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प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध : मंत्री राजपूत

भोपाल. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्त संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2864 स्थानों पर जांच की गई, 4283 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 736 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल] डीजल] पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस के संबंध में प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। खाद्य मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माईग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शन,सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वसहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाईपलाईन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे 1.5 लाख घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस हेतु सभी सीजीडी संस्थाएं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगायें, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिकारी उपस्थित रहें। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाईन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाईन डालकर कनेक्शन का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशनुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाईन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइपलाइन बिछाने की ROU स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाईपलाईन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाईपलाईन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये। कालाबाजारी के विरूद्ध कार्यवाही सीजीडी संस्थाओं को घरेलू एवं व्यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये सीजीडी संस्थाओं के कन्ट्रोल रूम नं. निम्नानुसार प्रदाय किये गये है – अवंतिका गैस लिमिटेड – इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर (9424098887) गैल गैस लिमिटेड – देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) नवेरिया गैस लिमिटेड – धार (07292-223311) थिंक गैस – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107) IOCL – गुना (9425991090), मउगंज, रीवा(9424836488), अशोकनगर(9425119522), मुरैना(7223982333) BPCL – महैर, सतना, शहडोल(9424738607), सीधी, सिंगरौली(9424341954) गुजरात गैस लि. – रतलाम (7412230292) प्रदेश के उक्त शहरों में जिन स्थानों से पाईपलाईन गई है, उस पाईपलाईन के आस-पास के घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते है। प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।  

चित्रकूट में 500 साल से पुरानी पांडुलिपियों का हुआ खुलासा, उर्दू में है ‘कालिया मर्दन’ का अनोखा विवरण

चित्रकूट  मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगरी चित्रकूट में किए गए सर्वेक्षण के दौरान 500 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान की गई है। इन पांडुलिपियों का अध्ययन वर्तमान में तुलसी शोध संस्थान में किया जा रहा है। यह खोज भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  देवनागरी, संस्कृत और उर्दू में मिली पांडुलिपियां इस सर्वेक्षण में मिली पांडुलिपियों की खास बात यह है कि ये विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं। अधिकांश पांडुलिपियां देवनागरी और संस्कृत में हैं, जबकि कुछ दुर्लभ पांडुलिपियां उर्दू भाषा में भी प्राप्त हुई हैं यह विविधता भारतीय समाज में भाषाई और सांस्कृतिक समन्वय की गहरी परंपरा को दर्शाती है। उर्दू पांडुलिपि में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन का वर्णन इन पांडुलिपियों में एक अत्यंत रोचक तथ्य सामने आया है। उर्दू लिपि में लिखी एक पांडुलिपि में श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन, जिसे 'कालिया मर्दन' कहा जाता है, का चित्रण किया गया है। आमतौर पर यह प्रसंग संस्कृत, ब्रजभाषा या अवधी साहित्य में मिलता है, लेकिन उर्दू में इसका वर्णन भारतीय सांस्कृतिक समावेश का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। तुलसीदास जी और भगवान गणेश का भी उल्लेख उर्दू पांडुलिपि में गोस्वामी तुलसीदास का चित्र और उल्लेख भी दर्ज है।  साथ ही भगवान गणेश का भी चित्रण इसमें देखने को मिला है। यह पांडुलिपि धार्मिक ग्रंथ “पोथी सतनाम” का हिस्सा बताई जा रही है। इसे ऐतिहासिक रूप से मुंशी नवल किशोर प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया था। इसमें मंगलाचरण, दोहा और चौपाई जैसे पारंपरिक काव्य रूप भी सम्मिलित हैं।  रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से जुड़ी सामग्री चित्रकूट में हुई खोज में तुलसी शोध संस्थान के प्रबंधक ओम प्रकाश पटेल ने बताया कि चित्रकूट क्षेत्र में रामचरितमानस की हस्तलिखित पांडुलिपियों के अंश भी सुरक्षित मिले हैं और इसके साथ ही रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से संबंधित देवनागरी लिपि में लिखी गई पांडुलिपियां भी आज तक संरक्षित हैं। हालांकि, इनमें से कई पांडुलिपियां आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं और उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण व अध्ययन किया जा रहा है। 350 पांडुलिपियां संस्थान में जमा, विशेषज्ञ कर रहे अध्ययन मध्यप्रदेश संस्कृत विभाग द्वारा लगभग 350 पांडुलिपियां चित्रकूट स्थित तुलसी शोध संस्थान में जमा कराई गई हैं। यहां विशेषज्ञ इनकी भाषा, लिपि, विषयवस्तु और ऐतिहासिक महत्व को समझने में जुटे हैं। इन पांडुलिपियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धर्म और साहित्य के कई अनछुए पहलुओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।   ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चल रहा राष्ट्रीय अभियान केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण का अभियान 16 मार्च से प्रारंभ किया गया है। यह अभियान तीन माह तक चलेगा। अभियान से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया कि इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को पुनः प्रकाश में लाना और उसे आम जनमानस तक पहुंचाना है। इन तीन चरणों में होगा संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य सरकार द्वारा इस मिशन को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में पांडुलिपियों की खोज, पहचान व दस्तावेजीकरण का कार्य होगा। दूसरे चरण में एकत्रित पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। वहीं, तीसरे चरण में विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन, संरक्षण और अर्थ स्पष्ट करने कार्य पूर्ण होगा। तीन माह बाद इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।   आम नागरिक भी कर सकते हैं योगदान संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम’ एप भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से आम लोग भी इस अभियान में भाग ले सकते हैं। जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियां हैं, वे एप पर लॉगिन कर उनकी फोटो, भाषा और स्थान की जानकारी अपलोड कर सकते हैं। भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत उदाहरण उर्दू भाषा में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन, तुलसीदास जी और भगवान गणेश का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल एक भाषा या परंपरा तक सीमित नहीं है। यह विविधता और एकता का अद्भुत संगम है, जो देश की साझा विरासत को दर्शाता है। डिजिटल रूप में भी कर सकते है इस्तेमाल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय दिल्ली में पदस्थ चंद्रमौली त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने पहले चरण में ज्ञान भारतम एप को आम जनमानस के लिए खोल दिया है जिनके पास भी ऐसी पांडुलिपियां हैं, वह एप में लाागिन कर लोकेशन बताते हुए उसकी भाषा बताकर फोटो अपलोड कर सकता है और आसानी से इस एप के जरिए ज्ञान को सहेजने का काम कर सकते है और इससे लोगों को एक नया तरीका भी उपलब्ध हो गया है का  

इंदौर चिड़ियाघर में अंडर वॉटर टनल, 35 करोड़ में बनेगा दुबई और सिंगापुर जैसे मॉडल का निर्माण

इंदौर  इंदौर के चिड़ियाघर में पर्यटकों को जल्द ही समुद्र की गहराई का अहसास होगा क्योंकि यहां 35 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक एक्वेरियम का निर्माण किया जा रहा है। प्रशासन ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले चार से पांच महीनों के भीतर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चिड़ियाघर परिसर में ही दो एकड़ की भूमि आरक्षित कर दी गई है।  समुद्री मछलियों के लिए बनेगा विशेष खारा पानी इस एक्वेरियम में सैकड़ों प्रजातियों की समुद्री मछलियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इन मछलियों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए चिड़ियाघर में ही कृत्रिम रूप से समुद्री यानी खारा पानी तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार जल को खारा बनाने की इस प्रक्रिया में लगभग 45 दिन का समय लगेगा। यहां दुर्लभ प्रजातियों को रखने की योजना है ताकि दर्शकों को एक नया अनुभव मिल सके। दुबई और सिंगापुर जैसी अंडर वॉटर टनल इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाली अंडर वॉटर टनल होगी जिसे सिंगापुर और दुबई के प्रसिद्ध एक्वेरियम की तर्ज पर बनाया जाएगा। यह ग्लास टनल 20 से 50 मीटर लंबी होगी जिसमें चलते हुए पर्यटक अपने चारों ओर मछलियों को तैरते हुए देख सकेंगे। इसके साथ ही यहां एक आधुनिक टॉवर का निर्माण भी किया जाएगा और साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए स्कूबा डाइविंग की विशेष व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। पीपीपी मॉडल पर आधारित निर्माण प्रक्रिया चिड़ियाघर प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया ने जानकारी दी कि इस पूरे प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि मानसून के बाद इसका निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया जाए। रविवार जैसे व्यस्त दिनों में जब चिड़ियाघर में दर्शकों की संख्या 25 हजार तक पहुंच जाती है, तब भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए एक्वेरियम का डिजाइन तैयार किया गया है। बच्चों के मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए भी यहां अलग से विशेष जोन बनाए जाएंगे। 

नर्मदा में बोटिंग करते वक्त चट्टानों पर आराम करता तेंदुआ, पर्यटकों में अफरातफरी

ओंकारेश्वर  जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में  सुबह बोटिंग कर रहे पर्यटकों को नर्मदा किनारे चट्टानों पर तेंदुआ दिखाई दिए जाने के बाद हलचल मच गई। ओंकारेश्वर बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में काजलरानी माता मंदिर के पास बोटिंग कर रहे श्रद्धालु और पर्यटकों की नजर चट्टानों के बीच आराम कर रहे तेंदुए पर पड़ी। यह दृश्य देखते ही लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में इसे कैद करना शुरू कर दिया।  खास बात यह रही कि लोगों की मौजूदगी और हलचल के बावजूद तेंदुआ पूरी तरह शांत नजर आया। वह कभी चट्टानों पर बैठा रहा तो कभी इधर-उधर टहलता दिखाई दिया, मानो उसे आसपास की गतिविधियों से कोई फर्क ही न पड़ रहा हो। इस घटना के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें लोग काफी दिलचस्पी से देख रहे हैं। बता दें कि ओंकारेश्वर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों और शांत वातावरण के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। यहां नर्मदा बैकवॉटर में बोटिंग का अनुभव पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहता है। ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी ने इस जगह के रोमांच को और बढ़ा दिया है। आमतौर पर तेंदुए को देखकर डर का माहौल बन जाता है लेकिन यहां मौजूद लोग इस अनोखे दृश्य को देखकर उत्साहित नजर आए और उन्होंने इसे यादगार पल के रूप में कैद किया।

एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं रिजल्ट जल्द ही, यहां पाएं Direct Link सबसे पहले

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MPBSE) से 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा दे चुके छात्र अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। इस साल तकरीबन 16 लाख से अधिक छात्रों ने एमपी बोर्ड की परीक्षा दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 15 से 20 अप्रैल के बीच जारी किया जाएगा। दोनों कक्षा का रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर जारी होगा। एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026 के लिए 10वीं-12वीं कक्षा के छात्रों का रिजल्ट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। बोर्ड किसी भी समय एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026 जारी होने की तारीख और समय की घोषणा कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमपी बोर्ड का रिजल्ट 15 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 के बीच घोषित हो सकता है। बोर्ड दोपहर 1 बजे या 4 बजे के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिजल्ट घोषित करता है। इसके तुरंत बाद आधिकारिक वेबसाइट mpbse.nic.in और mpresults.nic.in पर एमपी बोर्ड के रिजल्ट का लिंक एक्टिव कर दिया जाता है। एमपी बोर्ड रिजल्ट कैसे चेक करें?     एमपी बोर्ड 10वीं, 12वीं रिजल्ट 2026 चेक करने के लिए मध्य प्रदेश बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट mpresults.nic.in या mpbse.nic.in पर विजिट करें।     ‘HSC (10th)’ या ‘HSSC (12th)’ रिजल्ट 2026 के लिंक पर क्लिक करें।     9 अंकों का अपना रोल नंबर और 8 अंकों का एप्लीकेशन नंबर डालें।     ‘Submit’ बटन दबाएं और मार्कशीट आपकी स्क्रीन पर होगी। फेल या कम नंबर हैं तो क्या करें? एमपी बोर्ड के छात्र अगर रिजल्ट से संतुष्ट नहीं हैं या एक-दो विषय में पास नहीं हो पाए हैं, तब भी आपको घबराने की जरूरत नहीं है। अपना साल बचाने के लिए अब भी आपके पास 2 विकल्प रहेंगे। एमपी सरकार की यह मशहूर ‘रुक जाना नहीं’ योजना के जरिए बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले छात्र इसी साल दोबारा परीक्षा देकर अपना साल बचा सकते हैं। 1 या 2 विषयों में फेल स्टूडेंट्स एमपी बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षा देकर अपनी मार्कशीट सुधार सकते हैं। नंबर से असंतुष्ट हैं, तो कॉपी दोबारा चेक कराएं रिजल्ट के 15 दिनों के अंदर ‘MP Online’ पोर्टल पर जाकर ‘री-टोटलिंग’ या ‘कॉपी की फोटोकॉपी’ के लिए आवेदन करें। इसके लिए प्रति विषय एक निर्धारित शुल्क (लगभग 200-500 रुपये) देना होता है। एमपी बोर्ड सप्लीमेंट्री/कंपार्टमेंट परीक्षा कब होगी? एमपी बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षाएं आमतौर पर जून 2026 में आयोजित की जाती हैं। इसके फॉर्म रिजल्ट आने के एक हफ्ते बाद ही भरना शुरू हो जाते हैं। एमपी बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षा का परिणाम जुलाई के अंत तक आ जाता है। इससे छात्रों के लिए कॉलेज में प्रवेश ले पाना आसान हो जाता है। SMS से भी देख सकेंगे स्कोर इंटरनेट न होने पर छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. इसके लिए MPBSE10 रोल नंबर या MPBSE12 रोल नंबर लिखकर 56263 पर भेजना होगा. रिजल्ट आपके मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश हो जाएगा.    स्ट्रीम-वाइज नतीजे होंगे जारी कक्षा 12वीं के साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों स्ट्रीम के नतीजे एक साथ पोर्टल पर लाइव होंगे. इस बार छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है. तकनीकी खामियों से बचने के लिए बोर्ड ने अतिरिक्त सर्वर की व्यवस्था की है.   स्कोरकार्ड कैसे डाउनलोड करें? 10वीं के छात्र रिजल्ट जारी होते ही mpbse.nic.in पर जाएं. 'Exam Results' टैब पर क्लिक करें और अपना रोल नंबर दर्ज करें. मार्कशीट की प्रोविजनल कॉपी तुरंत डाउनलोड की जा सकेगी. ओरिजिनल मार्कशीट स्कूल से प्राप्त करनी होगी.    टॉपर्स को मिलेगा सम्मान मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना के तहत इस बार भी टॉपर्स को प्रोत्साहित किया जाएगा. बोर्ड सूत्रों का कहना है कि 10वीं और 12वीं की स्टेट मेरिट लिस्ट तैयार हो चुकी है. परिणाम घोषित होने के बाद टॉप-10 छात्रों की सूची सार्वजनिक की जाएगी.

अमरनाथ यात्रा के लिए 15 अप्रैल से एडवांस रजिस्ट्रेशन शुरू, 554 बैंक ब्रांच में होगी सुविधा उपलब्ध

 भोपाल  अमरनाथ यात्रा के लिए इस साल एडवांस रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए देशभर में 554 निर्धारित बैंक शाखाओं में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रा के लिए पंजीकरण और परमिट जारी करने की प्रक्रिया ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर की जाएगी। हालांकि, प्रत्येक बैंक शाखा में हर मार्ग के लिए प्रतिदिन एक तय कोटा निर्धारित किया गया है। जिसे पूरा होने के बाद उस दिन के लिए रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। केवल 13 से 70 वर्ष की आयु के श्रद्धालु ही इस पवित्र यात्रा के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा, छह सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को यात्रा करने की अनुमति नहीं दी गई है। कब से कब तक चलेगी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी। कुल 38 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र गुफा में भगवान शिव के हिमलिंग के दर्शन करने पहुंचते हैं। इस बार भी यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार, यात्रा में भाग लेने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही है। ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन आवेदन Shri Amarnathji Yatra app और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के जरिए OTP सत्यापन अनिवार्य होगा। साथ ही, 8 अप्रैल 2026 या उसके बाद जारी किया गया अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (CHC) और पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करना होगा। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से देशभर की अधिकृत बैंक शाखाओं में शुरू होगा। प्रति व्यक्ति 150 रुपये शुल्क लिया जाएगा। अमरनाथ यात्रा के प्रमुख मार्ग अमरनाथ यात्रा दो मुख्य मार्गों से पूरी की जाती है। पहलगाम मार्ग: लगभग 46 किलोमीटर लंबा पारंपरिक रास्ता, जो अपेक्षाकृत आसान और धीरे-धीरे चढ़ाई वाला है। बालटाल मार्ग: लगभग 14 किलोमीटर लंबा लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता, जो कम समय में यात्रा पूरी करने वालों के लिए उपयुक्त है। सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा विभिन्न पड़ावों पर टेंट, आवास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम और मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) लागू रहेंगी। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि वे कठिन मौसम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी के साथ यात्रा करें। ऊंचाई और ठंड को देखते हुए उचित कपड़े, दवाइयां और शारीरिक फिटनेस बेहद जरूरी है। 550 से ज्यादा बैंक शाखाओं में होगा रजिस्ट्रेशन श्रद्धालु 15 अप्रैल से देशभर की 550 से अधिक अधिकृत बैंक शाखाओं में जाकर अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण करा सकते हैं. इससे लोगों को रजिस्ट्रेशन कराने में आसानी होगी. इस व्यवस्था का मकसद यह है कि देश के अलग‑अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को पंजीकरण कराने में आसानी हो और वे अपने घर के पास ही रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकें।  पहले आओ, पहले पाओ श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने साफ किया है कि रजिस्ट्रेशन पूरी तरह पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगा. यात्रा के हर रास्ते के लिए रोज की एक तय संख्या होगी यानी हर दिन सीमित संख्या में ही यात्रियों को अनुमति दी जाएगी. इससे भीड़ को कंट्रोल करने और यात्रा को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।  कब से कब तक चलेगी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी. इस यात्रा के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र गुफा में भगवान शिव के हिमलिंग के दर्शन करने पहुंचते हैं. इस बार भी यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार, यात्रा में भाग लेने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल, 2026 से शुरू जो जाएगी। 

पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन में 900 किलो खराब खाद्य सामग्री जब्त की

नई दिल्ली दिल्ली के कपासहेड़ा इलाके में पुलिस ने एक्सपायर्ड खाद्य और कॉस्मेटिक उत्पादों के बड़े गोरखधंधे का खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में खराब और एक्सपायर्ड सामान बरामद किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान 34 वर्षीय अब्दुल मन्नान खान उर्फ मोनू के रूप में हुई है, जो बिजवासन का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ग्राहकों को सस्ते दामों पर एक्सपायर्ड या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके सामान बेचता था, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता था. पुलिस को 8 अप्रैल को इस मामले की सूचना मिली थी, जिसके बाद एक टीम ने स्टिंग ऑपरेशन चलाया. पुलिस ने डिकॉय ग्राहक बनाकर दुकान से सामान खरीदा. जांच में यह सामान एक्सपायर्ड पाया गया, जिसके बाद दुकान पर छापा मारा गया. कपासहेड़ा में पुलिस का स्टिंग ऑपरेशन छापेमारी के दौरान पुलिस को करीब 900 किलो एक्सपायर्ड किराना सामान मिला, जिसमें आटा, सूजी, पोहा, रवा, मसाले, पीनट बटर और बेबी फूड सप्लीमेंट शामिल थे. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट भी बरामद किए गए. पुलिस ने बताया कि मौके पर करीब 2000 किलो डेयरी उत्पाद जैसे दही और पनीर भी पाए गए, जिन्हें बेहद खराब और अस्वच्छ स्थिति में रखा गया था. फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में इन सभी डेयरी उत्पादों को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया. एक्सपायर्ड सामान का खुलासा जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग जगहों से एक्सपायर्ड, खराब या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके सामान बेहद सस्ते दामों पर खरीदता था और फिर उन्हें ग्राहकों को बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाता था. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है.

ईवी पर PUC चालान बना विवाद, पुलिस की गलती सामने आई

 नागौर कार या मोटरसाइकल का चालान कटना कोई नई बात नहीं, हर दिन अलग-अलग वजहों को लेकर कई चालान कटते हैं। लेकिन राजस्थान के नागौर जिले से चालान कटने का एक अचंभित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां ट्रैफिक पुलिस ने कथित तौर पर एक इलेक्ट्रिक कार का प्रदूषण का चालान काट दिया। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना सात अप्रैल को जिला मुख्यालय क्षेत्र में कृषि मंडी तिराहे पर हुई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। अब मामले की जांच शुरू हो गई है। 1700 रुपये का चालान किया अधिकारियों के अनुसार, यातायात पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक ने इलेक्ट्रिक कार को रोका और 1700 रुपये का चालान जारी कर दिया, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र न होने और कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी होने का हवाला दिया गया। वीडियो में चालक यह तर्क देता दिखता है कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के लिए PUC सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती, लेकिन पुलिसकर्मी कथित तौर पर यह कहता नजर आता है कि चालान जारी होगा, क्योंकि पीओएस मशीन में पीयूसी प्रदर्शित नहीं हो रहा। 'चालान गलती से जारी हुआ प्रतीत होता है' जिला परिवहन अधिकारी अवधेश चौधरी ने कहा कि ईवी के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होती और संबंधित पुलिसकर्मी को इस विषय को ठीक से समझना चाहिए था। यातायात प्रभारी शिवदेव राम ने कहा कि चालान गलती से जारी हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि मामले की पड़ताल की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश के विद्यार्थियों ने देखी उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं जीवन शैली

भोपाल.  "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" कार्यक्रम अंतर्गत मध्यप्रदेश एवं नागालैंड के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक समन्वय को बनाने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक्सपोज़र विज़िट” का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने एक से 7 अप्रैल के बीच नागालैंड का भ्रमण किया। इससे प्रदेश के विद्यार्थियों को उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं जीवनशैली को देखा। अब तक इस कार्यक्रम में 4 दलों को नागालैंड भ्रमण के लिए भेजा जा चुका है। विभाग द्वारा पहली बार इस तरह की पहल शुरू की गई है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह देखा गया। एक्सपोजर विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने नागालैंड के प्रमुख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण किया। इसमें कोहिमा, खोनोमा (भारत का प्रथम ग्रीन विलेज), किसामा विलेज (हॉर्नबिल महोत्सव स्थल), कोहिमा वॉर सेमेट्री (द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक) एवं कैथेड्रल चर्च शामिल हैं। खोनोमा में विद्यार्थियों ने पारंपरिक जनजातीय जीवन एवं सांस्कृतिक संरचनाओं का अवलोकन भी किया। एक्सपोजर विजिट में जोत्सोमा स्थित शैक्षणिक संस्थानों एवं छात्रावासों का भी भ्रमण किया। स्थानीय छात्रों के साथ संवाद कर उनकी शिक्षा प्रणाली एवं दैनिक जीवन को समझा। साथ ही शिक्षकों द्वारा वहां प्रचलित शैक्षणिक नवाचारों एवं ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का अध्ययन किया गया। सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत दोनों राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा लोक नृत्य, संगीत एवं पारंपरिक प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों द्वारा ‘कर्मा नृत्य’ की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अतिरिक्त दीमापुर स्थित नागालैंड विज्ञान केंद्र, बांस संसाधन केंद्र एवं कचरी अवशेषों का भी अवलोकन किया गया, जिससे विद्यार्थियों को क्षेत्रीय इतिहास एवं विज्ञान संबंधी जानकारी प्राप्त हुई। यात्रा का समापन नई दिल्ली स्थित इंडिया गेट एवं नेशनल वॉर मेमोरियल के भ्रमण के साथ हुआ।  

पति की हत्या के बाद पत्नी का ‘कातिल’ ड्रामा, रोते-रोते वायरल हुआ वीडियो

धार  मध्य प्रदेश के धार में एक पत्नी ने इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की तरह अपने पति की हत्या कर दी. दो दिन पहले हुई घटना में पुलिस के सामने रो-रोकर बताया कि घर में लुटेरे घुसे थे जिन्होंने घटना को अंजाम दिया. लेकिन महिला की चालाकी पुलिस के सामने ज्यादा देर तक नहीं चली और पुलिस की सख्ती के बाद रटे तोते की तरह उसने सब उगल दिया. प्रेमी की खातिर उसने पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी. पुलिस ने आरोपी पत्नी प्रियंका और उसके प्रेमी कमलेश को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि सह-आरोपी सुरेन्द्र अभी फरार है. मामले में रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं।  परिजन ने लगाए प्रियंका पर गंभीर आरोप इधर अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद मृतक की मां लक्ष्मीबाई और बहन ज्योति सहित रिश्तेदार सदमें में हैं. मृतक की मां और बहन ने बताया कि, ''प्रियंका और देव कृष्ण का विवाह लगभग 11 वर्ष पूर्व हुआ था. बाद में 2021 में प्रियंका का गौना कर ससुराल ले आए थे, लेकिन शुरू से ही प्रियंका का व्यवहार पति और घरवालों के प्रति ठीक नहीं था. वह बात-बात पर विवाद करती थी और परेशान करती थी. साथ ही घर के लोगों से कई बार हाथापाई भी करती थी. यहां तक की प्रियंका द्वारा दिनभर मोबाइल फोन चलाने के चलते भी कई बार विवाद हुआ. वह रंग को लेकर भी भैया को ताने मारती थी।  रंग को लेकर मारती थी ताना पूछताछ में प्रियंका ने पुलिस को बताया कि, पति का रंग काला था, इसलिए वह मुझे अच्छा नहीं लगता था. पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि, प्रियंका और देवकृष्ण का 2011 में बाल विवाह हुआ था. लेकिन विदाई नहीं हुई थी. इसी बीच प्रियंका की जिंदगी में 2017 में कमलेश की एंट्री हो गई, कमलेश उसका दूर का जीजा बताया जा रहा है. जिसके बाद से वह पति देवकृष्ण से दूरी बनाने लगी थी. चूंकि शादी पहले हो चुकी थी, इसलिए 21 में ससुराल गौना कर प्रियंका को घर ले आए थे. लेकिन ससुराल वालों के साथ उसका व्यवहार अच्छा नहीं रहा।  गालियां देती थी, केस में फंसाने की धमकी भी देती थी देवकृष्ण की मां लक्ष्मीबाई ने बताया कि, ''रात में पड़ोसन का फोन आया था. कमरे में जाकर देखा तो बेटा औंधा पड़ा था. पलटाने पर वह खून से सना मिला. घर का दरवाजा खुला था और हमलावर भाग चुके थे.'' मां ने बताया कि, ''प्रियंका उन्हें बेटे से दूर रखती थी और धमकाती थी. वह गालियां देती थी और केस में फंसाने की धमकी भी देती थी. कमलेश से उसका अफेयर लंबे समय से चल रहा था और इसी वजह से घर में लगातार विवाद होता था।  धार में राजा राघुवंशी की तरह हत्याकांड धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के गोंदीखेड़ा चारण में हुए सनसनीखेज लूट और हत्या के मामले का पुलिस ने चंद घंटों में खुलासा कर दिया है. इस पूरे हत्याकांड की साजिश मृतक की पत्नी प्रियंका ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर रची थी. पुलिस ने पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार हैं. 7 अप्रैल की रात मिर्ची व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित की हत्या को पहले लूट की वारदात बताया गया था. पत्नी प्रियंका पुरोहित ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर पति की हत्या कर दी और उसे बंधक बनाकर सोने-चांदी के आभूषण व नगदी लूटकर फरार हो गए।  हत्या के बाद गढ़ी लूट की कहानी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर विशेष टीमों का गठन किया. एसपी मयंक अवस्थी के निर्देशन में एएसपी पारुल बेलापुरकर और एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार के मार्गदर्शन में पुलिस ने जांच शुरू की. घटनास्थल पर फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट, डॉग स्क्वॉड और साइबर टीम की मदद से बारीकी से जांच की गई. जांच के दौरान पुलिस को कई अहम तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य मिले, जिससे संदेह की दिशा मृतक की पत्नी प्रियंका की ओर गया. पूछताछ के दौरान प्रियंका ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह किया, लेकिन सख्ती और मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।  सुपारी देकर करवाई पति की हत्या प्रियंका ने बताया कि, ''उसका राजगढ़ निवासी कमलेश पुरोहित से लंबे समय से प्रेम संबंध था और पति से परेशान होकर उसने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची. आरोपी कमलेश ने अपने साथी सुरेन्द्र भाटी निवासी छडावद को 1 लाख रुपये देकर देवकृष्ण की हत्या करवाई और पूरी घटना को लूट का रूप देने की योजना बनाई गई. हत्या के बाद घर में सामान बिखेरकर लूट की झूठी कहानी रची गई, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।  एसपी मयंक अवस्थी ने बताया कि, ''शुरू में लूट की कहानी सामने आई थी, लेकिन जांच में पत्नी पर शक हुआ. पूछताछ में प्रियंका ने कबूल किया कि कमलेश के साथ मिलकर उसने हत्या की साजिश रची थी. योजना के तहत दरवाजा खुला छोड़ा गया. कमलेश और सुरेंद्र घर में घुसे और सो रहे देवकृष्ण की धारदार हथियार से हत्या कर दी. बाद में इशारा मिलने पर प्रियंका ने 10-15 मिनट बाद शोर मचाया. पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।  मृतक की मां ने बताया कि, ''प्रियंका तीन-चार दिन ही ससुराल में रहती थी और विवाद करके मायके चले जाती थी. अब घटना के बाद मां और बहन आरोपियों के खिलाफ फांसी की सजा की मांग कर न्याय दिलाने की बात कर रही हैं. फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है, इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।  वो बयान, जिसने प्रियंका पर शक पैदा किया पुलिस जांच में प्रियंका के बयान विरोधाभासी पाए गए. उसने घुसपैठ के अलग-अलग तरीके बताए, जो सही नहीं थे. घटनास्थल की स्थिति भी उसकी कहानी से मेल नहीं खाती थी. जांच में सामने आया कि कमलेश शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है. वह ढाबा चलाता था, प्रियंका से उसके संबंध 2017 से थे. साजिश के तहत सुरेंद्र को एक लाख रुपए में हत्या का जिम्मा दिया गया था. 50 … Read more