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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जाखड़ ने CM मान को लिखा पत्र, किसान बीमा योजना लागू करने की मांग, 13 अप्रैल को विशेष सत्र

चंडीगढ़  भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक लेटर लिखा है। लेटर में किसानों के नुकसान की भरपाई के बारे में लिखा गया है। जाखड़ ने कहा है कि अगर सूबे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना होती तो किसानों के नुकसान की भरपाई हो जाएगी।  जाखड़ ने सीएम को लिखा है कि 13 अप्रैल को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने का प्रस्ताव लाए ताकि यह प्रदेश में लागू हो सके। जाखड़ ने लिखा है कि इससे किसानों को फायदा हो जाएगा। जाखड़ ने आगे लिखा कि 2023 और 2025 में पंजाब के किसानों को बाढ़ के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा। हर साल गड़ेमारी व मौसम के कारण फसलों को नुकसान होता है। ऐसे में फसल बीमा योजना बेहद जरूरी है। आपकी सरकार बीमा योजना ला रही थी वही ले आओ जाखड़ ने कहा कि आपने 26 मार्च 2023 को कहा था कि आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र की फसल बीमा योजना की जगह अपनी फसल बीमा योजना लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार केंद्र की बीमा योजना को लागू नहीं करना चाहती तो अपनी ही बीमा योजना ले आओ ताकि किसानों को इन आपदाओं से होने वाले नुकसान का मुआवजा मिल सके। तीन साल में किसानों को हजारों करोड़ का नुकसान सुनील जाखड़ ने कहा कि तीन साल में पंजाब के किसानों का हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो गया हे। अगर आप तीन साल पहले इस योजना को लागू कर देते तो किसानों को उनका मुआवजा मिल जाता और सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ भी नहीं आता। उन्होंने कहा कि अब भी देरी नहीं हुई है अगर आप किसानों के हितैषी हैं तो 13 अप्रैल को फसल बीमा योजना को लागू करने का प्रस्ताव पास करवाएं। कानून व्यवस्था पर उठाया सवाल जाखड़ ने अपने बयान में कहा है कि पंजाब में कानून व्यवस्था पहले ही खराब है। इंडस्ट्री पलायन कर चुकी है। अब खेतीबाड़ी पंजाब की अर्थव्यवस्था का मूल आधार है। अगर किसानों को भी इस तरह नुकसान होता रहा तो पंजाब और खतरनाक आर्थिक संकट में फंस जाएगा। इसलिए सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को तुरंत लागू करे।

एलडीए की सबसे सस्ती स्कीम, वरुण नगर में घर बनाने का सपना होगा सच और जून में शुरू होगी बुकिंग

लखनऊ   एलडीए की ओर से अब तक की सबसे सस्ती जमीन वाली आवासीय योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जेठ के किसी बड़े मंगल पर लॉन्च कर सकते हैं। वरुण नगर योजना हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने पर हजरतगंज से सीधे जुड़ जाएगी। एलडीए की जो चार नई आवासीय योजनाएं आ रही हैं उनमें वरुण नगर योजना में जमीन सबसे सस्ती होगी। आगरा एक्सप्रेस-वे के पास प्रस्तावित इस योजना में जमीन की कीमत अधिकतम 2500 रुपये प्रति वर्गफीट होगी। एलडीए की अन्य तीन प्रस्तावित आवासीय योजनाओं में किसी में भी जमीन की कीमत इतनी कम नहीं होगी। इस योजना का भूमि पूजन में जेठ में पड़ने वाले किसी एक बड़े मंगल पर मुख्यमंत्री के हाथों से कराने की योजना पर काम चल रहा है। राजधानी में एलडीए की चार नई आवासीय योजनाएं आने वाली हैं। इसमें सीतापुर रोड और आईआईएम रोड पर नैमिष नगर, सुल्तानपुर रोड पर आईटी सिटी और वेलनेस सिटी तथा आगरा एक्सप्रेसवे पर वरुण नगर योजना शामिल है। आईटी और बेलनेस सिटी के लिए जमीन लैंडपूलिंग से ली जा रही है जबकि नैमिष नगर और वरुण नगर में सहमति के आधार पर बैनामा से खरीदी जा रही है। जानिए, किस योजना में जमीन का कितना रेट है प्रस्तावित इनमें आईटी सिटी में जमीन का रेट करीब 4000 रुपये प्रति वर्गफीट प्रस्तावित है। वेलनेस सिटी में यह रेट 4200 रुपये प्रति वर्गफीट रहने का अनुमान है। नैमिष नगर में जमीन का रेट करीब 3000 रुपये प्रति वर्गफीट प्रस्तावित है जबकि वरुण नगर में यह रेट करीब 2500 रुपये प्रस्तावित है। ऐसे में चारों योजनाओं में यह सबसे सस्ती योजना होगी। बोते वर्ष मोहान रोड पर एलडीए ने अनंत नगर योजना लॉन्च की थी, वहां पर जमीन का रेट 3900 रुपये प्रति वर्गफीट रखा गया था। इसलिए यहां कम होगी कीमत जानकारों ने बताया कि चारों योजनाओं में सबसे महंगी जमीन वेलनेस सिटी की है। उसके बाद आईटी सिटी और फिर नैमिष नगर और उसके बाद वरुण नगर की है। यहां पर एलडीए की जमीन का रेट करीब 70 लाख रुपये बीघा पड़ रहा है जबकि नैमिष नगर में यही रेट करीब 1.25 करोड़ रुपये बीघा पड़ रहा है। आईटी सिटी और वेलनेस सिटी में जमीन लैंडपूलिंग से ली जा रही है। ऐसे में यहां पर एलडीए को जमीन खरीदनी नहीं पड़ रही है मगर यहां पर अभी जो रेट है वह 1.25 करोड़ से लेकर 1.50 करोड़ रुपये बीघा चल रहा है। एलडीए लैंडपूलिंग के तहत जमीन देने वालों को रुपये के बदले 25 प्रतिशत विकसित जमीन दे रहा है। तब 20 मिनट में पहुंचेंगे हजरतगंज योजना से जुड़े एक जानकार ने बताया कि हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने की योजना है। इसके बनने के बाद वरुण नगर से कालिदास चौक (हजरतगंज क्षेत्र) तक का सफर महज 20 मिनट में पूरा हो जाएगा। ऐसे में यह योजना एक तरह से गोमती नगर के टक्कर की हो जाएगी क्योंकि यहां पर 300 एकड़ का पार्क और 150 एकड़ की एक झील भी विकसित की जा रही है। हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने की योजना कई वर्ष से चल रही है मगर अभी अमल में नहीं आ सकी है। बसपा सरकार में लालबहादुर शास्त्री मार्ग और सदर तक कुछ हिस्से पर रोड बनी है। कालिदास चौक से पारा के मोहान रोड तक हैदर कैनाल करीब नौ किमी लंबाई में है। इस पर एलिवेटेड रोड बनने से शहर के करीब दस लाख से अधिक की आबादी का आवागमन आसान हो जाएगा। ये है योजना की पूरी डिटेल – 2664 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होगी वरुण नगर योजना – 2100 प्लॉट निकाले जाएंगे – कैलाश और काशी, दो खंड में बंटी होगी योजना योजना में शामिल गांव: भलिया, आदमपुर, इंदवारा, बहरु, जलियामऊ, मदारपुर, इब्राहिमगंज, नकटौरा, गहलवारा, तेजकृष्ण खेड़ा, रेवरी व सकरा। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार का कहना है कि वरुण नगर योजना का भूमि पूजन जून माह में बड़े मंगल के दिन कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इस योजना में लोगों को जमीन काफी किफायती दर पर मिलेगी जिससे वह खुद के आशियाने का सपना पूरा कर सकेंगे।  

CM की अध्यक्षता में पेसा-एफआरए समन्वय के लिए बनेगा टास्क फोर्स, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की घोषणा

आधारभूत जीवन के लिए कॉमन्स महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पेसा-एफआरए समन्वय के लिए जल्द होगा टास्क फोर्स का गठन- प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा विशेषज्ञों द्वारा स्टेट कॉमन्स कन्विनिंग चर्चा के बाद जो तथ्य निकल कर आएंगे वे राज्य के नीति निर्माण में होंगे सहायक जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका-बोरा दो दिवसीय छत्तीसगढ़ कॉमन्स कन्विनिंग कार्यशाला का शुभारंभ रायपुर आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि कॉमन्स पर जनजातिय समुदायों के अटूट विश्वास उनके सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका है। उन्होंने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की बात करें तो स्थानीय लोग नीति-कार्यान्वयन में सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलाव के लिए सरकार एक समर्पित टास्क फोर्स बनाने की प्रक्रिया में है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य पूरे राज्य में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के मध्य संतुलित समन्वय सुनिश्चित करना है। कॉमन्स सम्मेलन संवाद में सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों को केंद्र में रखा गया था, जिसकी शुरुआत पद्मपुरस्कार से सम्मानित जागेश्वर यादव और पांडी राम मंडावी तथा गौर मारिया नृत्य कलाकार सुलक्ष्मी सोरी जैसे सम्मानित अतिथियों के प्रारंभिक उद्बोधनों से हुई।           साझा प्राकृतिक संसाधनों (कॉमन्स) के सुशासन और सामुदायिक संरक्षण पर केंद्रित दो दिवसीय “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग” का शुभारंभ आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने किया। कार्यशाला नवा रायपुर ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सेक्टर-24, में आयोजित हो रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के अंतर्गत विभिन्न साझेदार संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। कल 10 अप्रैल को मुख्य सचिव विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद में शामिल होंगे। वहीं समापन सत्र में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम शामिल होंगे। जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका           बोरा ने कहा कि इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय विरासत के बीच गहरे जुड़ाव को पहचानते हुए, एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही यह प्रोजेक्ट सामने आएगा और यह स्टूडियो पारंपरिक लोक गीतों और स्वदेशी वाद्य यंत्रों की धुन, दस्तावेज़ीकरण, पहचान और कॉपीराइट सुरक्षा के लिए समर्पित होगा। इन साझा संसाधनों के संरक्षण के संबंध में, बोरा ने कहा कि वैश्वीकरण और आधुनिक जीवन शैली जैसे चुनौतियों के बीच संतुलित तरीका अपनाते हुए, साझा ज्ञान का विकास कैसे करें और अपनी आकांक्षाओं, विरासत और भविष्य को कैसे बेहतर बनाएँ। राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका     आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा कि यह सम्मेलन संवाद के लिए एक विशाल मंच साबित हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें विभिन्न संगठनों के नीति विशेषज्ञ, पंचायतों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और समुदाय के समर्पित सदस्य शामिल हैं। यह विविध समूह छत्तीसगढ़ में कॉमन्स (साझा संसाधन) के रूप में वर्गीकृत 70 लाख एकड़ ज़मीन पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस ज़मीन में जंगल, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं। कॉमन्स कन्विनिंग के पहले दिन, विशेषज्ञों ने राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

सीएम मान ने केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात की, पंजाब के गेहूं खरीद और मुआवजा मुद्दों पर की चर्चा

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में गेहूं की खरीद व्यवस्था, किसानों को मुआवजा, लंबित राशि और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में खाद्य सुरक्षा और पेट्रोलियम से जुड़े विषयों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पुराने गेहूं के भंडार को तेजी से उठाने के लिए अतिरिक्त विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है, जिससे भंडारण की समस्या कम होगी। आज पंजाब का दौरा कर सकती है केंद्रीय टीम बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की और केंद्र से अपील की कि फसल नुकसान का आकलन करने के लिए तुरंत एक टीम पंजाब भेजी जाए। संभावना जताई जा रही है कि केंद्र की टीम आज ही राज्य का दौरा कर सकती है। ऋण सीमा पर ब्याज दर में बढ़ोतरी से राज्य पर बोझ वित्तीय मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नकद ऋण सीमा पर ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी राज्य पर भारी बोझ डालती है। उन्होंने बताया कि केवल 0.005 प्रतिशत की वृद्धि से ही लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण विकास कोष की लगभग 9000 करोड़ रुपये की लंबित राशि का मुद्दा उठाया और इसे किस्तों में जारी करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में विचाराधीन है, लेकिन राज्य सरकार इसे वापस लेने पर भी विचार कर सकती है। इन दोनों मुद्दों पर केंद्र की तरफ से आश्वासन दिया गया है। आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी की मांग का समर्थन मुख्यमंत्री ने आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वे किसानों और मंडियों के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। मंडियों में काम करने वाले मजदूरों, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से आने वाले श्रमिकों से जुड़े मुद्दों और भविष्य निधि से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई, जिसे केंद्रीय मंत्री ने जायज बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात दोहराई और स्पष्ट किया कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लुंड्रा में 280 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और शिलान्यास

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के लुंड्रा में 280 करोड़ से अधिक के कार्यों का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ने सरगुजा जिले के लुंड्रा  में   280 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन में बड़ी संख्या में उपस्थित अन्नदाता किसानों और स्थानीय जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ये सभी परियोजनाएं न केवल बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगी, बल्कि क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास को नई गति भी देंगी। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर को सरगुजा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वर्षों बाद लुंड्रा की धरती पर इतनी बड़ी विकासात्मक पहल एक साथ देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि कुल 281 करोड़ रुपये के कार्यों में 28 करोड़ रुपये के कार्यों का लोकार्पण एवं 253 करोड़ रुपये के कार्यों का शिलान्यास शामिल है। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके सतत प्रयासों से सरगुजा को अंबिकापुर से दिल्ली एवं कोलकाता तक हवाई सेवाओं की सुविधा भी प्राप्त हुई है, जिससे क्षेत्र का संपर्क और विकास दोनों तेज होंगे। मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति पूर्णतः संवेदनशील है और उनकी आय बढ़ाने के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है और भुगतान 24 से 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही किसान उन्नति योजना के तहत अंतर की राशि भी समयबद्ध रूप से सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित की जा रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और त्यौहारों में उनकी खुशहाली स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक पहलें की गई हैं, जिनमें किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना प्रमुख हैं। राज्य सरकार भी इन योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर रही है, जिससे खेती को लाभकारी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान कर दी थी, जिनमें से 8 लाख से अधिक आवास अब पूर्ण होकर हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत हजारों परिवारों को आवास, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र ने दशकों तक हिंसा का दंश झेला, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहस के कारण अब प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष आवास भी स्वीकृत किए गए हैं, जिससे उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और सम्मान बढ़ा है। इसके अलावा तेंदूपत्ता संग्रहण मूल्य में वृद्धि, चरण पादुका योजना की पुनः शुरुआत और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित कर सरकार ने जनकल्याण को प्राथमिकता दी है।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं तथा 375 नई एंबुलेंस सेवाओं की शुरुआत से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का भी उल्लेख करते हुए आमजन से इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू करना है, ताकि हर व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के समग्र उत्थान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लुंड्रा क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें आधुनिक स्टेडियम निर्माण, सन्ना-जशपुर-धंवरपुर-सरगुजा से होते हुए बनारस तक सड़क निर्माण, ब्लॉक मुख्यालय में नवीन विश्राम भवन तथा कृषि उप मंडी की स्थापना शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्माण कार्यों से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को नए अवसर प्राप्त होंगे। कार्यक्रम में सांसद चिंतामणि महाराज, कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना की और इसे जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

योगी सरकार में युवाओं का बढ़ा इनोवेटिव बिजनेस की ओर रुझान, हजारों स्टार्टअप का हुआ गठन

योगी सरकार में इनोवेटिव बिजनेस में बढ़ा युवाओं का रुझान, इनोवेशन से स्थापित हो रहे हजारों स्टार्टअप सीएम युवा पहल से आत्मनिर्भर बन रहे युवा, नए क्षेत्रों में बढ़ रही भागीदारी प्रदेश में 10 हजार से अधिक इनोवेटिव उद्यम हुए स्थापित, युवाओं में बढ़ा आत्मविश्वास फूड, ट्रेनिंग, डिजिटल और सर्विस सेक्टर में इनोवेटिव मॉडल बना युवाओं की पहली पसंद बैंकों के सहयोग से स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिली मजबूती अब तक 10% इनोवेटिव उद्यम स्थापित, 2026-27 में 25% तक ले जाने का लक्ष्य लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सीएम युवा योजना के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में इनोवेशन आधारित स्टार्टअप तेजी से उभर रहे हैं, जिससे हजारों युवाओं को न केवल रोजगार मिल रहा है बल्कि वे खुद रोजगार सृजनकर्ता भी बन रहे हैं। सीएम युवा योजना के माध्यम से प्रदेश में अब तक 10 हजार से अधिक इनोवेटिव उद्यम स्थापित किए जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि युवाओं में उद्यमिता को लेकर आत्मविश्वास तेजी से बढ़ा है। खास बात यह है कि युवा पारंपरिक व्यवसायों से आगे बढ़कर नए और आधुनिक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। 25% उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य सीएम युवा के नोडल अधिकारी और ज्वाइंट कमिश्नर इंडस्ट्रीज सर्वेश्वर शुक्ला के अनुसार, ‘सीएम युवा’ जैसी योजनाओं के माध्यम से न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश अब आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएम युवा के माध्यम से अब तक स्थापित कुल उद्यमों में 10% इनोवेटिव मॉडल पर आधारित उद्यम हैं। मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसे 25% तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  इन सेक्टर्स में युवाओं की विशेष रुचि अगर सेक्टरवार आंकड़ों पर नजर डालें तो फूड और रेस्टोरेंट व्यवसाय युवाओं की पहली पसंद बनकर उभरा है, जहां सर्वाधिक 763 उद्यम स्थापित हुए हैं। इसके अलावा कंप्यूटर ट्रेनिंग (370), पैथोलॉजी सैंपलिंग (260), फास्ट फूड (253), फ्रेंचाइजी आधारित मॉडल (253) और ऑनलाइन टीचिंग (189) जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। वहीं जिम (170), मोबाइल आईटी एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म (120), ट्रैवल एंड टूरिज्म (117) और क्लाउड किचन (117) जैसे उभरते क्षेत्रों में भी स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं। लखनऊ, आजमगढ़ और हरदोई टॉप 3 में जनपदवार प्रदर्शन की बात करें तो राजधानी लखनऊ 287 उद्यमों के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद आजमगढ़ (286), हरदोई (262), जौनपुर (लगभग 250), अंबेडकर नगर (241), कानपुर (236), वाराणसी (229), रायबरेली (225), बरेली (208) और फिरोजाबाद (197) जैसे जनपद इनोवेटिव मॉडल अपनाने में अग्रणी बनकर उभरे हैं। योगी सरकार की इस पहल ने प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को नई दिशा दी है।  बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका इस पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में बैंकों की भूमिका भी बेहद अहम रही है। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक ने सर्वाधिक 2133 इनोवेटिव मॉडलों को ऋण उपलब्ध कराया है। इसके अलावा एसबीआई (1549), बैंक ऑफ बड़ौदा (1170), पंजाब नेशनल बैंक (1018), बैंक ऑफ इंडिया (774), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (589), केनरा बैंक (585), इंडियन बैंक (573), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (399) और यूको बैंक (182) ने भी युवाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनके स्टार्टअप को गति दी है।

1763 श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान रवाना, वैसाखी पर ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन करेंगे

अमृतसर वैसाखी और खालसा साजना दिवस के पावन अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 1763 श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन के लिए रवाना किया गया।  “जो बोले सो निहाल” के जयकारों के बीच रवाना हुए इस जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला।   जानकारी के अनुसार, देशभर से करीब 2800 सिख श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा में शामिल हो रहे हैं। यह जत्था अगले 10 दिनों के दौरान ननकाना साहिब, पंजा साहिब, डेरा साहिब, करतारपुर साहिब और सच्चा सौदा सहित विभिन्न पवित्र स्थलों के दर्शन करेगा। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पहली बार इन गुरुधामों के दर्शन के लिए जा रहे हैं और यह उनकी लंबे समय से इच्छा थी। उन्होंने वाहेगुरु से प्रार्थना की कि हर संगत को इस पवित्र अवसर का लाभ मिले। एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने कहा कि संगत की अरदासों के फलस्वरूप यह अवसर मिलता है, जिससे श्रद्धालु गुरु नानक देव जी से जुड़े पवित्र स्थलों के दर्शन कर पाते हैं। उन्होंने यात्रा की सफलता और सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी के लिए अरदास की। इस दौरान करतारपुर साहिब कॉरिडोर को पूरी तरह से खोलने की मांग भी दोहराई गई। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर सिख संगत की भावनाओं से जुड़ा है और इसे जल्द से जल्द पूरी तरह खोलना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर सकें। जत्थे के टीम लीडर सुरजीत सिंह तुगलवाला ने कहा कि वह पहली बार इस यात्रा की अगुवाई कर रहे हैं और एसजीपीसी हर साल यात्रियों के लिए बेहतर प्रबंध करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी यात्रा सुचारू रूप से संपन्न होगी। 32 श्रद्धालुओं के आवेदन हुए रद्द एसजीपीसी ने 1795 वीजा के लिए आवेदन भेजे थे, जिनमें से 1763 को वीजा जारी किया गया, जबकि 32 श्रद्धालुओं के आवेदन रद्द कर दिए गए। यह जत्था धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के बाद 19 अप्रैल को भारत लौटेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी यात्रा 10 दिनों की होगी। खालसा सृजना दिवस (बैसाखी) पर पाकिस्तान स्थित गुरुधामों के दर्शन के लिए विभिन्न कमेटियों के श्रद्धालु गए हैं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से 409, हरियाणा कमेटी से 255 और एसजीपीसी से 1763 श्रद्धालुओं को वीजा मिला है, जिससे कुल 2840 श्रद्धालु पाकिस्तान जा रहे हैं। करतारपुर साहिब का मार्ग खोलने की मांग श्रद्धालुओं ने सरकारों से अपील की है कि अधिक से अधिक लोगों को वीजा जारी किए जाएं और करतारपुर साहिब का मार्ग खोला जाए।उन्होंने पाकिस्तान द्वारा लगाए गए 20 डॉलर के शुल्क को खत्म करने की भी मांग की। जिन श्रद्धालुओं को वीजा नहीं मिला, उनमें निराशा भी देखी गई। 14 अप्रैल को खालसा सृजना दिवस एसजीपीसी के सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने बताया कि 14 अप्रैल को खालसा सृजना दिवस मनाया जाएगा और इसी संबंध में यह जत्था पाकिस्तान भेजा गया है। उन्होंने पुष्टि की कि 1795 पासपोर्ट भेजे गए थे, जिनमें से 32 रद्द हुए और 1763 श्रद्धालु यात्रा पर जा रहे हैं।  

ज्ञान भारतम् मिशन को योगी सरकार का बल, ज्ञान संरक्षण को मिल रही नई दिशा

वैश्विक मंच तक पहुंचेगा भारतीय ज्ञान, कानपुर की प्राचीन पांडुलिपियां होंगी डिजिटल ज्ञान भारतम् मिशन को योगी सरकार का बल, ज्ञान संरक्षण को मिल रही नई दिशा मंदिरों, मठों और निजी संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण ज्ञान भारतम् मोबाइल एप से होगा सर्वे, जीपीएस आधारित डाटा संग्रह शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को मिलेगा वैश्विक स्तर पर अध्ययन का अवसर लखनऊ/कानपुर  उत्तर प्रदेश में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और उसे वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से ज्ञान भारतम् मिशन को योगी सरकार ने मिशन मोड में आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में कानपुर नगर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों की तरह कानपुर में भी मंदिरों, मठों, आश्रमों, संस्कृत पाठशालाओं, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में सदियों पुरानी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। इन पांडुलिपियों में धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, इतिहास और साहित्य से जुड़ा बहुमूल्य ज्ञान निहित है, जिसे अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा। ज्ञान भारतम् ऐप से सर्वेक्षण कार्य इस अभियान के तहत ज्ञान भारतम् ऐप की मदद से सर्वेक्षण कार्य किया जाएगा। सर्वे टीम पांडुलिपियों की पहचान कर उनका जीपीएस लोकेशन, फोटोग्राफ, संख्या और वर्तमान स्थिति का विवरण ऐप में अपलोड करेगी। इसके बाद संस्कृति विभाग की विशेषज्ञ टीम इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करेगी। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह पहल केवल धरोहर संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर नई पीढ़ी और वैश्विक शोध समुदाय तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है। डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के बाद देश-विदेश के शोधकर्ता, विद्यार्थी और अध्येता इन पांडुलिपियों का अध्ययन कर सकेंगे। पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल संग्रहकर्ताओं के पास बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल संग्रहकर्ताओं के पास ही सुरक्षित रहेगा। प्रशासन और संस्कृति विभाग केवल उनके डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी करेंगे, जिससे धरोहर संरक्षित रहते हुए ज्ञान का व्यापक प्रसार संभव हो सके। योगी सरकार की यह पहल प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।  इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, पर्यटन अधिकारी अर्जिता ओझा, एडीआईओएस प्रशांत द्विवेदी, धर्मप्रकाश गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश में 13.35 करोड़ मतदाता तय करेंगे भविष्य, निर्वाचन आयोग ने सात लाख नामों को सूची से हटाने की तैयारी की पूरी

लखनऊ प्रदेश में शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। करीब सात लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से काटे जाने की उम्मीद है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में ज्यादा नाम काटे जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक,अंतिम मतदाता सूची में करीब 13.35 करोड़ लोगों के नाम होंगे। सूत्रों के मुताबिक, सूची में महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक संख्या में होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची जारी करेंगे। बीती 6 जनवरी को 12.55 करोड़ मतदाताओं की मसौदा सूची जारी की गई थी। उसके बाद 6 मार्च तक लोगों से इस ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां ली गईं। कुल 86.69 लाख लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के लिए फॉर्म-6 भरा। वहीं 3.18 लाख लोगों ने नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरा है। मतदाता सूची में 1.04 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके नाम का मिलान माता-पिता, बाबा-दादी व नाना-नानी से न होने के कारण इन्हें नोटिस दिया गया था। वहीं 2.22 करोड़ लोग तार्किक विसंगति वाले थे। सूत्र बताते हैं कि नाम कटवाने व नोटिस पाने वाले मतदाताओं में से करीब सात लाख के नाम काटे जाने की उम्मीद है। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची में 13.35 करोड़ लोगों के नाम हो सकते हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 12.55 करोड़ वोटरों में से 6.88 करोड़ पुरुष व 5.67 करोड़ महिलाएं थीं। नाम जुड़वाने के लिए आए 86.69 लाख फॉर्म-6 में से 43.06 लाख पुरुषों के और 43.62 लाख महिलाओं के फॉर्म थे। वहीं, 3.18 लाख फॉर्म-7 भरे गए हैं। इसमें से 1.46 लाख पुरुषों के और 1.31 लाख फॉर्म महिलाओं के आएं हैं। वहीं नोटिस पाने वाले जिन मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, उनमें भी महिलाओं व पुरुषों में कोई बड़ा अंतर नहीं है। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के नाम अधिक होने की उम्मीद है।  

सीएम योगी के निर्देश पर उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने किया हवाई सर्वे

सीएम योगी के निर्देश पर उप मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री ने किया हवाई सर्वे आपदा प्रभावित जनपदों का जाना हाल, प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत पहुंचाने के दिए निर्देश किसानों के साथ खड़ी है योगी सरकार, मुख्यमंत्री ने पीड़ित किसानों को हरसंभव मदद का दिया है भरोसा उप मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री ने फतेहपुर व आजमगढ़ में बैठक कर दिए निर्देश  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरुवार को आपदा से सर्वाधिक प्रभावित बाराबंकी, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, फतेहपुर, उन्नाव तथा लखनऊ जनपदों का हवाई सर्वेक्षण किया। योगी सरकार ने प्रदेश में इस सप्ताह हुई असामयिक वर्षा, तेज हवाओं और चक्रवात के कारण किसानों की फसलों को हुए भारी नुकसान का जायजा लेने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं।  किसानों के लिए खड़ी है सरकार  उप मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया संकट की घड़ी में सरकार साथ खड़ी है। योगी सरकार पीड़ित किसानों को आर्थिक सहायता समेत हरसंभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से इन सभी जनपदों के प्रशासन को विस्तृत सर्वेक्षण करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। आजमगढ़ व फतेहपुर में देखी जमीनी हकीकत  हवाई सर्वेक्षण के उपरांत आजमगढ़ तथा फतेहपुर जनपदों में स्थिति की जमीनी हकीकत परखने के लिए महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। इन बैठकों में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, उप निदेशक कृषि और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान फसल सर्वेक्षण कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की गई और सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे पूरी तत्परता के साथ आपदा प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूर्ण कर शासन को विस्तृत आख्या प्रेषित करें, ताकि प्रभावित अन्नदाताओं को अविलंब राहत राशि उपलब्ध कराई जा सके।