ट भी फास्ट

भोपाल  एम्स भोपाल में अब मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल के जैव रसायन विभाग में कोबास प्रो एडवांस्ड इंटीग्रेटेड क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री एनालाइज़र के जरिए जांच प्रक्रिया को और ज्यादा आधुनिक व तेज बना दिया गया है। यह मशीन प्रति घंटे 2,000 से अधिक टेस्ट करने की क्षमता रखती है, जिससे बड़ी संख्या में मरीजों को समय पर और सटीक रिपोर्ट मिल सकेगी। लगभग 3 करोड़ की लागत वाली यह मशीन मध्यप्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार स्थापित की गई है। यह एम्स भोपाल को न सिर्फ प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी तकनीकी रूप से अग्रणी बनाती है। ये सभी जांचें एक ही मशीन से संभव – ब्लड शुगर (डायबिटीज) – लीवर फंक्शन टेस्ट (LFT) -किडनी फंक्शन टेस्ट (RFT) -हार्ट प्रॉफाइल -थायरॉयड और अन्य हार्मोन -विटामिन्स और कैंसर मार्कर्स -यह मशीन 230 से ज्यादा प्रकार की जांचें करने में सक्षम है। तकनीकी दक्षता और भरोसेमंद रिपोर्टिंग कोबास प्रो मशीन एक पूरी तरह से एकीकृत, ऑटोमेटेड जैव रसायन विश्लेषक है जो न सिर्फ तेज़ परिणाम देती है, बल्कि उसकी रिपोर्टिंग में सटीकता भी बनी रहती है। मरीजों को कम समय में भरोसेमंद परिणाम मिलना एम्स भोपाल की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा। स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार जांच प्रक्रिया तेज़ और सहज होगी। रिपोर्ट वितरण में काफी तेजी आएगी। मरीजों को कम समय में इलाज की शुरुआत मिल सकेगी। जांच की सटीकता और गति दोनों में बेहद प्रभावशाली जैव रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि कोबास प्रो ई-800 एक पूरी तरह से एकीकृत, अत्याधुनिक क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री एनालाइज़र है। यह मशीन जांच की सटीकता और गति दोनों में बेहद प्रभावशाली है। अब मरीजों को रिपोर्ट के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और डॉक्टरों को भी समय पर सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे इलाज में देरी नहीं होगी।  मरीजों के लिए एक बड़ी राहत डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि एम्स भोपाल में शुरू की गई यह अत्याधुनिक जांच सुविधा मरीजों के लिए एक बड़ी राहत है। इससे जहां जांच की गति बढ़ेगी, वहीं इलाज में भी देरी नहीं होगी। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाएगी, बल्कि सरकारी अस्पतालों की क्षमता और भरोसे को भी मजबूत करेगी।  

वेबसाइट अपडेट न करने पर यूजीसी की सख्त कार्रवाई, भोपाल के 10 निजी विश्वविद्यालय डिफॉल्टर बने

 भोपाल  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने प्रदेश के 10 निजी विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर की श्रेणी में शामिल किया है। इसमें तीन निजी विवि भोपाल के हैं।यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि निजी विश्वविद्यालयों को तय फार्मेट में प्रमाणित दस्तावेज समय-सीमा के भीतर जमा करने थे, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कई विश्वविद्यालयों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए आयोग ने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यूजीसी का कहना है कि निजी विश्वविद्यालयों को हर साल तय फार्मेट में प्रमाणित दस्तावेज जमा करना होता है। इसमें दाखिले से संबंधित विवरण, डिग्री की मान्यता, शैक्षणिक गतिविधियां और फैकल्टी की स्थिति शामिल होती है, लेकिन इन विश्वविद्यालयों ने ऐसा नही किया। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों की आधिकारिक वेबसाइटों की जांच की। पाया गया कि कई विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट को समय पर अपडेट नहीं कर रहे हैं। वहां पाठ्यक्रम, मान्यता, फैकल्टी, फीस संरचना और प्रशासनिक विवरण उपलब्ध नहीं थे। यूजीसी ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय अब भी नियमों का पालन नहीं करते, तो उनके खिलाफ बड़ी कार्यवाही की जाएगी। इसमें विश्वविद्यालय की मान्यता निरस्त करने से लेकर प्रवेश प्रक्रिया रोकने तक के कदम उठाए जा सकते हैं। इससे निजी विश्वविद्यालयों में हड़कंप मच गया है। कई विवि अब जल्दबाजी में अपनी वेबसाइट और दस्तावेज अपडेट करने की तैयारी में जुट गए हैं। सूची में इन विश्वविद्यालयों का नाम     अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी भोपाल     जेएनसीटी प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भोपाल     शुभम यूनिवर्सिटी भोपाल     एलएन विद्यापीठ यूनिवर्सिटी इंदौर     मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी सीहोर     आर्यावर्त यूनिवर्सिटी सीहोर     डॉ. प्रीति ग्लोबल यूनिवर्सिटी शिवपुरी     ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी सागर     महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय जबलपुर     महाकौशल यूनिवर्सिटी जबलपुर  

झूठी शिकायत करने वालों के लिए अब कड़ा कदम, मोहन सरकार ने बनाई ब्लैक लिस्ट नीति

भोपाल  मध्य प्रदेश में CM हेल्पलाइन को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है. इस शिकायत निवारण मंच पर लगातार फर्जी और भ्रामक कॉल्स की शिकायतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. इसे रोकने के लिए सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं. दरअसल, कुछ समय पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक में पाया कि इसका उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, लेकिन कई लोग इसका दुरुपयोग कर झूठी शिकायतें दर्ज कर रहे हैं और ब्लैकमेलिंग की कोशिश कर रहे हैं. इससे वास्तविक जरूरतमंदों की शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं हो पाता और सरकारी संसाधनों पर अनावश्यक बोझ पड़ता है. इसके बाद सीएम हेल्पलाइन कार्यालय ने सभी जिला कलेक्टरों को आदेश जारी कर फर्जी, आदतन झूठी और ब्लैकमेलिंग करने वाले शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार करने को कहा. इस सूची में शिकायतकर्ता का नाम, मोबाइल नंबर, शिकायतों की संख्या और उनके बारे में टिप्पणी अनिवार्य होगी. इसका मतलब है कि हेल्पलाइन का दुरुपयोग करने वालों और ब्लैकमेलिंग की मंशा से कॉल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. सभी जिलों से नियमित रूप से ऐसी शिकायतों की रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि इस प्रवृत्ति पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके. अधिकारी अपनी टिप्पणी के साथ भेजेंगे जानकारी इसके लिए शासन ने एक फार्मेट भी जारी किया है, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम, मोबाइल नंबर, अब तक की गई कुल शिकायतों की संख्या और उसके बारे में अधिकारियों की टिप्पणी दर्ज की जाएगी। यह जानकारी लेवल अधिकारियों की लॉगिन आईडी के जरिए पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। गौरतलब है कि सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठकों में बार-बार यह तथ्य सामने आया है कि कुछ लोग फर्जी शिकायतें कर अफसरों-कर्मचारियों को परेशान करते हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव पहले ही ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे चुके हैं। अब पहली बार सरकार ने बाकायदा आदेश जारी कर कलेक्टरों से रिपोर्ट तलब की है।

पुलिस से बचने के लिए बादल करता था ड्रग सप्लाई, मछली गैंग में इस्तेमाल होता था खास कोड

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बहुचर्चित ड्रग्स कांड में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली का बादल मछली गैंग का सबसे बड़ा ड्रग सप्लायर है। पुलिस के बचने के लिए अलग अलग राज्यों के खास कोड के जरिए डील होती थी। यासीन के अंशुल और बादल के चैट्स मिले यासीन के अंशुल और अंशुल के बादल से चेट्स भी क्राइम ब्रांच को मिले हैं। सभी के बीच दो दर्जन से अधिक बार बैंक ट्रांजेक्शन भी हुए हैं। इन तमाम बातों का खुलासा यासीन और शाहवर मछली समेत 10 आरोपियों के खिलाफ 15 सितंबर को कोर्ट में पेश चालान से हुआ है।चालान में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार सभी आरोपियों की काल डिटेल्स क्राइम ब्रांच ने निकाली हैं। बीते 6 महीने के भीतर इन सभी आरोपियों के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई है।दरअसल विशाल उर्फ बादल अरोरा मछली गैंग को सबसे अधिक ड्रग्स खपाता था। यासीन मछली का करीबी अंशुल भूरी नाइजीरियन गुर्गे के संपर्क रहता था। यासीन के अंशुल और अंशुल के बादल के चैट्स भी क्राइम ब्रांच पुलिस को मिले है। सभी के बीच दो दर्जन से अधिक बार बैंक ट्रांजक्शन भी हुए है। यासीन और शाहवर मछली समेत 10 आरोपियों के खिलाफ 15 सितंबर को कोर्ट में पेश हुआ। यह था मामला भोपाल में ड्रग्स तस्करों के गिरोह की धरपकड़ के बाद नशे के कारोबार और यौन शोषण का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया था। यह नेटवर्क हिंदू लड़कियों के दुष्कर्म और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करने वाले मुस्लिम युवाओं के गिरोह से भी जुड़ा हुआ है। आशू और सैफउद्दीन भोपाल में यासीन मछली के सबसे बड़े पैडलर थे। इनकी गिरफ्तारी के बाद ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ था। यासीन के मेमोरेंडम में चौंकाने वाले खुलासे यासीन ने अपने मेमोरेंडम में बताया है कि वो अंशुल उर्फ भूरी ड्रग्स की खेंप लाने के लिए भेजा करता था। अंशुल ड्रग्स विशाल उर्फ सावन अरेरा निवासी दिल्ली से लाता था। पूरी डील सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ही कन्फर्म होती थीं। अंशुल का साथी अमन था जो ड्रग्स को लाने में उसकी मदद किया करता था। पुलिस को यासीन, अंशुल, विशाल और अमन के बीच बैंक ट्रांजेक्शन मिले हैं। विशाल इस मामले में फरार चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में सैफुद्दीन, शाहरुख, यासीन मछली, शाहवर मछली, अंशुल, बेंचामत (नाइजीरियन), ओविन्ना (नाइजीरियन), अमन, लारिब उर्फ बच्चा, शाकिर के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है। इनके खिलाफ 6 अक्टूबर को आरोप तय करने पर बहस होगी। इन आरोपियों की नहीं हो सकी गिरफ्तारी ड्रग्स केस में आरोपी डॉ. रहमान मलिक, मोनिस, उमेर पट्टी, विशाल और सनव्वर अभी फरार चल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद इनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा। आरोपी सनव्वर के भाई को ड्रग्स तस्करी में बनाया आरोपी पुलिस को आरोपी सनव्वर की तलाश थी। सनव्वर अपने भाई शाकिर के घर पर छिपा था। पुलिस जब उसकी तलाश में शाकिर के घर पहुंची, तो सनव्वर वहां से उनको भागता दिखा था, पीछा करने के बाद भी वह चकमा देने में कामयाब हो गया था। जिसके बाद पुलिस ने शाकिर के खिलाफ आरोपी को संरक्षण देने के लिए मामला दर्ज किया। इसके बाद आगे की जांच में शाकिर का कनेक्शन ड्रग्स के साथ पुलिस को मिला। जिसके बाद पुलिस ने उसे भी आरोपी बना दिया है। अलग-अलग राज्यों में होती थी डील पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी बादल ड्रग्स की डिलीवरी अलग-अलग राज्यों में अंशुल को दिया करता था। जिसमें प्रमुख तौर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं। सावन मूल रूप से पंजाब का ही रहने वाला है। एमडी ड्रग्स मामला:मछली समेत 10 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश राजधानी के चर्चित ड्रग्स मामले में यासीन और शाहवर मछली समेत 10 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है। इसमें खुलासा हुआ है कि यासीन और अन्य आरोपियों के बीच ड्रग्स सप्लाई को लेकर बैंकिंग ट्रांजेक्शन मिले हैं।