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प्रशांत किशोर फिर चर्चा में: नई शर्तों के साथ राजनीति से दूरी और मौन व्रत की घोषणा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आखिरकार सामने आ ही गए। पटना में उन्होंने प्रेस वार्ता की। उन्होंने पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि हमलोगों से जरूर कुछ गलती हुई है। इसलिए ऐसा परिणाम दिया। जनता ने हमलोगों को नहीं चुना। जनता ने हमलोगों पर विश्वास नहीं दिखाया। इस हार की जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरी है। जिस प्रयास से हमलोग जुड़े थे, उनका विश्वास नहीं जीत पाया। हमलोग सामूहिक तौर पर हारे हैं। जो लोग जीतकर आए, उन्हें मैं बधाई देता हूं। सीएम नीतीश कुमार और भाजपा को बधाई। हमलोग बिहार से गरीबी दूर करने और पलायन कम होने की कामना करते हैं। मैं बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खड़ा नहीं उतर सका, इसके लिए मैं माफी चाहता हूं। प्रायश्चित के तौर पर मैं भितिहरवा गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखूंगा। जो भी जनसुराज के साथी हैं, सभी लोग भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का उपवास रखूंगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि गलती हो सकती है। लेकिन, हमने गुनाह नहीं किया है। मैं सिर उठाकर कह सकता हूं कि मैंने कोई गुनाह नहीं किया है। मैंने जातियों का जहर फैलाने का गुनाह नहीं किया। मैंने जनता का मत खरीदने की कोशिश नहीं की। जिस तरह महाभारत में अभिमन्यु को घेरकर छल से मार दिया गया। लेकिन, महाभारत नहीं जीता नहीं गया। जीत उसकी ही हुई जो धर्म के साथ थे। हमलोग फिर से खड़े होंगे। हमलोग जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं। जब तक व्यवस्था को सुधार नहीं देते तब तक पीछे नहीं हटेंगे। अब दोगुनी मेहनत से बिहार की जनता के लिए काम करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि 10 हजार रुपये की बड़ी चर्चा हो रही है। यह बात सही नहीं है। 10 हजार रुपये के लिए जनता अपने बच्चों का भविष्य नहीं बेच सकते हैं। लोगों ने सिर्फ 10 हजार रुपये के लिए अपना वोट नहीं बेचा। चुनाव आयोग पर भी टीका-टिप्पणी करने का वक्त नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र लगाया गया यह बताने में कि अगर आप एनडीए को वोट करते हैं, आप दो लाख रुपये दिया जाएगा। इसके लिए 10 हजार रुपये बयाना के तौर पर दिया गया। हर विधानसभा जीविका, आंगनबाड़ी, ममता, प्रवासी मजदूरों को करीब 29 हजार करोड़ रुपये सरकार ने बांट दिए। 40 हजार करोड़ रुपये की योजना लाई। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार से मैं अपील करता हूं कि आपने जिन्हें 10 हजार रुपये दिए, उन सभी महिलाओं को दो लाख रुपये दे दीजिए। ताकि वह अपना रोजगार खड़ा कर सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 10 हजार रुपये केवल वोट के लिए खरीदे गए। मैंने जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर मैंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही थी। मैं इस पर अब भी अडिग हूं। नीतीश कुमार को 25 सीट से ज्यादा न आनी चाहिए थी और न आती। लेकिन, 10 हजार रुपये देकर उन्होंने वोट खरीदा। मैंने आज एलान करता हूं कि अगले छह महीने में एनडीए सरकार ने 10 हजार देने वालों को दो लाख रुपये दे देगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैंने आपको शिकायत करने के लिए नंबर भी जारी कर दिया। यह चौबीसों घंटे सातों दिन चालू रहेगा। अगर आपके खाते में दो लाख रुपये छह महीने के अंदर नहीं आते हैं तो आप इस पर फोन कर जानकारी दें। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। 'मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं, इसलिए संन्यास नहीं ले सकता' वहीं जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर सन्यास लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं। इसलिए मैं किस हक से संन्यास लूं। मैंने राजनीति छोड़ने की बात कही थी। मैं इस बात पर अडिग हूं। मैंने राजनीति नहीं कर रहा हूं। नीतीश सरकार ने डेढ़ करोड़ लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए हैं। पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान पैसे बांटने दिए, यह उनकी गलती है? इस पर मैंने टिप्पणी नहीं करूंगा। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि हमलोग हारे नहीं हैं। हमलोग तो रेस में ही नहीं हैं। पीके ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी पर भी उठाया सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि मधुबनी क्षेत्र में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल कोई नहीं जानता है। लेकिन, उस क्षेत्र में सवा लाख वोट आया। जो लोग कई साल से वहां राजनीति कर रहे हैं, उन्हें हजार में वोट आया है। कई सीटें ऐसी है कि चुनाव से 10 दिन पहले तय हुआ कि इस सीट से कौन सी पार्टी चुनाव लड़ेगी? इसके बाद उस पार्टी उन सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट आया है। मेरा यही सवाल है कि ऐसी कौन सी विधा है कि यह लोग ऐसा कर दिए। हमलोग तीन साल से उस क्षेत्र में घूमे। करीब 30 प्रतिशत लोगों को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल नहीं पता था। ऐसे में एक लाख से ज्यादा वोट कैसे आ गया? यह बड़ा सवाल है। पाकिस्तान के इमरान खान का भी पीके ने दिया उदाहरण प्रशांत किशोर ने पाकिस्तानी में इमरान खान के चुनाव लड़ने के मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में इमरान खान ने करीब 25-30 साल पहले अपनी पार्टी शुरू की। उनकी पार्टी ने सात सीटों पर चुनाव लड़ी थे। सभी सीटों पर इमरान खान की पार्टी हार गई। तो मेरे चुनाव लड़ने या नहीं लड़ना फैसला एक अलग विषय है लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि पिछले तीन साल में जनसुराज ने जो भी प्रयास किया, उसे जनता ने स्वीकार नहीं किया। मुझे लालू यादव, नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी जैसे धुरंधर नेताओं की तरह बिहार की समझ नहीं है। क्योंकि, मैंने भ्रष्टाचार नहीं किया। मुझे नहीं समझ है कि बिहार को जातियों, धर्म के नाम पर बिहार को कैसे बांटा जाए? मुझे नहीं समझ है कि बिहार में 10 हजार रुपया देकर वोट कैसे खरीदे जाए।  

नक्सल विरोधी अभियान तेज, CM साय बोले— ‘अब अंत करीब है’

रायपुर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती इलाकों में जारी एंटी नक्सल ऑपरेशन को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मीडिया से चर्चा में बयान दिया. उन्होंने कहा कि करीब 2 साल होने को आया, हमारे जवान ताकत के साथ नक्सली के खिलाफ लड़ते आ रहे हैं. अब नक्सलवाद का समापन होने वाला है, वह अपनी अंतिम सांस गिन रहा है. केंद्र में हमारी (भाजपा) सरकार है, जिसका लाभ मिल रहा है. प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प अवश्य पूर्ण होगा. बिजली बिल हाफ योजना के फैसले पर सीएम साय मुख्यमंत्री साय ने बिजली बिल हाफ योजना को लेकर कहा कि मंगलवार को विधानसभा का पुराने भवन, जो 25 वर्षों तक छत्तीसगढ़ की जनता का आशा और विश्वास का प्रतीक रहा, वहां दिनभर चर्चा हुई. इसी के साथ विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई. हाफ बिजली बिल जो 100 यूनिट था, उसमें वृद्धि कर 200 यूनिट किया गया है. इसका काफी लोगों को फायदा मिलेगा, और जो बच गए हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री सूर्य मुफ्त योजना से लाभ दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि एक किलोवाट में भारत सरकार की ओर से 30 हजार रुपए और राज्य सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है. लगभग लागत का तीन चौथाई सब्सिडी के रूप में कंज्यूमर को मिलेगा. एक चौथाई उनको लगाना पड़ेगा और कुछ वर्षों में उनका पूरा लोन समाप्त हो जाएगा. उसके बाद वह मुफ्त में बिजली का इस्तेमाल कर सकेंगे. साथ ही जो बिजली उत्पन्न करेंगे वह बिजली बेच भी पाएंगे. किसानों के लिए आज सौभाग्य का दिन धमतरी में किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त अंतरण कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री साय ने  कहा कि आज का दिन हमारे छत्तीसगढ़ सहित देश के किसान भाईयों के लिए सौभाग्य का दिन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोयंबटूर से देश के 9 करोड़ किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के 18 हजार करोड़ रुपए भेजने वाले हैं. छत्तीसगढ़ के 24 लाख 70 हजार किसानों के खाते में 494 करोड़ दिए जाएंगे. उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी. साथ ही देश के प्रधानमंत्री मोदी और कृषि मंत्री शिवराज को धन्यवाद ज्ञापित किया.

रायपुर ATS की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ में ISIS नेटवर्क पर शिकंजा, FIR दर्ज

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक बड़ा आतंकी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश को एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने समय रहते विफल कर दिया है। रायपुर एटीएस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान स्थित इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) मॉड्यूल इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय किशोरों को अपने नेटवर्क में जोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस मामले में एटीएस ने सोमवार देर रात गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत पहली एफआईआर दर्ज की है। इसकी स्थापना के बाद से पहली बड़ी कार्रवाई है। सूत्रों के अनुसार, एटीएस ने दो नाबालिग लड़कों की पहचान की है, जिनकी उम्र 16 और 17 वर्ष बताई जा रही है। इनमें से एक रायपुर का रहने वाला है और दूसरा भिलाई का। खुफिया एजेंसियां इन दोनों पर पिछले डेढ़ साल से नजर रख रही थीं। जांच के दौरान इनके मोबाइल फोनों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले कई संदेश और वीडियो सामग्री मिली है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि विदेशी हैंडलर्स इन युवाओं को आतंकी विचारधारा की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए गुमराह कर रहा था ISIS मॉड्यूल जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट्स का इस्तेमाल कर भारतीय नाबालिगों से संपर्क साध रहे थे। एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, ये हैंडलर्स पहले किशोरों से दोस्ती करते, फिर धीरे-धीरे उन्हें कट्टरपंथी सामग्री भेजकर उनकी मानसिकता को प्रभावित करते थे। ग्रुप चैट्स के जरिए उन्हें जिहादी वीडियो, कथित धार्मिक संदेश और ISIS से जुड़ी गलत सूचनाएं भेजी जाती थीं। हैंडलर्स का उद्देश्य नाबालिगों को इस कदर ब्रेनवॉश करना था कि वे स्थानीय स्तर पर ISIS की जड़ें फैलाने में मदद कर सकें। इसके तहत उन्हें "अंदरूनी सूचनाएं जुटाने", "स्थानीय समर्थन आधार बनाने" और "छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल खड़ा करने" के लिए प्रेरित किया जा रहा था। एजेंसियों को मिला संदिग्ध डिजिटल सबूत एटीएस और खुफिया एजेंसियों की जांच में यह भी पाया गया कि दोनों नाबालिगों के मोबाइल में ऐसे कई चैट, नोट्स और वीडियो मौजूद हैं जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। एजेंसियों को संदेह है कि इन युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से "लोन वुल्फ" हमलों और स्थानीय स्तर पर अस्थिरता पैदा करने के तरीकों पर भी प्रभावित किया जा रहा था। एटीएस अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान स्थित ISIS नेटवर्क का यह मॉड्यूल भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए किशोरों और युवाओं को सबसे आसान निशाना मानकर उन पर फोकस कर रहा था। स्थापना के बाद ATS की पहली FIR छत्तीसगढ़ एटीएस की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी। हालांकि विशेष मामलों में आमतौर पर स्थानीय पुलिस स्टेशन के माध्यम से UAPA लागू किया जाता था, लेकिन इस बार एटीएस ने स्वयं UAPA की पहली FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई आतंकवाद-रोधी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  एटीएस अधिकारियों के अनुसार, राज्य में ऐसे अन्य संभावित संपर्कों की तलाश की जा रही है जो विदेशी आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की जांच और सख्ती बढ़ाई जाएगी। राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती छत्तीसगढ़ में आतंकवादी संगठनों की ऑनलाइन घुसपैठ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाने की यह नई रणनीति युवा वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रही है, जिसे रोकने के लिए एटीएस और साइबर सेल मिलकर रणनीतिक कदम उठा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की एजेंसियां अधिक सतर्क हो गई हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठनों की घुसपैठ रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल की यह साजिश बेनकाब होना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

भोपाल:मुंह पर गमछा बांधकर कैफे में टूटे 20 बदमाश, तलवार-डंडों से मचाई दहशत

 भोपाल राजधानी भोपाल में एक बार फिर बदमाशों के हौसले बुलंद हो गए हैं. शहर के होशंगाबाद रोड स्थित मैजिक स्पॉट कैफे में बदमाशों ने जमकर तोड़फोड़ की. पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.  मिसरोद थाना इलाके में मैजिक स्पॉट कैफे संचालक सक्षम गोस्वामी ने बताया कि मंगलवार शाम 7:00 बजे करीब 20 से 25 बदमाश मुंह पर कपड़ा बांध अपने हाथों में डंडे, तलवार, बेसबॉल डंडा लेकर आए और दुकान का फर्नीचर, कांच का सामान फोड़कर चले गए. एक कर्मचारी को हाथ में तलवार भी लगी है. साथ ही एक ग्राहक को डंडा मारा था, जिससे उसकी उंगली फैक्चर हो गई.  कैफे संचालक ने बताया, ''मेरा कभी किसी से कोई भी विवाद नहीं हुआ. पुलिस में FIR दर्ज कराई है, जिसमें पुलिस ने बलवा, तोड़फोड़ मारपीट की धाराएं लगाकर हमको मदद का आश्वासन दिया है. ये गुंडे हाथों में तलवारें, डंडे और अन्य हथियार लेकर कैफे के अंदर घुस आए. उन्होंने वहां जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी. कैफे का काउंटर तोड़ दिया, कांच के शीशे चकनाचूर कर दिए, फर्नीचर को तहस-नहस कर दिया. डिस्प्ले में रखी चीजें और मशीनें भी नहीं बख्शीं. सब कुछ तोड़ते-फोड़ते हुए ये बदमाश चिल्ला रहे थे और डर का माहौल बना रहे थे. कैफे में मौजूद कर्मचारियों को भी इन गुंडों ने नहीं छोड़ा. उन्होंने स्टाफ के साथ मारपीट की. डंडों और तलवारों से हमला किया, जिससे कई कर्मचारी घायल हो गए. कैफे में उस समय कुछ ग्राहक भी मौजूद थे. जैसे ही तोड़फोड़ शुरू हुई, ग्राहक अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे. कोई बाहर की ओर भागा, तो कोई छिपने की कोशिश करने लगा. पूरा कैफे अफरा-तफरी से भर गया. यह पूरी घटना कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई. वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे नकाबपोश बदमाश एक-एक करके चीजें तोड़ रहे हैं. काउंटर पर कूदकर सामान फेंक रहे हैं, ग्लास फोड़ रहे हैं और फर्नीचर पर डंडे बरसा रहे हैं. यह फुटेज सामने आने के बाद इलाके में दहशत फैल गई. लोग सहम गए कि इतनी बड़ी संख्या में गुंडे दिनदहाड़े कैसे हमला कर सकते हैं. कैफे के मालिक बहुत डर गए. उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की. मिसरोद थाने में जाकर उन्होंने एफआईआर दर्ज करवाई. मालिक ने बताया कि यह हमला किसी पुरानी रंजिश या फिर जबरन वसूली की वजह से हो सकता है. उन्होंने कुछ नामों का जिक्र किया. एफआईआर में योगी, निखिल, अभिषेक और कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए. पुलिस ने इन नामों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है. अब पुलिस जांच कर रही है. सीसीटीवी फुटेज की मदद से बदमाशों की पहचान करने की कोशिश हो रही है. इलाके में लोगों का कहना है कि गुंडागर्दी बढ़ रही है, पुलिस को सख्ती दिखानी चाहिए. नया कैफे खुला था, लोग खुशी-खुशी आते थे, लेकिन इस घटना ने सबको डरा दिया. उम्मीद है कि जल्दी ही सभी आरोपी पकड़े जाएंगे और कैफे मालिक को न्याय मिलेगा.यह घटना बताती है कि शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है. आम लोग सुरक्षित महसूस करें, इसके लिए पुलिस को सक्रिय रहना होगा. दो संदेही उठाए, पूछताछ कर रही पुलिस डीसीपी विवेक सिंह ने बताया कि एफआईआर में जिन नामों का जिक्र था, उनमें से दो को राउंड अप कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। हमने 2 संदेहियों को उठाया है। उनके बयान लिए जा रहे हैं। अभी वजह स्पष्ट नहीं है, रंजिश थी या कोई पुराना विवाद, इसकी पड़ताल की जा रही है। तीन थानों की संयुक्त टीमें लगीं हमले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने तीन थानों की संयुक्त टीमें लगाई हैं। जिसमें मिसरोद, बागसेवनिया और कटारा हिल्स शामिल हैं विवेक सिंह ने बताया, तीनों थानों की टीमें अलग-अलग एंगल पर जांच कर रही हैं। फुटेज, शक के आधार, रूट मैप, और संभावित विवादों को लेकर जांच की जा रही है। हमलावरों ने अपने चेहरे बांध रखे थे, जिससे पहचान में दिक्कत हो रही है। लेकिन पुलिस को कुछ क्लू मिले हैं, जिन पर टीमें काम कर रही हैं। कैफे संचालक सक्षम गिरि ने योगी, निखिल, अभिषेक समेत पांच नामजद और अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई है।   डीसीपी जोन 2 विवेक सिंह ने बताया कि मैजिक स्पॉट कैफे में कुछ बदमाशों ने तोड़फोड़ की है. कैफे संचालक शुभम गोस्वामी ने थाने जाकर FIR दर्ज कराई है. तत्काल पुलिस ने मारपीट, बलवा, आर्म्स एक्ट की धारा लगाकर जांच शुरू कर दी है.  पुलिस अफसर ने बताया कि कई थानों की टीम बदमाशों को पकड़ने के लिए लगाई हुई है. कैफे मालिक की तरफ से अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसकी किसी से पुरानी रंजिश है या नहीं. कैफे संचालक ने कुछ संदेहियों के फोटो दिए हैं, उसी के आधार पर दो से तीन लोगों को पुलिस ने राउंडअप किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

20 को शपथ समारोह: BJP-JDU के बराबर मंत्री, चिराग–मांझी–कुशवाहा की पार्टियों को मिला प्रतिनिधित्व

पटना बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेतृत्व में नई सरकार की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कैबिनेट की बैठक के बाद राज्यपाल इस्तीफा सौंपेंगे और इसके बाद नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। 20 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके समेत कुल 36 मंत्री नई सरकार में मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इसका फॉर्मूला तय हो चुका है। एनडीए के सभी घटक दल के नेता नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री आवास पर जाकर मिल चुके हैं। नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाईटेड से 16, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। 24 से 48 घंटे में सभी पार्टियां अपने-अपने मंत्रियों की सूची फाइनल कर लेगी।   दिल्ली में हुई थी एनडीए के वरिष्ठ नेताओं की बैठक दरअसल, रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी के एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई थी। इसमें नई सरकार के रूपरेखा पर बातचीत हुई। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह के साथ जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की बैठक में किस पार्टी के कितने मंत्री होंगे? यह तय हो चुका है। इधर, एनडीए के घटक दल अपने-अपने विधायक दल के नेता चुनने की कवायत में लगे हैं। चिराग पासवान ने अपने दल का नेता राजू तिवारी को चुना है। जानिए, क्या है फॉर्मूला मंत्री बनाने का दिल्ली में पीएम मोदी के साथ हुई बैठक में छह विधायकों पर एक मंत्री बनाने का फॉर्मूला तय हुआ है। इसके आधार पर जदयू के खाते में सीएम नीतीश कुमार समेत 16 मंत्री, भाजपा के खाते में दो डिप्टी सीएम समेत 16 मंत्री, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के खाते में दो मंत्री पद देने की बात सामने आ रही है। हालांकि, चिराग की पार्टी के नेता अपने खाते में तीन मंत्री चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर छह विधायकों के फॉर्मूले को मनाना है तो उस हिसाब से उनके 19 विधायक हैं। इसलिए तीन मंत्री का पद देना ज्यादा बेहतर होगा। राजनीतिक पंडितो का कहना है कि विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए वह दो सीएम सीएम समेत 16 मंत्री को शपथ दिला सकती है। वहीं जदयू को सीएम पद के साथ 15 मंत्री शपथ दिला सकते हैं। अगर जदयू 15 पर मान लेती है तो इसका फायदा चिराग को मिलेगा। इस स्थिति में चिराग की पार्टी में तीन मंत्री शपथ ले पाएंगे। जानिए किस पार्टी के कितने विधायक एनडीए ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया। इसमें भाजपा ने अधिकतम 89 सीटें जीतीं, उसके बाद जदयू ने 85 सीटें जीतीं, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने 19 सीटें हासिल की। वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा से पांच और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से चार विधायक बने। 

स्वास्थ्य विभाग में उथल-पुथल: प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर विवाद बढ़ा, मंत्री ने दी प्रतिक्रिया

जयपुर सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सभी अस्पतालों के अधीक्षकों ने सोमवार को सामूहिक रूप से अपने इस्तीफ़े कॉलेज प्रिंसिपल को सौंप दिए। यह कदम चिकित्सा शिक्षा विभाग के हालिया आदेश के विरोध में उठाया गया, जिसमें कहा गया था कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल, नियंत्रक और संबद्ध अस्पतालों के अधीक्षक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का चिकित्सकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। अधीक्षकों का कहना है कि यह निर्णय वरिष्ठ चिकित्सकों के अधिकारों का हनन है। आदेश के बाद राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) भी खुलकर विरोध में उतर आया है। एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि इस तरह का आदेश क्यों जारी किया गया और इसके पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है, इसकी स्पष्टता नहीं है। मंत्री बोले- अभी इस्तीफ़े नहीं मिले, मांगें हुईं थीं… मामले पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि उन्हें अब तक किसी अधीक्षक का इस्तीफ़ा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों ने कुछ मांगें रखी थीं, जिन पर सरकार विचार कर रही है। मंत्री ने संकेत दिया कि यदि मांगें उचित लगती हैं तो उन पर निर्णय लिया जाएगा। चिकित्सा मंत्री ने यह भी कहा कि प्राचार्य और अधीक्षक जैसे पद पूर्णकालिक प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए होते हैं। यदि ये अधिकारी OPD चलाने और निजी तौर पर मरीज देखने में व्यस्त रहेंगे तो अस्पताल के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकार ने यह आदेश जारी किया है। अलग से प्रशासक नियुक्त करने के संकेत मंत्री खींवसर ने कहा कि यदि प्राचार्य और अधीक्षक केवल मरीज देखना चाहते हैं और प्रशासनिक दायित्व निभाने में रुचि नहीं रखते, तो सरकार मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अलग से एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारी नियुक्त करने पर विचार कर सकती है। क्या है विवादित आदेश? 11 नवंबर को जारी आदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं—     मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल और अधीक्षक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।     डॉक्टर सीधे प्रिंसिपल नहीं बनाए जा सकेंगे।     प्रिंसिपल पद के लिए 3 वर्ष अधीक्षक/अतिरिक्त प्रिंसिपल और 2 वर्ष HOD का अनुभव अनिवार्य।     प्रिंसिपल चयन के लिए 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई।     प्रिंसिपल और अधीक्षक को क्लीनिकल कार्य सिर्फ 25% तक सीमित किया गया।     दोनों पदाधिकारियों को यूनिट हेड या HOD नहीं बनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के इस परिवर्तनकारी निर्णय के बाद पूरे राज्य में चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छिड़ गई है।

फर्जी RAW अफसर ने जज को छल किया, ग्रेटर नोएडा में हुआ गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ)की टीम ने बुधवार तड़के एक फर्जी रॉ अधिकारी को गिरफ्तार किया है। वह कहीं खुद को रॉ अधिकारी और कहीं पर खुद को आर्मी का मेजर बताकर रहता था। इसने खुद को रॉ अधिकारी बताकर एक महिला जज को झांसे में ले लिया और उनसे सादी कर ली। पत्नी बिहार के छपरा में तैनात हैं। वहीं आरोपी एक कंपनी बनाकर लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करने की योजना बना रहा था। कंपनी से संबंधित दस्तावेज भी एसटीएफ ने बरामद किया है। फर्जी अफसर के पास से भारी मात्रा में फेक आईडी, चेक बुक, फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन पत्र, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पैन कार्ड ,आधार कार्ड, वोटर आई कार्ड आदि बरामद हुआ है। एसटीएफ और गुप्तचर एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी इससे गहनता से पूछताछ कर रहे हैं। इसके टैब में दिल्ली ब्लास्ट से संबंधित वीडियो भी बरामद हुई है। अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ (नोएडा यूनिट) राजकुमार मिश्रा ने बताया कि बीती रात को उप निरीक्षक अक्षय परमवीर कुमार त्यागी और उनकी टीम को सूचना मिली कि एक व्यक्ति जो कि कभी स्वयं को मेजर अमित और कभी खुद को डायरेक्टर रॉ बताकर अलग-अलग सोसाइटी में रहता है। वह संदिग्ध है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट की वजह से इस सूचना को गंभीरता से ली गई। एक टीम बनाकर पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसायटी ग्रेटर नोएडा में छापेमारी की गई। जब टीम सोसाइटी के उस फ्लैट में पहुंची जहां पर कथित रॉ अधिकारी रहता था तो दरवाजा एक महिला ने खोला। इसी बीच एक व्यक्ति वहां पर आ गया। उसने अपना नाम सुनीत कुमार पुत्र स्वर्गीय बृजनंदन शाह बताया। उसके हाथ में पकड़े हुए पर्स की तलाशी ली गई तो उसमें एक आई कार्ड केबिनेट सेक्रेट्रिएट गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का मिला। जिसपर सुमित कुमार आईसी 7623 बी, रैंक जॉइंट सेक्रेटरी, डेजिग्नेशन डायरेक्टर (ऑपरेशन), जेआईसी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, पुश्त पर सर्विस रिसर्च एंड एनेलसिस सर्विस, ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव, जन्मतिथि 25 मार्च 1988, पिता का नाम बृजनंदन शाह अंकित है। शक होने पर एसटीएफ ने रॉ के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। जब वे लोग मौके पर आए तो उन्होंने जांच किया। पता चला कि इस नाम का कोई भी व्यक्ति उनके विभाग में कार्यरत नहीं है। जो आई कार्ड उसके पास से बरामद हुआ है वह फर्जी है। उन्होंने बताया कि जिस फ्लैट में उक्त व्यक्ति रह रहा था उसके मकान मालकिन मंजू गुप्ता से जब संपर्क किया गया तो, उन्होंने कहा कि उनके यहां किराएदार मेजर अमित कुमार हैं। उन्होंने अपना पुलिस वेरिफिकेशन दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर के लेटर हेड पर मेजर अमित कुमार के नाम से करवाकर उपलब्ध करवाया है। उन्होंने बताया कि मंजू गुप्ता ने उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए वेरिफिकेशन की कॉपी वॉट्सऐप के माध्यम से भेजी। उन्होंने बताया कि उक्त सुनीत की पत्नी छपरा बिहार में न्यायिक मजिस्ट्रेट है, उनसे फोन करके जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पति गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं, और गोपनीय नियुक्ति पर हैं। उन्होंने बताया कि उक्त व्यक्ति के पास से काफी फर्जी अभिलेख बरामद हुए हैं। जिनमें मुख्य रूप से दो फर्जी आईडी, 20 चेक बुक, दिल्ली पुलिस की फर्जी वेरीफिकेशन लेटर,8 क्रेडिट/ डेबिट कार्ड, एक डायरी, 17 एग्रीमेंट, 5 पैन कार्ड, दो आधार कार्ड, तीन वोटर आईडी कार्ड, दो फार्म वोटर आईडी कार्ड, दो कंपनी संबंधित रजिस्ट्रेशन कागजात, आईटीआर के कागजात, बैंक स्टेटमेंट, 3 लैपटॉप, दो टेबलेट आदि बरामद हुआ है। उन्होंने बताया कि उक्त आरोपी के टैब से दिल्ली ब्लास्ट से संबंधित वीडियो भी बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि अभियुक्त सुमित कुमार को एसटीएफ ने आज सुबह गिरफ्तार कर लिया। इसके खिलाफ थाना सूरजपुर मे भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2),318(4),338,336(3), 340, 66 डी (सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008, के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

साइबर फ्रॉड का बढ़ता कहर: हरियाणा में हर महीने 40 करोड़ से अधिक की चोरी

गुरुग्राम  हरियाणा में साइबर फ्रॉड का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में राज्य ने डिजिटल धोखाधड़ी के कारण ₹850 करोड़ का नुकसान झेला, जिसमें केवल गुरुग्राम ने कुल मामलों का 20 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया। यह जानकारी पीएस साइबर मानेसर के सब-इंस्पेक्टर विकास बेनीवाल ने “नॉक आउट डिजिटल फ्रॉड” नामक राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम में दी, जिसे हरियाणा पुलिस और बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल) द्वारा संयुक्त रूप से गवर्नमेंट कॉलेज, सिधरावली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के लगभग 250 छात्र और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी पर विस्तार से बताते हुए बेनीवाल ने कहा, “लोगों के शिकार होने की सबसे बड़ी वजह है—अज्ञानता, लालच और भय। फ्रॉडस्टर डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट स्कैम और टास्क-बेस्ड फ्रॉड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को अलग-थलग कर देते हैं, उनकी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं और उनकी जीवन भर की कमाई साफ कर देते हैं। जब भी कोई व्यक्ति आपसे पैसे या बैंक डिटेल मांगता है, तो बिना किसी संदेह के समझ लें कि वह फ्रॉडस्टर है। जागरूकता ही असली सुरक्षा है।” उन्होंने आगे कहा, “गुरुग्राम में ही 2024 में 25,000 से अधिक साइबरक्राइम मामले दर्ज हुए हैं। साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में पीड़ित को तुरंत साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि इससे खोए हुए पैसे की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। पहले तीन घंटे इस तरह के मामलों में ‘गोल्डन पीरियड’ माने जाते हैं।” उन्होंने बताया कि अब तक रिपोर्ट हुए मामलों में 5,000 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। 2024-25 में हरियाणा पुलिस ने साइबर फ्रॉड मामलों से ₹100 करोड़ की रिकवरी की है। पूरे भारत में इसी अवधि में साइबर धोखाधड़ी के कारण नुकसान ₹22,800 करोड़ से अधिक पहुंच गया है—जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40% अधिक है। जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजेशपाल ने कहा, “हमारा देश तरक्की कर रहा है, और जैसे-जैसे हम मजबूत बन रहे हैं, साइबर फ्रॉड हमारे खिलाफ एक आर्थिक युद्ध का रूप ले चुका है। इसलिए राष्ट्रव्यापी धोखाधड़ी जागरूकता बेहद जरूरी है। आपको सतर्क रहना चाहिए और आकर्षक ऑफर्स, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया के जाल से खुद को बचाना चाहिए। फ्रॉडस्टर विदेशों से काम करते हैं और हमारी लापरवाही का फायदा उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “अपनी बैंक डिटेल साझा न करके, हर कदम से पहले सत्यापन करके और सतर्क रहकर कोई भी आसानी से साइबर फ्रॉड से खुद को बचा सकता है।” पीएस साइबर मानेसर, हरियाणा के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार ने कहा, “आज साइबर फ्रॉड एक व्यवसाय बन चुका है, जो देशभर में विभिन्न क्लस्टर्स के माध्यम से संचालित होता है। संचार और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ हमारी कमजोरियां भी बढ़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है—जागरूकता। यदि आपको कभी साइबर फ्रॉड का संदेह हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से ट्रांज़ैक्शन रोकने की संभावना काफी बढ़ जाती है। एक्सेस साझा न करें, संदिग्ध एपीके फाइलों से बचें, और हर प्लेटफॉर्म पर एक ही नंबर लिंक न करें।” इस अवसर पर गवर्नमेंट कॉलेज सिधरावली के प्रोफेसर पी.के. मलिक ने कहा, “भारत का युवा विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सतर्क और जानकारी पूर्ण रहकर वे अपने परिवारों और समुदायों की रक्षा कर सकते हैं।” बजाज फाइनेंस लिमिटेड (बीएफएल), जो भारत का सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है और बजाज फिनसर्व का हिस्सा है, एक राष्ट्रव्यापी वित्तीय साक्षरता और साइबर फ्रॉड जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल उपयोगकर्ताओं को विभिन्न तरह के खतरों के बारे में जानकारी देना और वित्तीय सुरक्षा के सर्वोत्तम उपाय सिखाना है। यह राष्ट्रव्यापी अभियान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 2024 के फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें प्रारंभिक पहचान, स्टाफ जवाबदेही और जनसहभागिता को डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यह कार्यक्रम व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान करता है। इसमें ओटीपी, पिन साझा न करना, संदिग्ध ईमेल, एसएमएस, लिंक, क्यूआर कोड से बचना और अज्ञात स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करने की सलाह शामिल है। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव वर्कशॉप, डिजिटल अवेयरनेस ड्राइव और प्रमुख शहरों एवं कस्बों में सामुदायिक पहुंच गतिविधियाँ शामिल हैं। यह पहल उन सामान्य वित्तीय धोखाधड़ियों पर ध्यान आकर्षित करती है, जो फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप ग्रुप और ऐसी वेबसाइटों के माध्यम से की जाती हैं, जो वित्तीय कंपनियों जैसी लगती हैं और उनके कर्मचारियों का झूठा प्रतिरूपण करती हैं।

सरकार पर निर्भरता कम करें, परियोजना निर्धारित करते समय आय सृजन की संभावनाओं का भी रखें ध्यान: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन की विकास कार्ययोजना की समीक्षा की परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए रेवेन्यू शेयरिंग और पीपीपी मॉडल अपनाने पर जोर सरकार पर निर्भरता कम करें, परियोजना निर्धारित करते समय आय सृजन की संभावनाओं का भी रखें ध्यान: मुख्यमंत्री तीनों शहरों में 478 विकास परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार मेरठ में बिजली बम्बा बाईपास को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश यातायात सुधार, मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट रोड और शहरी सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता कानपुर और मथुरा वृंदावन में विरासत, संस्कृति और पर्यटन आधारित विकास मॉडल लागू होगा जनहित से जुड़े कार्यों के लिए धनराशि की कमी नहीं होगी, जरूरत पड़ेगी तो अतिरिक्त बजट भी मिलेगा: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र नगरीय विकास की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इन नगरों का विकास केवल सड़कों और इमारतों के निर्माण तक सीमित न हो, बल्कि उनका स्वरूप ऐसा बने जिसमें स्थानीय पहचान, इतिहास, संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन दिखे। उन्होंने निर्देश दिया कि योजनाएं चरणबद्ध ढंग से लागू हों, कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे किए जाएं और नागरिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ दिखे। मुख्यमंत्री ने मेरठ में प्रस्तावित बिजली बम्बा बाईपास को लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर पीपीपी मोड में विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तीनों मंडलों के मंडलायुक्तों ने बारी-बारी से अपनी कार्ययोजना से अवगत कराया। बताया गया कि अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज की तर्ज पर अब मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के लिए भी समेकित विकास मॉडल अपनाया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों से विमर्श और विभागों के बीच समन्वय के आधार पर इन शहरों में कुल 478 परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें मेरठ में 111, कानपुर में 109 और मथुरा-वृंदावन में 258 परियोजनाओं का विकास प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणी में विभाजित कर स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। बैठक में बताया गया कि पहले चरण की कार्ययोजना के रूप में वर्ष 2025-26 में मेरठ में 11, कानपुर में 13 और मथुरा-वृंदावन में 14 प्राथमिक परियोजनाओं पर कार्य किया जाए। इन परियोजनाओं में यातायात सुधार, चौराहों का पुनर्विकास, मल्टीलेवल पार्किंग, हरित क्षेत्र, सड़क और पेवमेंट सुधार, बिजली लाइनों का भूमिगतकरण, जल प्रबंधन, पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन और शहरी सौंदर्यीकरण जैसी जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में बताया गया कि मेरठ में यातायात सुगमता के लिए बिजली बम्बा बाईपास, लिंक रोड, हापुड़ अड्डा से गांधी आश्रम तक चौड़ीकरण, ईस्टर्न कचहरी रोड, सूरजकुंड चौराहा, क़य्यम नगर पार्क, 19 प्रमुख चौराहों पर जंक्शन इम्प्रूवमेंट, संजय वन, शताब्दी नगर एसटीपी से मोहकमपुर औद्योगिक क्षेत्र तक जल पुनर्चक्रण व्यवस्था, स्मार्ट रोड और यूनिवर्सिटी रोड क्षेत्रीय पुनर्विकास जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। कानपुर के संबंध में बताया गया कि विकास का आधार “रूटेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो” की अवधारणा होगी। मैनावती मार्ग चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग, मास्टर प्लान सड़कों का निर्माण, ग्रीन पार्क के आसपास शहरी डिजाइन सुधार, मकसूदाबाद सिटी फॉरेस्ट, बोटैनिकल गार्डन, वीआईपी रोड, रिवरफ्रंट लिंक, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, मेट्रो विस्तार और ग्रेटर कानपुर के रूप में नए विस्तार क्षेत्र की दृष्टि इस योजना में शामिल है। मथुरा-वृंदावन के लिए प्रस्तुत मास्टर प्लान के तहत शहर को 'विजन-2030' के रूप में विकसित करने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए स्ट्रीट फसाड डेवलपमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, बस पार्किंग, प्रवेश द्वारों का सौंदर्यीकरण, नए मार्गों का निर्माण, बरसाना-गोवर्धन-राधाकुंड कॉरिडोर सुधार, परिक्रमा मार्ग पर सुविधाएं और नगर प्रवेश से धार्मिक स्थलों तक संकेतक एवं प्रकाश व्यवस्था की योजना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए नवाचार, बेहतर प्रबंधन और वित्तीय संयोजन पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर निजी क्षेत्र का सहयोग लेने और जहां संभव हो वहां पीपीपी मोड अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य ऐसा शहरी ढांचा तैयार करना है जो यातायात को सुगम बनाए, पैदल यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे, हरे-भरे शहरों की दिशा में आगे बढ़े और स्थानीय पहचान को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए यदि अतिरिक बजट की आवश्यकता होगी तो उसे उपलब्ध कराया जाएगा।

₹39453 लाख की परियोजनाओं से 36 हजार हेक्टेयर में पुनर्स्थापित होगी सिंचाई क्षमता

नहर व्यवस्था सुधार के लिए 95 नई परियोजनाओं को मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी ₹39453 लाख की परियोजनाओं से 36 हजार हेक्टेयर में पुनर्स्थापित होगी सिंचाई क्षमता मुख्यमंत्री का निर्देश सभी परियोजनाएं तय समय सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरी हों अनुपयोगी भूमि के उपयोग के लिए विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश सिंचाई सुधार कार्यक्रम से करीब 9 लाख किसानों को होगा सीधा लाभ सिंचाई एवं जल प्रबंधन और अन्नदाता किसान हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक में नहर व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से 95 नई परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं प्रदेश के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों को समयबद्ध सिंचाई उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कुल ₹39453.39 लाख की लागत वाली इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर 36 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता पुनर्स्थापित होगी, जिससे लगभग 9 लाख किसान और ग्रामीण आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही 273 हेक्टेयर विभागीय राजकीय भूमि को संरक्षित किया जा सकेगा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण हों और गुणवत्ता पर किसी भी स्थिति में समझौता न किया जाए। बैठक में बताया गया कि नहर पुनर्स्थापना से जुड़ी इन 95 परियोजनाओं में नहर प्रणाली के गैप्स में नहर निर्माण, हेड रेगुलेटर, क्रॉस रेगुलेटर, साइफन, फॉल तथा अन्य पक्की संरचनाओं का निर्माण शामिल है। नहरों के आंतरिक एवं बाह्य सेक्शन के सुधार, फिलिंग रीच में लाइनिंग के कार्य, क्षतिग्रस्त कुलाबों के पुनर्निर्माण, नहरों पर पुल-पुलियों के निर्माण एवं मरम्मत तथा नहर पटरियों पर खड़ंजा निर्माण को भी परियोजनाओं में शामिल किया गया है। निरीक्षण भवनों, कार्यालय भवनों तथा नहरों पर निर्मित पनचक्कियों के जीर्णोद्धार के साथ ही विभागीय भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवाल निर्माण भी प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से सिंचाई नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुचारू होगी, विशेष रूप से पूर्वांचल, तराई, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को इनसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण नहीं बल्कि जल प्रबंधन की दक्षता, किसान हित, कृषि उत्पादन वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी किसान सिंचाई के अभाव में अपनी फसल प्रभावित न होने पाए।  मुख्यमंत्री ने बैठक में विभाग को अनुपयोगी पड़ी भूमि के सर्वेक्षण और उसके सदुपयोग हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय भूमि का सुविचारित उपयोग विभाग की आय संवर्द्धन में सहायक होगा।  बैठक में मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रबंधन से जुड़े कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि आगामी वर्ष की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां जनवरी माह से प्रारंभ कर दी जाएं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि समय रहते आगे की कार्यवाही सुनिश्चित हो सके।