samacharsecretary.com

गांधी मैदान में हुआ भव्य समारोह: होमगार्ड जवानों को आधुनिक प्रशिक्षण और नई जिम्मेदारियों की जानकारी

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बदलते समय के साथ कानून-व्यवस्था की चुनौतियां भी बदल गई हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों को पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष होना होगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए अनुशासन और कौशल को अब मैदान में उतारने का समय आ गया है। जनता की सुरक्षा और सहायता ही हमारा पहला धर्म है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अपराधी चुनौती देते हैं तो कभी-कभी उन्हें जवाब देना भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार अब तेजी से बदल रहा है और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। पांच हजार होमगार्ड जवानों को दी बधाई मुख्यमंत्री गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार गृह रक्षा वाहिनी के 5,000 नवनामांकित जवानों के पारण परेड समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी जवानों को बधाई देते हुए कहा कि यहां तक पहुंचना उनके परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी जवान अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करेंगे। मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी ली और जवानों द्वारा प्रदर्शित अनुशासन तथा प्रशिक्षण कौशल की सराहना की। समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, गृह विभाग और बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। होमगार्ड कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होमगार्ड जवानों के कल्याण और सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है। जवानों के लिए आधुनिक बैरकों का निर्माण, बेहतर आवासीय सुविधाएं और कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि जवान बिना किसी चिंता के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। बिहार पुलिस की सहयोगी शक्ति मानी जाने वाली गृह रक्षा वाहिनी को अब 5,000 नए प्रशिक्षित जवानों का बल मिला है। इससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। महिला जवानों ने भी दिखाया दमखम पारण परेड की विशेषता यह रही कि बड़ी संख्या में महिला गृह रक्षक जवानों ने भी इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने अपने अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रशिक्षण क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। समारोह के अंत में सभी 5,000 जवानों ने देश और राज्य की सेवा के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ शपथ ली। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जवानों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अत्याधुनिक प्रशिक्षण से लैस हैं नए जवान नवनामांकित जवानों को केवल सामान्य सुरक्षा प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान वीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्य, अत्याधुनिक हथियारों के संचालन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण विधाओं का व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। इससे वे विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे। 45 डिग्री तापमान में भी दिखा अनुशासन और शौर्य भीषण गर्मी और लगभग 45 डिग्री तापमान के बावजूद गांधी मैदान में जवानों का उत्साह और जोश देखने लायक था। मुख्य मंच के सामने से गुजरते मार्चिंग दस्ते और बिहार गृह रक्षा वाहिनी के विशेष घुड़सवार दस्ते ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। जवानों की शानदार प्रस्तुति पर पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बड़ी संख्या में जवानों के परिजन भी कार्यक्रम में मौजूद थे, जिन्होंने अपने प्रियजनों की उपलब्धि और प्रशिक्षण प्रदर्शन को गर्व के साथ देखा। जवानों के अनुशासन, समर्पण और शौर्य ने समारोह को यादगार बना दिया।

भानगढ़ किला का श्राप और इतिहास: जानें तांत्रिक और संत बालू नाथ की कथाएं

अलवर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ किला भारत की सबसे भूतिया जगहों में से एक माना जाता है। इस किले की कहानी और इसके रहस्यमयी श्राप ने इसे रहस्यमयी और डरावनी जगह बना दिया है। यहां रात में जाना मना है, इस किले का इतिहास रहस्यमयी कहानियों से भरा पड़ा है। और इसके पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। भानगढ़ किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा माधो सिंह ने करवाया था। यह किला अपनी स्थापत्य कला और वास्तुकला के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन इसके अलावा यह किला अपने रहस्यों और भूतिया गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है। भूतिया श्राप की कहानी भानगढ़ किले की कहानी संत बालू नाथ से जुड़ी हुई है। राजा माधो सिंह ने इस किले का निर्माण करवाया था, लेकिन उन्होंने पहले बालू नाथ से इसकी स्वीकृति ली थी। बालू नाथ जो एक तपस्वी थे, उन्होंने शर्त रखी कि महल की छाया उनके ध्यान स्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। जब ​​किले का निर्माण पूरा हुआ तो इसकी छाया बालू नाथ के ध्यान स्थल पर पड़ी। छाया अपने ऊपर पड़ने से संत क्रोधित हो गए और उनका गुस्सा किले के लिए श्राप साबित हुआ। किले के निर्माण के तुरंत बाद ही भानगढ़ नष्ट हो गया और अब तक इसे फिर से बसाया नहीं जा सका है। बालू नाथ की तपस्या स्थली आज भी खंडहर में है, जो इस शापित स्थान के रहस्य को और बढ़ा देता है। राजकुमारी रत्नावती की कहानी भानगढ़ किले के बारे में एक और प्रसिद्ध कहानी यह है कि एक तांत्रिक के श्राप के कारण यह किला पूरी तरह से बर्बाद हो गया था। ऐसा कहा जाता है कि किले की खूबसूरत राजकुमारी रत्नावती इस किले के पतन का मुख्य कारण थी। राजकुमारी से प्यार करने वाले एक तांत्रिक ने उसे पाने के लिए एक चालाक योजना बनाई। लेकिन जब उसकी साजिश का पता चला तो उसे मौत की सजा सुनाई गई। इस तांत्रिक के श्राप के परिणामस्वरूप किला जल्द ही खंडहर में बदल गया और एक प्रेतवाधित स्थान के रूप में जाना जाने लगा। इसके बाद किले में अजीबोगरीब घटनाएं होने लगीं। स्थानीय लोग आज भी दावा करते हैं कि रात में किले से चीखें, चूड़ियाँ टूटने की आवाज़ और संगीत सुनाई देता है। उनका यह भी मानना ​​है कि किले में कभी-कभी परछाइयाँ दिखाई देती हैं और उन्हें लगता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है। इन रहस्यमयी घटनाओं ने भानगढ़ किले को एक भूतिया जगह बना दिया है, जहाँ आज भी लोग डर के मारे जाते हैं। भानगढ़ किले का भ्रमण भानगढ़ किला सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यह किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है, जो जयपुर और दिल्ली के बीच आता है। दिन के समय पर्यटक किले की खूबसूरती और वास्तुकला का लुत्फ़ उठा सकते हैं, लेकिन रात में यहाँ जाने की हिम्मत बहुत कम लोग ही कर पाते हैं। कहा जाता है कि भानगढ़ किले में रात के समय भूत-प्रेतों का वास होता है। रात में यहाँ अजीबोगरीब आवाज़ें भी सुनाई देती हैं, जो इस किले के रहस्यमयी माहौल को और बढ़ा देती हैं। इस किले के बारे में यह भी कहा जाता है कि जो भी रात में किले में प्रवेश करता है, वह सुबह वापस नहीं आ पाता। यही वजह है कि यहाँ रात में जाना मना है।इतना भूतहा किला होने के बाद भी यहां करन-अर्जुन, ट्रिप टू भानगढ़, फियर-फाइल्स और झांसी की रानी जैसे फिल्मों और शोज की शूटिंग हो चुकी है। भानगढ़ किले को भूतिया क्यों माना जाता है? भानगढ़ किले को भूतिया इसलिए माना जाता है क्योंकि यहाँ की स्थानीय मान्यता है कि एक तांत्रिक ने किले को श्राप दिया था, जिसके कारण किला नष्ट हो गया और यहाँ के निवासी भी खत्म हो गए। लोग अजीबोगरीब आवाजें सुनने और रात में परछाई देखने की बात करते हैं, जिसकी वजह से यह किला भूतहा जगह बन गया है। भानगढ़ किले का श्राप क्या था? भानगढ़ किले को एक तांत्रिक ने श्राप दिया था, जिसने कहा था कि किला कभी समृद्ध नहीं होगा और इसके निवासी नष्ट हो जाएंगे। इस श्राप की वजह से किला तेजी से नष्ट हो गया और आज भी इसे भूतहा जगह माना जाता है।

आम आदमी भी ठहरेगा वीआईपी बंगले में? सरकार बना रही खास प्लान

पटना. सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने एवं सरकारी परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक नई पहल करने जा रही है। इसके तहत जल संसाधन विभाग के अधीन राज्यभर में स्थित 217 निरीक्षण भवनों (इंस्पेक्शन बंगला) का कायाकल्प कर उन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित करने की तैयारी है। सरकार इन भवनों के संचालन एवं रखरखाव पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल देगी। इसके साथ बड़े साहबों के लिए बने निरीक्षण बंगलों में निर्धारित किराया भुगतान कर अब आम आदमी ठहरेगा। अभी तक ये निरीक्षण भवन मुख्य रूप से मंत्री, नेता, विभागीय अधिकारियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अकारियों के ठहरने के लिए उपयोग में आते रहे हैं। अधिकांश भवन नदियों, तटबंधों, बांधों एवं प्रमुख जल संरचनाओं के समीप स्थित हैं। वर्ष के अधिकांश समय इनका उपयोग सीमित रहने के कारण इनके रखरखाव पर सरकार को लगातार भारी भरकम खर्च वहन करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन भवनों का व्यावसायिक उपयोग भी संभव हो सकेगा। योजना के तहत निजी एजेंसियों को भवनों के संचालन, रखरखाव एवं सुविधाओं के उन्नयन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके बदले आम नागरिक और पर्यटक निर्धारित किराया देकर यहां ठहर सकेंगे। इससे एक ओर जहां विभाग को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वहीं, दूसरी ओर भवनों के रखरखाव पर सरकारी खर्च में भी कमी आएगी। पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार सृजन होगा जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि राज्य के कई निरीक्षण भवन प्राकृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित हैं। इसमें भवन बांधों बराजों एवं जलाशयों के निकट हैं। यदि इनमें आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो ये देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कमरे की खिड़की से हरियाली एवं नदियों व जलाशयों का मनोरम दृश्य भी देखने के साथ जल विहार करने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य केवल भवनों को राजस्व का स्रोत बनाना नहीं है, बल्कि वर्षों से कम उपयोग में आ रही सरकारी संपत्तियों को जनोपयोगी बनाना भी है। पीपीपी मॉडल के जरिए निरीक्षण भवनों को आधुनिक गेस्ट हाउस और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना पर विभागीय स्तर पर मंथन जारी है। योजना को अंतिम रूप मिलने के बाद राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के उपयोग का यह एक नया और अभिनव मॉडल साबित हो सकता है। प्रति वर्ष रख-रखाव पर विभाग करता है 15 करोड़ खर्च जल संसाधन विभाग के अनुसार इन भवनों के रख-रखाव पर ही प्रति वर्ष विभाग 15 करोड़ रुपये खर्च करता हैं। इसमें 58 भवन अब रहने लायक नहीं हैं। ऐसे में इसे तत्काल तोड़कर नए सिरे से बनाया जाएगा। पहले चरण में सभी भवनों को 30 वर्ष के लिए लीज पर पीपीपी के आधार पर देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे तरुण चुघ और केवल सिंह ढिल्लों, की अरदास और सेवा

अमृतसर. BJP के नए बने राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आज अमृतसर दौरे के दौरान श्री दरबार साहिब में मत्था टेका। इस दौरान तरुण चुघ और केवल सिंह ढिल्लों ने गुरु घर में मत्था टेका और सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की। दोनों नेताओं के साथ BJP के सीनियर नेता और दूसरे BJP कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। आपको बता दें कि राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों का अपने-अपने पद संभालने के बाद श्री दरबार साहिब का यह पहला दौरा है। इसलिए आज का दिन दोनों नेताओं के लिए अहम है। जानकारी के मुताबिक, श्री दरबार साहिब में दर्शन करने के बाद दोनों नेता जलियांवाला बाग, दुर्ग्याना मंदिर और श्री राम तीर्थ में भी मत्था टेकेंगे। इस मौके पर केवल सिंह ढिल्लों BJP कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग भी करेंगे। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। वहीं इस दौरे को लेकर भओाजपा नेताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

गृह निर्माण मंडल का सख्त एक्शन, निजी बिल्डर से छुड़ाई करोड़ों की सरकारी जमीन

रायपुर. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपनी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। मंडल की टीम ने निजी बिल्डर द्वारा अनधिकृत निर्मित सड़क को हटाकर भूमि को अपने कब्जे में लिया। अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि भविष्य की आवासीय परियोजनाओं के लिए सुरक्षित रखी गई है। जानकारी के अनुसार, दीनदयाल आवास योजना के तहत कलेक्टर रायपुर के 3 फरवरी 2006 के आदेश के माध्यम से ग्राम सेजबहार और ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (करीब 53.19 एकड़) भूमि गृह निर्माण मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए आबंटित की गई थी। इसमें ग्राम सेजबहार के खसरा नंबर 162/1 के हिस्से तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा नंबर 341/1 और 341/3 की भूमि शामिल है। इस परियोजना के लिए 17 मई 2006 को विकास अनुज्ञा भी स्वीकृत की गई थी। 1435 एलआईजी आवासों का था प्रस्ताव स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण किया जाना था। मंडल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण और अभिलेखों की जांच में पाया गया कि इनमें से 1327 आवास निर्धारित ले-आउट के अनुरूप बनाए गए थे, जबकि 39 भवन स्वीकृत अभिन्यास से अलग निर्मित किए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण हुआ। भूमि विवाद के कारण अधूरी रह गई परियोजना मंडल के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान भूमि विवाद उत्पन्न होने के कारण भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के तहत 7 अगस्त 2006 को किए गए अनुबंध क्रमांक-41 में 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत 193 एलआईजी भवन बनाए गए। हालांकि विवादित क्षेत्र में प्रस्तावित 79 आवास न तो निर्मित हो सके और न ही उनका विक्रय किया गया। सीमांकन में उजागर हुआ अतिक्रमण हाल ही में गृह निर्माण मंडल ने अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया। इस प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि एक निजी बिल्डर ने मंडल की भूमि के एक हिस्से पर बिना अनुमति कब्जा कर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया था। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया। टीम ने हटाई अवैध सड़क कार्यपालन अभियंता नितेश कश्यप के नेतृत्व में मंडल की टीम मौके पर पहुंची और अवैध रूप से बनाई गई सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। कार्रवाई में संपदा अधिकारी अमृत लाल बरमन, सहायक अभियंता हेमंत निषाद, उप अभियंता निकिता मिश्रा, अनुपम राठौर, पेमेन्द्र ध्रुव, अमय विक्रम और कमलेश दास सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। नई आवासीय परियोजना की तैयारी मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि उनकी महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडल अपनी भूमि और परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के खिलाफ आगे भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

दिल्ली से मिनटों में पहुंचेंगे सोनीपत-पलवल, मेट्रो और नमो भारत विस्तार योजना को मिली रफ्तार

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट का सबसे प्रमुख जरिया मेट्रो को माना जाता है. दिल्ली मेट्रो देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है. दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी मेट्रो रोजाना लाखों लोगों के सफर का साथी बनती है. दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में मेट्रो बिना किसी ट्रैफिक के झंझट के लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचाती है. सरकार लगातार मेट्रो के विस्तार पर काम कर रही है. एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में भविष्य में दिल्ली और हरियाणा को कनेक्ट करने वाले 6 प्रमुख कॉरिडोर को विकसित करने पर चर्चा हुई है. सरकार इन रूट्स पर नमो भारत के साथ-साथ मेट्रो को भी चलाने की तैयारी कर रही है।  इन रूट्स पर मेट्रो चलाने की तैयारी 1. सोनीपत-पानीपत  यह नमो भारत के दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर का हिस्सा है. यहां सरकार मेट्रो भी चलाने की तैयारी कर रही है.  सोनीपत को दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन (रिठाला-नरेला-सोनीपत कॉरिडोर) के जरिए भी मेट्रो से जोड़ने की योजना है।  2. गाजियाबाद-मेरठ यह देश का पहला ऐसा रूट है जहां मेट्रो और नमो भारत दोनों ट्रेनें एक साथ चलेंगी. मेरठ शहर के अंदरूनी हिस्सों के लिए स्थानीय मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है, जो RRTS के ही ट्रैक और स्टेशनों का इस्तेमाल करेगी।  3. फरीदाबाद-पलवल दिल्ली मेट्रो की वॉयलेट लाइन जो अभी राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़) तक आती है, उसे आगे पलवल तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।  4. फरीदाबाद-गुरुग्राम इस रूट पर मुख्य रूप से हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HMRTC) द्वारा एक स्वतंत्र मेट्रो लाइन बनाने का प्रस्ताव है. यह लगभग 52 से 60 किमी लंबा रूट पूरी तरह से मेट्रो कॉरिडोर होगा जो फरीदाबाद और गुरुग्राम के मौजूदा मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा।  5. बहादुरगढ़-रोहतक फिलहाल दिल्ली मेट्रो की ग्रीन लाइन (ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेशन, बहादुरगढ़) को आगे आसौदा तक बढ़ाने के लिए फिजिकल सर्वे और DPR का काम चल रहा है. इसे भविष्य में रोहतक तक और रैपिड रेल से इंटरचेंज के जरिए कनेक्ट किया जाएगा।  6. गुरुग्राम-मानेसर-रेवाड़ी गुरुग्राम (सेक्टर-56) से लेकर मानेसर तक गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा एक नई मेट्रो लाइन का निर्माण शुरू हो चुका है. इसके साथ ही, इस रूट पर दिल्ली-अलवर रैपिड रेल (RRTS) का काम भी चल रहा है।  हाल ही में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई. इस बैठक में फैसला लिया गया कि एनसीआर की मौजूदा क्षेत्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. एनसीआर में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से चार नए ‘नमो' ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे. इनमें हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में एक-एक शहर स्थापित किया जाएगा। 

Delhi Government issues ‘Flood Control Order 2026’; major preparations ahead of the monsoon

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी मानसून के मद्देनजर बुधवार को ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश 2026’ जारी करते हुए राजधानी के उन क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्त करने का निर्देश दिया जहां बरसात में जलभराव हो जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जारी किया बयान सीएम रेखा गुप्ता ने यह भी निर्देश दिया कि इन नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित अधिकारी सीधे जवाबदेह होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान के मुताबिक सीएम गुप्ता ने ये निर्देश सचिवालय में शीर्ष समिति की उच्च स्तरीय बैठक में दिए जिसमें आगामी मॉनसून और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा की गई तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। सीएम गुप्ता ने सभी विभागों को दिया निर्देश उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र की लगातार निगरानी की जाए। बयान के मुताबिक, विभिन्न एजेंसियों के नालों के जंक्शन बिंदुओं पर जल निकासी में कोई बाधा न आए, इसके लिए सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण समितियां गठित की हैं। सीएम ने जारी किया ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश-2026’ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश-2026’ जारी किया। सीएम गुप्ता ने बताया कि यह आदेश सभी विभागों के लिए दिशानिर्देश पुस्तिका के रूप में काम करेगा और इसमें जल निकासी प्रणाली, नदी के तटबंध, पंपिंग स्टेशन, नियामक तंत्र, परिचालन योजना, सभी मशीनरी की जानकारी और नियंत्रण कक्षों के संपर्क नंबर शामिल हैं। मानसून से पहले सीएम ने आदेश उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभाग अपनी टीमों को अलर्ट पर रखें और मानसून के दौरान हर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। उन्होंने आदेश दिए “राहत और बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों की जांच हो। बाढ़ की स्थिति में संबंधित विभाग लोगों को सकुशल सुरक्षित स्थानों पर भेजने के पुख्ता इंतजाम करें। बैठक में अधिकारियों ने दी जानकारी साथ ही पीडब्ल्यूडी व अन्य विभाग सुनिश्चित करें कि बरसात के दौरान दिल्ली में जलजमाव न हो इसके लिए सभी स्थायी पंप हाउस की जांच हो और जलजमाव वाले इलाकों में मोबाइल पंप भी तैनात किए जाएं। सीएमओ के मुताबिक, बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि 15 जून से केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24×7 आधार पर सक्रिय कर दिया गया है। दिल्ली के मंत्रियों की अध्यक्षता में गठन की कमेटियां साथ ही, दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, आशीष सूद और मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में उच्च स्तरीय सेक्टर कमेटियों का गठन किया गया है तथा प्रत्येक सेक्टर कमेटी में तीन चार जिलाधिकारी (डीएम) शामिल होंगे। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन और समन्वय के लिए पूरी तरह उत्तरदायी होंगे। पिछले साल की तुलना में दिल्ली में बढ़ी पंपों की संख्या बयान के अनुसार, बैठक के दौरान सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बाढ़ जैसे हालात से निपटने व नियंत्रण के लिए व्यापक संरचनात्मक, तकनीकी व अन्य सुधारों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। सीएमओ ने बताया कि विभाग ने 22 प्रमुख नालों सहित कुल 77 नालों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली है और शेष कार्य युद्धस्तर पर जारी है। साथ ही पिछले वर्ष की तुलना में विभाग ने पंपों की संख्या बढ़ाकर 243 से अधिक कर दी है। आपात स्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने की व्यवस्थाएं बयान के मुताबिक, आपात स्थितियों से निपटने के लिए नावों की संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई है और 31 मोटरबोट इंजन व 12 बोट कैरिज ट्रॉलियां भी उपलब्ध कराई हैं। बैठक में बताया गया कि नगर निगम के सभी 12 जोनों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं और स्थायी एवं पोर्टेबल पंपों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। संभावित जलभराव वाली जगहों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।  

सचिवालय में 149 नए पदों को मंजूरी, युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

जयपुर  राजस्थान की भजन लाल शर्मा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और युवाओं के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। बजट 2026-27 की घोषणा के तहत, मुख्यमंत्री ने राज्य कर्मचारियों को पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए जरूरी अनुभव सीमा में 2 वर्ष की विशेष छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के बयान के मुताबिक, इस फैसले के तहत प्रमोशन के लिए जरूरी अनुभव या सेवा अवधि में दो साल की छूट देने के लिए अलग-अलग सेवा नियमों में बदलाव किए जाएंगे। हालांकि, जिन कर्मचारियों ने 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) की प्रक्रिया के दौरान पहले ही ऐसी छूट का लाभ उठा लिया है, वे इस फायदे के लिए पात्र नहीं होंगे। सचिवालय में 149 नए पदों को मंजूरी इसके साथ ही मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए सरकारी सचिवालय में 149 नए पद बनाने को भी मंजूरी दी है। इनमें सरकार के असिस्टेंट सेक्रेटरी के 15 पद, असिस्टेंट सेक्शन ऑफ़िसर के 67 पद और क्लर्क ग्रेड-I के 67 पद शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इस कदम से न केवल मौजूदा कर्मचारियों के प्रमोशन के मौके बेहतर होंगे, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी पैदा होंगे। सेवा से जुड़े मामलों में 29 मामलों में छूट कर्मचारियों के हित में लिए गए एक और फ़ैसले में, मुख्यमंत्री ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति और सेवा से जुड़े मामलों में 29 मामलों में छूट दी। इनमें से 16 मामलों में सरकारी कर्मचारियों की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन जमा करने में हुई देरी के कारण छूट दी गई। नौ मामलों में, आवेदन में देरी पर विचार करने के बाद उम्र सीमा में छूट को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने तबादले से जुड़े चार मामलों में भी छूट को मंजूरी दी, ताकि कर्मचारी अपनी आश्रित पत्नियों की सुविधा के लिए अपने घरों के पास पोस्टिंग पा सकें। इस बीच, राज्य सरकार ने चार हाउसकीपर्स – सत्यदेव सिंह कृष्णावत, गिरिराज प्रसाद मीणा, योगेंद्र सिंह सिसोदिया और तरुण जोशी को हटाने का आदेश दिया है।

लेनिन क्रूज पर प्रपोजल से लेकर सात फेरे तक की लग्जरी सुविधाएं

 पटना  डेस्टिनेशन वेडिंग का सपना देखने वाले लोगों के लिए अब पटना में भी खास विकल्प उपलब्ध हो गया है। राजधानी के गांधी घाट स्थित लेनिन क्रूज पर गंगा की लहरों के बीच शाही अंदाज में शादी और उससे जुड़ी सभी रस्मों का आयोजन किया जा रहा है। आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक सजावट से लैस यह कॉन्सेप्ट लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अब शादी के लिए मुंबई, गोवा या दूसरे पर्यटन स्थलों का रुख करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रपोजल से लेकर सात फेरे तक की सुविधा लेनिन क्रूज पर प्रपोजल, रिंग सेरेमनी, हल्दी, मेहंदी, संगीत और विवाह मंडप तक की व्यवस्था उपलब्ध है। यहां दूल्हा-दुल्हन की ग्रैंड एंट्री से लेकर मेहमानों के स्वागत तक हर आयोजन को खास अंदाज में तैयार किया जाता है। गंगा के बीच तैरते क्रूज पर शादी का अनुभव लोगों को एक अलग ही यादगार एहसास देता है। दो मंजिला लग्जरी क्रूज में आधुनिक सुविधाएं लेनिन क्रूज के प्रबंधन के अनुसार यहां पूरी तरह वातानुकूलित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, ओपन डेक और अटैच बाथरूम वाले कमरे उपलब्ध हैं। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से संचालित इस क्रूज को विशेष रूप से लग्जरी आयोजनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यहां मेहमानों को आराम और मनोरंजन की सभी आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं। प्राइवेट प्रपोजल पैकेज की भी सुविधा शादी से पहले यादगार प्रपोजल के लिए ‘प्राइवेट प्रपोज एट लेनिन क्रूज’ पैकेज तैयार किया गया है। इस पैकेज के तहत पूरे क्रूज को निजी तौर पर बुक किया जा सकता है। इसमें अनलिमिटेड फूड, फ्लावर बुके, चॉकलेट्स, केक, म्यूजिक, टेबल डेकोरेशन और कोल्ड फायर जैसी सुविधाएं शामिल हैं। करीब डेढ़ घंटे तक गंगा में क्रूज भ्रमण कराया जाता है। इस पैकेज की शुरुआती कीमत 25,999 रुपये रखी गई है। हल्दी और संगीत समारोह को भी बनाया जा रहा खास क्रूज पर हल्दी और संगीत समारोह के लिए भी अलग-अलग थीम आधारित पैकेज उपलब्ध हैं। परिवार और दोस्तों के साथ गंगा की लहरों के बीच इन रस्मों का आयोजन किया जा सकता है। सजावट, खानपान, म्यूजिक और अन्य व्यवस्थाएं मेहमानों की संख्या और बजट के अनुसार कस्टमाइज की जाती हैं। रॉयल वेडिंग के लिए मिलेंगी विशेष सुविधाएं रॉयल वेडिंग पैकेज के तहत गंगा के खूबसूरत नजारों और सनसेट व्यू के बीच शादी की सभी रस्में संपन्न कराई जाती हैं। इसमें लग्जरी डेकोरेशन, लाइव म्यूजिक, प्रोफेशनल फोटोग्राफी, स्वादिष्ट व्यंजन और विशेष मनोरंजन कार्यक्रम शामिल किए जाते हैं। आयोजकों का दावा है कि यह अनुभव शादी को जीवनभर यादगार बना देता है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से होगी बुकिंग लेनिन क्रूज पर किसी भी कार्यक्रम की बुकिंग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जा सकती है। इच्छुक लोग मोबाइल नंबर 9330014000 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और गांधी घाट स्थित जेटी पर जाकर भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। यहां पैकेज, सुविधाओं और खर्च से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

बेटे की मौत के बाद भटकता रहा परिवार, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिलाया हक

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना के तहत मुआवजा पाने से वंचित एक महिला को राहत प्रदान की है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास ने आश्वासन दिया कि यदि मृत्यु प्रमाणपत्र में दर्ज त्रुटि को ठीक कर लिया गया है तो मुआवजा आवेदन के लिए पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। जस्टिस जगमोहन बंसल ने भावना द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका के अनुसार भावना के 26 वर्षीय बेटे की 9 मई 2024 को मृत्यु हो गई थी। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम थी, जिससे परिवार दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने का पात्र था। बेटे की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता ने 23 मई 2024 को आनलाइन आवेदन कर मुआवजे की मांग की थी। हालांकि, हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास ने 16 दिसंबर 2024 को दावा खारिज कर दिया। दावा अस्वीकार करने का कारण यह बताया गया कि मृत्यु प्रमाणपत्र और परिवार पहचान पत्र में मृतक के पिता के नाम को लेकर विसंगति थी। इस तकनीकी त्रुटि के कारण आवेदन मंजूर नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने बाद में संबंधित विभाग से त्रुटि दूर करवाई और 4 मार्च 2025 को संशोधित मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया। लेकिन समस्या यह रही कि ऑनलाइन पोर्टल पर दोबारा आवेदन करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था। इसके बाद उन्होंने कई प्रतिनिधित्व देकर मामले में राहत की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि याचिकाकर्ता ने वास्तव में मृत्यु प्रमाणपत्र में दर्ज विवरण को परिवार पहचान पत्र के अनुरूप संशोधित करवा लिया है तो हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास का मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोर्टल दोबारा खुलवाने पर विचार करेगा, ताकि वह अपना दावा पुन प्रस्तुत कर सके। याचिकाकर्ता की ओर से भी इस व्यवस्था पर सहमति जताई गई। दोनों पक्षों की सहमति को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास, पंचकूला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करे। इसके बाद संबंधित प्राधिकारी उसके दावे पर आगे की कार्रवाई करेगा। यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके वैध दावे केवल दस्तावेजी त्रुटियों या तकनीकी कारणों से लंबित या अस्वीकृत हो जाते हैं।