samacharsecretary.com

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन, कृषि क्षेत्र में नई पहल

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन भोपाल राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन किया गया है।समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त , सहकारिता, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण/ फूड प्रोसेंसिंग इंडस्ट्रीज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर/ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, आयुक्त/ संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, निदेशक भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर म.प्र, प्रभारी अधिकारी नाबार्ड, समन्वयक स्टेट लेवल बैंकर समिति, तिलहन क्षेत्र में कार्यरत एफपीओ/ को-ऑपरेटिक्स के दो प्रतिनिधि (प्रत्येक से एक) , बीज एवं खाद्य तेल उत्पादक उद्योग से संबंधित दो प्रतिनिधि(प्रत्येक से एक-एक) , भारत सरकार, कृषि मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी (संयुक्त सचिव स्तर) सदस्य होंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास (राज्य मिशन संचालक NMEO-OS) को सदस्य-सचिव नामित किया गया हैं।     राज्य तिलहन मिशन की बैठक का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन की अध्यक्षता में किया जा सकेगा। मिशन के दायित्व अंर्तगत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, मिशन में निहित समग्र नीति दिशा-निर्देशों के भीतर राज्य में मिशन कार्यान्वयन की समग्र निगरानी की जायेगी। राज्य को सौंपे गए क्षेत्र, उत्पादन,  और उत्पादकता लक्ष्यों और इसकी निगरानी के आधार पर तिलहन की खेती और उत्पादन के लिए राज्य तिलहन कार्य योजना को अंतिम रूप देना , कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करने से पहले मिशन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप संभावित और वार्षिक राज्य कार्य-योजना को अंतिम रूप देना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को प्रस्तुत नियमित रिपोर्टों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर नजर रखकर राज्य स्तर पर मिशन की प्रगति की निगरानी की जायेगी। समिति द्वारा आवश्यक बुनियादी ढांचे (इंफास्ट्रक्चर) और कटाई के बाद प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को विकसित करने के लिए राज्य स्तरीय वित्तीय संसाधन आवंटन की देखरेख करना, जिला मिशनों, मूल्य श्रृंखला भागीदारों और तकनीकी सहायता एजेंसियों के कामकाज और प्रगति की निगरानी करना और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करना और एस.ओ.पी निर्धारित करना, प्रमुख मिशन के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने तथा इसे राज्य कृषि नीतियों और विकास योजनाओं के साथ जोडने के लिए संबंधित विभागों (कृषि, सिंचाई वित्त. ग्रामीण विकास आदि) के साथ समन्वय करके अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण सुनिश्चित करने के कार्य किए जाएंगे।  

आज लाड़ली बहनों के खाते में 32वीं किस्त, सीएम मोहन यादव करेंगे डिजिटल ट्रांसफर

 नर्मदापुरम  मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए आज 16 जनवरी की सुबह खुशखबरी होगी। लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त उनके खातों में ट्रांसफर की जाएगी। सीएम डॉ. मोहन यादव नर्मदापुरम के माखननगर दौरे पर रहेंगे और इस दौरान बहनों के खातों में 1500 रुपये सिंगल क्लिक के माध्यम से भेजे जाएंगे। यह राशि पहले 15 जनवरी को जारी होने वाली थी, लेकिन कार्यक्रम एक दिन के लिए स्थगित किया गया। सीएम डॉ.मोहन यादव करेंगे लोकार्पण और भूमिपूजन माखननगर के सांदीपनि स्कूल के पास खेल मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सीएम डॉ.मोहन यादव उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा वे PWD गेस्ट हाउस का लोकार्पण करेंगे और कई अन्य विकास कार्यों का भूमिपूजन भी करेंगे। 31वीं किस्त कब जारी हुई थी मध्यप्रदेश के सीएम डॉ.मोहन यादव ने 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 31वीं किस्त के 1500 रुपये 9 दिसंबर को छतरपुर के राजनगर से ट्रांसफर किए थे। अब 32वीं किस्त माखननगर से जारी की जाएगी। लाड़ली बहनों को 3 हजार रुपये कब मिलेंगे? लाड़ली बहना योजना से अब तक 1 करोड़ 29 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार आने वाले वर्षों में यह राशि बढ़ाकर 2028 तक 3000 रुपये प्रति माह करने का लक्ष्य रखा गया है। हर महीने मिलते हैं 1500 रुपये मध्य प्रदेश सरकार इस योजना के तहत हर पात्र महिला को हर महीने 1500 रुपये देती है. शुरुआत में यह रकम 1000 रुपये थी, फिर 1250 रुपये की गई और अब दिसंबर 2025 से इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है. यानी एक साल में एक महिला को करीब 18000 रुपये की सीधी मदद मिल रही है. 1 करोड़ 29 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा लाभ इस योजना से अभी 1 करोड़ 29 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं. मतलब साफ है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को 32वीं किस्त का फायदा मिलेगा. सरकार का कहना है कि आने वाले सालों में इस रकम को और बढ़ाया जाएगा और 2028 तक इसे 3000 रुपये महीना करने का लक्ष्य है. लाडली बहना योजना क्या है ? बता दें कि लाडली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 में की गई थी. इसका मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे छोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर न रहें. यह पैसा रोजमर्रा की जरूरतों, दवा, राशन और बच्चों की पढ़ाई में काफी मदद करता है. कौन महिलाएं योजना के लिए पात्र हैं? इस योजना का लाभ वही महिलाएं ले सकती हैं जो मध्य प्रदेश की निवासी हों. महिला विवाहित होनी चाहिए, जिसमें विधवा, तलाकशुदा और छोड़ी गई महिलाएं भी शामिल हैं. महिला की उम्र 21 साल से ज्यादा और 60 साल से कम होनी चाहिए. पैसा सीधे महिला के आधार लिंक बैंक खाते में भेजा जाता है. किन महिलाओं को नहीं मिलेगा पैसा?     अगर किसी महिला या उसके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जिनके परिवार में कोई भी सदस्य इनकम टैक्स भरता है, उन्हें भी इस योजना से बाहर रखा गया है.      इसके अलावा जिनके परिवार में कोई सरकारी नौकरी करता है या पेंशन लेता है, उन्हें भी पैसा नहीं मिलेगा. आपके खाते में पैसा आएगा या नहीं, ऐसे करें चेक अगर आपको शक है कि आपका नाम लिस्ट में है या नहीं, तो इसे चेक करना बहुत आसान है.      इसके लिए आपको योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाना होगा.      वहां अंतिम सूची वाले विकल्प में अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें     कैप्चा भरें और ओटीपी डालते ही पूरी डिटेल लिस्ट सामने आ जाएगी. मैसेज नहीं आया तो घबराएं नहीं कई बार बैंक की तरफ से मैसेज देर से आता है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. आप अपने बैंक का बैलेंस मिनी स्टेटमेंट, मोबाइल बैंकिंग ऐप या *99# सर्विस से भी पैसे चेक कर सकती हैं. महिलाओं के लिए क्यों खासहै यह योजना अगर देखा जाए तो लाडली बहना योजना से हर महिला को महीने में 1500 रुपये मिलते हैं. यानी साल भर में यह रकम 18000 रुपये हो जाती है.आज के समय में जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, तब यह योजना महिलाओं के लिए राहत बनकर आई है. यह पैसा सीधे खाते में आता है और किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होती, जिससे भरोसा भी बना रहता है. गांव और छोटे शहरों में यह पैसा घर के छोटे खर्चों के लिए बहुत बड़ा सहारा बन चुका है. कब शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना मई 2023 में शुरू की गई थी। योजना के उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, परिवार में उनके निर्णय अधिकार को मजबूत करना तथा स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सतत सुधार सुनिश्चित करना है।     10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना की शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1,250 रुपये किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः 250 रुपये की वृद्धि की गई।     इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, 2024 व 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर 250 रुपये की विशेष सहायता राशि भी बहनों को प्रदान की गई। वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।     योजना की शुरुआत (जून 2023) से लेकर दिसंबर 2025 तक लगभग 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। योजना में किसे मिलता है लाभ पात्रता:     मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो।     विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।     21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाएं पात्रता के दायरे में आती हैं। अपात्र:     स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।     ​जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर … Read more

चंबल से अरावली तक खनन माफिया का तांडव, राजस्थान और एमपी में लोग खौफ में, कानून नाकाम

श्योपुर/जयपुर देश में अवैध रेत खनन का जिन्न एक बार फिर पूरी ताकत से बाहर आ चुका है. राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में रेत माफिया का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब न सिर्फ आम लोग, बल्कि पुलिस और वन विभाग के अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं.  जांच में सामने आया है कि बीजेपी शासित दोनों राज्यों में रेत माफिया खुलेआम दिनदहाड़े अवैध खनन और परिवहन कर रहा है. हालात इतने गंभीर हैं कि बीते एक हफ्ते में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक वनकर्मी ड्यूटी पर तैनात था. कई जिलों में अधिकारी कार्रवाई करने से डर रहे हैं और स्थानीय लोग पर्यावरण तबाही को लेकर दहशत में जी रहे हैं. राजस्थान के धौलपुर जिले से सबसे चौंकाने वाला मामला सामने आया. यहां चंबल नदी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन रोकने गए वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया. घटना 8 जनवरी की रात की है, जब वन विभाग की टीम चंबल वन्यजीव क्षेत्र में गश्त कर रही थी. ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने भागने के दौरान वनकर्मी को टक्कर मार दी. गंभीर हालत में उन्हें पहले करौली और फिर जयपुर रेफर किया गया, जहां पैर काटना पड़ा, लेकिन 10 जनवरी की रात उनकी मौत हो गई. वन विभाग के मुताबिक, आरोपी माफिया मौके से फरार हो गया था. बाद में पुलिस ने बजरी माफिया रामसेवक उर्फ चालू को गिरफ्तार किया. इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी से अवैध रास्तों को खोदकर बंद किया, लेकिन सवाल यही है कि क्या ये कार्रवाई स्थायी है? अजमेर: अलर्ट मोड पर प्रशासन, सख्त चेतावनी धौलपुर की घटना के बाद अजमेर प्रशासन हरकत में आया. जिला कलेक्टर लोकबंधु ने अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए. खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई गईं. पुष्कर, केकड़ी और सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी की गई. कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर लाखों का जुर्माना लगाया गया और दोबारा पकड़े जाने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई. प्रशासन का कहना है कि अब किसी भी कीमत पर अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे उलट नजर आती है. अलवर: अरावली की पहाड़ियां हो रहीं खत्म अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों को रेत और पत्थर माफिया खोखला कर रहे हैं. राजगढ़ क्षेत्र के मूनपुर गांव में बालाजी मंदिर के पास खुलेआम पत्थर खनन चल रहा है. आजतक की टीम ने देखा कि सुबह होते ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खनन में जुट जाती हैं. भारी वाहन सड़कों से गुजरते हैं, लेकिन न पुलिस रोकती है और न वन विभाग. जब पुलिस ने पीछा किया तो माफिया ने एक घर की नींव तक तोड़ दी, जिससे तीन बकरियों की मौत हो गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि माफिया को कानून का कोई डर नहीं है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है. बारां: अवैध बजरी मंडी पर छापा बारां शहर में पुलिस ने अंबेडकर सर्किल के पास अवैध बजरी बाजार पर बड़ी कार्रवाई की. 12 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ी गईं, जिनमें से 8 अवैध पाई गईं. हालांकि चार बिना रजिस्ट्रेशन वाली ट्रॉलियों को जांच के बाद छोड़ दिया गया, जिस पर सवाल उठ रहे हैं. गांव वालों का आरोप है कि खनन बस्ती से महज 100 मीटर दूर हो रहा है, ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आ गई हैं और शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप है. मध्य प्रदेश: रेत माफिया बनाम कानून श्योपुर: वन विभाग पर पथराव, मां-बेटे को कुचला राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश की बात करते हैं, जहां श्योपुर जिले में चंबल अभयारण्य की टीम ने एक अवैध रेत से भरा डंपर पकड़ा. डंपर जब्त कर ले जाते वक्त माफिया ने पथराव कर दिया और वाहन छुड़ाने की कोशिश की. पांच लोगों पर केस दर्ज हुआ. इसी जिले के विजयपुर इलाके में तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक सवार बेटे को कुचल दिया, मां गंभीर रूप से घायल हो गई. आरोपी चालक फरार है और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. रतलाम: पुलिस पर हमला, बीजेपी पार्षद गिरफ्तार रतलाम में अवैध परिवहन की सूचना पर पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकी. तभी 15 से ज्यादा बदमाश पहुंचे और पथराव शुरू कर दिया. ट्रॉली पलटने से एक पुलिसकर्मी दब गया. इस मामले में बीजेपी पार्षद जगदीश प्रजापत को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. बाकी आरोपी फरार हैं और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. मुरैना: चंबल में चौबीसों घंटे खनन मुरैना और भिंड चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन का सबसे बड़ा गढ़ बने हुए हैं. दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चंबल नदी से रेत निकालकर बेच रही हैं. खनिज विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है. अधिकारी कहते हैं कि शिकायत मिलने पर जांच होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. जबलपुर: अफसरों को कुचलने की धमकी जबलपुर में अवैध खनन की जांच करने पहुंचे तहसीलदार और खनिज विभाग की टीम को माफिया ने ट्रक से कुचलने की धमकी दी. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. खनन कारोबारी रोहित जैन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे लोग इतने बेखौफ कैसे हैं. सवाल वही: माफिया इतना ताकतवर क्यों? आजतक की इस जांच में साफ है कि अवैध रेत खनन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का बड़ा संकट बन चुका है. जब अफसरों की जान सुरक्षित नहीं, तो आम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे. सरकारें कार्रवाई के दावे कर रही हैं, लेकिन जब तक माफिया पर स्थायी और सख्त शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक चंबल, अरावली और नर्मदा यूं ही लुटती रहेंगी.  

भजनलाल शर्मा का संदेश: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने फिर दिखाया राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति एवं साहित्य अद्भुत है। यहां वृक्षों, पेड़ों, पहाड़ों और नदियों को पूजा जाता है। हमें अपनी इस सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आगे बढ़ना है, ताकि आगामी पीढ़ी इससे प्रेरणा ले तथा गर्व की अनुभूति करे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति और साहित्य के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी से साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाने की भी अपील की। शर्मा गुरुवार को जयपुर में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती सदियों से ज्ञान, कला और संस्कृति की संवाहक रही है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल विचारों का उत्सव एवं महासागर है। यह आयोजन साहित्य के साथ राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक उजागर करने में मददगार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान साहित्य, संगीत और कला की पुण्य भूमि है। यहां आमेर के किले से लेकर हवा महल तक हर विरासत में संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। पृथ्वीराज रासो राजस्थान की वीरगाथात्मक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मीरा की भक्ति, ढोला-मारू की कहानियां आज भी करोड़ों हृदयों को स्पर्श करती है। विजयदान देथा, कन्हैयालाल सेठिया, कोमल कोठारी जैसे साहित्यकार राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना की मशाल हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरा भक्ति और शक्ति की धरा है। महाराणा प्रताप, पन्नाधाय, अमृता देवी जैसे शूरवीरों ने अपने त्याग, बलिदान और समर्पण से प्रदेश की मिट्टी को गौरवान्वित किया है। पुस्तक पीढ़ियों तक फैलाती है ज्ञान का प्रकाश शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि हमें गुलदस्ते की जगह पुस्तक भेंट करनी चाहिए क्योंकि पुस्तक पीढ़ियों तक ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। श्री शर्मा ने कहा कि किताबें जीवन को समझने का नया दृष्टिकोण देती हैं। साथ ही साहित्य मनुष्य को संवेदना और करुणा से जोड़कर चिंतनशील और विनम्र बनाता है। हमारे पूर्वजों ने ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और जनकल्याण के ग्रंथ श्लोक में लिखे और इस ज्ञान को साहित्य के द्वारा लोगों तक पहुंचाकर लोकप्रिय बनाया। उन्होंने कहा कि मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध वीरों को प्रेरित करने, आजादी के आंदोलन में सेनानियों में जोश भरने, आपातकाल के दिनों में तानाशाही शासन को चुनौती देने से लेकर युद्ध में सेना का हौसला बढ़ाने तक हर समय साहित्य ने राष्ट्रनिर्माण का कार्य किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेम चंद बैरवा, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा, जेएलएफ डायरेक्टर सुश्री नमिता गोखले, श्री विलियम डेलरिंपल, टीमवर्क आटर््स के एमडी श्री संजय रॉय सहित ख्यातनाम लेखक, साहित्यकार एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

युवा लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) R (रामविलास) की मध्य प्रदेश प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा

भोपाल 11 जनवरी 2026 केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री एवं लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चिराग पासवान के मार्गदर्शन में आज मध्य प्रदेश में युवा लोक जनशक्ति पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की औपचारिक घोषणा की गई। भोजपुर क्लब में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जय कुमार ठाकुर जी की गरिमामय उपस्थिति रही, इस अवसर पर श्री यश तिवारी को युवा लोक जनशक्ति पार्टी, मध्य प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया, उनके साथ ही प्रदेश उपाध्याय अक़बर भूखारी, प्रदेश महासचिव विजय तिवारी, प्रदेश सचिव निशिता सिंह, को नियुक्त किया l कार्यक्रम में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जय कुमार ठाकुर,की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने उद्बोधन में श्री ठाकुर ने कहा कि पार्टी के संस्थापक, सामाजिक न्याय की राजनीति के बड़े स्तंभ है, स्वर्गीय श्री रामविलास पासवान की विचारधारा को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रदेश में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पार्टी मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ……….. ऐसे क्षेत्रों पर फोकस करेगी जोआने वाले समय में प्रदेश की तस्वीर बदलेंगे।प्रदेश अध्यक्ष श्री यश तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि युवा लोक जनशक्ति पार्टी का स्पष्ट विज़न है। मध्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को राज्य में एक सशक्त माध्यम के रूप में विकसित करना,तथा गरीबों, महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना।उन्होंने कहा कि यह संगठन केवल राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, हुनर और आत्मसम्मान की लड़ाई है। पार्टी आने वाले समय में जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक संगठन का विस्तार करेगी। इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय युवाओ ने भी अपनी सहभागिता दर्ज की, पार्टी पदाधिकारियों ने अपने संगठनात्मक ढांचे, कार्यप्रणाली और आगामी जनहितकारी गतिविधियों को प्रेस से साझा किया।

अन्नदाता बने सशक्त: योगी सरकार के 9 वर्षों में बदली उत्तर प्रदेश की खेती की तस्वीर

लखनऊ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर यकीन किया तो 2017 से पहले के खाद्यान्न संकट, कालाबाजारी और अराजकता से मुक्ति मिली और किसान पौने नौ वर्ष में ही समृद्धि के पथ पर अग्रसर हो गए। योगी मॉडल का ही असर है कि देश की कुल कृषि भूमि का महज 10 फीसदी हिस्सा रखने वाले उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में योगदान 21 फीसदी हो चुका है। 2017 से पहले कृषि क्षेत्र में विकास दर सिंगल डिजिट पर टिकी थी, लेकिन योगी सरकार में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में यह विकास दर पिछले तीन सालों में 14 फीसदी से अधिक रही। यूपी के किसान ‘खेत से खुशहाली’ तक पहुंचे हैं। डबल इंजन सरकार की नीतियों से उत्तर प्रदेश की खेती उत्पादकता के नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। कृषि क्षेत्र को लेकर सरकार की सोच और नीतियों ने उस तस्वीर को बदला, जिसमें किसान खुद को हाशिये पर महसूस करता था। 2017 में सत्ता संभालते ही योगी सरकार द्वारा सबसे पहले किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ करने की बात हो या पहली बार वैज्ञानिकों द्वारा ‘लैब से निकल कर लैंड’ तक पहुंच कर विकसित कृषि संकल्प अभियान के जरिए उत्तर प्रदेश के 14170 गांवों में 23.30 लाख किसानों से संवाद साधने की, योगी युग में खेती सिर्फ जीविका का साधन नहीं, बल्कि विकास की धुरी बन गई है। खेती-किसानी को प्राथमिकता और पारदर्शी व्यवस्था के कारण पौने नौ वर्ष में यूपी की तस्वीर बदली। कृषि व्यवस्था सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी बदलाव का माध्यम बनी। कभी कर्ज़, सिंचाई और भुगतान की परेशानियों से जूझने वाला किसान सरकार की प्राथमिकता के केंद्र में आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस सोच के साथ कृषि क्षेत्र में अनेक सुधार शुरू हुए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शिता से फसल खरीद होने लगी। भुगतान व्यवस्था को समयबद्ध किया गया। किसान को उपज का उचित मूल्य मिलने लगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया। नहरों के पुनर्जीवन, नलकूपों की संख्या में वृद्धि और मुफ्त/रियायती सिंचाई योजनाओं ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई। सूखे और जल संकट वाले इलाकों में भी खेती सांस लेने लगी। 2017 के पहले जिस उत्तर प्रदेश में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर था, वहां 2017 के बाद किसानों का सम्मान होने लगा। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में एक क्लिक पर किसानों को सम्मान निधि मिलने लगी, जिसमें यूपी अग्रणी भूमिका में रहा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की जारी 21वीं किस्त तक उत्तर प्रदेश के किसानों को 94,668.58 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। दो करोड़ से अधिक किसानों को किसान पाठशाला के जरिए नवीन तकनीक व उन्नत खेती से जोड़ा गया। 16 लाख निजी ट्यूबवेल से जुड़े किसानों का ऋण माफ किया गया। सहकारिता के माध्यम से संचालित एलडीबी द्वारा किसानों को साढ़े 11 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन मिलता था, अब यह छह फीसदी पर मिलेगा। लखनऊ के अटारी में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की स्मृति में सीड पार्क, बाराबंकी में टिश्यू कल्चर लैब के लिए 31 एकड़ भूमि तथा पीलीभीत में बासमती उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए सात एकड़ जगह चिह्नित की गई। योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपए प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा। 2017 के पहले तक किसानों का असंतोष अब विश्वास में बदला है। 2017 से अब तक 2.96 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया गया।

सर्द हवाओं के बीच भी आस्था अडिग, माघ मेला में संगम स्नान को उमड़े लाखों श्रद्धालु

प्रयागराज मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। दूर-दराज के राज्यों से लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए संगम पहुंच रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। सुबह से ही संगम तट पर 'हर-हर गंगे' और 'जय श्रीराम' के जयघोष गूंज रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। सुबह 10 बजे तक करीब 36 लाख श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, रोशनी, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी श्रद्धालु को स्नान या दर्शन में कोई परेशानी न हो। मकर संक्रांति के अवसर पर अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वतमानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं को पवित्र संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माघ मास का विशेष महत्व है और इस माह में किए गए व्रत, पूजा और अनुष्ठान पूरे वर्ष शुभ फल देते हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अटल एरिना के आचार्य इस पावन अवसर पर प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने सभी देशवासियों को माघ मास की पवित्रता का आनंद लेने और शुभकामनाएं दीं। वहीं, काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने भी मकर संक्रांति के अवसर पर संगम में पवित्र डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि सूर्य भगवान का मकर राशि में प्रवेश एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक क्षण है, जिसका इंतजार भीष्म पितामह ने हजारों वर्षों तक किया था। उन्होंने भागीरथ के 60 हजार पूर्वजों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिन आस्था और मोक्ष से जुड़ा हुआ है। शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि संगम आस्था और भक्ति का सर्वोच्च केंद्र है। जो भी यहां जिस भावना से आता है, उसे उसी अनुरूप फल मिलता है। उन्होंने कहा कि यह समय सनातन धर्म के पुनरुत्थान का है और यह दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि सनातन संस्कृति आज भी जीवंत और सशक्त है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कहीं स्थायी शांति संभव है, तो वह सनातन मूल्यों, आदर्शों और मान्यताओं से ही आ सकती है। सनातन ही नफरत, हिंसा और युद्ध के माहौल को समाप्त कर सकता है। इस दौरान छह वर्षीय बाल संत श्री बाहुबली महाराज ने कहा कि यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि अगर धर्म की रक्षा होगी तो देश की रक्षा अपने आप होगी। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। माघ मेले के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या को लेकर सुरक्षा, यातायात और अन्य तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति का स्नान सुचारू रूप से चल रहा है और अगले कुछ घंटों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। सभी घाटों पर व्यवस्थाएं योजना के अनुसार काम कर रही हैं और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने भी कहा कि मेला क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएं ठीक से चल रही हैं। रोशनी, सुरक्षा और स्नान से जुड़ी सुविधाएं पर्याप्त हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है। श्रद्धालुओं ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमकर सराहना की। एक श्रद्धालु ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद स्नान करने में कोई परेशानी नहीं हुई। कानपुर से आए श्रद्धालुओं ने पार्किंग और यातायात व्यवस्था को बेहतर बताया। झारखंड से आए श्रद्धालुओं ने टिकट, ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार का धन्यवाद किया। उत्तर मध्य रेलवे ने भी रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे सिस्टम, अस्थायी टिकट काउंटर, अलाव, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि रेलवे की व्यवस्थाएं कुंभ मेले जैसी हैं और यात्रा पूरी तरह सुरक्षित व सुविधाजनक है।

गुमला में रफ्तार का कहर: हाईवा ने पिकअप वैन को रौंदा, चार लोगों की मौके पर मौत

गुमला झारखंड के गुमला जिले में गुरुवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-23 पर एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई। इस घटना में अन्य दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। हादसा भरनो थाना क्षेत्र अंतर्गत भड़गांव के पास उस वक्त हुआ, जब एक हाईवा वाहन ने एक पिकअप वैन को पीछे से तेज रफ्तार में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पिकअप पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे में टाटा मैजिक पिकअप पर सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद कुछ देर तक सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। जानकारी के अनुसार, टाटा मैजिक पिकअप में सवार सभी लोग रांची से गुमला की ओर तिलकुट बेचने जा रहे थे। बताया जा रहा है कि मृतक और घायल सभी रांची के रहने वाले हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हाईवा चालक ने तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हुए पिकअप को पीछे से टक्कर मारी। हादसे के बाद चालक हाईवा लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस फरार वाहन और उसके चालक की तलाश में जुटी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही भरनो थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत व बचाव कार्य शुरू कराया। गंभीर रूप से घायल दोनों व्यक्तियों को पहले सिसई रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें रिम्स, रांची रेफर कर दिया गया। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर सदर अस्पताल, गुमला पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आसपास के थानों और रांची पुलिस से संपर्क किया जा रहा है।

एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों के खातों में आएंगे 1836 करोड़ रूपये

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार, 16 जनवरी को माखन नगर (बाबई), जिला नर्मदापुरम में आयोजित लाड़ली बहनों के राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना अंतर्गत प्रदेश की बहनों के खातों में राशि का अंतरण करेंगे। प्रदेश की लगभग 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार से अधिक पात्र बहनों के खातों में 1836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जायेगी। साथ ही 29 लाख बहनों को गैस सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 90 करोड़ से अधिक राशि का अंतरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया जायेगा। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत जून 2023 से की गई थी। योजना के अंतर्गत माह नवंबर 2025 से राशि में 250 रुपये की वृद्धि की गई है। अब पात्र हितग्राही महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना में जून 2023 से दिसंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता की 31 किश्तों का नियमित रूप से अंतरण किया जा चुका है। जनवरी 2026 में योजना की 32वीं किश्त का लाड़ली बहनों के खातों में अंतरण किया जायेगा। योजना अंतर्गत अब तक जून 2023 से दिसंबर 2025 की अवधि में कुल 48 हजार 632 करोड़ 70 लाख रुपये की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के दौरान 38 हजार 635 करोड़ 89 लाख रुपये का अंतरण किया गया है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान सुनिश्चित किया गया है। आगामी समय में योजना की हितग्राही महिलाओं को विभिन्न रोजगार, स्वरोजगार एवं कौशल उन्नयन कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे, जिससे वे आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकें।  

3 अधीक्षण यंत्री और 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी

 प्रमुख सचिव श्री नरहरि ने जल जीवन मिशन की समीक्षा की भोपाल प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने जल जीवन मिशन के कार्यों की विस्तृत समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। श्री नरहरि ने कार्यों में शिथिलता और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने 3 अधीक्षण यंत्रियों एवं 13 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट किया कि कार्यों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के समस्त जिलों के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं सहायक यंत्री स्तर तक के अधिकारी से जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही योजनाओं की अद्यतन स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। समीक्षा बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की गई। प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति निर्धारित लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है, जिससे मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत शेष बचे कार्यों को निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से प्रगति की निगरानी की जाएगी। प्रमुख सचिव श्री नरहरि ने कहा कि जल जीवन मिशन राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कार्यों की प्रगति में किसी प्रकार की शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि फील्ड स्तर पर समन्वय बढ़ाते हुए गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता के साथ कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।