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आसिफ उर्फ बम का शॉर्ट एनकाउंटर, पुलिस ने किया दावा – आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हत्या के आरोपी आसिफ उर्फ बम का शॉर्ट एनकाउंटर होने का मामला सामने आया है. यह घटना उस समय हुई, जब पुलिस उसे पकड़कर शहर ला रही थी और उसने रास्ते में भागने की कोशिश की. इसी दौरान पुलिस की गोली लगने से वह घायल हो गया।  आरोपी आसिफ उर्फ बम को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस टीम उसे भोपाल ला रही थी. इसी दौरान रातीबड़ इलाके के पास उसने अचानक पुलिस को चकमा देकर फरार होने की कोशिश की. पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना, जिसके बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी।  पुलिस की गोली आसिफ के पैर में लगी, जिससे वह घायल हो गया और मौके पर ही गिर पड़ा. इसके बाद पुलिस ने उसे तुरंत पकड़ लिया और घायल हालत में इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है।  गौरतलब है कि आसिफ उर्फ बम पर हाल ही में एक सनसनीखेज हत्या का आरोप है. बीते रविवार की रात अशोका गार्डन इलाके में मामूली विवाद के बाद उसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर 35 साल के चाय कारोबारी पर चाकू से हमला कर दिया था. इस हमले में कारोबारी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था।  घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की थी. इसी क्रम में आसिफ को पकड़ा गया था. पुलिस उसे आगे की पूछताछ के लिए भोपाल ला रही थी, लेकिन रास्ते में उसने भागने की कोशिश की।  पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है और उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है. वहीं, इस शॉर्ट एनकाउंटर के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. फिलहाल, मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में भी जुटी हुई है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति

नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति  जल जीवन मिशन से हर घर पहुंचा नल जल नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा, क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत रायपुर  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन ने सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में बदलाव की नई इबारत लिख दी है। 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में इसी लक्ष्य को साकार करते हुए नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत कोंटा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सालातोंग में अब हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है। ग्राम सालातोंग, जो कोंटा से लगभग 100 किमी तथा जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित है, लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट से जूझता रहा। गांव के लगभग 80 घरों के लोग पीने और घरेलू उपयोग के लिए एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जब महीनों तक बारिश नहीं होती थी, तब नाले का जलस्तर इतना घट जाता था कि ग्रामीणों को बेहद सीमित मात्रा में पानी निकालना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती थी। अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव में 100 नल कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य तेजी से किया गया, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध जल उपलब्ध होने लगा है। मिशन के लागू होने के बाद गांव में न केवल जल संकट दूर हुआ, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। जल जीवन मिशन के तहत सालातोंग में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव के जल स्रोतों सोलर आधारित सिस्टम एवं हैंडपंप का नियमित रूप से जल गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और गांव की शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है, ताकि वे स्वयं पानी की जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें। ग्रामीणों ने इस मिशन के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे हमारा जीवन आसान और सुरक्षित हुआ है। जल जीवन मिशन ने सालातोंग में स्वच्छ जल पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है।

हिंसा को पीछे छोड़, कांकेर में नक्सल प्रभावितों को मिल रही नई दिशा और रोजगार के अवसर

हिंसा छोड़कर नई दिशा, नई राह की ओर बढ़ रहे कदम आत्मसमर्पित व नक्सल पीड़ितों को कलेक्टर ने सौंपा नियुक्ति पत्र प्रशिक्षण उपरांत रोजगार देने वाला पहला जिला बना कांकेर रायपुर  मानव समाज का सबसे उत्कृष्ट पहलू सकारात्मक परिवर्तन है, जिससे जीवन में नवाचार और नए विचार जन्म लेते हैं। ऐसा ही बदलाव आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर उन्हें पहले प्रशिक्षित किया गया और अब कुशल होने के बाद रोजगार भी मुहैया हो रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों को भानुप्रतापपुर के ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पारंगत होने के बाद प्रशासन के प्रयासों से रोजगार भी दिलाया जा रहा है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी ने आज कलेक्टर कक्ष में आज सुबह 04 आत्मसमर्पित माओवादी व पीड़ितों को नियुक्ति पत्र सौंपा तथा उन्हें नई शुरूआत के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदाय किया गया, जहां 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। श्री आंचला ने बताया कि शिक्षा और सही-गलत की जानकारी के अभाव में माओवादी संगठन से जुड़ गया था। उन्हांने कहा कि मनुष्य की अहमियत मुख्यधारा में जुड़ने के बाद ही पता चली। जीवन के अलग-अलग रंगों व वास्तविक खुशियों की पहचान अब जाकर हुई। श्री आंचला ने शासन-प्रशासन का आभार मानते हुए कहा कि जीने का असली मकसद अब मिला है। इसी तरह माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रशिक्षण देकर उन्हें नियोजित करने के मामले में कांकेर बस्तर संभाग का पहला जिला बन गया है। यह शासन की विशिष्ट पहल है, जिसके चलते उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने व तराशने तथा उसे नई दिशा देने की कवायद हो रही है। इस प्रकार शासन की सकारात्मक पहल का प्रत्यक्ष लाभ पुनर्वासितों व पीड़ितों को मिल रहा है।

योगी सरकार में औद्योगिक क्रांति: 9 साल में 17 हजार से अधिक कारखाने पंजीकृत

योगी सरकार में औद्योगिक क्रांति, 9 साल में 17 हजार से अधिक कारखाने पंजीकृत पिछले 70 वर्षों में प्रदेश में पंजीकृत हुए थे केवल 14 हजार कारखाने 16 लाख से अधिक लोगों को रोजगार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से सामाजिक-आर्थिक बदलाव के संकेत लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। योगी सरकार के सुशासन, पारदर्शी नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व का ही असर है कि प्रदेश में अप्रैल 2017 से अब तक 17,841 नए कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के स्वतंत्र होने के बाद वर्ष 1947 से मार्च 2017 तक लगभग 70 वर्षों में प्रदेश में कुल 14,178 कारखाने ही पंजीकृत हो पाए थे। वर्तमान समय में प्रदेश में कुल पंजीकृत कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंच चुकी है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से प्रदेश में बना निवेश अनुकूल माहौल प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से सुधार, निवेश अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस, भूमि बैंक, बेहतर कानून-व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं विकसित कीं। यही वजह है कि देश-विदेश के निवेशकों का भरोसा उत्तर प्रदेश पर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 17,841 कारखाने अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत हुए हैं, जो राज्य में औद्योगिक गतिविधियों की तेज रफ्तार को दर्शाते हैं। सिर्फ सितंबर 2023 से अब तक ही 10,194 कारखानों का पंजीकरण हुआ है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 4,746 नए कारखाने जुड़े हैं। अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत इन कारखानों में वर्तमान में 16,53,179 लोग नौकरी कर रहे हैं। इनमें 15,29,907 पुरुष व 1,23,272 महिलाएं कार्यरत हैं। सबसे अधिक 10,895 कारखाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंजीकृत प्रमुख सचिव ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10,895, मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3,205 और बुंदेलखंड क्षेत्र में 215 कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार ने क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करते हुए हर क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा दिया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हुए। इन कारखानों से प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन भी तेजी से हुआ है। खास बात यह है कि कारखानों में कार्यरत महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जो प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत है। कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा योगदान प्रदेश में 14,412 कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 100 तक श्रमिक कार्यरत हैं जबकि 3,213 कारखानों में 101 से 1000 श्रमिक कार्यरत हैं। इसी तरह 118 बड़े कारखाने ऐसे हैं जिनमें 1000 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। यह संख्या दर्शाती है कि योगी सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई)के साथ-साथ बड़े उद्योगों को भी समान रूप से प्रोत्साहन दिया है। इससे प्रदेश की औद्योगिक संरचना मजबूत हुई है। बता दें कि औद्योगिक विकास में कानून-व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। योगी सरकार ने इस क्षेत्र में सख्त कदम उठाते हुए प्रदेश में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को नई गति दी। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि तेजी से औद्योगिक राज्य के रूप में उभर रहा है। नए कारखानों ने न केवल रोजगार दिया, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है।

न्यायिक सेवा में बड़ा बदलाव: अनुभवी वकीलों को ही मिलेगा जज बनने का मौका

चंडीगढ़.  हरियाणा सरकार ने न्यायिक सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा संशोधन करते हुए हरियाणा उच्च न्यायिक सेवा (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। ये नियम 27 मार्च 2026 से प्रभावी हो गए हैं। संशोधित नियमों के तहत अव न्यायिक सेवा में पदों को भरने के लिए प्रमोशन, सीमित प्रतियोगी परीक्षा और सीधी भर्ती का स्पष्ट ढांचा तय किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार 50 प्रतिशत पद मेरिट-कम-सीनियरिटी के आधार पर प्रमोशन से भरे जाएंगे जबकि 25 प्रतिशत पद सीमित प्रतियोगी परीक्षा और 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे। सीमित प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति के लिए न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव और 35 वर्ष की आयु निर्धारित की गई है।  सीधी भर्ती के लिए वकीलों के लिए भी कड़े मानदंड तय किए गए हैं। अभ्यर्थी को कम से कम तीन वर्षों तक आयकर दाता होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही वार्षिक न्यूनतम आय पांच लाख रुपये और प्रत्येक वर्ष कम से कम 50 मामलों की पैरवी का प्रमाण देना होगा। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को इन शर्तों में आंशिक छूट दी गई है। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए रोस्टर सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत हर चार पदों पर क्रमशः प्रमोशन, प्रमोशन, परीक्षा और सीधी भर्ती का पैटर्न अपनाया जाएगा। सरकार ने वरिष्ठता निर्धारण के नियम भी स्पष्ट किए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया में देरी होने पर किसी प्रकार का विवाद न हो।

स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: रांची नगर निगम बनाएगा इंडोर स्टेडियम

रांची. सिर्फ राजधानी रांची की साफ सफाई ही नहीं खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए रांची नगर निगम पहली बार इंडोर स्टेडियम बनाने जा रहा है। वार्ड-3 एदलहातू मोरहाबादी में बनने वाले इस अत्याधुनिक इंडोर के निर्माण पर निगम करीब पांच करोड़ रुपये खर्च करेगा। एक साल में स्टेडियम बनाने का लक्ष्य निगम ने रखा है। जारी टेंडर के अनुसार इंडोर स्टेडियम में चार बैडमिंटन कोर्ट बनाए जाएंगे। बैडमिंटन कोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। जहां वार्मअप से लेकर चेजिंग रूम, शौचालय, पार्किंग की भी व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा इंडोर स्टेडियम के साथ लैंडस्केपिंग कार्य भी कराया जाएगा। वर्तमान में रांची में बैडमिंटन खेलने के लिए इंडोर स्टेडियम की संख्या गिनी चुनी है। खिलाड़ी के अलावा आम लोग में खेल सकेंगे इस परियोजना की अनुमानित लागत 4 करोड़ 9 लाख 52 हजार 68 रुपये तय की गई है। इच्छुक एजेंसियां 2 अप्रैल 2026 से 17 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी बोली जमा कर सकेंगी। वहीं, टेंडर खोलने की तिथि 18 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस इंडोर स्टेडियम के बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ी के अलावा शहरवासी भी बैडमिंटन खेल सकेंगे। इसके एवज निगम कितना शुल्क लेगा इसकी घोषणा स्टेडियम का निर्माण पूरा होने के बाद होगा। इंडोर स्टेडियम की देखरेख का जिम्मा निगम निजी कंपनी को देगा। खिलाड़ियों के लिए कोचिंग की सुविधा मिलेगी। नगर आयुक्त ने उठाए बड़े कदम व्यापक डोर टू डोर सर्वे सत्यापन शहर के सभी वार्डों में विशेष अभियान चलाकर अज्ञात और छूटे हुए होल्डिंग्स की पहचान संपत्तियों के भौतिक सत्यापन के माध्यम से टैक्स बेस को मजबूत किया वार्ड स्तरीय लक्ष्य और दैनिक मानिटरिंग प्रत्येक वार्ड के लिए स्पष्ट राजस्व संग्रह लक्ष्य निर्धारित किए दैनिक और साप्ताहिक समीक्षा के माध्यम से प्रगति की निरंतर निगरानी कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में विशेष फोकस कर अभियान चलाया गया डिजिटल प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन प्रोपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से रीयल टाइम डेटा ट्रैकिंग की गई डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देकर पारदर्शिता और सुविधा में वृद्धि की गई बड़े बकायेदारों पर विशेष कार्रवाई उच्च बकाया वाले मामलों की पहचान कर विशेष वसूली अभियान चलाया गया आवश्यकतानुसार नोटिस, दंडात्मक कार्रवाई एवं प्रवर्तन उपाय अपनाए गए नागरिक सहभागिता और जागरूकता अभियान विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को कर भुगतान के लिए प्रेरित किया गया समय पर भुगतान करने वाले करदाताओं को प्रोत्साहित किया गया फील्ड में टीमों की सक्रियता और समन्वय पर विशेष ध्यान टैक्स कलेक्टरों और फील्ड स्टाफ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की टीम-आधारित कार्यप्रणाली से कार्य में गति एवं परिणाम दोनों प्राप्त हुए

गेहूं और सरसों की फसल पर बेमौसम मार, यूपी सरकार अलर्ट मोड पर, किसानों के खातों में सीधे पहुंचेगा राहत का पैसा

लखनऊ यूपी में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. मार्च महीने का अंत और अप्रैल की शुरुआत में ही हुई बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान चिंता में हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात का संज्ञान लेते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड पर कर दिया है और सभी जिलों के जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई तेज बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं. जिन खेतों में फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी, वहां पानी भरने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है. खासतौर पर गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों पर इसका असर देखा जा रहा है. गांवों से आ रही शुरुआती जानकारी में बताया जा रहा है कि कई जगहों पर फसलें गिर गई हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने का खतरा बढ़ गया है. मुख्यमंत्री ने मांगी जमीनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अधिकारी फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और प्रभावित क्षेत्रों की पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजें. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट केवल कागजी न हो, बल्कि जमीनी सच्चाई को दर्शाने वाली हो, ताकि राहत कार्य सही तरीके से संचालित किए जा सकें. सरकार ने फसल नुकसान के आकलन के लिए एक संयुक्त सर्वे कराने का फैसला लिया है. इसके तहत राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की टीम मिलकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी. मुआवजा देने की तैयारी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही नुकसान का आंकलन पूरा होगा, मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो और समयबद्ध तरीके से किसानों के खातों में पैसा पहुंचाया जाए. सरकार का कहना है कि किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. अधिकारियों को संवेदनशील रहने के निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खासतौर पर संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े. जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे खुद फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लें और यह सुनिश्चित करें कि राहत कार्य तेजी से और पारदर्शिता के साथ पूरे हों. सीएम ने प्रमुख सचिव (कृषि) और राहत आयुक्त को भी निर्देश दिया गया है कि वे फील्ड अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें. सभी सूचनाओं का सही समय पर संकलन कर शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि निर्णय लेने में देरी न हो. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रशासनिक मशीनरी एक टीम की तरह काम करे और किसानों को जल्द से जल्द राहत मिले.

इंदौर से खाटू श्याम की सीधी यात्रा, 2 अप्रैल से चलेगी स्पेशल ट्रेन

इंदौर  इंदौर से खाटू श्याम जाने के लिए 2 अप्रैल से रेल विभाग ने स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू किया है। इसके लिए आरक्षण भी शुरू हो चुके हैं। यह ट्रेन लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से संचालित होगी। इंदौर और आसपास के शहरों से बड़ी संख्या में भक्त खाटूश्याम जाते हैं और इस रूट पर ट्रेन चलाने की लंबे समय से मांग भी थी। रेलवे ने समर स्पेशल के रूप में इस ट्रेन को चलाने का फैसला लिया है, लेकिन यदि अच्छा प्रतिसाद मिलता है तो इसका संचालन नियमित भी किया जा सकता है। इंदौर से श्रीगंगानगर तक जाने के लिए पहली बार सीधी रेल सेवा शुरू होने जा रही है। श्रीगंगानगर से यह ट्रेन 2 अप्रैल से चलेगी और 3 अप्रैल को इंदौर पहुंचेगी। इस ट्रेन का अंतिम स्टॉप लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन होगा। रेलवे विशेषज्ञ नागेश नामजोशी ने बताया कि यह समर स्पेशल ट्रेन है। अभी तक यात्रियों को अलग-अलग ट्रेन बदलकर खाटूश्याम जाना पड़ता था, लेकिन इस रूट पर यह पहली सीधी रेल सेवा है, जिससे मालवा से राजस्थान तक यात्रा आसान हो जाएगी। रेल से खाटूश्याम तक जाने के लिए यात्रियों को भोपाल या कोटा से ट्रेन बदलनी पड़ती थी। लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से यह ट्रेन दोपहर 1:55 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 9:55 बजे श्रीगंगानगर पहुंचेगी। वहीं वापसी में श्रीगंगानगर से ट्रेन दोपहर 12:50 बजे चलेगी और अगले दिन दोपहर 1:55 बजे इंदौर पहुंचेगी।   यह ट्रेन इंदौर से निकलकर फतेहाबाद, रतलाम, मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़, चंदेरिया, भीलवाड़ा, अजमेर, मदनगंज किशनगढ़, किशनगढ़, फुलेरा, रिंगस, सीकर, लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर शेखावाटी, चूरू, सादुलपुर, तारानगर रोड, नूरसर, एलनाबाद, हनुमानगढ़, सूरतगढ़ होते हुए श्रीगंगानगर तक जाएगी। यह ट्रेन 2 अप्रैल से 10 जुलाई तक चलेगी।

गोरखपुर मंडल में 19 हजार परिवारों को मिली पक्की छत, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत खर्च हुए 219 करोड़

गोरखपुर पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है।  जिन्हें तकनीकी वजहों से PM आवास नहीं मिला, वे इस योजना से पूरा कर रहे घर का सपना  उत्तर प्रदेश में रहने वाले ऐसे जरूरतमंद लोग जिन्हें किसी तकनीकी कारण से पीएम आवास नहीं मिल पाया उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण, उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले निर्धन और वंचित परिवारों के लिए अपने पक्के घर का सपना साकार कर रही है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में यह योजना उन वर्गों के लिए बड़ा सहारा बनी है जो किन्हीं तकनीकी कारणों से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ नहीं ले पाए। गोरखपुर मंडल के ही चार जिलों में अब तक 19 हजार से अधिक जरूरतमंद इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इनमें से 17 हजार से अधिक खुद के पक्के मकान में रहने लगे हैं। इन आवासों के लिए सरकार करीब 219 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के हर निराश्रित और पात्र परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए कई प्रयास किए हैं। इस क्रम प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर ठीक से लागू कराया गया है। गोरखपुर मंडल में ही 199984 जरूरतमंदों को पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत पक्के आवास स्वीकृत हुए और इनमें से 199103 के आवास बनकर पूरे भी हो गए। पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही प्रदेश में सीएम योगी के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित हो रही है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है। इसमें दैवीय आपदा से प्रभावित परिवारों और वनटांगिया, मुसहर जैसे विशेष पिछड़े समुदायों को प्राथमिकता पर रखा गया। योजना के तहत मिलती हैं ये सुविधाएं मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को न केवल आवास निर्माण के लिए धनराशि दी जा रही है, बल्कि उन्हें एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। आवास निर्माण के लिए प्रति लाभार्थी 1.20 लाख रुपये देने के अलावा उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। साथ ही सौभाग्य योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन और उज्ज्वला योजना के तहत निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन भी दिया जाता है। क्या बोले अधिकारी गोरखपुर के मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने इस योजना के बारे में बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में हर जरूरतमंद को पीएम आवास योजना (PM Awas Yojna) और सीएम आवास योजना (CM Awas Yojna) के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

रतलाम मंडल से होकर चलेंगी तीन नई स्पेशल ट्रेनें, रेलयात्रियों को मिलेगी राहत

 रतलाम  यात्रियों की सुविधाओं तथा विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान बढ़ती यात्रा मांग को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये ट्रेनें बांद्रा टर्मिनस से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, सूबेदारगंज और आगरा कैंट के बीच विशेष किराये पर संचालित होंगी।  रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें रतलाम मंडल के विभिन्न स्टेशनों के साथ ही आसपास के अनेक रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। इससे यात्रियों को ग्रीष्मकालीन अवधि में यात्रा के दौरान आवागमन में सुविधा मिलेगी। बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 02200 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्पेशल ट्रेन प्रत्येक शनिवार को 4 अप्रैल से 11 जुलाई 2026 तक चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 5:10 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 5:00 बजे झांसी पहुंचेगी। यह ट्रेन रतलाम मंडल के दाहोद (12:43/12:45), रतलाम (14:30/14:40), नागदा (15:43/15:45), उज्जैन (16:55/17:10) और मक्सी (18:00/18:02) स्टेशनों पर रुकेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 02199 झांसी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 2 अप्रैल से 9 जुलाई 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को झांसी से शाम 16:50 बजे प्रस्थान कर अगले दिन शाम 16:10 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, भरूच, वडोदरा, गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, ब्यावरा, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 04126 बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 11:15 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन शाम 17:00 बजे सूबेदारगंज पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04125 सूबेदारगंज-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 04 अप्रैल से 13 जुलाई 2026 तक प्रत्येक सोमवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन सूबेदारगंज से सुबह 5:20 बजे प्रस्थान कर रतलाम (21:45/21:55) होते हुए अगले दिन सुबह 9:30 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, आगरा क्षेत्र सहित कई स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। उधना-आगरा कैंट स्पेशल ट्रेन ट्रेन संख्या 01908 उधना-आगरा कैंट स्पेशल 8 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 तक प्रत्येक बुधवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन उधना से दोपहर 15:25 बजे प्रस्थान कर रतलाम (22:25/22:30) होते हुए अगले दिन सुबह 8:30 बजे आगरा कैंट पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 01907 आगरा कैंट-उधना स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन आगरा कैंट से शाम 18:45 बजे प्रस्थान कर रतलाम (06:15/06:20) होते हुए अगले दिन दोपहर 13:25 बजे उधना पहुंचेगी। यह ट्रेन सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, बयाना, फतेहपुर सीकरी आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और जनरल कोच उपलब्ध रहेंगे।