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पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी, दलित और मजदूर वर्ग सपा के असली चेहरे से परिचिति: अनिल राजभर

'जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को': अनिल राजभर पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी, दलित और मजदूर वर्ग सपा के असली चेहरे से परिचिति: अनिल राजभर दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश को घेरा, बोले- पीडीए मतलब 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस' लखनऊ  समाजवादी पार्टी की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर विफल होने के बाद अब जाति का जहर घोलने की राजनीति कर रही है, लेकिन उसे इसमें कोई सफलता मिलने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा चाहे एक यात्रा निकाले या 100 यात्राएं, जनता अब उसके बहकावे में आने वाली नहीं है। पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी अनिल राजभर ने कहा कि पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी यात्रा है। उत्तर प्रदेश का पिछड़ा, दलित, कमजोर और मजदूर वर्ग समाजवादी पार्टी के असली चेहरे से भलीभांति परिचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सपा सत्ता में रहती है तो उसे गरीबों की याद नहीं आती और पूरा सैफई परिवार प्रदेश की गाढ़ी कमाई को लूटने में लगा रहता है। आज वही लोग चोला बदलकर पिछड़ों और दलितों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता सब समझती है। पीडीए की परिभाषा तय करे सपा उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले पीडीए की परिभाषा ही तय कर ले। पार्टी के नेता खुद ही पीडीए को लेकर भ्रमित हैं और रोज इसकी नई परिभाषा बताते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीतिक तिकड़मों से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। चुनाव आने पर समाजवादी पार्टी का कहीं नामोनिशान नहीं दिखाई देगा। इस दौरान नए वोटर फॉर्म में सर्विलांस से जुड़ी जानकारी जोड़े जाने और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के सवाल पर अनिल राजभर ने कहा कि हाल में सामने आए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है। चुनाव आयोग किसी भी विषय पर नियमों और परंपराओं के अनुसार आपसी राय-मशविरा और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लेता है। अलग-अलग राय लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती है। स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार से कब मिलेंगे अखिलेश? वहीं, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव और उनकी पीडीए राजनीति पर निशाना साधा। रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने नेताओं के घर जरूर जाना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार के पास वे आज तक क्यों नहीं गए। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को दूसरे मुख्यमंत्री के परिवार के प्रति शिष्टाचार और संवेदना दिखानी चाहिए थी। यदि अखिलेश यादव कल्याण सिंह के परिवार के पास जाकर श्रद्धांजलि और संवेदना व्यक्त करते, तो यह राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय और संवैधानिक मर्यादा का परिचय होता। उन्होंने कहा कि अब जब वे लोध समाज के बीच जा रहे हैं तो उन्हें अपने पुराने व्यवहार का भी जवाब देना चाहिए। पीडीए मतलब परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस पीडीए रथ यात्रा पर हमला बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीडीए का वास्तविक अर्थ 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस' है। उन्होंने दावा किया कि आज न पिछड़ा समाज, न दलित समाज और न ही अल्पसंख्यक समाज समाजवादी पार्टी के साथ है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा समाज पूरी मजबूती के साथ एनडीए के साथ खड़ा है। दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में ऐसे पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं जिनमें अखिलेश यादव से पूछा जा रहा है कि दलितों पर अत्याचार कब रुकेंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितना नया चोला पहन ले, उत्तर प्रदेश की जनता उसके असली चरित्र को पहचान चुकी है। जनता अब भ्रमित होने वाली नहीं है और समय आने पर अपना जवाब देगी।

झज्जर सेक्टर-6 के जमीन मालिकों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने योजना का लाभ देने के दिए निर्देश

 चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की वर्ष 2012 की लैंड पूलिंग योजना के तहत जमीन मालिकों के अधिकार को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि अधिग्रहित जमीन के मालिकों को राज्य के आश्वासन के बाद योजना का लाभ देने से इन्कार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने झज्जर के सेक्टर-6 पार्ट के लिए अनिवार्य रूप से अधिग्रहित जमीन के मालिकों को योजना के तहत पात्र मानते हुए निर्देश दिया कि सेक्टर के पहली बार विकसित होने पर उन्हें उनकी पात्रता के अनुसार विकसित प्लॉट आवंटित किए जाएं या योजना के प्रविधानों के अनुसार राशि दी जाए। जस्टिस विकास बहल और जस्टिस दिव्या शर्मा की खंडपीठ ने आठ याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि भूमि पूलिंग योजना का उद्देश्य अधिग्रहण के कारण अपनी जमीन खोने वाले भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाना था। मामले में कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने पात्र जमीन मालिकों को विकसित जमीन देने का स्पष्ट आश्वासन दिया था। इसी भरोसे पर याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाला मुआवजा और अन्य वैधानिक लाभ नहीं लिए। कुछ याचिकाकर्ताओं को 23 अगस्त 2013 के अवार्ड के बाद योजना के तहत 42 लाख रुपये प्रत्येक अग्रिम राशि के रूप में भी दिए गए थे। कोर्ट ने कहा कि जब जमीन मालिकों ने राज्य के स्पष्ट आश्वासन पर अपनी स्थिति बदल ली और दूसरे लाभ नहीं लिए तो बाद में सरकार अपने वादे से पीछे नहीं हट सकती। अधिकारियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं किया था। हाई कोर्ट ने मूल रिकार्ड देखने के बाद इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पांच याचिकाओं के मामले में रिकार्ड से स्पष्ट हुआ कि आवेदन निर्धारित 60 दिन की अवधि के भीतर जमा किए गए थे और अधिकारियों ने उन्हें सत्यापित कर स्वीकार भी किया था। इसलिए आवेदन में देरी के आधार पर योजना का लाभ न देना गलत बताया गया।अन्य याचिकाओं में भी कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों ने राज्य के आश्वासन पर अपनी स्थिति बदली थी। उन्होंने न तो अनिवार्य अधिग्रहण का मुआवजा लिया और न 33 वर्ष की वार्षिकी अथवा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना के लाभ प्राप्त किए। ऐसे में राज्य उन्हें भूमि पूलिंग योजना से बाहर नहीं कर सकता। पहली बार सेक्टर फ्लोट होने पर मिलेगा लाभ हाई कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 10 सितंबर 2012 की भूमि पूलिंग योजना के अनुसार विकसित सेक्टर में पहली बार फ्लोटेशन के समय उनकी पात्रता के अनुरूप प्लॉट आवंटित किए जाएं अथवा योजना के प्रावधानों के अनुसार राशि का भुगतान किया जाए। जिन याचिकाकर्ताओं ने पहले मिली अग्रिम राशि लौटानी है, वे 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि लौटाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। सक्षम अधिकारी को ऐसा आवेदन मिलने के चार सप्ताह के भीतर उसका निपटारा करना होगा। राशि लौटाने के बाद भी उनके विकसित प्लॉट पाने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 13 साल बाद जल्द फ्लोटेशन के निर्देश खंडपीठ ने कहा कि अवार्ड की घोषणा को 13 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। इसलिए अधिकारियों को सेक्टर की फ्लोटेशन प्रक्रिया जल्द पूरी करने का प्रयास करना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि अग्रिम राशि लौटाने से जमीन मालिकों का पहली बार सेक्टर फ्लोट होने पर विकसित प्लॉट पाने का अधिकार किसी तरह प्रभावित नहीं होगा।  

हरियाणा में मानसून कमजोर, 23% कम हुई बारिश; किसानों की बढ़ी चिंता

हिसार. औसत से 23 प्रतिशत कम वर्षा के साथ हरियाणा से मानसून की बुधवार को विदाई हो गई। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के नजदीक जिला यमुनानगर को छोड़कर लगभग पूरे प्रदेश से मानसून लौट चुका है। यमुनानगर में सुबह के समय कोहरा भी छाया रहा। इस मानसून में हरियाणा में 317.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। प्रदेश में सामान्य वर्षा का आंकड़ा 413 मिलीमीटर है। यानि प्रदेश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई। पलवल को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही। कमजोर मानसून का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ तापमान में कमी न आने से बिजली की खपत भी बढ़ी हुई है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि राजस्थान में बने प्रति चक्रवातीय परिसंचरण के कारण हरियाणा-एनसीआर में पश्चिमी गर्म और शुष्क हवाएं चल रही हैं। इससे वातावरण में नमी कम हुई है और दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार को तकरीबन सभी जिलों में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली है। गुरुग्राम में 38 डिग्री तापमान सबसे अधिकतम तापमान गुरुग्राम का 38.2 डिग्री रहा। 37.4 डिग्री सेल्सियस के साथ फरीदाबाद दूसरे नंबर पर रहा। सभी जिलों का न्यूनतम तापमान 20 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। 25 सितंबर को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हरियाणा के उत्तरी जिलों में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 28 से 30 सितंबर के दौरान भी पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी की मौसम प्रणाली के प्रभाव से उत्तरी व पूर्वी जिलों में मौसम में बदलाव और हल्की वर्षा की संभावना है। मानसून की वापसी के लिए लगातार वर्षा का न होना, निचले वायुमंडल में प्रतिचक्रवात का बनना और हवा में नमी की कमी प्रमुख संकेत माने जाते हैं। दस साल बाद ऐसा मानसून दस साल पहले भी मानसून कुछ ऐसा बीता था। 2016 में सामान्य से 58 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी। हालांकि 2015 का मानसून उससे भी कमजोर रहा था। उस वक्त सामान्य से 126 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। तब महज 287.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी।

PU सीनेट चुनाव की मतगणना पर ब्रेक, 36 घंटे बाद रोकी गई काउंटिंग

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव की रजिस्टर्ड ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना लगातार 36 घंटे चलने के बाद वीरवार दोपहर एक बजे रोक दी गई। मतगणना में तैनात स्टाफ को लगातार काम के बाद आराम नहीं मिल पाने के कारण यह फैसला लिया गया। पीयू रजिस्ट्रार वाइपी वर्मा ने बताया कि अब शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से दोबारा मतगणना शुरू होगी। 15 सीटों के लिए 51 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में मतगणना पर प्रत्याशियों और समर्थकों की लगातार नजर बनी हुई है। अब तक बूथवार रिकाॅर्ड के अनुसार 60,044 बैलेट पेपर की गिनती दर्ज की गई है। पंजाब के 212 बूथों से सबसे अधिक 49,422 वोट की गिनती हुई है। चंडीगढ़ के 33 बूथों से 5,446 और हरियाणा के 19 बूथों से 4,269 वोट दर्ज हुए। वहीं दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू से कुल 907 बैलेट पेपर की गिनती हुई है। मतगणना दोबारा शुरू होने के बाद रुझान और स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके साथ ही 15 सीटों पर कौन प्रत्याशी जीत की ओर बढ़ रहा है, इसकी तस्वीर भी साफ होगी। सीनेट चुनाव के अंतिम परिणाम के लिए अब शुक्रवार की मतगणना पर सभी की नजर है।

MP के सबसे अमीर बने विनोद अग्रवाल, एक साल में ₹700 करोड़ बढ़ी संपत्ति

इंदौर  इंदौर के प्रमुख कारोबारी व उद्यमी विनोद कुमार अग्रवाल हुरून रिच लिस्ट 2026 में मप्र के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में शीर्ष स्थान पर हैं। हुरून इंडिया द्वारा जारी सूची में देश के अमीरों की सूची में वे 365वें स्थान पर हैं। 10 हजार करोड़ से ज्यादा संपत्ति के मालिक इस सूची के मुताबिक अग्रवाल की संपत्ति में पिछले वर्ष की तुलना में 700 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उनकी संपत्ति 9500 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,200 करोड़ रुपये हुई है। हुरून इंडिया की सूची में इंदौर व भोपाल के एक दर्जन उद्यमी शामिल हैं। ‘इंदौर में उद्यमियों के लिए लगातार बढ़ रहे अवसर’ अग्रवाल कोल के संचालक विनोद कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेरा विजन है कि इंदौर में ज्यादा से ज्यादा उद्यमी इस सूची में शामिल हों। इस तरह इंदौर का नाम देश-दुनिया में ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। इंदौर शहर लगातार बढ़ रहा है। यहां पर नए उद्यमियों व व्यवसाय के लिए अधिक अवसर उपलब्ध हैं। इंदौर के विकास में रियल एस्टेट के माध्यम से योगदान दे रहे हैं। इसके माध्यम से हम इंदौर में ऐसे प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं, जिससे व्यवसायिक अवसर तैयार हों, जो इंदौर को देश के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सामने रखें। हुरून इंडिया की सूची में प्रदेश के कारोबारी इंदौर के कारोबारी व उद्यमी नाम — रैंक विनोद कुमार अग्रवाल — 365 अनुराग मूंदड़ा — 665 दिनेश पाटीदार — 941 नितिन अग्रवाल — 1139 सुनील चौरड़िया — 1276 विमल तोड़ी — 1425 भोपाल के कारोबारी व उद्यमी दिलीप सूर्यवंशी — 852 देवेंद्र जैन — 1112 अनिल बंसल — 1139 सुनील बंसल  — 1139 सुधीर कुमार अग्रवाल  — 1276 सुधीर अग्रवाल  — 1607  

CM साय करेंगे राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शिरकत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। CM साय सुबह 11:45 बजे पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार पहुंचेंगे, जहां आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे से आदिम जाति कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री शामिल होंगे। शाम 4:10 बजे मुख्यमंत्री एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित Statescon 2026 – Building Viksit Chhattisgarh कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री शाम 5:40 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।

वर्षों से पिता के नाम दर्ज थी जमीन, लोक सेवा गारंटी से किसान रतम राम को मिला हक

सेवा की कहानी वर्षों से पिता के नाम दर्ज थी जमीन, लोक सेवा गारंटी से किसान रतम राम को मिला हक फौती नामांतरण के बाद बी-1 में दर्ज हुआ नाम, किसान हितैषी योजनाओं से जुड़ने की राह हुई आसान समय-सीमा में राजस्व प्रकरण का निराकरण, किसान रतम राम ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का जताया आभार रायपुर  वर्षों से जिस कृषि भूमि पर खेती कर परिवार का जीवन चल रहा था, उसके राजस्व अभिलेख में अब भी दिवंगत पिता का ही नाम दर्ज था। इस वजह से जशपुर जिले के ग्राम कंडोरा निवासी किसान श्री रतम राम को अपनी जमीन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई आ रही थी। लोक सेवा गारंटी के माध्यम से उनका फौती नामांतरण होने और बी-1 में नाम दर्ज होने के बाद अब उनकी यह परेशानी दूर हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध नागरिक सेवाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी व्यवस्था का लाभ कुनकुरी तहसील के ग्राम कंडोरा निवासी किसान श्री रतम राम को मिला। पिता के निधन के वर्षों बाद भी रिकॉर्ड में दर्ज था उनका नाम श्री रतम राम के पिता स्वर्गीय सुखरू के निधन के कई वर्ष बीत चुके थे, लेकिन कृषि भूमि के राजस्व अभिलेख बी-1 में अब भी उनके पिता का नाम दर्ज था। जीवित वारिस के रूप में श्री रतम राम का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें जमीन से संबंधित कार्यों के साथ किसान हितैषी योजनाओं की प्रक्रियाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। किसान के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उसकी आजीविका का आधार होती है। ऐसे में राजस्व रिकॉर्ड का अद्यतन होना किसान को उसकी भूमि से संबंधित अधिकारों और विभिन्न शासकीय प्रक्रियाओं से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। लोक सेवा गारंटी ने आसान की राह अपनी समस्या के समाधान के लिए श्री रतम राम ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन मिलने के बाद राजस्व विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण पर कार्रवाई शुरू की। पटवारी जांच, मौका मुआयना तथा दावा-आपत्ति सहित आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनका फौती नामांतरण किया गया। नामांतरण पूरा होते ही राजस्व अभिलेख बी-1 में श्री रतम राम का नाम दर्ज हो गया। वर्षों से लंबित उनकी समस्या का समाधान होने से उन्हें बड़ी राहत मिली। अब किसान योजनाओं से जुड़ने की राह हुई आसान राजस्व अभिलेख अद्यतन होने से श्री रतम राम के लिए कृषि भूमि से संबंधित शासकीय प्रक्रियाएं आसान हुई हैं। अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और एग्रीस्टैक के अंतर्गत डिजिटल किसान पहचान जैसी किसान हितैषी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में उन्हें सुविधा मिल सकेगी। संबंधित योजनाओं का वास्तविक लाभ उनके निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार प्राप्त होगा। श्री रतम राम की कहानी यह बताती है कि समय पर राजस्व रिकॉर्ड में सुधार किसी किसान के लिए केवल दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं है। यह उसकी भूमि से जुड़े अधिकारों को रिकॉर्ड में स्पष्ट करने और विभिन्न शासकीय सेवाओं तक उसकी पहुंच आसान बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। रतम राम बोले—समय पर हुआ काम, अब बी-1 में मेरा नाम अपनी समस्या का समाधान होने से प्रसन्न श्री रतम राम ने कहा, “मेरे पिता के नाम पर जमीन होने से मुझे लाभ नहीं मिल रहा था। लोक सेवा गारंटी से मेरा काम समय पर हो गया और बी-1 में मेरा नाम आ गया। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन को दिल से धन्यवाद देता हूं।” मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नागरिकों को राजस्व सहित विभिन्न शासकीय सेवाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ अब जमीनी स्तर पर हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। किसान रतम राम का फौती नामांतरण इसी समयबद्ध सेवा व्यवस्था की एक सकारात्मक तस्वीर है।

पुंजापुरा के लोगों से PM मोदी की बातचीत, बोले- एंटरप्रेन्योरशिप में आगे बढ़ रहा MP

 देवास  सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बागली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पुंजापुरा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हितग्राहियों एवं उपस्थित जनसमुदाय से संवाद किया। प्रधानमंत्री ने युवाओं से बात कर सेवा कार्यों में उन्हें क्या अनुभव मिला, यह जाना। इससे उन्होंने क्या सीखा। उन्होंने युवाओं से वॉट्सएप ग्रुप बनाने की बात कही ताकि लोगों तक उनके काम पहुंचे। इसके साथ ही इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इसे शेयर करने को कहा। देवास जिले के पुंजापुरा में यात्रा के दौरान आये शाजापुर जिले के दीपेश गोटी से भी प्रधानमंत्री ने किया संवाद किया। प्रधानमंत्री ने गोटी से पूछा कि वडनगर में किसी से पहचान बनाई है या नहीं, इस पर गोटी ने अपनी कपड़े की दुकान के संबंध में जानकारी दी और बताया कि व्यापारियों से पहचान यात्रा के दौरान बनाई है। गोटी की इस बात पर प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आपने गुजराती ओर मारवाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया और सेवा के साथ काम भी कर लिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के युवा भी व्यापार-कारोबार में रुचि ले रहे हैं, यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा- मध्य प्रदेश एंटरप्रेन्योरशिप में बहुत आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में माय प्रॉमिस मोदी जी के भाजयुमो अभियान की पीएम मोदी को जानकारी दी गई।प्रधानमंत्री ने कहा- वडनगर और वाराणसी पौराणिक ऐतिहासिक शहर हैं। दोनों शहर हजारों साल से जीवंत है। एक मेरी जन्मभूमि तो दूसरी कर्मभूमि है। उल्लेखनीय है कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वडनगर से वाराणसी तक जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 22 सितंबर को यात्रा ने डबलचौकी से देवास में प्रवेश किया। अगला पड़ाव पुंजापुरा गांव हैं, जहां प्रधानमंत्री वर्चुअली संवाद किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल रहे।  उन्होंने युवाओं से वॉट्सएप ग्रुप बनाने की बात कही ताकि लोगों तक उनके काम पहुंचे। इसके साथ ही इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इसे शेयर करने को कहा।  देवास जिले के पुंजापुरा में यात्रा के दौरान आये शाजापुर जिले के दीपेश गोटी से भी प्रधानमंत्री ने किया संवाद किया। प्रधानमंत्री ने गोटी से पूछा कि वडनगर में किसी से पहचान बनाई है या नहीं, इस पर गोटी ने अपनी कपड़े की दुकान के संबंध में जानकारी दी और बताया कि व्यापारियों से पहचान यात्रा के दौरान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के युवा भी व्यापार-कारोबार में रुचि ले रहे हैं, यह अच्छी बात है। मध्य प्रदेश एंटरप्रेन्योरशिप में बहुत आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में माय प्रॉमिस मोदी जी के भाजयुमो अभियान की पीएम मोदी को जानकारी दी गई।प्रधानमंत्री ने कहा- वडनगर और वाराणसी पौराणिक ऐतिहासिक शहर हैं। दोनों शहर हजारों साल से जीवंत है। एक मेरी जन्मभूमि तो दूसरी कर्मभूमि है। उल्लेखनीय है कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वडनगर से वाराणसी तक जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 22 सितंबर को यात्रा ने डबलचौकी से देवास में प्रवेश किया। अगला पड़ाव पुंजापुरा गांव हैं, जहां प्रधानमंत्री वर्चुअली संवाद किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल रहे।

मध्य प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 10 जिलों में तेज बारिश; 25-26 सितंबर को स्ट्रॉन्ग सिस्टम

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बने अवदाब के प्रभाव से प्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हो रहा है। 25 और 26 सितंबर को इसका ज्यादा असर रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्यप्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है। आज इन 10 जिलों में तेज बारिश का अनुमान गुरुवार को छतरपुर, पन्ना, सतना, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अनुमान है।वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। 25-26 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब अगले 24 घंटे के बाद और मजबूत हो सकता है। इसके प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।खासकर पूर्वी हिस्से में 25 और 26 सितंबर को भारी से अति भारी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया मौसमी सिस्टम एक बार फिर राज्य में मानसूनी गतिविधियां बढ़ा रहा है. आज पूर्वी जिलों में इसका खासा असर देखने को मिलेगा. शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सतना, पन्ना और छतरपुर में गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना बन रही है. इन सभी जिलों में 64.5 मिमी से लेकर 115.5 मिमी तक वर्षा दर्ज की जा सकती है. तीव्र वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है. नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है. IMD ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. प्रभावित जिले वासियों को सावधानीपूर्वक यात्रा करने की सलाह दी है।  शेष जिलों में हल्की से मध्यम बारिश वहीं मध्य प्रदेश के शेष जिलों में आज कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं. प्रदेश के लगभग सभी जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चलने का अनुमान भी जताया गया है. इस दौरान खुले में, टिन शेड, हल्की नुकीली या धारदार वस्तुओं आदि के आसपास न खड़े हों।  मध्य प्रदेश में अब तक 34.2 इंच बारिश गौरतलब है कि इस सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक 34.2 इंच बारिश हुई है. सामान्य से 6 फीसदी कम वर्षा दर्ज हुई है. बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से अगले चार दिन प्रदेश में तेज बारिश के आसार हैं. कई जिलों में गरज-चमक के साथ बरसात होगी. प्रदेश के 100 से ज्यादा शहरों-कस्बों में बारिश हो सकती है. पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अब भी बारिश का कोटा अधूरा है. भोपाल समेत 23 जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है. कई क्षेत्रों में मानसून के आंकड़ों में सुधार हुआ है लेकिन मानसून जून की कमी पूरी नहीं कर सका. जुलाई-अगस्त का कोटा पूरा हो चुका है. भोपाल में लगातार चौथे साल सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है. बड़े तालाब का जलस्तर भी बढ़ गया है।  34.3 इंच बारिश, कोटे का 91.9% पूरा मध्यप्रदेश में अब तक औसतन 34.3 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का करीब 91.9 प्रतिशत है। मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है।राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है और मध्यप्रदेश में भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से मानसून विदाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। बुधवार को भी कई जिलों में तेज बारिश इससे पहले बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई। भोपाल में रुक-रुककर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम के इटारसी में करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। इसके अलावा खंडवा, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई।  

पारस्परिक स्थानांतरण वाले कर्मियों की वरीयता पर बदला नियम, झारखंड सरकार का फैसला

 रांची झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक आधार पर स्थानांतरित कर्मियों की वरीयता निर्धारण को लेकर एक महत्वपूर्ण संशोधन जारी किया है। सरकार के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में बताया गया है कि यह निर्णय झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मियों की वरीयता को लेकर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा देगा। दरअसल, विभागीय परिपत्र संख्या-6160 दिनांक 23.09.2024 के द्वारा पूर्व में जारी कुछ निर्णयों को संकलित किया गया था। इसमें कार्मिक विभाग के पत्र संख्या-5626 को विलोपित करते हुए और गृह (विशेष) विभाग, बिहार के पत्रों का हवाला देते हुए कार्मिक विभाग, झारखंड के पत्रांक-4450 दिनांक 19.07.2008 के द्वारा परिचारित राज्य सरकार के पूर्व के निर्णय को 19.07.2008 के भूतलक्षी प्रभाव से वापस प्रभावी किया गया था। इसके अनुसार, अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर झारखंड आने वाले कर्मियों को मूल वरीयता का लाभ नहीं मिलता है और वे अपने कोटि में अपने बैच के कर्मियों की तुलना में सबसे कनीय माने जाते हैं। अब सरकार ने विभागीय परिपत्र संख्या-6160 की कंडिका-7 में 7(ii) के पश्चात एक नई उप कंडिका-7(iii) जोड़ने का निर्णय लिया है। इस नई उप कंडिका के अनुसार“उपयुक्त कंडिका-7(ii) में उल्लेखित परिपत्र की शर्तें केवल उन्हीं कर्मियों पर लागू होंगी। जिनके पारस्परिक स्थानान्तरण आदेश में ‘वरीयता का दावा मान्य नहीं होगा’ अथवा ‘कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड के पत्र के आलोक में वरीयता निर्धारित होगा’, का उल्लेख रहेगा। इस आदेश की प्रतिलिपि नोडल पदाधिकारी पीएमयू कोषांग को वेबसाइट पर अपलोड करने हेतु, विभागीय वरीय प्रभारी प्रशाखा पदाधिकारी को भेजा गया है। यह निर्णय झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मियों की वरीयता को लेकर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा देने वाला माना जा रहा है।