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योग दिवस पर 45 मिनट का अभ्यास, शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण शुरू

जमशेदपुर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर इस वर्ष झारखंड के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में योग का व्यापक अभियान चलाया जाएगा. राज्य सरकार ने 21 जून को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को योगमय झारखंड 2026-27 के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. रविवार होने के बावजूद राज्य के सभी स्कूल सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और स्टूडेंट्स, टीचर्स और कर्मियों की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. 12 से 15 जून तक शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह द्वारा जारी निर्देश के अनुसार इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” निर्धारित की गई है. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने एसओपी जारी की है. योजना के तहत 12 से 15 जून तक जिला, प्रखंड और संकुल (क्लस्टर) स्तर पर शिक्षकों का विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम होगा. वहीं स्कूलों में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय योग ओलंपियाड के अंतर्गत पोस्टर, स्लोगन, कविता और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी. चयनित एंट्रीज को प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर मूल्यांकन के बाद एनसीइआरटी के राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. 16 से 20 जून तक रोजाना योग अभ्यास 16 से 20 जून तक सभी स्कूलों में प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे से 8:00 बजे तक 45 मिनट का सामूहिक योगाभ्यास कराया जाएगा. इसमें स्टूडेंट्स के साथ सभी टीचर और अन्य कर्मियों की भागीदारी अनिवार्य होगी. इसके अलावा 17 जून को सभी स्कूलों में सात सदस्यीय योग क्लब का पुनर्गठन भी किया जाएगा, जो पूरे साल योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करेगा. क्लास शुरू होने से पहले होगा दो मिनट का मेडिटेशन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने निर्देश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि अब स्कूलों में हर दिन पहली क्लास शुरू होने से पहले क्लास टीचर दो मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) कराएंगे. शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे स्टूडेंट्स में एकाग्रता, मानसिक संतुलन और सीखने की क्षमता में सकारात्मक सुधार आएगा. साथ ही स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले स्टूडेंट्स को 21 जून को सम्मानित किया जाएगा. कार्यक्रम पर होने वाला खर्च समग्र शिक्षा के कॉम्पोजिट स्कूल ग्रांट मद से उठाया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि योग दिवस कार्यक्रम के सफल आयोजन और शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल की होगी.

नो ट्रिपिंग जोन बनाने की तैयारी, 1500 करोड़ की योजना पर काम तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने लखनऊ नो ट्रिपिंग जोन बनाने की ठान ली है। इसमें केंद्र सरकार की मदद से आधुनिकीकरण का काम होगा। इससे लखनऊ की बिजली व्यवस्था को वर्ष 2032 के हिसाब से आधुनिक किया जाएगा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इसकी तैयारी में जुट गया है। राजधानी की बिजली व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ष 2032 के हिसाब से तैयार करने की तैयारी है। इस पूरे काम को वर्ष 2028 मध्य तक करना होगा। वर्ष 2032 में राजधानी के उपभोक्ताओं को कितनी बिजली चाहिए होगी, कितने उपभोक्ता होंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना मजबूत करना होगा। उसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने का काम तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। पंद्रह सौ करोड़ रुपये खर्च करके वर्ष 2028 मध्य तक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। टीम देखेगी कि कैसे पांच वर्ष में बिजली की डिमांड लखनऊ में बढ़ी है। उसी आधार पर आगे की रणनीति बनाएगी। वर्ष 2032 में कितने बिजली उपकेंद्र व ट्रांसमिशन उपकेंद्र चाहिए होंगे। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) राजधानी में बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें पावर कारपोरेशन के निदेशक होंगे, मध्यांचल के निदेशक तकनीकी और लेसा के एक मुख्य अभियंता को रखा गया है। यह समिति दीपावली तक पूरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट शक्ति भवन को सौंप देगी। इसके बाद मध्यांचल लखनऊ में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने पर काम करेगा। यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। हर वर्ष बढ़ रही है डिमांड और उपभोक्ता लखनऊ में हर वर्ष दो से ढाई सौ मेगावाट एम्पियर बिजली की डिमांड बढ़ रही है। हर वर्ष दो सौ मेगावाट की खपत और एक लाख उपभोक्ता बढ़ रहे है। इसको देखते हुए नए ट्रांसमिशन बिजली उपकेंद्र के साथ ही नए बिजली उपकेंद्र भी नए विकसित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। वहीं पुराने लखनऊ व घनी आबादी वाले क्षेत्र में पावर ट्रांसफार्मर रखे जाएंगे। इसके लिए जमीन भी तलाशी जाएगी, जिससे छोटे बिजली उपकेंद्र भी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बनाए जा सके। बिजली उपकेंद्र को डबल व त्रिपल सोर्स से लैस करने पर फोकस होगा। वीआइपी क्षेत्रों में एलटी केबल भी ओवरहेड न जाए, उन्हें ट्रंच लाइन में ले जाया जाए, इस पर भी विचार होगा।  

बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा बदलाव, पंजाब बोर्ड ने समझ और कौशल आधारित मूल्यांकन पर दिया जोर

लुधियाना. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पी.एस.ई.बी.) की परीक्षाओं में अब केवल किताबी अभ्यास के प्रश्नों को रटकर पास होने वाले विद्यार्थियों की राह आसान नहीं होगी। बोर्ड ने अकादमिक साल 2026-27 के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा की सालाना परीक्षा के प्रश्न-पत्रों के पूरे पैटर्न को ही बदल दिया है। नए बदलाव के तहत अब विद्यार्थियों को किताबों के हर पाठ को गहराई से समझना होगा। बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार अब परीक्षाओं के प्रश्न-पत्रों में 50 प्रतिशत प्रश्न पाठ्य पुस्तकों की विषय वस्तु में से यानी अभ्यास के अलावा पाठ के बीच में से पूछे जाने लाजमी किए गए हैं। वहीं, बाकी बचे 50 प्रतिशत प्रश्न ही पाठ्य पुस्तकों के अभ्यासों के प्रश्न-बैंक में से शामिल किए जाएंगे। बोर्ड का मुख्य मकसद विद्यार्थियों की कॉन्सैप्चुअल अंडरस्टैंडिंग को मजबूत करना है ताकि वे रट्टा लगाने की बजाय विषय को अच्छी तरह समझ सकें। इस बड़े फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए बोर्ड के उप-सचिव (अकादमिक) द्वारा समूह जिला शिक्षा अफसर (सै.सि.), पंजाब को कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अफसरों को हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने जिलों में इन कक्षाओं को पढ़ा रहे सभी अध्यापकों को इस नए बदलाव की तुरंत जानकारी दें, ताकि अध्यापक अभी से अपने विद्यार्थियों को इसी बदले हुए पैटर्न के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करवाना शुरू कर दें।

देश के सात कलाकारों को मिला संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान, रामलाल बरेठ भी शामिल

रायपुर. संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, अकादमी रत्न, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कारों की घोषणा की है. फेलोशिप और पुरस्कारों के लिए छत्तीसगढ़ के चार कलाकारों का चयन किया गया है. संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए जिन सात कलाकारों का चयन किया गया है, उनमें से छत्तीसगढ़ के पंडित रामलाल बरेठ का नाम सबसे ऊपर है. उनका चयन कथक नृत्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए किया गया है. इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी की सामान्य परिषद ने संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक, जनजातीय कलाओं और कठपुतली सहित विभिन्न क्षेत्रों के 108 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार के लिए चुना है. इनमें छत्तीसगढ़ के अनूप रंजन पांडेय का चयन लोक नृत्य (Folk Dance) के लिए किया गया है. वहीं 106 युवा कलाकारों का चयन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए किया गया है. इन युवा कलाकारों में छत्तीसगढ़ के आनंद कुमार पांडेय का चयन अभिनय (Acting) के लिए और घनश्याम साहू का चयन कथा लेखन (Play Writing) के लिए किया गया है. पंडित रामलाल बरेठ, कथक नर्तक संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए चयनित रामलाल बरेठ कथक नर्तक हैं. जिन्हें रायगढ़ के महाराज चक्रधर अपने दरबार के नर्तकों में कोहिनूर हीरा मानते थे. रामलाल ने अपनी पूरी जिंदगी नृत्य को समर्पित कर दी है. पंडित रामलाल बरेठ का जन्म 6 मार्च सन 1936 को हुआ था. संगीत परिवार में जन्में पंडित रामलाल की कथक नृत्य शिक्षा 5 साल की उम्र में अपने पिता के सानिध्य में शुरू हो गई थी. 10 वर्ष की छोटी आयु में ही वे रायगढ़ दरबार में कला के शौकीन लोगों के सामने नृत्य का प्रदर्शन करने लगे. जिसे देखकर महाराजा चक्रधर सिंह बहुत खुश हुए. इसके बाद महाराजा ने जयपुर के गुरू पंडित जयलाल महाराज से उनकी नृत्य शिक्षा की व्यवस्था करवाई. राजा चक्रधर सिंह खुद गायन, वादन एवं नृत्य के विद्वान भी थे. वाद्य यंत्र और गायन में भी महारथी पंडित रामलाल नृत्य के अलावा तबला वादन और गायन में भी पारंगत हैं. तबला की शिक्षा अपने पिता पंडित कार्तिकराम और पंडित जयलाल महाराज से ली और गायन की शिक्षा अपने पिता और उस्ताद हाजी मोहम्मद खां बांदावाले से ली है. पंडित रामलाल सन् 1949 में लखनऊ सम्मेलन में पहली बार मंच पर आए थे. जहां से इन्हें ख्याति मिलनी शुरू हुई. इसके बाद नृत्य प्रदर्शन का अनवरत सिलसिला शुरू हो गया. भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 2024 में पद्मश्री प्रदान गया था. अनूप रंजन पांडेय अकादमी द्वारा लोक नृत्य (Folk Dance) के लिए चयनित वरिष्ठ रंगकर्मी और लोक कलाकार पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में अपना एक अलग स्थान है. 21 जुलाई 1965 को बिलासपुर जिले के एक किसान परिवार में जन्मे अनूप रंजन पांडेय को बचपन में अपने माता-पिता से कला और संस्कृति के संस्कार विरासत में मिली. कला के प्रति उनके जुनून का नतीजा है कि उन्होंने खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से लोक संगीत में पीएचडी हासिल की. वर्ष 1988 में सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर से मुलाकात के बाद साल 1990 में वे उनके मशहूर ‘नया थियेटर’ से जुड़े और देश-विदेश के कई बड़े मंचों पर प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ी लोक रंगमंच को एक नई पहचान दिलाई. रंगमंच के जरिए केवल लोगों के मनोरंजन ही नहीं बल्कि जन जागरूकता का भी काम किया. 1989 से 1992 के दौरान उन्होंने अविभाजित मध्यप्रदेश में चले ‘संयुक्त साक्षरता आंदोलन’ में भी अहम भूमिका निभाई. बस्तर बैंड के जरिए दुर्लभ वाद्ययंत्रों का संरक्षण छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वे रायपुर आ गए और यहाँ साक्षरता के लिए ‘स्टेट रिसोर्स सेंटर’ (SRC) में भी कई वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं. अनूप रंजन पांडेय ने बस्तर के स्थानीय कलाकारों को साथ जोड़कर ‘बस्तर बैंड’ की स्थापना की, जिसके जरिए उन्होंने बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में संगीत के जरिए शांति और संस्कृति के संरक्षण का काम किया. लोकगीतों-पांडुलिपियों का किया संकलन उन्होंने करीब 60 दुर्लभ पारंपरिक वाद्ययंत्रों को विलुप्ति से बचाते हुए सहेजने का काम किया. इसके साथ छत्तीसगढ़ के 143 लोकगीतों और लोककथाओं की पांडुलिपियों का संकलन किया है. यही नहीं उन्होंने अपने व्यक्तिगत संग्रह के कई दुर्लभ वाद्ययंत्र रायपुर स्थित संग्रहालय को दान भी किए हैं. घनश्याम साहू, कथा लेखक छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और रंगमंचीय परंपरा को नई पहचान देने वाले युवा रंगकर्मी घनश्याम साहू आज नाटक लेखन, निर्देशन और सांस्कृतिक नेतृत्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम हैं. वर्ष 2007 से रंगमंच से सक्रिय रूप से जुड़े घनश्याम साहू ने अपने लेखन और निर्देशन के माध्यम से समाज, लोकजीवन और समकालीन सरोकारों को मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है. रायगढ़ जिले के सारंगढ़ के कतेली के रहवासी घनश्याम साहू द्वारा लिखित एवं निर्देशित प्रमुख नाटकों में अघनिया, चैती, लाल दुपट्टा, बाबागिरी, पहटिया और बिरसा शामिल हैं, जिनका मंचन देश के विभिन्न शहरों और सांस्कृतिक केंद्रों में हुआ है. विशेष रूप से “पहटिया” का मंचन दिल्ली, बैंगलोर, भोपाल, नागपुर, बालाघाट और चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण शहरों में हुआ, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. फ़िल्म लेखन एवं निर्देशन में योगदान घनश्याम साहू ने रंगमंच के साथ-साथ सिनेमा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके द्वारा लिखित एवं निर्देशित फ़ीचर फिल्मों में कुरुक्षेत्र, झन जाबे परदेस, दंतेला, मुरली, असुर प्रमुख हैं. डॉ. आनंद कुमार पांडेय, अभिनय डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय ने वर्ष 2010 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से नाट्यकला में एमए करने के बाद डॉ. योगेन्द्र चौबे के निर्देशन में “भारतीय रंगमंच में हबीब तनवीर के ‘नया थिएटर’ का योगदान” विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. रंगमंच के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है. वर्ष 2007 से हिंदी रंगमंच के संवर्धन और विकास के लिए निरंतर कार्यरत आनंद कुमार अपने अभिनय, निर्देशन और सांस्कृतिक गतिविधियों से नई पीढ़ी को रंगकर्म से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का आयोजन वर्तमान में वे जशपुर में रंगमंच को आगे बढ़ाने और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. बीते दो सालों से वे सफलतापूर्वक “जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव” का आयोजन कर रहे हैं, जो क्षेत्र के कलाकारों और रंगकर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. डॉ. पाण्डेय का … Read more

MP की लाडली बहनों के लिए बड़ी खबर! 37वीं किस्त की तारीख पर नजर, ₹1500 ट्रांसफर को लेकर नया अपडेट

भोपाल  मध्य प्रदेश की महिलाओं को जल्द ही जून महीने की अच्छी खबर मिलने वाली है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त की तारीख बस नजदीक आ गई है। हर महीने की तरह राज्य की 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में 1500 रुपये आने वाले हैं। हालांकि इस बार लाभार्थी महिलाओं को थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के लाडली बहना योजना के कार्यक्रम को लेकर अभी तक कोई ऐलान नहीं किया गया है। जानकारी मिल रही है कि इस बार 37वीं किस्त जारी करने का कार्यक्रम 15 जून तक खिंच सकता है। पिछले महीने 13 मई को सीएम मोहन यादव ने महिलाओं के खाते में 1500-1500 रुपये भेज दिए थे। लेकिन अभी मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं के चलते इसमें देरी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कुछ भी आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है। लाडली बहना योजना की अगली किस्त को लेकर औपचारिक ऐलान अगले 1-2 दिन में हो सकता है। पिछले 2 साल में 47 हजार करोड़ ट्रांसफर सीएम लाडली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जा रही है। पहले इस योजना के तहत 1000 रुपये दिए जाते थे। बाद में उसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। पिछले साल सीएम मोहन यादव ने इसमें बढ़ोतरी कर 1500 रुपये महीना कर दिया गया। जनवरी 2024 से मई 2026 तक लाडली बहनों के खाते में 47,775 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं। लाडली बहना योजना ऑनलाइन आवेदन कब शुरू होंगे लाडली बहना योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। अभी तक सरकार की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा जा रहा है। इस योजना को लेकर नए रजिस्ट्रेशन 2023 से ही बंद पड़े हैं। फिलहाल जो जानकारियां मिल रही हैं, उसके मुताबिक इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जब भी सरकार नए रजिस्ट्रेशन शुरू करेगी, उसके बाद ही लाडली बहना योजना के नए फॉर्म भरे जाने शुरू होंगे। क्या eKYC की वजह से बंद हो गया लाडली बहना का पैसा अगर ईकेवाईसी न कराने की वजह से आपका लाडली बहना योजना का पैसा बंद हो गया है तो अभी आपके पास वक्त है। इस काम को तुरंत करा लें। इसके लिए आपको समग्र पोर्टल पर जाना होगा और वहां आपको ईकेवाईसी करें का विकल्प दिखेगा। वहां जाकर आप अपने आधार कार्ड से ईकेवाईसी कर सकते हैं। लाडली बहना योजना का स्टेटस कैसे चेक करें आपके खाते में पैसा आया है या नहीं, इसकी जानकारी के लिए आपको लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाना होगा। यहां आपको 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' पर क्लिक करना है। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी डाल कर आप जानकारी हासिल कर सकती हैं।  

निवेश, युवा और किसान कल्याण पर फोकस, राजस्थान की उपलब्धियां गिनाईं

जयपुर  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद् की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा  ने राजस्थान के विकास के विजन, उपलब्धियों एवं भावी कार्ययोजना को प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता, सुशासन, नवाचार और समावेशी विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है तथा राजस्थान विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा अनुरूप राज्य सरकार गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को राज्य सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों के केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री के युवाओं की शक्ति के उपयोग के मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार प्रदेश की 63 प्रतिशत युवा आबादी को विकास का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। निवेश एवं औद्योगिक विकास को नई गति मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिला है तथा व्यापारिक माहौल को सरल एवं निवेश अनुकूल बनाने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी दिशा में राज्य सरकार ने निवेश प्रोत्साहन के लिए 35 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं।    उन्होंने कहा कि प्रदेश में 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश संबंधी एमओयू हस्ताक्षरित हुए हैं, जिनमें से 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। साथ ही, प्रदेश को 9 एमएमटीपीए क्षमता की आधुनिक रिफाइनरी की सौगात मिली है, जो राजस्थान के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2029 तक राजस्थान को 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में राज्य की जीएसडीपी वृद्धि दर 10.24 प्रतिशत है, जो इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में सकारात्मक संकेत है। युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ किया गया ‘माय भारत’ अभियान युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है। राजस्थान में इस अभियान को व्यापक समर्थन मिला है तथा 18 लाख पंजीकृत युवाओं के साथ राज्य देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि कौशल भारत मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना तथा राष्ट्रीय युवा नीति के अनुरूप नवीनतम राजस्थान कौशल नीति, राजस्थान युवा नीति एवं राजस्थान रोजगार नीति लागू की गई हैं। इसके अतिरिक्त सहकारिता, डेयरी विकास एवं एक जिला-एक उत्पाद जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। कृषि और किसान कल्याण में अग्रणी राजस्थान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता एवं उद्यमी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 2 करोड़ 19 लाख बीमा पॉलिसियां जारी की गई हैं तथा पीएम-कुसुम योजना (कम्पोनेंट-ए) के तहत 723 मेगावाट क्षमता की 496 सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। इन दोनों क्षेत्रों में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, नागौर, जालौर, चूरू एवं जोधपुर जैसे मरुस्थलीय जिलों में दलहन, तिलहन एवं बागवानी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन में वृद्धि हुई है, जिससे किसानों की आय एवं कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है। महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘नारी शक्ति’ विजन के अनुरूप राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘लखपति दीदी’ एवं ‘ड्रोन दीदी’ कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत राजस्थान लगातार दो वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर रहा है जबकि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में राज्य दूसरे स्थान पर है। सुशासन एवं जन शिकायत निवारण में नवाचार मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा विकसित ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार ने ‘राज उन्नति’ प्लेटफॉर्म प्रारंभ किया है। इसके माध्यम से अब तक 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक लागत की 42 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग—समीक्षा कर इन्हें फास्ट ट्रैक मोड पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्ट लोकसेवकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर रही है। जन शिकायतों के समाधान हेतु संचालित ‘संपर्क पोर्टल’ के माध्यम से शिकायतों के निस्तारण की औसत अवधि 28 दिन से घटकर 14 दिन रह गई है तथा 98 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया गया है। ग्राम विकास और आकांक्षी क्षेत्रों पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘ग्राम विकास एवं विरासत’ के विजन से प्रेरित होकर राजस्थान में ग्राम विकास चौपालों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें ग्रामीणों से सीधा संवाद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग की वर्ष 2025-26 की तृतीय तिमाही रैंकिंग में नीमराना ब्लॉक ने राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जबकि दौसा जिले के रामगढ़ पचवारा तथा जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ ब्लॉक ने विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर तक जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर तक ग्राम विकास रथ भिजवाए गए। इसके माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से 51 लाख सहित कुल 2 करोड़ लोग जुड़े। उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना के माध्यम से झुंझुनूं, चूरू एवं सीकर में 660 से अधिक हवेलियों को आर्थिक सहायता देकर पर्यटन इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यावरण एवं जल संवर्धन के प्रभावी प्रयास मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक लगभग 20 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि ‘कैच द रेन’, ‘जल संचय जनभागीदारी’ तथा ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं तथा कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य में 2 लाख 66 हजार पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हुई है। विकसित राजस्थान-2047 के लिए प्रतिबद्ध सरकार … Read more

महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बन रहा मेगा ब्रिज, उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी होगी आसान

 पटना उत्तर और दक्षिण बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले महात्मा गांधी सेतु के समानांतर गंगा नदी पर बन रहे नये फोर लेन पुल का निर्माण करीब 73 प्रतिशत पूरा हो चुका है. पटना, सारण और वैशाली जिलों को आपस में जोड़ने वाली इस 14.500 किमी लंबी परियोजना की अनुमानित लागत 2574.20 करोड़ से अब 2926.42 हो चुकी है. इस पुल से होकर 2027 तक आवागमन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. 2021 में ही शुरू हुआ था काम इस पुल का निर्माण एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड कर रही है. काम की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए अथॉरिटी इंजीनियर मैसर्स दोहवा इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है. इस परियोजना का एग्रीमेंट अमाउंट 1794.37 करोड़ रुपये था. जमीन पर काम की शुरुआत (अपॉइंटेड डेट) 25 मार्च 2021 को हुई थी. एप्रोच रोड के लिए मिट्टी भराई का काम 77 प्रतिशत पूरा इस नये पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड के लिए मिट्टी भराई का काम 77 प्रतिशत पूरा हो चुका है. इसके साथ ही आरई पैनल कास्टिंग का 92 प्रतिशत काम हो चुका है. सड़क को मजबूती देने वाले जीएसबी का 61 प्रतिशत, डब्ल्यूएमएम का 50 प्रतिशत और डीबीएम का 48 प्रतिशत काम भी जमीनी स्तर पर पूरा हो गया है. पुल के बनने से होगा यह फायदा इस पुल के बनने से गाड़ियों के लिए पटना से हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीवान का सफर बेहद आसान हो जायेगा. साथ ही उत्तर बिहार के गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में बेहतर इलाज के लिए पटना आने और जाने में सहूलियत होगी. हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों और उत्तर बिहार के किसानों की ताजी सब्जियां, फल बिना समय गंवाए पटना की मंडियों तक पहुंच सकेंगे. इससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा. क्या कहते हैं अधिकारी? पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल का कहना है कि एक्स्ट्रा डोज्ड तकनीक से बन रहे इस मुख्य पुल में कुल 33 वेल फाउंडेशन बनने हैं, जिनमें से 31 का काम पूरा हो चुका है. टोटल 33 पीलर में से 16 पियर टेबल का काम पूरी तरह तैयार है और चार पर काम चल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि तीन पियर टेबल का काम जल्द शुरू होगा. साथ ही पुल के लिए कुल 1868 कंक्रीट सेगमेंट्स की जरूरत है, जिसमें से 1381 की ढलाई हो चुकी है. 953 सेगमेंट्स को पीलर पर सफलतापूर्वक फिट भी कर दिया गया है. इस तरह से जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो सकेंगे.

3D तकनीक से जीवंत होंगे 16 संस्कार, यूपी का नया सांस्कृतिक म्यूजियम तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही ऐसा सांस्कृतिक संग्रहालय विकसित होने जा रहा है, जहां जन्म से मोक्ष तक आध्यात्म का हाइटेक संगम होगा। इसके साथ ही जनजातीय विरासत, लोक परंपराएं, संस्कार और भारतीय जीवन दर्शन आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत रूप में देखने को मिलेंगे। इस हाइटेक म्यूजियम में 3डी तकनीक से जन्म से मृत्यु तक के 16 संस्कार दिखेंगे। बीकेटी के चंद्रिकादेवी मंदिर के पास उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्राहलय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर परियोजना के निर्माण और क्यूरेशन कार्य के लिए राज्य सरकार ने करीब 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये की धनराशि जारी जारी कर दी गई है। इस परियोजना का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा इस हाईटेक संग्रहालय का सबसे खास हिस्सा क्यूरेशन फ्रेमवर्क होगा, जिसमें जन्म से मृत्यु तक भारतीय जीवन यात्रा और अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों को केंद्र में रखा गया है। आधुनिक तकनीकों जैसे थ्री डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, पैनोरमिक वीडियो वॉल, काइनेटिक मूर्तियां और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के जरिए अमूर्त आध्यात्मिक अवधारणाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। गैलरी वन में भारतीय रीति-रिवाजों की उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं और प्रकृति के पांच तत्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ उनके संबंध को दर्शाया जाएगा। यहां 270 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन पर ओरिएंटेशन फिल्म दिखाई जाएगी। इसी गैलरी में सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें गर्भाधान, नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे संस्कार शामिल होंगे। प्रवेश प्लाजा से ओपन थिएटर तक ढेरों सुविधाएं परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, पार्किंग, स्मारिका केंद्र, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, आवास ब्लॉक, ओपन थिएटर, तालाब, एडमिन ब्लॉक, निगरानी टावर और सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संग्रहालय का पूरा ढांचा पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक डिजाइन के समन्वय पर आधारित होगा। यहां आने वाले पर्यटक केवल प्रदर्शनी नहीं देखेंगे, बल्कि भारतीय संस्कारों और जीवनचक्र को अनुभव भी कर सकेंगे। पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस परियोजना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह केवल संग्रहालय न रहकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत केंद्र बन जाए। यह केंद्र लखनऊ में सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देगा और देश-विदेश के पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा।

आम महोत्सव बना सफलता की मिसाल, किसानों और महिला एफपीओ को मिला बेहतर बाजार

रांची पूर्वी सिंहभूम अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 से बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत आम बागवानी एवं मिश्रित आम बागवानी का कार्य विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के आलोक में किया जा रहा है। राज्य में लगभग 6000 एकड़ में बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से लाभुकों को न सिर्फ मजदूरी बल्कि स्थायी आजीविका के स्रोत भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 इसकी सफलता की कहानी स्वयं बयान कर रहा है। 96 हजार किलो से अधिक आम उत्पादन ने रचा नया कीर्तिमान वर्ष 2026-27 में कुल 96,175 किलो आम फलों का उत्पादन विभिन्न प्रखंडों में बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों द्वारा किया गया। इसके विक्रय हेतु जिला स्तर पर आम महोत्सव मेले का आयोजन किया गया, जो अपने आप में बेहद सफल रहा। एफपीओ और महिला किसानों ने बढ़ाया मेले का आकर्षण विभिन्न प्रखंडों से आए बिरसा हरित ग्राम योजना के किसान, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के सहयोग से एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों) जैसे बोड़ाम, तेजस्वी महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहरागोड़ा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, कन्हाईसर चाकुलिया महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा धालभूमगढ़ नारी शक्ति आजीविका प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की दीदियों एवं किसानों द्वारा उत्साहपूर्वक मेले में भाग लिया गया। आम महोत्सव में किसानों को मिली अच्छी आय किसानों और एफपीओ से कुल 1,249 किलो आम की खरीद कर आम महोत्सव में स्टॉल लगाया गया। यह न सिर्फ दीदियों के लिए उत्साह का कारण बना, बल्कि जमशेदपुरवासियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। बिरसा हरित ग्राम योजना के आम किसानों की मुस्कान बने। जिला स्तरीय आम महोत्सव में कुल 64,150 रुपये की आय हुई। साथ ही किसानों ने स्थानीय बाजार में भी आमों का विक्रय कर अच्छी आमदनी अर्जित की। 1400 किसान एफपीओ से जुड़े, बाजार तक मिली सीधी पहुंच बाजार विपणन समिति, पूर्वी सिंहभूम के सहयोग तथा जेएसएलपीएस के माध्यम से बिरसा हरित ग्राम योजना के 1400 किसानों को एफपीओ से टैग किया गया, जो उनके उत्पादों को स्थानीय और बाहरी विक्रेताओं तक पहुंचा रहे हैं। जेएसएलपीएस के तीन एफपीओ में कुल 4,103 महिला किसान शेयरधारक हैं, जबकि धालभूमगढ़ नारी शक्ति प्रोड्यूसर कंपनी में 2,085 शेयरधारक जुड़ी हुई हैं। इनके माध्यम से ट्रेडिंग का कार्य किया जा रहा है। APEDA और KISAN SAY से जुड़कर बढ़े निर्यात के अवसर इस वर्ष मनरेगा आधारित बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों के साथ समन्वय स्थापित कर Renown Agency के साथ टाई-अप किया गया है। इसके तहत A Category के आमों को APEDA और KISAN SAY जैसे संस्थानों के साथ ऑनबोर्ड किया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिल सके। पूर्वी सिंहभूम से लंदन तक पहुंचा बिरसा हरित ग्राम योजना का आम बोड़ाम और बहरागोड़ा से 1.5 टन बिरसा हरित ग्राम योजना के आम को जिला प्रशासन के सहयोग से एफपीओ के माध्यम से लंदन भेजे जाने के लिए फ्लैग ऑफ किया गया। यह योजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही है बिरसा हरित ग्राम योजना बिरसा हरित ग्राम योजना झारखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो ग्रामीणों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना की सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।  

काली फिल्म, हूटर और अवैध मॉडिफिकेशन पर पुलिस का बड़ा एक्शन

 जयपुर पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस द्वारा प्रदेशभर में चलाए जा रहे विशेष यातायात प्रवर्तन अभियान ने अब और अधिक गति पकड़ ली है। अभियान के दौरान यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों, अवैध रूप से वाहनों में मॉडिफिकेशन कराने वालों तथा हूटर-बत्ती और काली फिल्म लगाकर रौब गांठने वालों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभियान के दसवें दिन को पूरे प्रदेश में विशेष नाकेबंदी एवं प्रवर्तन अभियान के दौरान कुल 9,703 वाहनों के विरुद्ध चालान, जब्ती एवं अन्य विधिक कार्रवाई की गई।   इस तरह हुई कार्रवाई डीजी ट्रैफिक श्री अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में चल रहे इस अभियान के संबंध में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (यातायात) डॉ. बी. एल. मीणा ने बताया कि अभियान के दसवें दिन हुई कार्रवाई में सर्वाधिक 3,638 वाहनों के शीशों पर नियम विरुद्ध लगाई गई काली फिल्म (ब्लैक फिल्म) के मामलों में कार्रवाई की गई। इसके अलावा 2,450 वाहनों पर नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह पाए गए, जबकि 1,373 वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन अंकित होने के कारण उनके विरुद्ध कार्यवाही की गई। अभियान के दौरान वाहन की संरचना (बॉडी/चेसिस) में अवैध परिवर्तन करने वाले 945 वाहनों को भी चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की गई। इसी प्रकार 800 वाहनों पर अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर लगे पाए गए, जबकि 497 वाहनों में प्रेशर हॉर्न एवं एयर हॉर्न का उपयोग करने पर चालान एवं अन्य विधिक कार्यवाही अमल में लाई गई। अभियान के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में वाहन चालक अब भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए वाहनों के शीशों पर काली फिल्म लगा रहे हैं। ऐसे 3,638 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इसके अलावा 2,450 वाहनों पर नियम विरुद्ध नंबर प्लेट अथवा पंजीयन चिन्ह पाए जाने पर चालान एवं अन्य कानूनी कार्रवाई की गई। अवैध हूटर-बत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई पुलिस ने आमजन में भय एवं प्रभाव पैदा करने के उद्देश्य से वाहनों पर लगाई गई अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट और हूटर के खिलाफ भी अभियान चलाया, जिसके तहत 800 वाहनों पर कार्रवाई की गई। वहीं ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 497 प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न भी जब्त किए गए। रौब दिखाने वालों को नहीं मिलेगी छूट डॉ. मीणा ने कहा कि वाहन पर जाति, पद, संगठन अथवा अन्य अनाधिकृत शब्द लिखना, अवैध हूटर-बत्ती लगाना, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट उपयोग करना तथा काली फिल्म लगाकर वाहन चलाना कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस का यह विशेष अभियान आगामी दिनों में और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।