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गिट्टी से भरा ओबर लोडिग डंपर को खनिज विभाग ने किया जप्त

गिट्टी से भरा ओबर लोडिग डंपर को खनिज विभाग ने किया जप्त बमीठा थाना में डंपर रखने के बाद कानूनी प्रक्रिया जारी छतरपुर  काफी समय से ओवरलोडिंग बाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं और शासन प्रशासन के साथ वाहन मालिक आंख  मिचोली का खेल खेल रहे हैं और शासन प्रशासन को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है इतना ही नहीं उन ओवरलोडिंग वाहनों पर कानूनी कार्यवाही नहीं की जाती है जिस बाहन मालिक से खनिज विभाग का मंथली लेनदेन बना रहता और जिस बाहन मालिक से लेन देन नहीं होता है उस बाहन पर कार्यवाही की जाती है ऐसा ही एक मामला छतरपुर जिले के हाईवे रोड 39 पर आया है जहां पर ओवरलोडिंग गिट्टी से भरा डंपर खनिज विभाग ने पकड़ लिया है और बमीठा थाने में रख कर कार्यवाही प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जब खबर के संबंध में खनिज विभाग इंस्पेक्टर से मोबाइल पर बात हुई तो उन्होंने कहा है की ओवरलोडिंग गिट्टी होने के कारण डंपर को जप्त किया गया और बमीठा थाने में रखकर कानून प्रक्रिया चालू कर दी है यह डंपर बिना न्यायालय की नही छूटेगा चौंकाने वाली बात तो यह है कि गिट्टी से भरे डंपर में कहीं कोई डंपर का नंबर नहीं है न जाने ऐसे सैकड़ों बाहन सड़कों पर आए दिन दौड़ रहे हैं और शासन प्रशासन की आंखों में धूल खौप रहे हैं जो शासन प्रशासन के लिए चुनौती का विषय बना हुआ है किंतु अब देखना यह है कि खनिज विभाग ऐसे कितने वाहनों पर कार्यवाही कर पाएंगे जो सड़कों पर बेधड़क घूम रहे हैं

हत्या के मामले मे बमीठा पुलिस ने 6 लोगो को किया गिरफ्तार

हत्या के मामले मे बमीठा पुलिस ने 6 लोगो को किया गिरफ्तार 2 दिन पूर्व कामता आदिवासी की गयी थी हत्या छतरपुर  2 दिन पूर्व बमीठा थाना अंतर्गत ग्राम झमटुली मे जादू टोना के शक मे एक 55 वर्षीय वृद्ध की हाथ पैर बांध कर पीट पीट कर हत्या का मामला सामने आया था जिसमे बमीठा पुलिस ने कुल 6 लोगो पर हत्या का मामला दर्ज किया था जिसमे बमीठा पुलिस ने सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यालय भेज दिया है

मथुरा विवाद: जन्मभूमि मामले की सुनवाई टली, अब न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना करेंगे फैसला सुनने की तैयारी

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट में गुरुवार को मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। प्रकरण की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने अब न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना को नियुक्त किया है।  पीठ आज उपलब्ध नहीं थी, इसलिए सुनवाई टल गई। नई तारीख क्या नियत की गई है,  यह भी नहीं पता चल सका है। वाद संख्या नौ में (मंदिर पक्ष के)  अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने यह जानकारी दी। अब तक इस प्रकरण में न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायणन मिश्र सुनवाई कर रहे थे। पिछले दिनों उनका स्थानांतरण लखनऊ खंडपीठ  में हो गया है । अब  मुख्य  न्यायमूर्ति ने सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना को नामित किया है।  

तीसरी बार चालान का झटका – भोपाल में हेलमेट की अनदेखी अब महंगी पड़ सकती है

भोपाल सड़कों पर लोगों के चालान काट खुद नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले पुलिसकर्मियों को यातायात सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब बहुत भारी पड़ेगी। पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (पीटीआरआई) ने पुलिसकर्मियों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य किया है। नए निर्देशों में कहा गया है कि दो बार से अधिक बिना हेलमेट किसी पुलिसकर्मी का चालान हुआ तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। बात यहीं तक नहीं है। नये आदेशों में यह भी है कि इस कार्रवाई के बाद भी पुलिसकर्मी यातायात सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने से बाज नहीं आए तो उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। यानी इस मनमानी से उनकी नौकरी पर भी आंच आ सकती है। पीटीआरआई के इस निर्देश के बाद पूरे प्रदेश की पुलिस में हलचल मच गई है। भोपाल में ही अब तक 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के चालान बनाए जा चुके हैं। इनमें अधिकतर ऐसे हैं जो बिना हेलमेट ड्यूटी पर या निजी काम से दोपहिया वाहन लेकर निकले थे। कई मामलों में तो पुलिसकर्मी खुद ट्रैफिक सिग्नल तोड़ते या मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाते हुए पकड़े गए।   पीटीआरआई ने सभी जिला पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर नियमित निगरानी रखें और यदि कोई नियमों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। यह भी कहा गया है कि सड़क पर पुलिसकर्मी आम जनता के सामने अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक होते हैं, ऐसे में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे खुद ट्रैफिक नियमों का पालन कर उदाहरण प्रस्तुत करें। अधिकारियों का कहना है कि इस सख्ती का मकसद केवल अनुशासन बनाना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति पुलिसकर्मियों में जागरूकता बढ़ाना भी है। अगर पुलिस ही नियमों को तोड़ेगी तो जनता से पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? इस तरह पकड़ में आएगी खाकी की बदमाशी चालानी कार्रवाई के दौरान पुलिस नाम और मोबाइल नंबर का ब्यौरा लेती है। जिस-जिस व्यक्ति का चालान बनता है, उसका रिकॉर्ड जिला पुलिस के पास दर्ज होता है। एक निश्चित समय के बाद जिला पुलिस देखेगी कि कितने पुलिसकर्मियों पर लगातार हेलमेट नहीं पहनने को लेकर कार्रवाई हुई है। उनका डाटा तैयार किया जाएगा और फिर दो बार से अधिक उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव तैयार होगा। पुलिस को समाज के आदर्श के रूप में देखा जाता है। नए आदेश के जरिए पुलिसकर्मियों में हेलमेट के प्रति अनुशासन बढ़ाने का प्रयास है। यदि वे लगातार उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो कार्रवाई होगी। शाहिद अवसार, एआईजी, पीटीआरआई।

हर गांव में खेल का मैदान: पंजाब में 3100 शानदार स्टेडियमों की शुरुआत

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बठिंडा से 1194 करोड़ रुपये की लागत से 3100 खेल स्टेडियमों की शिलान्यास कर पंजाब में नया इतिहास रच दिया. पंजाब की धरती पर आज का दिन सिर्फ पंजाब ही नहीं, पूरे देश के लिए ऐतिहासिक बन गया. आज़ादी के 75 साल में किसी भी सरकार ने गांवों की तरफ इस तरह से ध्यान नहीं दिया. अब तक बड़े-बड़े शहरों में ही स्टेडियम बनते थे, लेकिन पहली बार किसी सरकार ने गांव के नौजवानों के लिए गांवों में ही शानदार खेल स्टेडियम बनवाने की शुरुआत की है. मान सरकार 3100 गांवों में आधुनिक और शानदार स्टेडियम बनवा रही है. इन स्टेडियमों में वॉलीबॉल, फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स के लिए ट्रैक बनेंगे. हर गांव में लोकल खेल के लिए भी अलग मैदान होगा. सरकार खेल का सामान भी उपलब्ध करवाएगी. स्टेडियमों की संभाल और देखरेख की जिम्मेदारी गांवों के यूथ क्लबों को दी गई है ताकि ये मैदान कमजोर न पड़ें और गांव का हर बच्चा इन सुविधाओं से जुड़ सके. पुरानी सरकारों ने नशा घर-घर पहुंचाया पंजाब में महीनों से नशे के खिलाफ जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है. पुरानी सरकारों ने नशा घर-घर पहुंचाया, पंजाब की जवानी को खोखला कर दिया. लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस तेजी से नशा तस्करों पर बुलडोज़र चला है. जितनी ज़ब्तियां और गिरफ्तारियां हुई हैं, ऐसा अभियान देश में कहीं नहीं चला. बड़े-बड़े नशा तस्कर जेल में हैं. करोड़ों की संपत्तियां ज़ब्त की जा रही हैं. जो लोग कभी खुद को अजेय समझते थे. आज जेल में सड़ रहे हैं. और जैसे ही एक बड़े तस्कर को जेल में डाला गया, सभी पुरानी पार्टियां एकजुट हो गईं, जिससे साफ हो गया कि नशे के कारोबार में सब मिले हुए थे, लेकिन भगवंत मान की सरकार ने साफ कर दिया है, पंजाब में नशा बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. खेल गांवों की नई पहचान बनेगा नशे के खिलाफ इस जंग के साथ अब बच्चों के भविष्य की नई बुनियाद रखी जा रही है. जो बच्चे नशा छोड़ रहे हैं, उनके लिए अब स्टेडियम में सेहत और खेल का रास्ता खुलेगा. मान साहब ने बताया कि भारत की चार राष्ट्रीय टीमों के कप्तान पंजाबी हैं. आने वाले वक्त में और भी कप्तान और चैंपियन इन्हीं गांवों से निकलेंगे. खेल अब गांवों की नई पहचान बनेगा. पंजाब के युवाओं के लिए मान सरकार ने 55,000 सरकारी नौकरियां दीं. बिना सिफारिश, बिना पैसे- सिर्फ मेरिट पर. अकाली दल, कांग्रेस और बीजेपी के शासन में बिना पैसे नौकरी पाना नामुमकिन था. आज सरकार ने सिस्टम बदल दिया है. इसके साथ ही चार लाख से ज़्यादा प्राइवेट नौकरियों की संभावनाएं भी खुल चुकी हैं क्योंकि इंडस्ट्री पंजाब में निवेश कर रही है. अब अगला बड़ा कदम कॉलेजों में उद्यमिता सिखाने का है. मोहाली से केजरीवाल और मान सरकार यह ऐलान करेगी कि हर कॉलेज में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ बिजनेस करवाया जाएगा. जो बच्चा कॉलेज से निकलेगा वो नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनेगा। पंजाब पूरे देश में उद्यमिता की राजधानी बनने की राह पर है. युवाओं को नशे से दूर कर रही मान सरकार मान सरकार गांवों में खेल स्टेडियम बना रही है, युवाओं को नशे से दूर कर रही है, रोजगार और बिजनेस के मौके दे रही है. विपक्षी पार्टियों ने पंजाब को खोखला किया, युवाओं को नशे में धकेला, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. गांव-गांव में स्टेडियम बन रहे हैं, नौजवान मैदान में लौट रहे हैं, नशा तस्कर जेल में हैं और पंजाब फिर से रंगला पंजाब बनने की ओर बढ़ रहा है. पंजाब की मिट्टी में वो ताकत है जिसने देश को कप्तान दिए, खिलाड़ी दिए, शहीद दिए. अब यही पंजाब आने वाले वक्त में ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में झंडा बुलंद करेगा. आज का दिन इस नई कहानी की शुरुआत है.

इंदौर मेट्रो को बड़ी कामयाबी: ट्रायल रन पूरा, 4 माह में तैयार होंगे तीन स्टेशन

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन का 17 किलोमीटर का ट्रायल रन गुरुवार को पूरा हुआ। अब गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का ट्रायल रन की राह आसान हो गई है। पहली बार मेट्रो ट्रेन सुखलिया ग्राम, विजय नगर और मालवीय नगर क्षेत्र के लोगों ने ट्रेक पर चलते हुए देखी। पहले दिन मेट्रो ट्रेन ने यह सफर एक घंटे में पूरा किया। पहली बार मेट्रो ट्रेन की स्पीड काफी कम रखी गई थी। अब धीरे-धीरे रफ्तार के साथ रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का ट्रायल रन होगा। अगले साल तक 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा। मेट्रो ट्रेन गांधी नगर स्टेशन से निकली। सात किलोमीटर तक स्पीड तेज रखी गई, लेकिन चंद्रगुप्त मोर्य प्रतिमा चौराहे के पास कम स्पीड में ट्रायल रन लिया गया। पहली बार मेट्रो को देख शहरवासी रुक गए और हाथ हिलाकरअभिवादन करने लगे। हार्न बजाते हुए मेट्रो धीरे-धीरे रेडिसन चौराहा तक पहुंची, फिर गांधी नगर डिपो की तरफ रवाना हुई।   तीन स्टेशन तैयार नहीं अभी मेट्रो के तीन स्टेशन पूरी तरह तैयार नहीं हुए है। इस कारण रेडिसन चौराह तक मेट्रो की सवारी शहरवासी टिकट लेकर नहीं कर सकते है। चार माह के भीतर तीनों स्टेशन तैयार हो जाएंगे। इसके बाद फिर मेट्रो कार्पोरेशन कमर्शियल रन की अनुमति लेगी। दो साल पहले मेट्रो का सात किलोमीटर का ट्रायल रन हुआ था। दो माह में 13 किलोमीटर तक का ट्रायल रन हुआ। अब गुरुवार को 17 किलोमीटर तक मेट्रो ट्रेन चली, लेकिन इससे आगे के ट्रायल में अब लंबा समय लगेगा, क्योकि खजराना चौराहा तक मेट्रो के ट्रेक भी अभी तक नहीं बन पाए है।    

मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त निर्देश: बांग्लादेशी घुसपैठियों पर तुरंत कार्रवाई हो

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कलेक्टर-कमिश्नर और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी तरह बांग्लादेश घुसपैठियों को रहने की इजाजत नहीं है। इन्हें ढूंढकर जेल में भेजो। यह लोग प्रदेश में आकर छिपकर रहने लगते हैं। इन पर नजर रखी जाए। सीएम ने बढ़ते महिला अपराधों पर नाराजगी व्यक्त की सीएम डॉ मोहन यादव ने महिला अपराधों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब ऑनलाइन समाधान बैठक होती है तो शाम को ही गुमशुदा महिला मिल जाती है। वर्ना दो-दो महीनों तक उनका कोई पता नहीं रहता है। ऐसे बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाना होगा। प्रदेश में ड्रग माफिया, जमीन माफिया और दूसरे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। एसपी ध्यान रखें कि सिर्फ बेसिक पुलिसिंग से काम नहीं चलने वाला। नई रणनीतियां तैयार करके अपराधियों को जेल में डालना होगा। बस्तियों में पनप रहा नेटवर्क राज्य में देखा गया है कि संकरी गलियों या बस्तियों में अपराधियों का नेटवर्क ऑपरेट होता है। जहां पर कई बार पुलिस जाने से भी कतरती है। इस मामले पर सीएम ने कहा कि संकरी गलियों वाली बस्ती या मोहल्ले को चिन्हित करें। यहां पर अपराधी अपना गढ़ बनाकर काम कर रहे हैं। 

Deadly Cough Syrup केस: आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, याचिका में CBI या आयोग से जांच की अपील

भोपाल  बीते कुछ समय से देश के कई राज्यों में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। इन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस संबंध में वकील विशाल तिवारी द्वारा एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज  यानी शुक्रवार, 10 अक्टूबर को सुनवाई का भरोसा दिया है। दर्ज याचिका में मांग की गई है कि इस संवेदनशील मामले की गहन जांच राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के माध्यम से विशेषज्ञों की समिति बनाकर कराई जाए। यह जनहित याचिका गंभीर स्वास्थ्य संकट और दवा सुरक्षा पर तत्काल ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को उजागर करती है। विषैले रसायनों की बिक्री पर सख्त नियम बनाने की मांग याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज द्वारा किए जाने की मांग की है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने याचिका में उन रसायनों के उपयोग पर सख्त नियम बनाने की मांग की गई है, जिनके कारण बच्चों की मौतें हुई हैं। बता दें कि इन रसायनों में डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल शामिल है। विषैले सिरप बनाने कंपनी के लाइसेंस को रद्द करने की मांग याचिका में कफ सिरप के नाम पर "विषैले सिरप" बनाने वाली इन कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द की मांग की गई है। कहा गया है कि इन कंपनियों को फौरन बंद किया जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, बाजारों में उतरे कंपनियों के प्रोडक्ट को वापस मंगाया जाए, ताकि अन्य लोगों को बचाया जा सके। साथ ही एक प्रभावी ड्रग्स रिकॉल पॉलिसी बनाने की आवश्यकता के बारे में याचिका में मांग की गई है। पीड़ितों के लिए मुआवजा की मांग सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी की गई है, ताकि इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को कुछ हद तक राहत मिल सके। वकील विशाल तिवारी ने मांग की है कि बच्चों की मौत के संबंध में विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक ही जगह ट्रांसफर किया जाए, ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। इससे जांच सही तरीके से हो पाएगी और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सकेगी।  Coldrif पर 2 साल पहले ही लग चुकी थी रोक, WHO ने भी मांगा स्पष्टीकरण यह कफ सिरप जिस फॉर्मूले से बनाई गई थी, उसे सरकार दो साल पहले ही 4 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रतिबंधित कर चुकी थी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने 18 दिसंबर 2023 को राज्यों को आदेश में कहा था कि क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट आईपी 2 मिलीग्राम और फेनाइलफ्राइन एचसीएल आईपी 5 मिलीग्राम कॉम्बिनेशन को चार साल तक के बच्चों को नहीं दिया जाए। यह आदेश फाइल 04-01/2022- डीसी के तहत जारी किया गया। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव ङ्क्षसह रघुवंशी की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि इस कॉम्बिनेशन वाले सिरप के लेबल और प्रचार सामग्री पर चेतावनी भी छापी जाए। इसके बाद भी पालन नहीं हुआ। तमिलनाडु सरकार ने की कंपनी सील बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने कांचीपुरम स्थित एक फार्मास्युटिकल फैक्ट्री को सील कर दिया है। कार्रवाई कोल्ड्रिफ कफ सिरप के कारण हुई। तमिलनाडु के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने 4 अक्टूबर को सिरप के नमूनों को मिलावटी घोषित किया था।  तमिलनाडु ने झाड़ा पल्ला तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोलर और वहां की सरकार ने श्रीसन को बंद कराने के बाद पल्ला झाड़ लिया है। मप्रस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वहां के ड्रग कंट्रोलर बताने को तैयार नहीं कि कोल्ड्रिफ में अवैध रूप से उपयोग किया जाने वाला जहरीला सॉल्वेंट बनाने वाली कंपनी ने कितनी मात्रा में निर्माण किया। श्रीसन को कब से बेच रही थी। किन राज्यों को सप्लाई किया। केंद्र को बताया तमिलनाडु की कंपनियों (Coldrif) व अफसरों की अनदेखी के कारण जहरीले कारोबार को मप्र समेत कई राज्यों में जगह मिली। मप्र सरकार की ओर से बुधवार को विस्तृत जानकारी केंद्र को दी गई। 1470 कंपनियों के पास प्रमाण पत्र नहीं केंद्र ने दवा कंपनियों के लिए डब्ल्यूएचओ प्रमाणपत्र अनिवार्य किया था। 5308 में 1470 कंपनियों ने आवेदन तक नहीं किया। डब्ल्यूएचओ सक्रिय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 'Coldrif' के निर्यात के संबंध में भारतीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। स्वास्थ्य एजेंसी ने भारतीय अधिकारियों से पूछा है कि यह सिरप विदेश भेजा गया है या नहीं। ताकि जरूरत पड़ने पर अलर्ट जारी किया जा सके।

स्वनिधि योजना से छोटे व्यापारियों को संबल, अब तक ₹2,078 करोड़ का लोन वितरित

पीएम स्वनिधि योजना में 13.46 लाख हितग्राहियों को दिया गया 2 हजार 78 करोड़ का ऋण ऋण राशि को भी बढ़ाया गया शहरी पथ-विक्रेताओं को जोड़ा जा रहा है अन्य योजनाओं से भी भोपाल प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में शहरी पथ-विक्रेताओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिये पीएम स्वनिधि योजना में अब तक 13 लाख 46 हजार प्रकरणों में 2 हजार 78 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से हितग्राहियों को ब्याज सब्सिडी के रूप में 30 करोड़ रुपये की राशि भी दी गई है। पीएम स्वनिधि में देश में पहले स्थान पर केन्द्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठन कर इसकी अवधि 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दी है। पथ-विक्रेताओं को योजना का लाभ देने के मामले में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। प्रदेश के 3 नगरीय निकायों उज्जैन, खरगोन और सारणी को सर्वाधिक ऋण वितरण के लिये पुरस्कृत भी किया जा चुका है। पीएम स्वनिधि योजना में 42 अन्य नगरीय निकायों एवं बैंक शाखाओें का चयन उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है। हितग्राहियों को प्रशिक्षण राज्य में पथ-विक्रेता योजना में सफलतापूर्वक काम कर सकें, इसके लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरीय निकायों के माध्यम से क्षमता निर्माण के लिये प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की है। हितग्राहियों को वित्तीय और डिजिटल साक्षरता, ई-कॉमर्स, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता का भी प्रशिक्षण दिलाया गया है। ऋण सीमा में वृद्धि योजना में चयनित हितग्राहियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गयी है। योजना में पूर्व में 10 हजार के स्थान पर 15 हजार और 20 हजार के स्थान पर 25 हजार रुपये और अंतिम किश्त के रूप में 50 हजार रूपये की ऋण राशि दी जा रही है। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिये हितग्राही को फुटकर लेन-देन पर 1200 रुपये और थोक व्यापार लेन-देन के लिये प्रतिवर्ष अधिकतम 400 रुपये तक कैश बेक की सुविधा दी जा रही है। पथ विक्रेता सुरक्षित रूप से व्यापार कर सके, इसके लिये नगरीय निकायों द्वारा आईडी प्रमाण-पत्र भी जारी किये गये हैं। पथ-विक्रेताओं और उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिये जन-धन, पीएम सुरक्षा बीमा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति और पीएम श्रम योगी मानधन योजना, वन नेशन वन राशन कार्ड, जननी सुरक्षा, श्रमिक कल्याण और पीएम मातृ वंदना योजना से भी जोड़ा गया है। योजना में जो हितग्राही समय पर किश्त जमा कर रहे हैं, उन्हें क्रेडिट कार्ड की भी सुविधा भी दी जा रही है।  

CM साय का बयान: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर  बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी। नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।