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किसान हित में पंजाब ने तोड़ा रिकॉर्ड, सबसे ज्यादा मुआवजा वितरण किया

पंजाब पंजाब में बाढ़ ने किसानों की मेहनत और ख्वाबों को डुबो दिया, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार ने किसानों को अकेला नहीं छोड़ा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि हर प्रभावित किसान को ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा। यह सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे देश में अब तक का सबसे बड़ा मुआवज़ा है। मान सरकार ने यह कदम सिर्फ कागज़ों पर नहीं बल्कि किसानों के दर्द को महसूस करते हुए उठाया है। जब हरियाणा में किसानों को अधिकतम ₹15,000 प्रति एकड़, गुजरात में करीब ₹8,900 प्रति एकड़, मध्य प्रदेश में करीब ₹12,950 प्रति एकड़, और उत्तर प्रदेश व राजस्थान में अधिकतर ₹5,000- ₹7,000 प्रति एकड़ तक राहत मिलती है, वहीं पंजाब के किसानों को सीधा ₹20,000 प्रति एकड़ देने का फैसला किसानों की ताक़त और मेहनत को सलाम करने जैसा है। बाढ़ के बीच सरकार का यह फैसला उम्मीद की नई किरण इतना ही नहीं, मान सरकार ने बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिवारों को ₹4 लाख की सहायता और खेतों में जमी रेत को बेचने की अनुमति भी दी है, ताकि किसानों को तुरंत नक़दी मिले और अगली बुवाई का रास्ता आसान हो सके। यह कदम साफ़ दिखाता है कि सरकार किसानों की मुश्किलें समझती है और उनके लिए हर मुमकिन राहत पहुँचाना चाहती है। आज जब पंजाब का किसान बाढ़ से तबाह खेतों और टूटे हुए घरों के बीच संघर्ष कर रहा है, तब सरकार का यह फैसला उनके लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है।   सरकार का ये फैसला किसानों को संघर्ष से सहारा और भविष्य के लिए विश्वास देता है मान सरकार ने राहत की राशि को सबसे ऊपर रखकर साबित कर दिया है कि किसान सिर्फ़ वोटर नहीं, बल्कि पंजाब की असली ताक़त हैं। यह फैसला किसानों को संघर्ष से सहारा और भविष्य के लिए विश्वास देता है। किसान की जीत ही पंजाब की जीत है, और मान सरकार हर हाल में किसानों के साथ खड़ी है।  

मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद शहडोल का कन्या शिक्षा परिसर अब माता शबरी के नाम से जाना जाएगा

शहडोल  मध्य प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के कन्या शिक्षा परिसरों का नाम अब 'माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर' होगा. राज्य सरकार ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं. इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया था.  प्रदेश में जनजातीय वर्ग की बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 82 कन्या शिक्षा परिसरों और 8 आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है. इन संस्थानों में विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधा के साथ आवासीय सुविधा भी दी जा रही है. कन्या शिक्षा परिसर में कक्षा छठवीं से 12वीं तक प्रति कक्षा 70 विद्यार्थी के मान से 490 लड़कियां और आदर्श विद्यालयों में कक्षा छठवीं से 12वीं तक प्रति कक्षा 35 विद्यार्थी के मान से 245 विद्यार्थी पढ़ कर रहे हैं.  सरकार की ओर से बताया गया कि  छात्राओं को यूनिफॉर्म, ब्लू ब्लेजर, किताब, स्टेशनरी, पोषण आहार दिया जाता है. प्रति विद्यार्थी 15 हजार रुपए प्रतिवर्ष दिए जाते हैं. कन्या शिक्षा परिसर में तमाम गतिविधियों जैसे खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, चिकित्सा, आकस्मिक चिकित्सा के लिए प्रति विद्यालय 7 लाख 10 हजार वार्षिक खर्च का प्रावधान हो. 

विधानसभा में बड़ा बदलाव: अरविंद शर्मा नए प्रमुख सचिव, AP सिंह की ढाई साल बाद सेवानिवृत्ति

भोपाल  लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश विधानसभा आए सचिव अरविंद शर्मा का संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में हो चुका है. अब उन्हें इस माह के अंत में मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के पद पर प्रमोट किया जाएगा. 2 साल सेवा वृद्धि और 6 महीने का संविदा नियुक्ति पूरी करके विधानसभा के मौजूदा मुख्य सचिव एपी सिंह इसी माह रिटायर होने जा रहे हैं. मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह इस महीने 30 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं और अब उनके पुनर्नियुक्ति की संभावना नहीं है। इसे देखते हुए विधानसभा में सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे अरविंद शर्मा को नया प्रमुख सचिव बनाए जाने की संभावना है। प्रमुख सचिव की नियुक्ति का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को होता है। चूंकि अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ही अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लेकर आए थे, इसलिए उनका प्रमुख सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है। 1 अक्टूबर से मिल सकती है जिम्मेदारी वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह को मानसून सत्र के दौरान सदन में स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने विदाई दी थी और विधायकों से शुभकामनाएं दिलाई थीं। इससे यह संकेत स्पष्ट हो गया था कि एपी सिंह का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ऐसे में यह माना जा रहा है कि एपी सिंह का कार्यकाल अब नहीं बढ़ेगा और नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाएगा। अरविंद शर्मा की दावेदारी सबसे मजबूत विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर लाकर विधानसभा सचिव बनाया था। एक साल की प्रतिनियुक्ति के बाद उनका संविलियन विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और विधानसभा नियमों के अनुसार वे 62 साल की उम्र तक सेवा में रह सकते हैं। इस हिसाब से यदि उन्हें प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो वे अगले दो सालों तक इस पद पर कार्यरत रह सकते हैं। चूंकि स्पीकर की पसंद वे स्वयं हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी बार सेवा हुई वृद्धि विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ढाई साल पहले सेवानिवृत्ति हो रहे थे. उन्हें साल 2023-24 के लिए एक साल की सेवा वृद्धि दी गई. इसके बाद 2024-25 में दूसरी बार 1 साल की सेवा वृद्धि दी गई. यह कार्यकाल 5 महीने पहले समाप्त हो गया था. इसके बाद 6 महीने की संविधान नियुक्ति प्रमुख सचिव के पद पर दी गई थी. यह अवधि इसी महीने 30 सितंबर को खत्म हो रही है. मध्य प्रदेश विधानसभा में हुआ संविलियन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में विधानसभा के कामों के लिए अरविंद शर्मा को सचिव बनाकर प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश लेकर आए थे. अब उनका संविलियन मध्य प्रदेश विधानसभा में कर दिया गया है. मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह का इसी महीने 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसके बाद अरविंद शर्मा विधानसभा के प्रमुख सचिव बन जाएंगे. प्यासी का सबसे ज्यादा लंबा रहा कार्यकाल मध्य प्रदेश विधानसभा के पांचवें प्रमुख सचिव के तौर पर अरविंद शर्मा जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह, भगवान देव इसरानी, राजकुमार पांडे और ए के प्यासी मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव रह चुके हैं. सभी विधानसभा प्रमुख सचिव में सबसे लंबा डॉक्टर एके पयासी का कार्यकाल रहा है साल 2002 से लेकर 2011 तक विधानसभा प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी में रहे थे. हालांकि की 9 से 10 साल तक अवधेश प्रताप सिंह भी प्रमुख सचिव विधानसभा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. एपी सिंह को सेवा विस्तार की उम्मीद नहीं एपी सिंह पहले ही 62 साल की उम्र में रिटायर हो चुके हैं, फिर उन्हें दो साल का विस्तार और फिर 6 महीने की संविदा सेवा दी गई थी, जो 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। अब वे 64 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और स्पीकर द्वारा उन्हें औपचारिक विदाई दी जा चुकी है, इसलिए सेवा बढ़ाने की संभावना नहीं बची है। हालांकि सिंह ने प्रमुख सचिव के रूप में विधानसभा में लंबा कार्यकाल पूरा किया है। डीजे को पीएस बनाने का स्पीकर को है पावर विधानसभा अधिनियम के तहत स्पीकर के पास यह भी अधिकार है कि वे जिला न्यायाधीश (डीजे) स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार फिलहाल इसकी संभावना कम है, क्योंकि अरविंद शर्मा ही स्पीकर की प्राथमिकता में हैं। विधानसभा सचिव पद की स्थिति विधानसभा में सचिव के दो पद होते हैं। फिलहाल एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं जबकि दूसरा पद रिक्त है। चूंकि प्रमोशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए अगर शर्मा को प्रमुख सचिव बनाया जाता है, तो सचिव के दोनों पद कुछ समय के लिए रिक्त रखे जा सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार से संचालित की जा सकती हैं। विधानसभा में अपर सचिव के चार पद हैं, जिनमें से तीन भरे हुए हैं जबकि एक पद रिक्त है।  

बिहार की सियासत में नई चाल: अरुण भारती को मिलेगा टिकट, बहनोई बनेंगे डिप्टी सीएम चेहरा?

पटना ‘बिहार बुला रहा है’ से शुरू होकर ‘उप-मुख्यमंत्री लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) से कोई और होगा’ तक पहुंचे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के सांसद बहनोई अरुण भारती जमुई जिले की सिकंदरा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। सरकार बनने पर डिप्टी सीएम पद के लिए लोजपा कोटा से अरुण का नाम चिराग बढ़ा सकते हैं। अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सिकंदरा जमुई लोकसभा का हिस्सा है, जहां से अरुण 2024 में पहली बार एमपी बने हैं। चिराग से उलझते रहने वाले केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तान आवामी मोर्चा (हम) के प्रफुल्ल मांझी अभी सिकंदरा के विधायक हैं। तीन बार बीपीएससी मेंस और एक बार यूपीएससी पीटी पास कर चुके प्रफुल्ल मांझी साधारण परिवार से आते हैं। सूत्रों का कहना है कि चिराग की पार्टी की डिमांड लिस्ट में सिकंदरा के साथ ही जमुई लोकसभा की चकाई सीट भी शामिल है। चकाई से दिवंगत समाजवादी नेता नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित सिंह निर्दलीय विधायक और नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री हैं। सुमित ने नीतीश को समर्थन दिया है और एनडीए के अंदर जेडीयू के करीब हैं। कभी लोजपा से जुड़े रहे सुमित 2010 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के टिकट पर चकाई से पहली बार विधायक बने थे। 2015 में निर्दलीय लड़कर वो राजद से हारे थे, लेकिन 2020 में सबको हरा दिया। लोजपा चौथे नंबर पर रही थी। चिराग ने 2 महीने पहले साफ-साफ कह दिया था कि 2025 में एनडीए सरकार बनी तो नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे। डिप्टी सीएम पद पर दावेदारी में चिराग ने कहा था कि लोजपा-आर का कोई अनुभवी कार्यकर्ता इस पद को सुशोभित करे। चिराग के शुरुआती तेवरों से भ्रम हुआ था कि बिहार बुला रहा है बोलकर वो सीएम बनने की रेस में हैं। अब साफ है कि चिराग को सीएम पद से कम मंजूर नहीं है। चिराग ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में कहा है कि इस बार एनडीए सरकार में लोजपा-आर की अहम भूमिका होगी। सूत्रों के मुताबिक एनडीए में सीट बंटवारे की मुख्य बातचीत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच चल रही है। चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियां सीटों की संख्या और कौन-कौन सी सीट जैसी बातें भाजपा से कर रही हैं। वैसे, सीट बंटवारे से पहले ही नीतीश कुमार सभाओं में जेडीयू उम्मीदवार के नाम घोषित करने लगे हैं। नीतीश ने बक्सर में राजपुर सीट से संतोष निराला को कैंडिडेट बता दिया है।  

रेलवे का नया कदम: स्टेशनों पर खुलेंगे प्रीमियम ब्रांड स्टोर, कपड़े-जूते से लेकर शिल्पकला तक सब मिलेगा

रायपुर मंडल के रेलवे स्टेशनों में भी अब एयरपोर्ट की तर्ज पर ब्रांडेड कंपनियों की दुकानें खुलेंगी, जहां अच्छी क्वालिटी के कपड़े, जूते, छत्तीसगढ़ के हर्बल उत्पाद, शिल्पकला समेत चीजें स्टेशनों की दुकानों में मिलेंगी. इसके आवदेन मंगाने शुरू कर दिए हैं. मंडल में आउटलेट्स रायपुर, दुर्ग, भाटापारा व भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशनों पर गैर-किराया राजस्व नीति के अंतर्गत स्थापित किए जाएंगे. रायपुर में बड़ी कंपनियों के स्थापित होने से यात्रियों के लिए स्टेशन में सुविधाएं बढ़ जाएंगी. इसके साथ दुर्ग और भिलाई पावर हाउस में यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है. इसीलिए यहां भी कपड़ों और जूतों की दुकान खुलने से आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है. रेलवे ने साफ किया है कि इन आउटलेट्स में खाने-पीने का सामान नहीं बेचा जाएगा. सभी दुकानें बोली प्रक्रिया के जरिए तय की जाएंगी. शुरुआत में दुकानों का करार 5 साल के लिए होगा, जिसे अच्छे प्रदर्शन पर 9 साल तक बढ़ाया जा सकता है. इसमें केवल प्रीमियम दुकानों को मौका मिलेगा. स्टेशनों में स्थापित किए जाएंगे रायपुर रेल मंडल के सीनियर DCM अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया कि रायपुर मंडल के रेलवे स्टेशनों पर प्रतिष्ठित सिंगल ब्रांड रिटेलर्स कंपनियों से प्रीमियम सिंगल ब्रांड आउटलेट्स गैर-खाद्य श्रेणियां स्थापित करने आवेदन आमंत्रित किया गया है. यह आउटलेट्स रायपुर, दुर्ग, भाटापारा एवं भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशनों पर गैर-किराया राजस्व नीति के अंतर्गत स्थापित किए जाएंगे, जिसमें यात्रा सहायक सामग्री, परिधान और फैशन से संबंधित सामग्री, जूते एवं खेल परिधान और छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रीमियम ब्रांड को प्राथमिकता दी जाएगी. छत्तीसगढ़ के फैशन से जुड़ी स्थानीय प्रीमियम ब्रांड को भी प्राथमिकता इन आउटलेट्स में यात्रियों को यात्रा सहायक सामग्री जैसे सैमसोनाइट, वीआईपी, सफारी, अमेरिकन टूरिस्टर, परिधान एवं फैशन ब्रांड्स जैसे एरो, वैन ह्यूसन, बीबा, पीटर इंग्लैंड, फेबइंडिया, जूते एवं खेल परिधान जैसे नाइकी, एडिडास, प्यूमा, रीबॉक उपलब्ध होंगे. साथ ही छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रीमियम ब्रांड्स जैसे हथकरघा, जनजातीय कला, हर्बल उत्पाद और शिल्पकला को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा. रेलवे का कहना है कि इन दुकानों से यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलेगी. दुकान खोलने मिलेगी जगह रेलवे चाहता है कि स्टेशन पर सिर्फ बड़े, भरोसेमंद और पहले से स्थापित ब्रांड ही दुकान खोले. अगर किसी ब्रांड के पास एयरपोर्ट या मॉल पर दुकान चलाने का अनुभव है, तो उसे पहले मौका मिलेगा. रायपुर, दुर्ग, भाटापारा और भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशनों पर जगह उपलब्ध कराई जाएगी. रायपुर रेलवे स्टेशन में अभी तक कपड़े, जूते और फैशन से जुड़ी चीजे नहीं मिलती हैं. एयरपोर्ट की तर्ज पर दुकानों के खुलने से सुविधाएं बढ़ेंगी और राजस्व भी बढ़ेगा. रेलवे स्टेशन में सभी वर्गों के यात्री सफर करते हैं. लोकल और बड़े ब्रांड की दुकानों से राजस्व लाभ भी होगा.

चौंकाने वाला फैसला: अकाली दल करेगा उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार

पंजाब   शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने सोमवार शाम को कहा कि वह पंजाब में आई बाढ़ के मद्देनजर आज होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करेगा. अकाली दल ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, जब भी और जहां भी कोई संकट आया है, पंजाब और पंजाबी हमेशा देश के साथ खड़े रहे हैं. लेकिन आज पंजाबियों को बाढ़ के कारण खुद एक बहुत ही गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. राज्य का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पानी में डूबा हुआ है और घर व फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं. सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाली पार्टी ने बाढ़ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह आप सरकार की लापरवाही और अक्षमता के कारण हुई एक मानव निर्मित त्रासदी है. बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल बठिंडा से पार्टी की एकमात्र सांसद हैं. राज्य और केंद्र सरकार ने नहीं की मदद पोस्ट में कहा गया, न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार पंजाबियों की किसी भी तरह से मदद के लिए आगे आयी है. शिरोमणि अकाली दल पंजाब की जनता की भावनाओं और आवाज का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए, पार्टी ने उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है. पंजाबी हमेशा देश के साथ खड़े अकाली दल ने कहा कि पंजाब और पंजाबी हमेशा राष्ट्र के साथ खड़े रहे हैं, जब भी और जहां भी कोई संकट आया है. लेकिन आज पंजाबियों को बाढ़ के कारण खुद एक बहुत ही गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. राज्य का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पानी में डूबा हुआ है और घर और फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं. यह पंजाब सरकार की लापरवाही और अक्षमता के कारण हुई एक मानव निर्मित त्रासदी है. किसी भी मदद के बिना लड़ रहे लोग इस आपदा में न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार पंजाबियों की किसी भी तरह से मदद के लिए आगे आई है. इस संकट से आम तौर पर पंजाबी और खासकर सिख राज्य या केंद्र सरकार की किसी भी मदद के बिना लड़ रहे हैं. राज्य के ग्रामीण युवा गुरु साहिबान की कृपा और प्रेरणा से प्रेरित होकर, धार्मिक समर्पण की भावना से बाढ़ के खिलाफ इस लड़ाई में सबसे आगे हैं. शिरोमणि अकाली दल उनकी भावना और प्रतिबद्धता के आगे नतमस्तक है. साथ ही अपने लोगों की मदद के लिए पूरी तरह से तत्पर भी है. उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला अकाली दल ने कहा कि, जब पंजाब इस त्रासदी से जूझ रहा है, देश आज उपराष्ट्रपति चुनाव में जा रहा है. लेकिन पंजाब के लोग राज्य सरकार और केंद्र सरकार से बेहद परेशान और नाराज़ हैं क्योंकि न तो पंजाब सरकार, न ही केंद्र सरकार और न ही कांग्रेस उनकी मदद के लिए आगे आई है. अकाली दल पंजाब के लोगों की भावनाओं और आवाज का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए, पार्टी ने उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.  

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, मिजोरम से आनंदविहार तक चलेगी नई राजधानी एक्सप्रेस, भागलपुर को मिलेगा फायदा

भागलपुर भागलपुर जिले वासियों के लिए एक बड़ा तोहफा आने वाला है। मिजोरम की राजधानी आइजोल के पास स्थित एनएफआर रेलवे साइरांग से नई दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल तक एक नई राजधानी एक्सप्रेस का परिचालन शुरू होने जा रहा है। यह भागलपुर के लिए दूसरी राजधानी और तीसरी वीवीआईपी ट्रेन होगी। रेलवे सूत्रों के अनुसार, इस राजधानी एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना कर सकते हैं। यह ट्रेन भागलपुर और जमालपुर के यात्रियों को पूर्वोत्तर भारत और देश की राजधानी से सीधे जोड़ने में मदद करेगी। 13 सितंबर को ट्रायल पूर्व रेलवे, कोलकाता के सीपीआरओ दीप्तिमोय दत्ता ने बताया कि 13 सितंबर को साइरांग से आनंद विहार के लिए ट्रेन का ट्रायल किया जाएगा। नियमित परिचालन की तारीख की घोषणा शीघ्र की जाएगी। मार्ग और समय-सारिणी नई राजधानी एक्सप्रेस साइरांग से चलकर न्यू जलपाईगुड़ी, मालदा टाउन, साहिबगंज, भागलपुर, जमालपुर, किऊल, पटना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और कानपुर सेंट्रल होते हुए आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी।     ट्रेन संख्या 20507: साइरांग से हर शुक्रवार को शाम 4.30 बजे रवाना होगी और रविवार को सुबह 10.10 बजे आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी।     ट्रेन संख्या 20508: आनंद विहार टर्मिनल से रविवार को शाम 7.50 बजे चलेगी और मंगलवार को दोपहर 3.15 बजे साइरांग पहुंचेगी। यह ट्रेन कुल 2,510 किलोमीटर की दूरी 42 घंटे 20 मिनट में तय करेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और उन्हें सुविधाजनक एवं आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। नई राजधानी एक्सप्रेस न सिर्फ भागलपुर और जमालपुर के यात्रियों के लिए लाभकारी होगी, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।

इंदौर और उज्जैन में जल्द शुरू होगी सस्ती सुगम परिवहन सेवा, मार्च से यात्रियों के लिए सुविधा

इंदौर  मध्य प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डेडलाइन तय कर दी है। अब हर हाल में मार्च के पहले बसों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। सबसे पहले इंदौर और इसके बाद उज्जैन से सेवा प्रारंभ की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय में परिवहन विभाग के कामकाज की समीक्षा की। यहां अधिकारियों ने बताया कि अब यातायात नियम तोड़ने पर चालानी कार्रवाई का अधिकार प्रधान आरक्षक को भी दिया जाएगा। इस संबंध में शीघ्र ही अधिसूचना जारी होने वाली है। बता दें कि वर्ष 2006 में मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम बंद होने के बाद से सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि उज्जैन जिले में सार्वजनिक बस संचालन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। जबलपुर और इंदौर में रूट सर्वे और श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और सर्वे भी लगभग पूरा हो गया है। वाहनों की स्पीड पर नियंत्रण जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अंतरविभागीय बैठक नियमित रूप से हो। सड़कों पर सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने पर उन्हें तत्काल दूर किया जाए। बस स्टाप पर नागरिकों को साफ-सफाई के साथ आवश्यक सुविधाएं मिलें। परिवहन विभाग की राजस्व संग्रह निगरानी प्रणाली को और मजबूत करें। वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। इसके साथ गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास आवश्यक कागजों की वैधता की जांच भी नियमित हो। परिवहन विभाग में बेहतर प्रबंधन के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। सुगम परिवहन सेवा में हो कम से कम किराया मुख्यमंत्री ने कहा कि सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुविधाओं और कम से कम किराये पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसमें इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग को प्रोत्साहित करें। परिवहन सेवा के लिए बने नियमों का सख्ती से पालन हो। बसों में शहरों एवं गांवों के नाम सामने के कांच पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। इसके साथ ही बस स्टाप पर भी गांव और नगरों के नाम लिखे हों। यात्री बसों का बीमा अनिवार्य हो। सभी कार्य नियमों के अंतर्गत हों, पारदर्शिता रहे। दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा जाए। बसें फिट हों, स्टाफ का व्यवहार अच्छा हो। अप-डाउनर्स को भी आवश्यक सुविधाएं दी जाएं। इस वर्ष 16 लाख 60 हजार नए वाहन आए, जिनमें 15 प्रतिशत ईव्ही बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 16 लाख 60 हजार वाहनों का पंजीयन किया गया है। इसमें 2 लाख 58 हजार यानी 15 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल वाहन हैं। प्रदेश में आन रोड वाहनों की संख्या एक करोड़ 80 लाख के करीब है। परिवहन से प्राप्त होने वाली राजस्व में पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बैठक में राजस्व वृद्धि के किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई।

फार्मेसी पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन होगा, उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पारदर्शिता पर जोर दिया

मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अब ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अपूर्ण हैं, जिन्हें समय पर पूरा करवाना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल होटल पलाश भोपाल में मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएँ। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार के लिये सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है। नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष संजय कुमार जैन, सदस्य राजू चतुर्वेदी, गौतमचंद धींग, रामरतन गर्ग, सत्येन्द्र सिंह चौहान, देवेंद्र कुमार बजाजत्य, अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, म.प्र.), आत्री मुख्य विश्लेषक और चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

सपा विधायक मनोज पारस की मुश्किलें बढ़ीं: पेश नहीं होने पर कोर्ट ने दी जेल की सजा

बिजनौर  नगीना से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक मनोज पारस को 2020 के हत्या के प्रयास के एक मामले में जमानत याचिका खारिज होने के बाद जेल भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) जितेंद्र चौहान ने बताया कि रसीदपुर गढ़ी निवासी छतर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 सितंबर, 2020 को झालू रोड पर उन पर चाकुओं से हमला किया गया था।  समाजवादी पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के साथ, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक पारस को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया था। बाद में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। चौहान ने बताया कि मंगलवार को पारस न्यायाधीश शांतनु त्यागी की अदालत में पेश हुए, जिन्होंने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें जेल भेज दिया।