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समय से पहले गर्मी का असर, प्रदेश में पारा 37 डिग्री के करीब

जयपुर राजस्थान में इस बार गर्मी ने तय समय से पहले ही दस्तक दे दी है। दिन का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। पश्चिमी जिलों के साथ अब पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में भी तेज धूप के कारण दिन का तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। गुरुवार को जयपुर, अजमेर और उदयपुर सहित कई जिलों में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार राज्य में अगले एक सप्ताह तक मौसम साफ रहेगा। वहीं आगामी 48 घंटों में तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे गर्मी का असर और तेज हो सकता है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे राज्य में दिनभर तेज धूप रही और हल्की गर्मी महसूस की गई। पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का प्रभाव अधिक देखने को मिला। बाड़मेर में अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर में भी तापमान बढ़ा और इन शहरों में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। अब पूर्वी राजस्थान में भी गर्मी का असर दिखने लगा है। गुरुवार को जयपुर, अजमेर, उदयपुर, गंगानगर और कोटा में अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हुआ। सीकर और सिरोही सहित अधिकांश शहरों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। हालांकि दिन में तेज गर्मी के बावजूद सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक से लोगों को राहत मिल रही है। गुरुवार को अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक न्यूनतम तापमान में खास बदलाव की संभावना नहीं है, जबकि अधिकतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारी, फाइनल वोटर लिस्ट से पता चले कितने वोटर करेंगे चुनाव

जयपुर  राजस्थान में पंचायत चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने  पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) जारी कर दी है। इस सूची के अनुसार, प्रदेश में अब कुल 4 करोड़ 2 लाख 20 हजार 734 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। माना जा रहा है कि प्रदेश की 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में अगले महीने चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं। मतदाताओं की संख्या में बड़ा इजाफा राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद प्रदेश में कुल 5 लाख 73 हजार 568 नए वोटर्स बढ़े हैं। बांसवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा 4.55% मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। फलोदी जिला 4.46% की बढ़ोतरी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। सबसे कम वृद्धि टोंक (0.04%) और श्रीगंगानगर (0.19%) जिलों में देखी गई। आयोग के अनुसार, 29 जनवरी 2026 को जारी प्रारूप सूची पर प्राप्त आपत्तियों के निपटारे के बाद 13.66 लाख नए नाम जोड़े गए, जबकि 7.92 लाख नाम हटाए गए हैं। जयपुर में 18 लाख से अधिक वोटर्स राजधानी जयपुर की बात करें तो यहाँ की 22 पंचायत समितियों में करीब 18.91 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। इन समितियों के अंतर्गत आने वाली सभी 597 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, जहाँ जल्द ही मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी। कार्यकाल और आरक्षण की स्थिति वर्तमान में प्रदेश की 12 जिला परिषदों और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल अभी शेष है, जो सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में पूरा होगा। ओबीसी आरक्षण पर संशय : चुनावों में ओबीसी वर्ग के आरक्षण के निर्धारण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का अभी इंतजार है। यदि आयोग समय पर रिपोर्ट पेश नहीं करता है, तो सरकार पुराने आरक्षण प्रावधानों के आधार पर ही चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।

राजस्थान में दिल दहला देने वाली घटना: स्कूल जाते ही 4 साल के बच्चे पर कुत्ते का हमला

बीकानेर राजस्थान के बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल के पहले ही दिन चार साल का एक मासूम आवारा कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना उपनी गांव के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल की है, जहां बच्चा अपने बड़े भाई के साथ पहली बार स्कूल गया था। रिपोर्ट के मुताबिक क्लास से बाहर निकलते ही मेन गेट के पास आवारा कुत्तों ने उसे घेर लिया और बुरी तरह नोंच डाला। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल का गेट खुला होने और सुरक्षा गार्ड ना होने के कारण कुत्ते परिसर में दाखिल हुए। बच्चे को तुरंत बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, कुत्तों ने बच्चे के सिर की खाल को बुरी तरह फाड़ दिया है, जिससे उसे गहरे जख्म आए हैं। इस घटना ने स्कूल प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जयपुर में दो नए रूट पर मेट्रो चलाने की भजनलाल सरकार ने की तैयारी

जयपुर. भजनलाल सरकार ने जयपुर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के संकेत दिए हैं। राजस्थान विधानसभा में देर रात अनुदान मांगों पर बहस का जवाब देते हुए यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जयपुर में जगतपुरा और वैशाली नगर तक भी मेट्रो चलाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए घोषणा की। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जगतपुरा, वैशाली नगर सहित अन्य क्षेत्रों में मेट्रो के लिए संभावित कॉरिडोर चिन्हित किए जाएंगे। सलाहकार स्तर पर संभावित मार्गों और आवश्यकताओं का अध्ययन करवाया जा रहा है। यदि फिजिबल हुआ तो मेट्रो का विस्तार किया जाएगा। जयपुर को जाम से राहत देने की दिशा में ठोस कदम उन्होंने कहा कि जयपुर मेट्रो फेज-2 का विस्तृत ट्रैफिक-ट्रांसपोर्ट अध्ययन, सर्वेक्षण और वित्तीय-आर्थिक विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिक रूप से रूट तय किया गया है। प्रह्लादपुरा से टोडी मोड़ तक का मेट्रो कॉरिडोर ज्यादा यात्री भार वाले क्षेत्रों को जोड़ेगा, जो जयपुर को जाम से राहत देने की दिशा में ठोस कदम है। मेट्रो फेज-2 की डीपीआर को जल्द स्वीकृति की उम्मीद जयपुर मेट्रो फेज-2 की डीपीआर अब केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए लंबित है। राजस्थान सरकार को मेट्रो फेज-2 की स्वीकृति जल्द मिलने की उम्मीद है, जिससे जयपुर शहर की परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी। बता दें कि जयपुर मेट्रो फेज-2 की लंबाई लगभग 42.80 किलोमीटर होगी। इसमें कुल 36 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें से 34 एलिवेटेड और 2 अंडरग्राउंड होंगे।

पंचायत चुनाव और मतदाता सूची का काम पूरा

जयपुर. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। चार करोड़ दो लाख बीस हजार 734 मतदाता मतदान कर सकेंगे।प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समिति और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से जिनके कार्यकाल खत्म हो चुके हैं, उनमें कोर्ट के निर्देशों के अनुसार संभवतः अगले महीने चुनाव कराए जा सकते हैं। आयोग ने 29 जनवरी को मतदाता सूची का प्रारूप जारी किया था। इसमें 3 करोड़ 96 लाख 47 हजार 166 मतदाता थे। वहीं, आपत्तियां और सुझाव आने के बाद उनका निपटारा करते हुए 13 लाख 66 हजार 435 नाम जोड़े गए हैं। जबकि 7 लाख 92 हजार 867 हटाए गए हैं। अब मतदाता सूची में कुल वृद्धि 5 लाख 73 हजार 568 मतदाताओं की हुई है। अंतिम मतदाता सूची में 4,02,20,734 वोटर हैं। इनमें 2,08,62,380 पुरुष, 1,93,58,147 महिला तथा 207 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। बांसवाड़ा में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बांसवाड़ा जिले में सर्वाधिक 4.55 तथा फलोदी जिले में 4.46 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, टोंक जिले में न्यूनतम 0.04 प्रतिशत एवं श्रीगंगानगर जिले में 0.19 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। 12 जिला परिषद और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल शेष आयोग के अनुसार, फिलहाल 41 में से 12 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों में से 130 का कार्यकाल शेष है। इनका कार्यकाल अलग-अलग समय पर दिसंबर 2026 तक पूरा होगा। 5 सितंबर तक 6 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होगा। वहीं, 29 अक्टूबर तक 2 जिला परिषद और 22 पंचायत समितियां का कार्यकाल खत्म होगा। इसके बाद 22 दिसंबर तक 4 जिला परिषद और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का बढ़ रहा इंतजार पंचायत-नगरीय निकाय चुनाव कराने से पहले वार्डों का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आना जरूरी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण तय होगा, लेकिन आयोग की रिपोर्ट का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। इससे चुनावों को लेकर वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया रुकी हुई है।

राजस्थान की भजनलाल शर्मा कैबिनेट ने किए वरिष्ठ बीडीओ के 750 नए पद मंजूर

जयपुर. राजस्थान कैबिनेट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लिया। अब पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत ग्राम विकास अधिकारियों को पदोन्नति का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। राज्य मंत्रिपरिषद ने वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के 750 नए पद सृजित करने की स्वीकृति दी है। इसके लिए राजस्थान ग्रामीण विकास एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 में संशोधन किया गया है। प्रदेश में 11 हजार से अधिक ग्राम विकास अधिकारी कार्यरत हैं। प्रथम पदोन्नति के लिए पूर्व में सहायक विकास अधिकारी के 2465 पद स्वीकृत थे, जो पर्याप्त नहीं थे। संघ ने कहा महत्वपूर्ण निर्णय संगठन की मांग पर 3600 ग्रेड वेतन तथा वेतन स्तर-10 में 750 नए पद स्वीकृत किए हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा एवं प्रदेश महामंत्री शिवराज चौधरी ने निर्णय का स्वागत किया। जिलाध्यक्ष भरत कुमार पटोत ने कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।

राजस्थान में अब 3 से अधिक संतान वाले भी लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव

जयपुर. राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले बड़ा बदलाव किया गया है। भजनलाल सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने की योग्यता में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब राज्य में दो से अधिक संतान वाले भी स्थानीय चुनाव लड़ सकेंगे। यानी अब दो से ज्यादा बच्चे वाले भी सरपंच और पार्षद बन सकेंगे। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल का कहना है कि दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने का प्रतिबंध उस समय लागू किया गया था, जब जनसंख्या विस्फोट पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता थी। वर्ष 1991-94 के बीच प्रजनन दर 3.6 थी, जो वर्तमान में घटकर 2 रह गई है। ऐसे में इन प्रावधानों का प्रत्यक्ष प्रभाव अब कम होता जा रहा है। ऐसे में भजनलाल सरकार ने अब राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-19 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा-24 में संशोधन करने का निर्णय लिया है। वर्तमान सत्र में ही पारित होंगे दोनों विधेयक कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों के लागू होने के बाद दो से अधिक संतानों वाले व्यक्तियों पर निकाय और पंचायत चुनाव लड़ने की लगी रोक समाप्त हो जाएगी। पटेल ने कहा कि दोनों विधेयकों को वर्तमान सत्र में ही पारित कराया जाएगा। इस निर्णय से ऐसे कई जनप्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों को राहत मिलेगी, जो अब तक इस प्रावधान के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे। समय-समय पर उठती रही बदलाव की मांग पिछली गहलोत सरकार के दौरान कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने 2 बच्चों की शर्त हटाने की मांग की थी। पिछले साल बजट सेशन के दौरान चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने भी सवाल उठाते हुए पूछा था कि दो से ज्यादा बच्चों वाले लोगों को विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने की इजाज़त देने और पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के पीछे क्या वजह है? साथ ही इस नियम पर फिर से विचार करने की अपील की थी। जनप्रतिनिधि-नेताओं के समान अवसर की मांग पर संशोधन जनप्रतिनिधियों और कई नेताओं ने दो बच्चों की बाध्यता हटाने की पुरजोर मांग की थी। खुद मंत्री झाबर सिंह खर्रा इन नेताओं की बात को कई बार दोहरा चुके हैं कि विधायक और सांसद चुनाव में ऐसी बाध्यता नहीं है। वहीं, सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में भी यह शर्त पहले ही हटाई जा चुकी है। ऐसे में निकाय चुनाव में यह बाध्यता क्यों हो? जनप्रतिनिधियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर सरकार में तय हुआ कि सभी योग्य और सक्रिय लोगों को चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए, विशेषकर उन लोगों को जिन्होंने वर्षों तक जमीनी स्तर पर काम किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में पंचायतीराज कानून और राजस्थान नगरपालिका कानून में संशोधन कर दो से अधिक संतानों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान जोड़ा गया था। उस समय इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना बताया गया था। नियम लागू होने के बाद कई निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त भी हुई थी। इस फैसले से राजस्थान की राजनीति गरमा गई थी। 1997 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इस बदलाव को सही ठहराते हुए कहा था कि यह आबादी बढ़ने से रोकने के लिए एक ज़रूरी कदम है। लेकिन, अब 30 साल पहले लागू किए गए प्रावधान को बदलने के निर्णय के बाद प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायतीराज की राजनीति में बदलाव की संभावना है।

अब नहीं रहेगी दो बच्चों की शर्त! कैबिनेट बैठक में बड़ा बदलाव, चुनाव लड़ने का रास्ता साफ

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को विधानसभा सचिवालय में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 और राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 लाने, राजस्व आसूचना एवं आर्थिक अपराध निदेशालय के गठन सहित कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कैबिनेट बैठक के बाद विधानसभा में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-19 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा-24 में संशोधन कर राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 और राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 लाने का महत्वपूर्ण निर्णय किया गया है। इससे जिन व्यक्तियों के दो से अधिक संतान हैं वे पंचायतीराज संस्थाओं एवं नगरपालिकाओं के चुनाव लड़ सकेंगे। उन्होंने बताया कि दो से अधिक संतान पर चुनाव लड़ने का प्रतिबंध उस समय लागू किया गया था, जब जनसंख्या विस्फोट पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता थी। वर्ष 1991-94 के बीच प्रजनन दर 3.6 थी, जो वर्तमान में घटकर 2 रह गई है। ऐसे में इन प्रावधानों का प्रत्यक्ष प्रभाव अब कम होता जा रहा है। पटेल ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की अनुपालना में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 में संशोधन कर धारा 2 को संशोधित करते हुए शब्द कुष्ठ रोग को खतरनाक रोग की श्रेणी से हटाया गया है। जिससे नगरपालिका के आगामी चुनाव में सभी व्यक्तियों को चुनाव लड़ने का समान अवसर मिल सकेगा और कुष्ठ रोगियों का सम्मान भी सुनिश्चित हो सकेगा। भूमि पर अवैध कब्जों से लेकर फर्जी दस्तावेजों जैसे आर्थिक अपराधों की होगी प्रभावी जांच उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि आर्थिक अपराधों पर प्रभावी रोकथाम तथा वित्तीय अनुशासन के लिए राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय को समाप्त कर राजस्व आसूचना एवं आर्थिक अपराध निदेशालय के गठन का निर्णय मंत्रिमण्डल में किया गया। उन्होंने बताया कि इससे रियल एस्टेट में धोखाधड़ी, बैंक-बीमा-एनबीएफसी एवं शेयर बाजार से जुड़े वित्तीय अपराध, मल्टी लेवल मार्केटिंग ठगी, झूठा दिवालियापन, फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी तथा फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से नौकरी या प्रवेश से संबंधित मामलों पर शीघ्र कार्रवाई हो सकेगी। साथ ही, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या विक्रय, स्टाम्प एवं पंजीयन अनियमितताएं, फर्जी कंपनियों का गठन, सहकारी समितियों में घोटाले जैसे आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा और अपराधियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया कि यह निदेशालय वाणिज्यिक कर, आबकारी, परिवहन, पंजीयन एवं मुद्रांक, खनिज सहित विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर राजस्व लीकेज पर निगरानी रखेगा तथा टैक्स चोरी को रोकेगा। इससे राजस्व संबंधी सूचनाओं और आर्थिक अपराधों की जांच का कार्य एकीकृत रूप से किया जा सकेगा। राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति, 2026 में मिलेगा पूंजीगत अनुदान उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड ने बताया औद्योगिक विकास को नई गति देने, निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने तथा सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति, 2026 लाई जाएगी। इस नीति के अंतर्गत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए मॉडल-ए (पूर्णतः रीको द्वारा आवंटित भूमि पर विकास), मॉडल-बी (80 प्रतिशत भूमि विकासकर्ता द्वारा अधिग्रहण एवं शेष 20 प्रतिशत भूमि रीको द्वारा निर्धारित दरों पर), मॉडल-सी (संपूर्ण भूमि की विकासकर्ता द्वारा व्यवस्था) तथा मॉडल-डी (पीपीपी मॉडल) निर्धारित किए हैं। उन्होंने बताया कि इस नीति के अंतर्गत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्कों के लिए कम से कम 50 एकड़ क्षेत्रफल तथा न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी। राज्य सरकार औद्योगिक पार्क के लिए सामान्य अवसंरचना विकास पर 20 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान भी देगी। इसकी अधिकतम सीमा 100 एकड़ तक के पार्क हेतु 20 करोड़ रुपए, 100 से 250 एकड़ हेतु 30 करोड़ तथा 250 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल हेतु 40 करोड़ रुपए होगी। साथ ही, हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए सीईटीपी पर व्यय का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 12.5 करोड़ रुपए प्रति पार्क) का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने बताया कि पार्क के लिए अनुमोदन प्रक्रिया राज निवेश पोर्टल के माध्यम से सिंगल विंडो प्रणाली द्वारा समयबद्ध एवं पारदर्शी रूप से की जाएगी। औद्योगिक इकाई हेतु भूमि आवंटन, स्टील वैल्यू चैन को मिलेगी मजबूती कर्नल राठौड़ ने बताया कि मैसर्स ग्रोथ इण्डस्ट्रीयल मिनरल्स प्रा. लि. को ग्राम रामल्यावार्स, तहसील नीमकाथाना में औद्योगिक प्रयोजन के लिए 53 हैक्टेयर की भूमि राजस्थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम, 1959 के प्रावधानों के अंतर्गत आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। कम्पनी द्वारा करीब 500 करोड़ रुपए के निवेश से इस जमीन पर आधुनिक तकनीक आधारित बेनिफिकेशन एवं पेलेट प्लांट की स्थापना कर लगभग 565 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, इससे प्रदेश में स्टील वैल्यू चैन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम साबित होगा तथा प्रदेश के राजस्व में भी वृद्धि होगी। राजस्थान मंडपम एवं अन्य प्रोजेक्ट्स के संशोधित प्रस्ताव का अनुमोदन, 10 करोड़ की आय संभावित उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमण्डल की 23 अगस्त 2025 को आयोजित बैठक में टोंक रोड, बी2 बाईपास, जयपुर स्थित रीको की भूमि पर 3 हजार 55 करोड़ रुपये की लागत से राजस्थान मंडपम, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर एवं अन्य विकास कार्यों के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी। इस प्रस्ताव के अंतर्गत 635 करोड़ रुपए की राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जानी थी। मंत्रिमण्डल की बैठक में आज संशोधित वित्तीय मॉडल का अनुमोदन किया गया। जिसके अंतर्गत परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5 हजार 815 करोड़ रुपए तथा अनुमानित राजस्व प्राप्ति 5 हजार 825 करोड़ रुपये है। इस संशोधित मॉडल में लगभग 10 करोड़ रुपए की शुद्ध आय भी संभावित है। इसमें अब राज्य सरकार पर पूर्व में अनुमानित 635 करोड़ का वित्तीय दायित्व भी नहीं रहेगा। परियोजना पूर्णतः स्व-वित्तपोषित मॉडल पर क्रियान्वित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की स्थापना से युवाओं को रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित होंगे। राजस्थान आयुर्वेद, योग तथा नेचुरोपैथी विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन डॉ. बैरवा ने बताया कि प्रदेश में भारतीय चिकित्सा पद्धति की अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए दि राजस्थान आयुर्वेद, योग एण्ड नेचुरोपैथी यूनिवर्सिटी, अजमेर विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन … Read more

राजस्थान में 2 बच्चों से अधिक वाले उम्मीदवार भी पंचायत-नगरपालिका चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे

जयपुर राजस्थान में दो से अधिक बच्चे वाले भी अब पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ सकते हैं. राजस्थान कैबिनेट का फैसला. कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा- ‘कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट से मंजूरी के बाद पूरी संभावना है कि यही बिल राजस्थान विधानसभा के मौजूदा सत्र में पेश किया जाएगा. इससे पहले दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत व नगरपालिका चुनाव नहीं लड़ सकते थे. समय की जरूरत है दो बच्चों की बाध्यता को हटाना: राज्यवर्धन सिंह राठौड़ कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में राज्य के उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि राजस्थान सरकार ने आज बड़ा फैसला करते हुए पंचायत और नगरपालिका चुनाव में दो संतान का नियम हटा दिया है. अब किसी व्यक्ति के कितने भी बच्चे हैं वो पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ सकता है. इससे पहले दो से अधिक संतान पर पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ने पर रोक थी. राजस्थान के उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा ये समय की जरूरत है, इसलिए फैसला किया. राठौड़ ने कहा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत या बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बयान से इस फैसले का कोई संबंध नहीं है. राठौड़ ने कहा कि अगर हम उनके बयान से फैसला करते तो तीन बच्चे की भी बात कर सकते थे. 1995 में भैरोंसिंह शेखावत की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने राजस्थान में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की बाध्यता लागू की थी. अब बीजेपी की भजनलाल सरकार ने ही इसे पलट दिया है. पंचायती राज चुनाव में दो संतानों की पाबंदी हटाने के मामले पर मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि पहले जनसंख्या का दबाव काफी तेज था, अलग तरह की स्थिति थी, अब पहले से हालत में सुधार हुआ, ऐसे में पहले जैसे स्थिति नहीं है. पंचायती राज चुनाव में दो संतान से अधिक संतान होने की धारा 19 के मामले में उसके स्पष्टीकरण में नगर पालिका की धारा 24 में संशोधन करके दो या अधिक संतान होने के बावजूद भी अगर जानते जनप्रतिनिधि अन्य योग्यताएं रखता है. चाहे पंचायती राज का इलेक्शन हो या नगर निगम का कोई इलेक्शन है चुनाव लड़ने के लिए योग्य माना जाएगा.

145 साल पुराने आबूरोड रेलवे स्टेशन का होगा कायाकल्प

अजमेर. आबूरोड रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजनांतर्गत रेल मंत्रालय ने 81.51 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। वर्ष 1880 में स्थापित स्टेशन के विकास को करीब 28 हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन अंबाजी-आबूरोड-तारंगा हिल नई रेललाइन परियोजना से जोड़कर भी देखा जा रहा है। परियोजना का कार्य पूर्ण होने पर स्थानीय स्टेशन से यात्री गाड़ियों का संचालन शुरू होगा। इससे यात्रियों की संख्या में वृद्ध होगी। यह विकास कार्य होंगे मंडल रेल प्रबंधक राजू भूतड़ा के अनुसार आबूरोड, अजमेर मंडल का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। इस स्टेशन के पुनर्विकास से यह स्टेशन नए स्वरूप में नजर आएगा और यात्रियों को और भी अधिक बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। स्वीकृत राशि में से 74.87 करोड़ निर्माण लागत, 0.75 करोड़ यूटिलिटी सर्विसेज, 0.19 करोड़ आर्टवर्क, 0.75 करोड़ डिजाइन चार्ज, 0.07 करोड़ ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन, 0.75 करोड़ फर्नीचर, 0.77 करोड़ कंटीन्जेंसीज और 3.36 करोड़ डिपार्टमेंटल चार्जेज खर्च शामिल हैं। अजमेर मंडल के 15 स्टेशनों का पुनर्विकास अजमेर मंडल के 15 स्टेशनों पर अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं। उदयपुर स्टेशन पर पुनर्विकास का कार्य जारी है, जबकि अजमेर स्टेशन पर भी पुनर्विकास कार्य स्वीकृत किया है। आबूरोड स्टेशन 145 साल का गौरवशाली इतिहास समेटे हैं। आबूरोड रेलवे ने मीटर गेज के स्टीम इंजन से वर्तमान में विद्युतीकृत ब्रॉडगेज लाइन की राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी गाड़ियों के संचालन तक का दौर देखा है। यह प्रमुख पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू का प्रवेश द्वार होने से वर्षभर देश-विदेश के पर्यटक ट्रेन के माध्यम से यहां पहुंचते हैं। निकट ही अंबाजी का मंदिर भी है, जहां भी देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।