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इंदौर केस अपडेट: MBA छात्रा के साथ क्रूरता करने वाला आरोपी मुंबई से हिरासत में

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में चार दिन से लापता एमबीए छात्रा की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंटकर हत्या करने वाला फरार सहपाठी छात्र पीयूष धामनोदिया मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की लोकेशन ट्रेस होने के बाद मुंबई पुलिस की मदद से उसे पकड़ा गया। वहीं आरोपी के परिजन मंदसौर से इंदौर पहुंच चुके हैं, जिनके बयान आज पुलिस दर्ज करेगी। द्वारकापुरी थाना पुलिस की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेने मुंबई पहुंच गई है और देर शाम तक उसे इंदौर लाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद हत्या की असली वजह और पूरी साजिश का खुलासा होगा। वहीं आज छात्रा का पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार सांवेर रोड स्थित एक कॉलेज में एमबीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही 24 साल की छात्रा 10 फरवरी की दोपहर घर से दस्तावेज अपडेट कराने का कहकर निकली थी। पिता उसे मोती तबेला फायर स्टेशन के पास छोड़कर लौट गए थे। शाम को छात्रा ने छोटी बहन को फोन कर बताया था कि वह द्वारकापुरी की अंकली गली में किराए से रहने वाले अपने सहपाठी पीयूष धामनोदिया के साथ एक दोस्त के जन्मदिन में जा रही है। रात में उसके मोबाइल से बहन को मैसेज आया कि वह घर नहीं आएगी। अगले दिन संपर्क नहीं होने पर 11 फरवरी को परिजनों ने पंढरीनाथ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस को छात्रा का नग्न शव उसके घर से करीब आधा किलोमीटर दूर अंकली गली स्थित आरोपी के किराए के कमरे से मिला। शव को कंबल से ढंका गया था और कमरे पर बाहर से ताला लगा हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्रा की हत्या रस्सी से गला घोंटकर की गई। शव पर धारदार हथियार से हमले के निशान भी मिले हैं, जो दरिंदगी की कहानी बयान कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की सटीक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। लोकेशन मुंबई की मिलते ही भेजी फोटो, ऐसे पकड़ा गया आरोपी डीसीपी जोन-1 कृष्ण लालचंदानी ने बताया कि आरोपी की तलाश में पुलिस टीमें लगातार सक्रिय थीं। जांच में पता चला कि आरोपी मूल रूप से मंदसौर के कालाखेत रोड का निवासी है और उसके पिता की धानमंडी में किराना दुकान है। पूछताछ में छात्रा के परिजनों ने खुलासा किया कि कॉलेज के वाट्सएप ग्रुप पर छात्रा के मोबाइल से आपत्तिजनक वीडियो वायरल किए गए थे, जिनमें छात्रा का चेहरा स्पष्ट दिख रहा था जबकि युवक ने अपना चेहरा इमोजी से छिपा रखा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि पीयूष वीडियो बनाकर छात्रा को ब्लैकमेल कर रहा था और उसके परिचितों को भी वीडियो भेज रहा था। मोबाइल टॉवर लोकेशन मुंबई मिलने पर तत्काल अंधेरी पुलिस स्टेशन को सूचना देकर आरोपी की फोटो भेजी गई, जिसके आधार पर मुंबई पुलिस ने उसे दबोच लिया। अब इंदौर पुलिस आरोपी को शहर लाकर गहन पूछताछ करेगी, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद है।

UP के आजमगढ़ दंगों का मामला: अदालत ने 12 आरोपियों को किया दोषी घोषित

आजमगढ़  यूपी के आजमगढ़ के मुबारकपुर कस्बे में 27 साल पूर्व शिया-सुन्नी दंगे के दौरान हुई युवक की हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी करार दिया है। उनकी सजा 17 फरवरी को सुनाई जाएगी। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को सुनाया। मामले में कुल 16 आरोपी थी। सुनवाई की अवधि के बीच चार की मौत हो गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में 30 अप्रैल 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तहरीर में नासिर हुसैन ने बताया कि उसके चाचा अली अकबर निवासी पूराख्वाजा 27 अप्रैल 1999 से लापता थे। अली अकबर के लड़के जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की सूचना थाने में दी थी। 30 अप्रैल को अली की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। पुलिस की विवेचना के दौरान यह पता चला कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की सुन्नी समुदाय के लोगों ने मारपीट कर हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पीयूष त्रिपाठी और एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने कुल नौ गवाहों को कोर्ट में परीक्षित कराया। चार लोगों की मुकदमे के दौरान हो गई थी मौत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने 12 लोगों को हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि निर्धारित की है। बता दें कि पुलिस ने कुल 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में दो और लोगों को न्यायालय ने बतौर मुलजिम तलब किया। इस तरह कुल 16 आरोपी हो गए थे। 16 आरोपियों में से हाजी मोहम्मद सुलेमान निवासी दुल्हनपुरा, नजीबुल्लाह निवासी पूरासोफी, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक निवासी हैदराबाद और हाजी अब्दुल खालिक निवासी हैदराबाद की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। सिर कटी लाश मिलने से भड़की थी हिंसा मुबारकपुर कस्बे में 30 अप्रैल 1999 को पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की पोखरे में सिरकटी लाश मिलने के बाद शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हिंसा भड़क गई थी। रुक-रुककर करीब 19 महीने तक मुबारकपुर सुलगता रहा। दोनों समुदायों के बीच विवाद की शुरुआत मोहर्रम के दिन हुई थी। मुबारकपुर कस्बे में मोहर्रम की नौवीं की रात जुलूस निकाला जा रहा था। कस्बे के पुरासोफी टुन्न स्थित शिया समुदाय के इमामबाड़ा के बगल में महिलाओं के बैठने के लिए पर्दा लगाया गया था। दसवीं के दिन सुबह किसी ने पर्दे में आग लगा दी। सुबह 11 बजे शिया समुदाय की तरफ से जुलूस निकाला जाना था। पर्दा जलाने की बात थोड़ी देर में ही कस्बे में फैल गई। जिसके बाद शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकालने से मना कर दिया। 19 महीने तक सुलगता रहा मुबारकपुर, 17 ने गंवाई जान मामले की जानकारी होने के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अफसरों ने शिया समुदाय के लोगों को समझाकर जुलूस निकलवाना शुरू किया। दोपहर में कस्बे के भुतही पक्कड़ के पास जुलूस पर कुछ लोगों ने पत्थर और गर्म पानी फेंक दिया। जिसके बाद विवाद बढ़ता चला गया। पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक, पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की कर्बला जाते समय सुन्नी समुदाय के लोगों ने पीटने के साथ ही चाकू मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद दोनों तरफ से लोग बवाल पर आमादा थे। प्रशासन की सख्ती और पुलिस की सूझबूझ के बाद किसी तरह बवाल टला, लेकिन दोनों समुदायों में अंदर ही अंदर चिंगारी भड़कती रही। जनवरी 2000 में यह चिंगारी फिर शोला बन गई। सुन्नी समुदाय के तीन लोग साड़ी का कारोबार कर वाराणसी से मुबारकपुर लौट रहे थे, तभी कस्बे के शाह मोहम्मदपुर मोहल्ले में तीनों लोगों की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद बवाल बढ़ने लगा। दोनों पक्षों के लोग एक बार फिर आमने-सामने आ गए थे, लेकिन प्रशासन की सख्ती के कारण बड़ी घटना टल गई। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी। जिसके बाद करीब नौ महीने तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। हालांकि दोनों पक्षों के लोग ताक में बैठे थे। नवंबर 2000 में आखिर उन्हें मौका मिल ही गया। कस्बे में करीब दर्जनभर जगहों पर एक साथ सुनियोजित तरीके से बम ब्लास्ट हुए। जिसमें दोनों पक्षों से तेरह लोगों की मौत हो गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में कई लोगों को कर दिया था बरी सुन्नी समुदाय के बीच हुए दंगे में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अगस्त 2023 में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। मुकदमे के अनुसार, पांच नवंबर 2000 को मुबारकपुर कस्बे में वादी मुकदमा अजादर हुसैन शाम सात बजे अपनी दुकान में बैठा था। इस दौरान सुन्नी समुदाय के कई लोग धारदार हथियार लेकर पहुंचे। शिया समुदाय के खिलाफ नारा लगाते हुए व जान से मारने की धमकी देते हुए अजादार हुसैन की दुकान पर लूटपाट की। इस घटना में मुख्तार व मोहम्मद हुसैन घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में कुल 26 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपी खलीलुर्रहमान, फुरतुल ऐम, एहकसामुर्रहमान, नौशाद की मौत हो गई। कुल सात गवाहों को अदालत ने पेश किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 22 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। पुलिस जांच में थे 14 आरोपी, बाद में हो गए 16 शिया-सुन्नी बवाल के दौरान युवक की हत्या के मुकदमे में तेरह आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट 22 जुलाई 1999 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में भेजी गई। जबकि एक आरोपी हुसैन अहमद के विरुद्ध 21 नवंबर 1999 को चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की गई। मुकदमे की फाइल 5 फरवरी 2002 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सत्र न्यायालय में भेज दी। सत्र न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 24 जुलाई 2002 को मुकदमे में 14 आरोपियों पर आरोप तय किया। प्रारंभिक गवाहों के बयान के आधार पर 18 जनवरी 2005 को मुकदमे में दिलशाद तथा वसीम अहमद को धारा 319 सीआरपीसी के तहत आरोपी के तौर पर कोर्ट ने तलब किया। इन दोनों आरोपियों के विरुद्ध 31 जनवरी 2005 को आरोप तय किया गया। अदालत ने इन 12 लोगों को माना हिंसा का दोषी 1. हुसैन अहमद, हैदराबाद 2. मोहम्मद अयूब … Read more

लाहौर के गुरुद्वारा साहिब में पार्टिशन के बाद पहली बार गूंजी गुरबाणी

चंडीगढ़. लाहौर के मॉल रोड स्थित एचिसन कॉलेज परिसर में बने पुरातन गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक सिख शबद कीर्तन आयोजित हुआ व अरदास की गई। इसमें पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा सहित स्थानीय सिख संगत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। डॉ. तरुणजीत सिंह बुतालिया ने कॉलेज प्रशासन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। वर्ष 1947 के बाद सिख विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के कारण यह गुरुद्वारा साहिब बंद हो गया था। परंतु इसकी देखरेख कॉलेज प्रशासन द्वारा लगातार की जाती रही। यह विशेष शबद कीर्तन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कॉलेज की आधारशिला 3 नवंबर 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही और प्रमुख परिवारों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से रखी गई थी। 1886 में हुई थी कॉलेज की स्थापना ज्ञात हो कि कि एचीसन कॉलेज का इतिहास काफी पुराना रहा है। इस कॉलेज की स्थापनी 3 नवंबर, 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही परिवारों और मुख्य घरानों के बच्चों को शिक्षा देने के इरादे से की गई थी। कॉलेज कैंपस में मौजूद  गुरुद्वारे की डिजाइन प्रसिद्ध सिख वास्तुकार राम सिंह ने तैयार की थी। यह उस समय के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स से जुड़े थे, जिसे आज नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स के नाम से जाना जाता है

पटवारी-आरआई 15 दिन बाद हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटे

मुंगेली. जिले के लोरमी तहसील में पिछले 15 दिनों से चल रहा पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और तहसीलदार के बीच का गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। कलेक्टर के मार्गदर्शन और हस्तक्षेप के बाद उनके निर्देशन में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के अधिकारियों तथा पटवारी-आरआई संगठनों के बीच बैठक आयोजित की, जिसमें आपसी सामंजस्य से समाधान निकाल लिया गया। इसके बाद हड़ताली पटवारी और राजस्व निरीक्षक अपने-अपने कार्य पर लौट आए। दरअसल, पटवारी और राजस्व निरीक्षक संघ ने लोरमी तहसील में पदस्थ तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया था। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप था कि तहसीलदार द्वारा कार्य के दौरान अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना दी जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर 29 जनवरी से लोरमी तहसील के पटवारी और आरआई अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब तीन दिनों के लिए जिला पटवारी–आरआई संघ ने भी समर्थन दे दिया। वहीं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ (नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार) ने तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की स्थिति में जोरदार विरोध दर्ज कराने की बात कही थी। संघ पदाधिकारियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी नाराजगी और मांगें रखी थीं। लगातार बढ़ते गतिरोध और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं कलेक्टर द्वारा बुलाई गई बैठक में सभी पक्षों को विस्तार से सुना गया। बैठक में आपसी संवाद, संयम और प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखते हुए कार्य करने पर सहमति बनी। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की जो भी जायज मांगें या शिकायतें हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। इससे पहले उन्होंने मीटिंग में राजस्व प्रकरणों के मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश दिए, साथ ही शासन एवं जिला प्रशासन के प्राथमिकता वाले कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के भी निर्देश दिए।

सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष

उत्तर प्रदेश इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसरः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किएः मुख्यमंत्री  आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक और उद्यमिता से जोड़कर उत्तर प्रदेश को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्किल डेवलपमेंट और आईटीआई व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत आते हैं। सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा के ढांचे को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से प्रत्येक जनपद के दो आईटीआई को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा रहा है। इन संस्थानों को ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर विकसित किया जा रहा है, ताकि एक केंद्रीय संस्थान से जुड़े अन्य संस्थानों को तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षण सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाए। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से युवाओं को जोड़ा गया मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी उन्नयन को नई दिशा मिली है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाया है। माध्यमिक शिक्षा के तहत प्रत्येक जनपद के राजकीय कॉलेजों को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों को डेटा उपयोग, इंटरनेट सुविधा और डिजिटल संसाधनों से सशक्त करने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने सीएम युवा उद्यमी योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 1,10,000 युवाओं को 10 प्रतिशत मार्जिन मनी के साथ ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना में चयन और प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि युवा सफल उद्यमी बन सकें। उन्होंने महिला उद्यमियों के लिए भी विशेष योजना लागू करने की बात कही गई। साथ ही स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के माध्यम से युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। स्टार्टअप और निवेश में वृद्धि मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी पहलों को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। 76 इनक्यूबेटर, 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न राज्य में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश से पलायन रोजगार के अभाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण होता था। अब कानून-व्यवस्था में सुधार और निवेश अनुकूल वातावरण के चलते रोजगार के अवसर बढ़े हैं और निवेश में वृद्धि हुई है। डेटा सेंटर और एआई पर फोकस मुख्यमंत्री ने बजट में घोषित यूपी डेटा अथॉरिटी और डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना को भविष्य की जरूरत बताया। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा आवश्यक है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की फैब यूनिट स्थापना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा का संकेत है। बेरोजगारी दर 19 से 2.24 प्रतिशत पर आई मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली सरकार के समय लगभग 19 प्रतिशत रही बेरोजगारी दर अब घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसे नीतिगत सुधार, निवेश वृद्धि और कानून-व्यवस्था में सुधार का परिणाम बताया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विकास कार्यों को लेकर अविश्वास की स्थिति उसी मानसिकता को दर्शाती है, जो सीमित दृष्टिकोण से बाहर नहीं निकल पाती। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने पिछले वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखा है और सरकार विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को तकनीक, नवाचार और युवा शक्ति के माध्यम से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया

उत्तर प्रदेश ने तय की है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन और कर्फ्यू से कानून के राज की यात्राः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया सीएम योगी ने कहा, उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणामः मुख्यमंत्री राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीः सीएम योगी लखनऊ  राज्यपाल के अभिभाषण पर शुक्रवार को विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है। समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है। अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणाम है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।  विपक्ष का आचरण संवैधानिक प्रमुख और मातृशक्ति का अपमान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का आधिकारिक दस्तावेज होता है। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों का सदन में आचरण अनुचित था। नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े हुए करते हुए सीएम ने कहा कि संभवतः इसीलिए आप सदन में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि समाजवादी पार्टी के सदस्य आपके नियंत्रण से बाहर रहे होंगे। यही वह आचरण था, जिससे बिटिया घबराती थी और व्यापारी कारोबार समेटता था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए गालिब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गालिब ने कहा था 'उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा।' समाजवादी पार्टी के और मुख्य विपक्षी दलों के इस आचरण के कारण पूरा सदन अपने आप को आहत महसूस कर रहा था।  ‘परसेप्शन’ और कानून-व्यवस्था पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि वर्षों तक चले अव्यवस्थित आचरण और अपराध के वातावरण ने उसे प्रभावित किया था। बेटियां भयभीत थीं, व्यापारी अपना कारोबार समेटने को मजबूर थे और दंगे-कर्फ्यू आम बात थे। 2017 के बाद से प्रदेश में “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की गई है। 2017 से पहले नीतिगत उदासीनता और प्रशासनिक शिथिलता का माहौल था, जबकि अब कानून का राज स्थापित हुआ है। 2017 के बाद से कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और प्रदेश में भयमुक्त वातावरण बना है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के प्रयासों से 6 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह आंकड़ा नीति आयोग के अनुसार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी से बाहर आने का अर्थ यह नहीं कि लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से वंचित किया जाएगा। राशन, स्वास्थ्य, आवास, पेंशन और अन्य सुविधाएं जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। निःशुल्क राशन की व्यवस्था जारी है। वृद्ध, निराश्रित और दिव्यांगजन को 12,000 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। पुलिस सुधार और आधुनिक सुरक्षा तंत्र मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्ती की गई है। पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर आज 44,000 हो गई है। 2017 से पहले हमारी प्रशिक्षण क्षमता 3,000 भी नहीं थी। आज यह स्थिति है कि हाल में 60,200 से अधिक पुलिस भर्ती की गईं, जिसके सभी चयनितों को प्रदेश में ही ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर थाने की स्थापना के साथ-साथ प्रदेश के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को मजबूत किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी हुई है। बीमारू से विकास की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है। पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया, जो “विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास” की यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने इसे अविश्वास से आत्मविश्वास की ओर बढ़ता प्रदेश बताया, जहां पहले उपद्रव की खबरें सुर्खियां बनती थीं, अब निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण की खबरें प्रमुखता पा रही हैं।  उत्तर प्रदेश आज ट्रिपल-टी की त्रिवेणी बनकर उभरा मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 9 वर्ष की जो यात्रा है, ये अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है, कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है, उपद्रव से उत्सव की यात्रा है, समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। यानी ये यात्रा केवल एक सत्ता प्राप्त करने की होड़ नहीं है, इसको प्राप्त करने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति थी, साफ नीयत थी, दृढ़ इच्छाशक्ति थी और सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम लोगों ने जब सामूहिक रूप से प्रयास किया, हर व्यक्ति के मन में विश्वास भरा,  हां यूपी भी कर सकता है, यूपी से भी परिणाम दिए जा सकते हैं और वही आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, आज यह ट्रिपल-टी का एक प्रतीक बना है। ट्रिपल टी मतलब टेक्नोलॉजी, ट्र्स्ट और ट्रांसफॉर्मेशन। यानी एक त्रिवेणी बनकर के उभरा है।  2017 के पहले केंद्र सरकार की योजनाओं का बॉटलनेक था उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री … Read more

फरार आरोपी को कोलार से किया गिरफ्तार, अड़ीबाजी के मामले में इनाम घोषित था

कोलार में अड़ीबाजी के मामले में फरार आरोपी गिरफ्तार, घोषित किया गया था पांच हजार का इनाम भोपाल कोलार पुलिस ने मारपीट और अड़ीबाजी के मामले में तीन महीने से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।  जानकारी के अनुसार फरियादी दौलत सिंह धाकड़ (22) पिछले साल नवंबर महीने में सुबह करीब चार बजे अपने एक दोस्त को छोडऩे के लिए प्रियंका नगर कोलार रोड गया था। वापस लौटते समय वंश मेहरा और उसके दो साथियों ने रोक लिया और पूछने लगे कि यहां क्यों आए थे। दौलत ने बताया कि वह अपने दोस्त को छोडऩे आया था। इसके बाद उन्होंने शराब पीने के लिए पांच सौ रुपये की मांग की। दौलत ने जब उन्हें रुपये देने से मना किया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए उसके साथ बेल्ट से मारपीट कर दी। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मारपीट और अड़ीबाजी का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी वंश मेहरा को उसी समय गिरफ्तार कर लिया था, जबकि दो आरोपी भाग निकले थे। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसके बाद से एक विशेष टीम आरोपियों की तलाश में लगाई गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने फरार आरोपी राज पथरोड़ निवासी प्रियंका नगर और शैलेंद्र सेन निवासी गरीब नगर कोलार रोड को गिरफ्तार कर लिया है।  पत्थर से हमला कर मोबाइल लूटने वाले शातिर बदमाश गिरफ्तार,आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टाप पर हुई वारदात  पुलिस ने चंद घंटों के भीतर 2 आरोपियों को दबोचा  भोपाल। हबीबगंज इलाके में एक युवक पर पत्थर से हमला कर मोबाइल फोन लूटने वाले 2 शातिर बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उस वक्त हुई, जब फरियादी बाइक से उतरकर पैदल अपने घर लौट थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों को दबोच लिया। जानकारी के अनुसार अशोक कुमार तिवारी (41) ई-2 अरेरा कॉलोनी में रहते हैं। गुरुवार की रात वह अपने दोस्त और होटल मालिक अखंड मिश्रा के साथ उनकी बाइक पर बैठकर ग्यारह मील मिसरोद से अपने घर लौट रहे थे। रात करीब बारह बजे अंखड ने उन्हें गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उतारा और अपने घर से लिए निकल गए।बाइक से उतरने के बाद अशोक कुमार पैदल-पैदल अपने घर के लिए जाने लगे। इसी दौरान दो लड़के उनके पास पहुंचे और बगैर किसी बात के गाली-गलौज करने लगे। अशोक उनकी बातों को अनसुना करते हुए आगे बढ़े, तभी एक युवक ने झपट्टा मारकर उनके हाथ से मोबाइल फोन छीनने लगा।अशोक ने जब इसका विरोद किया तो उसके साथी ने पत्थर उठाकर उनके सिर पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। उसके बाद दोनों बदमाश मोबाइल फोन छीनकर भाग निकले। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मारपीट और लूटपाट का मामला दर्ज किया था।सीसीटीवी कैमरों से मिला सुराग मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तलाश में पुलिस की एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और बदमाशों की पहचान के प्रयास किए। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि रात को समय मोबाइल लूटने वाले दो संदेही गणेश मंदिर के पास देखा गया है। सूचना के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें दबोच लिया। पूछताछ करने पर दोनों ने अपने नाम गोलू सनी एंथोनी (33) निवासी मद्रासी कालोनी टीटी नगर और राज विशेष उर्फ बिट्टू (24) निवासी रोहित नगर बावडिय़ा कला शाहपुरा बताया। आरोपी गोलू के खिलाफ टीटी नगर में आठ और राज के खिलाफ मिसरोद थाने में तीन अपराध पहले से दर्ज हैं।  पैसों की चाहत के चलते दिया वारदात को अंजाम  पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि दोनों रात के समय तफरी करने के लिए निकले थे। इसी दौरान उनके मन में पैसे कमाने की लालसा हुई तो उन्होंने पैदल जा रहे व्यक्ति के साथ मारपीट कर मोबाइल फोन लूट लिया। वारदात को बाद बदमाशों ने लूटा गया मोबाइल रेलवे पटरी के पास लोहे के पाइप के अंदर छिपा दिया और उसके बाद अपने घर चले गए। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। इनकी रही सराहनीय भूमिका लूटपाट की घटना का खुलासा और आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी संजय चौकसे, एसआई अजय दुबे, अखिलेश त्रिपाठी, शिवभानु सिंह, हेड कांस्टेबल राघवेन्द्र भास्कर, राजकुमार साहू, आरक्षक रामनरेश किरार, कंचन यादव, राकेश भारद्वाज, अरविन्द यादव, नीमेश लोट, अभिषेक मालवीय, पुष्पेन्द्र भदौरिया और शिवशंकर की सराहनीय भूमिका रही है।

एराज मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आयोजित हुआ पेशेंट सेफ्टी कार्यक्रम

एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में हुआ पेशेंट सेफ्टी  कॉन्क्लेव-2026 । विशेषज्ञों ने कहा कि "एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता"  लखनऊ   एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में संपन्न हो रहे पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में विशेषज्ञों ने एक मत से माना कि "एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता" दो दिनों तक चलने वाले पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति प्रो. अजय सिंह ने बताया कि मरीज की सुरक्षा (पेशेंट सेफ्टी) किसी एक चिकित्सक या स्टाफ की जिम्मेदारी नहीं यह एक टीम वर्क है। चिकित्सीय पेशे में त्रुटि (कॉम्लीकेशन) और गलती (एरर) में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा में होने वाली 50 फीसद से ज्यादा गलतियों को रोका जा सकता है साथ ही एआई (आर्टिफिशियन इंटेलिजेंस) हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती हालांकि पेशेंट सेफ्टी में एआई मददगार बन सकता है इलाज के दौरान होने वाली गलतियों को AI पूरी तरह से रोक नहीं सकता इसके लिए लगातार सीखने की जरूरत है। मुख्य अतिथि प्रो. अजय एराज लखनऊ मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में आयोजित पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में  उन्होंने बताया कि जब भी बात होती है तो बड़े अस्पतालों या चिकित्सा संस्थानों को लेकर ही योजनाएं बनाई जाती हैं। पीएचसी और सीएचसी पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वहां गलतियों की संभावना अधिक है जो मरीज के लिए साबित होती हैं। प्रो. अजय ने बताया कि अगर किसी प्रोसीजर में डाक्टर से गलती हो जाए तो उसे सुधारे न कि गलती करने वाले का नाम सार्वजनिक करें। ऐसा करना डाक्टर के प्रति मरीज के मन में विश्वास को कम करता है। उन्होंने सलाह दी कि मरीज की सुरक्षा के प्रति बने मानकों के बारे में युवा डाक्टरों को लगातार प्रशिक्षित करें। उन्हें उन बिन्दुओं पर सीखाएं जहां चूक की संभावना अधिक होती है। कार्यक्रम में आए इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट के निदेशक डॉक्टर गिरधन ज्ञानी ने बताया कि आज कई चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में पेशेंट सेफ्टी पर कोई बात ही नहीं करता। इसी का कारण है कि गड़बडिय़ों की संभावना लगातार बनी रहती है। करीब 60 प्रतिशत गलतियों मानवीय चूक के कारण होती हैं। इनको रोकने के लिए सबसे बेहतर तरीका मॉनीटरिंग बढ़ाना है। चाहे आईसीयू हो, ओटी हो, ओपीडी या वार्ड निगरनी तंत्र मजबूत होने से गलतियां कम होंगी। इस अवसर पर एराज मेडिकल कालेज के लिए तैयार पेशेंट सेफ्टी सिवोनियर और पेशेंट सेफ्टी फ्लायर का लोकार्पण भी किया गया।  काम में गलती हो तो सुधारें जरूर: वीसी एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अब्बास अली महदी ने बताया कि काम करने पर गलतियां होने की संभावना हमेशा बनी रहती है। अगर गलती हो तो उसे समझें। गलती से सीखें और उसे सुधारें जरूर तभी मरीज की जान बचाना आसान होगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों और स्टाफ को सलाह दी कि गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें और सुधारने की कोशिश करें। गलती को अनदेखा न करें क्योंकि चिकित्सीय पेशे में एक ही गलती को बार बार दोहराना उचित नहीं है। कार्यक्रम में एरा यूनिवर्सिटी की प्रो-वीसी प्रोफेसर फरजाना महदी ने कहा कि गलतियों को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें। तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसका लाभ मरीजों को मिले इसके लिए जरूरी है कि डाक्टर नई तकनीक को हमेशा सीखते रहें।  पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दी सलाह  – डॉ. नीलिमा क्षीरसागर ने कहा कि ‘उचित दवा लेखन कौशल ही रोगी सुरक्षा की नींव है।’ दवा देने के साथ ही मरीज की शंकाओं का समाधान जरूरी करें।  – डॉ. बिकाश मेधी ने कहा कि कम्युनिकेशन स्किल पर ध्यान दें। भाषा सबंधी गलतियों से भी मेडिकेशन एरर हो सकती है जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है।  – डॉ. बनानी पोद्दार ने कहा कि मरीज के अनुसार मानक बदल जाते हैं। गर्भवती महिला और साठ साल के बुजुर्ग को एक ही बीमारी में समान दवा नहीं दी जा सकती। उनकी दवाएं अलग-अलग होंगी।

सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी हैः सीएम

प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल, यही नए यूपी की पहचानः योगी सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी हैः सीएम इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण से यूपी आज वैश्विक निवेशकों का आकर्षक गंतव्य     लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल है, यही नए यूपी की पहचान है। प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर की प्रगति बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिटें संचालित हो रही हैं। इन यूनिटों में 3 करोड़ 11 लाख से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र ही प्रदेश में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करने वाला सेक्टर है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार के दौरान यह क्षेत्र लगभग मृतप्राय हो चुका था। उस समय सरकार के पास न कोई स्पष्ट विजन था, न ही टेक्नोलॉजी की समझ और न ही मजबूत इच्छाशक्ति। उद्यमियों को सरकारी सहयोग के बजाय इंस्पेक्टर राज का सामना करना पड़ता था। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड या अन्य विभागों के अधिकारी अक्सर उन्हें परेशान करते थे।  योगी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने इन समस्याओं को जड़ से समाप्त कर दिया। उद्यमियों को 1000 दिनों तक किसी भी एमएसएमई यूनिट स्थापित करने के लिए कोई एनओसी की आवश्यकता नहीं है। इस छूट नीति के परिणामस्वरूप आज प्रदेश में 96 लाख यूनिटें सक्रिय हैं और करोड़ों लोग रोजगार पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का जीता-जागता उदाहरण बताया, जिसने उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित कर दिया है। नागरिकों को सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज रूल ऑफ लॉ ही सुरक्षा और विकास की सबसे बड़ी गारंटी है। हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के भविष्य के साथ किसी को भी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। सीएम ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था के कारण ही आज प्रदेश में उत्कृष्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे का जाल बिछ चुका है, एयर कनेक्टिविटी में तेजी आई है।  उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल का उद्घाटन करेंगे। पहले मेरठ से दिल्ली जाने में 3-4 घंटे लगते थे, लेकिन अब 12 लेन हाईवे और रैपिड रेल से यह दूरी मात्र 45 मिनट में तय हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पूर्व सरकारें दूरी बढ़ाने में माहिर थीं, न केवल भौगोलिक दूरी, बल्कि जाति-जाति और भाई-भाई के बीच खाई को चौड़ा करने का काम भी किया गया। पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर उन्होंने कहा कि असीम संभावनाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश पहले निवेश से वंचित रहता था। आज फियरलेस गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस इसकी नई पहचान है। सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी है। सुरक्षा का माहौल, शासन में स्थिरता और विकास में गति, ये तीनों आज उत्तर प्रदेश की ताकत हैं। प्रदेश पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी लागू हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसे प्लेटफॉर्म निवेशकों को सुगम, पारदर्शी और विश्वसनीय वातावरण प्रदान कर रहे हैं। पहले ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में यूपी 14वें स्थान पर था, लेकिन आज यह टॉप अचीवर राज्यों में शामिल है। उत्तर प्रदेश ने सभी व्यापार सुधार मानकों को 100% लागू कर देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया। डीरिग्युलेशन में नंबर-वन और 23 प्रमुख सुधारों को पूर्ण रूप से लागू किया गया। डिक्रिमिनलाइजेशन के तहत 13 राज्य कानूनों और 99% आपराधिक प्रावधानों को हटाया गया। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट मुख्यमंत्री ने बताया कि 1947 से 2017 तक प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने थे, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में यह संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण के कारण यूपी आज वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य है। एमओयू अब कागजी नहीं, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग, उत्पादन और रोजगार सृजन तक ठोस परिणाम दे रहे हैं। पिछले साढ़े आठ वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, जिससे 60 लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। पहले यूपी के युवा अन्य राज्यों में पलायन करते थे, लेकिन अब प्रदेश में ही अवसर उपलब्ध हैं। बजट में ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट जोन’ योजना प्रस्तावित है, जो हर जिले में स्किल डेवलपमेंट से रोजगार तक की गारंटी देगी।  उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग में शोषण रोकने के लिए विशेष कॉर्पोरेशन गठित किया गया है। इससे युवाओं को 16-20 हजार रुपये का मानदेय मिलेगा। कंपनियों को केवल सेवा शुल्क दिया जाएगा। शोषण करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। आज उत्तर प्रदेश एमएसएमई और स्टार्टअप का प्रमुख हब है। यह वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश के 65% मोबाइल और 55-60% इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट यहीं बन रहे हैं। उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट का शिलान्यास प्रधानमंत्री जल्द करेंगे। 1962 से देश इस दिशा में प्रयासरत था, अब यूपी इसका केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री ने किया एलान, बढ़ाई जाएगी निराश्रित महिला, वृद्धजन और दिव्यांगजन की पेंशन राशि

प्रदेश में तीन गुना बढ़ी महिला वर्कफोर्स, 44 हजार महिला पुलिसकर्मी: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने किया एलान, बढ़ाई जाएगी निराश्रित महिला, वृद्धजन और दिव्यांगजन की पेंशन राशि आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर हुईं महिलाएं: मुख्यमंत्री उद्यमी और नेतृत्वकारी नारीशक्ति प्रदेश के भीतर प्रदान कर रही है नेतृत्व नौ लाख सरकारी नौकरियों में से 1,75,000 नौकरियां केवल महिलाओं के लिए  लखनऊ महिला सशक्तीकरण को लेकर विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी 12 से 13 प्रतिशत के बीच थी, जो अब बढ़कर 36 से 37 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसे तीन गुना से अधिक वृद्धि बताते हुए कहा कि यह बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एक करोड़ छह लाख निराश्रित महिलाएं, वृद्धजन और दिव्यांगजन इस समय 12,000 रुपये सालाना पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। सरकार इस राशि को बहुत जल्द बढ़ाने जा रही है। हमने बजट दे दिया है।  सुरक्षा से समृद्धि और एंप्लायमेंट से एक्सीलेंस तक नेतृत्व कर रहीं प्रदेश की महिलाएं  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नौ वर्षों में महिला सशक्तीकरण का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि  2017 के पहले प्रदेश में वूमेन वर्कफोर्स कुल 12 से 13 फीसदी थी। आज यह 36 से 37 फीसदी है। यानी कामकाजी महिलाओं की संख्या पहले की तुलना में तीन गुना से अधिक बढ़ी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की ही बात करूं तो महिलाओं की संख्या मात्र 10,000 थी, आज यह संख्या 44,000 पहुंच चुकी है।  उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आपके समय में तो एक कहावत प्रचलित थी, “देख सपाई, बिटिया घबराई।” अब ऐसे में महिला सशक्तीकरण पर आपसे क्या चर्चा की जाए? आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर, उद्यमी और नेतृत्वकारी नारी शक्ति उत्तर प्रदेश के भीतर नेतृत्व प्रदान कर रही है। अब तक नौ लाख सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इनमें से 1,75,000 नौकरियां केवल महिलाओं के लिए समर्पित हैं। अब नाइट शिफ्ट में भी काम कर रहीं महिलाएं  मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘ड्रोन दीदी’, सेल्फ हेल्प ग्रुप और ‘लखपति दीदी’ को एक मजबूत इकोसिस्टम प्रदान किया गया है। बीसी सखी योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक बीसी सखी बैंकिंग कार्यों को आगे बढ़ा रही है। आप कह रहे थे कि क्या महिला गहने पहनकर बाहर निकल सकती है? आपके समय में तो महिलाएं दिन में भी नहीं निकल पाती थीं। अब तो महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी उद्योगों और कार्यालयों में कार्य कर रही हैं। इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है? विपक्ष के लोगों को भी कन्यादान में सहभागिता करनी चाहिए  मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, इन सभी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है। सामूहिक विवाह योजना में बेटी की शादी के लिए सरकार एक लाख की सहायता दे रही है। आपको भी उन शादियों में जाना चाहिए, कन्यादान में सहभागिता करनी चाहिए, क्योंकि कन्यादान को बहुत बड़ा दान माना गया है। बुलाने की आवश्यकता क्या है? पात्रता के आधार पर नाम चयनित करिए और बताइए कि हम इनका विवाह कराना चाहते हैं। किसी के लिए भी मना नहीं है। कोई भी पात्र व्यक्ति आवेदन कर सकता है। आप 100 लोगों का चयन करिए, प्रशासन को बताइए, अधिकारी धनराशि उपलब्ध करवाएंगे। वे भी उसमें सहभागी बनेंगे। यह हर व्यक्ति का अधिकार है। हर व्यक्ति को उसमें जाने का अधिकार है। हर जनप्रतिनिधि को उसमें सहभागी बनने का अधिकार है। दिव्यांगजनों को डीबीटी से मिल रहा योजना का लाभ  दिव्यांगजनों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि आपके समय मात्र 300 रुपये पेंशन मिलती थी, आज हम 12,000 रुपये सालाना पेंशन दे रहे हैं। यही नहीं, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भी दे रहे हैं और इस बार तो हमने बेटियों के लिए ई-ट्राईसाइकिल की भी घोषणा कर दी है। इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल की भी घोषणा की है। ये पैसा डीबीटी के माध्यम से हम उनके खातों में भेज रहे हैं। आपके समय में वह 300 रुपये जाता था, वह भी छह महीने में एक बार जाता था। उसमें भी आधा ही लाभार्थी को मिल पाता था। आज डीबीटी के माध्यम से पूरा पैसा लाभार्थी के खाते में जाता है। प्रत्येक जरूरतमंद को उसके हिसाब से सुविधा का लाभ दिया है।