samacharsecretary.com

नेहरू के फैसलों ने कश्मीर को बनाया विवादित, आज तक भुगत रहा देश : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आधुनिक भारत के शिल्पकार, भारत रत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सीएम ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी की। सीएम योगी ने सरदार पटेल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर रियासत कहां शामिल हो, इसे लेकर असमंजस की स्थिति थी, तब जवाहर लाल नेहरू ने कहा कि मैं पहल करूंगा। जम्मू-कश्मीर पं. नेहरू के हाथों में था, लेकिन उन्होंने जम्मू-कश्मीर को इतना विवादित करने का कार्य किया कि आजादी के बाद से वह लगातार भारत को डसता रहा। नेहरू के कारण उसी कश्मीर से देश को उग्रवाद, अलगाववाद प्राप्त हुआ था। देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी है, जिन्होंने लौहपुरुष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार करते हुए धारा-370 को समाप्त कर कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए एक देश में एक प्रधान, एक विधान और एक निशान के संकल्प को आगे बढ़ाया।  सीएम योगी ने कहा कि गृहमंत्री के रूप में भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार, तमाम विवादों के समाधान के लिए तंत्र विकसित करने और भारत की प्रशासनिक सेवा को वर्तमान स्वरूप देने का कार्य भी लौहपुरुष के कारण हो पाया। सरदार पटेल का यशस्वी नेतृत्व और लंबे समय तक प्राप्त होता, लेकिन देश का दुर्भाग्य रहा कि 15 दिसंबर 1950 को उनका नश्वर शरीर जवाब दे गया। उनकी स्मृतियां, देश के प्रति उनकी सेवाएं व योगदान हम सबके लिए चिरस्मरणीय अध्याय बन गया। हर भारतवासी बड़ी श्रद्धा, सम्मान के साथ भारत मां के महान सपूत लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने को तत्पर रहता है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का यशस्वी नेतृत्व और लंबे समय तक प्राप्त होता, लेकिन देश का दुर्भाग्य रहा कि 15 दिसंबर 1950 को उनका नश्वर शरीर जवाब दे गया। उनकी स्मृतियां, देश के प्रति सेवाएं व योगदान चिरस्मरणीय अध्याय बन गए। देश वर्तमान भारत के शिल्पी के रूप में सदैव लौहपुरुष का स्मरण करेगा। सीएम योगी ने कहा कि लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के करमसद में सामान्य किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने परिश्रम से उच्च शिक्षा अर्जित की। इसके पीछे उनका उद्देश्य आजीविका प्राप्त कर विदेशी हुकुमूत की नौकरी करना नहीं, बल्कि देश-दुनिया को समझकर अपनी प्रतिभा व ऊर्जा का लाभ भारत मां के चरणों में समर्पित करना था। सरदार पटेल ने आजादी के आंदोलन को नेतृत्व दिया। कई बार जेल की यातनाएं सहीं, लेकिन आजादी के आंदोलन से विचलित नहीं हुए। देश जब आजाद हो रहा था, उस समय उन्होंने पुरजोर तरीके से भारत के विभाजन का विरोध किया। उन्होंने 567 रियासतों को भारत गणराज्य का हिस्सा बनाया। देश वर्तमान भारत के शिल्पी के रूप में सदैव लौहपुरुष का स्मरण करेगा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जूनागढ़ का नवाब व हैदराबाद का निजाम भारत गणराज्य में शामिल नहीं होना चाहते थे। जब देश आजाद हो रहा था, तब अंग्रेजों ने टू-नेशन थ्योरी को लागू किया और देसी रियासतों को स्वतंत्रता दी कि वे चाहें तो भारत गणराज्य में शामिल हों, पाकिस्तान में शामिल हों या स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखें। सभी हिंदू रियासतों ने भारत का हिस्सा बनने पर सहमति दी, लेकिन जूनागढ़ के नवाब और हैदराबाद के निजाम ने मना कर दिया। सरदार पटेल की सूझबूझ के परिणामस्वरूप उनके रक्तहीन क्रांति के माध्यम से दोनों रिसायतें भारत का हिस्सा बनीं। जूनागढ़ के नवाब और हैदराबाद के निजाम को देश छोड़कर भागना पड़ा।

बाजरा किसानों की बल्ले-बल्ले! हरियाणा सरकार ने खातों में डाले 380 करोड़ रुपये

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बताया कि सरकार ने भावांतर भरपाई योजना के तहत 380 करोड़ रुपए बाजरा उत्पादक किसानों के लिए जारी किए हैं। किसानों की समृद्धि के बिना प्रदेश में खुशहाली नहीं आ सकती, इसलिए किसान हित सरकार के लिए सर्वोपरि हैं। किसान को बिजाई से लेकर कटाई तक के कृषि यंत्रों पर सबसिडी दी जाती है। यदि प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होता है तो मुआवजे व फसल बीमा का प्रावधान है। कटाई के बाद फसल के दाने-दाने की खरीद की व्यवस्था की गई है और भुगतान सीधा किसान के खाते में डाला जाता है। वह रविवार को अपने सरकारी आवास संत कबीर कुटीर में किसान मोर्चा के पदाधिकारियों को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने किसान मोर्चा के पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे प्रदेश के किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के प्रति प्रेरित करें, इससे जहां पानी की बचत होगी वहीं फसल पर किसान की लागत में भी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि आज किसान की सभी 24 फसलों की खरीट न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रह है। आपदा के समय किसानों के साथ सरकार खड़ी रहती है। पिछले 11 सालों में किसानों को फसल खराबे के मुआवजे के रूप में 15,728 करोड़ रुपए दिए हैं। खरीफ सीजन-2025 की फसलों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के लिए 53,821 किसानों को 116 करोड़ 51 लाख रुपए से अधिक की राशि मुआवजे के रूप में जारी की गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे आबियाने को जड़ से खत्म कर दिया है। यही नहीं किसानों की तरफ पिछले आबियाने का 133 करोड़ 55 लाख 48 हजार रुपए बकाया माफ किया गया। हरियाणा आप्रेशनल पायलट परियोजना के अंतर्गत राज्य में अब तक 1 लाख 54 हजार 985 एकड़ भूमि का सुधार किया जा चुका है। प्राकृतिक खेती योजना के तह 31,873 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खे अपनाने के लिए 19,723 किसा का सत्यापन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि हाल ही किसानों की पैक्सों की तरफ बका अतिदेय ऋण की समस्या समाधान के लिए एकमुश्त निपट योजना शुरू की गई। इस योज तहत प्रदेश के 6 लाख 81 हजा 182 किसानों और गरीब मजद का 2 हजार 266 करोड़ रुपए क ब्याज माफ किया है। उन्होंने कहा कि बैंकों से किसा के लेन-देन पर लगने वाली स्टाम फीस 2000 रुपए से घटाकर 10 रुपए की गई है। साल से अधिन पुराने रजबाहों को भी दोबारा पक्क किया जाएगा।

Kangana Ranaut का पंजाब विवाद: बुजुर्ग महिला केस में नया मोड़, जानें ताज़ा जानकारी!

बठिंडा  दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान बुजुर्ग महिला महिंदर कौर को लेकर ट्विटर पर की गई टिप्पणी के मामले में सांसद कंगना रनौत के खिलाफ जिला अदालत में चल रहे प्रकरण की सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में दोनों पक्षों के वकील उपस्थित रहे, जबकि बुजुर्ग महिला की तबीयत ठीक न होने के कारण वह अदालत में पेश नहीं हो सकीं। अदालत ने कंगना रनौत के वकील को निर्देश देते हुए कहा कि आगामी 5 जनवरी 2026 को सांसद कंगना रनौत स्वयं अदालत में उपस्थित होकर गवाहों की शिनाखत करें। अब इस मामले की अगली सुनवाई उक्त तिथि को होगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए बुजुर्ग महिला महिंदर कौर के वकील बहनीवाल ने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत में महिंदर कौर और एक अन्य गवाह के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। सोमवार को मामले की अगली पेशी थी, लेकिन बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब होने के चलते वह अदालत नहीं आ सकीं। वहीं, सांसद कंगना रनौत की ओर से उनके वकील अदालत में पेश हुए। वकील बहनीवाल ने बताया कि अब मामले में गवाही की प्रक्रिया होनी है, जिसको लेकर अदालत ने निर्देश जारी किए हैं। अगली पेशी पर गवाहों के बयान दर्ज किए जाए। क्या है मामला  यह मामला वर्ष 2021 का है, जब किसान आंदोलन चरम पर था। उस समय कंगना ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने बठिंडा के गांव बहादुरगढ़ जंडिया की रहने वाली 81 वर्षीय बुजुर्ग किसान महिला महिंदर कौर की फोटो के साथ लिख दिया था कि ऐसी महिलाएं 100 रुपए में धरने में शामिल हो जाती हैं। इसके बाद माता महिंदर कौर ने अदालत में केस दायर किया था। अदालत में पेशी के दौरान  महिंदर कौर ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वह कंगना को किसी भी हालत में माफ़ नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि वह इंसाफ मिलने तक लड़ाई जारी रखेंगी, ताकि भविष्य में कोई बुज़ुर्ग महिला के बारे में ऐसी टिप्पणी न करे।  

निवेश नीति का असर: हापुड़ बना यूपी में औद्योगिक विस्तार और शहरी विकास का उभरता केंद्र

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उत्तर प्रदेश को निवेश और औद्योगिक विकास का बड़ा गंतव्य बनाने की ओर अग्रसर है। इसी क्रम में अब दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक नया निवेश केंद्र तेजी से उभर रहा है और वह हापुड़ है। हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा हाल ही में आयोजित 'इन्वेस्ट इन हापुड़ समिट 2025' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में हापुड़ भी गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम की तर्ज पर बड़े निवेश केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। समिट के दौरान कुल 1,300 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इस समिट का उद्देश्य हापुड़-पिलखुवा क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को निवेशकों के सामने प्रस्तुत करना और क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश को आकर्षित करना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना रहे। उन्होंने समिट का उद्घाटन करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार की पारदर्शी नीतियां, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और निवेश अनुकूल वातावरण के कारण उत्तर प्रदेश आज देश के शीर्ष निवेश गंतव्य स्थलों में शामिल हो गया है। वित्त मंत्री ने 100 से अधिक निवेशकों के समक्ष कहा कि दिल्ली-एनसीआर का विकास अब केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। हापुड़ जैसे क्षेत्र अब नए विकास इंजन के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण (एचपीडीए) के वाइस चेयरमैन डॉ. नितिन गौड़ (आईएएस) के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्राधिकरण ने सीमित समय में वित्तीय मजबूती और नियोजित विकास का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। समिट में प्रस्तुत आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। पिछले दो वर्षों में हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण का कुल लाभ 172 करोड़ से बढ़कर 435 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वहीं, नक्शों और विभिन्न स्वीकृतियों से होने वाली आय 5.3 करोड़ रुपए से बढ़कर 26.32 करोड़ रुपए हो गई है। यह वृद्धि प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और तेज निर्णय प्रक्रिया को दर्शाती है। समिट के माध्यम से निवेशकों को यह संदेश दिया गया कि हापुड़ अब केवल ग्रामीण छवि वाला क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह दिल्ली से लगभग 15 मिनट की दूरी पर स्थित एक उभरता हुआ शहरी और औद्योगिक केंद्र है। हापुड़ का मास्टर प्लान वर्ष 2024 में स्वीकृत हो चुका है। क्षेत्र की रोड कनेक्टिविटी मजबूत है और यह दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ से कुछ मिनटों की दूरी पर स्थित है। समिट में उद्योगपति, बिल्डर्स, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज और ग्रुप हाउसिंग से जुड़े निवेशकों को आमंत्रित किया गया। निवेशकों को आवासीय और औद्योगिक भूमि की जानकारी ग्रामवार खसरे सहित उपलब्ध कराई गई है, ताकि उन्हें भूमि खोजने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह योगी आदित्यनाथ सरकार के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मॉडल का व्यावहारिक उदाहरण है। समिट के दौरान कुल 1,300 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए। यशोदा ग्रुप सहित कई बड़े निवेशकों ने हापुड़ में निवेश का आश्वासन दिया। इसमें मैक्स, मेदांता हॉस्पिटल, न्यूट्रिमा, भारती, यशोदा समूह शामिल रहे। यशोदा हॉस्पिटल ग्रुप ने 300 करोड़ रुपए, एस्पायर 150 करोड़ रुपए, दिव्यांश ग्रुप 200 करोड़ रुपए, आनंतम 150 करोड़ रुपए, आईटी पार्क बाई विशाल त्यागी 200 करोड़ रुपए, एमएंडएम 100 करोड़ रुपए, वी मैप्स 150 करोड़ रुपए और पार्क सिटी ने 100 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की है। हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि यह पहली बार है, जब प्राधिकरण स्तर पर इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हरिपुर आवासीय योजना के अंतर्गत 30 हेक्टेयर का नया लैंड बैंक विकसित किया जा रहा है। इसमें से 21 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अब तक पूरा हो चुका है। हापुड़ की कनेक्टिविटी नेशनल हाईवे-9, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे से है।

दिल्ली विस्फोट मामला: कोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की हिरासत बढ़ाई

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) केस में अल फलाह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत को साकेत कोर्ट ने 20 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। अदालत ने यह आदेश मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए दिया। जावेद अहमद सिद्दीकी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और प्रवर्तन एजेंसियां उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। साकेत कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए न्यायिक हिरासत बढ़ाना जरूरी है। इससे पहले 12 दिसंबर को मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चार आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। इनमें डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद और आदिल अहमद शामिल थे। इन सभी को उनकी पिछली हिरासत अवधि पूरी होने के बाद अदालत के सामने पेश किया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के बाद चारों आरोपियों को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। एनआईए ने अदालत को बताया था कि आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर नबी, आदिल अहमद, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान और इरफान अहमद मिलकर एक बड़ी साजिश रच रहे थे। एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल का उद्देश्य राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाना और संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाना था। जांच में यह भी सामने आया है कि कार में हुए विस्फोट को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी था। चारों मुख्य आरोपियों को एनआईए की हिरासत खत्म होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था। एजेंसी ने उनके खिलाफ जुटाए गए प्रारंभिक सबूतों के आधार पर न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। गौरतलब है कि 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण विस्फोट से पूरे देश में दहशत फैल गई थी। शाम करीब 6:52 बजे एक हाई ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी सफेद हुंडई आई20 कार में जोरदार धमाका हुआ था। इस हमले में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जांच एजेंसियां इस साजिश से जुड़े हर पहलू की गहन जांच में लगी हुई हैं।

पंजाब से कुरुक्षेत्र मेले तक सफेद घोड़े का जलवा, करोड़ों की कीमत के बावजूद मालिक ने बेचने से किया इनकार

कुरुक्षेत्र  कुरुक्षेत्र के पिहोवा पशु मेले में 1 करोड़ का घोड़ा पहुंचा है। यह घोड़ा पंजाब के संगरूर से लाया गया है। घोड़े का नाम प्रताप रूप है, जो सिर से पैर तक पूरी तरह सफेद है। घोड़े की उम्र 28 महीने की है और यह 67 इंच ऊंचा है। लोग घोड़े के साथ फोटो खिंचवाने आ रहे हैं।  घोड़े के मालिक सरपंच हरप्रीत सिंह और उनके पिता निर्भय सिंह ने बताया कि इसकी 1 करोड़ रुपए तक की कीमत लग चुकी है। लेकिन तब भी उन्होंने इसे नहीं बेचा। घोड़े को 3 टाइम अलग-अलग डाइट दी जाती है। सर्दियों में उसे दूध में बादाम उबालकर दिए जाते हैं। इसके अलावा नहलाकर एक घंटे तेल मालिश की जाती है। जानें घोड़े की तीनों टाइम की डाइट   सुबह के समय प्रताप को 2 से 3 किलो काले चने दिए जाते हैं। 11 बजे उसे फॉर्म में घुमाने के लिए लेकर जाते हैं।   दोपहर को फॉर्म में उसे खुला रखते हैं, जहां वो घास चरता है।   शाम को प्रताप रूप को घर लाकर दूध पिलाते हैं। सर्दी में दूध में बादाम को डालकर उबालकर दिया जाता है। इसके बाद खाने के लिए उबला जौ भी देते हैं। गर्मी के दिनों में उसे सेब भी दिए जाते हैं।  

एक क्लिक में 160 करोड़ की मदद: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे अनुग्रह सहायता योजना की राशि का वितरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 दिसम्बर 2025 को मंत्रालय, भोपाल में संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 7 हजार 227 प्रकरणों में राशि रुपये 160 करोड़ सिंगल क्लिक के माध्यम से वितरित करेंगे। कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं विभिन्न स्थानों पर माननीय मंत्री गण एवं स्थानीय जन प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। संबल योजना, प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें अनुग्रह सहायता योजना के अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं। इसी प्रकार स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 01 लाख रूपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना के अंतर्गत जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये दिये जाते हैं तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महावि‌द्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा में शिक्षा के लिए सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार ‌द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खा‌द्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है। मध्यप्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती है। इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है।अब वे भी 5 लाख रूपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा प्राप्त कर रहे है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना प्रारंभ 1 अप्रैल 2018 से अब तक 1 करोड़ 83 लाख श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया गया है।पंजीयन प्रक्रिया निरंतरित है। श्रम विभागीय योजनांतर्गत वर्तमान तक 7 लाख 76 हजार से अधिक प्रकरणों में राशि रूपये 7 हजार 383 करोड़ से अधिक के हितलाभ दिये जा चुके हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में हो रहा है सांस्कृतिक अभ्युदय

भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे तानसेन मूर्धन्य संगीतज्ञ पं. राजा काले और पं. तरुण भट्टाचार्य तानसेन अलंकरण से हुए विभूषित  साधना परमार्थिक संस्थान समिति मण्डलेश्वर एवं रागायन संगीत समिति ग्वालियर को मिला राजा मानसिंह तोमर सम्मान भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक अभ्युदय हो रहा है। आज दुनिया भारत की ओर देख रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत शनै:-शनै: अपनी अद्वितीय छाप छोड़ता जा रहा है। राज्य सरकार कला-संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव “तानसेन संगीत समारोह” का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तानसेन संगीत समारोह प्रदेश का उल्लेखनीय और प्रतिष्ठित समारोह है। संगीत सम्राट तानसेन की सुर और तान ने ग्वालियर को दुनिया में अलग पहचान दिलवाई है। तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे। संगीत सम्राट तानसेन ने गुरु स्वामी हरिदास जी के सानिध्य में संगीत की बारीकियां सीखकर नए आयाम दिए हैं। उनकी तान सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। तानसेन की ख्याति ऐसी थी कि अकबर ने उन्हें अपने नवरत्नों में शामिल किया है। वैदिक काल से शास्त्रीय संगीत हमारे जीवन और संस्कृति का हिस्सा है और सामवेद इसका साक्षी है। इसके पहले अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला ने तानसेन समारोह के महत्व को बताते हुए रूपरेखा की जानकारी दी। सभी सम्मानित कलाकारों को दी बधाई तानसेन समारोह के शुभारंभ के साथ राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण एवं राजा मानसिंह तोमर सम्मान समारोह का आयोजन भी हुआ। इसमें प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. राजा काले मुम्बई को वर्ष 2024 एवं सुविख्यात संतूर वादक पं. तरुण भट्टाचार्य को वर्ष 2025 के तानसेन अलंकरण से विभूषित किया गया। इसी तरह मण्डलेश्वर की साधना परमार्थिक संस्थान समिति को वर्ष 2024 एवं ग्वालियर की रागायन संगीत समिति को वर्ष 2025 का राजा मानसिंह तोमर सम्मान से अलंकृत किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सम्मानित विभूतियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।   उल्लेखनीय है कि ग्वालियर में 15 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक “तानसेन समारोह” आयोजित हो रहा है। जाहिर है ग्वालियर की फिज़ाएँ अगले पाँच दिनों तक सुर, ताल व राग की बारिश में सराबोर रहेंगी। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश और दुनियाँ के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव " तानसेन समारोह " में इस बार अलग ही रंग भरे गए हैं। राज्य शासन के संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी व मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा जिला प्रशासन व नगर निगम के सहयोग से हर साल तानसेन संगीत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य समारोह में 10 संगीत सभाएँ होंगी तानसेन संगीत समारोह में इस साल 10 संगीत सभाएं होंगी। पहली सभा सोमवार को सायंकाल को तानसेन समाधि परिसर में बनाए गए भव्य मंच पर सजी। इसके बाद हर दिन यहीं पर प्रातः एवं सायंकालीन सभाएं होंगी। समारोह के तहत 18 दिसम्बर को प्रात:काल 10 बजे से दो संगीत सभायें समानांतर रूप से सजेंगी। यह सभायें तानसेन समाधि स्थल के मुख्य मंच व मुरैना जिले के सुप्रसिद्ध बटेश्वर मंदिर परिसर में संगीत सभा सजेगी। समारोह के आखिरी दिन 19 दिसंबर को प्रातःकालीन सभा संगीत शिरोमणि तानसेन की जन्मस्थली बेहट में और इस साल के समारोह की अंतिम संगीत सभा सायंकाल गूजरी महल परिसर में सजेगी। ग्वालियर में आयोजित कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री धर्मेंद्र लोधी, विधायक श्री मोहन ठाकुर, विधायक श्री सुरेश राजे, महापौर श्रीमती शोभा सिकरवार, संचालक संस्कृति श्री एनपी नामदेव सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित थे। 

पंजाब की इन जगहों पर फिर जाएंगे मतदाता, Election Commission ने घोषित किया री-पोल

चंडीगढ़  आयोग के तय प्रोग्राम के मुताबिक, राज्य भर में 22 ज़िला परिषदों के 347 ज़ोन और 153 पंचायत समितियों के 2838 ज़ोन के सदस्यों के चुनाव के लिए आम चुनाव तसल्लीबख्श और शांतिपूर्ण ढंग से पूरे हो गए हैं। कुछ घटनाओं को छोड़कर, चुनाव के दौरान किसी जानी नुकसान या टकराव की कोई खबर नहीं है। आयोग ने इन जगहों पर फिर से चुनाव कराने के दिए आदेश 1. ब्लॉक समिति अटारी, ज़ोन नंबर 08 (खासा) (बूथ नंबर 52, 53, 54, 55) और ज़ोन नंबर 17 (वरपाल कलां) (बूथ नंबर 90, 91, 93, 94, 95)-अमृतसर ज़िला। 2. ब्लॉक समिति चन्नणवाल (ज़ोन नंबर 04), गांव रायसर पटियाला (बूथ नंबर 20)- ज़िला बरनाला। 3. ब्लॉक कोट भाई, गिद्दड़बाहा जिला श्री मुक्तसर साहिब में गांव बबानिया (बूथ नंबर 63 और 64) और गांव मधीर (बूथ नंबर 21 और 22)  4. गांव चन्नियां (पोलिंग स्टेशन 124)- जिला गुरदासपुर 5. पोलिंग बूथ 72, पंचायत समिति भोगपुर (ज़ोन चीन 4)– जिला जालंधर वहीं जानकारी के लिए बता दें कि दोबारा चुनाव 16.12.2025 को सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होंगे और इन वोटों की गिनती 17.12.2025 को आम गिनती के साथ की जाएगी। 

जांच में सनसनीखेज तथ्य: दिल्ली ब्लास्ट के पीछे हवाई हमले की प्लानिंग, कश्मीरी स्टूडेंट की भूमिका उजागर

फरीदाबाद  नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) वीरवार को दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल में शामिल कश्मीरी छात्र जसीर बिलाल वानी को निशानदेही के लेकर अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहुंची। जहां उसको विस्फोटक रखने वाली जगहों पर लेकर जाया गया।  जांच एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जसीर वानी ने आटा-चक्की से यूरिया को पीसकर, उसमें से अमोनियम नाइट्रेट अलग करने में आतंकी मुजम्मिल की मदद की थी। जसीर वानी के साथ एजेंसी डॉ. शाहीन और डॉ. मुजम्मिल को भी लेकर आई थी, लेकिन केवल जसीर वानी को गाड़ी से उतारकर निशानदेही कराई गई। जसीर वानी डॉ. मुजम्मिल के साथ उसके फ्लैट पर भी रुका था। बम निरोधक दस्ता साथ लाया गया नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) अपने साथ बम निरोधक दस्ते को भी साथ लेकर आई थी। इस दौरान यूनिवर्सिटी परिसर के साथ लगते लगभग दो एकड़ के खेत में बने कमरे की जांच बम निरोधक दस्ता के द्वारा कराई गई, ये वो ही कमरा था, जिसमें 12 दिन तक विस्फोटक सामग्री को रखा गया था। बाद में उसको फतेहपुर तगा के कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। यहां कमरे के अंदर व पास में मिट्टी खोदकर भी देखा गया। लगभग एक घंटे बाद बम निरोधक दस्ता की टीम यहां से चली गई। इसके बाद डॉ. मुजम्मिल और शाहीन को यूनिवर्सिटी के एडमिन ब्लॉक ले जाया गया। जहां पर करीब एक आध घंटे तक उनको रखा गया। पूछताछ में कई डॉक्टर फैकल्टी स्टाफ सहित छात्रों को भी शामिल किया गया था। दरअसल मुजम्मिल और शाहीन रिमांड के दौरान जो जानकारी दे रहे हैं, एनआईए उस जानकारी को पुख्ता कर रही है कि वह सच बोल रहे हैं या झूठ, इसलिए टीम आतंकियों को बार-बार यूनिवर्सिटी लाकर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करती है। गांव धौज में रखी गई थी आटा चक्की इस दौरान NIA की टीम जसीर वानी को डॉ. मुजम्मिल के यूनिवर्सिटी वाले फ्लैट, गांव धौज में जहां पर आटा-चक्की रखी गई थी, गांव खोरी जमालपुर में पूर्व सरपंच का मकान जहां पर मुजम्मिल ने 3 कमरों को फ्लैट किराए पर लिया था, इन सभी जगहों पर लेकर गई और उसकी निशानदेही करवाई गई। पॉलिटिकल साइंस का छात्र  NIA के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जसीर वानी (20) पुलवामा का रहने वाला है। जसीर अनंतनाग के एक कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस का सेकेंड ईयर का छात्र है। दिल्ली ब्लास्ट में खुद को उड़ाने वाले आतंकी उमर का सबसे ज्यादा करीबी था। डॉ शाहीन और मुजम्मिल से जसीर वानी की मुलाकात आतंकी उमर ने कराई थी। हवाई हमले की थी प्लानिंग जसीर वानी से एजेंसी की पूछताछ में ये भी खुलासा हुआ है कि पहले हवाई हमले की प्लानिंग की गई थी। जिसमें विस्फोटक को भरकर दूर से ही हमले को अंजाम दिया जा सके, लेकिन ऐसा नही हो पाया। जिसके बाद उमर ने अपने साथियों के साथ दिल्ली में कई जगहों पर एक साथ हमले की योजना बनाई थी। श्रीनगर में प्लान तैयार, कुछ प्रयोग भी किए इसके लिए कश्मीर के श्रीनगर पूरा प्लान तैयार किया गया था। जहां पर कुछ प्रयोग भी किए गए थे, लेकिन बजट ज्यादा होने के चलते ऐसा संभव नही हो पाया। जांच में पता चला है कि जसीर वानी पुलवामा स्थित एक गांव का रहने वाला है और उसके गांव से कुछ ही दूरी पर आतंकी मुजम्मिल का भी गांव है, इसलिए वह जब भी फरीदाबाद आता, तो वह मुजम्मिल के फ्लैट पर ही रुकता था।