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अवैध मदिरा पर आबकारी विभाग की कार्रवाई तेज, 817 केस दर्ज और 309 गिरफ्तार

जयपुर आबकारी आयुक्त नमित मेहता के निर्देशानुसार प्रदेश में अवैध मदिरा निर्माण, भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय पर रोकथाम के लिए चल रहे विशेष निरोधात्मक अभियान के तहत नाकाबंदी, गश्त, रेड की प्रभावी कार्यवाही जारी है। प्रदेश में वाॅश, हथकड़ मदिरा सहित अन्य राज्य की मदिरा पर भी कार्रवाई की जा रही है अब तक 2 लाख 67 हजार 266 लीटर वाॅश नष्ट किया गया है। 309 गिरफ्तार, 31 वाहन सीज आबकारी आयुक्त नमित मेहता के निर्देशन में विशेष निरोधात्मक अभियान के तहत 23 सितंबर 2026 तक विभिन्न कार्रवाई के तहत 817 अभियोग दर्ज किए गए है। प्रदेश में देशी मदिरा 5 लाख 72 हजार 310 रूपए लागत की 2102 लीटर, भारत निर्मित विदेशी मदिरा एक करोड़ 1 लाख 27 हजार 990 रूपए की 10126 लीटर, बीयर एक लाख 41 हजार 608 रूपए की 674 लीटर, हथकड़ शराब 7403 लीटर एवं स्प्रिट 350 लीटर जब्त किया गया है। इसी क्रम में वाॅश 2 लाख 67 हजार 266 लीटर नष्ट किया गया। प्रदेश में अभियान के तहत एक बड़ा वाहन, 7 चार पहिया वाहन, 23 दुपहिया वाहन सहित 31 वाहन जब्त किए है साथ ही अवैध मदिरा से संबंधित 309 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। नाकाबंदी, दबिश – अवैध मदिरा जब्त प्रदेश में आबकारी निरोधक दलों की कार्रवाई के तहत पाली में आबकारी टीम ने अनुज्ञाधारियों की शिकायत पर संबंधित क्षेत्रों में अवैध मदिरा कारोबारियों पर दबिश देते हुए बड़ी मात्रा में अंग्रेजी मदिरा, देशी मदिरा एवं बीयर जब्त करते हुए नियमानुसार अभियोग दर्ज किए। श्रीगंगानगर के रायसिंह नगर में दबिश देकर 4 हजार लीटर वाॅश नष्ट किया। इसी क्रम में सूरतगढ़ में दबिश देकर 20 लीटर अवैध मदिरा जब्त की गई। हनुमानगढ़ में आबकारी टीम ने दबिश कार्रवाई में 500 लीटर वाॅश सहित 2 भट्टियां नष्ट करते हुए 8 लीटर हथकड़ मदिरा, 53 देशी मदिरा के पव्वे, 10 बीयर बोतल जब्त की। मौके से 2 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। इसी प्रकार प्रदेश के समस्त जिलों में भी विशेष निरोधात्मक अभियान के तहत नाकाबंदी, दबिश व सघन गश्त की जा रही है। समस्त अतिरिक्त आबकारी आयुक्त जोन, आबकारी उपायुक्त, जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक एवं आबकारी निरोधक दल द्वारा अवैध मदिरा के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्यवाही की जा रही है।

राजस्थान स्कूल टाइमिंग: 16 अक्टूबर से समय बदलने की मांग, शिक्षा विभाग के फैसले पर नजर

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में एक अक्टूबर 2026 से शीतकालीन समय लागू होना प्रस्तावित है। इसके तहत एक पारी में संचालित विद्यालयों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक किया जाना है। वहीं, वर्तमान में एक पारी वाले स्कूलों का संचालन सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया जा रहा है। हालांकि, समय परिवर्तन की तारीख नजदीक आने से पहले ही शिक्षक संगठनों ने इसे आगे बढ़ाने की मांग उठानी शुरू कर दी है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा), राजस्थान ने शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि एक अक्टूबर के बजाय 16 अक्टूबर 2026 से विद्यालयों का समय बदला जाए। महासंघ का कहना है कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का असर बना रहता है। ऐसे में सुबह के समय स्कूल शुरू करने की बजाय दोपहर तक चलने वाला वर्तमान समय विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक हो सकता है। छोटे बच्चों और ग्रामीण विद्यार्थियों का हवाला महासंघ ने अपनी मांग के पीछे विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रमुख आधार बनाया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि एक अक्टूबर से स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होते हैं तो प्राथमिक कक्षाओं के छोटे बच्चों को दोपहर बाद घर लौटना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए भी गर्म मौसम में यह व्यवस्था परेशानी पैदा कर सकती है। पहले भी बदली जा चुकी है समय परिवर्तन की तारीख राजस्थान में एक अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू करने की व्यवस्था शिविरा पंचांग में निर्धारित रही है। सामान्य तौर पर एक पारी वाले स्कूलों का समय इस अवधि में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रहता है। हालांकि, पिछले वर्षों में अक्टूबर की शुरुआत में तापमान अधिक रहने के कारण समय परिवर्तन की तारीख आगे बढ़ाई गई थी। वर्ष 2024 में भी गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मकालीन समय 15 अक्टूबर तक बढ़ाया गया और 16 अक्टूबर से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक शीतकालीन समय लागू किया गया था। अब शिक्षा विभाग के फैसले पर नजर इस बार भी मौसम को देखते हुए शिक्षक संगठनों ने समय परिवर्तन की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में एक अक्टूबर से समय परिवर्तन का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में अब निगाहें शिक्षा विभाग के अगले आदेश पर हैं। यदि विभाग शिक्षक संगठनों की मांग पर विचार करता है तो स्कूलों का वर्तमान प्रातःकालीन समय अक्टूबर के मध्य तक जारी रह सकता है। वहीं, यदि कोई संशोधित आदेश जारी नहीं होता है तो निर्धारित व्यवस्था के अनुसार एक अक्टूबर से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक हो जाएगा। पिछले चार वर्षों में से तीन बार 16 अक्टूबर से बदला था स्कूल टाइमिंग पिछले चार वर्षों यानी 2022 से 2025 तक राजस्थान में स्कूलों के समय में अक्टूबर के दौरान बदलाव की स्थिति देखें तो एक पैटर्न साफ दिखाई देता है। सामान्य व्यवस्था के अनुसार 1 अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू होता है और एक पारी के स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होते हैं। लेकिन 2022, 2023 और 2024 में गर्मी के कारण समय परिवर्तन को आगे बढ़ाया गया था। 2025 के शिविरा पंचांग में 1 अक्टूबर से ही स्कूलों का समय बदला गया। 2022 में 1 अक्टूबर का बदलाव टला, 16 अक्टूबर से लागू शिविरा पंचांग के अनुसार 1 अक्टूबर 2022 से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे किया जाना था। लेकिन मौसम की असामान्य परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने समय परिवर्तन को 15 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया। इस दौरान स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलते रहे। 16 अक्टूबर को रविवार होने के कारण वास्तविक रूप से स्कूलों में नया समय 17 अक्टूबर 2022 से लागू हुआ। 2023 में भी 1 अक्टूबर की जगह 16 अक्टूबर से बदलाव 2023 में भी गर्मी के कारण स्कूलों का समय 1 अक्टूबर से नहीं बदला गया। शिक्षा विभाग ने शीतकालीन समय 16 अक्टूबर 2023 से लागू किया। इसके बाद एक पारी वाले स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होने लगे। दो पारी वाले स्कूलों में पहली पारी सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे और दूसरी पारी दोपहर 12:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रखी गई। 2024 में भी 1 अक्टूबर से बदलाव नहीं हुआ 2024 में भी यही स्थिति बनी। शिविरा कैलेंडर के अनुसार 1 अक्टूबर से शीतकालीन समय लागू होना था, लेकिन गर्मी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इसे 15 अक्टूबर तक टाल दिया। इस दौरान स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलते रहे। शीतकालीन समय 16 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया और एक पारी के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे कर दिया गया। लेकिन 2025 में एक अक्टूबर से ही हुआ था स्कूलों का समय परिवर्तन 2025-26 के शिविरा पंचांग में स्पष्ट रूप से 1 अक्टूबर 2025 को विद्यालय समय परिवर्तन की तारीख निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार एक पारी के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे और दो पारी वाले स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित था। उपलब्ध पंचांग में 1 अक्टूबर को ही समय परिवर्तन दर्ज है।

दीपावली पर पटाखे बेचने हैं तो ध्यान दें, 25 सितंबर तक करना होगा आवेदन

जयपुर  दीपावली पर आतिशबाजी की अस्थाई दुकान लगाने की तैयारी कर रहे कारोबारियों के लिए जरूरी खबर है। जिला प्रशासन ने पटाखों की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लाइसेंस लेने के इच्छुक लोगों को 25 सितंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। तय तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर प्रशासन की ओर से कोई विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आवेदन की समय सीमा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक के अनुसार, दीपावली के अवसर पर विस्फोटक नियम, 2008 के तहत आतिशबाजी की अस्थाई बिक्री के लिए अनुज्ञापत्र जारी किए जाएंगे। अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026 तक रहेगी। इस अवधि के दौरान निर्धारित नियमों और स्वीकृत स्थानों पर ही आतिशबाजी की बिक्री की जा सकेगी। संबंधित एसडीएम कार्यालय में करना होगा आवेदन अस्थाई पटाखा बिक्री का लाइसेंस लेने के लिए आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा कराया जाएगा। प्रशासन ने आवेदन के साथ प्रस्तावित बिक्री स्थल से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया है। आवेदक को प्रस्तावित आतिशबाजी बिक्री स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र पांच प्रतियों में देना होगा। इस मानचित्र में आसपास मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट रूप से दर्शाना जरूरी होगा। इसके अलावा शपथ पत्र, स्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज अथवा किरायानामा की प्रमाणित फोटो कॉपी और आवेदक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी आवेदन के साथ जमा करनी होंगी। इन थाना क्षेत्रों के लिए शुरू हुई प्रक्रिया अस्थाई आतिशबाजी अनुज्ञापत्र के लिए जयपुर जिले के कई थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें शाहपुरा, मनोहरपुर, अमरसर, जमवारामगढ़, आंधी, चन्दवाजी, रायसर, नरैना, मांजी रेनवाल, माधोराजपुरा, सांभर, फुलेरा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, गोविन्दगढ़, सामोद, कालाडेरा, दूदू, मौजमाबाद और फागी शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में पहुंचना जरूरी है। अंतिम तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और न ही उन पर विचार किया जाएगा। कारोबारियों के पास अब सीमित समय दीपावली से पहले पटाखों की अस्थाई दुकान लगाने के इच्छुक कारोबारियों को अब आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए सीमित समय मिला है। उन्हें जरूरी दस्तावेज तैयार कर 25 सितंबर तक संबंधित एसडीएम कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। आवेदन की अंतिम तारीख निकलने के बाद लाइसेंस के लिए नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा एक नजर में आवेदन की अंतिम तारीख: 25 सितंबर 2026 अस्थाई अनुज्ञापत्र की अवधि: 12 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026 आवेदन कहां करें: संबंधित थाना क्षेत्र के उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय जरूरी दस्तावेज: ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र की 5 प्रतियां, शपथ पत्र, स्वामित्व दस्तावेज या किरायानामा, 2 पासपोर्ट साइज फोटो लाइसेंस की प्रक्रिया: विस्फोटक नियम, 2008 के तहत महत्वपूर्ण: 25 सितंबर के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण तय, 457 प्रधान और 8245 पंचायत समिति सदस्यों की लॉटरी

जयपुर नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब पंचायतों में भी आरक्षण की लॉटरी निकलते ही गांवों में सियासी पारा चढ़ गया है। जिला प्रमुख के 41 पदों के बाद बुधवार को जिला मुख्यालयों पर 1403 जिला परिषद सदस्य, 457 प्रधान व 8245 पंचायत समिति सदस्यों के पदों के संबंध में आरक्षण लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया कि राजस्थान में 221 महिलाएं प्रधान बनेंगी। इनमें जयपुर-जोधपुर जिलों में संख्या सबसे ज्यादा रही है। 4 जिलों में केवल एसटी कैटेगरी में प्रधान होगा। जिला मुख्यालयों पर बुधवार को निकाली गई लॉटरी के आधार पर पंचायत समिति प्रधानों में एससी के 79, एसटी के 93 और ओबीसी के लिए करीब 56 पद आरक्षित किए गए है। जिलेवार जानकारी के अनुसार जयपुर की 22 पंचायत समितियों में 1 महिला प्रधान बन सकेंगी। उदयपुर में 20 पंचायत समितियों में से एक में भी ओबीसी वर्ग का प्रधान नहीं होगा इनके अलावा डूंगरपुर, बांसवाड़ा सलूंबर और प्रतापगढ़ जिलों में केवल एसटी वर्ग से ही प्रधान बनेंगे। 14 हजार 403 सरंपच चुने जाएंगे पंचायती राज संस्थाओं के जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर पर कुल 1.51 लाख से अधिक वार्ड हैं और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों के लिए सरपंचों का चुनाव होगा। पंचायती राज संस्थाओं मैं महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण होने के कारण इन संस्थाओं में 75 हजार से अधिक महिलाओं का चुनाव भी किया जाएग। इनके अलावा 1403 जिला परिषद सदस्य 41 जिलों के लिए जिला प्रमुख और 8245 पंचायत समिति सदस्य 457 प्रधानों का चुनाव करेंगे, जिनमें भी महिला आरक्षण लागू होगा। अनुमान है कि पंचायत चुनाव में 7 लाख से अधिक लोग के लिए सामने आ सकते हैं। जिला प्रमुख पदों का आरक्षण पहले ही तय हो चुका है। सरपंच और वार्ड पंचों के पदों की लॉटरी आज अब गुरुवार को उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंचों के पदों की लॉटरी निकाली जाएगी। प्रदेश में 41 जिला परिषद और 457 पंचायत समिति और ग्राम पंचायतें 14 हजार से अधिक हैं, जिनके वार्डों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा है। 41 जिला परिषदों में जिला प्रमुख पदों के लिए ओबीसी के 5, अनुसूचित जाति (एससी) के 8, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 7 प्रतिनिधि चुने जाएंगे, वहीं चूरू, अजमेर, झुंझुनू, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डीग, श्रीगंगानगर, झालावाड़, फलोदी, बीकानेर एवं कोटा में जिला प्रमुख सामान्य महिला श्रेणी से होगा। बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, करौली, कोटपूतली-बहरोड़, राजसमंद, सिरोही एवं उदयपुर में भी जिला प्रमुख सामान्य श्रेणी में होंगे। सामान्य श्रेणी के पदों पर आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधि भी चुने जा सकेंगे।  

चंबल जल बंटवारे पर अक्टूबर में बड़ा फैसला, चारों बांधों के पानी का होगा आकलन

कोटा मानसून की विदाई का वक्त आ गया है। इस बार राजस्थान और मध्यप्रदेश में मानसून की बेरुखी के कारण बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। ऐसे में रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी रहने की आशंका है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के खेतों को सरसब्ज करने वाली चंबल सिंचाई परियोजना पर भी इसका असर पड़ने वाला है। चंबल के बांधों में भी अपेक्षाकृत कम पानी है। चंबल जल बंटवारे को लेकर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की तकनीकी समिति की बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है। बैठक के मद्देनजर दोनों राज्यों की संयुक्त समिति चंबल के चारों बांधों में उपलब्ध पानी का आकलन करेगी। इसी के आधार पर दोनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा तय होगा। जल बंटवारे में पेयजल और उद्योगों के लिए पानी आरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद वाष्पीकरण ह्रास का आकलन कर सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी की मात्रा तय की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि तकनीकी समिति की बैठक का शेड्यूल 25 सितम्बर तक तय किया गया था, लेकिन हाल में दोनों राज्यों में हुई बारिश से बांधों में पानी की आवक हुई है। इसलिए अब पानी का आकलन पांच अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके बाद दोनों राज्यों की संयुक्त बैठक होगी। इस बार बैठक की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य अभियंता करेंगे। चंबल के बांध कितने भरे हैं बांध    जलभराव (%) गांधी सागर बांध    75.65 राणाप्रताप सागर बांध    73.29 जवाहर सागर बांध    75.64 कोटा बैराज    98.08 गांधी सागर बांध का जलस्तर 1302.14 फीट पहुंचा चंबल नदी के सबसे बड़े बांध गांधी सागर का जलस्तर हाल में हुई बारिश से करीब एक फीट बढ़ गया है। गांधी सागर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में पिछले सप्ताह अच्छी बारिश हुई। इससे बांध का जलस्तर भराव क्षमता 1312 फीट के मुकाबले 1302.14 फीट तक पहुंच गया है। यह कुल जलभराव क्षमता का 75.65 प्रतिशत है। फैक्ट फाइल     1960 में चम्बल का नहरी तंत्र विकसित     63 दाईं और बाईं मुख्य नहर की शाखाओं, उपशाखाओं व वितरिकाओं की संख्या     16 किमी आबादी क्षेत्र में दाईं मुख्य नहर व इसकी छोटी नहर     5 किमी आबादी क्षेत्र में बाईं मुख्य नहर, माइनरें तथा वितरिकाएं     1.27 लाख हैक्टेयर दाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र     1.2 लाख हैक्टेयर बाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र     6656 क्यूसेक दाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता     1500 क्यूसेक पानी बाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता     3 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित     124 किमी दाईं मुख्य नहर राजस्थान में     248 किमी मध्यप्रदेश की सीमाओं में जल प्रवाहित करती है     24.6 प्रतिशत हिस्सेदारी एमपी की होती है दाईं मुख्य नहर के समस्त कार्यों में     24.6 प्रतिशत राशि राजस्थान वहन करता है दाईं मुख्य नहर के कार्यों में इनका कहना है अक्टूबर के पहले सप्ताह में जल बंटवारे को लेकर बैठक प्रस्तावित है। इसमें पानी के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। फिलहाल बैठक का एजेंड़ा नहीं आया है। बैठक में मुख्यतया जल प्रवाह के संबंध में ही चर्चा होगी। -संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा

राजस्थान निकाय चुनाव: BJP ने जीते 199 निकाय, अब पंचायत चुनाव पर नजर

जयपुर राजस्थान निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 309 में से 199 नगर निकायों पर जीत दर्ज की है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह परिणाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर है. चुनाव प्रचार के दौरान भजनलाल शर्मा ने जिस तरह रोड शो किए थे और सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा था. उससे 10 नगर निगमों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त या जीत दर्ज होने के बाद पार्टी का उत्साह बढ़ गया है. अब भाजपा की नजर आगामी पंचायत चुनावों पर है, जिन्हें अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है. पहले जानिए क्या कह रहे हैं चुनावी परिणाम राजस्थान के 309 नगर निकायों में से 199 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है. 10 में से सात नगर निगम के परिणाम आ चुके हैं इनमें से छह पर भाजपा के मेयर बने हैं. तीन के परिणाम बाकी है जिसमें से दो में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और तीसरे में भी बीजेपी आगे है यानी 10 में से 9 नगर निगम भाजपा के पास आने वाले हैं. भजनलाल के लिए क्यों खास है ये बंपर जीत राजस्थान में यह एकतरफा जीत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में मिली है. यह जीत उस वक्त मिली है जब भजनलाल शर्मा अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. यह जीत उस वक्त मिली है जब आमतौर पर राजस्थान की जनता में एंटी इनकंबेंसी वाले भाव आना शुरू हो जाते हैं. यह जीत उस वक्त मिली है जब बीजेपी का कोर वोटर बीजेपी से नाराज बताया जा रहा है. इस चुनाव को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूरी तरह लीड किया था. 10 के 10 नगर निगम क्षेत्रों में भजनलाल शर्मा ने रोड शो किए थे. चुनाव से पहले संकल्प पत्र जारी किया था. दावा किया था कि हम हमारे घोषणा पत्र के 78 फीसदी वादे पूरे कर चुके हैं. कुल मिलाकर यह चुनाव भजनलाल शर्मा ने अपने काम के आधार पर लड़ा और अपने चेहरे पर लड़ा. सफलता को आप आंकड़ों में देख सकते हैं और आंकड़े कह रहे हैं कि इस चुनाव में भाजपा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की है. आगे पंचायत चुनाव की परीक्षा बाकी अब आगे पंचायत चुनाव भी आ रहे हैं और एक बार फिर परीक्षा के मैदान में उतरना है. आज नतीजों के बाद बीजेपी दफ्तर में आए भजनलाल शर्मा का कॉन्फिडेंस बता रहा है कि वे एक और परीक्षा के लिए तैयार हैं. करीब ढाई साल पहले जब भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बने थे तो वे विधायक भी पहली बार ही बने थे. कोई प्रशासनिक और सरकारी अनुभव नहीं था लेकिन इन दी वर्षों में उन्होंने चुपचाप अपना काम किया. नतीजा आज सबके सामने हैं.

राजस्थान में ‘नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क’ की पहल, CS ने परिवादियों से किया सीधा संवाद

जयपुर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन केन्द्र का निरीक्षण कर सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न जिलों के परिवादियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली वीडियो कॉल के माध्यम से आमजन से सीधे संवाद मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल के तहत एक अभिनव पहल की गई है। इसके माध्यम से प्रशासनिक सचिव प्रतिदिन वीडियो कॉल के जरिए आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं तथा उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस नवाचार से सरकार को आमजन की समस्याओं के स्वरूप और उनकी वास्तविक कठिनाइयों को सीधे समझने में भी मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प है कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो, जिससे उनका संतुष्टि स्तर बढ़े तथा समस्याओं का प्रभावी, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि 181 हेल्पलाइन के माध्यम से शासन और आमजन के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रशासन अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और आमजन के प्रति तत्पर बन सके। ‘नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क’ की दिशा में बढ़ रहा राजस्थान संपर्क मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार के सुशासन के संकल्प को साकार करने के लिए राजस्थान संपर्क को नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से आमजन और शासन के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाकर शिकायतों के त्वरित, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि को सुनिश्चित करें मुख्य सचिव ने सभी जिला स्तरीय एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसामान्य से जुड़े विभागों से संबंधित परिवादों के निस्तारण में परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन परिवादों के निस्तारण के बाद परिवादी की असंतुष्टि सामने आती है, उन पर जिला स्तरीय एवं विभागीय उच्चाधिकारी विशेष ध्यान दें तथा अपने स्तर से उनके संतोषजनक समाधान का प्रयास करें। साथ ही, परिवादों के निराकरण के दौरान सामने आने वाली कमियों को जानकर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि आमजन को अधिकतम राहत मिल सके। परिवादियों से किया सीधा संवाद मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परिवादियों से स्वयं संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने बीकानेर के अशोक कुमार, जयपुर के मोहनलाल तथा टोंक के आसाराम सहित अन्य परिवादियों से बातचीत की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परिवादियों की समस्याओं और उनके निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग दिनेश कुमार, आयुक्त, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग हिमांशु गुप्ता सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

राजस्थान में ₹35 लाख करोड़ के निवेश समझौते, ₹9 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर

जयपुर सार्वजनिक निवेश का बेहतर प्रबंधन, परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेश से अधिकतम परिणाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता केंद्र (एसएआरटीटीएसी) द्वारा जयपुर में ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट–इंडियन स्टेट्स’ विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सोमवार को शुरुआत हुई। उद्घाटन सत्र में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि देश में सार्वजनिक परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश हो रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए निवेश का अधिकतम लाभ आमजन और अर्थव्यवस्था को मिले। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सार्वजनिक निवेश का असर केवल बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं रहा है। जल एवं परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं में लगातार निवेश से दूर-दराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और लोगों को बाजारों एवं सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ने में मदद मिली है। मुख्य सचिव ने कहा कि राइजिंग राजस्थान के तहत लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनमें से करीब 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। राइजिंग राजस्थान के तहत भी इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने भड़ला सौर पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं बताती हैं कि सही दिशा में किया गया रणनीतिक निवेश आर्थिक विकास को गति देने के साथ ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मुख्य सचिव ने जीएसटी सुधारों को महत्वपूर्ण परिवर्तन बताते हुए कहा कि इससे विभिन्न प्रक्रियाओं और दस्तावेजीकरण को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिली है। उन्होंने राज्य के साइबर कोषागार के माध्यम से वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ने तथा एसएनए-स्पर्श के माध्यम से कोषागार आधारित भुगतान व्यवस्था में वास्तविक समय में भुगतान की दिशा में हुए बदलाव का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर एसएआरटीटीएसी के निदेशक हेराल्ड फिंगर ने बताया कि एसएआरटीटीएसी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), दक्षिण एशिया के सदस्य देशों और विकास साझेदारों की सहयोगात्मक पहल है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की संस्थागत एवं मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करना है, ताकि वे बेहतर व्यापक आर्थिक एवं वित्तीय नीतियां तैयार कर उनका प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें। उन्होंने बताया कि एसएआरटीटीएसी में भारत के साथ बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका सदस्य देश हैं। यह आईएमएफ का ऐसा क्षेत्रीय केंद्र है, जहां प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दोनों को एक साथ उपलब्ध कराया जाता है। इस अवसर पर एसएआरटीटीएसी के रेजिडेंट पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट एडवाइजर स्टीफन टर्नबुल, नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार अनुराग गोयल, विशेष शासन सचिव वित्त (बजट) श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार तथा आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के विशेषज्ञ रूई मोंटेइरो एवं मार्टिन डार्सी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

राजस्थान के 5 नगर निगमों में मेयर चुनाव के नतीजे, 4 पर BJP और बीकानेर में कांग्रेस

 जयपुर  राजस्थान के नगर निगमों में महापौर चुनाव के नतीजों ने कई जगह दिलचस्प राजनीतिक समीकरण सामने रखे हैं। सोमवार को हुए चुनाव में अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, अलवर और पाली नगर निगम में महापौर पद के परिणाम घोषित हुए। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा के महापौर निर्विरोध चुने जा चुके हैं। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर पद का चुनाव 25 सितंबर को होगा। इन परिणामों में सबसे कम वोटों के अंतर से जीत पाली में दर्ज हुई। यहां भाजपा की नमिता बुबकिया ने निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को महज 4 वोटों से हराया। नमिता को 33 और राजबाला को 29 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन को तीन वोट मिले। पाली में कुल 65 वार्ड हैं और महापौर बनने के लिए 33 वोट जरूरी थे। पाली और अजमेर में बेहद करीबी मुकाबला पाली के बाद सबसे कम अंतर से जीत अजमेर में रही। यहां भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। यानी भाजपा प्रत्याशी ने 6 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। अजमेर में भाजपा के 32 और कांग्रेस के 37 पार्षद थे, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद थे। परिणाम में भाजपा प्रत्याशी को पार्टी के घोषित संख्या बल से अधिक वोट मिले। उदयपुर में सबसे बड़ा अंतर उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी ने सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले। दोनों के बीच 30 वोट का अंतर रहा। उदयपुर में भाजपा के पास 53 पार्षद थे और सिंघवी को इससे दो अधिक वोट मिले। बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला को 50 वोट मिले और भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। यहां कांग्रेस ने 20 वोट के अंतर से महापौर पद जीता। वहीं अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल को 42 और कांग्रेस को 23 वोट मिले, जिससे जीत का अंतर 19 वोट रहा। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशियों का निर्वाचन निर्विरोध हुआ। अब प्रदेश की निगाहें जयपुर, जोधपुर और कोटा पर हैं, जहां महापौर चुनाव 25 सितंबर को होगा। इन परिणामों के बाद अब उपमहापौर और उपाध्यक्ष पदों के लिए भी राजनीतिक समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। महापौर चुनाव के परिणाम और जीत का अंतर नगर निगम             कुल वार्ड    महापौर             पार्टी          विजेता के वोट    दूसरे प्रत्याशी के वोट    जीत का अंतर अजमेर                       80    अनामिका शर्मा      भाजपा           43                    कांग्रेस 37                6 वोट उदयपुर                       80    पारस सिंघवी         भाजपा          55                    कांग्रेस 25                30 वोट बीकानेर                    80    अनिल कल्ला            कांग्रेस         50                    भाजपा 30                  20 वोट अलवर                      65    सुमनलता अग्रवाल    भाजपा       42                       कांग्रेस 23                  19 वोट पाली                        65    नमिता बुबकिया        भाजपा       33                       निर्दलीय 29                   वोट भरतपुर                   65    अनुराधा सिंह            भाजपा        निर्विरोध                —                                निर्विरोध भीलवाड़ा                 70    जसवंत कंवर            भाजपा       निर्विरोध                  —                                निर्विरोध

गेमिंग-रील्स के चक्कर में साइबर ठगी का खतरा, राजस्थान पुलिस ने दी पैरेंट्स को चेतावनी

जयपुर बस पांच मिनट और मॉम। आप कई बार मोबाइल को लेकर बच्चों को टोकते हैं, लेकिन वे आपसे बस 5 मिनट और रुकने की कहते हैं। ध्यान रखें यही 5 मिनट कहीं आपके लाड़ले के लिए भारी न पड़ जाएं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स के बढ़ते चलन के बीच राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों और बच्चों को सख्त चेतावनी दी है। पुलिस ने कहा है कि गेमिंग और रील्स के चक्कर में बच्चे फर्जी प्रोफाइल और साइबर बुलिंग के शिकार न हों। ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखें, अनुचित कंटेंट को तुरंत ब्लॉक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 नंबर पर दें। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें राजस्थान पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी पोस्ट में साफ कहा गया है कि बच्चे आसानी से फर्जी अकाउंट बनाकर या दोस्ती का झांसा देकर साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। गेमिंग प्लेटफॉर्म और शॉर्ट रील्स ऐप्स पर अजनबियों से बातचीत, दोस्ती या चैलेंज स्वीकार करने से मानसिक तनाव, ब्लैकमेलिंग और यहां तक कि शारीरिक नुकसान तक का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। फर्जी प्रोफाइल बनाकर ऐसे फंसाते हैं बच्चों को साइबर अपराधी आकर्षक फोटो और झूठी कहानियों के साथ फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं। गेमिंग या रील्स के नाम पर वे बच्चों से संपर्क साधते हैं, फिर धीरे-धीरे निजी जानकारी, फोटो या वीडियो मांगते हैं। बाद में इन्हीं चीजों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में तुरंत 1930 पर कॉल करना सबसे जरूरी कदम है। अभिभावकों की जिम्मेदारी सबसे बड़ी अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना चाहिए। गोपनीयता सेटिंग्स चेक करें, अजनबी फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने की आदत डालें और नियमित बातचीत से बच्चों को जागरूक बनाएं। अनुचित कंटेंट दिखने पर तुरंत रिपोर्ट और ब्लॉक करें। पुलिस का कहना है कि समय पर सतर्कता कई बड़े अपराधों को रोक सकती है। राजस्थान में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं राजस्थान में हाल के महीनों में इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर दोस्ती के नाम पर नाबालिगों को फंसाने, ब्लैकमेल करने और यहां तक कि दुष्कर्म के मामले सामने आए हैं। जयपुर, अलवर और अन्य जिलों में ऐसे कई मामले दर्ज हुए हैं, जहां फर्जी दोस्ती से शुरू होकर पीड़ितों को मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचाया गया। ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के मामले भी प्रदेश में काफी संख्या में दर्ज हो रहे हैं। इन घटनाओं ने पुलिस को लगातार जागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया है। 1930 नंबर ही सबसे बड़ा सहारा किसी भी साइबर अपराध या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 पर दें। शिकायत cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है। राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है। पुलिस का संदेश साफ है—बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी परिवार और समाज दोनों की है। सतर्क रहें, जागरूक रहें और समय पर रिपोर्ट करें ताकि गेमिंग और रील्स का मजा अपराध का कारण न बने।