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नई राशन दुकानों के लिए जयपुर में खुला आवेदन, 70 स्टॉल की तैयारी, नियम और शर्तें देखें

जयपुर जयपुर जिले में नवसृजित 70 उचित मूल्य की राशन दुकानों के लिए आवेदन प्रक्रिया आज सोमवार से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। जिला रसद अधिकारी कार्यालयों द्वारा इच्छुक आवेदकों से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन दुकानों में से 11 दुकानें "जयपुर प्रथम" और 59 दुकानें "जयपुर द्वितीय" क्षेत्र में खोली जाएंगी। यह पहल सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है। आवेदन पत्र प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है, जबकि आवेदन जमा कराने की अवधि 15 सितंबर से 10 अक्टूबर 2025 तक है। आवेदन पत्र केवल कार्यदिवसों में सुबह 9:30 से शाम 6 बजे तक संबंधित कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। आवेदन पत्र जिला रसद अधिकारी कार्यालय से निर्धारित शुल्क 100 रुपये में उपलब्ध होंगे और भुगतान डिमांड ड्राफ्ट या भारतीय पोस्टल ऑर्डर के माध्यम से किया जाएगा। ई-मित्र, नोटरी बुक स्टोर या किसी अन्य माध्यम से प्राप्त फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे। शहरी क्षेत्र में आवेदन करने वाले आवेदक को उसी वार्ड का निवासी होना आवश्यक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में आवेदक को उसी ग्राम पंचायत का निवासी होना चाहिए। शैक्षणिक योग्यता के रूप में स्नातक होना अनिवार्य है, यदि स्नातक उपलब्ध न हो तो 12वीं उत्तीर्ण आवेदकों के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदक को कंप्यूटर प्रशिक्षण आर.के.सी.एल. या समकक्ष सरकारी संस्थान से तीन माह का प्रशिक्षण आवश्यक है। यदि यह प्रशिक्षण पहले नहीं किया गया है तो चयन के बाद 6 माह के भीतर इसे पूरा करना होगा और शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के साथ पहचान या निवास प्रमाण का प्रस्तुत होना अनिवार्य है, जिसमें वोटर आईडी, आधार कार्ड, जनाधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या मतदाता सूची की सत्यापित प्रति शामिल हैं। आवेदन के लिए आयु सीमा 21 से 45 वर्ष के बीच रखी गई है, जिसे उपरोक्त प्रमाण पत्रों से सिद्ध किया जाएगा। यदि कोई समूह या स्वयंसेवी संस्था आवेदन करती है तो उसके अध्यक्ष, सचिव या प्रबंधक को भी उपरोक्त सभी योग्यताओं को पूरा करना होगा।

बस्ती में सीएम योगी का दौरा, आज होंगे कई विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास

बस्ती  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज बस्ती जिले के दौरे पर रहेंगे। जिला प्रशासन ने उनके दौरे की तैयारियां पूरी कर ली है। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है। सीएम योगी कई विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। कई विकास कार्यों का करेंगे शिलान्यास बताया जा रहा है कि सीएम योगी बसहवां में 10:55 पर हेलीपैड पर पहुंचेंगे। 11 बजे सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण और 12 बजे तक सरस्वती शिशु मंदिर में भूमि पूजन करेंगे। इस दौरान योगी कई विकास कार्यों का शिलान्यास करेंगे। सारे कार्यक्रम निपटाकर योगी 12.05 पर गोरखपुर के लिए रवाना होंगे। यह कार्यक्रम जिले के नगर थाना क्षेत्र के बसहवां होगा। कमिश्नर, DIG और DM ने कार्यक्रम स्थल में पहुंचकर सारी तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान एसपी, एडीएम सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

उच्च शिक्षा विभाग का फैसला: प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं के विशेष पाठ्यक्रम शुरू

भोपाल  महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भाषाई विवाद चर्चा का विषय है. भाषा को लेकर पैदा हो रहे तनाव और सामाजिक असंतुलन को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने एक बड़ी पहल की घोषणा की है. प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें भारतीय भाषाओं से जुड़े विशेष कोर्स भी शामिल किए जाएंगे. इसके जरिए न सिर्फ छात्रों को नई भाषाओं का ज्ञान मिलेगा, बल्कि देश की विविधता में एकता का संदेश भी जाएगा.  मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा, ''मध्य प्रदेश अब भाषाई एकता का केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का युवा देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र में जाए तो वहां के निवासियों से सहजता और आत्मीयता से संवाद कर सके. भारत में कुल 12 राष्ट्रीय और 22 क्षेत्रीय भाषाएं हैं. इनमें से 12 से 15 भाषाओं को विश्वविद्यालयों में पढ़ाने की प्रक्रिया इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू कर दी जाएगी.'' मंत्री का कहना है कि भाषा के आधार पर उत्पन्न संघर्षों को रोकने और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इसके साथ ही एमपी देश में एक आदर्श के रूप में उभरकर अन्य राज्यों के लिए मार्गदर्शक बनेगा. सरकारी पहल का उद्देश्य इस योजना के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है– भारतीय विविधता को सम्मान देना और संवाद की भाषा के रूप में भाषा को जोड़ने का माध्यम बनाना. प्रदेश में ऐसे युवाओं की बड़ी संख्या है जो नौकरी, व्यवसाय या शिक्षा के लिए अन्य राज्यों में जाना चाहते हैं, लेकिन भाषा की बाधा के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इस पहल के माध्यम से प्रदेश के छात्र न सिर्फ अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे बल्कि अन्य राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं से परिचित होंगे. इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि आपसी विश्वास और संवाद भी मजबूत होगा. विपक्ष का विरोध हालांकि, इस योजना का विरोध भी शुरू हो गया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह योजना केवल चुनावी लाभ के लिए लाई गई है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में दूसरी भाषाओं को पढ़ाने से व्यावहारिक लाभ नहीं होगा. उनका आरोप है कि इससे छात्रों को वास्तविक फायदा नहीं मिलेगा और यह योजना केवल प्रचार का हिस्सा है. कांग्रेस का यह भी कहना है कि पहले से चल रही हिंदी माध्यम की योजनाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, ऐसे में नई योजना भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी.

हरियाणा :गांव के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट शिक्षा का सपना अधूरा, सुविधाओं की भारी कमी

चंडीगढ़   हरियाणा में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की रफ्तार सुस्त है। प्रदेश के कुल 14,338 सरकारी स्कूलों में से 6,101 स्कूलों में ही स्मार्ट क्लासरूम, स्मार्ट बोर्ड या वर्चुअल क्लासरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार की यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडीआईएसई) की 2024-25 की रिपोर्ट में दी गई है। स्मार्ट स्कूल में एक क्लास के अंदर इंटरएक्टिव बोर्ड, डिजिटल स्क्रीन, ई-लर्निंग सामग्री की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। राज्य सरकार ने 2023 में हरियाणा स्मार्ट एजुकेशन मिशन शुरू किया था जिसके तहत तीन वर्षों में सभी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के 16.3 फीसदी सरकारी स्कूलों में प्रोजेक्टर और 41.6 फीसदी में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाएं (आईसीटी) हैं। वहीं, 63.9 फीसदी निजी सहायता प्राप्त स्कूल ही स्मार्ट बने हैं। स्मार्ट स्कूलों में ज्यादातर शहरी क्षेत्रों या मॉडल संस्कृति स्कूलों हैं। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल डिजिटल सुविधाओं से वंचित हैं। स्मार्ट को अब स्मार्ट प्लस बनाने की योजना हरियाणा सरकार का दावा है कि अगले दो साल में पांच हजार से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा स्मार्ट स्कूलों को अब स्मार्ट प्लस स्कूल के रूप में अपग्रेड करने की योजना बना रही है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित लर्निंग टूल्स और वर्चुअल लैब की व्यवस्था होगी। पंजाब ने चार साल पहले शुरू की थी पहल पंजाब सरकार ने हरियाणा से चार साल पहले 2019 में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की पहल शुरू की थी। यहां कुल 19,107 सरकारी स्कूलों में से 6,832 स्मार्ट हैं। इसके अलावा 13 हजार स्कूलों में 41 हजार स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए और 3,500 स्कूलों में एजुकेशनल सैटेलाइट सुविधा उपलब्ध है। स्मार्ट स्कूल नीति के तहत पंचायतों, एनआरआई और समाजसेवी संगठनों के सहयोग से तेजी से विस्तार किया। इससे कई गांवों तक डिजिटल शिक्षा की पहुंच हो गई है। प्रदेश के 13 जिलों के 50 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में एक-एक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की जा चुकी है। 615 अन्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में एक-एक नई विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित लैब बनाने की प्रक्रिया जारी है। रही बात स्मार्ट स्कूलों की रफ्तार धीमी होने की तो उसकी भी समीक्षा की जा रही है। इस बार मुख्यमंत्री ने शिक्षा का बजट बढ़ाया है। -महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री 

जैन दंपति का अनोखा कदम: AIIMS में भ्रूण दान, मेडिकल रिसर्च को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली दिल्ली में एक ऐतिहासिक पहल हुई है. एम्स (AIIMS) को पहली बार भ्रूण दान मिला है. ये कदम एक परिवार के दर्द को समाज और विज्ञान की ताकत में बदलने का उदाहरण है. 32 वर्षीय वंदना जैन का पांचवें महीने में गर्भपात हो गया था. इस मुश्किल घड़ी में परिवार ने भ्रूण को शोध और शिक्षा के लिए एम्स को दान करने का निर्णय लिया. सुबह से शाम तक संघर्ष और फिर रचा इतिहास वंदना जैन के परिवार का सुबह 8 बजे दधीचि देहदान समिति से संपर्क हुआ. समिति के उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता और समन्वयक जी.पी. तायल ने त्वरित पहल करते हुए एम्स के एनाटॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.बी. राय और उनकी टीम से बातचीत की. टीम के सहयोग से दिनभर दस्तावेज आद‍ि औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शाम 7 बजे एम्स ने अपना पहला भ्रूण दान प्राप्त किया. क्या होगा भ्रूण दान का फायदा भ्रूण दान सिर्फ एक मेडिकल प्रोसेस नहीं, बल्कि आने वाले समय की रिसर्च और शिक्षा का बड़ा आधार है. AIIMS में एनाटॉमी विभााग के प्रोफेसर डॉ. सुब्रत बासु ने aajtak.in को बताया कि कि मानव शरीर के विकास को समझने के लिए भ्रूण अध्ययन बेहद अहम है. रिसर्च और टीचिंग में हमें यह देखने का मौका मिलता है कि किस तरह शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग समय पर विकसित होते हैं. जैसे बच्चा जब जन्म लेता है तो उसका नर्वस सिस्टम पूरी तरह डेवेलप नहीं होता. वह धीरे-धीरे दो साल बाद विकसित होता है. ऐसे मामलों का अध्ययन मेडिकल छात्रों और वैज्ञानिकों को गहराई से समझने का मौका देता है. डॉ. बासु आगे कहते हैं कि यह शोध एजिंग की प्रक्रिया को समझने में भी मदद करेगा. भ्रूण में टिश्यू लगातार ग्रो करते हैं, वहीं बुढ़ापे में टिश्यू डैमेज होने लगते हैं. अगर हम यह समझ पाएं कि कौन से फैक्टर टिश्यू को ग्रो कराते हैं और कौन से उन्हें डैमेज करते हैं, तो भविष्य में उम्र से जुड़ी कई बीमारियों का हल निकालने में मदद मिलेगी. वह एक और अहम पहलू बताते हैं कि बच्चों में एनेस्थीसिया का इस्तेमाल एक बड़ी चुनौती है. छोटे बच्चे बोल नहीं पाते, उन्हें कितना डोज देना है, यह सटीक पता होना ज़रूरी है. भ्रूण अध्ययन से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि किस स्टेज पर बच्चे का कौन-सा ऑर्गन कितना विकसित है और उसे किस तरह सुरक्षित तरीके से उसे ट्रीट किया जा सकता है. जैन परिवार की मिसाल इस पहल ने जैन परिवार को समाज में एक अनूठी मिसाल बना दिया. उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुख को मानवता और विज्ञान के लिए अमूल्य योगदान में बदल दिया. दधीचि देहदान समिति पहले से ही अंगदान, नेत्रदान और देहदान के क्षेत्र में देशभर में जागरूकता फैलाती रही है. भ्रूण दान का यह पहला मामला समिति की मुहिम को और ऐतिहासिक बना गया है. ये कहानी सिर्फ भ्रूण दान की नहीं है, बल्कि संवेदना, साहस और समर्पण की है. वंदना जैन और उनका परिवार आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन गए हैं. एम्स और दधीचि देहदान समिति की ये पहल भविष्य की पीढ़ियों को चिकित्सा की नई राह दिखाएगाा. 

ग्रामसभा का सख्त निर्णय: देवनाला रैयत गांव में शराब बनाने या बेचने पर भारी जुर्माना

पांढुर्णा  तहसील के देवनाला रैयत गांव ने नशा मुक्ति के लिए बड़ा कदम उठाया है। रविवार को हुई ग्रामसभा में गांव के सभी लोगों ने सर्वसम्मति से शराब निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। साथ ही इसका उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी तय किया गया। ग्रामसभा में लिया गया कड़ा निर्णय ग्रामसभा में तय हुआ कि गांव में यदि कोई व्यक्ति शराब बनाएगा या बेचेगा तो उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, नशे की हालत में किसी भी व्यक्ति का अपमान करने पर 505 रुपए अर्थदंड भरना होगा। यह निर्णय गांव को नशामुक्त बनाने और सामाजिक समरसता कायम करने के उद्देश्य से लिया गया। ग्रामीणों ने खुद की पहल निर्णय के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर गांव के आसपास नाले और जंगलों में बने अवैध कच्ची शराब के ठिकानों को खुद ही ध्वस्त कर दिया। इस दौरान गांव के दिनेश उईके, देवराम भलावी, अनिल मर्सकोले, देवीलाल तुमदाम, पूनाजी तड़ाम, सम्पिलाल उईके, गणेश उईके सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एकमत से संकल्प लिया कि अब गांव में किसी भी प्रकार का नशे का कारोबार नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस ने की पहल की सराहना थाना प्रभारी अजय मरकाम ने देवनाला रैयत के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय समाज में जागरूकता और अनुशासन का उदाहरण है। गांव की इस पहल से क्षेत्र के अन्य गांवों को भी प्रेरणा मिलेगी। थाना प्रभारी ने भरोसा दिलाया कि किसी भी समस्या या चुनौती की स्थिति में पुलिस गांव का पूरा सहयोग करेगी। सामाजिक दृष्टि से ऐतिहासिक कदम गांव के बुजुर्गों का कहना है कि नशे ने कई परिवारों को बर्बाद किया है। युवा पीढ़ी गलत राह पर जा रही थी। अब इस प्रतिबंध से गांव में माहौल सुधरेगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। ग्रामीण महिलाएं भी इस फैसले से काफी खुश हैं। उनका कहना है कि अब घरों में झगड़े और कलह की स्थिति खत्म होगी।  

PM मोदी ने किया PM Mitra Park का शिलान्यास, देशभर की महिलाओं के लिए सशक्त नारी अभियान की सौगात

धार  मध्यप्रदेश के दौरे पर आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य समृद्धि का मंत्र दे सकते हैं। सबकुछ ठीक रहा तो प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश से 'सशक्त नारी, समृद्ध अभियान' को हरी झंडी देंगे। लक्ष्य महिलाओं की सेहत की चिंता करना, उनके लिए शारीरिक आहार व पोषण व्यवस्था को मजबूत बनाना और समग्र देखभाल को मजबूत करना होगा, ताकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से लड़ने में सक्षम बनाया जा सके। जब महिलाएं स्वस्थ रहेंगी तो स्वाभाविक है कि बच्चे भी तंदुरुस्त होंगे। जब जच्चा-बच्चा दोनों अच्छे होंगे तो आधी से अधिक परेशानियां तो वैसे ही खत्म हो जाएंगी। इस तरह लाखों परिवार संकट से बाहर रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने आगामी मध्यप्रदेश दौरे पर महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य समृद्धि का मंत्र देने वाले हैं। चर्चा है कि वे यहां से ‘सशक्त नारी, समृद्ध अभियान’ की शुरुआत करेंगे। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं की शारीरिक सेहत, आहार और पोषण व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि वे स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें। जब महिलाएं स्वस्थ होंगी तो बच्चों का विकास भी बेहतर होगा और लाखों परिवारों की परेशानियां कम हो जाएंगी। जच्चा-बच्चा की सेहत में सुधार अपने आप में समाज की मजबूती का आधार बनेगा। पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास भी होगा प्रधानमंत्री मोदी का दौरा 17 सितंबर को प्रस्तावित है। कार्यक्रम की जगह धार जिले के बदनावर को माना जा रहा है। यहीं से वे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। यह पार्क टेक्सटाइल क्षेत्र में रोजगार और निवेश की नई संभावनाओं को जन्म देगा। खास बात यह है कि यह भारत में बनने वाला पहला ऐसा पार्क होगा जो सबसे पहले तैयार भी होगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और प्रदेश को औद्योगिक बढ़त मिलेगी। पहले भी मध्यप्रदेश से मिले हैं बड़े तोहफे यह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश से कोई बड़ा अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने कई राष्ट्रीय कार्यक्रम यहीं से लॉन्च किए थे। उदाहरण के तौर पर, सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन अभियान, किसानों के लिए फसल बीमा योजना की सौगात, महिलाओं को सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर, छोटे व्यापारियों के लिए स्वनिधि योजना और नदी जोड़ो अभियान की शुरुआत मध्यप्रदेश की धरती से हुई थी। इन पहलों ने देशभर के लोगों को सीधा लाभ पहुंचाया। महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष आह्वान भोपाल के जंबूरी मैदान से प्रधानमंत्री मोदी पहले भी महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तिकरण का संदेश दे चुके हैं। यह आयोजन देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर हुआ था। उस समय भी उन्होंने महिलाओं की भूमिका और उनकी ताकत को देश की प्रगति से जोड़ा था। अब एक बार फिर मध्यप्रदेश से नया अभियान शुरू करके वे महिलाओं की सेहत और परिवारों की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इन अभियानों, कार्यक्रमों को दे चुके हरी झंडी मोदी देश को मध्यप्रदेश से पहले भी कई सौगात दे चुके हैं। उन्होंने सिकलसेल एनीमिया के खात्मे की शुरुआत का आह्वान यहीं से किया था। किसानों को फसल बीमा की सौगात, महिलाओं को सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों का तोहफा, स्वनिधि का पहला कार्यक्रम और नदी जोड़ो अभियान की नींव भी इसी धरती से रखी थी। भोपाल के जंबूरी मैदान से मोदी देशभर की महिलाओं को हर दृष्टि से सशक्त बनाने का आह्वान कर चुके हैं। आयोजन देवी अहिल्या बाई की 300वीं जयंती पर किया गया था।

हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं, MP में लाखों वाहन जोखिम में, फिसड्डी राज्यों की सूची में चौथा

भोपाल  कहने को तो भोपाल प्रदेश की राजधानी है, लेकिन यहां पर नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भोपाल में पिछले 15 साल में करीब 19 लाख गाड़ियां रजिस्टर्ड हुई हैं, लेकिन अब तक करीब 5 लाख में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं लग पाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विभाग ने इस अभियान को प्राथमिकता में रखते हुए 3 महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। लेकिन लगता नहीं कि यह पूरा हो पाएगा। इस मामले में परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले वाहन मालिक अब कोई भी परिवहन संबंधी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करा पाएंगे। जिन वाहनों में यह नंबर प्लेट नहीं लगी है उनके पीयूसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, आरसी बदलाव, परमिट नवीनीकरण और अन्य सेवाएं ठप हो जाएंगी। यह प्रक्रिया आसान है और ऑनलाइन बुकिंग के बाद तय समय पर नंबर प्लेट लगाई जा सकती है। वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) को लेकर परिवहन विभाग और पुलिस महकमा लगातार प्रयासरत है। लेकिन मप्र के वाहन मालिक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगवाने को राजी नहीं हैं। मध्यप्रदेश में कुल 2.45 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से केवल 65.72 लाख वाहनों पर HSRP लगी है। यानी प्रदेश के 1.79 करोड़ से अधिक वाहन (73.24%) अब भी बिना सुरक्षा नंबर प्लेट के सड़क पर दौड़ रहे हैं। सबसे फिसड्डी राज्यों में एमपी चौथे नंबर पर देश में HSRP न लगवा पाने वाले राज्यों में मप्र देश के सबसे फिसड्‌डी राज्यों में चौथे नंबर का प्रदेश है। HSRP लगवाने वाले टॉप स्टेट में जम्मू कश्मीर पहले नंबर पर है। J&K में मात्र 6.63% वाहन ऐसे हैं जिन पर HSRP लगना बाकी है। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगाने में अव्वल राज्यों में टॉप-5 में शामिल है। ये जानकारी लोकसभा में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सवाल के जवाब में दी गई है। एचएसआरपी क्यों जरूरी है परिवहन विभाग का कहना है कि एचएसआरपी नंबर प्लेट हाई-क्वालिटी, टेम्पर-प्रूफ होती है और इसमें एक यूनिक लेजर-कोड होता है, जिससे चोरी या फर्जी नंबर प्लेट लगाने जैसी घटनाओं पर रोक लगती है। साथ ही यह सड़क पर लगे कैमरों से वाहन की सही पहचान में मदद करती है, जिससे ट्रैफिक नियमों का पालन और अपराध नियंत्रण आसान हो जाता है। क्या है हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट? यह एक होलोग्राम स्टिकर है। इस पर वाहन के चेसिस और इंजन के नंबर दर्ज होते हैं। इस खास तरह के स्टिकर को वाहन की नंबर प्लेट पर चिपकाया जाता है। प्लेट पर नंबर उभारकर बनाए जाते हैं, ताकि कोई उनमें छेड़छाड़ न करने पाए। इस पूरी प्लेट को वाहनों की सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है। एक बार प्लेट वाहन में फिट हो जाए तो उसे निकालना भी आसान नहीं हो पाता। HSRP नंबर को प्रेशर मशीन की मदद से लिखा जाता है। इस नंबर से वाहन की पूरी कुंडली सामने आ सकती है। राज्य कुल रजिस्टर्ड वाहन HSRP लगे वाहन HSRP बाकी HSRP बाकी% लक्षद्वीप 21497 508 20989 97.64% आंध्र प्रदेश 18486709 2071421 16415288 88.80% केरल 18502182 4709555 13792627 74.55% मध्य प्रदेश 24556837 6572040 17984797 73.24% अंडमान निकोबार द्वीप समूह 178660 50846 127814 71.54%   कैसे करता है काम ? एचएसआरपी नंबर प्लेट एक होलोग्राम स्टिकर है। इस पर वाहन के चेसिस और इंजन के नंबर दर्ज होते हैं। इस खास तरह के स्टिकर को वाहन की नंबर प्लेट पर चिपकाया जाता है। प्लेट पर नंबर उभारकर बनाए जाते हैं, ताकि कोई उनमें छेड़छाड़ न करने पाए। इस पूरी प्लेट को वाहनों की सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है। एक बार प्लेट वाहन में फिट हो जाए तो उसे निकालना भी आसान नहीं हो पाता। इसमें HSRP नंबर को प्रेशर मशीन की मदद से लिखा जाता है। इस नंबर से वाहन की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। ऐसे करें आवेदन     सबसे पहले ऑटोमोबाइल डीलर्स की संस्था SIAM की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।     “Book HSRP” ऑप्शन पर क्लिक करें, जिससे एचएसआरपी रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलेगा।     फॉर्म में अपना पूरा नाम, ईमेल एड्रेस, स्टेट (मध्य प्रदेश), व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर और डिस्ट्रिक्ट भरें।     “I Agree” पर टिक करें और सबमिट करें।     इसके बाद “Select Your Vehicle Type” में अपनी गाड़ी का प्रकार चुनें (जैसे कार/SUV)।     वाहन निर्माता कंपनी (जैसे Tata Motors) चुनें और “Order Your HSRP Now” पर क्लिक करें।     “Fitment Location” में “Dealer Premises” सेलेक्ट करें।     “HSRP Order Type” में “Old Vehicle HSRP Kit” चुनें।     व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर के आखिरी 5 डिजिट और इंजन नंबर के आखिरी 5 डिजिट भरें।     सिटी और नजदीकी डीलर चुनें।     अपॉइंटमेंट डेट और स्लॉट सेलेक्ट करें।     बिलिंग एड्रेस भरें, मोबाइल नंबर वेरीफाई करें और ऑनलाइन पेमेंट करें।     पेमेंट के बाद तय तारीख पर डीलर के पास जाकर नंबर प्लेट फिट कराएं।     एचएसआरपी की कुल लागत ₹696.20 है (₹540 प्लेट लागत + ₹50 सुविधा शुल्क + ₹16 GST)। भोपाल में 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड भोपाल जिले में इस वक्त 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं जिनमें से 40 प्रतिशत के पास अभी भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं है। ऐसे वाहन मालिक फिलहाल घर बैठे ही सुविधाओं को अपडेट करवा सकते हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (High Security Number Plate) मंगवाने और मोबाइल नंबर को अपडेट करने के लिए आरटीओ के वाहन पोर्टल या सारथी एप के जरिए आवेदन किए जा सकेंगे। ओटीपी के आधार पर मोबाइल नंबर गाड़ी की डिटेल्स के साथ लिंक हो जाएगा। एचएसआरपी नंबर प्लेट नजदीकी डीलर के यहां से फिट करवा सकेंगे। मध्यप्रदेश में 15 साल पुराने वाहन कार-88,529 मोपेड – 20,162 जीप – 21,607 ट्रैक्टर -74,794 आटो रिक्शा – 46,999 गुड्स ट्रक -72, 502 बस – 14,813 टैक्सी -1,098 बाइक -2,08054 स्कूटर -76,188 इसलिए जरूरी मोबाइल नंबर ये मुहिम इसलिए चलाई जा रही है क्योंकि बड़े पैमाने पर व्हीकल रजिस्ट्रेशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड में दर्ज नंबर में भिन्नता पाई जा रही थी। ऐसी स्थिति में किसी भी गाड़ी को किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर आसानी से करवाया जा सकता था। कई ऐसे … Read more

मध्यप्रदेश सरकार की तैयारी, किरायेदारों के अधिकारों को सुरक्षित करेगा नया कानून

भोपाल   किरायेदार और मकान मालिक दोनों को सुरक्षित करने के लिए सरकार मॉडल किराएदारी बिल (Model Tenancy Bill) लागू करने जा रही है। बिल को अंतिम रूप देने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने फिर कवायद शुरू की है। विभाग ने संचालनालय से प्रदेश में बनाए बिल के ड्राफ्ट, लागू कानून और केंद्र के मॉडल किराएदारी एक्ट की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है। नए कानून के ड्राफ्ट में किराएदार और मकान मालिक दोनों के हितों की रक्षा की व्यवस्था है। मकान पर कब्जा होने से रोकने के प्रावधान हैं। एग्रीमेंट खत्म होने पर किराएदार के मकान खाली न करने पर उसे पहले दो माह में दोगुना और तीसरे महीने से चार गुना किराया देना होगा। मकान भी प्रशासन खाली कराएगा। किराएदार की सुरक्षा के लिए मालिक द्वारा घर का नल कनेक्शन, गैस सप्लाई, मार्ग, लिफ्ट, सीढिय़ां, पार्किंग आदि बंद करने पाबंदी लगाई गई है। नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को दे रहा अंतिम रूप नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को अंतिम रूप देने के लिए बैठकें कर रहा है। अफसरों का कहना है, बिल जल्द वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजा जाएगा। वहां से अनुमति के बाद कैबिनेट में पेश होगा। बता दें, अभी प्रदेश में किराएदारी अधिनियम 2010 लागू है। यह सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। नया एक्ट ग्रामीण-शहरी, व्यावसायिक सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा। शासकीय, धार्मिक संस्थान, ट्रस्ट या वक्फ बोर्ड के अधीन परिसरों पर लागू नहीं होगा। विवाद सुलझाने कोर्ट जाने की जरूरत नहीं -नए नियमों के तहत किराएदारी विवाद सुलझाने कोर्ट नहीं जाना होगा। – जिले में किराया प्राधिकारी डिप्टी कलेक्टर स्तर के अफसर होंगे। किराया अतिरिक्त कलेक्टर कोर्ट होगा। – अपील के लिए जिला जज की अध्यक्षता में रेंट ट्रिब्यूनल गठित होगा। – किराएदारी की पूरी जानकारी रखने के लिए अलग पोर्टल बनेगा। – मकान मालिक और किराएदार के बीच के एग्रीमेंट की सूचना किराया प्राधिकारी को 60 दिन में देनी होगी। – प्राधिकारी इसे पोर्टल पर अपलोड करेंगे। किराया वृद्धि या मकान खाली करने जैसी सूचना यहीं अपडेट होंगी। विवाद घटेंगे, भरोसा बढ़ेगा मध्यप्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 27.7 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। यह 40 फीसदी पहुंचने का अनुमान है। लोग बड़ी संख्या में पढ़ाई, नौकरी, व्यापार, बेहतर सुविधा के लिए शहरों में आ रहे हैं। कई लोग किराएदारों के विवाद से बचने के लिए खाली आवास होने के बावजूद किराए पर नहीं देते। लोग अपने कार्यस्थल के पास ही अफॉर्डेबल राशि का भुगतान कर किराए पर आवास लेना चाहते हैं। कई बार मकान मालिक मनमाना किराया मांगते हैं। अभी कानून (Model Tenancy Bill) में इसके प्रावधान नहीं हैं। नए कानून में मकान मालिक अधिकतम दो माह का एडवांस किराया ही ले सकेंगे। मनमानी पर रोक, क्षेत्र के हिसाब से किराया नए एक्ट में जहां मकान मालिक के हितों की रक्षा करने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं. वहीं किराए पर दी जाने वाली संपत्तियों पर मनमानी किराया वसूलने से भी रोक लगाई गई है. इसमें क्षेत्र के आधार पर किराया तय किया जाएगा. जिससे किराएदारों को भी राहत मिलेगी और उन्हें मुंहमांगा किराया नहीं चुकाना पड़ेगा. वर्तमान में शहरों में संपत्ति कर के लिए अलग-अलग स्लैब हैं, इसी आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों पर किराए की दर भी निर्धारित की जाएगी. अतिरिक्त निर्माण पर रोक, क्षतिपूर्ति देनी होगी एमटीए के तहत अब किराएदार संबंधित संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण नहीं करा सकेगा. यदि वह ऐसा कराता है, तो उसके साथ बेदखली की कार्रवाई भी की जा सकेगी. इसके साथ उसके द्वारा किराए के लिए जमा की गई एडवांस राशि में से ही अतिरिक्त निर्माण को हटाने के साथ मकान को व्यवस्थित किया जाएगा. मकान या दुकान में टूट-फूट होने पर भी यही प्रावधान लागू होंगे. यानि क्षतिपूर्ति किराएदार को चुकानी होगी. एमटीए में एजेंट को मिलेगा कानूनी दर्जा मकान मालिक और किराएदारों के बीच में बड़ा रोल एजेंटो का भी होता है, लेकिन अब तक इनको एक्ट में नहीं लिया गया था, लेकिन नए मॉडल टेनेंसी एक्ट में एजेंटों को भी एक्ट के दायरे में लाया गया है. इनको हर साल अपना पंजीयन कराना होगा. एजेंट संबंधित जिले में कलेक्टर कार्यालय में जाकर अपना पंजीयन करा सकेंगे. इसके लिए एजेंटो को मामूली शुल्क भी चुकाना होगा. ऐसे में अब एजेंटो को भी कानूनी दर्जा मिलेगा. ट्रिब्यूनल के बाद ही सिविल कोर्ट में होगी सुनवाई बता दें कि नए एक्ट के तहत मकान मालिक और किराएदार के बीच आपसी विवाद निपटाने के लिए किराया प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे. वहीं अलग से एक रेंट कोर्ट भी होगी, जिसमें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करेंगे. इसी प्रकार रेंट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा. जिसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश सुनवाई करेंगे. वहीं रेंट ट्रिब्यूनल में विवाद नहीं सुलझ पाने के बाद ही इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होगी. ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियां भी एक्ट के दायरे में साल 2010 में जो किराएदारी का एक्ट बना था. उसमें केवल शहरी क्षेत्रों को लिया गया था, यानि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कानून लागू नहीं होता था. लेकिन अब नया कानून शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होगा. खास बात यह है कि अब तक दूतावास, बहु राष्ट्रीय कंपनियां, आयोग और अंतराष्ट्रीय संगठन समेत कुछ संस्थाओं को इस एक्ट से छूट थी, लेकिन अब नए किराएदारी के एक्ट में इन सबको अधिनियम के तहत प्रावधानों का पालन करना होगा. अन्यथा इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. विवाद निपटाने के लिए न्यायालय और ट्रिब्यूनल का गठन नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश में अब तक किराएदारी अधिनियम 2010 का पालन किया जा रहा है. लेकिन इसमें कई विसंगतियां है. ऐसे में अब नए एक्ट एमटीए बनाया गया है. इस एक्ट में कई बातें स्पष्ट हैं, जिससे मकान मालिक और किराएदार के बीच बार-बार विवाद की नौबत नहीं बनेगी. वहीं यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए भी एक्ट में न्यायालय और ट्रिब्यूनल का प्रावधान है. यानि कि एक्ट के लागू होते ही मध्य प्रदेश में किराएदारी के विवाद निपटाने के लिए न्यायालय या ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाएगी. विधानसभा सत्र में रखा जाएगा मॉडल टेनेंसी एक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने … Read more

MP में सड़क हादसों की स्थिति चिंताजनक, सावधानी के साथ चलें: आंकड़े बताते गंभीर स्थिति

भोपाल   केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। अगस्त के अंतिम हफ्ते में जारी इस रिपोर्ट से मध्य प्रदेश में सड़कों की बदहाली और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी खुलकर सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उक्त अवधि में देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसों में तमिल नाडु के बाद मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा। हादसों में सबसे ज्यादा मौत उत्तर प्रदेश और तमिल नाडु में हुईं, जबकि मध्य प्रदेश चौथे नंबर पर रहा। इतना ही नहीं, देश में तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पूरे देश में चार लाख 80 हजार 583 सड़क हादसे हुए। इनसे एक लाख 72 हजार 890 लोगों की मौत हुई और चार लाख 62 हजार 825 लोग घायल हुए। देश में हुए कुल हादसों में से 14 प्रतिशत हादसे तमिल नाडु, 11.5 प्रतिशत मध्य प्रदेश, 10 प्रतिशत केरल, 9.39 प्रतिशत उप्र और 9 प्रतिशत हादसे कनार्टक में हुए। देश में यही पांच राज्य टाप-फाइव की सूची में शामिल हैं। टाप-पांच राज्य : कहां कितने हादसे     तमिलनाडु – 67 हजार 213     मध्य प्रदेश – 55 हजार 327     केरल – 48 हजार 091     उत्तर प्रदेश – 44 हजार 534     कर्नाटक – 43 हजार 440 सड़क हादसों में मौत : टाप-फाइव राज्य     उप्र – 23 हजार 652     तमिल नाडु – 18 हजार 347     महाराष्ट्र – 15 हजार 366     मप्र – 13 हजार 798     कर्नाटक – 12 हजार 321 नेशनल हाइवे पर हादसे     उत्तर प्रदेश – 8446     तमिलनाडु – 6258     मध्य प्रदेश – 5780 ट्रैफिक नियम तोड़ने के कारण सबसे ज्यादा हादसे मप्र में     रिपोर्ट में सड़क हादसों की अलग-अलग वजहों का भी विश्लेषण किया गया है। सामने आया है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे ट्रैफिक नियम तोड़ने की वजह से हुए।     प्रदेश में ट्रैफिक नियम न मानने की वजह से 44 हजार 592 हादसे हुए। वहीं तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मरने वालों की संख्या मप्र में 11 हजार 380 रही, जो देश में सबसे ज्यादा है।     देश में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जबलपुर तीसरे नंबर पर है, जहां हादसों में 545 लोगों ने जान गंवाई है। दिल्ली 1457 मौत के साथ पहले नंबर पर है। टाप-10 शहर…जहां सबसे ज्यादा हादसे     दिल्ली – 5834     बेंगलुरु – 4974     जबलपुर – 4205     चेन्नई – 3653     इंदौर – 3566     मल्लपुरम – 3253     हैदराबाद – 2943     जयपुर – 2915     भोपाल – 2906     कोच्चि – 2803 शाम 6 से 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे, मरने वालों में दो पहिया वाले ज्यादा रिपोर्ट में वर्ष 2020 से लेकर 2023 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। सामने आया कि शाम 6 से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे हुए। 2023 में इस समयावधि में 99 हजार 945 हादसे हुए हैं। यह कुल हादसों का 20.8 प्रतिशत है। ऐसे हादसों में जान गंवाने वाले सबसे ज्यादा दो पहिया सवार हैं। 2023 में सात हजार 591 दो पहिया सवारों की मौत हुई, जबकि पैदल चलने वालों की संख्या चार हजार 604 के साथ दूसरे नंबर पर है। एक हजार 593 कार सवारों की मौत हुई।