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3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी

3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी प्रमुख सचिव नरहरि ने जल जीवन मिशन की समीक्षा की भोपाल  प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी नरहरि ने जल जीवन मिशन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। नरहरि ने कार्यों में शिथिलता और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 3 अधीक्षण यंत्रियों एवं 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट किया कि कार्यों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के समस्त जिलों के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं सहायक यंत्री स्तर तक के अधिकारी से जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं की अद्यतन स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। समीक्षा बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की गई। प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति निर्धारित लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है, जिससे मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत शेष बचे कार्यों को निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से प्रगति की निगरानी की जाएगी। प्रमुख सचिव नरहरि ने कहा कि जल जीवन मिशन राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कार्यों की प्रगति में किसी प्रकार की शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि फील्ड स्तर पर समन्वय बढ़ाते हुए गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता के साथ कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।  

फार्मर रजिस्ट्री में बस्ती, गाजियाबाद और रामपुर पहले तीन स्थानों पर

सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश में फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान तेज सीतापुर, फिरोजाबाद, प्रतापगढ़, बिजनौर, जौनपुर, पीलीभीत व औरैया भी टॉप-10 में शीर्ष तीनों जनपदों में 80 प्रतिशत से ज्यादा रजिस्ट्रेशन   लखनऊ, उत्तर प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री (किसान पंजीकरण) को लेकर बड़ा अभियान जारी है। प्रदेश में कुल 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक 60 प्रतिशत से अधिक 1,75,30,760 करोड़ किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। इसमें बस्ती जिला सबसे आगे है, जहां 81.49 प्रतिशत रजिस्ट्री पूर्ण हो चुकी है। इसके बाद गाजियाबाद (80.34), रामपुर (80.32), सीतापुर (79.73), फिरोजाबाद (79.59), प्रतापगढ़ (75.65), बिजनौर (74.98), जौनपुर (72.84), पीलीभीत (72.04) तथा औरैया (71.45) टॉप-10 जनपद शामिल हैं। 90 दिनों में शत प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्यमंत्री के निर्देश पर आगामी 90 दिनों के भीतर प्रदेश भर में शत प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है। निर्देशों में कहा गया है कि पीएम किसान योजना के शत-प्रतिशत लाभार्थियों की फार्मर आईडी 15 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से बनवाई जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि फार्मर आईडी बनाने का कार्य और अधिक सघनता से किया जाए। इस कार्य की प्रतिदिन समीक्षा करते हुए कार्ययोजना बनाकर प्रगति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रत्येक किसान की फार्मर आईडी होना अनिवार्य है। इस अभियान के तहत जिलाधिकारियों को फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर प्रतिदिन समीक्षा भी करने के निर्देश दिए गए हैं। पीएम किसान सम्मान योजना में सत्यापन अभियान को बड़ी सफलता दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत उत्तर प्रदेश में चलाए गए विशेष सत्यापन अभियान को उल्लेखनीय सफलता मिली है। इसके तहत राज्य में कुल 2,48,30,499 पीएम किसान लाभार्थी सत्यापित किए जा चुके हैं। सत्यापन प्रक्रिया में अम्बेडकर नगर, प्रतापगढ़, फर्रुखाबाद, बागपत, महराजगंज, मिर्जापुर, हरदोई, अयोध्या, बलिया, भदोही, सिद्धार्थनगर सहित कई जिलों में जिला स्तरीय वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट प्रदान किए गए हैं। इस अभियान से पात्र किसानों को समय पर लाभ सुनिश्चित करने और अपात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर करने में प्रशासन को सफलता मिली है।

सबसे पहले सीएम योगी ने महायोगी गोरखनाथ जी को चढ़ाई आस्था की पवित्र खिचड़ी

गोरखपुर, मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार ब्रह्म मुहूर्त में चार बजे शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाई और लोकमंगल की कामना की। सीएम योगी के बाद नाथ योगियों, साधु संतों ने भी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इसके साथ मंदिर के गर्भगृह कपाट को आमजन के लिए खोल दिया गया। खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंदिर में आस्था का सैलाब नजर आया। गोरखनाथ मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु महायोगी गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए पहुंचे। लोक मान्यता के अनुसार त्रेतायुग से बाबा गोरखनाथ का खप्पर भरने की परंपरा का अनुसरण करते हुए श्रद्धा की अंजुरी में आस्था की खिचड़ी लेकर श्रद्धालु नतमस्तक रहे। महायोगी गोरखनाथ को नेपाल राजपरिवार की तरफ से भेजी गई खिचड़ी भी श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई। खिचड़ी चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में लगे विशाल मेले का भ्रमण कर आनंद उठाया। मनोरंजन के साथ जरूरी वस्तुओं की जमकर खरीदारी की। मकर संक्रांति पर गुरुवार को भोर में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने नाथपंथ की परंपरा के अनुसार  गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में जमीन पर बैठ कर, सीटी बजाकर गुरु गोरखनाथ को प्रणाम कर आदेश लिया। फिर विधिविधान से पूजन कर गोरक्षपीठ की ओर से श्रीनाथ जी को खिचड़ी (चावल, दाल, तिल, सब्जी, हल्दी, नमक आदि) चढ़ाई। इसके बाद उन्होंने मुख्य मंदिर में स्थापित अन्य देव विग्रहों की पूजा की। फिर योगिराज बाबा गंभीरनाथ, अपने दादागुरु महंत दिग्विजयनाथ, गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ, नौमीनाथ व अन्य नाथ योगियों की प्रतिमाओं समक्ष शीश नवाकर खिचड़ी भोग अर्पित किया। सीएम योगी द्वारा बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी भोग अर्पित करने के बाद सुख समृद्धि की मंगलकामना लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत अन्य राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने भी कतारबद्ध होकर महायोगी गोरखनाथ को श्रद्धा की खिचड़ी चढ़ाई। लगातार चलता रहा खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला महायोगी गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला लगातार चलता रहा। पूरे दिन भक्तों की कतार नहीं टूटी। दोपहर बाद तक गोरखनाथ मंदिर आने वाले सभी रास्तों पर श्रद्धालुओं का रेला दिख रहा था। खिचड़ी चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित सभी देवी देवताओं के विग्रहों का पूजन कर ब्रह्मलीन महंत बाबा गंभीरनाथ, ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर माथा टेक आशीर्वाद भी लिया। पूरा दिन मंदिर परिसर गुरु गोरखनाथ की जय जयकार से गूंजता रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा को लेकर मंदिर व जिला प्रशासन की ओर से समुचित प्रबंध किए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद सभी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए थे। भोर में तीन बजे ही लग गई थी लंबी कतार गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला लोक श्रद्धाभाव के साथ सामाजिक समरसता का भी मेला है। हर वर्ग के लोग नंगे पांव कतारबद्ध होकर बारी बारी भगवान गोरखनाथ को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ा रहे थे। कोई मुठ्ठी भर श्रद्धा का चावल लेकर आ रहा था तो कोई झोली भर। पर, महायोगी के प्रति भाव सभी का एक समान था। न जाति का बंधन था, न धर्म का। बुधवार को भी लाखों श्रद्धालुओं ने खिचड़ी चढ़ाई थी। गुरुवार को यह संख्या और बढ़ गई। भोर में तीन बजे ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार मंदिर परिसर से बाहर सड़क तक लग गई थी। अलग-अलग गेट और बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं की भीड़ को संभाला जा रहा था। मंदिर में हुआ खिचड़ी सहभोज का आयोजन मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धा के साथ सभी श्रद्धालुओं को खिचड़ी का प्रसाद वितरित करने के लिए सहभोज का आयोजन किया गया। अमीर-गरीब, जाति, वर्ग का भेदभाव भुलाकर सबने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में आमंत्रित अतिथियों के लिए भी सहभोज का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों, उद्यमियों, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों एवं गण्यमान्य लोगों की सहभागिता रही। नेपाल में राजगुरु माने जाते हैं महायोगी गोरखनाथ : डॉ. प्रदीप राव नाथपंथ के अध्येता डॉ. प्रदीप कुमार राव बताते हैं कि महायोगी गुरु गोरखनाथ का नेपाल से भी गहरा संबंध है। मकर संक्रांति पर गुरु गोरखनाथ को गोरक्षपीठाधीश्वर द्वारा खिचड़ी चढ़ाए जाने के बाद नेपाल राजपरिवार की तरफ से आई खिचड़ी चढ़ाई जाती है। गुरु गोरखनाथ जी नेपाल के राजगुरु माने जाते हैं। त्रेतायुगीन मानी जाती है गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है। मान्यता है कि तत्समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार में पहुंचे। मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया। कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं। उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए। भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए। उनका तेज देख लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल आदि) दान करते रहे। इस दौरान मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई। तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर अहर्निश जारी है। कहा जाता है कि उधर मां ज्वाला देवी के दरबार में बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है।

नक्सलवाद पर करारा प्रहार: छत्तीसगढ़ में 52 इनामी नक्सलियों ने छोड़ा हथियार

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षा बलों को नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता हाथ लगी है. जवानों द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाई और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘नियद नेल्लानार’ और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक डीवीसीएम (डिवीजनल कमेटी मेंबर) सहित कुल 52 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है. आत्मसमर्पित करने वालों में 21 महिला और 31 पुरुष माओवादी शामिल हैं. इन सभी पर कुल 1.41 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी 52 माओवादी फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी सहित कई नक्सली वारदातों में शामिल रहे हैं. इन नक्सलियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेंद्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल और उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया. आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 से अब तक 824 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 1126 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने 223 माओवादियों को मार गिराया है. आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास नीति के तहत सभी नक्सलियों को प्रोत्साहन स्वरूप 50-50 हजार रुपए की नगद राशि प्रदान की गई. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने के लिए आगे भी हर संभव सहयोग किया जाएगा.

बिहार विधानमंडल का दो फरवरी से शुरू होगा बजट सत्र, 19 बैठकें होंगी

पटना. राज्य विधानसभा का बजट सत्र दो फरवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र के दौरान राज्य सरकार वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट तीन फरवरी को सदन में पेश करेगी, जबकि वर्ष 2025-26 का तृतीय अनुपूरक बजट नौ फरवरी को प्रस्तुत किया जाएगा। संसदीय कार्य विभाग ने बजट सत्र के कार्यक्रम को लेकर औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। बजट सत्र के पहले दिन, दो फरवरी को राज्यपाल दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे। इसी दिन नए सदस्यों का शपथ ग्रहण भी कराया जाएगा। इसके साथ ही सरकार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट भी सदन में रखेगी, जिसमें राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास दर, राजस्व और व्यय से जुड़ी प्रमुख जानकारियां शामिल होंगी। तीन फरवरी को सरकार वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेगी। बजट प्रस्तुति के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर वाद-विवाद की प्रक्रिया शुरू होगी। चार फरवरी को सत्र की बैठक नहीं होगी। पांच फरवरी को सरकार राज्यपाल के अभिभाषण पर दिए गए सुझावों और सवालों का जवाब देगी। छह फरवरी को वर्ष 2026-27 के आय-व्यय पर सामान्य विमर्श होगा। सात और आठ फरवरी को भी सदन की बैठक नहीं बुलाई गई है। नौ फरवरी को आय-व्ययक पर सामान्य वाद-विवाद और सरकार का उत्तर होगा। इसी दिन सरकार वर्ष 2025-26 का तृतीय अनुपूरक बजट भी सदन में पेश करेगी। दस फरवरी को आय-व्यय की अनुदान मांगों पर वाद-विवाद के बाद मतदान कराया जाएगा। 11 फरवरी को तृतीय अनुपूरक बजट पर चर्चा और सरकार का जवाब होगा। 12 और 13 फरवरी को वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर वाद-विवाद और मतदान होगा। 14 और 15 फरवरी को बैठक नहीं होगी। इसके बाद 16 फरवरी से 20 फरवरी के बीच लगातार अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया चलेगी। 21 और 22 फरवरी को भी सदन की बैठक नहीं होगी। 23 फरवरी को विनियोग विधेयक पर वाद-विवाद और सरकार का उत्तर होगा। 24 से 26 फरवरी तक राजकीय विधेयकों और अन्य शासकीय कार्यों पर चर्चा की जाएगी। बजट सत्र के अंतिम दिन, 27 फरवरी को गैर सरकारी सदस्यों के कार्य और गैर सरकारी संकल्प सदन में लिए जाएंगे।

नेपानगर में 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष का आह्वान

नेपानगर (बुरहानपुर) मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने कहा है कि इस देश में आदिवासियों का भी अलग धर्म कोड होना चाहिए और इसके लिए अब एकजुट होकर निर्णायक आंदोलन की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ही डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं, यदि यह समाज संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करे तो सरकार को अधिकार देना ही पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार बुरहानपुर जिले के नेपानगर में आयोजित 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस महासम्मेलन में सहभागी बनना उनके लिए गौरव और आत्मीय अनुभव है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से आए हजारों आदिवासी प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस महासम्मेलन को एकता, चेतना और संस्कृति का जीवंत उत्सव बना दिया है। सम्मेलन में आदिवासी समाज के भाई-बहनों और बुजुर्गों से मिला स्नेह और आशीर्वाद उनकी ऊर्जा और संकल्प को और मजबूत करता है। श्री सिंघार ने कहा कि आदिवासियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी विभिन्न समाजों के साथ मिलकर जातिगत जनगणना की मांग उठाई है और आज आदिवासी समाज के पास यह अवसर है कि वह इसे पूरे देश का जन आंदोलन बनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यहां राजनीति से दूर रहकर समाज के अधिकार की बात कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस तरह झारखंड के आदिवासियों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, उसी तरह मध्यप्रदेश के आदिवासी समाज को भी आगे आना होगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अलग कोड के लिए राष्ट्रपति को आदिवासी समाज की ओर से ज्ञापन भेजा जाना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट मांग हो कि आदिवासियों को भी अलग धर्म कोड दिया जाए, यह उनका संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है। अपने संबोधन के अंत में श्री उमंग सिंघार ने कहा, मैं उमंग सिंघार जल, जंगल, जमीन, हमारी संस्कृति और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण की लड़ाई में हमेशा अपने आदिवासी समाज के साथ खड़ा रहूंगा।

नीतीश सरकार युवाओं तक नौकरी की पहुँच बनाने लॉन्च करेगी नया पोर्टल

पटना. बिहार सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य के एक करोड़ युवाओं को रोजगार और नौकरी देने का लक्ष्य रखा है। इस काम को तय सीमा में पूरा करने के उद्देश्य से युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन भी किया है। आने वाले दिनों में इस नवगठित विभाग की जवाबदेही और बढ़ेगी। इस विभाग को अब ई-पोर्टल का संचालन, विभिन्न जिलों में रोजगार मेला आयोजित करना और नौकरी से जुड़ी युवाओं की समस्याओं के समाधान का निराकरण भी करना होगा। हाल ही में सरकार ने इस नए विभाग को ठीक से चलाने के लिए 147 नए पद स्वीकृत किए हैं। इन पदों के जरिए विभाग के सभी काम तेजी से पूरे किए जाएंगे। विभाग रोजगार से जुड़े नियम बनाएगा, योजनाओं को लागू करेगा और युवाओं की मदद के लिए नई सुविधाएं शुरू करेगा। मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को स्वीकृत भी कर दिया है। जानकारी के अनुसार, नवगठित विभाग का सबसे अहम कार्य एक ई-पोर्टल का प्रबंधन होगा। इस पोर्टल पर युवा अपनी पढ़ाई और योग्यता के अनुसार नौकरी की जानकारी देख सकेंगे और ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे। इस सुविधा के प्रारंभ होने से युवाओं को विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। विभाग राज्य के अलग-अलग जिलों में रोजगार मेलों आयोजित करेगा। मेलों में निजी और सरकारी कंपनियां सीधे युवाओं से मिलेंगी और मौके पर ही नौकरी के अवसर उपलब्ध कराएंगी। नया विभाग निजी कंपनियों, उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों से भी लगातार संपर्क में रहेगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा किए जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से बिहार के युवाओं को नौकरी मिलने में आसानी होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

पंजाब में कड़ाके की ठंड के बीच स्कूलों का बदलेगा समय?

लुधियाना. पंजाब में कड़ाके की ठंड और घनी धुंध के प्रकोप ने जनजीवन के साथ शिक्षा विभाग की गतिविधियों की रफ्तार पर रोक लगानी शुरू कर दी है। मौसम के बिगड़ते मिजाज और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जहां एक ओर राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं और अधिकारियों के महत्वपूर्ण ओरिएंटेशन प्रोग्राम को टाल दिया गया है, वहीं दूसरी ओर अध्यापक संगठनों ने सुबह की जानलेवा धुंध से बचाव के लिए स्कूलों के समय में तुरंत बदलाव की आवाज उठाई है। पंजाब के कई हिस्सों में विजीबिलिटी शून्य होने के कारण सड़कों पर बढ़ते खतरों ने अभिभावकों और अध्यापकों की चिंता को बढ़ा दिया है। प्रचंड ठंड का सीधा असर खेल के मैदानों पर भी दिखाई दिया है। डायरैक्टर स्कूल एजुकेशन पंजाब के स्पोर्ट्स विभाग ने लुधियाना जिले में आयोजित होने वाली 69वीं इंटर-डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी स्कूल खेलों के कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार 16 से 22 जनवरी तक होने वाली इन राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। विभाग के उच्च अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जारी कड़ाके की ठंड और छोटे बच्चों की सेहत व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन खेलों को हाल की घड़ी के लिए मुल्तवी करना ही उचित समझा गया है। डायरेक्टर ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सभी जिलों को सूचित कर दिया है। स्कूलों का समय 10 से 3 बजे तक करने की मांग मास्टर कैडर यूनियन ने प्रदेश में बढ़ रही शीत लहर और शून्य दृश्यता को देखते हुए शिक्षा विभाग से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक करने की पुरजोर मांग की है। यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष जगजीत सिंह साहनेवाल और जिला जनरल सचिव गुरप्रीत सिंह दोराहा ने कहा कि धुंध के कारण दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों और अध्यापकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी लगातार गिर रही है। वे बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर छुट्टियों में वृद्धि न करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन गिरते तापमान के बीच समय परिवर्तन में देरी करना किसी बड़े हादसे को न्यौता देने के समान है। छुट्टियों के बाद पहले दिन कम रही हाजिरी सर्दियों की छुट्टियों के बाद आज जब स्कूल खुले तो पहले ही दिन कड़ाके की ठंड का असर विद्यार्थियों की उपस्थिति पर साफ देखने को मिला। घनी धुंध और ठिठुरन के कारण अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बहुत कम दर्ज की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई निजी स्कूलों ने अपने स्तर पर ही स्कूल के समय में बदलाव कर दिया है ताकि बच्चों को सुबह की भीषण ठंड से बचाया जा सके। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी अध्यापकों और अभिभावकों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। वेदान्त प्रकाश मारवाह और हरविंदर लहरा जैसे लोगों ने सोशल मीडिया कमैंट्स के जरिए बताया कि आज इस सर्दी का सबसे ठंडा दिन था और भीषण ठंड के कारण बच्चों का बुरा हाल रहा। यहां तक कि ठंड की वजह से हाथ भी सही से काम नहीं कर रहे थे। कुलदीप सिंह अरोड़ा और लखविंदर लकी ने भी पुष्टि की कि स्कूलों में बच्चे बहुत कम आए। वहीं, किरन पुनिया बराड़ जैसे अभिभावकों ने पुरजोर मांग की है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्कूल का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 या 3 बजे तक होना चाहिए। प्रशासनिक कारणों से 'मिशन समर्थ' की ओरिएंटेशन भी मुल्तवी स्टेट कौंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.), पंजाब ने भी अपने प्रशासनिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। 'मिशन समर्थ 4.0' के तहत 15 जनवरी को होने वाली एक दिवसीय ओरिएंटेशन को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पंजाब के समूह जिला शिक्षा अधिकारियों (सैकेंडरी और एलीमैंट्री), समूह प्रिंसीपल डाइट और समूह उप जिला शिक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लेना था। डायरैक्टर एस.सी.ई.आर.टी. पंजाब के अनुसार, इस ओरिएंटेशन की नई तारीखों का एलान भविष्य में उचित समय पर किया जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग का पूरा ध्यान फिलहाल मौसम के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित है।

CM यादव का ऐलान: एआई को कुशल शासन और पारदर्शिता के लिए अहम बनाती है राज्य सरकार

राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति एआई पर मिशन मोड पर होगा कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लांच की मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 प्रधानमंत्री मोदी के विजन को दृष्तिगत रखकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश जन-कल्याणकारी योजनाओं में एआई का प्रभावी उपयोग करेगा मध्यप्रदेश प्रदेश में जल्द लाई जाएगी राज्य एआई नीति मुख्यमंत्री ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026’ का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य जी की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है। स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी।   आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव जैन  ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी … Read more

मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों के लिए UPPSC और PSC तैयारी, 2 नए छात्रावास बनाने की योजना

जबलपुर  अपने अटपटे बयानों के लिए पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री आजकल बहुत नापतौल कर बयान दे रहे हैं. जनजातीय मंत्री विजय शाह ने जबलपुर में अपने विभाग के अलावा किसी दूसरे सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने बताया कि आदिवासी छात्र-छात्राओं को यूपीएससी और पीएसी की तैयारी के लिए जबलपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा. जिसमें छात्र-छात्राओं को सरकारी खर्च पर विशेष कोचिंग करवाई जाएगी. जबलपुर में बनेंगे 2 नए छात्रावास मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह जबलपुर पहुंचे. जहां उन्होंने दो नए छात्रावासों के निर्माण की घोषणा की है. जिन्हें 8 करोड़ 18 लख रुपए की लागत से बनाया जाएगा. एक छात्रावास जबलपुर के महाकाल में और दूसरा कुडम में बनेगा. मंत्री कुंवर विजय शाह का कहना है कि "आदिवासी जनजाति के छात्रों को लेकर जबलपुर में एक नया प्रयोग किया जा रहा है, जो अगले शिक्षा सत्र से शुरू होगा. आदिवासी छात्रों को सरकार कराएगी कोचिंग इसके तहत 100 लड़के और 100 लड़कियों को यूपीएससी और पीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग करवाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग की ओर से 18 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. उन्होंने बताया इसी तरह अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए नीट, आईआईटी, जेईई और करंट अफेयर्स की तैयारी के लिए भी जबलपुर में व्यवस्था की जा रही है. इन छात्रों के लिए हॉस्टल बनाया जा रहा है. यह हॉस्टल सुरक्षा के नजरिए से अत्यधिक व्यवस्थाओं से लैस होगा. राज्यसभा सीट और इंदौर मामले पर जवाब देने से बचे विजय शाह मंत्री विजय शाह का कहना है कि मध्य प्रदेश में 5000 अनुसूचित जाति जनजाति छात्रावास हैं. इनमें स्थाइ वार्डन नहीं है और वार्डन का चार्ज किसी शिक्षक को दिया गया है. ऐसी स्थिति में शिक्षक छात्रावास को 100% समय नहीं दे पाता. इसलिए इन सभी छात्रावास में स्थाइ वार्डन की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है." इसके बाद कांग्रेस दिग्विजय सिंह के स्थान पर राज्यसभा में आदिवासी नेता को राज्यसभा सदस्य बनना चाहती है. इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलेंगे. इंदौर में गंदे पानी के मुद्दे पर भी कुंवर विजय शाह ने कुछ नहीं कहा.