samacharsecretary.com

MP हाईकोर्ट की नई गाइडलाइन, पार्किंग समस्या के समाधान के लिए अधिवक्ताओं को कार पूलिंग अपनाने की सलाह

 जबलपुर कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने गुरुवार को हाई कोर्ट के सामने प्रस्तावित 117 करोड़ रुपये के अधिवक्ता चैंबर और मल्टीलेवल पार्किंग प्रोजेक्ट को लेकर दायर याचिका का महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सहित पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने केवल अधिवक्ता चैंबर निर्माण प्रक्रिया लंबित होने पर असंतोष जताया। इसके साथ ही हाई कर्ट परिसर के आसपास बढ़ते यातायात और पार्किंग संकट पर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी कर दी। दिलचस्प यह है कि अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए गए कार पूलिंग और यातायात अनुशासन के संदेशों की प्रतिध्वनि भी सुनाई दी। युगलपीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष धन्य कुमार जैन की याचिका का निराकरण करते हुए स्पष्ट किया कि अब जबकि टेंडर प्रक्रिया जारी हो चुकी है, याचिका को लंबित रखने का औचित्य नहीं रह जाता। हालांकि कोर्ट ने यह रास्ता खुला रखा कि यदि भविष्य में राज्य सरकार परियोजना को लेकर अनावश्यक विलंब करती है तो याचिकाकर्ता पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष जताया मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि हाई कोर्ट के गेट नंबर-चार के सामने आधुनिक अधिवक्ता चैंबर और बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसका टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष व्यक्त किया। आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष पार्किंग व्यवस्था को लेकर रहा। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे हाई कोर्ट परिसर के निकट अनावश्यक वाहन खड़े करने के बजाय पिक एंड ड्राप व्यवस्था को बढ़ावा दें। अधिवक्ताओं से भी वाहन साझा (कार पूलिंग) करने की व्यवस्था अपनाने की अपेक्षा जताई गई। वहीं यातायात पुलिस को क्षेत्र की सतत निगरानी कर पार्किंग अनुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं दरअसल, चार मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एससी शर्मा, न्यायमूर्ति सूर्यकांत व तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की उपस्थिति में परियोजना का भूमिपूजन हुआ था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से बार एसोसिएशन ने चिंता जताई थी। न्यायालय के आदेश ने यह संदेश भी दिया है कि केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं है। यातायात अनुशासन, कार पूलिंग और पिक एंड ड्राप संस्कृति अपनाए बिना न्यायालय परिसर की भीड़भाड़ कम नहीं होगी। यही कारण है कि एक साधारण दिखने वाली याचिका का पटाक्षेप, न्यायालय परिसर की भावी यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण नजीर बनकर उभरा है।

भाजपा कार्यकर्ता बनेंगे जनता की आवाज, समस्याओं का होगा निराकरण : जग्गा

राजपुरा भारतीय जनता पार्टी ने इलाका प्रभारी जगदीश जग्गा की अगुवाई में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए गांव-गांव जग्गा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। अभियान के तहत भाजपा कार्यकर्ता प्रतिदिन गांवों में पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद करेंगे तथा उनकी समस्याओं को सुन कर संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए प्रयास करेंगे।  इस संबंध में जानकारी देते हुए भाजपा इलाका प्रभारी जगदीश जग्गा बताया कि वे पिछले बीस वर्षों से निस्वार्थ भाव से क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए नगर काउंसिल चुनावों में जनता की ओर से उन्हें अच्छा समर्थन मिला, जिसके बाद अब बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने भी उनसे संपर्क करना शुरू किया।  ग्रामीणों ने उन्हें गांवों में बढ़ रही समस्याओं, कानून व्यवस्था की स्थिति, नशे के बढ़ते प्रकोप तथा अन्य जनहित के मुद्दों की ओर ध्यान देने की मांग की। जग्गा ने बताया कि लोगों की मांग और समस्याओं को देखते हुए भाजपा ने गांव-गांव जग्गा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रतिदिन शाम 5 बजे से लेकर रात 8-9 बजे तक क्षेत्र के एक या दो गांवों का दौरा किया जाएगा। इस दौरान गांवों के लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।  उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इस अवसर पर रूपिंदर रूपी, प्रदीप नंदा, जसवीर जस्सी सहित अन्य मौजूद थे।

गर्मी से मिलेगी राहत! पंजाब में अगले 4 दिनों तक बारिश-आंधी की चेतावनी

चंडीगढ़. पंजाब में भीषण गर्मी के बीच मौसम को लेकर नई अपडेट सामने आई है। गुरुवार को भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) चंडीगढ़ के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले 4 दिनों तक बारिश, तेज़ हवाओं और गरज-चमक की संभावना है, जिस कारण विभाग ने कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 18 जून को पूरे पंजाब में किसी भी तरह की मौसम संबंधी चेतावनी जारी नहीं की गई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। हालांकि, 19 जून से जिला फिरोजपुर, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, मानसा, संगरूर, बरनाला, लुधियाना, मोगा, पटियाला और एस.ए.एस. नगर (मोहाली) में बारिश के साथ तेज़ हवाएं चलने की संभावना है। कहा जा रहा है कि अगले 48 घंटों के दौरान इन इलाकों में मौसम अचानक खराब हो सकता है।   20 और 21 जून को भी जारी रहेगा खराब मौसम 20 और 21 जून के दौरान भी पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर समेत उत्तर और सीमावर्ती जिलों में मौसम खराब रहने के आसार हैं। इन क्षेत्रों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं विभाग  ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। तेज़ हवाओं और आंधी के समय पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों के पास जाने से बचने तथा आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।

लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए स्वदेशी तकनीक पर MoU, आयात पर निर्भरता घटेगी

 जमशेदपुर  आज के डिजिटल और इलेक्ट्रिक युग में मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी समस्या भी पैदा हो रही है वो है कबाड़ हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों के कचरे (ई-वेस्ट) का अंबार. इस बड़ी चुनौती को एक शानदार अवसर में बदलने के लिए झारखंड के जमशेदपुर स्थित सरकारी लैब सीएसआइआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) ने एक बेहद ऐतिहासिक कदम उठाया है. एनएमएल ने बेंगलुरु की प्रसिद्ध कंपनी मेसर्स सिरक्योर प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक विशेष समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के तहत अब कबाड़ हो चुकी बैटरियों को फेंकने के बजाय उनसे ‘काला सोना’ यानी बेहद कीमती धातुएं निकाली जाएंगी. यह स्वदेशी तकनीक आने वाले समय में बैटरी कचरे को एक मूल्यवान संसाधन में बदलने के लिए पूरी दुनिया में ‘गेमचेंजर’ साबित होने वाली है. पूरी तरह स्वदेशी तकनीक इस आधुनिक और उन्नत धातुकर्म प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से भारत में विकसित स्वदेशी तकनीक है. इस तकनीक की मदद से बेकार और कबाड़ हो चुकी बैटरियों को बहुत ही सुरक्षित, साफ-सुथरे और वैज्ञानिक तरीके से रिसायकल किया जाएगा. इस प्रक्रिया के जरिए कबाड़ बैटरियों के अंदर से लिथियम, कोबाल्ट, मैंगनीज, निकेल, तांबा, एल्युमिनियम और ग्रेफाइट जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और महंगे पदार्थों को वापस निकाल लिया जाएगा. अब तक इन कबाड़ बैटरियों को नष्ट करने का कोई इतना सुरक्षित और सटीक उपाय देश में नहीं था, लेकिन अब इस तकनीक से कचरे से भी करोड़ों का कीमती सामान निकाला जा सकेगा. विदेशी आयात पर लगेगी रोक वर्तमान समय की बात करें तो भारत अपनी जरूरत के लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए बहुत बड़े पैमाने पर विदेशी आयात (दूसरे देशों से खरीदने) पर निर्भर है. चूंकि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल और पावर बैंक का चलन दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है, इसलिए कच्चे माल की मांग भी बढ़ती जा रही है. एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार झा की सीधी देखरेख में विकसित की गई यह तकनीक इन खराब बैटरियों को कच्चे माल के एक बेहतरीन विकल्प (सेकेंडरी सोर्स) के रूप में खड़ा कर देगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत को अब इन कीमती धातुओं के लिए प्राकृतिक खनन पर और दूसरे देशों से आयात करने पर अपनी निर्भरता को बहुत हद तक कम करने में मदद मिलेगी, जिससे देश का पैसा बचेगा. पर्यावरण को सुरक्षा और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा समझौते के दौरान सिरक्योर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्रीकुमार वाचस्पति भी मौजूद थे. उन्होंने इस तकनीक की तारीफ करते हुए कहा कि आज के समय में उद्योग जगत को इस तरह की तकनीक की बहुत ज्यादा जरूरत थी. पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस करार से न केवल खतरनाक बैटरी कचरे का सुरक्षित और सही प्रबंधन हो सकेगा, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना देश में ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (कचरे से कंचन बनाने की व्यवस्था) को रफ्तार मिलेगी. इससे प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी एक मजबूत आधार मिलेगा. इस खास एमओयू (MoU) के मौके पर एनएमएल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार और सीओए जय शंकर शरण सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

रात के अंधेरे में चल रहा था रेत का कारोबार, विधायक ने मौके पर पहुंचकर खोली पोल

बीजापुर. मिनगाछल नदी में चल रहे रेत के अवैध कारोबार की जानकारी लगते ही बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी मौके पर पहुंचे. रेत उत्खनन में लगी मशीनों को बंद कराकर विभागीय अधिकारी व नैमेड थाना प्रभारी को मौके पर बुलाकर जब्ती करवाई, साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया. विधायक विक्रम मंडावी की कार्रवाई के बाद अब लोग सवाल कर रहे हैं कि कैसे प्रशासन की नाक के नीचे रात के अंधेरे में देर रात तक रेत का अवैध कारोबार चल रहा था? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों के संलिप्तता के बिना यह कार्य संभव है? क्या सरकार के किसी नेता के संरक्षण में यह बड़ा खेल चल रहा है? क्या मामले की प्रशासन जांच कर संलिप्त अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई करेगा? या यह पहले की ही तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा. कार्रवाई के दौरान नदी क्षेत्र से टिप्पर, ट्रैक्टर, जेसीबी और अन्य भारी मशीनें जब्त की गईं। जबकि कुछ वाहन चालक और खनन से जुड़े लोग मौके से भागने में सफल रहे। विधायक ने अधिकारियों को अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अवैध खनन पर सख्त रुख उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध रेत खनन को लेकर प्रशासन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जब्त वाहनों और मशीनों पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कुपोषण के खिलाफ बड़ा अभियान, मुनगा को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी, मंत्री राजवाड़े का संदेश

‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’ बनेगा जनआंदोलन महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने जनप्रतिनिधियों से किया व्यापक पौधरोपण का आह्वान रायपुर प्रदेश में कुपोषण की समस्या के समाधान और जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ के रोपण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों से वर्षा ऋतु के दौरान बड़े पैमाने पर मुनगा (सहजन) का पौधरोपण कर ‘‘घर-घर मुनगा, हर घर सुपोषण’’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस संबंध में जारी अपने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को सुपोषित बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं हितग्राहियों के घरों में ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ लगाने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने बताया कि मुनगा एक अत्यंत पौष्टिक एवं बहुउपयोगी पौधा है, जिसके पत्ते, फलियां और अन्य भाग पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘सी’ सहित अनेक आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के कारण इसे ‘‘मदर ट्री’’ के नाम से भी जाना जाता है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुनगा का नियमित सेवन बच्चों, महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में सहायक है। यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ एनीमिया जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी मददगार सिद्ध होता है। श्रीमती राजवाड़े ने सभी जनप्रतिनिधियों से वर्षा ऋतु में जल स्रोतों के आसपास, ग्राम पंचायत परिसरों, सार्वजनिक स्थलों तथा हितग्राहियों के घरों में मुनगा पौधों का रोपण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।  उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से संचालित यह अभियान प्रदेश में सुपोषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा तथा लोगों में पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर ‘‘सुपोषित छत्तीसगढ़’’ के निर्माण में योगदान देने की अपील की है।

राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश: विकास और संस्कृति के संतुलन से ही बनेगा सशक्त भारत

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक सेवा और अध्यात्म के संगम से ही समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बैतूल में "आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज के सशक्तिकरण"कार्यक्रम को किया संबोधित बैतूल राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगी। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।    राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पायी जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मू ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्य योजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।   राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवन शैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन बिताना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा—को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है, यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है। आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु द्वारा कलश एवं ध्वज को ब्रह्मकुमारी बहनों को प्रदान कर अध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन का शुभारंभ किया। महासम्मेलन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु और राज्यपाल मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों का राजयोगिनी मंजू दीदी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।  राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने महासम्मेलन परिसर में बैतूल जिले की सांस्कृतिक झलक और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है तथा इसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां भी बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती भारत की मूल परंपरा रही है और आज देश पुनः उसी दिशा में लौट रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए … Read more

सटीक जांच रिपोर्ट ही बेहतर इलाज की बुनियाद: विशेषज्ञों ने गुणवत्ता प्रक्रिया पर दिया प्रशिक्षण

पटना पटना आईजीआईएमएस के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों को प्रयोगशाला की गुणवत्ता और मानक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई. कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) बिंदे कुमार, प्रो. (डॉ.) प्रीत पाल सिंह और प्रो. (डॉ.) ललित मोहन ने किया. सटीक जांच रिपोर्ट को बताया बेहतर इलाज का आधार उद्घाटन संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में सटीक जांच रिपोर्ट ही सही निदान और प्रभावी उपचार का आधार होती है. उन्होंने कहा कि जीसीएलपी के सिद्धांतों का पालन केवल प्रयोगशालाओं की आवश्यकता नहीं, बल्कि मरीजों के हित और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है. गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. रवि शेखर ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैब प्रक्रियाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि सैंपल संग्रह, परीक्षण, रिकॉर्ड संधारण और गुणवत्ता नियंत्रण की सही व्यवस्था से जांच परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ती है. विशेषज्ञों ने साझा किए तकनीकी अनुभव कार्यशाला में प्रो. (डॉ.) शैलेश कुमार, प्रो. (डॉ.) अंजू सिंह, प्रो. (डॉ.) जीउतराम केसरी, एडिशनल प्रोफेसर डॉ. प्रीतम प्रकाश, डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. सौरभ कुमार तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्चना भारती ने जीसीएलपी के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए. विशेषज्ञों ने क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम, इंटरनल एवं एक्सटर्नल क्वालिटी कंट्रोल, बायोसेफ्टी, सैंपल मैनेजमेंट, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा इंटीग्रिटी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी. गुणवत्तापूर्ण जांच से बेहतर होंगे स्वास्थ्य परिणाम वक्ताओं ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण जांच रिपोर्ट बेहतर इलाज की बुनियाद होती है. यदि प्रयोगशाला जांच वैज्ञानिक मानकों और गुणवत्ता प्रक्रियाओं के अनुरूप हो तो चिकित्सक अधिक सटीक निदान कर सकते हैं. इससे उपचार संबंधी निर्णय बेहतर होते हैं और मरीजों की सुरक्षा व स्वास्थ्य परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार आता है.

बयान बदलने के लिए पैसों का प्रलोभन देने का आरोप, मुकेश चंद्राकर केस में नया मोड़

बीजापुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के चर्चित पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड मामले में गवाहों को प्रभावित करने और उनके बयान बदलवाने के प्रयास का मामला सामने आया है। इस संबंध में पत्रकार चेतन कापेवार एवं पवन दुर्गम ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले के प्रमुख गवाहों को धनराशि एवं अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर उनके बयान बदलवाने का प्रयास किया जा रहा है। आवेदन के अनुसार बीजापुर निवासी सुनील मर्सकोले ने पत्रकार चेतन कोपवार से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क कर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के पक्ष में बयान देने के एवज में एक लाख रुपये का प्रलोभन दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बातचीत के दौरान पत्रकार पवन दुर्गम का नाम भी लिया गया और यह बताया गया कि उनसे भी इस संबंध में चर्चा की गई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पवन दुर्गम का बयान पहले ही देवाड़ा न्यायालय में दर्ज हो चुका है, जो मुकेश चंद्राकर के पक्ष और आरोपियों के खिलाफ है। पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि गवाहों को अलग-अलग धनराशि देकर बयान बदलवाने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और निष्पक्ष जांच में बाधा उत्पन्न करने का गंभीर प्रयास है। उन्होंने कहा कि गवाहों पर दबाव, धमकी या प्रलोभन देना कानूनन अपराध है। इससे न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता प्रभावित होती है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी : एसपी शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने और प्रकरण के प्रमुख गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि वे बिना किसी भय, दबाव या प्रलोभन के न्यायालय एवं जांच एजेंसियों के समक्ष अपना पक्ष स्वतंत्र रूप से रख सकें। इस मामले में एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। जानिए पूरा मामला एक जनवरी 2025 को मुकेश चंद्राकर अपने घर से निकले थे और फिर लापता हो गए। परिवार ने उनके गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। 3 जनवरी को उनकी लाश एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक से मिली थी। पुलिस ने हत्याकांड के मास्टरमाइंड सड़क ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। इस हत्याकांड में सुरेश के साथ रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके का नाम भी शामिल है। इन चारों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था। मुकेश चंद्राकर की हत्या की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर सहित 4 लोगों को आरोपी बनाया था। साथ ही 70 लोगों को इस मामले में गवाह बनाया गया। एसआईटी की जांच में सामने आया था कि आरोपी सुरेश चंद्राकर उसके सड़क निर्माण के काम में भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबरों से काफी नाराज था। मुकेश ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की खबरें दिखाई थी। इसके बाद उसने हत्या की पूरी प्लानिंग की। उसके घटना से कुछ दिन पहले ही अपने बैंक खाते से बड़ी रकम भी निकाली थी। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था। 5 जनवरी को आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। उसका भाई और सुपरवाइजर भी गिरफ्तार हुआ था।

आस्था और टेक्नोलॉजी का संगम: अयोध्या में बनेगा दुनिया का पहला रामायण वैक्स म्यूजियम

लखनऊ राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद, अयोध्या एक और खास चीज तैयार हो गई है। ये शहर में आस्था, कला और पर्यटन का संगम है। ये होगा दुनिया का पहला रामायण-थीम वाला वैक्स म्यूजियम। म्यूजियम अब बनकर तैयार हो चुका है। सीएम योगी कल अपने अयोध्या दौरे पर इसका उद्घाटन करेंगे। यह म्यूज़ियम आने वालों को सीधे त्रेता युग या रामायण काल में ले जाने का वादा करता है। इसे आस्था के केंद्र और पर्यटकों के लिए एक बड़े आकर्षण के तौर पर देखा जा रहा है। यह पौराणिक कथाओं, टेक्नोलॉजी और कलाकारी का मेल दिखाते हुए एक अनोखा अनुभव देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 जून को अयोध्या पहुंचकर नगर निगम की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं रामायण वैक्स म्यूजियम और अयोध्या धाम के नए जोनल कार्यालय का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वैक्स म्यूजियम परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित भी करेंगे। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रामायण वैक्स म्यूजियम अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा। म्यूजियम में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान जी, ऋषि वशिष्ठ, रावण, मेघनाथ और जटायु सहित रामायण के 25 से अधिक प्रमुख पात्रों की जीवंत मोम प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। उद्घाटन के बाद इसे आम पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। टिकट दरों और समय-सारिणी की घोषणा भी लोकार्पण के बाद की जाएगी। मुख्यमंत्री इसी दौरान मोहबरा बाजार क्षेत्र में 10.19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए जोनल कार्यालय का भी उद्घाटन करेंगे। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यालय के शुरू होने से अयोध्या धाम क्षेत्र के नागरिकों को नगर निगम से संबंधित विभिन्न सेवाएं और सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार सुबह महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश पांडे ने बताया कि निरीक्षण के दौरान राम कथा पार्क के निकट स्थित हेलीपैड स्थल पर घास की सफाई तथा खुले केबलों को भूमिगत करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा अधिकारियों ने ऋषिदेव जैन मंदिर और मनीरामदास की छावनी का निरीक्षण कर सफाई और सौंदर्यीकरण कार्यों की समीक्षा की। महापौर ने दोनों स्थलों को विशेष रूप से सजाने-संवारने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने कार्यक्रम स्थलों पर पेयजल, स्वच्छता, चूना और ब्लीचिंग का छिड़काव, एंटी-लार्वा दवा के प्रयोग, फॉगिंग तथा धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी के छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अपने इस दौरे के दौरान अयोध्या की कई अन्य विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ, भारत भार्गव, मुख्य महाप्रबंधक जलकल सौरभ श्रीवास्तव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राममणि शुक्ल, अधिशासी अभियंता दीपांकर सिंह तथा सहायक अभियंता राजपति यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।