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रक्षाबंधन पर बहनों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बसों में मिलेगा सफर का तोहफा : CM डॉ. यादव

रक्षाबंधन पर बहनें करेंगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन की बसों में सफर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव परिवहन सेवा को चरणबद्ध रूप से किया जाएगा शुरू सामान्य जन के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है राज्य परिवहन सेवा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य परिवहन सामान्य जन के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्य सरकार न सिर्फ प्रदेश में बेहतर और आधुनिक सड़कों का तेजी से निर्माण कर रही है, बल्कि जल्द ही नागरिकों को राज्य परिवहन की विशेष सुविधा भी देने जा रही है। राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की ओर बढ़ रही है। इस बार रक्षाबंधन पर हमारी बहनें परिवहन विभाग की बसों में सफर करें, इसके लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी विधानसभा में मीडिया से चर्चा में दी। राज्य सरकार जन सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थिति के कारण शहरों के बीच दूरी अधिक है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा सभी समस्याओं को खत्म कर जनता का आवागमन सुगम बनाएगी। उम्मीद है कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों और पड़ोसी राज्यों के साथ मध्यप्रदेश सरकार का यह प्रयास सुगम परिवहन सेवा के प्रभावी रूप में देखने को मिलेगा। प्रदेश में जन सुविधाओं के विस्तार और प्रदेश के समग्र विकास के लिए हमारी सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता और संकल्प के साथ कार्य कर रही है।  

प्रदेश के विकास और जनकल्याण को बड़ी सौगात, 21,485 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी

प्रदेश के चहुँमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को मिली स्वीकृति अधिकार अभिलेखों पर स्टॉम्प ड्यूटी और पूरा पंजीयन शुल्क माफ करने का हुआ फैसला योजना का वित्तीय भार 3800 करोड़ रूपये का राज्य शासन करेगा वहन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति जिला न्यायालय भवन, पिपल्याहाना, इंदौर के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत 626 करोड़ 61 लाख रूपये की स्वीकृति पहली से 8 वीं तक के विद्यार्थियों को सिली हुई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय "मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश, 2026" के प्रारूप का अनुमोदन "मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश 2026" के प्रारूप का किया अनुमोदन "तन्वी द ग्रेट" और "शतकः संघ के 100 वर्ष" को एस.जी.एस.टी. से छूट के निर्णय का अनुसमर्थन बरगी जलाशय दुर्घटना की जांच के लिए न्यायिक जाँच आयोग के गठन का अनुसमर्थन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। साथ ही प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है, जिसका संपूर्ण 3800 करोड़ रूपये का वित्तीय भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। इसके साथ ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 17 हजार 59 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई, जिससे नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण और एमबीबीएस तथा पीजी सीटों में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त होगा। बैठक में ग्रामीण विकास और वित्तीय सुधारों को गति देने के लिए 'मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम' तथा 'मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम' में संशोधन संबंधी अध्यादेशों के प्रारूपों को मंजूरी दी गई। वहां, स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए सत्र 2026-27 में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त इंदौर जिला न्यायालय भवन के पुनरीक्षित लागत, बरगी जलाशय हादसे की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठन के निर्णय का अनुसमर्थन तथा 2 प्रमुख फिल्मों को एस.जी.एस.टी. से छूट देने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर मंत्रि-परिषद द्वारा मुहर लगाई गई। ये सभी निर्णय राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार और पारदर्शी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा, संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रूपये का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा है। स्वामिव योजना में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत नागरिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने के लिए अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त/संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का विस्तृत परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध चिकित्सालय योजना की 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 14,363.95 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के जन सामान्य को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराये जाने एवं प्रदेश में चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किये जाने के लिए 12 जिला मुख्यालयों पर चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध चिकित्सालयों का संचालन राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है। चिकित्सा महाविद्यालय में पी.जी. पाठ्यक्रम के सुदृढ़ीकरण से संबंधित योजना के लिए 657 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश में संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में वृद्धि होगी। इससे राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ जन सामान्य को सुदूर ग्रामीण अंचल से जिला स्तर तक चिकित्सा सुविधा के लिए चिकित्सीय मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की … Read more

महिला-बाल कल्याण योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए कड़े निर्देश

महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहन और लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव योजनाओं के क्रियान्वयन में जनभागीदारी और जबावदेही करें सुनिश्चित पोषण स्तर सुधार की गतिविधियों में विभिन्न विभाग मिलकर करें कार्य निजी अस्पतालों और संस्थाओं का भी लिया जाए सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक से अधिक जन भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचार हो। बच्चों और महिलाओं में पोषण स्तर को बेहतर करने के लिए संचालित गतिविधियों में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित निजी अस्पतालों और संस्थाओं को भी जोड़ा जाए। इस दिशा में अन्य राज्यों और प्रदेश के जिलों में हो रहे सफल नवाचारों को अपनाने के लिए भी कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही मैदानी स्तर पर बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करें और लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश सोमवार को मंत्रालय में हुई महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर हॉस्टल निर्माण की बनाएं कार्ययोजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन औद्योगिक इकाइयों में महिला कर्मियों की संख्या अधिक है, उन इकाइयों में कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर हॉस्टल निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में बताया गया कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण प्रारंभ हो गया है। प्रताड़ित महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद-झाबुआ, इंदौर के लसूड़िया और सांवेर एवं धार के मनावर और पीथमपुर में वन स्टॉप सेन्टर स्वीकृत किए गए हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन अंतर्गत 51 जिला स्तरीय और 01 राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर के माध्यम से 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई गई। जोखिम ग्रस्त बच्चों की मैपिंग के लिए 13 जिलों में प्रक्रिया जारी है। 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित किया गया विद्यारंभ समारोह बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए विद्यारंभ आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया और बच्चों का शाला में सुगम प्रवेश सुनिश्चित किया गया। प्रदेश के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सराहना मिली है। बाल देखरेख संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री खेल एवं सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। सक्षम आंगनवाड़ी उन्नयन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बैठक में बताया गया कि सक्षम आंगनवाड़ी उन्नयन के अंतर्गत प्रदेश में एक साथ 12 हजार 670 मिनी केंद्रों को मुख्य आंगनवाड़ी के रूप में उन्नत कर मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बना है। इस प्रकार की पहल में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में जनवरी 2024 से मई 2026 तक प्रदेश की 01 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र बहनों को 47 हजार 775 करोड़ रुपये से अधिक की मासिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15 लाख 84 हजार बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के क्रियान्वयन में देश में अव्वल म.प्र. बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में दर्ज 15 लाख 51 हजार गर्भवती महिलाओं को 798 करोड़ 68 लाख रूपये से अधिक का भुगतान किया गया। इस योजना के क्रियान्वयन में पिछले ढाई साल से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को बीमा योजना से लाभान्वित किया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पोषण स्तर में सुधार के लिए किये जा रहे नवाचारों की जानकारी भी दी गई। बैठक में सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती जी.वी. रश्मि सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

योग में बना नया इतिहास, 35 हजार विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक साथ कर रचा विश्व रिकॉर्ड

35 हजार से अधिक छात्रों, प्राध्यापकों ने सामूहिक योग कर बनाया विश्व रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर मालवांचल यूनिवर्सिटी में आयोजित हुआ योग महोत्सव इंदौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के अंतर्गत देशभर में आयोजित किए जा रहे योग महोत्सव एवं काउंटडाउन कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरूआत हो गई है।  नेमावर रोड़ स्थित मालवांचल यूनिवर्सिटी इंदौर में सामूहिक योग महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के योगगुरू एवं एस. व्यासा यूनिवर्सिटी के कुलगुरू पद्मडॉ. एच. आर. नागेन्द्र, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार, नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, संस्थान के डायरेक्टर सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. मयंक भदोरिया, डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा सहित अमलतास तथा इंडेक्स समूह संस्थानों के छात्र, नागरिक और सामाजिक संगठन आदि शामिल हुए। कार्यक्रम में मालवांचल एवं अमलतास यूनिवर्सिटी के 35 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने सामूहिक योग कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। विद्यार्थियों के साथ योगगुरू पद्मडॉ. एच. आर. नागेन्द्र, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार, नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, संस्थान के डायरेक्टर सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. मयंक भदोरिया ने भी सामूहिक योग किया। इस मौके पर अपने संबोधन में योगगुरू पद्मडॉ. एस. आर. नागेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योग के प्रति रूचि और आस्था के चलते योग आज पूरी दुनिया में फैल गया है। भारत में 30 करोड़ लोग आज से जुड़े हैं और यह संख्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। मध्यप्रदेश देश का हृदय स्थल है और इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है। हमें पूरे मध्यप्रदेश के नागरिकों को योग से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में योग पाठ्यक्रम को शामिल किया जाए। इस बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एक बड़ा योग का कार्यक्रम कलकता में किया जाएगा। योग केवल आसन नहीं है बल्कि एक जीवन पद्धति है। योग करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है और उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्ष 2015 से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन विश्व स्तर पर निरंतर विस्तार प्राप्त कर रहा है। आज यह दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है और लाखों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व दिए गए संदेश में कहा गया कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा का वह अमूल्य उपहार है जिसने सम्पूर्ण विश्व को समरसता और स्व से समष्टि तक की यात्रा का मार्ग दिखाया है। आज योग दुनिया के करोड़ों लोगों के सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है। शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ मन को स्थिरता, बुद्धि को स्पष्टता और जीवन को उद्देश्य प्रदान करने वाली योग एक जीवन पद्धति है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम "योग फॉर हेल्दी एजिंग" है। योग हमें हर आयु में शारीरिक सक्रियता, मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर उनके बीमारियों से बचाव और लड़ने में मदद करता है। प्राचार्य श्रीमती रेशमा खुराना ने बताया कि आज का यह योग महोत्सव संस्थान के 11 जोन में एक साथ किया गया, जिसमें मालवांचल, अमलतास एवं इंडेक्स संस्थान के 35 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने सामूहिक योग किया। कार्यक्रम में योगगुरु पद्मडॉ. एच. आर. नागेन्द्र की उपस्थिति में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मालवांचल यूनिवर्सिटी के प्रमुख भदोरिया को योग का विश्व रिकॉर्ड बनने पर प्रमाण-पत्र भेंट किया गया। इस मौके पर संस्थान के प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

तकनीक आधारित शिक्षा से छात्रों के लिए खुलेंगे नए अवसरों के द्वार : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

तकनीक आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को मिलेंगे नए अवसर : उच्च शिक्षा मंत्री परमार उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए इंदौर में आयोजित हुआ ‘डिजी100x मध्यप्रदेश समिट’ उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा के डिजिटल भविष्य पर हुआ मंथन मंत्री परमार ने किया समिट का शुभारंभ भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा  इंदौर के मेरियट होटल में “डिजी100x मध्यप्रदेश समिट” का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महत्वपूर्ण समिट का शुभारंभ प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा, आर.आर. कन्हेरे सहित प्रदेश के विभिन्न शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समिट का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचारों के माध्यम से शिक्षण एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डिजिटल परिवर्तन की संभावनाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, ई-गवर्नेंस, डिजिटल मूल्यांकन तथा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का सशक्त उपकरण भी है। मंत्री परमार ने बताया कि विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जा रही है तथा उन्हें बहुभाषी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तेलुगू, तमिल, मराठी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार तथा डिजिटल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यों में गति, पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए तकनीक को अपनाना आवश्यक है। जब तकनीकी विशेषज्ञ, विश्वविद्यालय और शासन मिलकर योजनाओं का स्वरूप तैयार करते हैं, तब शिक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था को नई दिशा मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग उच्च शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराएगा। मंत्री परमार ने परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मूल्यांकन (डिजिटल इवैल्यूएशन) प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी नवाचारों का उपयोग शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा शासन के प्रतिनिधियों से इस विषय पर व्यापक विमर्श कर व्यवहारिक और प्रभावी समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से परीक्षा प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार होगा, परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा विद्यार्थियों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस कार्यशाला को समयानुकूल और महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली को लागू करने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली में 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा के अनुपात का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते शैक्षणिक परिवेश को देखते हुए इसे 40:60 करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की सतत शैक्षणिक सहभागिता और कक्षा आधारित सीखने की प्रक्रिया को अधिक महत्व मिलेगा। उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है। विद्यार्थियों को एआई आधारित तकनीकों से परिचित कराने के लिए महाविद्यालयों में एआई से संबंधित सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को एआई टूल्स के रचनात्मक, नैतिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। समिट में विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, स्मार्ट प्रशासन, ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली, डेटा आधारित प्रबंधन तथा तकनीक आधारित कौशल विकास जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि डिजिटल संसाधनों और नवाचारों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक सुलभ, प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विश्वविद्यालय प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में साझा कार्ययोजना तैयार करना था। समिट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा को अधिक नवाचारी, विद्यार्थी-केंद्रित, समावेशी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।  

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी पहचान, CM डॉ. यादव ने दिया प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन को श्रेय

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश के अग्रणी होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन को है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भविष्य की जरूरतों के अनुसार दी गई अंतर्राज्यीय परियोजनाओं को मंजूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदानीरा समागम में जल संवर्धन की प्रदर्शनी का किया अवलोकन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन के कारण मध्यप्रदेश जल संरक्षण और जल संचयन के कार्यों में देश में अग्रणी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण में किये जा रहे अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने राज्यों को अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के बलबूते भविष्य की आवश्कताओं का अनुमान लगाते हुए आवश्यक जल के प्रबंध के लिए भी सजग बनाया है। मध्यप्रदेश, केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए दी गई मंजूरी से वृहद स्तर पर लाभान्वित होगा। मध्यप्रदेश इस वर्ष गुड़ी पड़वा से ही प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख कुओं बावड़ियों, पोखरों, जलाशयों और अन्य जलसंरचनाओं को उपयोगी बनाने के महत्वपूर्ण कार्य में लगा है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की शाम भारत भवन के बहिरंग में 27 मई से 2 जून तक आयोजित सदानीरा जल गंगा संवर्धन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया। मेपकास्ट (मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद) के सहयोग से लघु चित्रों में जल, भूगर्भीय जल स्रोत, मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान और जलचर-जलीय जीवन के प्राण तत्व नामक प्रदर्शनियों के साथ ही 'वीर भारत न्यास' और 'मेपकास्ट' द्वारा प्रकाशित अंतर्जलि यात्रा, जिलों के भूजल एटलस और अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में फिजी, साइप्रस, मैक्सिको सहित अन्य देशों के उच्चायुक्त और राजदूत भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनेक नदियों का उद्गम स्थल है। प्रदेश की नदियां प्रवाहित होते हुए गंगा-यमुना जैसी नदियों में जाकर मिलती हैं। यह प्रदेश का सौभाग्य है कि हमारे विंध्याचल और सतपुड़ा के पर्वत मध्यप्रदेश को परमात्मा की अनुपम कृति हैं। वनांचलों से जल धाराएं आती हैं जो नदियों को समृद्ध बनाती हैं। नर्मदा मैया के साथ ही ताप्ती, बेतवा, चंबल जैसी नदियां अपार जल राशि से समृद्ध हैं। चंबल नदी का जल प्रदेश की गणना देश की स्वच्छ नदियों में करवाता है, इसके कारण घड़ियाल भी इसी नदी में सर्वाधिक पाए जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदि काल से जल सहेजने के कार्य चल रहे हैं। राजा भोज के काल की तकनीक की चर्चा करें तो भोपाल की बड़ी झील श्रेष्ठ जल संरक्षण प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें आबादी को हानि पहुंचाए बिना जल सहेजने, उसके उपयोग और अतिरिक्त जल की निकासी का श्रेष्ठ प्रबंध किया गया। प्रदेश में जनता की भागीदारी से जल गंगा संवर्धन अभियान का संचालन चल रहा है। प्रदेश में कृषि उत्पादन में वृद्धि का आधार भी यही जल और उसका उचित प्रबंधन है। भूगर्भ के जल भण्डारण का कृषि क्षेत्र में संतुलन के साथ उपयोग किस तरह किया जाए यह विज्ञान के सहयोग से संभव है। मेपकास्ट द्वारा इस क्षेत्र में किये जा रहे अनुसंधान महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास और सहयोगी संस्थाओं को इस सार्थक आयोजन के लिए बधाई दी। इस अवसर पर केंद्रीय भू-जल बोर्ड के प्रतिनिधि अशोक विश्वास, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी भी उपस्थित थे। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह प्रदान किए। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल सहित बड़ी संख्या में जल संरक्षण क्षेत्र के विद्वान, विद्यार्थी, सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि और अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जुड़े कलाधर्मी उपस्थित थे।  

पीएम ई-बस सेवा के तहत इंदौर शहर में प्रारंभ होगा 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में इंदौर संभाग से प्रारंभ होगा बस आपरेशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीएम ई-बस सेवा के तहत इंदौर शहर में प्रारंभ होगा 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर से प्रदेश के अन्य जिलों के लिए, इंदौर शहर एवं उप नगरीय क्षेत्रों तक सिटी बसें म.प्र. से लगे हुए राज्यों के लिए (महाराष्ट्र, राजस्थान गुजरात एवं उत्तरप्रदेश) अंतर्राज्यीय चलेंगी बसें मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में म.प्र. यात्री परिवहन एण्ड इन्फ्रॉस्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मण्डल की हुई बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में  हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेश में बसों के संचालन हेतु, मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्डं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मण्डल की बैठक संपन्न हुई। बैठक में बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष बोर्ड के प्रबंध संचालक मनीष सिंह द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। संपूर्ण मध्यप्रदेश को 7 क्षेत्रों में, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर एवं रीवा विभक्त करते हुए इन शहरों में पूर्व से क्रियाशील शहरी परिवहन के लिये कंपनियों के संबंध में जानकारी दी गई। बताया गया कि पीएम ई-बस सेवा और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना में बसों का संचालन सर्वप्रथम इंदौर क्षेत्र से प्रारंभ किया जाएगा। इंदौर क्षेत्र के तहत, इंदौर संभाग के समस्त जिले तथा इंदौर स्थित अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (A.I.C.T.S.L.) अब संपूर्ण इंदौर संभाग से प्रारंभ होने वाली बसों के कार्यक्षेत्र में कार्य करेंगी। इंदौर क्षेत्र से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत निम्न तीन श्रेणी की बसों का संचालन जुलाई माह प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित किया गया:- (अ) इंदौर से मध्यप्रदेश के अन्य जिलों को जोड़ने वाली इंटरसिटी मार्गों पर बसों का संचालन। (ब) इंदौर शहर में सिटी बसों का संचालन तथा इस श्रेणी में उपनगरीय क्षेत्रों तक अधिसूचित मार्गों पर भी बसों का संचालन। (स) इंदौर संभाग के समीपवर्ती राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश जाने वाले अंतर्राज्यीय मार्गों पर अनुबंध अनुसार बसों का संचालन। इसके साथ-साथ यह भी अवगत कराया गया कि पीएम ई-बस सेवा की 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी इंदौर शहर में जुलाई माह से प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। प्रबंध संचालक द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया गया कि 7 क्षेत्रीय मुख्यालयों के 7 शहर से, प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों तक जाने वाले कुल 620 मार्गों को चिन्हित किया गया है। इनमें कुल 2432 बसें संचालित होगी। इसके तहत इन्दौर क्षेत्र से प्रदेश के अन्य जिलों में कुल 121 मार्ग चिन्हित किये गये हैं, जिनमें 608 बसें संचालित की जायेंगी। सात क्षेत्रीय मुख्यालय इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और रीवा में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सिटी बसों का संचालन भी किया जायेगा। यह बसें आमजन की सुविधा हेतु शहर से आगे महत्वपूर्ण उप नगरीय क्षेत्रों तक भी जा सकेंगी। इस श्रेणी के सिटी रूट के तहत इंदौर में शहर के अंदर एवं उप नगरीय क्षेत्रों तक कुल 28 मार्ग चिन्हित किये गये हैं। इनमें आमजन की सुविधा हेतु 784 बसें (पीएम ई-बस सेवा की 150 बसों को मिलाकर) संचालित की जायेंगी। इसी प्रकार यह भी बताया गया कि इंदौर क्षेत्र से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश राज्यों के लिये जाने वाली बसों के मार्ग अनुबंध अनुसार कुल 101 हैं। इसमें कुल 276 अंतर्राज्यीय बसों का संचालन अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (A.I.C.T.S.L), के द्वारा किया जायेगा। इसी प्रकार इंदौर से प्रारंभ होने वाली इंटरसिटी सिटी बसें एवं अंतर्राज्यीय, कुल मार्गों की संख्या क्रमश: 250 हैं। इनमें कुल 1688 बसों का संचालन किया जाना प्रस्तावित हैं। प्रबंध संचालक द्वारा यह अवगत कराया गया कि जिस प्रकार से इंदौर क्षेत्र से उक्त तीनों श्रेणी की बसों का संचालन विभिन्न मार्गों पर किया जायेगा। इसी प्रकार अन्य 6 क्षेत्रीय मुख्यालयों से भी इन तीनों श्रेणी की बसों का संचालन चिन्हित मार्गों पर उस क्षेत्र की सहायक कंपनियों द्वारा किया जायेगा। सम्पूर्ण प्रदेश के सात क्षेत्रों में कुल सभी श्रेणी के 1164 मार्गों को चिन्हित किया गया है, जिसमें कुल 5206 बसें संचालित होंगी। बसों का संचालन मोटरयान अधिनियम 1988 के सुसंगत प्रावधानों के तहत, स्कीम के प्रकाशन उपरांत होगा। इसमें वर्तमान संचालित निजी बसों के अनुज्ञा-पत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा तथा वे यथावत पूर्व व्यवस्था अनुसार संचालित होती रहेंगी। संचालक मण्डल की बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत गठित की गई राज्य स्तरीय कंपनी एवं सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के संगठनात्मक महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं पदों की स्वीकृति भी संचालक मण्डल द्वारा दी गई। इन कंपनियों में प्रभावशील रहने वाले सेवा भर्ती नियम-2026 की भी स्वीकृति संचालक मण्डल द्वारा प्रदान की गई है। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्डि इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में 7 विभाग कार्य करेंगे, जो क्रमश: IT एवं ITMS विभाग, planning एवं अनुबंध विभाग, पॉलिसी विभाग एवं अनुसंधान, मानव संसाधन एवं विधि विभाग, अधोसंरचना विभाग, प्रवर्तन एंव गुणवत्ता विभाग तथा Buiseness Development विभाग कार्य करेंगे। सभी विभागों के प्रमुख, मुख्य महाप्रबंधक रहेंगे। इन पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को लिया जा सकेगा। इस होल्डिंग कंपनी में प्रतिनियुक्ति, संविदा और संविलयन के आधार पर पदों की भर्ती की जा सकेगी। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में कुल 140 पद उच्च प्रबंध श्रेणी, वरिष्ठ प्रबंध श्रेणी एवं कनिष्ठ प्रबंध श्रेणी में स्वीकृत किए गए हैं। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के अधीन 7 क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में कुल 150 पदों की स्वीकृति दी गई है। सभी सहायक कंपनियां एक कार्यकारी संचालक के अधीन होंगी। सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के अधीन संचालित होने वाली बसों की सुरक्षा एवं सुविधा और प्रवर्तन अमले के लिये भी पद स्वीकृत किए गए हैं। इसमें पुलिस एवं विशेष सशस्त्र बल से अधिकारी-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर अथवा हाल ही में सेवानिवृत्त हुए अधिकारी-कर्मचारियों को संविदा पर लिया जा सकेगा। संचालित होने वाली बसों की गुणवत्ता नियंत्रण के लिये गुणवत्ता विभाग के अधीन भी पदों की स्वीकृति की गई है। इससे आमजनों की यात्रा सुरक्षित हो सकेगी। राज्य परिवहन उपक्रम के तहत संचालित होने वाली इन बसों की आवाजाही प्रदेश के सभी ISBT एवं बस स्टेण्ड तक हो सकेगी। इस प्रकार एक राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी एवं 7 सहायक क्षेत्रीय कंपनियों … Read more

छोटे कारोबारियों के लिए वरदान साबित हो रही पीएम स्वनिधि योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पीएम स्वनिधि योजना से देश के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को मिली नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता हो चुके हैं लाभांवित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सम्मान का आधार बनी 'पीएम स्वनिधि' योजना के सफलतम 6 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'पीएम स्वनिधि' ने देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के सपनों को नई उड़ान और सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलवाया है। उन्होंने कहा कि इस जनकल्याणकारी योजना से जुड़कर अब तक प्रदेश के 9 लाख से अधिक पथ-विक्रेता लाभान्वित हो चुके हैं।  

लू, आकाशीय बिजली और सर्पदंश से बचाव को लेकर एडवाइजरी जारी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

लू-तापघात, आकाशीय बिजली एवं सर्पदंश से बचाव के लिये परामर्श जारी भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह विभाग, द्वारा प्रदेश में लू-तापघात, आकाशीय बिजली एवं सर्पदंश जैसी मौसमी एवं प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि एवं दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से संचार माध्यमों से जनजागरूकता करते हुए परामर्श दिया जा रहा है। सचिव (गृह) एवं समन्वयक मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण श्रीमती कृष्णावेणी देशावतु ने बताया कि विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए आमजन तक सुरक्षा संबंधी संदेश पहुँचाए जा रहे हैं, जिससे शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकाधिक नागरिकों को समय रहते आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो सके। अभियान का उद्देश्य लोगों में जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आपदा की स्थिति में त्वरित एवं उचित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल में बढ़ता तापमान लू-तापघात की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। विशेष रूप से बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, श्रमिकों तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित व्यक्तियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। नागरिकों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, हल्के एवं सूती वस्त्र पहनने तथा शरीर में जल की कमी न होने देने संबंधी आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। मानसून अवधि में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएँ अनेक बार गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। इस संबंध में नागरिकों को सलाह दी गई है कि मौसम में अचानक परिवर्तन, तेज गर्जना एवं बिजली की चमक को संभावित खतरे के संकेत के रूप में गंभीरता से लें। ऐसे समय में खुले स्थानों, खेतों, जलाशयों, विद्युत खंभों तथा बड़े वृक्षों के नीचे रुकने से बचें तथा सुरक्षित भवनों में शरण लें। नागरिकों को आकाशीय बिजली संबंधी पूर्व चेतावनी प्राप्त करने के लिए “दामिनी” मोबाइल ऐप के उपयोग के लिये भी प्रेरित किया जा रहा है। किसानों एवं पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतने तथा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। वर्षा ऋतु के दौरान सर्पदंश की घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। जलभराव एवं प्राकृतिक आवास प्रभावित होने के कारण साँप मानव बस्तियों के समीप आ सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखना, झाड़ियों एवं कबाड़ को हटाना, जूते एवं कपड़ों को उपयोग से पूर्व सावधानीपूर्वक जांचना तथा खेतों, जंगलों एवं जल स्रोतों के समीप अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है। सर्पदंश की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाने तथा किसी भी प्रकार के अंधविश्वास अथवा अप्रमाणित उपचार से बचने की सलाह दी गई है। मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी चेतावनियों एवं परामर्शों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना अथवा संकट की स्थिति में तत्काल डायल-112 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त करें। सतर्कता, जागरूकता एवं समय पर अपनाई गई सावधानियाँ जनहानि एवं दुर्घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी उद्देश्य से राज्य स्तर पर निरंतर जनजागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।  

MP कैबिनेट विस्तार को दिल्ली से हरी झंडी, अगले महीने बदल सकता है कई मंत्रियों का समीकरण

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरों और केंद्रीय नेतृत्व से लगातार मुलाकातों के बाद आखिरकार कैबिनेट विस्तार और फेरबदल का रास्ता साफ हो गया है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल करना पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। वे जब चाहें अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। संगठन हमेशा सरकार के फैसलों के साथ खड़ा रहता है, क्योंकि जिसे भी जिम्मेदारी मिलेगी, उसका मुख्य काम केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाना है।: अजय सिंह यादव, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा।