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मोरहाबादी मेले में महिलाओं की पहल बनी आकर्षण, मछली से बने उत्पादों ने खींचा ध्यान

रांची मोरहाबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में मंगलवार को राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान, उद्यमी और आम लोग पहुंचे। मेले में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, सिंचाई, उन्नत बीज, पौधों और कृषि उपकरणों से जुड़े कई स्टॉल लगाए गए हैं, जहां लोग नई तकनीकों और व्यवसायिक संभावनाओं की जानकारी ले रहे हैं। मेले का प्रमुख आकर्षण महेशपुर मत्स्यपालन सहयोग समिति का स्टॉल रहा। समिति से जुड़ी 60 महिलाओं का समूह सामूहिक रूप से मछली पालन का कार्य कर रहा है। समूह की सदस्य सुनीता देवी ने बताया कि महिलाएं केवल मछली पालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उससे मूल्यवर्धित उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। मछली से समोसा, बर्गर, कटलेट और अचार बनाकर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मछली के अचार की खासियत यह है कि उसमें मछली की गंध बिल्कुल महसूस नहीं होती और उसका स्वाद सामान्य अचार की तरह ही होता है। इस पहल से महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अवसर मिला है। वर्तमान में 60 महिलाएं इस कार्य से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। मेले में मोती पालन की आधुनिक तकनीक भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। विशेषज्ञों ने बताया कि सीप (शीप) के माध्यम से मोती उत्पादन की प्रक्रिया में लगभग दो वर्षों का समय लगता है। इसके पालन में स्वच्छ जल, पर्याप्त ऑक्सीजन और शैवाल (ऐलगी) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रदर्शनी में मोती उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को मॉडल और प्रदर्शन के माध्यम से समझाया गया, जिससे किसानों और युवाओं ने काफी रुचि दिखाई। इसके अलावा मेले में उन्नत किस्म के मिर्च, बैंगन तथा अन्य सब्जियों के पौधों की भी बिक्री की जा रही है। किसान नई किस्मों के बीज और पौधों की जानकारी लेकर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उपाय जान रहे हैं।  

टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ मिशन की प्रगति पर मंथन, मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को दिए अहम निर्देश

मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और सुरक्षित मातृत्व अभियान के कार्यों की समीक्षा की रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में टीवी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ को टीवी मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत किए जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की।                  मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में कार्य करने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा है कि राज्य में टीबी के मरीजों की जांच के लिए व्यापक स्तर पर जांच शिविर लगाये जायें। जिसमें जांच के दौरान मिलने वाले टीबी के मरीजों का त्वरित ईलाज किया जाए। इसके लिए प्रत्येक गांव और शहरों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने टीबी मरीजों के जांच के लिए सभी जरूरी उपकरणों एक्स-रे मशीन एवं रेडियोग्राफरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने कहा है।                 विकासशील ने मरीजों की शीघ्र पहचान कर ईलाज शुरू किया जाना चाहिए एवं मरीजों को स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत पोषण आहार एवं पौष्टिक सामग्री हेतु निर्धारित राशि तुरंत उपलब्ध कराया जाना चाहिए। टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत जो गांव और ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त होती है। इसके बारे में गांव में होने वाली ग्राम सभा में लोगों को बताया जाना चाहिए। इसी तरह से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की घर-घर जाकर जांच की जाए। महिलाओं के बीपी, वजन, हिमोग्लोबिन इत्यादि की जांच की जाए। आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को एफआरयू में रेफर किए जाए।                  मुख्य सचिव ने बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग की जाए। सभी आंगनबाड़ी, स्कूलों में हर बच्चें की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। रोग युक्त पाए जाने बच्चों को बड़े अस्पतालों में ईलाज के लिए भेजा जाए। अस्पतालों में ईलाज करा रहे बच्चों की टैªकिंग की जाकर उनके स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग कर समुचित उपचार दिया जाए। सभी शिशुओं को जरूरी टीके लगाए जाये। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत राज्य में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

हाईकोर्ट ने कहा विशेषज्ञों की राय पर अदालत नहीं ले सकती प्रतिस्थापन, भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा फैसला

चंडीगढ़  हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) प्रारंभिक परीक्षा-2026 की उत्तर कुंजी और परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालतें शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय का स्थान नहीं ले सकतीं। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि जब तक उत्तर कुंजी में त्रुटि प्रत्यक्ष, स्पष्ट और संदेह से परे साबित न हो, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर यदि संदेह या अस्पष्टता हो तो उसका लाभ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को दिया जाना चाहिए, न कि अभ्यर्थी को। हाईकोर्ट एचसीएस (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने 26 अप्रैल को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या पाया? उनका कहना था कि सामान्य अध्ययन और सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के कई प्रश्नों के उत्तर गलत हैं तथा प्रमाणिक स्रोतों के विपरीत हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परीक्षा के बाद हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने 28 अप्रैल को अस्थायी उत्तर कुंजी वेबसाइट पर अपलोड कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया, जिनकी राय के आधार पर कुछ उत्तरों में संशोधन किया गया और 2 मई को संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई। इसके बाद 4 मई को परिणाम घोषित किया गया।हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश देकर यह भी जानकारी मांगी थी कि कुल कितनी आपत्तियां प्राप्त हुईं और उन्हें निपटाने में कितना समय लगा। इसके साथ ही विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की टिप्पणियां भी तलब की गई थीं। आयोग ने जवाब में बताया कि अदालत के निर्देश के बाद विवादित प्रश्नों पर विशेषज्ञों से दोबारा राय ली गई, लेकिन उन्होंने अंतिम उत्तर कुंजी में किसी अतिरिक्त बदलाव की आवश्यकता नहीं बताई।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करने से पहले उन्हें अन्य अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देने का अवसर नहीं दिया गया। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसा कोई नियम, विनियमन या विज्ञापन की शर्त नहीं है जो आयोग को ऐसी प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य करती हो। जस्टिस बंसल ने अपने फैसले में विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी पर यह साबित करने का दायित्व होता है कि त्रुटि इतनी स्पष्ट है कि उसके लिए किसी अनुमान या विस्तृत तर्क की आवश्यकता न पड़े। अदालत ने कहा कि रिकार्ड से यह साबित नहीं होता कि विशेषज्ञों द्वारा स्वीकार किए गए उत्तर प्रत्यक्ष रूप से गलत हैं। इसलिए विशेषज्ञों की राय को प्रतिस्थापित करने का कोई आधार नहीं बनता। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि यदि हर आपत्ति पर पुन आपत्ति और फिर पुनर्विचार की अनुमति दी जाए तो भर्ती प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं हो सकेगी। चूंकि यह केवल प्रारंभिक परीक्षा थी और मुख्य परीक्षा इसी माह के अंत में प्रस्तावित है, इसलिए कुछ असफल अभ्यर्थियों की मांग पर पूरी चयन प्रक्रिया रोकना सार्वजनिक हित और सफल उम्मीदवारों दोनों के लिए नुकसानदेह होगा। इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।  

विकास और पर्यावरण में संतुलन की पहल, नई पॉलिसी के तहत पेड़ों की कटाई पर कड़े नियम

ग्वालियर मध्यप्रदेश सरकार ने विकास परियोजनाओं के दौरान पेड़ों की कटाई को कम करने के उद्देश्य से 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का मसौदा तैयार किया है।  यह ड्राफ्ट हाई कोर्ट की डबल बेंच के समक्ष पेश किया गया। प्रस्तावित नीति के तहत सड़क, मेट्रो, रेलवे और फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं में पेड़ों को काटने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से दूसरी जगह प्रत्यारोपित करने पर जोर दिया गया है। थाटीपुर पुनर्विकास परियोजना के बाद बनी नीति सरकारी सूत्रों के अनुसार, ग्वालियर के थाटीपुर पुनर्विकास परियोजना के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों का प्रत्यारोपण किया गया था। बाद में पर्याप्त देखरेख नहीं होने से कई पेड़ नष्ट हो गए। इस मामले में हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सरकार से स्पष्ट नीति बनाने को कहा था। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद तैयार हुआ ड्राफ्ट न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए थे कि पेड़ों के प्रत्यारोपण और कटाई से संबंधित कार्य वैज्ञानिक मानकों और स्पष्ट नीति के आधार पर किए जाएं। इसके बाद राज्य सरकार ने ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी का मसौदा तैयार किया। पेड़ काटना नहीं होगा पहला विकल्प प्रस्तावित नीति के अनुसार किसी भी निर्माण एजेंसी को यह साबित करना होगा कि परियोजना के डिजाइन में बदलाव कर पेड़ों को बचाने के सभी विकल्पों पर विचार किया गया है। यदि पेड़ों को हटाना अपरिहार्य हो, तो प्रभावित पेड़ों में से कम से कम 80 प्रतिशत का वैज्ञानिक तरीके से प्रत्यारोपण करना होगा। जियो-टैगिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग नीति में प्रत्यारोपित पेड़ों और उनके स्थान पर लगाए जाने वाले नए पौधों की जियो-टैगिंग का प्रावधान किया गया है। इसके लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा। डैशबोर्ड पर पेड़ों की लोकेशन, तस्वीरें और रखरखाव से जुड़ी जानकारी उपलब्ध रहेगी, जिससे निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। नए पौधे लगाने की भी व्यवस्था ड्राफ्ट के अनुसार प्रत्यारोपित किए गए प्रत्येक पेड़ के बदले निर्धारित संख्या में नए पौधे लगाने होंगे। इन पौधों की निगरानी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी।

खनिज माफियाओं पर कसेगा शिकंजा, बिहार सरकार ने प्रतिदिन 5 वाहन जब्त करने का दिया लक्ष्य

पटना. बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने 20 जून से राज्य में प्रभावी इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। विभागों ने सभी बॉर्डर जिलों को निर्देश दिए हैं कि प्रतिदिन पांच ऐसे वाहनों को पकड़े और जब्त करें जो बिना वैध इंटर स्टेट ट्रांजिट पास खनिज लदे वाहनों के साथ बिहार की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। खान एवं भू-तत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह ने सभी सहायक निदेशक और खनिज विकास पदाधिकारियों के साथ इंटर स्टेट ट्रांजिट पास समेत विभाग की योजनाओं की समीक्षा की।  दूसरे राज्यों से आने वाले गाड़ियों के जांच के निर्देश वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में आईएसटीपी व्यवस्था की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि आइएसटीपी के नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और अधिक से अधिक वाहनों का पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाले लघु खनिज लदे वाहनों की सघन जांच करने को कहा गया। पांच वाहनों को जब्त करने के निर्देश इसी क्रम में प्रतिदिन पांच वाहनों को जब्त करने के निर्देश भी दिए गए। खान सचिव ने वाहनों की जांच के लिए छापेमारी बढ़ाने और अधिक समय तक जांच अभियान चलाने को कहा। बैठक में औरंगाबाद के खनिज विकास पदाधिकारी द्वारा जांच में लापरवाही बरतने का मामला भी सामने आया। इस पर संबंधित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया है। समीक्षा के दौरान पाया गया कि आईएसटीपी चालान दिन और रात दोनों समय लगभग समान संख्या में जारी हो रहे हैं। इसे देखते हुए अधिकारियों को दिन के समय भी विशेष जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।

देश सेवा करते हुए पंजाब का वीर जवान शहीद, लेह में ऑक्सीजन लेवल घटने से बिगड़ी तबीयत

चंडीगढ़. देश की सेवा करते हुए पंजाब के एक फौजी जवान के शहीद होने की दुखद खबर सामने आई है। पंजाब आर्मर्ड रेजिमेंट के जवान नायक सरबजीत सिंह लेह (लद्दाख) में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। जानकारी के अनुसार गांव बिंदरख निवासी नायक सरबजीत सिंह पुत्र दर्शन सिंह लेह के ऊंचाई वाले क्षेत्र में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान अचानक ऑक्सीजन की कमी होने से उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दुखद समाचार के बाद गांव बिंदरख सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि शहीद सरबजीत सिंह का विवाह 25 जनवरी 2026 को ही हुआ था। शादी के महज 5 महीने बाद उनके शहीद होने की खबर से परिवार गहरे सदमे में है। शहीद के ताऊ सुखविंदर सिंह ने बताया कि सरबजीत सिंह का पार्थिव शरीर जल्द ही उनके पैतृक गांव बिंदरख लाया जाएगा, जहां पूर्ण राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर जवान की शहादत पर विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

गौ सेवा आयोग अध्यक्ष की कार को बाइक सवारों ने मारी टक्कर, त्वरित कार्रवाई में 2 गिरफ्तार

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में बुधवार को गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विश्वेसर पटेल के साथ बदसलूकी और हमले की कोशिश का मामला सामने आया है. कार और बाइक के बीच हुई टक्कर को लेकर विवाद शुरू हुआ था. आरोप है कि दोनों युवकों ने अभद्रता करते हुए पत्थर उठाकर हमला करने का प्रयास किया. घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर की है. जानकारी के अनुसार, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विश्वेसर पटेल जिला मुख्यालय कवर्धा से अपने गांव रोहरा लौट रहे थे. उस समय वह अपनी कार में चालक के साथ सवार थे. इसी दौरान पीछे से आ रही एक बाइक उनकी कार से टकरा गई. टक्कर के बाद जब कार रोकी गई तो बाइक सवार दोनों युवक विवाद करने लगे. आरोप है कि उन्होंने गाली-गलौज की और पत्थर उठाकर हमला करने की कोशिश भी की. विश्वेसर पटेल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है, लेकिन उन्हें सुरक्षा के लिए कोई गार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. जांच के दौरान दोनों युवक नशे की हालत में पाए गए. पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया और कानूनी कार्रवाई के बाद गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. फिलहाल मामले की जांच जारी है. दोनों आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने मामले में जानकरी दी कि कवर्धा के बाहरी क्षेत्र में घटना हुई है. कार में अचानक ब्रेक लगने से पीछे चल रही बाइक टकरा गई. बाइक सवार दो युवक घटना के दौरान नशे की हालात में थे. इस दौरान दोनों पक्षों में विवाद हुआ. वहीं गाली-गलोच भी हुई है. सूचना पर पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को गिरफ्तार किया है. कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है.

MP में राष्ट्रपति मुर्मू का दौरा: इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर बदलेगा ट्रैफिक रूट, एयरपोर्ट क्षेत्र नो-फ्लाइंग जोन

भोपाल  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रहेंगी। दौरे की शुरुआत इंदौर से होगी, जहां से वे सीधे ओंकारेश्वर पहुंचकर ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करेंगी। 19 जून को वे अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होंगी। इसके बाद राष्ट्रपति ग्वालियर और श्योपुर के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्थाएं की हैं। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्र को ‘नो-फ्लाइंग जोन’ घोषित किया गया है। वहीं 17 से 19 जून तक यातायात डायवर्जन लागू रहेगा। भारी वाहनों का रूट बदला गया     इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले भारी मालवाहक वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा।     इंदौर से खंडवा जाने वाले भारी वाहन तेजाजी नगर, महू, मानपुर, धामनोद, खरगोन, भीकनगांव और देशगांव होते हुए खंडवा जाएंगे।     सिमरोल से आने वाले वाहन मंडलेश्वर, कसरावद, खरगोन, भीकनगांव और देशगांव होकर खंडवा पहुंचेंगे।     बड़वाह से आने वाले वाहन मंडलेश्वर, कसरावद, खरगोन और भीकनगांव के रास्ते खंडवा जाएंगे।     खंडवा से इंदौर जाने वाले भारी वाहन भीकनगांव, खरगोन और कसरावद होकर जाएंगे।     मंडलेश्वर से आने वाले वाहन कसरावद और खलघाट के रास्ते इंदौर पहुंच सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था 18 और 19 जून को ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को निर्धारित पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा।     इंदौर की ओर से आने वाले छोटे और मध्यम वाहन बड़वाह, मोरटक्का, सनावद और इनपुन होते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड और ताम्रकर पार्किंग तक जाएंगे।     खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले वाहन भी सनावद और इनपुन के रास्ते इन्हीं पार्किंग स्थलों तक पहुंचेंगे     पार्किंग से श्रद्धालुओं को पैदल दर्शन और स्नान के लिए जाना होगा। बसों के लिए व्यवस्था     इंदौर और खंडवा से आने वाली श्रद्धालुओं की बसें मोरटक्का में पार्क की जाएंगी।     वहां से प्रशासन द्वारा लोक परिवहन के जरिए श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर पहुंचाया जाएगा।     नियमित रूट की बसों को सनावद और इनपुन होते हुए पी-01 पार्किंग तक भेजा जाएगा। इसके आगे पैदल जाना होगा।     कुछ समय के लिए रास्ते बंद रह सकते हैं। कुछ मार्ग नो व्हीकल जोन रहेंगे राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ मार्गों को अस्थायी रूप से नो व्हीकल जोन बनाया जाएगा। राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात सामान्य कर दिया जाएगा। प्रशासन की अपील पुलिस और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं एवं आम लोगों से ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था का पालन करने तथा यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने की अपील की है।

बस्तर अंजोर अभियान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन, यूनिसेफ के साथ राज्य नीति आयोग की अहम चर्चा

राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ के बीच उच्चस्तरीय बैठक  विकसित छत्तीसगढ़ एवं बस्तर अंजोर को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन रायपुर,  राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा से आज यूनिसेफ इंडिया के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नीति भवन नवा रायपुर में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने किया। इस अवसर पर यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड कार्यालय की प्रमुख श्रीमती सीमा कुमार एवं सामाजिक नीति प्रमुख डॉ. बाल परितोष दाश भी उपस्थित रहे।           बैठक में विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त, सामुदायिक जागरूकता एवं सामाजिक व्यवहार परिवर्तन और बस्तर अंजोर कार्यक्रम पर विस्तृत चर्चा हुई। विकसित छत्तीसगढ़ – जहाँ बच्चे हैं विकास की नींव         बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने स्पष्ट किया कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना में बच्चे केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य के प्रत्येक बच्चे को स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और संरक्षण सुनिश्चित नहीं होता, तब तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य अधूरा है।  राज्य नीति आयोग ने विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क के अंतर्गत 50 से अधिक विभागों के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक विकसित किए हैं, जिसमें बाल कल्याण को एक स्वतंत्र एवं समर्पित विषयक्षेत्र के रूप में सम्मिलित किया गया है। विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई, नीति और जमीन के बीच सेतु         राज्य नीति आयोग एवं यूनिसेफ के संयुक्त प्रयास से स्थापित विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई (VC-SPS Unit) राज्य में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहल है। यह इकाई विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए बजट विश्लेषण और सामाजिक संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए राज्य के विभागों को निरंतर तकनीकी सहयोग प्रदान करती है। बैठक में इस इकाई के कार्यों की सराहना की गई और इसे और अधिक सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की गई। देश में पहली बार – बाल कल्याण सूचकांक             राज्य नीति आयोग देश में पहली बार एक राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण मापन पद्धति एवं बाल वंचना सूचकांक विकसित करेगा। यह सूचकांक राज्य के विभागों को बच्चों तक सेवा वितरण की कमियों की पहचान करने और बाल-केंद्रित नीतियों को सुदृढ़ करने में सहायक होगा। साथ ही बच्चों के लिए बजट का एक मानक ढांचा भी तैयार किया जाएगा। यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रस्तावित पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगा। बस्तर अंजोर – आदिवासी एवं बाल विकास का ऐतिहासिक अवसर          बैठक में बस्तर अंजोर को आदिवासी समुदायों और बच्चों के कल्याण के लिए एक अभूतपूर्व अवसर के रूप में रेखांकित किया गया। राज्य नीति आयोग द्वारा प्रवर्तित यह अभिनव समन्वय पहल बस्तर संभाग के सातों जिलों को आच्छादित करती है। 3+4 मॉडल पर आधारित यह कार्यक्रम तीन कलेक्टर नेतृत्व वाली जिला पहलों -नियद नेल्ला नार, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर को चार राष्ट्रीय एवं राज्य मिशनों से जोड़ता है। इस कार्यक्रम के 90 प्रतिशत से अधिक हस्तक्षेप क्षेत्र बाल स्वास्थ्य, पोषण एवं सामाजिक संरक्षण से संबंधित हैं।         यूनिसेफ ने इस कार्यक्रम को संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में विकास की रोशनी पहुँचाने का एक दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण अवसर बताया और बस्तर अंजोर के औपचारिक लोकार्पण में मुख्य अतिथि एवं रणनीतिक भागीदार के रूप में सहभागिता की सहर्ष स्वीकृति दी। सामुदायिक जागरूकता, विश्वास निर्माण एवं सामाजिक व्यवहार परिवर्तन          बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल नीति एवं बजट से नहीं, बल्कि समुदाय के विश्वास और व्यवहार परिवर्तन से भी निर्धारित होती है। बस्तर जैसे आदिवासी एवं संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक जागरूकता और जन विश्वास का निर्माण विकास की पूर्वशर्त है।         यूनिसेफ की सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञता को बस्तर अंजोर और विकसित छत्तीसगढ़ के जमीनी क्रियान्वयन से जोड़ने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके अंतर्गत पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल संरक्षण के क्षेत्रों में समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान, स्थानीय नेतृत्व का सुदृढ़ीकरण और परिवारों में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने की दिशा में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। यूनिसेफ का सहयोग और विस्तार         यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने कहा कि यूनिसेफ वर्ष 2019 से छत्तीसगढ़ सरकार का विश्वसनीय रणनीतिक भागीदार रहा है और यह साझेदारी आगे और सुदृढ़ होगी। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़, बस्तर अंजोर, बाल कल्याण सूचकांक, सामुदायिक जागरूकता और बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त के क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से सहयोग विस्तार का आश्वासन दिया।        बैठक के अंत में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने यूनिसेफ की पूरी टीम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी छत्तीसगढ़ के बच्चों के उज्जवल भविष्य और विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक सशक्त एवं प्रेरणादायी कदम है।

ड्रोन से हथियार और ड्रग्स सप्लाई करने वाले आतंकी मॉड्यूल का दिल्ली में पर्दाफाश हुआ

नई दिल्ली  पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के समर्थन से चल रहे एक इंटरनेशनल टेरर-क्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए स्पेशल सेल ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मॉड्यूल को पाकिस्तानी गैंगस्टर-आतंकी शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुज्जर ऑपरेट कर रहे थे। यह सिंडिकेट पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई कर रहा था।     पुलिस इनसे जुड़े अन्य मेंबरों की तलाश कर रही है।     DCP (स्पेशल सेल) नरी चैतन्य के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के लोनी निवासी अनस उर्फ अनस त्यागी (26), मोहित उर्फ योगी (26), दीपक उर्फ दीपक अगरौला (38), आरिफ उर्फ प्रधान (30), जतन (29), साबिर (30) और पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी करणवीर सिंह (26) के तौर पर हुई है।     इनसे पांच पिस्टल, 41 कारतूस, सात फोन और एक स्कॉर्पियो रिकवर हुए है।     पूछताछ में कई बैंक अकाउंट्स की जानकारी मिली है।     इनके फोन खंगालने पर शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर से चैट, वॉयस नोट और अन्य आपत्तिजनक डिजिटल एविडेंस मिले हैं। सोशल मीडिया के जरिए हुई भर्ती भट्टी और उसके विदेशी सहयोगी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप्स के जरिए भारतीय युवाओं को नेटवर्क से जोड़ रहे हैं। नई उम्र के लड़कों को हथियार, आपराधिक लाइफ स्टाइल की चमक-दमक, मोटी रकम का लालच देकर भर्ती किया जा रहा है। इन्हें हथियारों की तस्करी, ड्रग्स सप्लाई और अन्य गतिविधियों में लगाया जा रहा है। रेकी कर पाक भेजे विडियो-फोटो पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के कई संवेदनशील और सार्वजनिक जगहों के अलावा कुछ नामी शख्सियतों की रेकी की थी। इनकी फोटो और विडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजे गए थे। दिल्ली-एनसीआर में आतंकी हमला करने का इनका मकसद भय का माहौल पैदा करना और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना था। जेल में बैठे गैंगस्टर से जुड़ा नेटवर्क आरिफ ने अजमल से एक जिगाना पिस्टल एक लाख में खरीदी थी। बैंक खातों और UPI स्कैनर से पेमेंट हुई थी। ड्रग्स की बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल नेटवर्क फैलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए कर रहे थे। मंडोली जेल में बंद गैंगस्टर दीपक अगरौला को भी नेटवर्क से जोड़ा गया। अनस ने जेल में फोन चला रहे दीपक का संपर्क अजमल से कराया। दो साल से थे टच में ACP कैलाश बिष्ट की निगरानी में बनी इंस्पेक्टर राहुल कुमार, विनीत कुमार तेवतिया और अजीत कुमार की टीम ने इनकी गिरफ्तारी की है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अनस और मोहित नवंबर 2025 से और दीपक मार्च 2026 से भट्टी-गुज्जर के टच में थे। करणवीर और आरिफ भी सीधे गुज्जर के कॉन्टैक्ट में थे। इनके बीच सैकड़ों से लेकर हजारों बार बातचीत के साक्ष्य मिले है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ हत्या, डकैती, जानलेवा हमला, आर्म्स और NDPS एक्ट जैसे केस दर्ज हैं।