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झारखंड में 245 ब्लॉक में 203 करोड़ लागत की बनेंगी ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट

रांची. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बड़ा ऐलान किया है। जल्द ही सरकार जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) स्थापित करेगी। अंसारी ने बताया कि बीपीएचयू को प्रधामंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और 15वें वित्त आयोग से मिले ग्रांट के 203 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किया जाएगा। इसका निर्माण कुल 245 ब्लॉक में किया जाएगा। इस मामले की जानकारी देते हुए इरफान अंसारी ने कहा कि बीपीएचयू की स्थापना झारखंड की हेल्थकेयर सिस्टम को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। आदिवासी, दूरदराज और पिछड़े इलाकों के लोगों को इससे सीधा फायदा होगा। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बड़ा ऐलान किया है। जल्द ही सरकार जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) स्थापित करेगी। अंसारी ने बताया कि बीपीएचयू को प्रधामंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और 15वें वित्त आयोग से मिले ग्रांट के 203 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किया जाएगा। इसका निर्माण कुल 245 ब्लॉक में किया जाएगा। इस मामले की जानकारी देते हुए अंसारी ने कहा कि बीपीएचयू ब्लॉक स्तर पर निगरानी, ​​योजना, इमरजेंसी की तैयारी और कोऑर्डिनेटेड पब्लिक हेल्थ रिस्पॉन्स के लिए मुख्य संस्थागत इकाई के रूप में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि क्वालिटी हेल्थकेयर सेवाएं, समय पर टेस्टिंग, सटीक डेटा और तेजी से स्वास्थ्य प्रतिक्रिया हर ब्लॉक तक पहुंचे, ताकि किसी भी बीमारी या महामारी के फैलने से पहले ही उस पर प्रभावी ढंग से कंट्रोल किया जा सके। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य की हेल्थकेयर सिस्टम को आधुनिक, संवेदनशील और लोगों पर केंद्रित बनाना है।

नक्सलमुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: झारखंड में माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई—अमित शाह

नई दिल्ली झारखंड में माओवादियों के ढेर होने से नक्सलमुक्त अभियान को मिली बड़ी सफलता: अमित शाह नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में 1 करोड़ के कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के मारे जाने पर कहा कि इससे नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली है। इसके साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, ''आज पश्चिमी सिंहभूम में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे एक जॉइंट ऑपरेशन में 1 करोड़ का कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के अब तक एनकाउंटर से नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली। दशकों से भय और आतंक के पर्याय रहे नक्सलवाद को हम 31 मार्च 2026 से पहले समाप्त करने के लिए संकल्पित हैं। मेरी पुनः शेष बचे नक्सलियों से अपील है कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें।" झारखंड के नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में गुरुवार को सुरक्षाबलों को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी माओवादी पतिराम मांझी उर्फ अनल दा और 15 नक्सली ढेर कर दिए गए। मारे गए नक्सलियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह ने बताया कि मारे गए अन्य नक्सलियों में अनमोल उर्फ सुशांत (बीजेएसएसी), अमित मुंडा (आरसीएम), पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालु, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सूरजमुनी और जोंगा शामिल हैं। इनमें से कई पर झारखंड, ओडिशा और एनआईए ने लाखों रुपए के इनाम घोषित किए थे, और इन सभी के खिलाफ गंभीर नक्सली मामलों के दर्जनों केस दर्ज थे। ये सभी नक्सली केंद्रीय कमेटी सदस्य (सीसीएम) अनल उर्फ पतिराम मांझी के दस्ते के साथ झारखंड के कोल्हान इलाके में लंबे समय से सक्रिय थे। अनल दा पर झारखंड में एक करोड़ और ओडिशा में एक करोड़ 20 लाख का इनाम घोषित था।

लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री साय सख्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं। इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केशव मौर्य की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से अपील: स्नान कर विवाद समाप्त करें

प्रयागराज  माघ मेला-2026 में मौनी अमावस्या के दिन पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक तरफ प्रशासन ने नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब तलब किया है तो वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एक बयान ने इस पूरे प्रकरण को अलग ही मोड़ दे दिया है। प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान के बारे में पूछे जाने पर डिप्टी सीएम ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है। वह बढ़िया स्नान करें। उनसे प्रार्थना है और इस विषय का समापन करें, ऐसा आग्रह है। बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला एवं पुलिस प्रशासन ने मौनी अमावस्या पर पहिया लगी पालकी से संगम स्नान के लिए जाने से रोका था। शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया था, उन्होंने कहा था कि वह अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे, उसी स्थान पर तब तक बैठे रहेंगे जब तक अफसर उनसे मांफी मांग ससम्मान संगम स्नान के लिए नहीं ले जाते हैं। शंकराचार्य के इस ऐलान के बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए उसने 24 घंटे में स्पष्ट करने को कहा गया था कि वह खुद को शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं और अपने शिविर पर लगे बोर्ड पर शंकराचार्य कैसे लिखा है। इसके बाद मामला और अधिक बढ़ गया। मंगलवार को शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वो अपना जवाब दाखिल करेंगे। बुधवार को जवाब दे दिया। इस जवाब में उन्होंने प्राधिकरण के अफसरों से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने को कहा। ऐसा न करने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी। शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया है कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। आठ पेज के जवाब में प्रशासन की ओर से उठाए गए बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की गई। हालांकि इसके बार प्रशासन की ओर से उन्हें एक और नोटिस देकर 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके हमेशा के लिए मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस दूसरी नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए पूछा है कि क्या समझकर उन्हें सुविधाएं दी गई थीं और क्या समझकर वापस ली जा रही हैं।  

ग्रामीण महिलाओं के हाथ में विकास की कमान

पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारक दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की मिलेगी छूट स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड बनेंगे विकसित यूपी का ग्रोथ इंजन लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को विकास की धुरी बनाया जा रहा है। स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के जरिए महिलाओं को आर्थिक संबल देकर प्रदेश को नए ग्रोथ इंजन की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसी क्रम में पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा। इस तरह मिलेगी जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को समूह सखी, बैंक सखी, ड्रोन सखी और आजीविका सखी जैसी जिम्मेदार भूमिकाएं दी जाएंगी। इससे जहां महिलाओं की आय बढ़ेगी, वहीं सरकारी योजनाओं का लाभ भी गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को समूह से जोड़ने का अभियान तेज योगी सरकार पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशन कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने जा रही है। इसके साथ ही वीबी जीरामजी कार्डधारकों और जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अभियान तेज किया गया है। ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की छूट होगी, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के स्वरोजगार शुरू कर सकें। वहीं, प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए मेगा कैंपेन चलाया जाएगा। सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सीधे बाजार से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके। योगी सरकार का मानना है कि सशक्त महिला ही सशक्त परिवार, सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ विकसित यूपी के लक्ष्य को नई गति देगी।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके। बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

सीमा पर खुशियों का सवेरा, योगी सरकार के सुशासन से चौगुर्जी गांव में रचा गया इतिहास

यूपी-नेपाल सीमा पर बसे गांव में योगी सरकार लाई खुशियों का सवेरा पुल से चलकर आई ‘जिंदगी’ चौगुर्जी में सीएम योगी के मार्गदर्शन, डीएम की सक्रिय पहल से बदली 109 परिवारों की बदली तकदीर कर्णाली और मोहना नदी पर बने नए पांटून पुल का लोकार्पण लखनऊ/लखीमपुर खीरी भारत-नेपाल सीमा पर बसा चौगुर्जी गांव वर्षों तक विकास से कटे रहने की मजबूरी झेलता रहा। नदी, दूरी और दुर्गम भूगोल ने यहां के 109 परिवारों को मुख्यधारा से अलग-थलग कर दिया था। लेकिन योगी सरकार के “हर गांव तक विकास” के संकल्प ने आज इस सीमांत गांव की नियति ही बदल दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित सुशासन मॉडल का जीवंत उदाहरण गुरुवार को तब देखने को मिला, जब जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल की प्रशासनिक तत्परता और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से चौगुर्जी गांव को ‘जिंदगी’ की वह सौगात मिली, जिसका इंतजार दशकों से था। पुल बना, दूरी घटी, अब घंटे नहीं, मिनटों में सफर गुरुवार को कर्णाली व मोहना नदी पर बने नए पांटून पुल का लोकार्पण डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल और निघासन विधायक शशांक वर्मा ने किया। यह पुल सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांव के लिए जीवन-रेखा साबित हुआ है। जहां पहले गांव तक पहुंचने में दो घंटे लगते थे, अब एंबुलेंस, स्कूल बस और आवश्यक सेवाएं मिनटों में उपलब्ध होंगी। यह बदलाव योगी सरकार की उस नीति का परिणाम है, जिसमें सीमांत और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच प्राथमिकता है। शुद्ध जल, स्वस्थ जीवन, आर्सेनिक से मिली मुक्ति योगी सरकार के जल जीवन मिशन के तहत चौगुर्जी के 109 परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा मिली। वर्षों से आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीणों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं। बटन दबाते ही नलों से निकला साफ पानी इस बात का प्रतीक बना कि सरकार की योजनाएं अब कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतर चुकी हैं। अंधेरे से उजाले की ओर, सोलर लाइटों से रोशन गांव सीमांत गांव की गलियों में अब अंधेरा नहीं, बल्कि उम्मीद की रोशनी है। 20 सोलर स्ट्रीट लाइटों के लोकार्पण से न सिर्फ गांव जगमगाया, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया। यह पहल योगी सरकार की ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर गांव की सोच को दर्शाती है। शिक्षा को मिली नई उड़ान, बच्चों के सपनों को लगे पंख परिषदीय विद्यालयों में सौर ऊर्जा, स्मार्ट क्लास और नया फर्नीचर उपलब्ध कराकर सरकार ने यह संदेश दिया कि सीमा पर रहने वाला बच्चा भी वही अवसर पाएगा, जो शहरों में उपलब्ध हैं। अब चौगुर्जी के बच्चे भी डिजिटल शिक्षा से जुड़कर देश की मुख्यधारा का हिस्सा बनेंगे। ग्रामीणों की जुबानी, यह सिर्फ विकास नहीं, सम्मान है ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा पल है। इतने वर्षों बाद हमें पुल, साफ पानी, रोशनी और शिक्षा मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, विधायक और डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने हमारे गांव को पहचान दी है। चौगुर्जी गांव की यह तस्वीर लखीमपुर खीरी में चल रहे उस व्यापक बदलाव की कहानी कहती है, जहां योगी सरकार के नेतृत्व में सीमा, दूरी और संसाधनों की कमी अब विकास में बाधा नहीं बन रही।

पेंच जल विद्युत गृह ने मॉक ड्रिल में दिया महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों को बैकअप

भोपाल मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह के माध्यम से उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय एवं परिचालन तत्परता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कम्पनी (MahaTransco) के साथ गत दिवस सफलतापूर्वक ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की। यह अभ्यास विशिष्ट आपातकालीन परिस्थितियों या राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के आंशिक अथवा पूर्ण विफल होने की स्थिति में विद्युत प्रणाली की त्वरित बहाली एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दृष्टि से किया जाता है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के पेंच जल विद्युत गृह से महाराष्ट्र राज्य स्थित कोराडी ताप विद्युत गृह (महा-जेनको), खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह (महा-जेनको) व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह (अदाणी समूह), नागपुर तक एक आयलैंड का निर्माण कर महाराष्ट्र की लगभग 5 हजार मेगावाट उत्पादन क्षमता को बैकअप दिया गया। क्यों की जाती है मॉक ड्रिल भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड – IEGC) एवं MEGC 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत ग्रिड पुनर्बहाली प्रक्रियाओं का सामयिक परीक्षण व सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसमें पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में ब्लैक स्टार्ट प्रक्रिया, आयलैंड का निर्माण व उसके पुनः राष्ट्रीय ग्रिड के साथ समन्वय की व्यवस्था शामिल है। मॉक ड्रिल कैसे की गई पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह में यह ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल गत दिवस 21 जनवरी को सुबह 10:03 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। इस मॉक ड्रिल में आयलैंड के माध्यम से पेंच जल विद्युत गृह से लगभग 20 मेगावाट विद्युत की आपूर्ति महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों कोराडी ताप विद्युत गृह, खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह को की गई। इस मॉक ड्रिल में आपातकालीन स्थिति में विद्युत गृह को प्रारंभ करने की तकनीकी क्षमता का परीक्षण किया गया। लगभग दो घंटे तक आयलैंड के सफल एवं स्थिर संचालन के बाद दोपहर 12:02 बजे पेंच जल विद्युत गृह को राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के साथ सफलतापूर्वक पुनः समन्वित (री-सिंक्रोनाइज) किया गया। यह संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप पूर्ण की गई, जो मध्यप्रदेश पावर कंपनी की उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय व परिचालन तत्परता को प्रदर्शित करती है। ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल क्या है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल एक विशेष तकनीकी अभ्यास है, जिसके अंतर्गत किसी भी पूर्ण या आंशिक ब्लैक आउट की स्थिति में विद्युत गृह को बाह्य ग्रिड सहायता के बिना, सेल्फ स्टार्ट जनरेटरों की सहायता से चालू किया जाता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया जल अथवा गैस आधारित विद्युत गृहों द्वारा की जाती है, जहाँ स्थानीय स्टैंड-अलोन विद्युत स्रोतों जैसे डीजल जनरेटर सेट के माध्यम से सहायक प्रणालियों को विद्युत आपूर्ति देकर क्रमशः ताप विद्युत इकाइयों को प्रारंभ किया जाता है। यह अभ्यास त्वरित समाधान, प्रणाली की विश्वसनीयता तथा अभियंताओं की तकनीकी तत्परता एवं दक्षता का व्यावहारिक परीक्षण होता है। पेंच जल विद्युत गृह की विशिष्ट भूमिका पिछले वर्षों में ग्रिड संबंधी घटनाओं के परिपेक्ष्य में ब्लैक स्टार्ट सक्षम विद्युत गृहों की निरंतर तत्परता, परीक्षण एवं अभ्यास अत्यंत आवश्यक है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में विद्युत प्रणाली की शीघ्र बहाली कर आर्थिक एवं सामाजिक क्षति को न्यूनतम किया जा सके। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल इंडिया व विदर्भ क्षेत्र के निकटस्थ उपलब्ध एकमात्र जल विद्युत स्रोत 160 मेगावाट क्षमता का पेंच जल विद्युत गृह है। इस दृष्ट‍ि से पेंच जल विद्युत गृह आपातकालीन तकनीकी अभ्यास के लिए अहम भूमिका रखता है। पेंच जल विद्युत गृह के माध्यम से आसपास स्थित महाराष्ट्र के विभिन्न ताप विद्युत गृहों को आपातकालीन परिदृश्य निर्मित कर इस अभ्यास को क्रियान्वित किया गया।  

मानसि‍क स्वास्थ्य पहल से विद्यार्थियों के समग्र विकास को मिलेगा नया आयाम

आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सहायक कुलसचिव एवं प्रभारी प्राचार्य के लिए प्रशिक्षण भोपाल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, शाहपुरा भोपाल में सहायक कुलसचिव एवं प्रभारी प्राचार्यों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय-विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानकारी दी जा रही है। गुरुवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुलसचिव व प्रभारी प्रचार्य को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. ऊषा नायर ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक पहल की जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करना है। डॉ. नायर ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होगा। परामर्श, मार्गदर्शन, जागरूकता कार्यक्रमों एवं सहयोगात्मक गतिविधियों के जरिए विद्यार्थी तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच तथा जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण का विकास होगा। उन्होंने कहा कि समय पर परामर्श, सहायता एवं संवेदनशील वातावरण के निर्माण से जोखिम की स्थिति में मौजूद विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग मिल सकेगा, जिससे न केवल मानसिक स्थिरता सुनिश्चित होगी बल्कि जीवन की रक्षा भी संभव हो पाएगी। इन पहलों के माध्यम से एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण होगा, जहां प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सहानुभूति, सहयोग और समग्र विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय एवं सहयोग को भी सुदृढ़ किया जाएगा। मनोवैज्ञानिकों, परामर्शदाताओं एवं प्राध्यापकों के संयुक्त प्रयासों से एक प्रभावी सहयोग तंत्र विकसित होगा, जो विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप समय पर सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 20 विश्वविद्यालयों के सहायक कुलसचिव एवं 20 महाविद्यालयों के प्रभारी प्राचार्य उपस्थित रहे।  

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर पर समर्पित होगी नई दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली म.प्र. की झांकी

 भोपाल लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड-2026 में मध्यप्रदेश की भव्य झांकी शामिल होगी झांकी में ‘पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर’ के गौरवशाली व्यक्तित्व, सुशासन, आत्मनिर्भरता, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया जायेगा। झांकी के अग्र भाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई की चिर-परिचित प्रतिमा को दर्शाया गया है, जिसमें वे हाथ में शिवलिंग धारण किए पद्मासन में विराजमान हैं। यह दृश्य भारतीय मातृशक्ति की सौम्यता, गरिमा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। झाँकी के मध्य भाग में लोकमाता अहिल्याबाई अपने मंत्री-गण एवं सैनिकों के साथ दिखाई गई हैं, जो उनके सुदृढ़ प्रशासन और न्यायप्रिय शासन व्यवस्था को दर्शाता है। इसके निचले हिस्से में उनके शासनकाल में होल्कर साम्राज्य द्वारा किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों का चित्रण है, जहाँ एक सैनिक पहरा देते हुए सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश देता है। अंतिम भाग में देवी अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के प्रसिद्ध घाट, मंदिर एवं किले को प्रदर्शित किया गया है। नीचे पवित्र नर्मदा नदी, घाट एवं नौकाओं का दृश्य अंकित है। झाँकी के अंतिम छोर पर महेश्वर घाट स्थित मंदिरों के शिखर दिखाई देते हैं। वहीं भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएँ प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी की बुनाई करती हुई नजर आती हैं, जो उनके काल में नारी सशक्तीकरण, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण है। झाँकी के साथ चलते लोक कलाकारों का पारंपरिक नृत्य, इस प्रस्तुति को जीवंत, रंगीन और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली बनाता है।