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यूपी में महिला ई-रिक्शा पायलटों की मुहिम, अयोध्या समेत 5 जिलों में हुआ आगाज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत प्रदेश में महिला ई-रिक्शा पायलटों की फौज तैयार की जा रही है, जिससे बालिकाओं और महिलाओं को विद्यालय, कार्यस्थल और अन्य जरूरी स्थानों तक सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक परिवहन मिल सकेगा। इस योजना के तहत शुरुआत में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में इस सुविधा की शुरुआत कर दी गई है, जबकि लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में इसे जल्द शुरू किया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल इसलिए भी खास है, क्योंकि इसका सीधा रिश्ता महिला सुरक्षा से जुड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं के लिए अब महिला चालकों द्वारा संचालित ई-रिक्शा सेवा बेहतर समाधान बनकर उभर रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के तकनीकी सहयोग से चल रहे इस कार्यक्रम ने अब तक प्रभावी परिणाम दिए हैं। पांच जनपदों में 119 महिलाओं को ई-रिक्शा देकर उद्यमी बनाया जा चुका है। वहीं, 629 महिलाओं को संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है और 244 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराया गया है। इस पहल से जुड़ी महिलाएं अब सिर्फ वाहन ही नहीं चला रहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक धुरी भी बन रहीं हैं। योजना से जुड़ी महिलाओं की औसत वार्षिक आय 3 लाख रुपए से अधिक पहुंचने की बात इस मॉडल की सफलता को और मजबूत बनाती है। ‘सेफ मोबिलिटी’ का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। इससे बेटियों की स्कूल तक पहुंच आसान होगी, कामकाजी महिलाओं का सफर सुरक्षित बनेगा, गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनेंगी। महिला सुरक्षा, सम्मानजनक परिवहन और स्वरोजगार इन तीनों मोर्चों पर एक साथ असर डालने वाली यह पहल उत्तर प्रदेश को नई पहचान दे रही है। यही वजह है कि महिला सुरक्षा में यूपी अब मॉडल स्टेट के रूप में अपनी अलग छाप छोड़ता दिख रहा है और ई-रिक्शा महिला पायलटों की यह नई फौज गांवों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने की तैयारी में है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सिम्स में ‘जेंडर फॉर हेल्थ’ विषय पर आयोजन, 100 से अधिक छात्रों ने लिया भाग

बिलासपुर विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सिम्स चिकित्सालय, बिलासपुर में “जेंडर फॉर हेल्थ” थीम पर एक व्यापक एवं जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं जेंडर समानता के महत्व को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं एवं शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान क्विज, पोस्टर मेकिंग एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, लैंगिक समानता एवं समाज में जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपने विचार रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ समाज के निर्माण में सभी वर्गों की समान भागीदारी आवश्यक है। यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन की थीम “जेंडर फॉर हेल्थ” के अनुरूप किया गया। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ, जिसमें स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में देशभर के सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों में चल रही समान गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई, जिससे प्रतिभागियों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया एवं उनके प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञों ने छात्रों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में सिम्स चिकित्सालय के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह एवं नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप की विशेष उपस्थिति रही। इसके साथ ही डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. अर्चना सिंह  डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. सचिन पांडे एवं डॉ. विवेक शर्मा सहित संस्थान के अन्य वरिष्ठ चिकित्सक, स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

एयरलाइंस को मिली राहत, केंद्र ने सब्सिडी की अवधि बढ़ाई, इंदौर-भोपाल समेत अन्य शहरों के जुड़ने की संभावना

उदयपुर उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी को लेकर अब नई उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की संशोधित उड़ान योजना में वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। इससे एयरलाइंस कंपनियां की ओर से इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद और पुणे जैसे हाई-डिमांड रूट।  लंबे समय तक मिलने वाली सब्सिडी एयरलाइंस के लिए जोखिम कम करेगी और मेवाड़ को फिर से बेहतर हवाई नेटवर्क से जोड़ सकती है। केंद्र सरकार की यह पहल उदयपुर के पर्यटन और मार्बल उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि राज्य सरकार चैलेंज मोड के तहत इन बंद रूट्स की डिमांड केंद्र को भेजती है तो इन रूट्स को प्राथमिकता मिल सकती है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े विमान और किफायती किराया मॉडल के साथ इन रूट्स पर पैसेंजर लोड और बढ़ सकता है। पहले से ही इन रूट्स पर करीब 80 फीसदी सीटें भरी जा रही थीं। जो इनके व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने का संकेत है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी लगातार इन फ्लाइट्स को बहाल करने की मांग कर रहे हैं, जिससे केंद्र स्तर पर इस दिशा में पहल की संभावना और मजबूत हो गई है। ये रूट बंद हुए, यही प्राथमिकता पर     इंदौर रूट (29 मार्च 2026 से बंद) – इसी समर शिड्यूल में कनेक्टिविटी टूटी। व्यापारिक और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह सबसे ज्यादा मांग वाला रूट था।     भोपाल एवं अहमदाबाद (पिछले शिड्यूल से बंद) – मध्य प्रदेश की राजधानी और गुजरात के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र से सीधा हवाई संपर्क कटा हुआ है। इससे यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भर होना पड़ रहा है।     पुणे रूट (2020 से बंद) – पिछले 6 सालों से सीधी उड़ान का इंतजार है। पुणे में रहने वाले हजारों मेवाड़ी छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यह कनेक्टिविटी सबसे जरूरी है। भास्कर सुझाव – संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया यात्रियों का लोड बढ़ाने में रहेगा कारगार संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया का फार्मूला इन रूट्स पर पैसेंजर लोड बढ़ाने में कारगर हो सकता है। क्योंकि, अब 5 साल तक सरकार वित्तीय घाटे की भरपाई करेगी। इससे उनपर वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित मेवाड़ के बड़े जनप्रतिनिधि इन बंद हुई इन फ्लाइट्स को वापस बहाल कराने की लगातार मांग कर रहे हैं। नए शिड्यूल पर सवाल – जो फ्लाइटें छीनी, उनमें था 80 फीसदी यात्रीभार टूरिस्ट सिटी उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी पिछले कुछ समय से लैंडिंग मोड पर चल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि समर शिड्यूल में उदयपुर-भोपाल, उदयपुर-इंदौर और उदयपुर-अहमदाबाद के बीच चलने वाली जिन फ्लाइट्स का बंद किया गया, उनमें करीब 80 फीसदी सीट्स फुल चल रही थीं। वहीं, पुणे जैसा बड़ा आईटी और एजुकेशन हब तो साल 2020 से ही उदयपुर के हवाई नक्शे से गायब है। अभी मुंबई के लिए 6, दिल्ली 4 फ्लाइट, जयपुर 2, और बेंगलुरु व हैदराबाद के लिए 1-1 फ्लाइट का संचालन हो रहा है।  

नाराज कर्मचारियों की हड़ताल, कुरुक्षेत्र अस्पताल में कर्चमारी के चलते इलाज प्रभावित

कुरुक्षेत्र. लोक नायक जय प्रकाश जिला नागरिक अस्पताल (एलएनजेपी) के पुरुष वार्ड में बीती रात बड़ा विवाद खड़ा हो गया। अलसुबह करीब 3 बजे कौशल रोजगार निगम के माध्यम से तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामेश्वर पर कुछ युवकों ने हमला कर दिया। घटना के बाद अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में रोष फैल गया और उन्होंने सुबह हड़ताल का एलान कर दिया। हड़ताल के कारण अस्पताल की सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हैं। सुबह 10 बजे तक ओपीडी शुरू नहीं हो सकी और न ही मरीजों की पर्ची काटी गई। स्थिति यह है कि सुबह 8 बजे से लाइन में खड़े मरीज परेशान हो रहे हैं। पर्ची काउंटर बंद रहने के कारण इलाज ठप है। इस दौरान एक महिला कर्मचारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पीएमओ ने तीन बार लिखकर भेजा कि यहां चौकी बनाओ, तो क्यों नहीं बनाते। सिक्योरिटी के लिए दो-तीन बार पुलिस को लिखा गया, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई है। घटना की सूचना मिलते ही प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सारा अग्रवाल मौके पर पहुंचीं और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। वहीं, केयूके थाना प्रभारी विशाल कुमार भी अस्पताल पहुंचे और आरोपितों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। फिलहाल कर्मचारी आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

पावरकॉम की नई योजना: पंजाब के परिवारों को डायरेक्ट बिजली कनेक्शन की सुविधा

जीरकपुर/चंडीगढ़. अधूरी कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं से वंचित जीवन जी रहे हजारों परिवारों के लिए राहत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पावरकॉम ने राज्य स्तर पर सख्त और स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। 30 मार्च 2026 को जारी इन आदेशों में पूरे पंजाब के बिजली अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया, उन मामलों की पहचान करके संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटीज को आधिकारिक नोटिस भेजे जाएं और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल हो जाता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। यह आदेश पावरकॉम के चीफ इंजीनियर (कमर्शियल) कार्यालय द्वारा जारी कर पूरे राज्य के इंजीनियर-इन-चीफ और चीफ इंजीनियर (डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) तक भेजे गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह कदम किसी एक शहर तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पंजाब में लागू होगा। इस कार्रवाई का आधार पीएसईआरसी (PSERC) द्वारा हाल ही में किए गए संशोधन हैं, जिनके तहत सप्लाई कोड-2024 के अनुसार अधूरी कॉलोनियों और डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के मामलों में सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, यदि कोई बिल्डर या प्रमोटर आवश्यक एनओसी प्राप्त नहीं करता, बैंक गारंटी जमा नहीं करता या कॉलोनी में बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचा जैसे ट्रांसफॉर्मर, केबल और वितरण प्रणाली पूरी नहीं करता, तो उसका लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। पावरकॉम ने आदेश दिए हैं कि ऐसे मामलों को दस्तावेज़ी रूप से चिन्हित कर पुड्डा, गमाडा, पीडीए और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग जैसे विभागों को नोटिस भेजे जाएं। यह प्रक्रिया कॉलोनी को खाली घोषित करने के लिए जरूरी शर्त होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित सरकारी प्राधिकरण तीन महीनों के भीतर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तो पावरकॉम खुद अदालत का रुख करेगा और आवश्यक आदेश लेकर आगे कार्रवाई करेगा। इससे पहली बार बिजली विभाग सिर्फ सप्लाई एजेंसी से आगे बढ़कर सक्रिय भूमिका निभाता नजर आएगा। सीधे बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे – सबसे ज़रूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल होता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे, भले ही बिल्डर ने प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ दिया हो। हालांकि, इसके लिए कॉलोनी का ऑफिशियली खाली घोषित होना ज़रूरी होगा और इस बारे में नॉर्म्स तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद लागू किया जाएगा। अब बिल्डर की लापरवाही की वजह से लोगों को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा। ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में अधूरे बिजली सिस्टम को पूरा करने का अनुमानित खर्च पावरकॉम तैयार करके संबंधित डिपार्टमेंट्स के सामने रखेगा। सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी कुछ खर्च वसूल यह भी इशारा किया गया है कि इस प्रोसेस में कुछ खर्च ऐसे प्रोजेक्ट्स में रहने वालों से सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी वसूला जा सकता है, जिससे यह साफ है कि राहत के साथ-साथ लोगों पर कुछ फाइनेंशियल जिम्मेदारी भी आ सकती है। हाल के बिजली संकट और ज़ीरकपुर और आसपास के इलाकों में अधूरी कॉलोनियों के मामले में इस ऑर्डर को काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह भी उतना ही साफ है कि डायरेक्ट बिजली कनेक्शन का रास्ता तभी खुलेगा जब नोटिस जारी करने से लेकर लाइसेंस प्रोसेस करने और छोड़ने की घोषणा करने तक का पूरा प्रोसेस कानूनी और एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से पूरा हो जाएगा। इस पूरे ऑर्डर का मैसेज यह है कि अगर बिल्डर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है, तो बिजली सप्लाई की स्थिति स्थिर नहीं रहेगी। तय प्रोसेस के जरिए एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को एक्टिवेट करके, आखिरकार निवासियों को बिजली देने का रास्ता तैयार किया जा रहा है, हालांकि सब प्रोसीजरली और नियमों के दायरे में ही लागू किया जाएगा। विभाग को ऐसे आदेश क्यों जारी करने पड़े पंजाब में कई कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने बिजली का बुनियादी ढांचा पूरा किए बिना ही लोगों को बसाया, जिससे निवासी आवश्यक सुविधाओं से वंचित रह गए। कई बड़े प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने सिंगल पॉइंट मीटर लेकर निवासियों से प्रीपेड मीटर के जरिए पैसे वसूले, लेकिन वह राशि पावरकॉम को जमा नहीं करवाई। इसके कारण जब बिल्डरों पर लाखों रुपये बकाया हो गए तो बिजली काट दी गई, और पूरा भुगतान करने के बावजूद निवासी अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के निर्देशों और नियमों के तहत यह सख्त आदेश जारी किए गए हैं।

गिरते जलस्तर को रोकने के लिए बिलासपुर में नलकूप निर्माण पर रोक

बिलासपुर. जिले में गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नए नलकूप एवं ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संजय अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में नए नलकूप/ट्यूबवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है, जिसमें बताया गया है कि भू-जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने तथा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। आदेश के तहत बिलासपुर जिले के विकासखंड बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था नए नलकूप खनन नहीं कर सकेगी। हालांकि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगर निगम एवं नगर पंचायतों जैसी शासकीय एजेंसियों को केवल पेयजल आपूर्ति हेतु आवश्यकता अनुसार नलकूप खनन की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन संबंधित कार्यों की जानकारी अधिकृत अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। जन सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में नलकूप खनन की अनुमति प्रदान करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को अधिकृत किया गया है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अनुमति देने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

बड़े तालाब के पास रसूखदारों के 347 अवैध बंगलों पर शुरू हुई बुलडोजर कार्रवाई

 भोपाल भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील शहर की पहचान है लेकिन भीड़ भाड़ और अवैध निर्माण ने यहां घूमने आने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. अब प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है. क्योंकि बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है. 6 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 21 अप्रैल तक चलेगा. कुल 15 दिनों तक चलने वाली इस कार्रवाई में जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं।  पहले दिन भदभदा में चला ‘पीला पंजा’अभियान के पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला. यहां 9 दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है और पीछे नहीं हटेगी।  भोज वेटलैंड रूल्स के बाद सख्ती प्रशासन का कहना है कि 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बड़ा तालाब से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण को अवैध माना जाएगा. इसी नियम के तहत सभी निर्माण हटाए जाएंगे. प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई तालाब की पारिस्थितिकी, जलस्तर और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।  राजा भोज ने कराया था झील का निर्माण भोपाल की बड़ी झील को भोजताल या अपर लेक भी कहा जाता है. 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा निर्मित भारत की सबसे पुरानी मानव निर्मित झीलों में से एक है. यह आज भोपाल शहर की पहचान भी है. यह शहर के पीने के पानी का मुख्य स्रोत है और 2002 में इसे 'रामसर साइट' का दर्जा मिला. यहां बोट क्लब, खूबसूरत व्यू और वॉटर स्पोर्ट्स पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।  ये इलाके हैं नो-कंस्ट्रक्शन जोन लेक के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर का एरिया, जो भोज वेटलैंड और रामसर साइट का भी हिस्सा है, वेटलैंड नियमों के तहत नो-कंस्ट्रक्शन जोन है और अभी भी इस जोन में सैकड़ों फार्म हाउस, बंगले, मैरिज हॉल, रेस्टोरेंट से लेकर छोटे घर और झुग्गियां बनी हुई हैं। इन सब में बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव, बैरागढ़ और ऐसे एरिया सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। टास्क फोर्स ने नया सर्वे शुरू किया डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर द्वारा बनाई गई 17 लोगों की टास्क फोर्स को ADM अंकुर मेश्राम लीड कर रहे हैं। यह टीम झील के आसपास के मना किए गए एरिया में सर्वे और डिमार्केशन और बाद में पहचाने गए अतिक्रमणों को हटाने के प्रोसेस पर नजर रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन इस बार अतिक्रमण हटाने को लेकर सीरियस है, तो उन्होंने कहा, 'प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है। अगर आपके मन में कोई खास स्ट्रक्चर है और जब उसे गिरा दिया जाता है, तभी आप मानेंगे कि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, यह एक अलग बात है।' 5 प्वॉइंट में पढ़िए पूरी खबर का सार 1. रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत तालाब के FTL (Full Tank Level) से 50 मीटर तक कोई भी पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। 2. बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव और बैरागढ़ में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें रसूखदारों के बंगले और मैरिज हॉल शामिल हैं। 3. NGT के निर्देशों पर पहले भी तीन बार सर्वे हो चुका है, लेकिन इस बार टास्क फोर्स में राजस्व, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणविद भी शामिल हैं। 4. हब्बीनामा, इनायतनामा और वक्फ बोर्ड की जमीनों के दावों के कारण प्रशासन को कड़ी चुनौती मिल रही है, जिसे लेकर NGT पहले ही नाराजगी जता चुका है। 5. SDM टी.टी. नगर ने अपने क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो संकेत है कि इस बार मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा  

जिंदल स्टील ने कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से रचा इतिहास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की दिशा दिखाई

जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास, कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की राह दिखाई  रायपुर  जिन्दल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन के माध्यम से 'स्वदेशी' कोयले के बेहतरीन उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे कम कार्बन वाले स्टील के उत्पादन के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।  जिन्दल स्टील ने दुनिया में पहली बार एक ऐसी तकनीक (कोयला गैसीफिकेशन) का सफल प्रयोग किया है, जिससे स्वदेशी कोयले से गैस (सिनगैस) बनाकर लोहा (डीआरआई) तैयार किया जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी ने विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले के बजाय अपने देश के कोयले को साफ-सुथरी गैस में बदलकर स्टील बनाने की बड़ी कामयाबी हासिल की है। प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिए जिन्दल स्टील ने अब गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में सिनगैस का सफल प्रयोग किया है, जो स्टील इंडस्ट्री में पहली बार हुआ है। यह प्रयोग आज की कठिन परिस्थितियों में ईंधन की कमी को दूर करने में मददगार साबित हुआ है।  स्टील जगत को नई दिशा दिखाते हुए जिन्दल स्टील ने सिनगैस से ब्लास्ट फर्नेस संचालित कर आयातित कोकिंग कोल पर देश की निर्भरता घटाई है और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन की मात्रा उल्लेखनीय स्तर तक कम करने में भी कामयाबी हासिल की है। स्टील उत्पादन की वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग निश्चित रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा।  गौरतलब है कि भारत सरकार की भावी नीतियों और प्रोत्साहनों में राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन शामिल है, इसलिए उम्मीद है कि कोयला गैसीफिकेशन तकनीक को अपनाने में तेजी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए देश में हो रहे इस प्रयास को समर्थन मिलेगा।  इस संबंध में जिन्दल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक श्री पी.के. बीजू नायर ने कहा: "स्वदेशी कोयले से बनी यह गैस (सिनगैस) विदेशों से आने वाले महंगे मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी की जगह ले सकती है। भारत को अपनी तरक्की और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अपने पास मौजूद कोयले के विशाल भंडार का सही उपयोग करना चाहिए। अगर हम कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन नियंत्रण की तकनीक (CCUS) का उपयोग करें तो न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों (CBAM) पर खरा उतरकर हमारा स्टील, विदेशी बाजारों में और भी मजबूत बनेगा।" स्वदेशी कोयले का उपयोग और उन्नत स्वच्छ कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से जिन्दल स्टील, सस्टेनेबल और सस्ता स्टील उपलब्ध कराते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टि को आगे बढ़ा रहा है।  जिन्दल स्टील के बारे में  जिन्दल स्टील भारत के शीर्ष स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपनी कार्यक्षमता और बेहतरीन क्वालिटी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कंपनी का 'माइन-टू-मेटल' मॉडल इसे खास बनाता है, जहां खदानों से लेकर तैयार स्टील तक, सारा काम अपने संसाधनों और आधुनिक तकनीक से होता है। 12 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश के साथ कंपनी के पास अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में विश्वस्तरीय स्टील प्लांट हैं। जिन्दल स्टील आज  न केवल भारत में, बल्कि अफ्रीका तक अपने मजबूत नेटवर्क के जरिये देश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।  

अदालत ने चोरी के आरोप में फंसे जज को जमानत देने से किया मना, कानून की जीत

चंडीगढ़  पंजाब की एक अदालत में हाल ही में एक अनोखा मामला पहुंचा। यहां एक जज पर लगे चोरी के आरोप पर सुनवाई करते समय अदालत भी हैरान रह गई। जज पर अन्य लोगों के साथ मिलकर साथी जज के घर से चोरी के इल्जाम लगे हैं, वह भी तब जब जज की लाश अस्पताल में पड़ी थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हुए पंजाब के पटियाला की एक अदालत ने बीते बुधवार को कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता और जज की अग्रिम जमानत की याचिका भी खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरिंदर सिद्धू ने अपने आदेश में कहा कि एक कार्यरत न्यायिक अधिकारी पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और यह एक पब्लिक सर्वेंट, खासकर न्यायिक अधिकारी से अपेक्षित ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं। यह मामला 1 अगस्त 2025 की रात से जुड़ा है, जब जज कंवलजीत सिंह का पटियाला के अमर अस्पताल में निधन हो गया था। आरोप हैं कि सिविल जज (जूनियर डिविजन) बिक्रमदीप सिंह ने मृतक के घर की घरेलू सहायक अमरजोत कौर उर्फ पिंकी, सरकारी अधिकारी गौरव गोयल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के साथ मिलकर साजिश रची। कैसे हुई चोरी? जानकारी के मुताबिक जब जज का शव अस्पताल में था, तब यह लोग विकास कॉलोनी स्थित जज के घर में घुसे और सोना, जेवर और नकदी निकाल ली। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी जज और उनके साथी घर में आते-जाते और बैग और डिब्बे ले जाते दिखे हैं। इसके बाद डॉ. भूपिंदर सिंह विर्क, जो पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में लॉ प्रोफेसर हैं, की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। क्या बोला कोर्ट? कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज पहली नजर में आरोपी की मौजूदगी और भूमिका को साबित करती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फुटेज में आरोपियों की बॉडी लैंग्वेज और सामान ले जाने का तरीका साफ दिखाता है कि यह काम गुपचुप तरीके से किया गया। कोर्ट ने बचाव पक्ष की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें व्हाट्सऐप चैट और कॉल के जरिए अनुमति मिलने की बात कही गई थी। अदालत ने पाया कि ये बातचीत कथित चोरी के बाद हुई थी। फुटेज रात करीब 9:50 बजे तक की है, जबकि पहला मैसेज 10:17 बजे का बताया गया। कोर्ट ने कहा कि इन संदेशों में सिर्फ शोक जताया गया है, किसी तरह की अनुमति का संकेत नहीं मिलता। कानून से ऊपर कोई नहीं कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका पद कुछ भी हो, कानून से ऊपर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन बनाम गुजरात राज्य (1991) मामले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह दिशानिर्देश सिर्फ मनमानी गिरफ्तारी से बचाते हैं, पूरी छूट नहीं देते। अदालत ने कहा कि इस मामले में कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है, क्योंकि अभी भी काफी सामान बरामद नहीं हुआ है और पूरी साजिश का खुलासा होना बाकी है। कोर्ट ने कहा कि गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत जांच में बाधा नहीं बननी चाहिए।

पीटीपीएस जमीन अधिग्रहण को लेकर झारखंड में तनाव, ग्रामीण तैयार नहीं घर छोड़ने के लिए

पतरातू/रांची. झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड के हेसला पंचायत स्थित पीटीपीएस की अधिग्रहित जमीन पर बने आवासीय परिसर को खाली कराने की तैयारी को लेकर आज  सोमवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया. प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करने लगे. पीटीपीएस पावर प्लांट बंद होने के बाद यह जमीन सरकार द्वारा झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण को सौंप दी गई है. जियाडा ने इस भूमि को निजी कंपनियों को उद्योग स्थापना के लिए आवंटित कर दिया है, जिसके चलते आवास खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है. न्यायालय का दावा बनाम प्रशासन, पटेल चौक पर जुटे लोग कॉलोनी वासियों का कहना है कि कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जबकि प्रशासन को ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है. इसी को लेकर लोग पटेल चौक पर जुटे हैं और साफ कह रहे हैं कि वे किसी भी हालत में घर खाली नहीं करेंगे.  प्रशासन अलर्ट, स्थिति पर नजर क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहा है. समाचार भेजे जाने तक प्रशासन के लोग नहीं पहुंचे हैं.