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योग से स्वस्थ जीवन और सशक्त समाज का निर्माण संभव : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर. राज्यपाल रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित योग शिविर में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संदेश का वाचन किया एवं सामूहिक योगाभ्यास में भाग लिया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने बारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी और कहा कि यह हर्ष का विषय है कि पूरा छत्तीसगढ़ इस ऐतिहासिक अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रहा है। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध रहने की कामना की। डेका ने प्रदेशवासियों से कहा कि योग को जीवनशैली में शामिल करें, प्रतिदिन योगाभ्यास की आदत बनाए और बच्चों को भी इसकी आदत डाले जिससे उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और वे  भविष्य में देश के अच्छे नागरिक बनेंगे। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मन और भावनाओं को सुदृढ़ बनाकर व्यक्ति के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर डेका ने विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।  योगाभ्यास कार्यक्रम में विधायकगण पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, सुनील सोनी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्य सचिव विकास शील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, पुलिस कमिश्नर रायपुर संजीव शुक्ला, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हुए। बलरामपुर में हजारों लोगों ने किया सामूहिक योगाभ्यास अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बलरामपुर जिले में “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम के साथ व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय स्थित स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल के हाई स्कूल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिले की प्रभारी मंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सहभागिता करते हुए विभिन्न योगासनों एवं प्राणायाम का अभ्यास किया तथा नागरिकों को नियमित योग अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। आज विश्व के अनेक देशों में योग को स्वास्थ्य, संतुलन और मानव कल्याण के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का विज्ञान है। योग और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं तथा यह व्यक्ति को स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवन की दिशा प्रदान करते हैं। योग हमारी सांस्कृतिक विरासत और स्वस्थ जीवन का आधार है : ओ.पी. चौधरी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय स्थित भीमा तालाब के जाज्वल्य देव द्वार परिसर में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों के सदस्यों तथा नागरिकों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास में भाग लिया। इस अवसर पर वित्त मंत्री चौधरी ने जिलेवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों के कारण योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर को अपना रही है। उन्होंने कहा कि योग “विकास भी, विरासत भी” की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है, जिसने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को विश्व मंच पर सम्मान दिलाया है।

राष्ट्रपति मुर्मु की मौजूदगी में सजा दीक्षांत समारोह, मेधावी छात्रों को मिले गोल्ड मेडल

जबलपुर. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह रविवार को उस समय ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने समारोह में पहुंचकर मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्साह और गरिमा का माहौल था। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। सर्किट हाउस से विश्वविद्यालय तक पूरे मार्ग पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती रही। समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। राष्ट्रपति के पहुंचते ही परिसर में मौजूद विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। शोभायात्रा और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद पारंपरिक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें मंचासीन अतिथि शामिल हुए। इसके बाद राष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलित कर 36वें दीक्षांत समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। कुलगान और अन्य औपचारिक कार्यक्रमों के साथ समारोह आगे बढ़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। कुलगुरु ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां दीक्षांत भाषण की शुरुआत करते हुए कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने वीरांगना रानी दुर्गावती को नमन किया। उन्होंने कहा कि 24 जून को रानी दुर्गावती का 462वां बलिदान दिवस है और विश्वविद्यालय उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। कुलगुरु ने बताया कि 23 जुलाई 2024 को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने विश्वविद्यालय को 'ए' ग्रेड प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय मात्र 0.04 अंक से 'ए++' ग्रेड हासिल करने से चूक गया। इसके बावजूद यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्ता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाती है। रोजगारोन्मुखी शिक्षा और डिजिटल सुधारों पर जोर प्रो. वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय में कई नवाचार लागू किए गए हैं। रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से 10 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने 28 घंटे में 28 परीक्षा परिणाम घोषित कर एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। 'भारत' शब्द को बनाया पहचान का हिस्सा अपने संबोधन में कुलगुरु ने एक विशेष पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने अपने सभी आधिकारिक दस्तावेजों में 'इंडिया' के स्थान पर 'भारत' शब्द का उपयोग प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मगौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया। मेधावियों को मिला राष्ट्रपति के हाथों सम्मान समारोह के अंतिम चरण में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न संकायों के चयनित विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान कर सम्मानित किया। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह क्षण जीवनभर की याद बन गया। पूरे समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर तालियों की गूंज और उपलब्धियों के उत्सव से सराबोर नजर आया।

राजनीतिक विज्ञापनों पर पाबंदी से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) के 2019 के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें आदर्श आचार संहिता (MCC) के दौरान दिल्ली मेट्रो में ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाई गई थी। हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो उन कंपनियों के समूह ने दायर की थीं जिनके पास दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के साथ विज्ञापन के अधिकार हैं। इन अधिकारों में ट्रेनों के अंदर और बाहर, साथ ही सिविल स्ट्रक्चर पर विज्ञापन लगाने के कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं। DMRC के फैसले को सही ठहराया इन याचिकाओं में एक सिंगल जज के जनवरी 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें MCC (आदर्श आचार संहिता) लागू रहने के दौरान मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने के DMRC के फैसले को सही ठहराया गया था। याचिकाकर्ताओं ने जून 2019 में ECI की ओर से DMRC को भेजे गए एक संदेश का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान कमर्शियल विज्ञापनों के लिए लीज पर दी गई जगह पर कोई भी राजनीतिक विज्ञापन नहीं लगाया जाएगा। अचार संहिता में तुरंत हटेगा विज्ञापन अगर दी गई जगह पर कोई राजनीतिक विज्ञापन है, तो आदर्श आचार संहिता लागू होते ही उसे तुरंत हटा दिया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह निर्देश संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, क्योंकि MCC के दौरान राजनीतिक प्रचार के लिए बस शेल्टर जैसी जगहों के इस्तेमाल पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अपील करने वालों पर अपना बिजनेस करने को लेकर 'कोई पूरी रोक नहीं' थी। कोर्ट ने कहा कि MCC लागू होने के दौरान भी वे ऐसे विज्ञापन दिखाने के लिए आजाद थे जो राजनीतिक नहीं थे। बेंच ने कहा कि राजनीतिक विज्ञापनों पर सीमित रोक का मतलब विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगाना नहीं है। संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक विज्ञापनों को दिखाने पर रोक (वह भी सीमित समय के लिए) का मतलब यह नहीं है कि कंपनियों को कोई भी विज्ञापन दिखाने से रोका गया था। इसलिए, यह दलील कि इससे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी) और (g) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है, बेबुनियाद है।  

रांची एयरपोर्ट की उड़ानों में बदलाव, अहमदाबाद, पटना और चेन्नई रूट प्रभावित

 रांची मानसून सीजन को देखते हुए विमानन कंपनियों ने अपनी उड़ान सेवाओं के शेड्यूल में बदलाव किया है। इंडिगो एयरलाइंस ने रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से संचालित होने वाली कुछ प्रमुख उड़ानों के दिनों में परिवर्तन किया है। नए शेड्यूल के अनुसार यात्रियों को यात्रा से पहले फ्लाइट की स्थिति जरूर जांच लेने की सलाह दी गई है। इंडिगो की रांची-अहमदाबाद विमान सेवा अब सप्ताह में पांच दिन संचालित होगी। यह उड़ान रविवार, मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को उपलब्ध रहेगी। वहीं रांची-पटना रूट पर विमान सेवा मंगलवार और गुरुवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी दिनों में संचालित होगी। रांची से कोलकाता जाने वाले यात्रियों के लिए भी बदलाव किया गया है। इंडिगो की उड़ान संख्या 6ई-7251 अब सप्ताह में तीन दिन उपलब्ध नहीं होगी। यह सेवा सोमवार, बुधवार और शनिवार को संचालित नहीं की जाएगी। इसके अलावा रांची-चेन्नई विमान सेवा सप्ताह में चार दिन रविवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को उड़ान भरेगी। मानसून के दौरान मौसम की स्थिति का असर विमान परिचालन पर पड़ सकता है। तेज बारिश, कम दृश्यता या खराब मौसम की स्थिति में उड़ानों के समय में बदलाव या देरी की संभावना रहती है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि एयरपोर्ट पहुंचने से पहले एयरलाइंस की वेबसाइट, मोबाइल एप या हेल्पलाइन से फ्लाइट का ताजा अपडेट जरूर प्राप्त कर लें। यात्रियों को बोर्डिंग समय से पहले एयरपोर्ट पहुंचने और यात्रा के दौरान जरूरी दस्तावेज साथ रखने की भी अपील की गई है, ताकि अंतिम समय में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।  

भोपाल स्टेशन पर ‘हरित युवा–हरित भारत’ अभियान की शुरुआत, यात्रियों को बांटे गए 500 पौधे

भोपाल पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से आज भोपाल रेलवे स्टेशन पर **हरित युवा–हरित भारत अभियान** का शुभारंभ मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS), ICYM एवं YCS द्वारा MIJARC के सहयोग से किया गया। अभियान के अंतर्गत भोपाल स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को 500 निःशुल्क फलदार पौधों का वितरण कर पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  आशीष दुबे  स्टेशन डायरेक्टर, भोपाल रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में  हैरिस लाल (मुख्य कार्यालय अधीक्षक, वाणिज्यिक – डीआरएम, भोपाल), राकेश (डिप्टी एसएस) तथा  सुरेन्द्र मोहन शर्मा (सेवानिवृत्त रिजर्वेशन सुपरिटेंडेंट) उपस्थित रहे। इस अवसर पर फादर शिल्टों अब्राहम, फादर जोशी, मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS) के समस्त स्टाफ सदस्य तथा एम.पी.आर.वाई.सी. (MPRYC) के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत फादर शिल्टों द्वारा अभियान के परिचय के साथ की गई। इसके बाद MPRYC के सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत फलदार पौधे भेंट कर किया। मुख्य अतिथि श्री आशीष दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा प्रत्येक नागरिक को वृक्षारोपण एवं पौधों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने इस जन-जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के हित में एक सराहनीय पहल बताया। साथ ही उन्होंने भारतीय रेलवे द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि हैरिस लाल ने कहा कि पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। इसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे और सभी जीव-जंतु शामिल हैं। स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन प्रदान करता है। बढ़ते प्रदूषण और पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, इसलिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रयास करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण ही हमारे सुरक्षित भविष्य की नींव है। कार्यक्रम के दौरान यात्रियों को पौधों का वितरण किया गया तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और हरित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित अतिथियों एवं सदस्यों ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का सफल आयोजन मध्य प्रदेश समाज सेवा संस्था (MPSSS), ICYM, YCS, MIJARC तथा MPRYC के संयुक्त सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का समापन फादर जोशीके आभार उद्बोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

भूमिहीन कृषि मजदूरों को बड़ी राहत, हर पात्र परिवार को मिलेंगे 10 हजार रुपये

सूरजपुर. राज्य सरकार द्वारा भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के उद्देश्य से "दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना" संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र हितग्राही परिवार को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है, जो खेती में परिश्रम तो करते हैं, परंतु उनके पास स्वयं की भूमि नहीं है। यह सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो। यह योजना भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। योजना के अंतर्गत आवेदन के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना आवश्यक है। पात्र समूह में भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी सहित अनुसूचित क्षेत्रों में देवस्थलों से जुड़े पुजारी, वैद्य, गुनिया एवं मांझी परिवार शामिल हैं। इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत आवेदन की प्रक्रिया अत्यंत सरल रखी गई है। इच्छुक हितग्राही ग्राम/नगर पंचायत कार्यालय से ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। पूर्ण आवेदन जमा करने के पश्चात विभाग द्वारा सत्यता जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त पंजीयन विवरण ऑनलाइन मोबाइल नंबर, आधार नंबर अथवा पंजीयन क्रमांक के माध्यम से भी देखा जा सकता है। नियमित वित्तीय सहायता भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए स्थायी लाभ सुनिश्चित करेगी। यह पहल राज्य सरकार की ग्रामीण कल्याण नीति में कमजोर वर्ग के उत्थान की प्राथमिकता को दर्शाती है।

अवैध खनन और माफियाओं पर जीरो टॉलरेंस: योगी आदित्यनाथ ने झांसी में दिए कड़े आदेश

झांसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आयुक्त सभागार में जनपद झांसी के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने जनपद के विकास और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए जाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद किए जाने का निर्देश देते हुए कहा कि ऐसा करने से विकास को गति मिलती है। उन्होंने नए कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण जनप्रतिनिधियों से कराए जाने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी गौरांग राठी द्वारा "जनसंवाद" एक नई पहल को प्रदेश स्तर तक लागू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य सचिव के समक्ष वीसी के माध्यम से जनसंवाद की जानकारी दिए जाने का सुझाव दिया, ताकि अन्य जिलों में भी इस पहल को प्रारंभ कराया जा सके। उन्होंने जिलाधिकारी द्वारा "न्यायालय आपके द्वार" अंतर्गत वादों की सुनवाई भी जनसंवाद के माध्यम से किए जाने की जानकारी देनें पर प्रसन्नता व्यक्त की। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जनपद में अवैध खनन, गो तस्करी, भू माफिया, शराब माफिया पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जहां से अवैध खनन होता है, उसे वहीं रोका जाए। सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाएं। इसके साथ ही उन्होंने ओवरलोडिंग पर भी कड़ा एक्शन लेने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है जहां खनन नीति बनाई गई है। उन्होंने निर्देश दिया कि जहां अवैध खनन किया गया, वहां समतलीकरण करते हुए व्यापक वृक्षारोपण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को पशुपालन विभाग की सहभागिता योजना का लाभ दिए जाने का सुझाव दिया। सीएम ने कहा कि गो आश्रय स्थल से ऐसे परिवार को एक गाय दें, जिसका लालन-पालन करते हुए दूध का इस्तेमाल स्वयं करें, उन्हें सरकार 1500 रुपये का भुगतान भी करेगी। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में उन्होंने आयुष्मान योजना अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों को किए जा भुगतान के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उद्यमी बनाकर आत्मनिर्भर बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने जनपद में एफपीओ द्वारा तैयार किए जा रहे मिलेट्स के उत्पादों को मार्केट उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि जो पट्टे दिए गए हैं, उनके परिजनों को मुआवजा दें या आवास। उन्होंने बीडा में स्किलिंग के लिए भी ट्रेनिंग कराए जाने का सुझाव दिया ताकि बेरोजगारों को यहीं पर रोजगार मिल सके। उन्होंने बीडा में इच्छुक निवेशकों को डेटा सेंटर की भूमि आवंटन पर सुझाव दिए की जरूरत के मुताबिक उन्हें भूमि उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बीडा की समीक्षा करते हुए कहा कि क्षेत्र के युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें गांव में ही प्रशिक्षण दिया जाए ताकि क्षेत्र में जो औद्योगिक इकाई स्थापित हो वहां उन्हें नौकरी मिल सके। उन्होंने कहा कि जनपद में माफियाओं पर जीरो टॉलरेंस के साथ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। महिलाओं और बालिकाओं को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो इसके लिए पेट्रोलिंग को और बेहतर बनाते हुए अधिक से अधिक किया जाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने पैदल पैट्रोलिंग करने के भी निर्देश दिए।      समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने जनपद में जनसंवाद अभिनव पहल की जानकारी दी। जल संरक्षण के कार्यों से लगभग 03 मीटर भूजल बढ़ जाने की जानकारी दी। उन्होंने जनपद में आगामी 02 माह में विद्युत व्यवस्था में काफी कुछ सुधार लाए जाने की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद की सभी गोशालाओं पर सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से लगातार विकास भवन कार्यालय से निगरानी की जा रही है। उन्होंने जनपद में तुलसी की खेती के विस्तार हेतु बुंदेलखंड औषधि फार्मर समिति के गठन की जानकारी दी और लगातार किसानों की संख्या में बढ़ोतरी। इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति सहित राजस्व वादों के निस्तारण की संबंध में जानकारी दी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति ने कानून व्यवस्था की जानकारी देते हुए मिशन शक्ति के तहत की किए गए कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने जनपद में माफियाओं पर की गई कार्यवाही की जानकारी दी। बैठक में सीईओ संजय खत्री ने बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण में भू अर्जन की जानकारी दी। उन्होंने आवश्यक तकनीकी कार्मिकों की आवश्यकता के संबंध में भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इस समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों द्वारा भी सुझाव रखे गए। सर्वप्रथम सांसद झांसी ललितपुर अनुराग शर्मा ने एम्स और आईआईटी के लिए जगह भूमि की उपलब्धता का सुझाव दिया। विधायक बबीना राजीव सिंह ने मुआवजे में आ रही दिक्कतों की जानकारी दी। इसी क्रम में विधायक मऊरानीपुर डॉ रश्मि आर्य, एमएलसी रमा निरंजन, एमएलसी डा बाबू लाल तिवारी से भी जानकारी ली। मेयर बिहारी लाल आर्य ने जनपद में डिफेंस कॉरिडोर और बीडा के दृष्टिगत एयरपोर्ट का अनुरोध किया।  

सीमा पर नशा तस्करी पर बड़ा वार, अमृतसर में संयुक्त कार्रवाई में 27 किलो हेरोइन जब्त

अमृतसर. भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित पुल मोरां के पास बीएसएफ और पुलिस ने सर्च अभियान चलाकर कुल 27 किलो हेरोइन की खेप बरामद की है। 25 पिस्तौल और एके 47 की बरामदगी के बाद यह बड़ी खेप है। आशंका जताई जा रही है कि यहीं हथियारों की खेप भी पाकिस्तानी तस्करों ने गिराई है। सर्च अभी तक जारी है। बीएसएफ को सूचना मिली थी कि पाक तस्करों ने ड्रोन के जरिए घरिंडा इलाके में हेरोइन की बड़ी खेप गिराई है। पुलिस के साथ ज्वाइंट आपरेशन के दौरान जवानों ने यह खेप बरामद की। भार करने पर इसका वजन 27 किलो बताया गया है। बता दें इससे पहले बुधवार को रमदास इलाके में 25 पिस्तौल, एक एके 47, 360 कारतूस, 47 मैगजीन और एक बुलेट प्रूफ जाकेट सहित एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इंदौर में NEET अभ्यर्थियों की सख्त चेकिंग, क्लचर से लेकर कानों की बाली तक हटवाई गई

इंदौर. मेडिकल में प्रवेश के लिए देश की सबसे बड़ी री परीक्षा NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर मध्यप्रदेश में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। नीट-यूजी परीक्षा केंद्र के बाहर सुबह 11 बजे से ही गहमागहमी शुरू हो गई थी। डेढ़ बजे तक प्रवेश मिलना था, लेकिन सुरक्षा के नियम इतने कड़े थे कि छात्र-छात्राएं हैरान रह गए। पेन-पेंसिल ले जाने पर भी पाबंदी केंद्र के बाहर ही पेन-पेंसिल रखवा लिए गए और बताया गया कि ये अंदर ही मिलेंगे। परीक्षार्थियों को केवल आधार कार्ड और प्रवेश पत्र ले जाने की अनुमति थी। जांच के दौरान पानी की पारदर्शी बोतलों से स्टिकर हटाए गए, हाथ के पवित्र धागे कटवाए गए और बालिकाओं के बालों से क्लच व पोनीटेल तक निकलवा दिए गए। पुलिस अधिकारियों ने संभाला छात्रा का मोबाइल इसी बीच छात्रा सेजल गुप्ता मोबाइल के साथ पहुंची। परिजन साथ नहीं थे, तो गेट पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसका मोबाइल सुरक्षित संभाला। कान की बाली के लिए भी छात्रा को रोका गया वहीं एक छात्रा सानिया मनियार की एक कान की बाली लाख कोशिशों के बाद भी नहीं निकली, तो गहन जांच के बाद उसे उसी हाल में प्रवेश दिया गया। सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई जब एक अन्य छात्रा अपना आधार कार्ड लाना भूल गई। उसे रोका गया तो वह रोने लगी; उसके माता-पिता तुरंत प्रिंट आउट निकलवाने के लिए दौड़े। परीक्षा से पहले का यह दृश्य किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं था।

झारखंड में परिसीमन पर आदिवासी प्रतिनिधिमंडल की चिंता, आरक्षित सीटों पर असर का दावा

 रांची  आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव के नेतृत्व में आदिवासी छात्र संघ के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। वर्ष 2027 में प्रस्तावित परिसीमन, अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा, पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के संवैधानिक संरक्षण एवं आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड लागू करने की मांग को ले ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि परिसीमन प्रक्रिया में आदिवासी समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखा जाए तथा वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों की वर्तमान संरचना को सुरक्षित रखा जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि वर्ष 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों में लगभग 6 सीटों तथा लोकसभा की 1 अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट के प्रभावित होने की आशंका है। इससे राज्य के आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा। इसी संवैधानिक चिंता को देखते हुए आदिवासी छात्र संघ द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन आदिवासी समाज के ऐतिहासिक संघर्ष, बलिदान एवं जल-जंगल-जमीन की रक्षा की भावना से हुआ है। इसलिए केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन के आधार पर आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। सुशील उरांव ने कहा कि बिहार राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के प्रविधानों के तहत झारखंड के आदिवासियों को प्राप्त जनजातीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व पूरी तरह अक्षुण्ण है और हमेशा अक्षुण्ण रहना चाहिए। इस संवैधानिक अधिकार में किसी भी प्रकार की कटौती या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं, खनन, औद्योगिकीकरण एवं विस्थापन के कारण हुए जनसांख्यिकीय बदलाव का राजनीतिक नुकसान आदिवासी समाज को नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा आदिवासी भूमि, मूलवासी भूमि एवं राज्य सरकार की गैर-मजरूआ भूमि पर हुए अनाधिकृत कब्जे, बाहरी व्यापारिक गतिविधियों, व्यावसायिक विस्तार, मुटिया मजदूरी तथा औद्योगिक श्रमिक आबादी से हुए जनसांख्यिकीय बदलाव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। ऐसे बदलाव को निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। कहा कि झारखंड के मूल निवासियों के लोकतांत्रिक अधिकार, सांस्कृतिक पहचान एवं जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है। उन्होंने आदिवासी समाज से अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग, सतर्क एवं एकजुट रहने का आह्वान किया। आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय कोषाध्यक्ष सह संयोजक जलेश्वर भगत ने कहा सरना धर्म कोड की मांग कई दशकों पुरानी है और वर्ष 2027 की जनगणना से पूर्व हर हाल में पृथक सरना धर्म कोड लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा आदिवासी छात्र संघ द्वारा झारखंड सहित ओड़िशा, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं असम में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में सुशील उरांव, डा. जलेश्वर भगत, मनोज उरांव, विद्यासागर, संजय व रवि उपस्थित रहे।