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रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा फैसला, 75 सीएम श्री स्कूलों में मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के 75 सीएम श्री स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ सरकार ने उसका चेहरा बदलने का भी फैसला किया है। सीएम रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक्सपेंडिचर एंड फाइनेंस कमिटी (ईएफसी) की बैठक में इसके लिए करीब 264.90 लाख रुपये की मंजूरी दे दी है। इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर सुधार के साथ सीसीटीवी कैमरे आधुनिक सभागार, विज्ञान एवं आईटी पार्क और विशेष कैटिगरी के बच्चों के लिए खास सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। सीएम रेखा गुप्ता के साथ शिक्षा मंत्री आशीष सूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह भी इस बैठक में मौजूद रहे। यह पूरा काम अगले साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा? सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्कूल भवनों की मरम्मत कराना नहीं, बल्कि ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ, आधुनिक परिसर मिले। इस योजना के अंतर्गत स्कूलों के प्रवेश द्वारों का आधुनिक स्वरूप में निर्माण और सौंदर्याकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सीएम श्री स्कूलों की जर्जर इमारतों की समस्या दूर करना, वॉटरप्रूफिंग, बाहरी पेंटिंग, नया प्लास्टर, बाउंड्री वॉल एवं फेंसिंग का निर्माण व मरम्मत, टॉयलेट, पानी की व्यवस्था, सीवर एवं ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ खेल सुविधाओं का विकास, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, मल्टीपरपज हॉल विकसित किए जाएंगे। खराब एलईडी लाइट, सीलिंग फैन, एग्जॉस्ट फैन और पीए (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम को बदला जाएगा, ताकि पूरे परिसर में घोषणाएं और आपातकालीन सूचनाएं तेजी से प्रसारित की जा सकें। रेखा गुप्ता ने कहा कि स्कूल परिसरों का स्वरूप भी पूरी तरह बदला जाएगा। आधुनिक डिजाइन वाले सीएम श्री प्रवेश द्वार विकसित किए जाएंगे। खेल मैदानों में आधुनिक आउटडोर गैलरी विकसित की जाएगी, जिसका उपयोग आउटडोर कक्षाओं, मनोरंजन, इंटरैक्टिव गतिविधियों तथा सहयोगात्मक शिक्षण के लिए किया जा सकेगा। बास्केटबॉल कोर्ट में नया टर्फ बिछाया जाएगा। यह सारा कार्य अगल साल के अंत तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।  

लखनऊ में कुर्सी रोड होगा छह लेन, पांच लाख लोगों की सफर की परेशानी होगी खत्म

पटना यूपी की राजधानी लखनऊ में लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है। कुर्सी रोड पर बसे लोगों को आए दिन लगने वाले जाम से निजात मिलने वाली है। डंडहिया चौराहा से बेहटा तक 12.5 किमी लंबा यह मार्ग मौजूदा समय में चार लेन का है, जिसे शीघ्र ही छह लेन का किया जाएगा। सर्विस रोड पर हुए अवैध कब्जे भी हटाए जाएंगे। छह लेन की सड़क होने पर सरगम अपार्टमेंट से लेकर डंडहिया चौराहे तक अक्सर लगने वाले जाम से लोगों को निजात मिलेगी। उनकी आवाजाही आसान हो जाएगी। कुर्सी रोड(लखनऊ-महमूदाबाद मार्ग) स्टेट हाईवे है। चार लेन के इस हाईवे के चौड़ीकरण की मांग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की तरफ से सालों से उठाई जा रही है। इस बार पीडब्ल्यूडी ने अपनी कार्ययोजना में चौड़ीकरण का प्रस्ताव शामिल करते हुए शासन की स्वीकृति के लिए भेज दिया है। सहमति मिलते ही चौड़ीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस मार्ग के दोनों तरफ पचासों की संख्या में कॉलोनियां सहित सहित एलडीए के और निजी अपार्टमेंट बन चुके हैं। नहरिया रोड से भी इस मार्ग पर काफी संख्या में लोगों का आनाजाना होता है। चार लेन वाली इस सड़क पर ट्रैफिक का बोझ बढ़ा है, जिससे आए दिन पीक ऑवर में जाम की स्थिति बनती है। चौड़ीकरण से इस समस्या से राहत मिलेगी। 60 करोड़ की लागत से होगा चौड़ीकरण कुर्सी रोड के चौड़ीकरण का काम लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाएगा। निर्माण कार्य का खाका पीडब्ल्यूडी ने तैयार कर लिया है। प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया है। स्वीकृति का इंतजार है। दोनों तरफ 10.5-10.5 मीटर चौड़ी होगी सड़क कुर्सी रोड अभी फोर लेन है, जो कि 07-07 मीटर चौड़ी है। दोनों ही तरफ गुडंबा थाना तक सर्विस लेन भी है, जिस पर ठेलों और रेहड़ी वालों ने कब्जा कर रखा है। चौड़ीकरण के बाद यह सड़क दोनों तरफ 10.5-10.5 मीटर की हो जाएगी। इसके अतिरिक्त सर्विस लेन होगा। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा समय में वहां सीवर और पेयजल पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान दोनों तरफ के अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। पांच लाख से अधिक होंगे लाभांवित छह लेन की सड़क बनने के बाद कुर्सी रोड के दोनों तरफ बसी 50 से अधिक कॉलोनियों में रहने वाले, अपार्टमेंट के निवासियों सहित नहरिया रोड के लोगों को मिलाकर लगभग पांच लाख से अधिक की शहरी आबादी लाभांवित होगी। इसके अतरिक्त बेहटा तक के लोगों की लखनऊ तक आवाजाही आसान हो जाएगी।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, नालों की सफाई की निगरानी अब IAS और HCS अधिकारियों के जिम्मे

चंडीगढ़. हरियाणा में मानसून की तैयारियों तथा जमीनी स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आईएएस एवं एचसीएस अधिकारियों को नालों का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान प्री-मानसून डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) कार्यों की गुणवत्ता की जांच भी की जाएगी। सभी 87 शहरी स्थानीय निकायों में चल रहे नालों के सफाई कार्यों की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने नगर निगम आयुक्तों तथा उपायुक्तों को निर्देश दिए कि अगले तीन दिन के भीतर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से अपने क्षेत्रों में जल निकासी अवसंरचना का मौके पर जाकर निरीक्षण कराया जाए। विशेष निगरानी अभियान के तहत प्रत्येक आईएएस और एचसीएस अधिकारी को अपने अधिकार क्षेत्र में कम से कम पांच किलोमीटर लंबाई के नालों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को निरीक्षण से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट, फोटोग्राफ तथा स्थलीय अवलोकन सहित शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, ताकि कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून की तैयारियां केवल कार्यालय में बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर डी-सिल्टिंग कार्यों की गुणवत्ता का सत्यापन करना होगा। संवेदनशील स्थानों की पहचान करनी होगी। कमियों का पता लगाना होगा तथा आवश्यकतानुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नाले का निरीक्षण सुनिश्चित कर सभी रुकावटें दूर की जाएं। लंबित कार्यों को मानसून शुरू होने से पहले पूरा किया जाए, ताकि शहरी क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके। बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा और पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मकरंद पांडुरंग ने भी अपनी बात रखी।

तरनतारन में ASI ने सर्विस रिवॉल्वर से की आत्महत्या, पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

तरनतारन. विधानसभा हलका पट्टी के गांव कैरो पुलिस चौकी के प्रभारी एएसआई अमरजीत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। अमृतसर निवासी अमरजीत सिंह का शव कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी तक आत्महत्या की वजह का पता नहीं चल पाया। एएसआई अमरजीत सिंह करीब 4 माह से पुलिस चौकी में पत्थर प्रभारी तैनात थे। उनके साथ चौकी में तीन अन्य कर्मचारी भी तैनात थे। गुरुवार की शाम को नाकाबंदी के बाद खाना खाकर 9:30 बजे रात अपने क्वार्टर में गए वहां विश्राम के दौरान कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। क्योंकि मैं तैनात आने कर्मी ने मौके पर जाकर देख के ऐसी अमरजीत सिंह लहू लुहान पड़े थे और हाथ में उनके सर्विस पिस्टल थी। अमरजीत ने खुद की कनपटी पर पिस्टल लगाकर गोली चलाई जो उनकी मौत का कारण बनी। सूचना मिलते ही डीएसपी रविशेर सिंह मौके पर पहुंचे आशी का कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के शव ग्रह में रखवा दिया गया है। कम नफरी के बीच ड्यूटी का था बोझ एएसआई अमरजीत सिंह ने खुद को गोली क्यों मारी इस बाबत अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पुलिस चौकी में नौकरी की कमी के चलते एएसआई अमरजीत सिंह कई बार अपना तबादला करवाने लिए अधिकारियों को कह चुके थे। एक ही सब डिवीजन में दूसरी घटना अभी 15 जून को पट्टी की अदालती परिसर में सुरक्षा में तैनात एएसआई गुरमीत सिंह ने खुद को गोली मारी थी जिनकी 7 दिन बाद अमृतसर के निजी अस्पताल में मौत हुई है।डीएसपी रविशेर सिंह ने बताया कि सब कब्जे में लेकर विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है।

बस्तर में धान खरीद व्यवस्था पर सवाल, उठाव में देरी से करोड़ों की फसल हुई खराब

सुकमा. सुकमा में धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपये मूल्य का धान या तो रिकॉर्ड से गायब मिला या फिर खुले में पड़े-पड़े अमानक हो गया. जिला स्तरीय सत्यापन में 1115.86 मीट्रिक टन धान रिकॉर्ड से कम पाया गया, जबकि 1295.90 मीट्रिक टन धान डेढ़ साल तक उठाव नहीं होने से खराब हो गया. यह वही धान था, जिसे मिलिंग के बाद गरीब परिवारों तक चावल के रूप में पहुंचना था. विभाग ट्रांसपोर्टिंग लक्ष्य पूरा होने का तर्क दे रहा है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि लक्ष्य पूरा होने के बाद धान की सुरक्षा और समय पर उठाव की जिम्मेदारी किसकी थी? कई स्तरों की निगरानी व्यवस्था के बावजूद करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति का नुकसान प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नुकसान की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं. बस्तर संभाग में चार लाख क्विंटल धान असुरक्षित पड़ा धान खरीदी खत्म हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश के खरीदी केंद्रों में अब भी 10.76 लाख क्विंटल से ज्यादा धान पड़ा हुआ है। मानसून करीब है और समय पर बारिश शुरू होने की स्थिति में यह धान खराब हो सकता है। समर्थन मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 333.74 करोड़ रुपए से अधिक है। खरीदी केंद्रों में अभी 7,48,310 क्विंटल मोटा, 1,21,020 क्विंटल पतला और 2,07,250 क्विंटल सरना धान का परिवहन बाकी है। परिवहन में लगातार हो रही देरी के कारण एक बार फिर करोड़ों रुपए के धान के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। साल 2025-26 में प्रदेश में कुल 14.10 करोड़ क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इसमें से 12.34 करोड़ क्विंटल धान राइस मिलर्स को और 1.65 करोड़ क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों में भेजा गया। नियम के अनुसार 31 मार्च तक खरीदी केंद्रों से धान का पूरा उठाव हो जाना चाहिए था, लेकिन समय-सीमा बढ़ाकर 31 मई कर दी गई। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में धान अब भी केंद्रों में जमा है। अब बारिश में खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।

स्वस्थ बच्चे बनेंगे समृद्ध समाज का आधार : सीएम योगी आदित्यनाथ

स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थ्यप्रद व स्वच्छ आहार-विहार आवश्यक : मुख्यमंत्री  स्वस्थ बच्चे बनेंगे समृद्ध समाज का आधार : सीएम योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने राज्य सरकार के सहयोग से बने अक्षयपात्र फाउंडेशन के केंद्रीयकृत रसोईघर का किया उद्घाटन नए सत्र में गोरखपुर के एक लाख स्कूली बच्चों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण गर्मागर्म भोजन : सीएम योगी गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थ्यप्रद एवं स्वच्छ आहार-विहार का होना आवश्यक है। कुपोषण से मुक्ति के लिए जरूरी है कि स्वच्छता का ध्यान रखते हुए बच्चों को पौष्टिक आहार मिले। समाजहित में यह कार्य अक्षयपात्र फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। स्वच्छ और पौष्टिक आहार मिलने से स्वस्थ बच्चे समृद्ध समाज का आधार बनेंगे।   सीएम योगी गुरुवार शाम गोरखपुर में राज्य सरकार के सहयोग से बने, एक लाख बच्चों के लिए भोजन क्षमता वाले अक्षयपात्र फाउंडेशन के केंद्रीयकृत रसोईघर के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों के मिड डे मील के लिए अक्षयपात्र फाउंडेशन की तरफ से भोजन निर्माण में स्वच्छता, पोषण और गुणवत्ता का जो ध्यान रखा जाता है, वह सबके लिए सीखने लायक है।  सीएम योगी ने कहा कि मथुरा, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, कानपुर में अक्षयपात्र फाउंडेशन के रसोईघर पहले से संचालित हैं। अब सरकार के सहयोग से गोरखपुर में केंद्रीयकृत रसोईघर का निर्माण कर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। नए शैक्षिक सत्र में 50 हजार से अधिक स्कूली बच्चों को फिर कुछ समय में ही 1 लाख बच्चों को यहां से गर्मागर्म भोजन मेन्यू के हिसाब से प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न और कन्वर्जन कास्ट सरकार उपलब्ध कराती है। बेहतर ढंग से भोजन बनाने और वितरण का कार्य अक्षयपात्र की तरफ से किया जा रहा है।  भोजन की क्वालिटी देखनी हो तो शुरुआत स्वच्छता से करें मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबको सोचना चाहिए। हम स्वस्थ तभी रहेंगे जब हमारा आहार स्वच्छ होगा। आहार स्वच्छ होगा तो वह स्वास्थ्यप्रद भी होगा। पौष्टक आहार से शरीर स्वस्थ होगा और शरीर स्वस्थ रहने पर ही मस्तिष्क भी स्वस्थ होगा। उन्होंने कहा कि घर हो या बाजार, भोजन की क्वालिटी देखनी हो तो शुरुआत स्वच्छता से करें। स्वच्छता में असावधानी होने पर ही फ़ूड पॉयजनिंग जैसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने भोजन तैयार और वितरण करने में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के लिए अक्षयपात्र फाउंडेशन की सराहना की।  विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में योगदान करेंगे स्वस्थ बच्चे मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्षयपात्र फाउंडेशन के सहयोग से गोरखपुर में 1 लाख बच्चे पौष्टिक भोजन प्राप्त कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुपोषण मिशन के लक्ष्य को प्राप्त कर विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चे भी भविष्य में समृद्ध समाज और सशक्त राष्ट्र का आधार बनेंगे।  सशक्त समाज की मजबूत कड़ी है शिक्षा सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा, समृद्ध समाज की आधारशिला और सशक्त राष्ट्र की मजबूत कड़ी है। शिक्षा से ही समाज का वर्तमान और भविष्य तय होता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के बेसिक स्कूलों में मिशन कायाकल्प से और माध्यमिक स्कूलों में प्रोजेक्ट अलंकार से ढांचागत सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने आज से शुरू हुए बेसिक शिक्षा के सत्र को लेकर शिक्षकों का आह्वान किया कि वे प्रयास करें कि एक भी बच्चा स्कूल आने से वंचित न रहे। विद्यालय में प्रवेश दिलाने के साथ उसे यूनिफॉर्म, बैग, जूता, मोजा आदि सभी उपलब्ध कराया जाए।  यूपी की शिक्षा के कायाकल्प को नीति आयोग से मिली सराहना मुख्यमंत्री ने कहा 9 साल में यूपी की शिक्षा के कायाकल्प को नीति आयोग ने सक्सेस स्टोरी माना है। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को सुरक्षित वातावरण में अध्ययन के लिए पर्याप्त धनराशि दी गई। सीएम ने कहा कि पहले जहां बोर्ड परीक्षाओं और परिणाम में महीनों लग जाते थे, वहीं अब 15 दिन में नकलविहीन परीक्षा और 15 दिन में परिणाम आ जाते हैं। इससे 11 माह पढ़ाई के लिए उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अटल टिकरिंग लैब, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बन रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सभी जिलों में अभ्युदय कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ी सुविधाओं से प्रदेश में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा नया कीर्तिमान स्थापित करेगी।  अक्षयपात्र फाउंडेशन ने भूमि और आर्थिक सहायता के लिए सीएम योगी का जताया आभार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी सहित सभी आगतों का स्वागत करते हुए अक्षयपात्र फाउंडेशन के सह संस्थापक एवं उपाध्यक्ष चंचलापति दास ने रसोईघर के निर्माण के लिए करीब 2.5 एकड़ भूमि और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अक्षयपात्र फाउंडेशन का मिशन है कि कोई भी बच्चा भूख की वजह से शिक्षा से वंचित न रहने पाए। उन्होंने बताया कि अक्षयपात्र की यह रसोई पीएम पोषण योजना के तहत गोरखपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के बच्चों के लिए प्रतिदिन 1 लाख गर्म, पौष्टिक एवं संतुलित भोजन तैयार और वितरित करने की क्षमता रखती है। विशेषीकृत रसोई उपकरणों में दो रोटी मेकिंग मशीनें हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता प्रति घंटे 40 हजार रोटियां तैयार करने की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के हाथों उद्घाटित केंद्रीयकृत रसोईघर की नई सुविधा अब 546 विद्यालयों के 55,000 बच्चों तक सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगी तथा चरणबद्ध तरीके से 1,570 विद्यालयों के 1 लाख बच्चों तक अपनी पहुंच का विस्तार करेगी। वर्तमान में यह सुविधा भोजन वितरण के लिए 23 इलेक्ट्रिक वाहनों के बेड़े का संचालन कर रही है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और क्षेत्रीय स्कूल भोजन प्रणाली को सुदृढ़ करने में सहायता मिलती है।  कार्यक्रम की अध्यक्षता अक्षयपात्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रस्टी भरतर्षभ दास ने की। इस अवसर पर प्रमुख रूप से राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष … Read more

ब्रांड पुशिंग का असर, दिल्ली में बीयर बिक्री दोगुनी, आबकारी राजस्व में 17% की बढ़ोतरी

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग द्वारा बियर, शराब की ब्रैंड पुशिंग की नीति का फायदा दिखने लगा है। दिल्ली में शराब की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीने में रेवेन्यू में 17% का इजाफा हुआ है। बियर के नेशनवाइड पॉपुलर बियर बैंड की बिक्री भी दोगुनी हो चुकी है। दो महीने में 885 करोड़ आबकारी विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में पहले दो महीने ( अप्रैल- मई) में शराब की बिक्री से कुल 885 करोड़ का रेवेन्यू मिला था, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसी दौरान बढ़कर 1038 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में शराब की बिक्री से कुल वास्तविक रेवेन्यू 7148 करोड़ रुपये रखा था, जो इस साल बढ़ाकर 7200 करोड़ रुपये कर दिया है। सरकार का कहना है कि ब्रेड पुशिंग के चलते शराब व बियर की बिक्री में इजाफा हुआ है। इधर, सस्ती बीयर की डिमांड घटी अधिकारी के मुताबिक गर्मियों के दौरान बियर की बिक्री बढ़ जाती है। इसलिए हमने नेशन वाइज पॉपुलर बियर बैंड की पुशिंग 24% से बढ़ाकर 54% कर दी है। इससे बिक्री पर असर पड़ा है। पिछले साल मई 2025 में पॉपुलर ब्रैंड की बियर की बिक्री 2,47,143 थी, जो इस साल बढ़कर 5,96,351 हो गई है। इससे कम पॉपुलर ब्रेड की बिक्री जो 2025 में कुल बिक्री का 76% था, वह घटकर 46 फीसदी पर आ गई है। ब्रांड पुशिंग को लेकर बनाया दबाव अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में आबकारी विभाग ने सभी चार निगमों को ब्रांड पुशिंग को लेकर लगातार दबाव बनाया। इसके अलावा ब्रांडेड शराब की बिक्री को लेकर निगरानी भी बढ़ाई। उसकी नतीजा है कि दिल्ली के जो लोग अच्छी बियर व शराब के लिए दिल्ली की सीमा से सटे दूसरे राज्यों में जाते थे, उन्होंने दिल्ली में ही खरीदारी की। इससे बियर की बिक्री बढ़ी।  

गुलाबचंद कटारिया और CM सुखविंदर सुक्खू की मुलाकात, पंजाब-हिमाचल से जुड़े कई मुद्दों पर मंथन

चंडीगढ़ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया से पंजाब लोकभवन में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर बैठक होगी। बैठक में शानन पावर प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश को सौंपने, चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी 7:19 फीसदी करने और चंडीगढ़ में हिमाचल भवन के नए परिसर के निर्माण के लिए भूमि देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

बिहार में पंचायत सचिव की नियुक्ति जन्म से 9 महीने पहले, वरीयता सूची पर उठे सवाल

पटना बिहार में पंचायती राज विभाग ने पंचायत सचिवों की वरीयता सूची जारी की है। राज्य में स्नातक उत्तीर्ण पंचायत सचिव को प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी बनाया जाएगा। यह सूची राज्य में कार्यरत पंचायत सचिवों का एक अप्रैल 2026 के आधार पर जारी की गई है। विभाग के संयुक्त सचिव मो. वसीम अहमद ने जिलों के डीएम और जिला पंचायत राज पदाधिकारी (डीपीआरओ) को पत्र भेजा है। इस सूची में एक ऐसी गड़बड़ी सामने आई है जिसे जानकर कोई भी हैरान हो जाएगा। सूची में दी गई सूचना को सही मानें तो एक पंचायत सचिव को जन्म से 9 माह पहले ही नौकरी मिल गई। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा है कि वरीयता सूची में किसी सेवानिवृत्त, मृत या त्याग पत्र दिये हुए पंचायत सचिव का नाम हो या किसी पंचायत सचिव का नाम छूट गया हो तो डीपीआरओ पूर्ण विवरण के साथ विभाग को सूची उपलब्ध करायेंगे। वरीयता सूची में दावा और आपत्ति साक्ष्य के साथ 30 दिनों के अंदर उपलब्ध कराना होगा। इस अवधि में दावा या आपत्ति नहीं मिलने पर माना जायेगा कि औपबंधिक वरीयता सूची में कोई त्रुटि नहीं है। इसके बाद अंतिम रूप से वरीयता सूची का प्रकाशन कर दिया जायेगा। इस तरह पंचायत सचिवों की लंबी मांग पूरी हो जाएगी। इसे लेकर पंचायत सचिवों ने हड़ताल भी की थी। सूची में कई खामियां: संघ बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने कहा है कि इस लिस्ट में अन्य कई खामियां हैं। वरीयता सूची में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त दर्जन भर से अधिक स्नातक उत्तीर्ण पंचायत सचिवों का नाम नहीं है। सूची में कई प्रकार की गलतियां हैं। जन्म के 9 माह पहले ही मिल गई नौकरी औपबंधिक वरीयता सूची को देख आप चौक जायेंगे। इस सूची में सारण जिला के पंचायत सचिव सुदर्शन राम को उनके उनके जन्म के पहले ही नौकरी मिल गई है। सुदर्शन राम की जन्म तिथि 19 नवंबर 1969 अंकित है। जबकि इनकी पंचायत सचिव पद पर नियुक्ति तिथि 28 जनवरी 1969 अंकित है।

Punjab News: ED ने मंत्री संजीव अरोड़ा की ₹55.57 करोड़ की संपत्ति की अटैच, दुबई कंपनियों के नाम पर बिलिंग का आरोप

लुधियान  प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई करते हुए पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़ी कंपनी मैसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (पूर्व नाम-मैसर्स रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड) और संबंधित लोगों की 55.57 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क हुई कुर्क।  यह कार्रवाई कथित तौर पर मोबाइल फोन के फर्जी निर्यात से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दुबई की जिन कंपनियों के नाम पर मोबाइल निर्यात के बिल बनाए गए, वे भी कथित रूप से आरोपी पक्ष से जुड़ी हुई थीं। ईडी ने इस मामले के मुख्य आरोपी और कंपनी के तत्कालीन चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर को पहले ही गिरफ्तार किया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी ने संकेत दिया है कि मामले में आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। इन शहरों की संपत्तियां हुईं कुर्क ED द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), जमीन, कमर्शियल स्पेस और आलीशान आवासीय अपार्टमेंट शामिल हैं। ये संपत्तियां लुधियाना, गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में स्थित हैं और कंपनी, संजीव अरोड़ा तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं। कैसे खुला फर्जीवाड़े का यह खेल, जानिए..     गुरुग्राम में दर्ज FIR से शुरू हुई जांच: यह मामला सबसे पहले गुरुग्राम (हरियाणा) के उद्योग विहार थाने में दर्ज एक FIR के बाद सामने आया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं (जो पहले IPC की धारा 420, 467, 471 और 120-B थीं) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया गया था। चूंकि ये मामले PMLA एक्ट के तहत आते हैं, इसलिए ED ने इसकी जांच अपने हाथ में ली थी।   कागजों पर बेच डाले ₹157 करोड़ के मोबाइल: ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रियल एस्टेट सेक्टर की इस कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान करीब 157 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई थी। इसमें से करीब 102.50 करोड़ रुपए का मोबाइल एक्सपोर्ट दुबई (UAE) की दो कंपनियों मैसर्स फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO और मैसर्स ड्रैगन ग्लोबल FZCO को करना दिखाया गया था।     शेल कंपनियों का नेटवर्क: एक ही नंबर और ईमेल से खुलीं फर्में: जब ED ने गहराई से जांच की तो पता चला कि जिन स्थानीय सप्लायर्स से मोबाइल खरीदना दिखाया गया था, वे असल में केवल कागजी (शेल) कंपनियां थीं। कई फर्में एक ही मोबाइल नंबर और एक ही ईमेल आईडी पर चल रही थीं। इनका काम सिर्फ फर्जी बिल बनाना और बिना किसी सामान की डिलीवरी के केवल कागजी एंट्री घुमाना था।     दुबई कनेक्शन भी खुद का ही: ED के मुताबिक, दुबई जिन कंपनियों को मोबाइल का निर्यात दिखाया गया, वे असल में कोई बाहरी कंपनियां नहीं थीं, बल्कि उनका रिमोट कंट्रोल भी इसी आरोपी ग्रुप के हाथों में था। यानी बिना किसी मोबाइल की आवाजाही के सिर्फ कागजों पर करोड़ों का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट चल रहा था। ₹102.99 करोड़ की 'अपराध की कमाई ED ने अब तक की जांच में इस पूरे घोटाले से हुईअपराध की कमाई की कुल रकम करीब 102.99 करोड़ रुपए आंकी है। एजेंसी ने बीते 9 मई 2026 को इस मामले में धारा 17 के तहत बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया था, जिसके बाद मुख्य आरोपी संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार किया गया था। ED का कहना है कि मोबाइल एक्सपोर्ट के नाम पर की गई मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खोली जा चुकी हैं, जबकि इस मामले में लोकल सेल (स्थानीय बिक्री) को लेकर जांच अभी भी जारी है, जिससे कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।