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पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन में 900 किलो खराब खाद्य सामग्री जब्त की

नई दिल्ली दिल्ली के कपासहेड़ा इलाके में पुलिस ने एक्सपायर्ड खाद्य और कॉस्मेटिक उत्पादों के बड़े गोरखधंधे का खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में खराब और एक्सपायर्ड सामान बरामद किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान 34 वर्षीय अब्दुल मन्नान खान उर्फ मोनू के रूप में हुई है, जो बिजवासन का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ग्राहकों को सस्ते दामों पर एक्सपायर्ड या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके सामान बेचता था, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता था. पुलिस को 8 अप्रैल को इस मामले की सूचना मिली थी, जिसके बाद एक टीम ने स्टिंग ऑपरेशन चलाया. पुलिस ने डिकॉय ग्राहक बनाकर दुकान से सामान खरीदा. जांच में यह सामान एक्सपायर्ड पाया गया, जिसके बाद दुकान पर छापा मारा गया. कपासहेड़ा में पुलिस का स्टिंग ऑपरेशन छापेमारी के दौरान पुलिस को करीब 900 किलो एक्सपायर्ड किराना सामान मिला, जिसमें आटा, सूजी, पोहा, रवा, मसाले, पीनट बटर और बेबी फूड सप्लीमेंट शामिल थे. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट भी बरामद किए गए. पुलिस ने बताया कि मौके पर करीब 2000 किलो डेयरी उत्पाद जैसे दही और पनीर भी पाए गए, जिन्हें बेहद खराब और अस्वच्छ स्थिति में रखा गया था. फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में इन सभी डेयरी उत्पादों को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया. एक्सपायर्ड सामान का खुलासा जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग जगहों से एक्सपायर्ड, खराब या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके सामान बेहद सस्ते दामों पर खरीदता था और फिर उन्हें ग्राहकों को बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाता था. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है.

ईवी पर PUC चालान बना विवाद, पुलिस की गलती सामने आई

 नागौर कार या मोटरसाइकल का चालान कटना कोई नई बात नहीं, हर दिन अलग-अलग वजहों को लेकर कई चालान कटते हैं। लेकिन राजस्थान के नागौर जिले से चालान कटने का एक अचंभित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां ट्रैफिक पुलिस ने कथित तौर पर एक इलेक्ट्रिक कार का प्रदूषण का चालान काट दिया। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना सात अप्रैल को जिला मुख्यालय क्षेत्र में कृषि मंडी तिराहे पर हुई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। अब मामले की जांच शुरू हो गई है। 1700 रुपये का चालान किया अधिकारियों के अनुसार, यातायात पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक ने इलेक्ट्रिक कार को रोका और 1700 रुपये का चालान जारी कर दिया, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र न होने और कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी होने का हवाला दिया गया। वीडियो में चालक यह तर्क देता दिखता है कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के लिए PUC सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती, लेकिन पुलिसकर्मी कथित तौर पर यह कहता नजर आता है कि चालान जारी होगा, क्योंकि पीओएस मशीन में पीयूसी प्रदर्शित नहीं हो रहा। 'चालान गलती से जारी हुआ प्रतीत होता है' जिला परिवहन अधिकारी अवधेश चौधरी ने कहा कि ईवी के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होती और संबंधित पुलिसकर्मी को इस विषय को ठीक से समझना चाहिए था। यातायात प्रभारी शिवदेव राम ने कहा कि चालान गलती से जारी हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि मामले की पड़ताल की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश के विद्यार्थियों ने देखी उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं जीवन शैली

भोपाल.  "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" कार्यक्रम अंतर्गत मध्यप्रदेश एवं नागालैंड के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक समन्वय को बनाने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक्सपोज़र विज़िट” का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने एक से 7 अप्रैल के बीच नागालैंड का भ्रमण किया। इससे प्रदेश के विद्यार्थियों को उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं जीवनशैली को देखा। अब तक इस कार्यक्रम में 4 दलों को नागालैंड भ्रमण के लिए भेजा जा चुका है। विभाग द्वारा पहली बार इस तरह की पहल शुरू की गई है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह देखा गया। एक्सपोजर विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने नागालैंड के प्रमुख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण किया। इसमें कोहिमा, खोनोमा (भारत का प्रथम ग्रीन विलेज), किसामा विलेज (हॉर्नबिल महोत्सव स्थल), कोहिमा वॉर सेमेट्री (द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक) एवं कैथेड्रल चर्च शामिल हैं। खोनोमा में विद्यार्थियों ने पारंपरिक जनजातीय जीवन एवं सांस्कृतिक संरचनाओं का अवलोकन भी किया। एक्सपोजर विजिट में जोत्सोमा स्थित शैक्षणिक संस्थानों एवं छात्रावासों का भी भ्रमण किया। स्थानीय छात्रों के साथ संवाद कर उनकी शिक्षा प्रणाली एवं दैनिक जीवन को समझा। साथ ही शिक्षकों द्वारा वहां प्रचलित शैक्षणिक नवाचारों एवं ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का अध्ययन किया गया। सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत दोनों राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा लोक नृत्य, संगीत एवं पारंपरिक प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों द्वारा ‘कर्मा नृत्य’ की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अतिरिक्त दीमापुर स्थित नागालैंड विज्ञान केंद्र, बांस संसाधन केंद्र एवं कचरी अवशेषों का भी अवलोकन किया गया, जिससे विद्यार्थियों को क्षेत्रीय इतिहास एवं विज्ञान संबंधी जानकारी प्राप्त हुई। यात्रा का समापन नई दिल्ली स्थित इंडिया गेट एवं नेशनल वॉर मेमोरियल के भ्रमण के साथ हुआ।  

पति की हत्या के बाद पत्नी का ‘कातिल’ ड्रामा, रोते-रोते वायरल हुआ वीडियो

धार  मध्य प्रदेश के धार में एक पत्नी ने इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की तरह अपने पति की हत्या कर दी. दो दिन पहले हुई घटना में पुलिस के सामने रो-रोकर बताया कि घर में लुटेरे घुसे थे जिन्होंने घटना को अंजाम दिया. लेकिन महिला की चालाकी पुलिस के सामने ज्यादा देर तक नहीं चली और पुलिस की सख्ती के बाद रटे तोते की तरह उसने सब उगल दिया. प्रेमी की खातिर उसने पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी. पुलिस ने आरोपी पत्नी प्रियंका और उसके प्रेमी कमलेश को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि सह-आरोपी सुरेन्द्र अभी फरार है. मामले में रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं।  परिजन ने लगाए प्रियंका पर गंभीर आरोप इधर अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद मृतक की मां लक्ष्मीबाई और बहन ज्योति सहित रिश्तेदार सदमें में हैं. मृतक की मां और बहन ने बताया कि, ''प्रियंका और देव कृष्ण का विवाह लगभग 11 वर्ष पूर्व हुआ था. बाद में 2021 में प्रियंका का गौना कर ससुराल ले आए थे, लेकिन शुरू से ही प्रियंका का व्यवहार पति और घरवालों के प्रति ठीक नहीं था. वह बात-बात पर विवाद करती थी और परेशान करती थी. साथ ही घर के लोगों से कई बार हाथापाई भी करती थी. यहां तक की प्रियंका द्वारा दिनभर मोबाइल फोन चलाने के चलते भी कई बार विवाद हुआ. वह रंग को लेकर भी भैया को ताने मारती थी।  रंग को लेकर मारती थी ताना पूछताछ में प्रियंका ने पुलिस को बताया कि, पति का रंग काला था, इसलिए वह मुझे अच्छा नहीं लगता था. पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि, प्रियंका और देवकृष्ण का 2011 में बाल विवाह हुआ था. लेकिन विदाई नहीं हुई थी. इसी बीच प्रियंका की जिंदगी में 2017 में कमलेश की एंट्री हो गई, कमलेश उसका दूर का जीजा बताया जा रहा है. जिसके बाद से वह पति देवकृष्ण से दूरी बनाने लगी थी. चूंकि शादी पहले हो चुकी थी, इसलिए 21 में ससुराल गौना कर प्रियंका को घर ले आए थे. लेकिन ससुराल वालों के साथ उसका व्यवहार अच्छा नहीं रहा।  गालियां देती थी, केस में फंसाने की धमकी भी देती थी देवकृष्ण की मां लक्ष्मीबाई ने बताया कि, ''रात में पड़ोसन का फोन आया था. कमरे में जाकर देखा तो बेटा औंधा पड़ा था. पलटाने पर वह खून से सना मिला. घर का दरवाजा खुला था और हमलावर भाग चुके थे.'' मां ने बताया कि, ''प्रियंका उन्हें बेटे से दूर रखती थी और धमकाती थी. वह गालियां देती थी और केस में फंसाने की धमकी भी देती थी. कमलेश से उसका अफेयर लंबे समय से चल रहा था और इसी वजह से घर में लगातार विवाद होता था।  धार में राजा राघुवंशी की तरह हत्याकांड धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के गोंदीखेड़ा चारण में हुए सनसनीखेज लूट और हत्या के मामले का पुलिस ने चंद घंटों में खुलासा कर दिया है. इस पूरे हत्याकांड की साजिश मृतक की पत्नी प्रियंका ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर रची थी. पुलिस ने पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार हैं. 7 अप्रैल की रात मिर्ची व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित की हत्या को पहले लूट की वारदात बताया गया था. पत्नी प्रियंका पुरोहित ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर पति की हत्या कर दी और उसे बंधक बनाकर सोने-चांदी के आभूषण व नगदी लूटकर फरार हो गए।  हत्या के बाद गढ़ी लूट की कहानी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर विशेष टीमों का गठन किया. एसपी मयंक अवस्थी के निर्देशन में एएसपी पारुल बेलापुरकर और एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार के मार्गदर्शन में पुलिस ने जांच शुरू की. घटनास्थल पर फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट, डॉग स्क्वॉड और साइबर टीम की मदद से बारीकी से जांच की गई. जांच के दौरान पुलिस को कई अहम तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य मिले, जिससे संदेह की दिशा मृतक की पत्नी प्रियंका की ओर गया. पूछताछ के दौरान प्रियंका ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह किया, लेकिन सख्ती और मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।  सुपारी देकर करवाई पति की हत्या प्रियंका ने बताया कि, ''उसका राजगढ़ निवासी कमलेश पुरोहित से लंबे समय से प्रेम संबंध था और पति से परेशान होकर उसने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची. आरोपी कमलेश ने अपने साथी सुरेन्द्र भाटी निवासी छडावद को 1 लाख रुपये देकर देवकृष्ण की हत्या करवाई और पूरी घटना को लूट का रूप देने की योजना बनाई गई. हत्या के बाद घर में सामान बिखेरकर लूट की झूठी कहानी रची गई, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।  एसपी मयंक अवस्थी ने बताया कि, ''शुरू में लूट की कहानी सामने आई थी, लेकिन जांच में पत्नी पर शक हुआ. पूछताछ में प्रियंका ने कबूल किया कि कमलेश के साथ मिलकर उसने हत्या की साजिश रची थी. योजना के तहत दरवाजा खुला छोड़ा गया. कमलेश और सुरेंद्र घर में घुसे और सो रहे देवकृष्ण की धारदार हथियार से हत्या कर दी. बाद में इशारा मिलने पर प्रियंका ने 10-15 मिनट बाद शोर मचाया. पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।  मृतक की मां ने बताया कि, ''प्रियंका तीन-चार दिन ही ससुराल में रहती थी और विवाद करके मायके चले जाती थी. अब घटना के बाद मां और बहन आरोपियों के खिलाफ फांसी की सजा की मांग कर न्याय दिलाने की बात कर रही हैं. फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है, इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।  वो बयान, जिसने प्रियंका पर शक पैदा किया पुलिस जांच में प्रियंका के बयान विरोधाभासी पाए गए. उसने घुसपैठ के अलग-अलग तरीके बताए, जो सही नहीं थे. घटनास्थल की स्थिति भी उसकी कहानी से मेल नहीं खाती थी. जांच में सामने आया कि कमलेश शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है. वह ढाबा चलाता था, प्रियंका से उसके संबंध 2017 से थे. साजिश के तहत सुरेंद्र को एक लाख रुपए में हत्या का जिम्मा दिया गया था. 50 … Read more

2200 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट से गाजियाबाद बनेगा यूपी का इंटीग्रेटेड अर्बन हब

2200 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट से यूपी का प्रवेश द्वार गाजियाबाद बनेगा इंटीग्रेटेड अर्बन हब पश्चिमी यूपी को पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की सौगात, जल्द हो सकता है शिलान्यास विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम के चारो तरफ बसेगी एरोसिटी, बढ़ेगा पर्यटन व रोजगार आधुनिक शॉपिंग मॉल, रिटेल जोन, हाईटेक बिजनेस हब और बनेंगे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर बनेगा प्रमुख आकर्षण, स्पोर्ट्स एकेडमी, स्मार्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और ग्रीन स्पेस की रहेगी सुविधा लखनऊ उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार गाजियाबाद अब एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। करीब 2200 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम और एरोसिटी प्रोजेक्ट न केवल इस शहर की पहचान बदलने जा रहा है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सौगात मिलने जा रही है। इसके साथ ही यह क्षेत्र इतने बड़े स्तर के इंटीग्रेटेड अर्बन डेवलपमेंट मॉडल का हिस्सा बनेगा, जिससे गाजियाबाद प्रदेश का बड़ा पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा। इसके साथ ही यहां लाखों की संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से टर्निंग प्वाइंट साबित होंगे। सबसे अहम बात यह है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास जल्द ही होने की संभावना है, जिससे वर्षों से अटकी योजना अब जमीन पर उतरने के करीब पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन पर आधारित यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद को स्पोर्ट्स, टूरिज्म और हाईटेक अर्बन डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र बनाएगा। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर प्रमुख आकर्षण रहेगा। 417 एकड़ में खेल, व्यापार, पर्यटन और आधुनिक जीवनशैली का होगा समेकित विकास गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी नंद किशोर कलाल ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन (मोर्टी क्षेत्र) में प्रस्तावित इस योजना के तहत 37 एकड़ में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम विकसित किया जाएगा, जबकि इसके आसपास 380 एकड़ में लगभग 1800 करोड़ रुपये की लागत से एरोसिटी टाउनशिप बसाई जाएगी। दोनों को मिलाकर एक ऐसा इंटीग्रेटेड अर्बन हब तैयार किया जाएगा, जहां खेल, व्यापार, पर्यटन और आधुनिक जीवनशैली का समेकित विकास होगा। 2014-15 में बनी थी योजना, पहले की सरकार में नहीं हो सका कोई काम दरअसल, इस परियोजना की रूपरेखा 2014-15 में तैयार हुई थी, लेकिन लंबे समय तक यह आगे नहीं बढ़ सकी। उस दौर में विकास की गति अपेक्षित नहीं रही और गाजियाबाद को उसकी क्षमता के अनुरूप पहचान नहीं मिल पाई। पहले की सरकार के दौरान रही सुस्ती के कारण यह प्रोजेक्ट वर्षों तक ठहराव में रहा, लेकिन अब योगी सरकार में इसे प्राथमिकता में रखते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। पश्चिमी यूपी पहली बार अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों की करेगा मेजबानी करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं वाला होगा। इसमें करीब 30,000 से अधिक दर्शकों की क्षमता, आधुनिक मीडिया सेंटर और हाईटेक लाइटिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी, जो इसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएंगी। इस स्टेडियम के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पहली बार बड़े अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों की मेजबानी का अवसर मिलेगा। काम करने, रहने और मनोरंजन के लिए बनेगा संपूर्ण डेस्टिनेशन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी नंद किशोर कलाल ने बताया कि स्टेडियम के चारो ओर विकसित होने वाली एरोसिटी इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी ताकत होगी। इसमें बड़े होटल, लक्जरी रिजॉर्ट्स, आधुनिक शॉपिंग मॉल, रिटेल जोन, हाई-टेक बिजनेस हब, ऑफिस स्पेस और एंटरटेनमेंट सेंटर विकसित किए जाएंगे। एयरपोर्ट के नजदीक होने के कारण यह क्षेत्र देश-विदेश के पर्यटकों और निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बनेगा। यह परियोजना सिर्फ स्टेडियम या टाउनशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि एक नए अर्बन मॉडल के रूप में विकसित की जा रही है। इसमें स्पोर्ट्स एकेडमी, स्मार्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स, ग्रीन स्पेस और आउटडोर खेल सुविधाएं भी शामिल होंगी, जिससे यह क्षेत्र रहने, काम करने और मनोरंजन के लिए एक संपूर्ण डेस्टिनेशन बनेगा। होटल, रिटेल और सर्विस सेक्टर तक बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, बढ़ेगा निवेश गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) बोर्ड से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे यूपी क्रिकेट एसोसिएशन के साथ जॉइंट वेंचर मॉडल पर विकसित किया जाएगा। सभी सुविधाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है, ताकि यह प्रोजेक्ट भविष्य में निवेश और विकास का बड़ा केंद्र बन सके। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने से गाजियाबाद और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को व्यापक आर्थिक लाभ मिलेगा। निर्माण से लेकर होटल, रिटेल और सर्विस सेक्टर तक बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, निवेश बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना आने वाले समय में पश्चिमी यूपी के विकास की दिशा और गति दोनों तय करती नजर आएगी।

जल जीवन मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, 5 दिन की रिमांड की मांग

जयपुर जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ी कार्रवाई के तहत शुक्रवार को पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कोर्ट से उनकी 5 दिन की पुलिस रिमांड की मांग करने की तैयारी की है, ताकि मामले में गहन पूछताछ की जा सके। इस पूरे मामले की जांच एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में चल रही है। गिरफ्तारी के अगले दिन कोर्ट में पेशी एसीबी अधिकारियों के अनुसार, सुबोध अग्रवाल को एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ पहले से ही गिरफ्तारी वारंट जारी था। गुरुवार को उन्हें नई दिल्ली से हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया, जहां औपचारिक गिरफ्तारी की गई। शुक्रवार को मेडिकल प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। टेंडर घोटाले और पद के दुरुपयोग के आरोप जांच में सामने आया है कि पूर्व आईएएस अधिकारी पर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं। एसीबी का दावा है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर करीब 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। इस घोटाले में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। 10 गिरफ्तार, 3 आरोपी अभी भी फरार इस मामले में एसीबी पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। फरार आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इन आरोपियों को भी गिरफ्तार करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। 51 दिन की तलाश, 260 ठिकानों पर छापेमारी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी एसीबी के लिए आसान नहीं रही। उन्हें पकड़ने के लिए एजेंसी ने 51 दिनों तक लगातार अभियान चलाया। इस दौरान 18 टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने देशभर में 260 ठिकानों पर छापेमारी की। बावजूद इसके, अग्रवाल लगातार एजेंसियों से बचते रहे और फरारी के दौरान 10 से अधिक ठिकाने बदलते रहे। दिल्ली से मुंबई तक छिपने की कोशिश जांच के दौरान एसीबी को इनपुट मिले थे कि सुबोध अग्रवाल दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मुंबई में छिपते रहे। इन सभी स्थानों पर लगातार दबिश दी गई, लेकिन वे पकड़ में नहीं आए। आखिरकार जब एसीबी ने कोर्ट में संदिग्ध संपत्तियों की सूची पेश की और स्थायी वारंट जारी करवाए, साथ ही कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया, तो अगले ही दिन वे सामने आ गए। भगोड़ा घोषित, संपत्ति कुर्की की तैयारी एसीबी की कार्रवाई के तहत रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के साथ एसई मुकेश गोयल, जितेन्द्र शर्मा और निजी व्यक्ति संजीव गुप्ता को भी भगोड़ा घोषित किया गया था। हालांकि, सुबोध अग्रवाल अब गिरफ्त में आ चुके हैं, लेकिन बाकी तीन आरोपी अब भी फरार हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इन सभी की संदिग्ध संपत्तियों को चिह्नित कर कुर्क करने की प्रक्रिया जारी है। रिमांड मिलने पर बड़े खुलासों की उम्मीद एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यदि कोर्ट से रिमांड मिलती है तो पूछताछ के दौरान न केवल जेजेएम घोटाले की परतें खोली जाएंगी, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि फरारी के दौरान सुबोध अग्रवाल को किन लोगों ने मदद पहुंचाई। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी। लुक आउट नोटिस जारी, विदेश भागने का खतरा गौरतलब है कि एसीबी ने फरार आरोपियों के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी करवा दिए थे। एजेंसी का मानना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें फिलहाल, सभी की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यदि एसीबी को रिमांड मिलती है, तो आने वाले दिनों में जेजेएम घोटाले से जुड़े कई अहम राज खुलने की संभावना है।

पान महासम्मेलन से विपक्षी एकजुटता का शक्ति प्रदर्शन

पटना 12 अप्रैल को कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी का पटना दौरा इस हलचल को और तेज करने वाला है. नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है और इसी बीच राहुल गांधी का आना महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी बिसात का हिस्सा माना जा रहा है. पान महासम्मेलन के मंच से सजेगी चुनावी बिसात इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के अध्यक्ष आईपी गुप्ता के अनुसार, राहुल गांधी 12 अप्रैल को पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में आयोजित होने वाले “पान महासम्मेलन” का उद्घाटन करेंगे. कहने को तो यह पान व्यवसाय से जुड़े समाज का एक सम्मेलन है, लेकिन जिस तरह से इसमें बड़े सियासी दिग्गजों का जमावड़ा होने वाला है, उसने साफ कर दिया है कि असली मकसद 2024 के चुनावों से पहले विपक्षी एकजुटता की धार को और तेज करना है. पटना की सड़कों पर राहुल गांधी की मौजूदगी उस वक्त होगी जब सत्ता पक्ष (एनडीए) नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन कर रहा होगा. तेजस्वी और दीपंकर के साथ ‘पावर शो’ की तैयारी इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी हाईलाइट राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का एक साथ मंच साझा करना होगा. नीतीश कुमार के संभावित विदाई के बाद पैदा हुए ‘पॉलिटिकल वैक्यूम’ को भरने के लिए विपक्ष इस मौके का भरपूर इस्तेमाल करना चाहता है. यह एक ऐसा मंच होगा जहां से महागठबंधन के नेता न केवल सामाजिक संदेश देंगे, बल्कि राज्य में बदलते समीकरणों के बीच अपनी मजबूती का अहसास भी कराएंगे. नीतीश की विदाई और विपक्ष की नई रणनीति बिहार में इस वक्त एनडीए के भीतर नए मुखिया को लेकर खींचतान और मंथन का दौर जारी है. ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा कांग्रेस और राजद के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम करेगा. नीतीश कुमार के राज्यसभा की राह पकड़ने के बाद बिहार की राजनीति में जो नया समीकरण उभर रहा है, उसमें राहुल और तेजस्वी की जुगलबंदी काफी निर्णायक साबित हो सकती है. अब सबकी निगाहें 12 अप्रैल के उस संबोधन पर टिकी हैं, जो बापू सभागार से गूंजेगा और आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता की दिशा तय करेगा.

पोषण पखवाड़ा अंतर्गत स्कूलों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन

भोपाल.  स्कूल शिक्षा विभाग केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक “8वां पोषण पखवाड़ा” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास” थीम पर प्रदेश भर में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। पोषण पखवाड़े के दौरान स्कूलों में पोषण सत्र, रेसिपी प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता, कार्यशालाएं तथा पोषण रैली जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों और आमजन में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा इस संबंध में सभी कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह ने बताया कि पोषण पखवाड़े के प्रभावी संचालन के लिए जिला, विकासखंड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी स्तरों पर समन्वय के साथ कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। पोषण पखवाड़ा अभियान अंतर्गत होंगी ये गतिविधियां कक्षा 6 वीं से 12वीं तक सभी स्कूलों में शनिवार को पोषण सत्र का आयोजन। प्राथमिक/माध्यमिक स्कूलों के सहयोग से स्थानीय पोषण रैली। कक्षा 9 से 11 तक घर पर तैयार रैसिपी की प्रतियोगिता/प्रदर्शनी स्थानीय खिलौने के प्रोत्साहन के लिए स्कूलों में कार्यशाला का आयोजन। को-लोकेशन एवं अन्य नजदीकी आंगनवाड़ी केन्द्र में खेल तथा नृत्य दिवस आयोजन। कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के माध्यम से उनके जन्म तिथि सहित विशेष तिथियों में नजदीकी आंगनवाड़ी केन्द्र में तिथि भोज आयोजन। स्थानीय खाद्य व्यवस्था के प्रोत्साहन के लिए पोषण मेला आयोजन।  

मनोहर थाना में जनसंवाद यात्रा, 126 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

झालावाड़ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje ने गुरुवार को मनोहर थाना कस्बे में जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान एक भावुक बयान देकर सभी को चौंका दिया। लोगों की समस्याएं सुनते हुए उन्होंने कहा “मेरा तो खुद का चला गया, मैं अपने आपको नहीं बचा सकी, तो तुम्हारे लिए क्या करूं?” उनके इस बयान ने सभा में मौजूद लोगों के बीच गहरी संवेदना पैदा कर दी। जनता की समस्याओं पर खुलकर बोलीं जनसंवाद के दौरान स्थानीय लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचे। किसी ने मकान नहीं मिलने की शिकायत की, तो किसी ने पेंशन और मुआवजे में देरी का मुद्दा उठाया। इस पर राजे ने कहा कि जीवन में ऐसी परेशानियां आती रहती हैं और हर परिवार इन हालातों से गुजरता है। निजी दर्द का किया जिक्र राजे ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा लोग कहते हैं आपका तो सब ठीक है, हमें बचा लीजिए… लेकिन मैं खुद को नहीं बचा सकी, तो आपको कैसे बचाऊं?” उनके इस बयान ने कार्यक्रम को भावनात्मक मोड़ दे दिया और लोगों के साथ उनका जुड़ाव और गहरा नजर आया। जनसंवाद यात्रा के चौथे चरण की शुरुआत इस दौरान Dushyant Singh भी उनके साथ मौजूद रहे। मां-बेटे की जोड़ी ने ‘जनसंवाद यात्रा’ के चौथे चरण की शुरुआत कामखेड़ा बालाजी धाम से की। यात्रा शुरू करने से पहले दोनों नेताओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। यात्रा को बताया चुनौतीपूर्ण सभा को संबोधित करते हुए राजे ने कहा कि यह यात्रा आसान नहीं है, लेकिन जनता का प्यार ही उनकी ताकत है। उन्होंने बताया कि पहले तीन चरणों में भी लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला और उम्मीद से ज्यादा भीड़ जुटी। दुष्यंत सिंह की तारीफ राजे ने अपने बेटे की तारीफ करते हुए कहा इन्होंने तय किया कि ये अकेले चलेंगे, क्योंकि इन्हें पता है कि ये लोगों के लिए काम करते हैं।” उन्होंने कहा कि लोग उन्हें अपना मानते हैं, यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। 35 साल का रिश्ता बताया राजे ने झालावाड़ और बारां की जनता के साथ अपने 35 साल पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि परिवार जैसा है। उन्होंने कहा कि उनके सामने कई पीढ़ियां बड़ी हो चुकी हैं। दुष्यंत सिंह का आभार संदेश दुष्यंत सिंह ने जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि सफर में धूप और मुश्किलें जरूर आती हैं, लेकिन लोगों का प्यार उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जनता के साथ से क्षेत्र का विकास और तेज होगा। 126 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान 126 करोड़ रुपए की लागत वाली 10 सिंचाई परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। इससे क्षेत्र में कृषि और पानी की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई। महिलाओं को योजनाओं का लाभ ‘लखपति दीदी योजना’ के तहत महिलाओं को टैबलेट वितरित किए गए और कस्टम हायरिंग योजना के तहत एक महिला को ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। स्थानीय नेताओं की मौजूदगी कार्यक्रम में मनोहर थाना विधायक गोविंद रानीपुरिया, डाग विधायक कालूराम मेघवाल, जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा और पूर्व जिला अध्यक्ष संजय जैन सहित कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भावनाओं और राजनीति का संगम जनसंवाद यात्रा का यह चरण जहां राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा, वहीं वसुंधरा राजे के भावुक बयान ने इसे मानवीय संवेदनाओं से भी जोड़ दिया। उनके शब्दों ने यह दिखाया कि राजनीति के मंच पर भी व्यक्तिगत अनुभव लोगों के दिलों को छू जाते हैं।

भूमि सुधार विभाग का बड़ा फैसला, ई-मापी होगी अब ऑनलाइन

पटना बिहार सरकार के राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने जमीन की मापी को लेकर नई व्यवस्था शुरू कर दी है. इस बदलाव का मकसद पूरी प्रक्रिया को साफ-सुथरा, तय समय में पूरा होने वाला और टेक्नोलॉजी के जरिए आसान बनाना है. विभाग ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी. क्या बदल जायेगा नई व्यवस्था के तहत जिन जमीनों पर कोई विवाद नहीं है, उनकी मापी अब सिर्फ 7 दिनों के अंदर पूरी कर दी जाएगी. इससे लोगों को पहले की तरह लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और काम तेजी से होगा. जिन जमीनों को लेकर विवाद चल रहा है, उनकी मापी के लिए भी सरकार ने समय तय कर दिया है. ऐसे मामलों में मापी का काम 11 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि पुराने और लंबित केस जल्दी निपट सकें. मापी के बाद रिपोर्ट ऑनलाइन डालना जरूरी जमीन की मापी पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट को 14 दिनों के अंदर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी कर दिया गया है. इससे रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा और जरूरत पड़ने पर लोग इसे आसानी से देख सकेंगे. अब ई-मापी के लिए आवेदन भी ऑनलाइन किया जा सकता है. इसके लिए लोगों को बिहार भूमि पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा. इससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी. सरकार के इस कदम से कम होंगे विवाद सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन से जुड़े कामों में पारदर्शिता बढ़ेगी. विवाद कम होंगे और लोगों को समय पर सेवाएं मिलेंगी. इसे डिजिटल बिहार और बेहतर प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.