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झुग्गी-झोपड़ी पर बुलडोजर कार्रवाई: रांची में भाकपा माले ने जताया विरोध

रांची झारखंड में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी- लेनिनवादी) की रांची नगर कमेटी के सुहैल अंसारी ने कहा कि रांची के हटिया में एचईसी की जमीन से अतिक्रमण हटाने के नाम पर 30-40 वर्षों से रह रहे लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाकर 100 से अधिक घरों को तोड़ जाने की घटना को गलत बताया और कड़ा रोष व्यक्त किया है। भाकपा माले ने कहा कि रांची राज्य की राजधानी है और रोजगार की संभावनाओं से भरा शहर है इसलिए विभिन्न जिलों से लोग सुनहरे भविष्य की तलाश में यहां आते हैं। इनमें असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, घरेलू काम करने वाली महिलाएं, निर्माण मजदूरों और सफाई कर्मियों के लिए ये झुग्गियां जीवन का आधार हैं, उनके बिना वैकल्पिक रहने की व्यवस्था किए बुलडोजर चलाना अनुचित है। भाकपा माले ने सरकार से मांग की है कि जिन लोगों के घर उजड़े हैं, उनके लिए तुरंत रहने की व्यवस्था की जाए। साथ ही, जहां ये झुग्गियां थीं, वहां की सड़क, बिजली, पानी और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं पुन: बहाल कराई जाएं। भाकपा माले ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के नफरती एजेंडे को बाबूलाल मरांडी बढ़ावा दे रहे हैं। भाजपा के विधानसभा क्षेत्र में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई, जिसमें सैकड़ों लोग बेघर हुए, लेकिन भाजपा ने ध्यान नहीं दिया। भाजपा केवल बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर जनता को भ्रमित कर रही है। भाकपा माले रांची नगर कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया तो उनका आंदोलन और तेज होगा।  

कलेक्टर का सख्त आदेश: छिंदवाड़ा में ई-अटेंडेंस में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, शिक्षक होंगे जिम्मेदार

छिंदवाड़ा  ई-अटेंडेंस (e-attendance) नहीं लगाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई तय है, ई अटेंडेंस नहीं भरने वाले वि‌द्यालय इंचार्ज की सूची मांगते हुए छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की उपस्थिति एवं समय पालन शिक्षा की गुणवत्ता का मूल आधार है, इसलिए इस व्यवस्था में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्ट्रेट में हुई बैठक कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने  कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल, सहायक संचालक शिक्षा जनजातीय कार्य विभाग उमेश सातनकर, डीपीसी जगदीश इड़पाचे, जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी, बीआरसीसी उपस्थित रहे।  जेईई एवं नीट परीक्षा की तैयारी जेईई एवं नीट (JEE-NEET Exam) की तैयारी तेज समीक्षा बैठक के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल ने सरकारी स्कूलों में संचालित जेईई एवं नीट कक्षाओं की वार्षिक कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी विकासखंडों में शिक्षक-विद्यार्थियों के वॉट्सएप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन टेस्ट लिए जाएंगे। उनका रिकॉर्ड संधारित किया जाएगा। विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार नया पाठ्यक्रम कक्षा 11 वीं और 12 वीं के साथ जोड़ा गया है। पालकों के घरों में होगी पेरेंट-टीचर मीटिंग कलेक्टर ने नवाचार करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षकों को निर्देश दिए कि अब पेरेंट-टीचर मीटिंग (Parent-teacher meeting) सीधे पालकों के घरों में आयोजित होगी। प्रत्येक 15 दिन में कम से कम एक पालक के घर में बैठक की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। कलेक्टर ने शिक्षकों से आत्ममंथन करते हुए वेतन अनुरूप कार्य करने की उमीद की है। उन्होंने कहा कि हर शिक्षक को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि उन्हें जो वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, क्या वे उसके अनुरुप अपने कर्तव्यों का इमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। नियमित संचालित हों रेमेडियल कक्षाएं कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने रेमेडियल कक्षाएं लगातार संचालित करने के निर्देश देते हुए कमजोर वि‌द्यार्थियों की कमियों को दूर करने के निर्देश दिए ताकि वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं करने वाले अतिथि शिक्षकों पर कार्यवाही करने के दिए निर्देश भी दिए हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि शिक्षक यदि अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रहे हैं तो उन्हें तत्काल हटाया जाए। उन्होंने अतिथि शिक्षकों को नियमित और समय पर कक्षाएं नहीं लेने पर सेवाएं समाप्त करने की हिदादयत दी। 

शिक्षा में उत्कृष्टता की पहचान: प्रो. नम्रता वडेरा सम्मानित

समराला  पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के समाज विज्ञान विषय की प्रो. डॉ. नम्रता वडेरा को कर्नाटक के बेंगलुरु में डॉ. एस. राधाकृष्णन शिक्षक कल्याण संघ की ओर से ‘भारत शिक्षा रत्न अवॉर्ड’ दिए जाने पर कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने सम्मानित किया। डॉ. नम्रता विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान एवं सामाजिक मानव विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि शिक्षकों को सम्मान मिलने से संस्थान की गरिमा में वृद्धि होती है। डॉ. नम्रता वडेरा ने बताया कि देशभर के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से 22 शिक्षकों को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्होंने बताया कि डॉ. एस. राधाकृष्णन शिक्षक कल्याण संघ भारत का अपनी तरह का सबसे बड़ा राष्ट्रीय संगठन है, जिसमें सभी राज्यों से सदस्य शामिल होते हैं। यह संघ शिक्षा क्षेत्र में कुशलता एवं पेशेवर दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के लिए यह अवॉर्ड प्रदान करता है। उल्लेखनीय है कि डॉ. नम्रता वडेरा को इससे पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

EOU ने किया बड़ा खुलासा, बिहार में पकड़ा गया आधार फर्जीवाड़ा गिरोह, 3 साइबर अपराधी गिरफ्तार

पटना बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने आधार फर्जीवाड़ा के मामले में साइबर अपराधियों के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मधेपुरा जिले से 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। बता दें कि 09 सितम्बर 2025 को आर्थिक अपराध इकाई, पटना के निर्देशन व मार्गदर्शन में गठित विशेष टीम ने मधेपुरा जिले में छापेमारी की। इस दौरान राम प्रवेश कुमार,नितीश कुमार और विकास कुमार को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्तगण नकली वेबसाइटें (जैसे – ayushman.site, UCL इत्यादि) बनाकर, ECMP Software व UCL Source Code का दुरुपयोग करते थे। इन वेबसाइटों के माध्यम से लोगों के आधार और बायोमेट्रिक डेटा की चोरी की जाती थी और फिर उसका उपयोग कर फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए जाते थे। अभियुक्तों द्वारा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से बचने के लिए सिलिकॉन फिंगर प्रिंट का इस्तेमाल करते थे, जिससे उन्हें आसानी से ECMP को एक्सेस करने का रास्ता मिल जाता था। इसके बाद यह लोग आधार डाटा में हेरफेर कर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते थे। गिरोह न सिर्फ़ आधार से जुड़ी सेवाओं में सेंध लगाता था बल्कि आम नागरिकों की पहचान व निजी जानकारी से खिलवाड़ कर राष्ट्रीय सुरक्षा व डेटा संरक्षण के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा था। इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई में आईटी एक्ट 2000 की विभिन्न धाराओं एवं IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं और अन्य शामिल व्यक्तियों व नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।  

राहुल गांधी वापस जाओ! रायबरेली पहुंचते ही विरोध, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने संभाला मोर्चा

रायबरेली लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद राहुल गांधी बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उनके दौरे का प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विरोध किया। लखनऊ प्रयागराज हाईवे पर बैठकर राहुल के काफिले को रोक दिया। हाईवे पर समर्थकों के साथ मंत्री दिनेश हाईवे पर बैठ गए। इस दौरान नारेबाजी होने लगी है। राहुल गांधी वापस जाओ के नारे लगाए। करीब 20 मिनट तक का काफिला रुका रहा। इस दौरान पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। सांसद राहुल गांधी बुधवार को दिवसीय दौरे पर रायबरेली पहुंचे। लखनऊ से रायबरेली आते समय हरचंदपुर क्षेत्र के गुलुपुर के पास उनका विरोध किया गया। प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और कार्यकर्ता लखनऊ प्रयागराज हाईवे पर बैठ गए। राहुल गांधी वापस जाओ के नारे लगाए। करीब 20 मिनट तक राहुल गांधी का काफिला रुका रहा। इस दौरान कार्यकर्ता उत्तेजित हो गए। हालांकि मंत्री ने उन्हें समझाया तब जाकर समर्थक शांत हुए। मंत्री दिनेश सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। बिहार में उनकी मौजूदगी में प्रधानमंत्री की मां को गाली दी गई। यह किसी तरह से समाज के लिए ठीक नहीं है। प्रदेश सरकार के मंत्री के विरोध के चलते पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। काफी देर तक वहां अफरातफरी का माहौल रहा। पुलिस को हालात सामान्य करने में काफी समय लगा। किसी तरह राहुल के काफिले को आगे बढ़ाया गया। इससे पहले राहुल गांधी लखनऊ एयरपोर्ट पहुचे थे। लखनऊ एयरपोर्ट पर कोंग्रेसियों ने भव्य स्वागत किया।. राहुल लखनऊ एयरपोर्ट से रायबरेली के लिए रवाना हुए थे। राहुल गांधी सड़क मार्ग से रायबरेली पहुंचे थे।  

विधायक भाटी का साफ संदेश- पर्यावरण बचाओ, खेजड़ी और ऑक्सीजन के लिए ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लाओ

जयपुर राजस्थान विधानसभा के युवा और तेजतर्रार चेहरे शिव विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी ने अमर उजाला से खास बातचीत में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाने की जितनी घोषणाएं की गईं, वे सब केवल कागजों तक सीमित हैं, धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक है। भाटी ने कहा कि खेजड़ी बचाओ आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और इसे पूरे प्रदेश के लोगों, व्यापारियों और समाज का व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि वर्तमान सरकार वह करे, जो पहले किसी सरकार ने नहीं किया। ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू कर खेजड़ी और अन्य पेड़ों को कानूनी सुरक्षा दे। यह सरकार के खाते में बड़ी उपलब्धि होगी। सरकार का दावा है कि पिछले दो साल में 17-18 करोड़ पेड़ लगाए गए हैं। इस पर सवाल उठाते हुए भाटी ने कहा कि जब इतने करोड़ पेड़ लगाए गए तो धरातल पर क्यों नहीं दिखते? एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत करोड़ों पौधे लगाने का दावा हुआ, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। वास्तव में ये पेड़ सिर्फ कागजों पर लगे हैं। विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि अगर पिछले पांच साल में जितने पेड़ लगाने की बातें हुईं, उतने पेड़ सचमुच लग गए होते तो राजस्थान हरा-भरा होता। करोड़ों रुपये का फंड खर्च हुआ, लेकिन असलियत शून्य है। सरकार पहले लगे पेड़ों को बचाए, नए लगाने की जल्दबाजी न करे। भाटी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग रखी थी, परंतु पक्ष-विपक्ष के हंगामे में विषय दब गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सदन के अंदर बैठे लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं? ग्लोबल वार्मिंग पर दुनिया चर्चा कर रही है, ऐसे में हमारी विरासत खेजड़ी को बचाना आवश्यक है। केर-सांगरी की सब्जी के बढ़ते फैशन का उदाहरण देते हुए भाटी बोले कि खेजड़ी सबको चाहिए, पर इसे बचाने की बात करने में नेताओं की सांस फूल रही है। मैं बड़े नेताओं से कहना चाहूंगा कि यह केवल जैसलमेर-बाड़मेर का मुद्दा नहीं, पूरे राजस्थान की जरूरत है। जो इस पर बोलेंगे, जनता उन्हें सर माथे पर बिठाएगी। भाटी ने स्पष्ट कहा कि यह कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को ऑक्सीजन देने का संघर्ष है। उन्होंने सरकार को दो-टूक संदेश दिया कि जल्द से जल्द ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

अब भोपाल AIIMS में लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं, मरीज पाएंगे तेज OPD पंजीकरण और त्वरित डॉक्टर से मिलने का मौका

भोपाल  एम्स भोपाल ने ‘एम्स स्वास्थ्य’ मोबाइल ऐप में नई डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं, जिनसे मरीजों का इंतजार समय कम होगा और परामर्श प्रक्रिया तेज तथा पारदर्शी बनेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की डिजिटल हेल्थकेयर सर्विसेज एट योर फिंगरटिप्स के आधार पर यह ऐप अब स्वास्थ्य सेवाओं का वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया है। यह ऐप आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अनुरूप है। इसके जरिए मरीज अपना आभा आइडी बना सकते हैं या पहले से बनी आईडी को लिंक कर सकते हैं। इससे अस्पताल में बने स्वास्थ्य अभिलेख देशभर के अन्य अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे। मिलेंगी नई डिजिटल सुविधाएं नई सुविधा ई-विजिट के तहत मरीज बिना कतार में लगे ओपीडी पंजीकरण कर सकते हैं। अस्पताल परिसर में लोकेशन एक्सेस देकर ऐप से खुद टिकट जेनरेट कर प्रिंट करवाया जा सकता है। ऐप से परामर्श शुल्क और ओपीडी सेवाओं का सीधे डिजिटल भुगतान भी किया जा सकता है। इससे डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन, डिस्चार्ज समरी और लैब रिपोर्ट कभी भी, कहीं भी देखा और डाउनलोड किया जा सकता है। इससे समय की बचत के साथ ही कागज़ का इस्तेमाल भी घटेगा।

राज्यपाल पटेल ने हाट बाजारों में सिकल सेल और टीबी की स्क्रीनिंग कराने की दी सलाह

राज्यपाल पटेल का निर्देश: हाट बाजार में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, सिकल सेल और टीबी पर खास ध्यान सिकल सेल अभियान की अवधि बढ़ाएं : राज्यपाल पटेल राजभवन में हुई समीक्षा बैठक भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि हाट बाजारों में सिकल सेल और टीबी की स्क्रीनिंग शिविर लगाए जाने चाहिए जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की विरल आबादी तक पहुंच हो सके। उन्होंने कहा कि सिकल सेल जाँच के 100 दिवसीय अभियान की उपलब्धियां प्रभावी है और अभियान को 125 दिन तक बढ़ाया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल राजभवन के जवाहर खण्ड में बुधवार को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष और जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आगनबाड़ियों के साथ सतत संपर्क पर विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के प्रभावी संचालन में आगनबाड़ी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिलों के प्रवास के दौरान वह पीएम जनमन, धरती आबा अभियान, सिकल सेल और टी.बी. रोग की समीक्षा अनिर्वायत: करेंगे। उन्होंने अपेक्षा की है कि जिलों में राज्यपाल के प्रवास के दौरान कार्यक्रम स्थल पर टी.बी., सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जन प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त करने की भी जरूरत बताई है। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सांसद और विधायक निधि से वित्तीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि वे सहयोग की जनप्रतिनिधियों से भी अपील करेंगे।    राज्यपाल पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता में स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम कड़ी तक पहुंच बहुत महत्वपूर्ण है। समुदाय के बीच पहुंच कर स्वास्थ्य शिक्षा के प्रयास बहुत प्रभावी होते हैं। उन्होंने एकलव्य विद्यालयों में सिकल सेल जांच शिविरों के आयोजन की पहल की सराहना की। जनजातीय छात्रावास के प्राचार्य और शिक्षकों को सिकल सेल रोग के संबंध में सेंसेटाईज करने के प्रयास करने के लिए कहा है। राज्यपाल पटेल ने आयुर्वेदिक औषधियों की वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाए जाने की जरूरत बताई। उन्होंने सिकल सेल रोगियों को आयुर्वेदिक औषधियां उपलब्ध करवाने को कहा। बताया गया कि विभाग द्वारा चयनित पायलट जिले धार में 1546 और बड़वानी में 1015 रोगियों को सिकल सेल की आयुर्वेदिक औषधियाँ दी जा रही है। प्रदेश में 17 सितम्बर से स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान चलाया जाएगा। सिकल सेल के लिए संचालित 100 दिवसीय अभियान के दौरान सिकल सेल रोगियों को जेनेटिक कार्ड वितरण कार्य बहुत तेज गति से हुआ है। अभियान अवधि में 12 लाख से अधिक कार्ड वितरित हुए है। विभाग द्वारा 1 करोड़ वां कार्ड प्रधानमंत्री द्वारा वितरित करावाने की योजना है। प्रदेश में टी.बी. और सिकल सेल रोग प्रबंधन प्रयासों के परिणामों के बेहतर संकेत मिल रहे हैं। टी.बी. रोगियों के ड्रॉप आउट और मृत्यु दर में कमी दिख रही है। सिकल सेल प्रबंधन से मातृ मृत्यु दर में भी कमी होने की जानकारी मिली है।          बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संदीप यादव, आयुक्त आयुष श्रीमती उमा महेश्वरी, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सुसलोनी सिडाना, राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव और जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती जमुना भिड़े मौजूद थीं।        

बच्चों की मौत के बाद इंदौर में चूहों पर अभियान, ऑपरेशन रैट किल में मारे और पकड़े गए चूहों की जांच

इंदौर इंदौर के सरकारी एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजातों की मौत के बाद पेस्ट कंट्रोल एजाइल कंपनी को हटाने की जानकारी सामने आई है। अब इस काम की मॉनिटरिंग के लिए मंगलवार रात डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट की नियुक्ति कर विशेष जिम्मेदारी।  अस्पताल में चूहों को पकड़ने के लिए चूहामार दवाइयां (कुछ विशेष तरह का पॉयजन, जिसका तुरंत असर हो) डाली जा रही हैं। साथ ही हर यूनिट में बड़े पिंजरे और रोडेंट ग्लू ट्रेप (जिसमें कुतरने वाले जीव, खासकर चूहे, फंस जाते हैं) लगाए जा रहे हैं। बता दें, नवजातों की मौत के मामले में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया और सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव सहित अन्य पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कितने चूहे पकड़ाए, इसकी जवाबदेही इंचार्ज की चूहों को पकड़ने को लेकर तुरंत फीडबैक लिया जा रहा है कि रातभर में कितने चूहे पकड़े गए और कितने मारे गए। इसके लिए हर यूनिट के इंचार्ज की जवाबदेही तय की गई है कि 24 घंटे में क्या नतीजे रहे। इसमें NICU (Neonatal Intensive Care Unit) और PICU (Pediatric Intensive Care Unit) पर खास फोकस है। नवजातों को शिकार बनाते हैं चूहे दूसरी मंजिल पर इन NICU और PICU में पूरे कॉरिडोर में गार्डों को सख्त हिदायत दी गई है कि यहां किसी भी हालत में चूहों की एंट्री नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। दरअसल, इन दोनों यूनिट्स में उन गंभीर नवजात शिशुओं को रखा जाता है, जिनकी स्थिति काफी क्रिटिकल रहती है। इनमें से अधिकतर वेंटिलेटर पर रहते हैं। कम वजनी इन नवजातों का हर अंग नाजुक होता है। जिन गंभीर बीमारियों के कारण उन्हें इन यूनिट्स में एडमिट किया जाता है, उनकी वजह से वे पहले से ही काफी कमजोर रहते हैं और बीमारियों से लड़ने की क्षमता (Immunity Power) बहुत कम होती है। ऐसे में इन दूधमुंहे नवजातों को बड़े चूहे आसानी से अपने भोजन का शिकार बना लेते हैं। हाल की दो घटनाओं में, चूहों ने एक नवजात की चारों उंगलियां तक खा लीं। अस्पताल के बाहर बम चेक करने जैसी चेकिंग चूहों के आतंक को खत्म करने के लिए अस्पताल के और भी ज्यादा सख्ती की गई है। यहां तीन-तीन गार्डों की ड्यूटी लगाई गई है। वे दिन-रात एंट्री करने वाले अटेंडर्स के सामान को बारीकी से चेक कर रहे हैं कि उसमें कोई खाद्य पदार्थ तो नहीं है। इसके अलावा परिसर के बाहर, जहां सार्वजनिक पार्किंग और अस्पताल के बगीचे हैं, वहां किसी भी जूठन या अन्य वेस्ट खाद्य पदार्थ तो नहीं है, उस पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। सीढ़ियों और 6 लिफ्टों में चूहों पर नजर मुख्य सीढ़ियों सहित छह लिफ्टों में चूहो नजर आते हैं तो इसकी जानकारी तुरंत इंचार्ज को देने के लिए कहा गया है। इसे लेकर हर फ्लोर और अन्य स्थानों पर पर्चे चिपकाए गए हैं, जिनमें लिखा है कि यदि किसी स्टाफ को चूहे दिखें तो वे तुरंत इन नंबरों पर सूचना दें। आखिरी तक झूठ बोलते रहे जिम्मेदार केस में जिम्मेदार कहते रहे कि चूहों ने मामूली काटा है। मौत का कारण नवजात का हीमोग्लोबिन कम होना और अंदरूनी अंगों का पूरी तरह से विकसित न होना बताया गया। इन सारे झूठों का खुलासा शनिवार को तब हुआ, जब धार निवासी मंजू के नवजात का शव लेकर परिवार अपने गांव पहुंचा। वहां रात को लाइट नहीं थी, तो उन्होंने मोबाइल की रोशनी में शव की पैकिंग खोली। देखा तो एक हाथ की चारों उंगलियां गायब थीं और घाव देखकर सभी सिहर उठे। दरअसल, चूहों के लिए भोजन के रूप में नवजातों की उंगलियां ही सबसे पहले रहती हैं। वहां से वे धीरे-धीरे शरीर का बड़ा हिस्सा कुतर सकते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि चूहों ने दो दिनों में उसे कितना जख्मी किया होगा। सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे मॉनिटरिंग चूहों की धरपकड़ के लिए हर कॉरिडोर, वार्ड और यूनिट में लगे सीसीटीवी कैमरों से भी नजर रखी जा रही है। हालांकि अस्पताल में चूहों का ज्यादातर मूवमेंट फ्लोर पर ही रहा है। साथ हा वे पलंग, स्लाइन बोतलों के स्टैंड, वार्डों में मरीजों और ड्यूटी रूम में रखी भोजन की छोटी आलमारियों और बड़ी टेबलों तक पहुंच जाते हैं। वे टेबलों और अलमारियों में रखी दवाइयां तक खा जाते हैं। खाने का लालच देकर घेराबंदी कर रहे चूहों की घेराबंदी के लिए सरकारी कैंसर और चाचा नेहरू अस्पताल की सीमा तक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए टीमें उन्हें बिस्किट, केक और दानों का लालच देकर पास बुला रही हैं। हालांकि दिन में सक्रियता कम रहती है। कई स्थानों पर रात में रोडेंट ग्लू ट्रैप में अनाज के दाने रखे गए, जिससे चूहे लालच में आकर चिपक गए और मर गए। अलसुबह इन रोडेंट ग्लू ट्रैप में चिपके मृत चूहों को तुरंत उठाकर ठिकाने लगाया जा रहा है। ऐसे में बाहर और सड़कों पर मृत चूहे देखे जा रहे हैं। बड़े स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं दूसरी ओर, डीन द्वारा एजाइल कंपनी को हटाकर उसे ब्लैकलिस्टेड करने के लिए भोपाल पत्र लिखा गया है। इस मामले में एजाइल कंपनी पर सिर्फ एक लाख रुपए जुर्माना लगाकर खानापूर्ति कर दी गई, जबकि हटाने संबंधी अधिकृत पत्र की पुष्टि नहीं की गई। जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों पर भी अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। इन डॉक्टर्स को कारण बताओ नोटिस मंगलवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में इस मामले की कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पूरी कार्यवाही निष्पक्षता, पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर की जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को धूमिल करती हैं, दोषी व्यक्तियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी रोकथाम उपाय तुरंत लागू किए जाएं। उन्होंने कहा कि अस्पताल सुपरिटेंडेट डॉ. अशोक यादव, डॉ. बृजेश लाहोटी (HOD, PIC), प्रो. डॉ. मनोज जोशी और सहायक प्रभारी नर्सिंग अधिकारी कलावती भलावी को घटना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। डॉ. मुकेश जायसवाल (असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट और भवन प्रभारी), प्रवीणा सिंह (प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर), नर्सिंग ऑफिसर आकांक्षा बेंजामिन और श्वेता चौहान को सस्पेंड किया गया है। नर्सिंग … Read more

राजस्थान में टूटे 107 साल पुराने मानसून रिकॉर्ड, सितंबर में विदाई की उम्मीद

जयपुर राजस्थान में इस सीजन का मानसून ऐतिहासिक बन गया है। प्रदेश में 107 वर्ष बाद रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। वर्ष 1917 में राजस्थान में 844.2 मिमी वर्षा हुई थी, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड था। इस वर्ष 2025 में मानसून सीजन के दौरान अब तक 693.1 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार औसत से अधिक वर्षा के कारण प्रदेश के सभी जिलों में जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अब मानसून धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। 11 सितंबर के बाद से बारिश में तेज गिरावट देखने को मिलेगी। पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से मानसून की गतिविधियां धीमी हो जाएंगी और 20 सितंबर के बाद प्रदेश से इसकी पूरी तरह विदाई की संभावना है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार राज्य में भारी बारिश की गतिविधियों से मंगलवार से ही राहत मिलने की पूरी संभावना है. इसके अनुसार पूर्वी राजस्थान के कोटा, भरतपुर, जयपुर, अजमेर, उदयपुर संभाग के अधिकांश भागों में आगामी एक सप्ताह बारिश की गतिविधियों में गिरावट जारी रहने व केवल छुटपुट स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। इसी तरह पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश भागों में भी आगामी दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी से गिरावट होने व 11 सितंबर से अधिकांश भागों में आगामी एक सप्ताह मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है. इसके अनुसार मंगलवार को बाड़मेर, जैसलमेर व आसपास के जिलों में कहीं-कहीं हल्की व मध्यम बारिश होने की संभावना है। मानसून सीजन में प्रदेश में 23 जिलों में सामान्य से अत्यधिक, 17 जिलों में सामान्य से अधिक तथा 1 जिले में सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश में सीजन की सर्वाधिक वर्षा सिरोही जिले में हुई। यहां सीजन में कुल  2163 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं सीजन में एक ही दिन में सर्वाधिक वर्षा बूंदी के नैनवा में 502 एमएम दर्ज की गई। सामान्य से अत्यधिक वर्षा वाले राजस्थान के जिले:     अजमेर     बालोतरा      बारां     ब्यावर     बूंदी     चूरू     दौसा     धौलपुर     डीडवाना-कुचामन     गंगानगर     हनुमानगढ़     जयपुर     जालौर     झुंझुनूं     जोधपुर     करौली     कोटा     नागौर     पाली     फलौदी     सवाई माधोपुर     सीकर     टोंक इन जिलों में हुई सामान्य से अधिक वर्षा     अलवर     जैसलमेर     बांसवाड़ा     बाड़मेर     भरतपुर     भीलवाड़ा     बीकानेर     चित्तौड़गढ़     डीग     डूंगरपुर     झालावाड़     खेड़थल-तिजारा     कोटपूतली-बहरोड़     प्रतापगढ़     राजसमंद     सलूम्बर     उदयपुर वहीं इस सीजन में जैसलमेर में सामान्य वर्षा दर्ज की गई।