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UP में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए साइन हुआ MoU

उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने को एमओयू साइन – उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कारपोरेशन की स्वतंत्र इकाई इंडिया एआई मिशन और यूपीडेस्कोके बीच हुआ एमओयू का आदान प्रदान  – उत्तर प्रदेश को AI हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, इंडिया एआई मिशन के तहत यूपी में सशक्त होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम – एमओयू प्रदेश के युवाओं को भविष्य के लिए आवश्यक डिजिटल और एआई कौशल प्रदान करने में होगा मददगार लखनऊ योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कारपोरेशन की स्वतंत्र इकाई इंडिया एआई मिशन और उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीडेस्को) लखनऊ के बीच एक एमओयू का आदान प्रदान किया गया। यह एमओयू उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। एमओयू प्रदेश के युवाओं और छात्रों के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम के नये अवसर प्रदान करेगा एमओयू प्रमुख सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, अनुराग यादव तथा इंडिया एआई मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह के बीच हुआ। इस अवसर पर मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इसे राज्य और केंद्र सरकार के बीच मजबूत सहयोग का प्रतीक बताया। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सरकार पिछले पौने नौ वर्षों से डिजिटल गवर्नेंस, स्टार्टअप्स, आईटी पार्क, डाटा सेंटर और उभरती तकनीकों को लगातार बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री की एआई, मशीन लर्निंग और डाटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना प्राथमिकताओं में शामिल है। यही वजह है कि इंडिया एआई मिशन के तहत एमओयू प्रदेश के युवाओं, छात्रों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। प्रदेश में स्थापित की जाएंगी 65 डाटा एवं एआई लैब प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुराग यादव ने कहा कि इंडिया एआई मिशन के तहत यह पहल प्रदेश के युवाओं को भविष्य के लिए आवश्यक डिजिटल और एआई कौशल प्रदान करने में सहायक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योगी सरकार युवाओं के कौशल विकास, नवाचार को प्रोत्साहन देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर रही है। यह पहल प्रदेश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यूपीडेस्को की प्रबंध निदेशक नेहा जैन ने बताया कि इंडिया एआई मिशन परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को नोडल प्रशासकीय विभाग तथा यूपीडेस्को को राज्य की नोडल एजेंसी नामित किया गया है। उन्होंने बताया कि इंडिया एआई मिशन के तहत प्रदेश में कुल 65 डाटा एवं एआई लैब स्थापित किए जाने की योजना है। योगी सरकार ने दी 49 डाटा एवं एआई लैब की स्थापना को हरी झंडी वर्तमान में लखनऊ और गोरखपुर स्थित एनआईईएलआईटी (NIELIT)केंद्रों में दो इंडिया एआई डाटा एवं एआई लैब पहले से संचालित हो रही हैं, जबकि पीलीभीत में एक डाटा एवं एआई लैब उद्योग साझेदार के सहयोग से स्थापित की गई है। इसके अलावा, योगी सरकार द्वारा 49 डेटा एवं एआई लैब को स्वीकृति दी जा चुकी है और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहीं शेष 13 अतिरिक्त स्थानों की पहचान शीघ्र की जाएगी। इन इंडिया एआई डाटा एवं एआई लैब्स को विशेष रूप से एआई स्किलिंग के लिए आधुनिक अवसंरचना और तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। इन लैब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को एआई टूल्स, डेटा सेट्स और वास्तविक समय की समस्याओं पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे छात्र न केवल उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल कर सकेंगे, बल्कि नवाचार आधारित एआई समाधान भी विकसित कर पाएंगे।

गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर बायोगैस बनाकर घटाई जाएगी तेल-एलपीजी पर निर्भरता

सीएम योगी का विजन : गाय बनेगी मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार, बड़ी संख्या में गो पालकों को होगी आमदनी गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर बायोगैस बनाकर घटाई जाएगी तेल-एलपीजी पर निर्भरता यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर हो सकती है 500 करोड़ के पेट्रोलियम उत्पादों की बचत यूपी में 2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए गए, 21 से अधिक प्रोजेक्ट निर्माणाधीन लखनऊ  देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश तेजी से लीडिंग स्टेट के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत अब बड़ी मात्रा में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाकर क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता घटाने की ठोस रणनीति पर काम हो रहा है। बायोगैस बनाने में अधिक पैमाने पर गाय के गोबर का सदुपयोग किया जाएगा, जिसका सबसे ज्यादा लाभ गोपालकों को मिलेगा। इस योजना में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए जा चुके हैं। एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। 2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत प्रदेश में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, बाराबंकी, बदायूं, बरेली और मिर्जापुर जिलों में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 21 से अधिक नए सीबीजी प्लांट निर्माणाधीन हैं। सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए कार्ययोजना गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जा रही है। प्राथमिक तकनीकी आकलनों के अनुसार एक देशी गाय से प्रतिदिन औसतन लगभग 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जिससे मीथेन युक्त बायोगैस का उत्पादन संभव है। गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि परिशोधन के बाद यही गैस सीबीजी के रूप में रसोई और वाहनों में उपयोग की जा सकती है। यदि प्रदेश में गायों के गोबर से मीथेन का दोहन किया जाए, तो पेट्रोलियम उत्पादों पर होने वाले व्यय में उल्लेखनीय कमी की संभावना बन सकती है। गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। इससे अन्य देशों से आयात होने वाले कच्चे तेल और एलपीजी पर निर्भरता भी घटेगी। बाराबंकी का निजी सहभागिता वाला सीबीजी प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला जैसे प्रयोग इस मॉडल की व्यवहारिक सफलता के उदाहरण हैं।  गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैव-उर्वरक और जैव-उर्वरक से कृषि उत्पादकता का यह चक्र गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य को ऊर्जा सुरक्षा की ओर ले जाएगा।

विशेषज्ञ बोले , उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में आगे बढ़ा रही योगी सरकार

स्टार्टअप इकोसिस्टम से उत्तर प्रदेश बन सकता है ग्लोबल एआई पावर हाउस : कविता भाटिया  विशेषज्ञ बोले , उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में आगे बढ़ा रही योगी सरकार एआई से उत्तर प्रदेश अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता को कर रहा मजबूत   आर्थिक विकास और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान भी बनाने के लिए लगातार आगे बढ़ रहा यूपी  लखनऊ,  उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के पहले दिन  होटल द सेंट्रम में हेल्थ सेक्टर में एआई के प्रयोग को लेकर विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि एआई केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि जनकल्याण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह सेशन प्राथमिकता वाले एआई मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने, नीति संबंधी जानकारी के आदान-प्रदान और व्यावहारिक समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया। इसमें सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर चुनौतियों की पहचान, बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने और परिणाम तैयार करने पर विचार किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ डाटा और एआई आधारित सॉल्यूशंस से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा  विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हेल्थ सेक्टर में तकनीक और एआई के प्रयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम योगी की मंशा है कि एआई के जरिए मातृ एवं नवजात देखभाल, रोगों की समय पर पहचान, सटीक इलाज और हेल्थ रिसर्च को नई गति दी जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ डाटा और एआई आधारित सॉल्यूशंस के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है। सत्र में इंडिया एआई मिशन की सीओओ कविता भाटिया ने एआई के क्षेत्र में जनभागीदारी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मजबूत पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और समृद्ध, संरचित (रिच स्ट्रक्चर्ड) डाटा के प्रभावी उपयोग से उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के जरिए उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल एआई पावर हाउस के रूप में स्थापित किया जा सकता है, जहां नवाचार, निवेश और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। स्टोर डाटा का सही और सुरक्षित इस्तेमाल भविष्य में बीमारियों के सटीक इलाज के साथ रिसर्च में अहम भूमिका निभाएगा  इंडिया एआई मिशन के जनरल मैनेजर स्वदीप सिंह ने हेल्थ सेक्टर में एआई के लिए डाटा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि स्टोर किए गए डाटा का सही और सुरक्षित इस्तेमाल भविष्य में बीमारियों के सटीक इलाज और गहन रिसर्च में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें किसी एक प्रकार के डाटा पर निर्भर न रहते हुए, विविध एआई-आधारित डाटा सॉल्यूशंस पर काम करना होगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी, सटीक और भरोसेमंद बन सकें। वहीं फ्यूचर स्किल्स, इंडिया एआई मिशन के जीएम कार्तिक सूरी ने कहा कि हेल्थ सेक्टर में एआई के सफल उपयोग के लिए फ्यूचर रेडी वर्कफोर्स तैयार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि देशभर में कई डाटा लैब स्थापित की जा चुकी हैं और लगातार नई एआई-आधारित डाटा लैब बन रही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवाओं की क्षमता को एआई बेस्ड टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाए, ताकि एआई सुरक्षित और भरोसेमंद बने।

जशपुर पुलिस ने सरहदी राज्यों से अवैध तस्करी कर लाई 149 क्विंटल धान की जब्त

जशपुर. छत्तीसगढ़ में चालू धान खरीदी सीजन के बीच जशपुर पुलिस ने सरहदी राज्यों से अवैध धान लाने की कोशिशों पर लगातार निगरानी रखी है। इसी कड़ी में चौकी आरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए झारखंड से जशपुर लाए जा रहे 149 क्विंटल अवैध धान को जब्त किया है। इस धान की अनुमानित कीमत 3 लाख 42 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई चौकी आरा क्षेत्रांतर्गत ग्राम केतार और बोकी में की गई। 10 जनवरी 2026 की रात करीब 10 बजे मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम केतार के पास एक संदिग्ध ट्रक में भारी मात्रा में धान लोड कर झारखंड से जशपुर लाया जा रहा है। सूचना मिलते ही चौकी आरा की पेट्रोलिंग टीम ने तुरंत ग्राम केतार स्थित पेट्रोल पंप के पास ट्रक क्रमांक JH-01-GF-0332 को रोका। तलाशी के दौरान ट्रक में 290 बोरी यानी 90 क्विंटल धान पाया गया। पूछताछ पर ट्रक चालक गणेश यादव (33 वर्ष, ग्राम खुटगांव, थाना कुनकुरी) ने बताया कि ट्रक जशपुर निवासी विशाल गुप्ता का है और धान को झारखंड से लाकर जशपुर में खपाने की तैयारी थी। चालक धान परिवहन के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। ट्रक सहित धान को जब्त कर जिला प्रशासन को सौंप दिया गया। उल्लेखनीय है कि विशाल गुप्ता का एक मिनी ट्रक इससे पहले भी धान तस्करी के मामले में पकड़ा गया था। इसके बाद 11 जनवरी 2026 की शाम करीब 7 बजे मुखबिर की सूचना पर आरा पुलिस ने ग्राम बोकी में घेराबंदी कर दो पिकअप वाहन JH-07-H-0224 और JH-01-CV-2140 को रोका। जांच में पहले पिकअप से 66 बोरी यानी 30 क्विंटल और दूसरे पिकअप से 60 बोरी यानी 29 क्विंटल धान बरामद हुई। दोनों पिकअप के चालक शेखर यादव (26 वर्ष, मधुबनटोली, जशपुर) और सजीत कुमार (25 वर्ष, पुरनानगर, जशपुर) पाए गए। चालकों ने बताया कि वे भी झारखंड से धान ले जा रहे थे, लेकिन वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। इसके बाद पुलिस ने दोनों पिकअप और कुल 126 बोरी यानी 59 क्विंटल धान जब्त कर जिला प्रशासन को सौंप दिया। इस तरह जशपुर पुलिस ने केवल दो दिनों में अवैध धान परिवहन करते हुए एक ट्रक और दो पिकअप से कुल 149 क्विंटल धान पकड़कर बड़ी कार्रवाई की। जिले में अब तक 2100 क्विंटल से अधिक अवैध धान जब्त कर संबंधित मामलों में जिला प्रशासन को सौंपा जा चुका है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि जशपुर पुलिस अवैध धान परिवहन के खिलाफ लगातार सख्ती कर रही है। आरा क्षेत्र में पकड़े गए ट्रक और पिकअप से जब्त धान जिला प्रशासन को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि आगे भी अवैध धान तस्करी के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और कोई भी तस्करी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई जिले में धान खरीदी के दौरान काले धंधों पर नियंत्रण और किसानों की उपज की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बलरामपुर में 3 एकड़ वन भूमि पर कब्जा

बलरामपुर. जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पण्डरी गांव में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर वन भूमि घोटाला बताते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि वन विभाग की मिलीभगत से देवचंद साहू और लालचंद साहू ने पैसे देकर तीन एकड़ से अधिक वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया, जबकि विभाग ने कार्रवाई के नाम पर केवल गरीब ठेला लगाने वाले ग्रामीणों को निशाना बनाया है। वन विभाग द्वारा पण्डरी गांव के 43 ठेला लगाने वाले ग्रामीणों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में तीन दिन के भीतर वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ये सभी लोग वर्षों से छोटे-मोटे ठेले लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं और इनका बड़े स्तर पर वन भूमि कब्जे से कोई लेना-देना नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि असल अतिक्रमणकारी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे वन विभाग की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार लालचंद साहू और देवचंद साहू द्वारा वन के वन विभाग साथ मिलकर लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक जेसीबी मशीन चलाई गई। इस दौरान वन भूमि को पूरी तरह समतल कर तीन एकड़ से अधिक क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इतने लंबे समय तक भारी मशीनों के चलने के बावजूद न तो वन विभाग का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही तत्काल कोई कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विभाग कार्रवाई करता, तो इतने बड़े पैमाने पर वन भूमि का नुकसान नहीं होता। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में वन विभाग के प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रेंजर की मिलीभगत और संरक्षण के बिना इस स्तर पर अवैध कब्जा संभव नहीं है। आरोप है कि पैसे लेकर भू-माफियाओं को वन भूमि पर कब्जा करने दिया गया और बाद में अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए गरीब ठेला वालों को नोटिस देकर कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है। इस पूरे मामले में रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि बिना रेंजर की जानकारी के न तो जेसीबी मशीनें कई दिनों तक चल सकती हैं और न ही तीन एकड़ से अधिक वन भूमि पर कब्जा हो सकता है। इसके बावजूद अब तक किसी भी बड़े भूमाफिया के खिलाफ न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही कब्जा हटाने की ठोस कार्रवाई की गई है। मामले को लेकर पण्डरी गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही अवैध कब्जे को तत्काल हटाया जाए और दोषी अधिकारियों एवं भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और उच्च वन अधिकारी इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या वास्तव में वन भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराया जा सकेगा या नहीं।

अवैध उत्खनन में संलिप्त 2 ट्रैक्टर किए वन अमले ने जब्त

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक द्वारा वन की अवैध कटाई, अतिक्रमण और अवैध उत्खनन पर नियंत्रण के लिए सभी परियोजना मंडलों में नियमित निरीक्षण और गश्त के निर्देश दिए गए हैं। इसी निर्देश के तहत विभिन्न परियोजना मंडलों में दिन और रात की संयुक्त गश्त लगातार की जा रही है, जिससे वन सुरक्षा में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। इसी क्रम में कोटा परियोजना मंडल, बिलासपुर की टीम ने गश्त के दौरान दो महत्वपूर्ण कार्रवाई की । जिसके तहत अवैध लकड़ी जप्त परिक्षेत्र तेंदुआ के कक्ष क्रमांक P-128 में गश्ती टीम के पहुंचते ही आरोपी सागौन के 4 लठ्ठे (0.149 घन मीटर) छोड़कर मौके से फरार हो गए। लकड़ी को जप्त कर प्रकरण दर्ज किया गया। इसी तरह कोटा परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक RF-172 में नाले से अवैध रेत और मिट्टी उत्खनन कर ट्रैक्टर से परिवहन किया जा रहा था। टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों सहित जब्त किया। जप्त वाहन एवं आरोपी ट्रैक्टर क्र. CG-04DT-8490 (महिंद्रा लाल कलर), चालक/स्वामी – बुधराम सिंह मरकाम, निवासी सरईपाली जॉन डियर हरा ट्रैक्टर, चालक/स्वामी – ओमप्रकाश मरावी, निवासी सरईपाली दोनों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा (1) ख के तहत प्रकरण दर्ज किए गए। वाहनों को जप्त कर राजसात की कार्रवाई के लिए प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। यह कार्रवाई क्षेत्रीय महाप्रबंधक अभिषेक सिंह एवं मंडल प्रबंधक सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन में परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी वैभव साहू द्वारा सफलतापूर्वक संचालित की गई। इसमें अरुण कुमार सिंह (सहायक परियोजना क्षेत्रपाल), चंद्रकांत साय (क्षेत्ररक्षक), बलदाऊ सिंह मरावी (चौकीदार), नैनसिंह (चौकीदार) तथा रोपण सुरक्षा श्रमिक शामिल थे। प्रबंध संचालक द्वारा की गई प्रशंसा वन अपराधों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने पर निगम के प्रबंध संचालक श्री प्रेम कुमार ने पूरी टीम की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया है। साथ ही, उन्होंने प्रदेश के सभी निगम अधिकारी-कर्मचारियों को इसी प्रकार सजग रहकर वन सुरक्षा कार्य करने के निर्देश दिए हैं। आगामी वर्ष की गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) में क्षेत्रीय कर्मचारियों के मूल्यांकन में वन सुरक्षा एवं संरक्षण में उनके योगदान को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा।

स्लॉटर हाउस कांड का खुलासा: दुधारू-स्वस्थ भैंसों की हत्या, बछड़े और पाड़ों के अवशेष मिलने से हड़कंप

भोपाल   स्लॉटर हाउस में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध कटाई का मामला गहराता जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार स्लॉटर हाउस में 14-15 साल की निर्धारित उम्र के बजाय 4 से 8 साल के दुधारू और स्वस्थ भैंसों को काटा जा रहा है। यहां छोटे-छोटे बछड़ों और पाड़ों के अवशेष के साक्ष्य मिले हैं। 26 टन गौ मांस से भरा मिला था ट्रक बता दें कि पीएचक्यू (PHQ) के सामने 26 टन गोमांस से भरा ट्रक मिला था। इस मांस को स्लॉटर हाउस से मुंबई भेजने का सर्टिफिकेट नगर निगम ने जारी किया था। निगम के डॉक्टर ने इस मांस को भैंस का बताते हुए इंसानों के उपभोग के लिए फिट माना था।  पड़ताल में सामने आया कि स्लॉटर हाउस में रोज 100 से 150 पशुओं का वध किया जा रहा था। वहीं, निगम के रिकॉर्ड में ह संख्या औसतन 40 भैंसों की थी। 22 दिसंबर को स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी ने भास्कर से बातचीत में खुद स्वीकारा था कि रोज 100 से 150 पशुओं की स्लॉटिंग हो रही है। यानी निगम के रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन में 3 गुना से ज्यादा का अंतर था।स्लॉटर हाउस से मांस मुंबई और चेन्नई के रास्ते दुबई समेत खाड़ी देशों तक एक्सपोर्ट किया जा रहा था। हालांकि, नगर निगम प्रशासन को इस सप्लाई चैन की कोई जानकारी नहीं थी। एमआईसी सदस्य (हेल्थ और एसबीएम) आरके सिंह ने कहा, ‘निगम के रिकॉर्ड में हर दिन अधिकतम 40 भैंसों की स्लॉटिंग दर्ज है। मांस कहां और कितना भेजा जा रहा है, यह देखना हमारा काम नहीं है।’ निगम के डॉक्टर रोज दो बार स्लॉटर हाउस की जांच करते थे। शाम को पशुओं की मेडिकल जांच होती। इसके बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता। अगले दिन सप्लाई होने वाले मांस की गुणवत्ता की जांच होती थी। अब पुलिस रिपोर्ट की आड़ में मामला दबाने की कोशिश     जिस 26 टन मांस को मुंबई भेजा गया, उसमें गोमांस की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद पूरा सिस्टम पुलिस की जांच रिपोर्ट की आड़ लेता दिख रहा है। पुलिस कह रही है कि सीसीटीवी फुटेज में सिर्फ भैंसें नजर आ रही हैं, जबकि निगम यह तर्क दे रहा है कि पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की जांच होगी।     पुलिस की जांच रिपोर्ट का मतलब है चार्जशीट, जिसमें कम से कम 3 महीने लगते हैं। यानी तब तक कार्रवाई टालने का रास्ता साफ। ऐसे में सवाल है कि किस रिपोर्ट का इंतजार है?     जब पुलिस की पीएम रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि पहले ही हो चुकी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? मेयर से बोले पार्षद- मान लिया कि सब नियम से हुआ, पर गोमांस का जवाब दें गोमांस मामले में महापौर मालती राय अब एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्षों को मनाने में जुट गई हैं। उन्होंने सोमवर को एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्ष पार्षदों को इस मुद्दे पर निगम का साथ देने के लिए कहा। इस पर पार्षदों ने कहा कि माना सबकुछ नियम से हुआ, लेकिन गाय का मांस कैसे जस्टीफाई हो सकता है? इस पर तो जवाब देना ही होगा। अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हम तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं। नियमों को तिलांजलि: डॉक्टर और तकनीक फेल 1- फिटनेस रिपोर्ट का अभाव: नियम है कि बिना पशु चिकित्सक की जांच और उम्र निर्धारण के किसी पशु को नहीं काटा जाएगा, लेकिन यहां बिना जांच के ही वध का खेल चल रहा था। 2- स्टनिंग और क्रूरता आधुनिक मशीनों और सीसीटीवी की मौजूदगी के बावजूद पशुओं को बिना बेहोश किए और अनावश्यक पीड़ा देकर काटा जा रहा था। 3- अवैध ड्रेसिंग: स्वास्थ्य मानकों के अनुसार जमीन पर मांस का संपर्क प्रतिबंधित है, लेकिन सबूत बताते हैं कि यहां स्वच्छता के मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। सवालों से भाग रहे अधिकारी 1- डॉ. बीपी गौर (पशु चिकित्सक): विवादित सर्टिफिकेट जारी करने के बाद से डॉक्टर ने चुप्पी साध ली है। वे न फोन उठा रहे हैं और न ही दफ्तर में मिल रहे हैं। 2- हर्षित तिवारी (अपर आयुक्त): पशु संबंधी कामकाज संभालने वाले अपर आयुक्त ने सवालों पर फोन काट दिया। स्लॉटर हाउस की नियमावली इनके पास नहीं है। 3- संस्कृति जैन (निगम आयुक्त): भोपाल शहर की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को स्लॉटर हाउस के संचालन की बुनियादी प्रक्रिया तक की जानकारी नहीं है, जिससे प्रबंधन की पोल खुल गई है। असलम पर मेहरबान निगम, 100 करोड़ की जमीन 4 लाख में दी यह मॉडर्न स्लॉटर हाउस करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर बना है, जिसकी बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। निगम ने यह जमीन कंपनी को सालाना सिर्फ 4 लाख रुपए किराये पर दी थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, परिसर में बाहरी लोगों की एंट्री प्रतिबंधित थी। संचालन का पूरा नियंत्रण असलम कुरैशी के पास था। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग भी निगम के बजाय संचालक के पास थी। गोमांस की पुष्टि होते ही तुरंत स्लॉटर हाउस सील कर दिया। आगे की कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के बाद की जाएगी।’ -मालती राय, मेयर ( नगर निगम भोपाल) गोमांस मामले में आरोपियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। मामले में सख्त कार्रवाई हो।’ -विश्वास सारंग, कैबिनेट मंत्री

इंदौर हाई कोर्ट का आदेश: चाइनीज मांझे वाली पतंग उड़ाने पर नाबालिगों के अभिभावक होंगे जिम्मेदार

 इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने सोमवार को राज्य सरकार को चीनी मांझे पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि यदि कोई नाबालिग प्रतिबंधित चीनी मांझे से पतंग उड़ाते हुए पाया जाता है, तो उसके अभिभावकों को भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि जनता के बीच व्यापक प्रचार किया जाए कि चीनी मांझे की बिक्री या उपयोग से, अगर कोई घायल होता है या किसी की मृत्यु होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई की जा सकती है. अदालत ने 11 दिसंबर 2025 को चीनी मांझे से हुई मौतों और हादसों को लेकर स्वतः संज्ञान लिया था. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि चीनी मांझे की बिक्री रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं और हादसों से बचाव के लिए कई एहतियाती उपाय लागू किए जा रहे हैं. सरकार ने यह भी कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे. हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित मांझे की बिक्री या उपयोग करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ BNS, 2023 की धारा 106(1) (आईपीसी की धारा 304-ए) के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. साथ ही, यदि कोई नाबालिग चीनी नायलॉन धागे का उपयोग करता है, तो उसके अभिभावकों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा. सुनवाई के दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने अदालत को बताया कि निर्देशों के पालन में प्रशासन जल्द आदेश जारी करेगा, जिन्हें पड़ोसी जिलों में भी तत्काल प्रसारित किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, पिछले डेढ़ महीने में इंदौर में चीनी मांझे से गला कटने की दो अलग-अलग घटनाओं में 16 वर्षीय किशोर और 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है. प्रशासन द्वारा प्रतिबंध के बावजूद पतंगबाज प्रतिद्वंद्वियों की पतंग काटने के लिए अब भी इस खतरनाक मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं.

UPI ट्रांजैक्शन ने खोला राज: चेतन बनकर होटल में ठहरे अशरफ, दो आधार कार्ड से हुआ खुलासा

मंदसौर मंदसौर में बस स्टैंड के पास स्थित एक होटल में राजस्थान का रहने वाला अशरफ नाम का युवक पहचान छिपाकर हिंदू युवती के साथ ठहरा था। अशरफ ने अपना नाम चेतन बताया था। आधार कार्ड में भी नाम चेतन था। उसका ये झूठ यूपीआई ट्रांजैक्शन में पकड़ा गया। होटल संचालक अशोक मारू ने भुगतान से जुड़े यूपीआई ट्रांजैक्शन की जांच की तो जिस खाते से 600 की राशि आई थी, वह अशरफ खान नाम से थी। जबकि होटल में दर्ज पहचान हिंदू नाम चेतन प्रकाश की थी। इसी विरोधाभास के चलते होटल संचालक को संदेह हुआ। रात के वक्त जब दोनों होटल लौटे तो होटल संचालक ने उनसे पूछताछ की। इस दौरान युवक के पास से एक और आधार कार्ड मिला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उसने फर्जी पहचान के जरिए होटल में ठहरने की कोशिश की थी। इसके बाद होटल संचालक ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने उससे पूछताछ की और गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। हिंदू नाम के आधार पर लिया कमरा पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान अशरफ खान निवासी जैसलमेर (राजस्थान) के रूप में हुई है। वह अपनी हिंदू गर्लफ्रेंड के साथ होटल राज में चेतन प्रकाश नाम के आधार कार्ड के जरिए रुका हुआ था। जांच में आरोपी के पास दो आधार कार्ड मिले। दोनों में फोटो तो एक ही था, लेकिन नाम और पते अलग-अलग दर्ज थे। दोनों आधार कार्ड राजस्थान के बताए जा रहे हैं। लैब टेक्नीशियन की परीक्षा देने आया था बताया जा रहा है कि अशरफ लैब टेक्नीशियन की परीक्षा देने के लिए अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मंदसौर आया था। परीक्षा श्रीजी कॉलेज में थी। इसीलिए दोनों ने सुबह होटल राज में रूम लिया और परीक्षा देने चले गए। युवती राजस्थान के नागौर जिले की रहने वाली बताई जा रही है। दोनों जोधपुर के एक अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के रूप में काम करते हैं। पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को थाने ले जाकर पूछताछ की। पुलिस ने आरोपी अशरफ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि दोनों के परिजन को भी सूचना दे दी गई है। पुलिस पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है। धार्मिक पहचान छिपाने की कोशिश शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि युवक को आशंका थी कि मुस्लिम नाम से हिंदू युवती के साथ होटल में ठहरने पर परेशानी हो सकती है। इसलिए उसने हिंदू नाम वाले फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। हालांकि होटल संचालक ने युवक की इस चालाकी को पकड़ लिया।

KGMU धर्मांतरण केस में नया मोड़, PFI लिंक, विदेशी संपर्क और दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े अहम सबूत मिले

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े लव जिहाद, यौन शोषण और धर्मांतरण मामले की जांच गंभीर हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर केस की कमान स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी गई है. STF की जांच शुरू होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बनी आंतरिक जांच समिति को भंग कर दिया गया है.  फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अब तक की जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सौंपते हुए आगे की जांच STF से कराने की सिफारिश की थी. KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. उन्होंने 9 जनवरी को महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के दौरे के दौरान हुए बवाल से मुख्यमंत्री को अवगत कराया. इसके साथ ही विश्वविद्यालय में की गई कार्रवाई और जांच की स्थिति भी बताई. मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इस केस का सबसे अहम किरदार आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज पुलिस की गिरफ्त में है. 50 हजार के इनामी रमीज को 18 दिन की फरारी के बाद लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. उससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि KGMU में चल रहा धर्मांतरण नेटवर्क सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई लोगों से जुड़े हो सकते हैं. यहां की दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं. आरोप है कि मिलकर धर्मांतरण का रैकेट चलाया जा रहा था. यह भी सामने आया है कि कुछ महिलाओं ने पहले ही इसकी शिकायत की थी. उस वक्त विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया था. अब कुछ विभागाध्यक्षों की भूमिका भी एजेंसियों के रडार पर है. रमीज की गिरफ्तारी के बाद उसके PFI कनेक्शन ने जांच को नई दिशा दी है. पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि फरारी के दौरान रमीज प्रतिबंधित संगठन PFI के कई पदाधिकारियों के संपर्क में था. उसने PFI से कानूनी मदद लेने की कोशिश भी की थी. इसके सबूत मोबाइल डेटा से मिले हैं. रमीज के पिता सलीमुद्दीन के भी PFI से पुराने और गहरे संबंध बताए जा रहे हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि PFI ने सलीमुद्दीन को दो बार सम्मानित किया था. सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन को लेकर हुआ है. पूछताछ में रमीज ने स्वीकार किया है कि उसका संपर्क दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉक्टर शाहीन से था.  शाहीन को पहले ही दिल्ली ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. रमीज ने बताया कि वह डॉक्टरों की कॉन्फ्रेंस में उससे मिला था. फरारी के दौरान शाहीन बाग भी गया था. पुलिस पहले ही रमीज और डॉक्टर शाहीन के संबंधों की जानकारी ATS को दे चुकी थी. इसी इनपुट के बाद ATS ने केस में सक्रियता बढ़ा दी है. रमीज के पास से बरामद फोन के डेटा को रिकवर के लिए भेजा गया है.  जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे PFI नेटवर्क, विदेशी संपर्क और संभावित आतंकी लिंक की कई परतें खुल सकती हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या KGMU में मेडिकल पेशे की आड़ में धर्मांतरण का कोई बड़ा नेटवर्क चल रहा था. क्या दिल्ली ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से इसके तार जुड़े हैं. और इस पूरे नेटवर्क का असली सरगना कौन है?