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मध्य प्रदेश बोर्ड: 10वीं और 12वीं परीक्षा की तिथियों में बदलाव, देखें नई डेट शीट

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने 2025-26 सत्र की हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) बोर्ड परीक्षाओं के टाइम टेबल में बड़ा बदलाव किया है.मंडल ने आधिकारिक नोटिस जारी कर कुछ विषयों की परीक्षा तिथियां आगे बढ़ा दी हैं. ये बदलाव छात्रों के हित में किया गया है. बाकी सभी विषयों का शेड्यूल पहले जैसा ही रहेगा. सभी परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होंगी.मंडल ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वो संशोधित टाइम टेबल छात्रों तक पहुंचाएं और सूचना पटल पर लगाएं. छात्रों से अपील की गई है कि वो सिर्फ ऑफिशियल वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर उपलब्ध टाइम टेबल को ही मानें और अफवाहों से बचें. 10वीं और 12वीं में किन विषयों की तारीखें बदलीं? 10वीं कक्षा का हिंदी पेपर पहले 11 फरवरी (बुधवार)को होना था, लेकिन अब इसे 6 मार्च (शुक्रवार)को शिफ्ट कर दिया गया है. 12वीं कक्षा में तीन मुख्य विषयों की तारीखें बदली गई हैं: – उर्दू और मराठी का पेपर पहले 9 फरवरी (सोमवार)को था, अब 6 मार्च (शुक्रवार)को होगा. – हिंदी का पेपर पहले 7 फरवरी (शनिवार)को था, अब 7 मार्च (शनिवार)को होगा. बाकी सभी विषयों की परीक्षा पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी.ये बदलाव सभी प्रकार के छात्रों पर लागू होगा.चाहे नियमित छात्र हों,स्वाध्यायी हों या दिव्यांग छात्र. परीक्षा केंद्र पर पहुंचने और नियमों की सख्ती सभी छात्रों को परीक्षा केंद्र पर सुबह 8:00 बजे तक पहुंचना अनिवार्य है. सुबह 8:30 बजे तक परीक्षा कक्ष में अपना स्थान ग्रहण करना जरूरी है. 8:45 बजे के बाद किसी भी छात्र को कक्ष में प्रवेश नहीं मिलेगा. 8:50 बजे ओएमआर शीट वितरित होगी. 8:55 बजे प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया जाएगा. प्रैक्टिकल परीक्षाओं का शेड्यूल रेगुलर छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं उनके स्कूलों में 10 फरवरी 2026 से 10 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएंगी. छात्रों के लिए जरूरी सलाह मंडल ने छात्रों से कहा है कि वो संशोधित तारीखों के अनुसार अपनी पढ़ाई और तैयारी को व्यवस्थित करें. स्कूल प्रशासन और अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि सभी छात्रों को समय पर सूचना मिले. ऑफिशियल वेबसाइट पर ही नवीनतम अपडेट चेक करें.

खुशखबरी: प्रदेश के लाखों शिक्षकों के वेतन में हर महीने 5 हजार तक बढ़ोतरी, कैबिनेट बैठक में आज फैसला

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज सुबह 11 बजे मंत्रालय में मोहन कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में पहली बार ई-कैबिनेट एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा जिसके जरिए सभी प्रस्ताव डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किए जाएंगे। शिक्षकों की सैलरी बढ़ाने पर मुहर संभव  आज की कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी जा सकती है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के शिक्षकों को चतुर्थ समयमान वेतनमान देने के प्रस्ताव को कैबिनेट की स्वीकृति मिल सकती है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 1 लाख 25 हजार शिक्षकों को लाभ होगा और उनके वेतन में हर माह 4 से 5 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। पहली बार होगा ई-कैबिनेट ऐप का इस्तेमाल   इसके अलावा जल संसाधन विभाग की मालवा क्षेत्र से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है, जिससे क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं प्रदेश में साइंटिफिक रिसर्च को प्रोत्साहित करने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा के बाद निर्णय लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस पहल से राज्य में शोध और नवाचार को नई दिशा मिलेगी। 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक होंगे लाभान्वित शिक्षा विभाग के अनुसार, 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके लगभग 1.25 लाख शिक्षक वर्तमान में तृतीय समयमान वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं और चतुर्थ समयमान की मांग कर रहे हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं, जो पिछले 5 से 8 वर्षों से इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ केवल प्राचार्य और व्याख्याताओं को ही मिल रहा है। 5 सितंबर को की गई थी घोषणा गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) के अवसर पर शिक्षकों को चतुर्थ समयमान वेतनमान देने की घोषणा की थी। अब इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए आज की कैबिनेट बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। शिक्षक संगठनों को फैसले का इंतजार शासकीय शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो शिक्षकों को हर महीने सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और वर्षों से लंबित मांग का समाधान होगा। शिक्षकों और कर्मचारियों की निगाहें कैबिनेट पर आज होने वाली मोहन कैबिनेट की बैठक को लेकर प्रदेशभर के शिक्षक और कर्मचारी वर्ग आशान्वित हैं। यदि चतुर्थ समयमान वेतनमान को मंजूरी मिलती है, तो यह फैसला शिक्षकों के लिए नई आर्थिक राहत लेकर आएगा और सरकार के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा।

खंडवा: इल्लियों से भरे खाने पर विरोध, वार्डन ने दी धमकी- प्राइवेट बातें सार्वजनिक कर दूंगी

खंडवा खंडवा के सीनियर कॉलेज जनजातीय कन्या छात्रावास की 20-25 छात्राओं ने साहस की एक नई मिसाल पेश की. हॉस्टल के नरकीय हालातों और वार्डन की तानाशाही से तंग आकर ये आदिवासी छात्राएं 8 किलोमीटर पैदल चलकर कलक्ट्रेट पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं. दरअसल, कलेक्टर कार्यालय के बाहर बीते दिन 15 से 18 वर्ष की 20-25 आदिवासी छात्राएं यहां धरने पर बैठ गईं और नारेबाजी करने लगीं. वे अपने हॉस्टल की वार्डन की गंभीर शिकायतें लेकर आई थीं, जो वे कलेक्टर को बताना चाहती थीं. उनकी मुख्य शिकायत भोजन को लेकर थी, जिसमें आए दिन इल्लियां निकलती रहती हैं. शिकायत करने पर वार्डन रेखा प्रजापति उन्हें एडजस्ट करने की ही सलाह देती हैं. छात्राओं के सब्र का बांध तब टूट गया, जब 5 छात्राओं की थालियों में 3 इंच लंबी इल्लियां समेत कीड़े निकलने लगे. इसके बाद कई छात्राओं को उल्टी होने लगी, कुछ की तबीयत इतनी बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन वहां भी इलाज से पहले पुलिस को सूचना देने की ताकीद की गई. गहरी हताशा में ये सभी छात्राएं हॉस्टल से पैदल ही 8 किलोमीटर दूर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं ताकि अपनी व्यथा बता सकें. वार्डन ने उन्हें रोकने का भरसक प्रयास किया, धमकाया भी, लेकिन वे इतने गुस्से में थीं कि कहीं नहीं रुकीं. कलेक्टर कार्यालय के बाहर लड़कियों ने मीडिया को अपनी समस्या बताई, हालांकि उनके चेहरों पर वार्डन की धमकी का खौफ नजर आ रहा था. एक घंटे तक प्रदर्शन और नारेबाजी के बावजूद जब कलेक्टर नहीं आए, तो छात्राएं उठीं और सभागार की तरफ दौड़ लगाई. हंगामा देखकर अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख मौके पर पहुंचीं और छात्राओं की समस्या सुनी. एक पीड़ित छात्रा मनीषा रंगीले ने बताया, ''हम सीनियर महाविद्यालय जनजातीय कन्या छात्रावास से आए हैं. यह अनुसूचित जाति का छात्रावास है. हमारी वार्डन रेखा प्रजापति मैम हैं. कुछ दिनों से लगातार भोजन में इल्लियां निकल रही हैं. आज तो हद हो गई, जब इतनी बड़ी इल्ली निकली वो गोंच वाली. हम मैम के पास लेकर गए तो वे बोलीं, 'बेटा, आज एडजस्ट कर लो, फिर देखेंगे. बहुत सारी लड़कियां उल्टी करने लगीं, उन्हें अस्पताल में एडमिट करना पड़ा. अस्पताल में इलाज करने से मना कर दिया, बोले पुलिस को इन्फॉर्म करो. हम कहां जाते सर? उल्टी कर-कर के… हमने बहुत बार मैम से कहा कि कुछ एक्शन लो, लेकिन वे बहाना बनाकर टाल देती हैं.'' थप्पड़, धमकी और ब्लैकमेलिंग का आरोप छात्रा ने बताया, ''आज 5 बच्चे बीमार थे- रक्षा, खुशबू, भारती, मनू, साक्षी और सलोनी दीदी. मैं खुद खाना खाया तो उल्टी हो गई, लेकिन कॉलेज चली गई. शिकायत करने पर वार्डन मैम डांटती हैं, उल्टा लड़कियों को धमकाती हैं- ''मैं तुम्हारे घर पर तुम्हारी प्राइवेट बातें बता दूंगी.'' यही नहीं, छात्राओं का आरोप है कि खाना बच जाता है तो भी नहीं देते. तीन रोटी मिलेंगी तो तीन ही मिलेंगी. सब्जी बस इतनी कि थाली का पेंदा ढंक जाए. पेट भरकर खाना भी नहीं देते. आज किसी ने भी खाना नहीं खाया. आज आलू की सब्जी में इल्ली मिली थी. हॉस्टल में 100 छात्राएं हैं, लेकिन 60 के करीब ही रहती हैं. पीड़ित छात्राओं का आरोप है, ''आज भी हमें यहां आने से बहुत रोका. हम दो बजे से आने की कोशिश कर रहे थे. जहां भी शिकायत करें, उल्टा हमें ही समझाते हैं- ''बेटा, एडजस्ट कर लो.'' इन छात्राओं ने अपर कलेक्टर को बताया कि वे सभी शहर के लालचौकी स्थित सीनियर ट्राइबल गर्ल्स हॉस्टल की छात्राएं हैं. उन्हें जेल में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन से भी बदतर खाना दिया जाता है. पीने का पानी भी साफ नहीं आता. हॉस्टल की साफ-सफाई भी समय पर नहीं होती. छात्राओं ने कहा कि पहले भी कई बार जनजातीय कार्य विभाग के दफ्तर में शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला. सहायक संचालक नीरज पाराशर निरीक्षण पर आते हैं और उल्टा एडजस्ट करने को कहकर चले जाते हैं. फिर वार्डन धमकाती हैं. घरवालों को फोन करके कहती हैं कि तुम्हारी लड़की स्कूल नहीं जाती, बाहर घूमती है. खराब खाने का विरोध करने पर थप्पड़ मारती हैं. कहती हैं- ''जहां जाना हो, चले जाओ. मेरी बहुत पहचान है, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा.'' अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख ने आश्वासन दिया कि वे हॉस्टल का निरीक्षण करेंगी और सभी समस्याओं का जल्द समाधान कराएंगी. इसके बाद छात्राओं ने प्रदर्शन खत्म किया.

रायपुर: स्वामी विवेकानंद के विचारों से सशक्त भारत का निर्माण संभव: मंत्री राजवाड़े

रायपुर : स्वामी विवेकानंद के विचारों से ही होगा सशक्त भारत का निर्माण : मंत्री राजवाड़े 400 ‘नन्हें विवेकानंद’ बने आकर्षण, युवाओं से पंच परिवर्तन अपनाने का आह्वान रायपुर स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर ही सशक्त, समरस और विकसित भारत का निर्माण संभव है यह बात महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर कही। उन्होंने युवाओं से सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे पंच परिवर्तन को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षित, जागरूक और संस्कारवान युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य तय करेंगे। राष्ट्रीय युवा दिवस (स्वामी विवेकानंद जयंती) के अवसर पर सूरजपुर जिला स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जब जिले के 400 स्कूली विद्यार्थी स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस दृश्य को अद्भुत बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो स्वामी विवेकानंद की ऊर्जा स्वयं युवाओं के माध्यम से मंच पर साकार हो उठी हो। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहने, राष्ट्र सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से जुड़ने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान आत्मनिर्भर भारत और नशामुक्त भारत की शपथ भी दिलाई गई। समारोह में भाषण, काव्यपाठ, रंगोली एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें 400 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर प्रेमनगर विधायक श्री भूलन सिंह मरावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, पूर्व विधायक श्रीमती रजनी रविशंकर त्रिपाठी सहित जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्वामी विवेकानंद के मंत्र “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” का स्मरण कराते हुए कहा कि यह संदेश आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण और मानव कल्याण के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।  

एआई टेक्नालॉजी के उपयोग से कम एफर्ट में होगा ज्यादा काम : आयुक्त डॉ. रवि मित्तल

मीडिया के सभी माध्यमों का प्रयोग कर जनसंपर्क अधिकारी अपने कार्य को बना सकते हैं प्रभावशाली: आयुक्त डॉ. रवि मित्तल एआई टेक्नालॉजी के उपयोग से कम एफर्ट में होगा ज्यादा काम : आयुक्त डॉ. रवि मित्तल जनसम्पर्क की नई चुनौतियाँ: जनसंपर्क अधिकारियों की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ रायपुर मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल ने कहा कि जनसंपर्क अधिकारी एक्सक्लूजिव स्टोरी तैयार करें और इसके व्यापक प्रचार के लिए मीडिया के सभी माध्यमों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की स्टोरी नेशनल और स्टेट लेवल पर प्रकाशित होगी, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया जाएगा। आयुक्त डॉ. मित्तल नवा रायपुर स्थित संवाद के ऑडिटोरियम में जनसम्पर्क की नई चुनौतियां विषय पर जनसम्पर्क अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला में उक्त बाते कहीं।  आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि वर्तमान दौरे में जनसंपर्क में सूचना एवं जनसंपर्क का माध्यम बदल रहे हैं। नए-नए तकनीक आ रहे हैं, जनसंपर्क अधिकारियों को भी उन तकनीकों का उपयोग कर अपने कार्य को प्रमाणिक, बेहतर और समय सीमा में पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया का बखूबी उपयोग करना है, ताकि शासन की फैसलों को जनता तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए अधिकारियों को नए टेक्नोलॉजी से अपडेट रहना होगा। उन्होंने इस मौके पर पत्रकारिता स्कूल-कॉलेजों के बच्चों को भी जनसंपर्क विभाग में इंटरशीप का अवसर देने पर बल दिया।    उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ अधिकारियों में अपर संचालक जवाहरलाल दरियो, संजीव तिवारी, उमेश मिश्रा, आलोक देव ने जनसेवा में स्पष्ट, सरल और समयबद्ध संवाद की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनसंपर्क के लिए प्रभावी संवाद सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रतिभागियों को दो दिनों तक चलने वाले सत्रों की रूपरेखा और अपेक्षाओं से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य समाचार लेखन, टेलीविजन सहभागिता और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से जनसंपर्क को अधिक सशक्त, आधुनिक, संवेदनशील और उन्मुखी बनाना है। कार्यशाला के प्रथम दिवस की शुरुआत पाठक-अनुकूल लेखन सरकारी समाचार को आकर्षक बनाना विषयक सत्र से हुई, जिसमें दैनिक भास्कर के संपादक शिव दुबे ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सरकारी आदेशों और सूचनाओं से जनता से जुड़ी मुख्य बात को पहचानने, सरल और सुबोध भाषा के प्रयोग, प्रभावी हेडलाइन एवं लीड पैराग्राफ लिखने की जानकारी दी। साथ ही, प्रेस विज्ञप्ति की संरचना, उपयुक्त उद्धरणों के प्रयोग तथा संकट के समय मीडिया से संतुलित और समयबद्ध संवाद की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की। द्वितीय सत्र में आकाशवाणी के समाचार संपादक विकल्प शुक्ला ने टेलीविजन मीडिया की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों को विजुअल स्टोरी के रूप में प्रस्तुत करने, टीवी कवरेज के लिए आवश्यक तत्वों, कैमरे पर संक्षिप्त बाइट लेने और फैक्ट शीट के महत्व की जानकारी दी। तीसरे सत्र में सोशल मीडिया और एआई टूल्स के उपयोग पर चर्चा हुई। सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग और एआई विशेषज्ञ राकेश साहू ने  एआई डिजिटल टूल्स का उपयुक्त उपयोग कर फोटो, वीडियो एडिटिंग के बारे में  मार्गदर्शन दिया।  आज के अंतिम सत्र में जनसंपर्क संचालनालय, भोपाल के सेवानिवृत्त संचालक लाजपत आहूजा ने पीआर टूल बॉक्स, स्टेकहोल्डर प्रबंधन तथा आपातकालीन संचार (क्राइसिस कम्युनिकेशन) से जुड़े तुरंत उपयोग योग्य उपकरणों की जानकारी दी। कार्यशाला में राज्यभर से आए जनसंपर्क अधिकारियों ने हिस्सा लिया। 

डॉ. यादव का नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट नागपुर दौरा, अस्पताल की सेवाओं को सराहा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट नागपुर का किया दौरा अस्पताल की व्यवस्थाओं को सराहा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नागपुर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के विभिन्न क्लिनिकल विभागों में जाकर डॉक्टरों और स्टाफ से संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चिकित्सकों की सेवाभावना और स्टाफ द्वारा मरीजों की देखभाल के प्रति समर्पण भावना की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश से आए उन मरीजों से भी मुलाकात की जो एनसीआई में उपचाररत हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मरीजों और उनके परिजन से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से उपचार करवा रहे नागरिकों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। इंस्टिट्यूट के जनरल सेक्रेटरी और सीईओ शैलेश जोगलेकर तथा मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आनंद पाठक ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को संस्थान के विकास और मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही समग्र कैंसर उपचार सेवाओं की जानकारी दी।  

रायपुर: मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में बाल विवाह रोकने की शपथ दिलाई

रायपुर : मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में बाल विवाह रोकथाम की दिलाई शपथ 20 हजार लोगों ने एक साथ शपथ लेकर बनाया विश्व रिकॉर्ड रायपुर जिला मुख्यालय बालोद के समीप ग्राम दुधली में आयोजित देश की प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की रोकथाम के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपस्थित रोवर-रेंजरों, स्काउट-गाइड एवं जनसमुदाय को शपथ दिलाई। इस अवसर पर एक साथ 20 हजार से अधिक लोगों द्वारा बाल विवाह रोकथाम की शपथ लेकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में बालोद जिले का नाम दर्ज कराया गया, जो बालोद जिले के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाल विवाह, समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसे रोकने के लिए केवल शासन ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी लोग अपने घर, परिवार, रिश्तेदारों एवं आसपास के लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें और इसे जड़ से समाप्त करने में सहभागी बनें। शपथ के दौरान उपस्थितजनों ने संकल्प लिया कि वे बाल विवाह नहीं होने देंगे, इसकी सूचना प्रशासन को देंगे तथा समाज में जागरूकता फैलाएंगे। मुख्यमंत्री ने बाल विवाह मुक्त अभियान में उल्लेखनीय प्रयासों के लिए जिला प्रशासन की सराहना की तथा एक साथ 20 हजार लोगों के शपथ लेने पर कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स का प्रमाण पत्र प्रदान किया और उन्हें मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद भोजराज नाग, भारत स्काउट गाईड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त के.के. खण्डेलवाल, महासचिव पी.जी.आर सिंधिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, देशभर से आए रोवर-रेंजर तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

भिंड प्रशासन ने मनरेगा मजदूरों पर सख्ती, 70% मजदूरों को छोड़ा जाएगा, 84 हजार मजदूर प्रभावित

भिंड पंचायतों में फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर मनरेगा की मजदूरी हड़पने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिला पंचायत के माध्यम से सभी पंचायतों में सचिव और जीआरएस ने मजदूरों की ई-केवाइसी की जा रही है। जॉब कार्ड धारी मजदूर के आधार से उसका फेस मैच किए जा रहे हैं। दोनों का मिलान न होने पर संबंधित मजदूर को मनरेगा योजना की मजदूरी से बेदखल किया जा रहा है। 10 हजार मजदूर ही सही बता दें जिले में कुल डेढ़ लाख मजदूरों के मनरेगा के तहत पंचायतों में जॉब कार्ड बनाए गए है। इनमें से 84 हजार एक्टिव मजदूर है। एक माह में 38 हजार मजदूरों की केवाईसी हुई है, जिसमें से महज 10 हजार मजदूर ही सही पाए गए हैं। स्थिति यह है कि जिस पंचायत में 100 मजदूर दर्ज है, वहां केवाईसी के बाद 20 से 25 कामगार ही रह गए है।  30 जनवरी तक मनरेगा में कार्यरत सभी मजदूरों की केवाईसी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में जानकारों का मानना है कि पंचायतों में सरपंच और सचिवों द्वारा बनाए फर्जी जॉबकार्ड धारी 70 प्रतिशत तक मजदूर इस योजना से बेदखल किए जा सकते हैं। इस तरह चल रही केवाईसी मनरेगा के तहत पंचायतों में किए जा रहे कार्य में जॉब कार्ड धारी मजदूर कार्य करने पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनकी ई-केवाईसी की जा रही है। सार्वजनिक कार्यक्षेत्र पर पोर्टल से आधार लिंक कर मजदूर का फोटो खींचा जा रहा है, जो आधार में लगे फोटो से मैच किया जा रहा है। इतना ही नहीं कार्यक्षेत्र पर मजदूर की सुबह-शाम नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप से उपस्थिति दर्ज की जा रही है। जिससे मनरेगा में अब फर्जी मजदूर कार्य नहीं कर पाएंगे। पंचायतों में भी असल मजदूर ही रह गए हैं। अब मजदूर के खाते में जाएगी मजदूरी मनरेगा में प्रतिदिन की 261 रुपए मजदूरी दी जा रही है। ग्राम पंचायतों में चेक डेम, पीएम आवास योजना, पंचायत में पौधरोपण, पशु शेड निर्माण, शांतिधाम निर्माण, तालाब निर्माण, खेत तालाब, नाला निर्माण, सड़क निर्माण, स्कूल भवन का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन का निर्माण, गोशाला, चारागाह विकास, बायोगैस निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता, सीसी रोड निर्माण सहित आदि कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों को मनरेगा के मजदूर करते हैं, लेकिन अभी तक पंचायत द्वारा मजदूर के दस्तावेज लगाकर सीधे खाते में पैमेंट डाल दिया जाता था। शासन की सख्ती के बाद अब मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूर के आधार से लिंक खाते में ही मजदूरी भेजी जाएगी। मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी की जा रही है। जो कार्य करने वाले मजदूर हैं, वही रह जाएंगे। केवाइसी पूरी होते ही मजदूरों की छटनी करेंगे। – सुनील दुबे, सीईओ, जिपं भिण्ड ये भी जानिए…. 1.5 लाख मजदूर मनरेगा में दर्ज। 84 हजार पंचायतों में हैं एक्टिव । 38 हजार की ई-केवाईसी पूरी। 28 हजार मजदूर नहीं आए। 30 जनवरी तक पूरी होगी जांच।

छत्तीसगढ़ सरकार की तैयारी: 2027 जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी

रायपुर   राज्य में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। यह जनगणना देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार ने गृह विभाग को बनाया नोडल राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की पहली बैठक मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में 6 जनवरी आयोजित की गई, जिसमें जनगणना की रूपरेखा, कार्ययोजना और विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में जनगणना के लिए गृह विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। गृह विभाग भारत सरकार, जनगणना निदेशालय और राज्य के सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 के डिजिटल रोडमैप, संगठनात्मक ढांचे और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। डिजिटल गणना, मोबाइल ऐप से होगा डेटा संग्रह निदेशक ने बताया कि जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल होगी। आंकड़ों का संग्रह मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा, जबकि इसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए वेब पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इस बार नागरिकों को सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा राज्य को इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इस बड़े कार्य के लिए राज्य में लगभग 63 हजार प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। जनगणना से पहले पूर्व-परीक्षण (प्री-टेस्टिंग) का कार्य नवंबर 2025 में कबीरधाम जिले के कुकदूर, महासमुंद जिले की महासमुंद तहसील के चयनित गांवों और रायपुर नगर निगम के एक वार्ड में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इन अनुभवों को मुख्य जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी मुख्य सचिव ने बताया कि जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की अवधि में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। इस अवधि का निर्धारण मानसून और स्कूल शिक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में देशभर में एक साथ जनसंख्या गणना की जाएगी। इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि जनगणना 2027 राज्य की भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं की मजबूत आधारशिला होगी। उन्होंने सभी विभागों से मिशन मोड में समन्वय के साथ कार्य करने और आम जनता से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग की अपील की। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना) मनोज पिंगुआ, निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय, एनआईसी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

नई रेललाइन तैयार, रामगंज मंडी-भोपाल ट्रैक पर ट्रायल रन की तारीख तय, जल्द शुरू होंगी ट्रेनें

भोपाल  मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित रामगंज मंडी- भोपाल रेल लाइन (bhopal ramganj mandi railway line) का काम अब अपने निर्णायक चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। करीब 3035 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में अब काम की रफ्तार काफी तेज है। रेलवे ने मार्च-2026 तक अलग-अलग सेक्शन में ट्रैक बिछाने और ट्रायल रन शुरू करने की डेडलाइन तय कर दी है। जिसके तहत जिले में खिलचीपुर से आगे राजगढ़ और ब्यावरा के साथ ही सोनकच्छ तक मार्च तक ट्रायल रन के लिए ट्रैक तैयार होगा। केवल सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ और कुरावर वाला हिस्सा ही इसके बाद शेष रह जाएगा। जिसे भी सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। राजस्थान के हिस्से का काम पूरा बता दें कि राजस्थान में काफी पहले काम पूरा हो चुका है, लेकिन मप्र की सीमा में प्रशासकीय और रेलवे के ढीले रवैये के चलते काम पिछड़ा है। राजगढ़ जिले की बात करे यहां जमीन अधिग्रहण के कारण भी काम में देरी हुई है। यहीं कारण है कि वर्ष-2022 में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट अभी तक अधूरा है। हालांकि अब काम निर्णायक मोड में पहुंचता नजर आ रहा है। अर्थवर्क नरसिंहगढ़ के एक सेक्शन को छोड़कर लगभग सभी जगह पूरा हो चुका है। अब केवल ट्रैक बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण का काम शेष है। खिलचीपुर और ब्यावरा में बिछीं पटरियां कोटा मंडल में आने वाले रामगंज मंडी से ब्यावरा का काम मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। खिलचीपुर से करीब 12 किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। इसके साथ ही ब्यावरा राजगढ़ सेक्शन में भी ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं भोपाल मंडल में ब्यावरा से आगे सोनकच्छ सेक्शन के लिए भी मार्च की डेडलाइन तय की है। जिसके तहत ब्यावरा से करीब चार किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। उधर श्यामपुर से आगे अब कुरावर तक भी ट्रैक तैयार होने वाला है। ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रैक तैयार होने के बाद करीब 80 फीसदी काम भोपाल मंडल का भी पूरा हो जाएगा। केवल नरसिंहगढ़ के बीच का करीब 22-25 किमी सेक्शन में ही काम अधिक बाकी है। राजगढ़ जिले में रहेंगे ये स्टेशन रेल लाइन पर जिले में ब्यावरा जंक्शन सहित छह स्टेशन रहेंगे। राजस्थान तरफ से खिलचीपुर के भोजपुर से एंट्री करने वाले ट्रैक पर पहला स्टेशन भोजपुर ही है। इसके बाद खिलचीपुर, राजगढ़, ब्यावरा जंक्शन, नरसिंहगढ़ और कुरावर शामिल है। इसके आगे श्यामपुर होते हुए हिरदाराम और भोपाल लाइन जुड़ेगी। ट्रैक की बात करे तो खिलचीपुर से राजगढ़ और एनएच-52 के सामानांतर और राजगढ़-ब्यावरा के बीच हाईवे को क्रॉस कर ब्यावरा पहुंचेगी। जहां से ब्यावरा से पांच किमी आगे मक्सी-रुठियाई ट्रैक के सामांतर और फिर ट्रैक पूर्व में अलग होकर करीब सात सौ मीटर आगे देवास हाईवे को क्रॉस करेगी, इसके बाद एनएच-46 के साइड में होते हुए कुरावर के पास फिर फोरलेन क्रॉस करेगी भोपाल रेल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी ने बताया कि मार्च तक ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रायल ट्रैक तैयार कर लिया जाएगा। इस सेक्शन में अर्थवर्क लगभग पूरा हो चुका है। पटरियां बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण किया जा रहा है। मार्च तक 80 प्रतिशत हमारा काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद केवल एक ही सेक्शन का काम रह जाएगा। जिसे भी अक्टूबर तक पूरा करा लिया जाएगा। कोटा मंडल के ट्रैक इंजीनियर गौरव मिश्रा का कहना है लगभग 90 फीसदी काम हमारा पूरा हो चुका है। अब केवल राजगढ़ ब्यावरा के बीच ट्रैक और कुछ हिस्सा खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच बाकी है। जिसे भी मार्च तक पूरा कराने की डेडलाइन तय है।