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अब सफर होगा आसान और ग्रीन: 100 ई-बसें सड़कों पर, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

ग्वालियर ग्वालियर शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार की पीएम-ई बस सेवा के तहत ग्वालियर को मिलने वाली 100 इलेक्ट्रिक बसें डिपो का काम पूरा होते ही सड़कों पर दौड़ेंगी। इन बसों को इंटेलिजेंट ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (पीआईएस) से लैस किया जाएगा, जिससे उनकी हर गतिविधि स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटर की जा सकेगी। निगम के अधिकारियों ने धार के पीथमपुर में तैयार हो रही बसों का निरीक्षण भी कर लिया है। हालांकि जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो पर सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य देरी से शुरू होने के कारण परियोजना में कुछ विलंब हो सकता है। ऐसे में अब ई-बसों के मई-जून 2026 तक शहर में शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। बसों का संचालन अब नगर निगम की जगह राज्य सरकार की होल्डिंग कंपनी के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केंद्र सरकार करेगी सिस्टम का टेंडर बसों में लगाए जाने वाले आइटीएमएस और पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम के लिए टेंडर और कंपनी का चयन केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। बसों में स्पीकर सिस्टम भी होगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में कंट्रोल रूम से ड्राइवर और कंडक्टर को सीधे निर्देश दिए जा सकेंगे।   ऐसे चलेगी ई-बस सेवा पीएम-ई बस सेवा के तहत शहर में कुल 100 बसें चलाई जाएंगी। पहले चरण में 60 बसें और दूसरे चरण में 40 बसें आएंगी। सभी बसें 9 मीटर लंबी मिडी इलेक्ट्रिक बसें होंगी। इनका संचालन जलालपुर आइएसबीटी और रमौआ डिपो से होगा और यहीं बनाए जा रहे चार्जिंग स्टेशन से बसों को चार्ज किया जाएगा। 10 रूट किए गए फाइनल शहर में बस संचालन के लिए 10 रूट तय किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने इन रूटों का निरीक्षण कर नागरिकों से सुझाव भी लिए हैं। बसें आते ही इन्हीं रूटों पर संचालन शुरू किया जाएगा। 15.50 करोड़ से बन रहे डिपो और चार्जिंग स्टेशन ई-बस सेवा के संचालन और रखरखाव के लिए रमौआ और आइएसबीटी डिपो पर करीब 15.50 करोड़ रुपए से सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य कराए जा रहे हैं। इसमें रमौआ डिपो पर सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 4.29 करोड़, चार्जिंग के लिए एचटी कनेक्शन 7.31 करोड़, आइएसबीटी में सिविल व आंतरिक इलेक्ट्रिकल कार्य 1.16 करोड़ और बाहरी इलेक्ट्रिकल कनेक्शन के लिए 2.73 करोड़ रुपए शामिल हैं। 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान बस संचालन के लिए एजेंसी को नगर निगम 58.14 रुपए प्रति किलोमीटर का भुगतान करेगा। इसमें केंद्र सरकार 22 रुपए प्रति किलोमीटर देगी, जबकि शेष 36.14 रुपए नगर निगम को वहन करना होगा। निगम को उम्मीद है कि बसों से होने वाले कलेक्शन से इस खर्च की भरपाई हो जाएगी। बसों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं पीएम-ई बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होंगी। इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, डिजिटल डिस्प्ले और पैसेंजर सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं होंगी। बस जिस स्थान से गुजरेगी, उस क्षेत्र की जानकारी डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखाई देगी। ये बसें एक बार चार्ज होने पर लगभग 180 किलोमीटर तक चल सकेंगी। नोडल अधिकारी मुनीष सिकरवार के अनुसार पीथमपुर में बसों का निरीक्षण किया जा चुका है और बसें तैयार हैं। रमौआ और आइएसबीटी में चार्जिंग स्टेशन का कार्य पूरा होते ही संभावित रूप से मई-जून तक बसें ग्वालियर में आ सकती हैं। पहले चरण में 60 बसें आएंगी।

खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री

देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हम सबके लिए सम्मान का विषय – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है – मुख्यमंत्री हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना हो – मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ और मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से किया सम्मानित उत्तर प्रदेश को मिला ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार, राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए मिला सम्मान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के इस सम्मान समारोह में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है और इससे भी अधिक प्रसन्नता इस बात की है कि इस सम्मान समारोह का आयोजन प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान समारोह के कारण देश के इन प्रतिभावान खिलाड़ियों का उत्तर प्रदेश की धरती पर आगमन हुआ है। यह हम सबके लिए सम्मान का विषय तो है ही, साथ ही यह प्रदेश की नई पीढ़ी को खेल के क्षेत्र में अचीवमेंट्स हासिल करने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगा। स्पोर्ट्स अवार्ड समारोह का आयोजन एक निजी मीडिया समूह ने किया था, जिसमें देशभर के दिग्गज खिलाड़ियों और खेल हस्तियों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खेल केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का माध्यम है। खेल भावना व्यक्ति को मजबूत बनाती है, विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस देती है और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में खेलों के विकास के लिए कई सार्थक प्रयास किए हैं।  उन्होंने बताया कि 2017 के बाद से हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहल को मुहिम की तरह आगे बढ़ाया। यही नहीं, वर्तमान में हमारी सरकार प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में एक खेल मैदान, हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम और हर जिले में एक स्टेडियम विकसित कर रही है। वाराणसी में बीसीसीआई के एक इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हुआ है, गोरखपुर में भी इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही पिछले वर्ष मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है। साथ ही हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाए, जहां हमारे खेल क्षेत्र के दिग्गज खिलाड़ियों और अनुभवी प्रशिक्षकों के माध्यम से स्थानीय युवकों को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं के लिए ट्रेनिंग दी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और जॉब सिक्योरिटी देने के लिए हमारी सरकार ने खेल पॉलिसी में बदलाव लाकर खिलाड़ियों को राज्य में सरकारी नौकरियां देने की नीति लागू की है, जिससे वे निश्चिंत होकर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि मुझे बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमारी सरकार ने 500 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को विभिन्न पदों पर सरकारी नौकरी प्रदान की है। इनमें से कई वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम के आयोजन के लिए मीडिया समूह और आयोजक टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को सम्मान देने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का मंच प्रदान करते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. उषा सहित कार्यक्रम में शामिल हुई खेल जगत की हस्तियों के स्वागत से हुई। इस अवसर पर देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इस क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेनिस जगत में देश का नाम रोशन करने वाले लिएंडर पेस को ‘मेंटॉर ऑफ द इयर’ के पुरस्कार से सम्मानित किया। वहीं, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया, जबकि हॉकी के दिग्गज पी. आर. श्रीजेश को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राज्य में विकसित हो रहे खेल ढांचे और नीतियों के लिए ‘स्टेट ऑफ द इयर’ का पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में ‘टीम ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारत की महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम को दिया गया, जबकि ‘फेडरेशन ऑफ द इयर’ का पुरस्कार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को मिला। समारोह में बताया गया कि इस वर्ष मीडिया समूह की ओर से खेल की 45 श्रेणियों में 100 से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और लगन से देश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्पर्धाओं में ऊंचा किया है। कार्यक्रम में फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया, बीसीसीआई के वाइस प्रेसिडेंट राजीव शुक्ला,  क्रिकेटर कुलदीप यादव, महिला क्रिकेट खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा, हरलीन देवल आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

नदियों की निर्मलता के लिए सीएम योगी ने पूर्व सरकार से 10 गुना अधिक काम किया

नदियों की निर्मलता के लिए पूर्व की सरकार की तुलना में सीएम योगी ने किया 10 गुना काम नमामि गंगे : 2017 से पहले केवल 5 एसटीपी किए जा सके इंस्टॉल 9 साल में नमामि गंगे योजना के तहत 10 गुना बढ़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 2017 के बाद योगी सरकार ने 50 एसटीपी किए इंस्टॉल प्रदेश में लगभग पांच हजार मिलियन लीटर प्रतिदिन वेस्ट वाटर किया जा रहा साफ वर्तमान में प्रदेश भर में 160 एसटीपी किए जा चुके इंस्टॉल लखनऊ उत्तर प्रदेश में नदियों की निर्मलता और गंदे पानी के शोधन के काम में योगी सरकार ने नौ वर्षों में रफ्तार कई गुना बढ़ा दी है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के तहत सिर्फ 5 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) इंस्टॉल हो पाए थे, वहीं 2017 के बाद पिछले 9 साल में ऐसे 50 से अधिक एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, यानी इस अवधि में क्षमता लगभग 10 गुना बढ़ी है। प्रदेश में लगभग 160 एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग पांच हजार मिलियन लीटर (एमएलडी) वेस्ट वाटर को शुद्ध कर नदियों में जाने से रोका जा रहा है। पूर्व की सरकारों की तुलना में मौजूदा योगी सरकार में सीवर शोधन ढांचे के विस्तार की रफ्तार लगभग दस गुना तक बढ़ी है। नमामि गंगे : 9 साल में 10 गुना बढ़े एसटीपी नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की संरचना तैयार की जा रही है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के अंतर्गत केवल 5 एसटीपी इंस्टॉल हो सके थे, वहीं योगी सरकार में 50 से अधिक नए एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं। लखनऊ में 9 संचालित एसटीपी, 624.50 एमएलडी की क्षमता राजधानी लखनऊ में इस समय कुल 09 सीवेज शोधन संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल शोधन क्षमता 624.50 एमएलडी है। इन संयंत्रों के जरिए गोमती एवं उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले पानी को पहले ही शुद्ध किया जा रहा है। संचालित एसटीपी भरवारा, दौलतगंज (शहरी), दौलतगंज (ग्रामीण), हाथी पार्क, जीएच कैनाल, वृंदावन, यूपी आवास विकास परिषद क्षेत्र और सीजी सिटी आदि स्थानों पर स्थापित हैं। इन प्लांटों से निकला ट्रीटेड वॉटर एक ओर नदियों को स्वच्छ रखने में मदद कर रहा है, वहीं चरणबद्ध तरीके से इसके पुन: उपयोग (रीयूज) की योजना भी तैयार की जा रही है। लखनऊ में 3 निर्माणाधीन और 4 प्रस्तावित एसटीपी लखनऊ में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा कुल 03 एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 153.50 एमएलडी होगी। ये प्लांट बारिकल, लोनियांपुरवा और बिजनौर क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं। राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता पहुंचेगी 1000 एमएलडी के पार इसके अलावा लखनऊ में 4 नए एसटीपी बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और मस्तेमऊ के निर्माण का प्रस्ताव है, जिनकी कुल क्षमता 342 एमएलडी होगी। इन संयंत्रों के तैयार हो जाने के बाद राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता 1000 एमएलडी से अधिक पहुंचने का अनुमान है। 2017 से पहले नदियों की निर्मलता कागजों तक सीमित रही 2017 से पहले नदियों की निर्मलता की योजनाएं कागजों तक सीमित रहीं और एसटीपी निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त थी। वहीं, योगी सरकार में नए प्लांटों के साथ-साथ पुराने संयंत्रों के उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है।

खनिज एवं उपखनिज खनन से राजस्व में वृद्धि, सोनभद्र का योगदान सबसे अधिक

खनिज एवं उपखनिज खनन से हुई राजस्व प्राप्ति में वृद्धि, सोनभद्र का रहा सर्वाधिक योगदान सोनभद्र जनपद से सर्वाधिक 678.28 करोड़ रुपये की हुई राजस्व प्राप्ति, महोबा, हमीरपुर, झांसी और जालौन रहे अन्य प्रमुख जनपद राजस्व प्राप्ति के साथ अवैध खनन पर रोक और पर्यावरणीय मानकों के पालन को सुनिश्चित कर रहा है प्रदेश का भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग लखनऊ  उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप खनिज संसाधनों का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में अधिकाधिक योगदान का सतत प्रयास कर रहा है। इस संबंध में विभाग की ओर से हाल ही में संपन्न हुई मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में फरवरी माह के राजस्व संग्रह के आंकड़े जारी किए गए। जिसके अनुसार प्रदेश के खनिज संपदा से संपन्न प्रमुख दस जनपदों से लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया। जिसमें सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है, इसी क्रम में महोबा, हमीरपुर, झांसी और जालौन जनपद खनन आधारित राजस्व प्राप्ति में प्रमुख रहे। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग प्रदेश में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए राजस्व संग्रह में वृद्धि सुनिश्चित कर रहा है। इस क्रम में खनिज एवं उपखनिज के खनन से फरवरी माह में सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है। सोनभद्र जनपद ने मुख्य खनिजों के खनन से 402.79 करोड़ रुपये, जबकि उपखनिजों के खनन से 275.49 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। वहीं महोबा ने 394.9 करोड़ रुपये, हमीरपुर ने 389.61 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया। जबकि झांसी से 215.83 करोड़ रुपये, जालौन से 225.62 करोड़ तथा सहारनपुर से 227.58 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति दर्ज की गई। इस क्रम में अन्य प्रमुख जनपदों में बांदा ने 209.98 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जबकि प्रयागराज से 136.9 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। फतेहपुर और कौशांबी जैसे जनपदों से क्रमशः 40.31 करोड़ रुपये और 24.41 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया गया। समीक्षा बैठक में विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के दस प्रमुख खनिज संपन्न जिलों से फरवरी माह में लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विभागीय प्रयासों और सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था का परिणाम माना जा रहा है।  विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए विभाग की ओर से प्रदेश में खनन गतिविधियों की सतत निगरानी एवं खनन पट्टों के आवंटन और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है, जिससे राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने किया इनोवेशन महाकुंभ 1.0 के पोस्टर का विमोचन

मुख्यमंत्री साय ने किया इनोवेशन महाकुंभ 1.0 के पोस्टर का विमोचन रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी स्थित निवास कार्यालय में "इनोवेशन महाकुंभ 1.0" के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति मनोज श्रीवास्तव और स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत समन्वयक जगदीश पटेल भी उपस्थित रहे। बस्तर के युवाओं में नवाचार,उद्यमिता और स्वरोजगार में तकनीक आधारित विकास हेतु “ इनोवेशन महाकुंभ 1.0 का आयोजन आगामी 4 एवं 5 मई को किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर और स्वावलंबी भारत अभियान, पीएम ऊषा एवं इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के साथ किया जाएगा। जिसमें एनआईटी रायपुर,आईआईएम रायपुर,आईआईटी भिलाई, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् की भी सहभागिता होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ादेव की पूजा कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ादेव की पूजा कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की शहीद वीर नारायण सिंह एवं वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमाओं का किया अनावरण रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम ओड़ान में गोंड समाज के पवित्र पूजा स्थल पर आयोजित बड़ादेव स्थापना कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विधि-विधान से बड़ादेव की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे पारंपरिक और आध्यात्मिक आयोजन हमारी संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह एवं वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमाओं का अनावरण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट प्रेरणा का स्रोत है। इसी प्रकार रानी दुर्गावती ने अपने अदम्य साहस और स्वाभिमान से गोंडवाना की गरिमा को अक्षुण्ण रखा। मुगल सेना के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय उन्होंने रणभूमि में वीरगति प्राप्त कर मातृभूमि के प्रति अपने समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर जांजगीर-चांपा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक संदीप साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आकांक्षा जायसवाल, उपाध्यक्ष पवन साहू, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सप्तमी से नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) तक प्रदेश भर में वृहद आयोजन कराएगी योगी सरकार

चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों-शक्तिपीठों में गूंजेंगे गीत-भजन सप्तमी से नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) तक प्रदेश भर में वृहद आयोजन कराएगी योगी सरकार  देवी गायन-दुर्गा सप्तशती पाठ, शक्ति आराधना, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन, कलाकारों का किया गया चयन  महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए योगी सरकार चला रही ‘मिशन शक्ति’  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चैत्र नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि (25,26 व 27 मार्च) को देवी मंदिरों-शक्तिपीठों में देवीगीत, भजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, शक्ति आराधना, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। संस्कृति विभाग इसके भव्य आयोजन की तैयारी में जुट गया है। आयोजन के लिए कलाकारों का चयन कर लिया गया है। जनपदों में स्थानीय प्रशासन के समन्वय से यह आयोजन होगा। बता दें कि प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए विशेष अभियान "मिशन शक्ति" चलाया जा रहा है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग द्वारा महिलाओं व बालिकाओं की सहभागिता के साथ प्रदेश में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तावित किए गये हैं। इन शक्तिपीठों- देवी मंदिरों में होंगे आयोजन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संस्कृति विभाग की तरफ से प्रदेश के देवी मंदिर व शक्तिपीठों में इसकी तैयारी कर ली गई है। सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि पर मां विंध्यवासिनी देवी (विंध्याचल मीरजापुर), ज्वाला देवी सोनभद्र, सीता समाहित स्थल भदोही, अलोपी देवी प्रयागराज, कड़ावासिनी कौशांबी, पाटेश्वरी देवी (देवीपाटन-बलरामपुर), ललिता देवी (नैमिषारण्य-सीतापुर), शाकुम्भरी देवी सहारनपुर, कात्यायनी देवी मथुरा, मां शीतला चौकिया धाम जौनपुर, बेल्हा देवी प्रतापगढ़, चंडिका देवी उन्नाव, विशालाक्षी देवी वाराणसी, देवकाली मंदिर औरैया, मां तरकुलहा देवी धाम गोरखपुर, मां शीतला स्थल मऊ, ललिता देवी प्रयागराज, मां शिवानी देवी चित्रकूट, गायत्री शक्तिपीठ हमीरपुर, बैरागढ़ माता जालौन, कुष्मांडा देवी घाटमपुर कानपुर देहात, शीतला माता मंदिर मैनपुरी, चामुंडा माता मंदिर फिरोजाबाद, बीहड़ माता मंदिर फिरोजाबाद, चंद्रिका देवी मंदिर व संकटा देवी मंदिर लखनऊ समेत अन्य देवी मंदिरों- शक्तिपीठों में आयोजन होंगे।  जनसहभागिता से होंगे आयोजन, प्रशासन के सहयोग से तय समय पर पूरी कर ली जाएं व्यवस्थाएं   योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि इस आध्यात्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम में आमजन की सहभागिता विशेष रूप से सुनिश्चित हो। इससे जुड़ी व्यवस्थाएं स्थानीय स्तर पर प्रशासन, पुलिस, नगर निगम आदि के माध्यम से ससमय पूरी कर ली जाएं। प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान "मिशन शक्ति" से भी इसे जोड़ा जाए। देवी मंदिरों, शक्तिपीठों में लोक कलाकारों, भजन मंडलियों, कीर्तन मंडलियों का चयन भी किया जा चुका है।   साफ-सफाई व श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर  देवीपाटन मंदिर बलरामपुर, शाकम्भरी देवी मंदिर सहारनपुर, विंध्यवासिनी देवी धाम मीरजापुर समेत सभी देवी मंदिरों व शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित होने चाहिए। कतारबद्ध श्रद्धालुओं को तेज धूप में खड़े होने में समस्या न हो। सभी देवालयों में पेयजल व छाजन की भी पुख्ता व्यवस्था हो। रही। योगी सरकार ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया है कि जनपदों में स्थानीय प्रशासन के सहयोग से सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रत्येक आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, ध्वनि, प्रकाश एवं दरी-बिछावन आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करा ली जाए। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सफाई कर्मी भी लगाकर स्वच्छता रखी जाए।

मां कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में 126 ज्योत प्रज्वलित

मां कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में 126 ज्योत प्रज्वलित रायपुर  प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ कहार भोई समाज के द्वारा रायपुरा स्थित मां कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में ज्योत जलाई गई। इस वर्ष लगभग 126 ज्योत समाज के द्वारा जलाई गई । इस आशय की जानकारी मां कन्हाई परमेश्वरी सेवा समिति के उपाध्यक्ष  प्रशांत नायक द्वारा दी गई।

योगी सरकार का द शैडो एप: बेटियों की सुरक्षा में परछाईं की तरह होगा साथी

योगी सरकार का द शैडो एप परछाईं की तरह करेगा बेटियों की सुरक्षा  सीएम योगी की मंशा के अनुरुप यूपीएसआईएफएस ने लांच किया ‘द शैडो’ एप, बेटियों की सुरक्षा की दिशा में बड़ी पहल लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को देखते यूपी सरकार ने आधी आबादी को सम्मानजनक व सुरक्षित वातावरण देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी क्रम में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) ने एक अनूठी पहल की है। संस्थान के बीटेक स्टूडेंट्स द्वारा विकसित “द शैडो” (यूपीएसआईएफएस एप) एप स्टूडेंट्स, विशेषकर बेटियों की सुरक्षा व शैक्षणिक प्रबंधन को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह एप एक समग्र सुरक्षा-आधारित डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया गया है, जो हर स्टूडेंट के साथ उसकी “परछाईं” की तरह जुड़ा रहेगा। यह तकनीक बेटियों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास है। ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल’ से बेटियों की सुरक्षा को नई मजबूती यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि “द शैडो” इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स द्वारा ही विकसित किया गया है। इस एप की खासियत केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह स्टूडेंट्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनके हर मूवमेंट को अधिकृत तरीके से ट्रैक करता है। कैंपस में प्रवेश, निकास, अवकाश अनुरोध और अन्य गतिविधियों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे संस्थान प्रशासन को रियल-टाइम जानकारी मिलती रहती है। इसमें अटेंडेंस, असाइनमेंट, परीक्षा प्रदर्शन और अकादमिक प्रगति का पूरा डेटा भी उपलब्ध रहता है, जिससे स्टूडेंट्स, पैरेंट्स व टीचर तीनों एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहते हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि स्ट्डेंट्स की जिम्मेदारी भी तय होगी। एप में दिया गया ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम’ इसे और खास बनाता है। इसके तहत किसी भी छात्रा के कैंपस से बाहर जाने या विशेष अनुमति से जुड़े अनुरोध पर सबसे पहले अभिभावकों की मंजूरी अनिवार्य है। इससे बेटियों की सुरक्षा को एक अतिरिक्त परत मिलती है और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होता है। इससे छात्राओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित होगा।  एसओएस इमरजेंसी सिस्टम से मिलेगी तुरंत मदद, रहेगी हर खतरे पर नजर “द शैडो” एप का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका इंटीग्रेटेड एसओएस इमरजेंसी कॉल सिस्टम है। यदि कोई छात्रा किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति में आती है, तो एक बटन दबाते ही संस्थान प्रशासन और अभिभावकों को तुरंत अलर्ट मिल जाता है। यह सुविधा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है, जिससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सकता है। इसके साथ ही क्यूआर-कोड आधारित डिजिटल गेट पास सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे कैंपस में अनधिकृत प्रवेश और अवांछनीय गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जा सके। इंस्टीट्यूट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह के मार्गदर्शन में इस एप को बीटेक छात्र हर्ष व आदित्य मिश्रा ने विकसित किया है। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि “द शैडो” एप बेटियों की सुरक्षा को लेकर तकनीकी नवाचार का एक सशक्त उदाहरण है, जो सरकारी प्रयासों को संस्थागत स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाता है। यह ऐप दिखाता है कि कैसे डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त किया जा सकता है। यह स्टूडेंट्स के लिए एक “डिजिटल साथी” की तरह है, जो हर पल उनकी सुरक्षा, निगरानी और शैक्षणिक प्रगति का ध्यान रखेगा।

योगी सरकार की अभ्युदय योजना से यूपीएससी में प्रदेश की तीन बेटियों ने किया परचम लहराना

नारी तू नारायणी योगी सरकार की अभ्युदय योजना का मिला लाभ, यूपीएससी में प्रदेश की तीन बेटियों ने लहराया परचम मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से यूपी की बेटियों को लगे ‘पंख’, अब तक ढाई सौ से अधिक ने पाई सफलता एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने अब तक कराया रजिस्ट्रेशन 2025 में योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने हासिल की उल्लेखनीय सफलता महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं यूपी की बेटियां ‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए बन रहीं हैं प्रेरणा लखनऊ उत्तर प्रदेश की बेटियां अब सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें साकार भी कर रहीं हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना इनके लिए ऐसे ‘पंख’ बनकर उभरी है, जिसके सहारे वे देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परचम लहरा रही हैं। संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में इस योजना का लाभ लेकर प्रदेश की तीन बेटियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। खास बात ये है कि इस योजना के जरिए अब तक ढाई सौ से अधिक बेटियां सफलता हासिल कर चुकीं हैं और अधिकारी बनकर यूपी को दिशा दिखा रहीं हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि योगी सरकार की शिक्षा केंद्रित योजनाओं की प्रभावशीलता का भी प्रमाण है।  महंगी कोचिंग के बिना भी बड़ी सफलता 2021 में शुरू हुई मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने अब तक एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को जोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत मंच दिया है। खास बात यह है कि बेटियां इस योजना के जरिए महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी बड़ी सफलता हासिल कर रहीं हैं। ‘नारी तू नारायणी’ की भावना को साकार करती ये बेटियां आज समाज के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं। मानसी : सेल्फ स्टडी से 444वीं रैंक तक का सफर गाजियाबाद के प्रताप विहार की रहने वाली मानसी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 444वीं रैंक हासिल की। प्राइवेट जॉब करने वाले पिता समेत परिवार में पांच सदस्य हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मानसी ने घर पर ही तैयारी की और अभ्युदय योजना के मार्गदर्शन से सफलता हासिल की। अदिति सिंह: पढ़ाई के साथ दूसरों का भी किया मार्गदर्शन झांसी की अदिति सिंह ने 859वीं रैंक प्राप्त की। इंजीनियर पिता और शिक्षिका मां की बेटी अदिति ने सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की। खास बात यह रही कि वह स्वयं भी अभ्युदय योजना के तहत अन्य छात्रों को पढ़ाकर उनकी मदद करती रहीं। तनीषा सिंह : घर से पढ़ाई, बड़ा मुकाम आगरा की तनीषा सिंह ने 930वीं रैंक हासिल की। रेवेन्यू इंस्पेक्टर पिता और गृहिणी मां के परिवार से आने वाली तनीषा ने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की और अभ्युदय योजना की सहायता से सफलता प्राप्त की। कीर्तिका सिंह : डिप्टी एसपी बन मिसाल बनीं लखनऊ की रहने वाली कीर्तिका सिंह 2022 में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी बनीं। एटा में तैनात कीर्तिका किसान परिवार से हैं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तैयारी की और अभ्युदय योजना का लाभ उठाया। बदलती तस्वीर : गांव-शहर हर जगह जल रही शिक्षा की लौ मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने न केवल शिक्षा को सुलभ बनाया है, बल्कि बेटियों में आत्मविश्वास भी जगाया है। अब वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यूपी की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। संदेश है साफ : अवसर मिला तो बेटियां उड़ान भरेंगी इन सफलताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर सही दिशा और संसाधन मिलें, तो प्रदेश की बेटियां देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज उन लाखों सपनों को आकार दे रही है, जो कभी संसाधनों के अभाव में अधूरे रह जाते थे।