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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण

आदिवासी वीर नायकों को समर्पित देश का पहला डिजिटल संग्रहालय रायपुर छत्तीसगढ़ की धरती पर 1 नवम्बर को इतिहास रचा जाएगा, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर देश के पहले डिजिटल ट्राइबल म्यूज़ियम शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण करेंगे। यह भव्य संग्रहालय उन आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है, जिन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध अपने प्राणों की आहुति दी और छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा की। आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा जहां देशभर के आदिवासियों के प्रेरणापुंज हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में सोनाखान के ज़मींदार वीर नारायण सिंह ने फिरंगियों के विरुद्ध बिगुल फूंका था। उन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शहीद वीर नारायण सिंह और अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले आदिवासी नायकों की स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से नवा रायपुर में इस अद्वितीय संग्रहालय की स्थापना का निर्णय लिया। 50 करोड़ की लागत से बना अनूठा डिजिटल संग्रहालय नवा रायपुर के सेक्टर-24 में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है। इसकी डिज़ाइन, अवधारणा और तकनीकी संरचना आधुनिकतम मानकों पर आधारित है। संग्रहालय में अत्याधुनिक वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन सिस्टम, डिजिटल स्क्रीन, और मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे आगंतुक हर कथा को डिजिटल माध्यम से अनुभव कर सकेंगे। आदिवासी विद्रोहों की जीवंत कहानी – 14 सेक्टरों में सजा इतिहास संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी आंदोलनों—हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह—की जीवंत झलक दिखाई जाएगी। इन ऐतिहासिक विद्रोहों को 14 सेक्टरों में विभाजित कर प्रस्तुत किया गया है, ताकि दर्शक हर संघर्ष और उसकी प्रेरक गाथा को समझ सकें। संग्रहालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह का भव्य स्मारक भी बनाया गया है। यह स्मारक न केवल श्रद्धांजलि का स्थल होगा, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। प्रवेश द्वार पर सरगुजा के कलाकारों द्वारा तैयार की गई सुंदर नक्काशीदार पैनलें लगाई गई हैं। वहीं परिसर में 1400 वर्ष पुराने साल, महुआ और साजा वृक्ष की प्रतिकृतियाँ स्थापित की गई हैं, जिनकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों की डिजिटल कहानियाँ उकेरी गई हैं। सुविधाओं से सुसज्जित आधुनिक परिसर संग्रहालय में सेल्फी प्वाइंट, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएँ, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, और भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। ये सभी तत्व संग्रहालय को एक जीवंत सांस्कृतिक और भावनात्मक अनुभव का केंद्र बनाते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इन पहलों के अंतर्गत आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा  शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण छत्तीसगढ़ की रजत जयंती वर्ष के एक ऐसे क्षण के रूप में दर्ज होगा जो इतिहास, परंपरा और आधुनिकता को एक सूत्र में पिरो देगा।

राष्ट्रीय एकता दिवस पर राज्यपाल गंगवार ने किया सरदार पटेल को याद, एकता और समरसता का दिया संदेश

रांची झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल गंगवार ने आज राजभवन में महान स्वतंत्रता सेनानी व आधुनिक भारत के शिल्पकार तथा भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल ने कहा कि सरदार पटेल ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और रियासतों के एकीकरण के माध्यम से आधुनिक भारत की सुदृढ़ नींव रखी। उनका जीवन, त्याग और नेतृत्व देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा। राज्यपाल ने इस अवसर पर समस्त राज्यवासियों को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, 'महान स्वतंत्रता सेनानी और देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती पर शत-शत नमन। देश की एकता और अखंडता को सशक्त आधार प्रदान करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल जी का योगदान सदियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।'  

डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में नई उड़ान भरेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

“अभ्युदय मध्यप्रदेश” – एक नवंबर को 70वां स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को मिलेंगी सौगातें रवीन्द्र भवन में होगा राज्य स्तरीय समारोह भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के गौरवशाली 70वें स्थापना दिवस पर राज्य सरकार डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भी नई उड़ान भरने जा रही है। नागरिकों और निवेशकों को सशक्त बनाने के लिए तीन नई डिजिटल पहल शुरू होंगी। इनमें “MP ई-सेवा पोर्टल” के माध्यम से नागरिकों को एक ही मंच पर सभी सरकारी सेवाएँ सरल और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होंगी। “Invest MP 3.0” पोर्टल निवेशकों के लिए एक उन्नत सिंगल विंडो सिस्टम के रूप में कार्य करेगा, जिससे निवेश की प्रक्रिया और अधिक सहज व समयबद्ध बनेगी। वहीं “Wash on Wheels” मोबाइल ऐप युवाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ते हुए शहरी स्वच्छता सेवाओं में नई तकनीकी ऊर्जा जोड़ेगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश निवेश उपलब्धियों, औद्योगिक प्रगति और रोजगार सृजन के विजन पर अपने विचार साझा करेंगे। इस अवसर पर “द टू-ईयर जर्नी” शीर्षक से एक विशेष ऑडियो-विजुअल का प्रदर्शन किया जायेगा जिसमें विगत दो वर्षों की राज्य की निवेश प्रोत्साहन यात्रा और उपलब्धियों का जीवंत चित्रण होगा। अभ्युदय मध्यप्रदेश का यह राज्य स्तरीय समारोह 1 नवम्बर 2025 को भोपाल के रवींद्र भवन में सुबह 11:30 बजे से होगा। यह केवल उत्सव नहीं बल्कि प्रदेश की सशक्त विकास यात्रा उपलब्धियों और आने वाले वर्षों के संकल्पों का प्रतीक बनेगा। कार्यक्रम में प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देने के लिए विमानन क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत की जाएगी। इनमें उज्जैन हवाई अड्डे के विकास अनुबंध पर हस्ताक्षर, रीवा–नई दिल्ली और रीवा–इंदौर फ्लाइट के लिए अनुबंध तथा प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा के अनुबंध शामिल हैं। इन पहलों से राज्य के औद्योगिक, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई उड़ान मिलेगी। “अभ्युदय मध्यप्रदेश” राज्य सरकार की नीति, दृष्टि और प्रतिबद्धता का ऐसा संगम होगा, जिसमें प्रदेश के विकास के साथ भविष्य की दिशा का स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भारत @2047” के विजन से प्रेरित होकर “समृद्ध मध्यप्रदेश 2047” के संकल्प को नई गति दे रही है। यह आयोजन उसी दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है जो यह संदेश देगा कि मध्यप्रदेश दृढ़-संकल्प शक्ति के साथ लगातार बढ़ रहा है। समारोह में केंद्रीय मंत्रियों, नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के उच्च पदाधिकारियों की उपस्थिति भी रहेगी। कार्यक्रम में विधि एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू, उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. सुमन के. बेरी, मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप तथा अदानी ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री प्रणव अदानी सहित आंध्रप्रदेश से आने वाले गणमान्य अतिथि और उद्योग प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन राज्य की विकास यात्रा एवं भविष्य की रूपरेखा पर अपने विचार साझा करेंगे। कार्यक्रम में “समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” दृष्टि-पत्र का विमोचन किया जाएगा जो प्रदेश के दीर्घकालिक विकास का रोडमैप प्रस्तुत करेगा। यह दस्तावेज़ एक ऐसे मध्यप्रदेश की परिकल्पना करता है जो नागरिकों के जीवन की सुगमता और गुणवत्ता पर केंद्रित, निवेश और रोजगार सृजन के अवसरों से सम्पन्न तथा परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से सशक्त सांस्कृतिक राज्य के रूप में आगे बढ़े। “अभ्युदय मध्यप्रदेश” स्थापना दिवस आत्मविश्वास, नवाचार और प्रगति की नई उड़ान का प्रतीक बनेगा। यह आयोजन उस भावना का उत्सव है जो कहती है, मध्यप्रदेश न केवल अपनी विरासत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य को और उज्ज्वल बनाने के लिए पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।  

रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया गौरव – प्रधानमंत्री मोदी करेंगे भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण

छत्तीसगढ़ विधानसभा का नया भवन : परंपरा और आधुनिकता का संगम रायपुर, छत्तीसगढ़ के इतिहास में 1 नवम्बर का दिन एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्य की जनता को विधानसभा का नया भवन समर्पित करेंगे। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद रायपुर के राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा को 25 वर्षों के बाद रजत जयंती वर्ष में अपना भव्य, आधुनिक और पूर्ण सुविधायुक्त स्थायी भवन मिलने जा रहा है। यह भवन केवल एक खूबसूरत इमारत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है। ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की वास्तुकला में बखूबी पिरोया गया है। विधानसभा के सदन की सीलिंग पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। भवन के ज्यादातर दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं। इस तरह नया विधानसभा भवन आधुनिकता और परंपरा का एक जीवंत संगम बन गया है। भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक भवन नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और सुसज्जित भवन है, जिसके सदन को 200 सदस्यों तक के बैठने के लिए विस्तारित किया जा सकता है। पेपरलेस विधानसभा संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का समावेश भी किया गया है, जिससे यह भवन ‘स्मार्ट विधानसभा’ के रूप में विकसित होगा। 324 करोड़ की लागत से बना 51 एकड़ में फैला परिसर कुल 51 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 324 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों—विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी—में विभाजित किया गया है। विंग-ए में विधानसभा का सचिवालय, विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय, तथा विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं। हरित तकनीक से निर्मित पर्यावरण अनुकूल भवन यह भवन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और हरित निर्माण तकनीक से बनाया गया है। परिसर में सोलर प्लांट की स्थापना के साथ वर्षा जल संचयन हेतु दो सरोवर भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, भवन में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया गया है। 500 सीटर ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल विधानसभा भवन में 500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल बनाया गया है। भवन की वास्तुकला आधुनिकता और पारंपरिक शैलियों का उत्कृष्ट मेल है। तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक छत्तीसगढ़ की संस्कृति और शिल्प से सजे-संवरे इस नए विधानसभा भवन में राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदें, आकांक्षाएं और आत्मगौरव साकार होता दिखेगा। यह भवन न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था  का, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का प्रतीक भी बनेगा।

विशेष शिक्षकों का फूटा गुस्सा, BRP संघ ने डिप्टी सीएम साव को सौंपी संविलियन की मांग

रायपुर उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन कराने छत्तीसगढ़ प्रदेश स्पेशल एजुकेटर संघ ने डिप्टी सीएम अरुण साव एवं शिक्षा सचिव से मुलाकात की। शासन के रवैये से नाराज होकर BRP विशेष शिक्षक संघ ने संविलियन करने की मांग की है। साथ ही तत्काल भर्ती प्रकिया पर रोक लगाते हुए 20 वर्षों से कार्यरत संविदा विशेष शिक्षकों के पक्ष में निर्णय लेने की बात कही। संघ के सदस्य सुदीप जांगड़े ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे छत्तीसगढ़ में BRP को संविलियन का लाभ नहीं मिला। ना ही इनके लिए कोई विचार किया गया है। इस सबंध में अपनी मांग रखा है। इस दौरान प्रमुख रुप से संदीप जांगडे (संरक्षक), श्याम नारायण पाण्डेय, पूर्णिमा खोब्रागडे, कमलेश खोब्रागडे, प्रवीण चौधरी, प्रिया यादव आदि सदस्य उपस्थित रहे। संघ ने कहा, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा एक कानूनी अधिकार है। जो भारत सरकार के संविधान और विभिन्न कानूनों द्वारा संरक्षित है। शिक्षा को अनुच्छेद 21ए के तहत मौलिक अधिकार (शिक्षा का अधिकार (RTE) एवं अधिनियम 2009 के तहत भी सभी विकलांग बच्चे जो 6 से 18 वर्ष की आयु तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने प्रावधानित किया गया है। इसे पूरे देश में पालन कराने भारत सरकार ने समावेशी शिक्षा नीतियां तैयार कर सभी राज्यों में भारतीय पुनर्वास परिषद एक्ट 1992 द्वारा पंजीकृत विशेष शिक्षकों की भर्ती की गई है। संघ ने बताया, छत्तीसगढ़ राज्य में भी इसी नीति का पालन करते हुए शासकीय विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा पहली से 12वीं तक के लगभग 78410 दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण एवं बाधारहित वातावरण प्रदान करने 162 विशेष शिक्षक पद नाम (BRP) की संविदा नियुक्ति कर विगत 20 वर्षों से छत्तीसगढ़ शसन सेवा ले रही है। संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों के विनियमितिकरण / समान्य शिक्षकों के सामान वेतनमान अनुमनय कराये जाने के संबंध में रजनीश कुमार पाण्डेय व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका को उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि प्रदेश में कार्यरत संविदा विशेष शिक्षकों की स्क्रीनिंग कमेटी बनाकर पद समायोजन करे एवं नए पदों की भर्ती समय सीमा में करते हुए उक्त कार्यवाही का हलफनामा प्रस्तुत करे। इसका पालन महाराष्ट्र, मणिपुर, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार आन्ध्र प्रदेश ने किया, परंतु छत्तीसगढ़ सरकार ने उक्त आदेश का पालन न करते हुए उच्च्तम न्यायालय को श्रृटिपूर्ण हलफनाम देकर प्रदेश में विशेष शिक्षकों का संविलियन नहीं किया एवं विशेष शिक्षकों की 848 पद सृजित कर 100 पदों की भर्ती विज्ञापन जारी किया है।

बच्चों को संक्रमित खून देने का मामला: झारखंड HC ने सरकार से की कड़ी पूछताछ

  रांची झारखंड उच्च न्यायालय ने खून चढ़ाने से 5 बच्चों के कथित रूप से एचआईवी से संक्रमित हो जाने पर राज्य सरकार को रक्त आधान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं करने को लेकर फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस विषय का जनहित याचिका के रूप में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह को फटकार लगाई। कहा, खबर है कि चाईबासा जिले में पांच बच्चों को खून चढ़ाया गया और इसके बाद वे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। ये बच्चे थैलेसीमिया के मरीज थे और चाईबासा के सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे। इलाज के तहत उन्हें खून चढ़ाया गया। इस साल अगस्त और सितंबर में अलग-अलग तारीखों पर इन बच्चों को रक्त चढ़ाया गया था। खंडपीठ ने कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को एक हलफनामा दाखिल कर राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में आयोजित रक्तदान शिविरों का विवरण पीठ को बताने का निर्देश दिया। अदालत ने अस्पतालों में रक्त की मांग और ‘ब्लड बैंकों' द्वारा उपलब्ध कराई गई मात्रा के बारे में भी जानकारी मांगी। अदालत ने विभाग को राष्ट्रीय रक्त नीति के अनुसार तैयार की जाने वाली मानक संचालन प्रक्रिया पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, पीठ ने सरकार को यह बताने का आदेश दिया कि अस्पतालों में ‘न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (एनएटी)' करने के लिए उन्नत स्क्रीनिंग मशीनें क्यों नहीं लगाई गई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल गेरा ने अदालत को बताया कि किसी मरीज को रक्त चढ़ाने से पहले उसकी गुणवत्ता निर्धारित करने और एचआईवी की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एनएटी आवश्यक है। इससे पहले, अदालत ने थैलेसीमिया से पीड़ित एक बच्चे के माता-पिता द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की सुनवाई शुरू की थी। इस बच्चे को कथित रूप से संक्रमित रक्त चढ़ाया गया था। कथित तौर पर, बच्चे को दूषित रक्त के माध्यम से एचआईवी संक्रमण हुआ था, जिसके बाद उसके पिता ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। मुख्य न्यायाधीश ने इसे एक जनहित याचिका में बदल दिया था। झारखंड सरकार ने 26 अक्टूबर को पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन और अन्य संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया था, जब यह बात सामने आई कि चाईबासा में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को रक्त चढ़ाने के बाद उनकी एचआईवी जांच पॉजिटिव आई थी।  

मध्यप्रदेश में हैरान करने वाला खुलासा! संचालक बेच रहा था फर्जी डेथ सर्टिफिकेट ऑनलाइन

बुरहानपुर खकनार तहसील में चाौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। तहसील मुख्यालय में फोटोकापी और एमपी ऑनलाइन सेंटर चलाने वाला युवक अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र बांट रहा था। नायब तहसीलदार कविता सोलंकी की शिकायत पर खकनार थाना पुलिस ने आरोपित संचालक विनोद पवार निवासी पांगरी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। हालांकि शुक्रवार शाम तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। दरअसल बिजौरी निवासी गोवर्धन पुत्र ताराचंद ने पंचायत सचिव दीपक आम्बेकर को अपने काका गोकुल पुत्र हीरा का मृत्यु प्रमाण पत्र दिया था। सचिव ने जांच करने के लिए जब प्रमाण पत्र का आरएस नंबर ऑनलाइन पोर्टल पर डाला तो पता चला कि उसी नंबर का एक प्रमाण पत्र एक अक्टूबर को तहसीलदार जितेंद्र अलावा के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हो चुका है। गोवर्धन द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र तीन अक्टूबर का था और उसमें नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर व सील लगी हुई थी। फर्जीवाड़े का पता चलने पर सचिव ने नायब तहसीलदार को सूचना दी। जांच में मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।   आरोपित ने ढाई हजार रुपये लिए गोवर्धन ने पुलिस को दिए बयान में बताया है कि 29 सितंबर को वह काका गोकुल का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने लोकसेवा केंद्र खकनार गया था। वहां उससे शपथ पत्र बनवा कर लाने के लिए कहा गया। इसके बाद वह रोहन फोटोकापी और आनलाइन सेंटर पहुंचा। जहां संचालक विनोद पवार ने ढाई हजार रुपये में प्रमाण पत्र बनवा कर देने की बात कही। गोवर्धन ने 600 रुपये अग्रिम दिए। तीन दिन बाद उसने 19 सौ रुपये लिए और गोवर्धन को प्रमाण पत्र दे दिया। उसे इस बात की जानकारी ही नहीं हुई कि जो प्रमाण पत्र दिया गया है, वह फर्जी है। इस फर्जीवाड़े में तहसील का भी कोई कर्मचारी शामिल है य नहीं और अब तक ऐसे कितने प्रमाण पत्र बना कर बांटे जा चुके हैं इसकी जांच की जा रही है।

महिलाओं के विकास की नई गाथा लिख रहा देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिलाओं की उन्नति के बिना समग्र विकास की कल्पना अधूरी है। महिलाओं की कठिनाइयों को दूर करने के साथ उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर में सुधार के प्रयास निरंतर जारी रहना बेहद जरूरी है। महिलाओं के स्वास्थ्य, उपचार, पोषण और कल्याण की दिशा में मध्यप्रदेश में विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की हर बेटी, हर महिला पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े, हर बहन सशक्त बने, यही हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के साथ उनके सर्वांगीण विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसी दिशा में हमने देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन प्रारंभ किया है। यह मिशन प्रदेश की बहनों को हर स्तर पर नई ताकत और नये अवसर प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए भी हमारी सरकार ने विभिन्न प्रयास किए हैं। इनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल, सुरक्षा सहित कायिक शुचिता और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार द्वारा ‘सैनिटेशन एवं हाइजीन योजना’ चलाई जा रही है। योजना के अंतर्गत छात्राओं को सेनेटरी पैड्स क्रय के लिए सहायता राशि सीधे इनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक प्रदेश की 20 लाख से अधिक बेटियों को 118 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि इनके खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों के हित में ऐसा कदम उठाने वाला हमारा मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। हमारी बहनें है समाज की शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बहनें समाज की शक्ति हैं। देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन उनके जीवन में नई ऊर्जा और अवसर लेकर आया है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर बहन को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मान मिले। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में यह हमारा संकल्प है और महिलाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। राज्य की महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए ही यह मिशन प्रारंभ किया गया है। मिशन के अंतर्गत महिलाओं को कौशल विकास, उद्यमिता, शासकीय योजनाओं का लाभ, नेतृत्व प्रशिक्षण और सुरक्षा व अधिकार संरक्षण जैसी सेवाएं और सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। हमारी सरकार महिलाओं को हर क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने शासकीय नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दी है। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के मानदेय में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर इन्हें समुचित सम्मान और प्रोत्साहन दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वस्त्र उद्योग में कार्यरत महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए भी सरकार ने कदम उठाए हैं। हमने रेडिमेड गारमेंट्स इंडस्ट्री में कार्यरत हर महिला श्रमिक को प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। इससे महिलाएं और अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके साथ ही प्रदेश के सभी औद्योगिक प्रक्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं के लिए आश्रय गृह (वर्किंग वुमन हॉस्टल्स) की सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रदेश के 47 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। इनका कुशल नेतृत्व यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश की अनवरत विकास यात्रा में हमारी बहनें अभूतपूर्व योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आधी आबादी को उनका पूरा हक दिलाने के लिए हमारी सरकार कोई कमी नहीं रखेगी। महिलाएं ही प्रदेश के चहुंमुखी विकास का नया अध्याय लिखेंगी, यह निश्चित है। 

CBSE ने बड़ी घोषणा की! 10वीं-12वीं बोर्ड एग्जाम की डेटशीट 110 दिन पहले जारी, जानें पूरा शेड्यूल

चंडीगढ़  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा की परीक्षा की तारीखें जारी कर दी हैं। अधिसूचना के मुताबिक 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक होगी। वहीं, बारहवीं की परीक्षा 17 फरवरी से 9 अप्रैल 2026 तक होगी। दोनों परीक्षाएं केवल एक शिफ्ट सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित कराई जाएंगी।  110 दिन पहले जारी की डेटशीट  सीबीएसई के मुताबिक, पहली बार डेटशीट परीक्षा शुरू होने से 110 दिन पहले जारी की गई है। इससे बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों और स्कूलों को कई लाभ होंगे। जैसे छात्र परीक्षा की तैयारी पहले शुरू कर सकेंगे, जिससे उन्हें अपना प्रदर्शन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही सभी स्कूल बोर्ड कक्षाओं के लिए बेहतर ढंग से योजना बना सकेंगे। दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित कराई जाएगी। पूरी डेटशीट सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट www.cbse. gov.in पर देखी जा सकती है। इस साल करीब 42 लाख बच्‍चे CBSE बोर्ड परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। 

खेसारी लाल यादव ने खोली RJD की पोल: कहा—2 करोड़ नहीं, 50 लाख नौकरी भी नहीं मिलेगी!

पटना  जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी के साथ राजनीतिक लड़ाई तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में छपरा विधानसभा सीट (Chhapra Assembly seat) से महागठबंधन के प्रत्याशी और गायक-अभिनेता खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) ने एक बार फिर एनडीए सरकार पर हमला बोला। साथ ही राजद के 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने के दावे की पोल खोल दी। एनडीए सिर्फ जंगलराज का डर दिखाती है  खेसारी लाल यादव ने कहा, "अगर हम 2 करोड़ रोजगार नहीं भी देंगे, तो कम से कम 50 लाख रोज़गार तो देंगे ही। कम से कम हमारे नेता रोज़गार देने की बात तो कर रहे हैं। एनडीए सरकार तो वादे भी नहीं करती, सिर्फ़ जंगलराज की बात करती है। वो हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर बात करेंगे… वो सिर्फ़ उन मुद्दों पर बात करेंगे जिनका आपकी ज़िंदगी से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि हाल ही में आरजेडी ने बिहार में 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की घोषणा की थी। इससे पहले खेसारी लाल यादव ने कहा कि छपरा की जनता ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, छपरा की जो भी समस्याएं हैं, मैं अपने हुनर ​​और ताकत से जो भी कर सकता हूं, करने की कोशिश करूंगा। हमारी कोशिश होगी कि शिक्षा का स्तर ऊंचा हो, अस्पताल की व्यवस्था दूसरे शहरों से बेहतर हो…छपरा को बेहतर दिशा में ले जाएं।" गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।