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एम्स भोपाल, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के बीच त्रिपक्षीय एमओयू

एम्स भोपाल, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के बीच हुआ त्रिपक्षीय एमओयू मधुमेह के जटिल उपचार पर होगा संयुक्त शोध भोपाल  विश्व होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव और सचिव आयुष वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में होम्योपैथी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण, प्रदेश के आयुष विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहा, जिसके अंतर्गत शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के बीच एक त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। आयुष विभाग के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है, जो प्रदेश में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा। एमओयू में अब भोपाल के इन प्रतिष्ठित संस्थानों में 'मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट डायबिटीज मेलिटस' के कारण होने वाले 'फुट अल्सर' के मामलों में होम्योपैथी दवाओं के प्रभाव पर विस्तृत शोध किया जाएगा। यह अनुसंधान, भविष्य में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति कीटाणुओं की बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) के वैश्विक संकट को हल करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। भारत में इस विधा के स्वरूप, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को रेखांकित करते हुए विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर एम्स भोपाल के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष विश्वास, मुख्य शोधकर्ता डॉ. शाश्वती नेमा, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल की शोध प्रमुख डॉ. जूही गुप्ता, सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के सचिव डॉ. संजय गुप्ता एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेनु मित्तल विशेष रूप से उपस्थित थे।  

सरेंडर की डेडलाइन खत्म, बस्तर में 5 माओवादी अब भी फरार—काउंटडाउन जारी

जगदलपुर. बस्तर में माओवादियों का नेटवर्क अब सिमटकर अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है. लेकिन इसी बीच कुछ गिने-चुने माओवादी अब भी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं और सुरक्षा बलों को सीधी चुनौती दे रहे हैं. माओवादी कमांडर पापाराव के जगदलपुर में और PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा के तेलंगाना में आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में सक्रिय माओवादियों की संख्या तेजी से घटी है. इसके बावजूद अब भी कुछ कट्टर कैडर अंडरग्राउंड रहकर गतिविधियां जारी रखे हुए हैं. स्थिति को देखते हुए बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने साफ और कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर में अब गिनती के माओवादी ही बचे हैं. और उनके पास मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका है. आईजी ने दो टूक कहा कि अगर अब भी ये माओवादी सामने नहीं आते हैं, तो सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज होगी. तेलंगाना DGP की माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील वहीं दूसरी ओर तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने भी तेलंगाना मूल के माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील दोहराई है. उन्होंने बताया कि साल 2024 में 125 तेलंगाना मूल के लोग माओवादी संगठन से जुड़े थे. लेकिन अब यह संख्या घटकर महज 5 रह गई है. इन बचे हुए माओवादियों में बड़े नाम भी शामिल हैं जिनमें गणपति और कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर में सक्रिय महिला माओवादी रूपी का नाम प्रमुख है जो अब भी अंडरग्राउंड हैं. यानी साफ है बस्तर में माओवाद का ढांचा लगभग ढह चुका है लेकिन आखिरी बचे माओवादी अब भी आत्मसमर्पण और मुठभेड़ के बीच खड़े हैं जहां अगला कदम उनकी किस्मत तय करेगा.

रोजगारोन्मुखी कोर्स डिज़ाइन करें – मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अहम निर्देश

रोजगारोन्मुखी नवीन कोर्स करें डिजाइन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की 47 आईटीटाई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सबसे अधिक नामांकन मध्यप्रदेश में भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रदेश की उपलब्धि अन्य राज्यों से बेहतर है। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स भी डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलवाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिये। बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उपस्थित रहे। बैठक में जाकनारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयत्न किए हैं। देश में युवाओं की जनसंख्या के दृष्टिगत उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लाँग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्रायवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्रायवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।  

मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित किया जायेगा मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह स्टेक-होल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर कार्यक्रम में टूरिज्म, हेल्थ, होटल इंड्रस्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पाँच विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने की योजना है। प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनाने की दिशा में कार्य शुरू हो गया है। इस मेडिकल हब के बनने से मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश विशेषकर इंदौर में विशेष मेडिकल हब बनने की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह है। इंदौर में के 100 किलोमीटर की दायरे में देा ज्यार्तिलिंग ओंकारेश्वर और उज्जैन में प्रसिद्ध महांकालेश्वर मंदिर है। बाहर से आने वाले नागरिक उक्त दोनों ही ज्योर्तिलिंगों पर दर्शन के लिये आते है। इस दृष्टि से भी विशेष रीजनल मेडिकल हब इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर पर बनाना उपयुक्त है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इंदौर में एजुकेशन हब है। इंदौर में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है। रेलवे और एयर कनेक्टिविटी है। व्यवसायी दृष्टि से भी इंदौर तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि केन्द्र सरकार की आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से नागरिकों का नि:शुल्क इलाज हो रहा है। अभी तक करोड़ नागरिकों द्वारा आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का लाभ ले चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित स्टेकहोल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर में अपना संबोधन दे रहे थे। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एमडी डॉ. सलोनी सिड़ाना, एसीएस हेल्थ अशोक बर्णवाल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और आयुक्त आयुष विभाग शोभित जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने का उद्देश्य दुनियाभर से आने वाले मरीजों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं आधुनिक तकनीक और किफायती इलाज मुहैया कराना है। भारत की चिकित्सा क्षमता को दुनिया के सामने लाने में विशेष रीजनल मेडिकल हब की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वर्तमान में भारत मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स और वेलनेस इंडेक्स में अच्छी स्थिति में है और हमें इसे और बेहतर करना है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनने से स्वास्थ्य सुविधाएं, देखभाल रिहैबिलिटेशन सेवाएं और आयुष सेवाएं बेहतर होगी। देश में मेडिकल सेवाएं के बेहतर होने से विदेशी मरीज विशेषकर मध्य एशिया, यूरोपी देश और अफ्रीका से इलाज के लिए मध्यप्रदेश में आएंगे, जिससे विदेशी मुद्रा आएगी और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश, देश में तेजी से आगे बढ़ता हुआ राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में लगातार अवार्ड प्राप्त कर रहा है। मध्यप्रदेश में बिजली का उत्पादन भी सरप्लस हो रहा है और मध्यप्रदेश दूसरे राज्यों को भी बिजली दे रहे है। ताप्ती-पार्वती, केन, बेतवा आदि नदियों से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहे है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमें एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ आयुर्वेद एवं अन्य भारतीय चिकित्सा को भी बढ़ाने की आवश्यकता है। देहदान और अंगदान के क्षेत्र में जिस तरह का कार्य आज तमिलनाडू, महाराष्ट्र और तेलंगाना प्रदेश में हो रहा है, उस स्तर का कार्य मध्यप्रदेश में भी करने की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा का तेजी से विस्तार हुआ है और इसका लाभ मध्यप्रदेश को भी मिला है। टीयर-2 और टीयर-3 सिटी में वेलनेस सेंटर तेजी बढ़ने लगे हैं। आम आदमी की पेइंग केपेसिटी बढ़ी है। शुक्ल ने कहा कि भारत आज जीडीपी में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। शुक्ल ने कहा कि हमारे स्वास्थ्य का खराब होने का एक बड़ा कारण दूषित पेयजल है। बेहतर होगा कि हम खेती किसानी में रासायनिक उर्वरकों की बजाय गौमूत्र-गोबर खाद् का इस्तेमाल करें, इससे हमारी धरती सुधरेगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि एक समय था कि जब आर्गन ट्रांसप्लांट के लिये हम मुंबई जाते थे, लेकिन अब यह कार्य इंदौर में हो रहा है। एसीएस हेल्थ बर्णवाल ने कहा कि आज की वर्कशॉप में हेल्थ, होटल, टूरिज्म आदि क्षेत्रों से आये प्रतिनिधियों के अपेक्षा से अधिक सुझाव आये है और अब इस पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। हमें एक कमेटी बनानी होगी जो और आगामी तीन महिनों के भीतर रीजनल मेडिकल हब का फाइनल ड्रॉफ्ट बना सकें। इस कार्य में सभी को सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में अपार संभावनाएं है। इस दृष्टि से इंदौर शहर में अच्छा कार्य हो रहा है। इंदौर के ही चोइथराम अस्पताल में सर्जरी का लाइन डेमों बच्चों को दिखाया जाता है। इंदौर में एयर एम्बुलेंस की बेहतर सुविधा है। बुरहानपुर के शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में अच्छा कार्य हो रहा है। वर्कशॉप में अरबिंदों अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. विनोद भंडारी ने मेडिकल इंटीग्रेटेड पर बात की। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डी.के. शर्मा ने मेडिकल टूरिज्म को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जोड़ने की बात की। वर्कशॉप में अंगदान, फार्मेसी इंड्रस्टी, इंटरनल टूरिज्म, स्किल डेवलपमेंट, नी रीप्लेसमेंट, क्वालिटी हेल्थ एजुकेशन, ग्लोबल हेल्थ इंश्यूरेंस आदि विषयों पर भी चर्चा हुई। वर्कशॉप में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हासानी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया, डॉ. अशोक यादव सहित अनूप हजेला ने भी अपने विचार रखें। वर्कशॉप में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला एवं उपस्थित प्रतिनिधियों ने एमवाय परिसर में बनने जा रहे आधुनिक जी-प्लस-8 भवन का थ्रीडी प्रजेंटेशन का अवलोकन किया। बताया गया आधुनिक सुविधाओं से लेस इस शासकीय अस्पताल में 1610 बेड होंगे साथ ही मल्टी लेवल पार्किंग होगा।  

सूरजपुर : जनगणना 2027 – 13 अप्रैल से प्रारंभ होगा प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण

सूरजपुर जनगणना 2027 के प्रथम चरण – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) – की तैयारी के अंतर्गत जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार जिले में 13 अप्रैल से प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जायेगा। जारी दिशानिर्देशों के अनुसार यह प्रशिक्षण 25 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना है। तीन दिवसीय बैच प्रशिक्षण:- दो फील्ड ट्रेनर्स की जोड़ी द्वारा 40 से 45 प्रतिभागियों के बैचों में 03 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण से पूर्व सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का पंजीयन सीएमएमएस पोर्टल (census.gov.in) पर किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान एचएलओ निर्देश पुस्तिकाएँ, पीपीटी प्रस्तुतियाँ एवं लघु शिक्षण वीडियो हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रशिक्षण की निगरानी सीएमएमएस डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी।      कलेक्टर एस. जयवर्धन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को निर्धारित समय-सीमा में सफलतापूर्वक पूर्ण कराया जाने हेतु चार्ज अधिकारियों को दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिये।   

डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से 220 बिस्तर अस्पताल में मातृ सेवाओं को मिली नई मजबूती

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले के 220 बिस्तर अस्पताल मनेंद्रगढ़ के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। निजी कारणों से अवकाश पर चल रही वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कुमार ने पुनः अपना कार्यभार संभाल लिया है। उनकी वापसी से अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नया विस्तार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। डॉ. रश्मि कुमार के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ अब फिर से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को मिलेगा। अपने पूर्व कार्यकाल में उन्होंने जटिल प्रसव और स्त्री रोग से जुड़े मामलों का सफलतापूर्वक उपचार कर मरीजों का भरोसा जीता था, जिससे अस्पताल की सेवाओं पर विश्वास और मजबूत हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से प्रसूति सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा। अब सामान्य प्रसव के साथ-साथ जटिल मामलों का भी बेहतर इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगा, जिससे मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने भी उनकी वापसी पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर को कम करने और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने भी डॉ. रश्मि कुमार की वापसी का स्वागत किया है। अस्पताल में लगातार सुविधाओं के विस्तार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, और उनकी पुनः तैनाती से इस दिशा में और सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र का छोटा सा गांव धोवाताल आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर उभर रहा है। जहां कई स्थानों पर गौठान योजनाएं निष्क्रिय हैं, वहीं इस गांव की 60 महिलाओं ने गौठान को किराए पर लेकर उसे आजीविका के सशक्त केंद्र में बदल दिया है। लगभग 150 घरों और 510 की आबादी वाले इस गांव में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिखी है। पांच समूहों ने संभाली जिम्मेदारी गांव में पांच महिला समूह मिलकर विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। बजरंगबली समूह बकरी पालन, सिद्धबाबा समूह मुर्गी पालन, महिला सशक्तिकरण समूह किराना दुकान, सीता महिला समूह बहुआयामी गतिविधियों (सुअर, बटेर व मछली पालन) तथा दुर्गा महिला समूह किराना व मनिहारी दुकान संचालित कर रहे हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। सहायता राशि को बनाया निवेश महिलाओं को क्लस्टर स्तर से मिली 60-60 हजार रुपये की सहायता राशि को खर्च करने के बजाय व्यवसाय में निवेश किया गया। आज उनके उत्पाद स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश तक पहुंच रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं। पलायन पर लगी रोक इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव गांव में पलायन रुकने के रूप में सामने आया है। जो युवा पहले रोजगार की तलाश में रायपुर, गुजरात और मेरठ जैसे शहरों की ओर जाते थे, अब उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। NRLM से मिली दिशा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिले मार्गदर्शन और सहयोग ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। समूह की महिलाओं का कहना है कि अब पशुपालन और दुकान संचालन से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। युवाओं को मिला स्थानीय रोजगार गांव के युवाओं ने बताया कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही काम मिलने से आय के साथ संतोष भी मिल रहा है। प्रशासन ने सराहा पहल ग्राम सरपंच गोकुल प्रसाद परस्ते ने बताया कि गौठान आधारित गतिविधियों से गांव में आर्थिक समृद्धि आई है और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। जनपद भरतपुर के अधिकारियों ने भी धोवाताल मॉडल को प्रेरणादायक बताया है। प्रेरणादायक बना धोवाताल धोवाताल की यह पहल दर्शाती है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

आत्मानंद स्कूल में एडमिशन की शुरुआत: सीमित सीटों पर लॉटरी से मिलेगा मौका

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मनेंद्रगढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित इस विद्यालय में इच्छुक छात्र-छात्राएं अब निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार प्रवेश हेतु आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जो 5 मई 2026 को शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी। अभ्यर्थी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए अभिभावक CGSchool Portal के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विद्यालय द्वारा जारी सीटों के विवरण के अनुसार कक्षा 1वीं में 50 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं कक्षा 3वीं, 4वीं और 5वीं में 1-1 सीट, कक्षा 7वीं में 2 सीटें तथा कक्षा 8वीं में 6 सीटें रिक्त हैं। इसके अलावा कक्षा 11वीं में कॉमर्स, जीव विज्ञान और गणित संकायों में 5-5 सीटें निर्धारित की गई हैं। सभी कक्षाओं में बालक एवं बालिकाओं के लिए समान रूप से प्रवेश की सुविधा उपलब्ध रहेगी। विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कक्षा में उपलब्ध सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पात्र अभ्यर्थियों का चयन पारदर्शी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसकी सूचना अभ्यर्थियों को पूर्व में ही दे दी जाएगी। अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करने की दिशा में यह पहल अहम मानी जा रही है।

विकास के मार्ग पर श्रमिकों का योगदान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से बढ़ी उम्मीदें

रायपुर : विकास की नींव रखने वाले हाथों का सम्मान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से खिले श्रमिकों के चेहरे रायपुर  जगदलपुर के स्थानीय वीर सावरकर भवन में  निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विकास की रीढ़ कहे जाने वाले श्रमिकों का न केवल सम्मान किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस सम्मेलन में समूचे जिले के सुदूर अंचलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी उत्साहजनक उपस्थिति से सराबोर नजर आया।        कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद बस्तर महेश कश्यप और नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में श्रमिकों को राष्ट्र का असली निर्माता बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। कश्यप ने शासन द्वारा श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न 31 योजनाओं की जानकारी और अन्य सुरक्षा योजनाओं के लाभ पर जोर देते हुए कहा कि हर श्रमिक का पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि शासन की मदद उन तक बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस अवसर पर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।        मंच से जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत सहायता राशि के चेक वितरित किए गए, जिसे पाकर श्रमिकों के चेहरों पर संतोष और खुशी के भाव स्पष्ट नजर आए। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मौके पर ही समाधान की रही, जहाँ श्रम विभाग द्वारा लगाए गए विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से नए श्रमिकों का तत्काल पंजीयन किया गया। श्रम पदाधिकारी भूपेंद्र नायक ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य बस्तर के उन मेहनतकश लोगों को विभागीय योजनाओं के दायरे में लाना है जो अब तक जागरूकता के अभाव में लाभ से वंचित थे। इस सार्थक प्रयास से बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी अब सरकार की कल्याणकारी नीतियों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

हाईकोर्ट का सख्त रुख: ध्वनि प्रदूषण पर जागरूकता जरूरी, डीजे की तेज आवाज है खतरे की घंटी

जबलपुर  ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों तथा डीजे की तेज आवाज से लोगों को हार्ट अटैक आने और ब्लड प्रेशर बढ़ने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि कान फाड़ देने वाली डीजे की तेज आवाज जनसमस्या बन गई है। कोलाहल एक्ट के तहत निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि इस समस्या के समाधान के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है। नाना देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (उम्र 83 वर्ष), सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आर.पी. श्रीवास्तव (उम्र 100 वर्ष) सहित अन्य चार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि शादियों व धार्मिक आयोजनों के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाए जाते हैं। मानव शरीर 75 डेसिबल तक की आवाज की तीव्रता सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आती है। डीजे की आवाज की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है, जिससे लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से मौत के मामले भी सामने आए हैं। इसके अलावा लोग बहरेपन और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश जवाब में इसे जनसमस्या बताते हुए कहा गया कि कोलाहल एक्ट के तहत जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है, जिसका प्रतिकूल असर मानव जीवन पर पड़ रहा है और लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डीजे की तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से कई लोगों की मौत भी हुई है। केवल जुर्माने की कार्रवाई से इस समस्या पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता।