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स्मार्ट मीटरिंग की दिशा में बड़ी उपलब्धि! भोपाल में अब तक 3 लाख से अधिक स्मार्ट मीटरों की सफल स्थापना

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर , मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल सहित कंपनी के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के परिसर में कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर स्थापित कर दिए गए हैं। जिन अधिकारियों के घरों पर स्‍मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उनमें पीडीटीसी के निदेशक श्री अनिल खत्री, महाप्रबंधक प्रशासन एवं पीजीआर श्री संपूर्णानंद शुक्‍ला, उप मुख्‍य महाप्रबंधक सतर्कता श्री आरएनएस ठाकुर, महाप्रबंधक (स्‍मार्ट मीटरिंग सेल) श्री सी.के.पवार, वरिष्‍ठ सुरक्षा अधिकारी श्री राजेश यादव सहित अनेक अधिकारी शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सभी उपभोक्‍ताओं से आग्रह किया है कि वे स्‍मार्ट मीटर के फायदों को देखते हुए अपने घरों में स्‍मार्ट मीटर जरूर लगवाएं। गौरतलब है कि कंपनी के सभी 16 जिलों में उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के अंतर्गत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम त्वरित गति से चल रहा है। अब तक कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अब तक 03 लाख, 03 हजार 305 स्मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। सर्वाधिक भोपाल शहर वृत्‍त में 1 लाख 62 हजार 320 स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। कंपनी ने कहा है कि स्‍मार्ट मीटर लगने से उपभोक्‍ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्‍मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्‍मार्ट मीटर के फायदे बताते हुए कहा है कि स्‍मार्ट मीटर से रियल टाइम डेटा प्राप्‍त किया जा सकता है, जिससे उपभोक्‍ताओं को सटीक और समय पर बिलिंग सुनिश्चित की जा रही है। कंपनी ने बताया कि जहां-जहां भी स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं वहां पर बिलिंग तथा रीडिंग निर्धारित समय पर हो रही है, इससे सभी उपभोक्‍ता संतुष्‍ट हैं। दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है। जून माह का बिल जो कि जुलाई माह में जारी हुआ है, उसमें दिन के टैरिफ में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपयोग की गई विद्युत के दौरान बनी यूनिट पर छूट अलग कॉलम में अंकित की गई है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और एलटी औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए ऑफ पीक/ सौर समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर यह छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को मिल रही है।  

फिशरीज सेक्टर में क्रांति: हसदेव डुबान में शुरू होगा छत्तीसगढ़ का पहला एक्वा पार्क

उत्पादन प्रोसेसिंग से लेकर एक्वा टूरिजम से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय रायपुर, छत्तीसगढ़ में जल्द ही मछली पालन के क्षेत्र में एक नये युग की शुरूआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से केन्द्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के कोरबा जिले में हसदेव बांगो डुबान जलाशय में पहला एक्वा पार्क स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत केन्द्र सरकार से 37 करोड़ 10 लाख रूपए से अधिक की राशि स्वीकृत हो चुकी हैं। यह एक्वा पार्क एतमा नगर और सतरेंगा क्षेत्र में फैलें सैकड़ों एकड़ डुबान जलाशय में विकसित होगा। इस एक्वा पार्क विकसित हो जाने से राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा। मछली उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, विक्रय, निर्यात और एक्वा टूरिजम से क्षेत्र के ग्रामीणों की आय बढ़ेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पार्क की स्थापना के लिए राशि स्वीकृत करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित केन्द्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। कोरबा जिले के हसदेव बांगो जलाशय के डुबान क्षेत्र में विकसित होने वाले इस एक्वा पार्क में दो तरह की सुविधाएं होंगी। एतमा नगर में फीड मिल, फिश प्रोेसेसिंग प्लांट, हेचरी और रिसर्कुलेटरी एक्वा कल्चर सिस्टम स्थापित होगा। वहीं सतरेंगा में एक्वा टूरिजम को बढ़ाने के लिए म्यूजियम और अन्य सुविधा विकसित की जाएंगी। एतमा नगर में मछलियों के उत्पादन से लेकर उनकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के साथ-साथ उन्हें विदेशों में एक्सपोर्ट करने तक की सुविधा विकसित होगी। हेचरियों में मछलियों के बीज उत्पादन से लेकर फीड मिल में पूरक पोषक आहार भी यहीं बनेगा। फिश प्रोसेसिंग प्लांट में मछलियों की सफाई, हड्डियां हटाकर फिले बनाना और उसे उच्च स्तरीय गुणवत्ता वाले पैकेजिंग सिस्टम से पैक कर विदेशों में निर्यात करने की पूरी व्यवस्था यहां की जाएगी। एतमा नगर के इस प्रोसेसिंग यूनिट से हटकर सतरेंगा में एक्वा म्यूजियम बनेगा। पहले ही सतरेंगा पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का प्रमुख वाटर बॉडी है। एक्वा म्यूजियम बन जाने से विभिन्न प्रकार की मछलियों को पर्यटकों की जानकारी के लिए यहां रखा जाएगा। इसके साथ ही सतरेंगा में एंगलिंग डेस्क, कैफेटेरिया, फ्लोटिंग हाउस तथा मोटर बोट सहित वाटर स्पोर्ट्स की सविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा। पर्यटन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। एक्वा पार्क बनने से प्रदेश में मछली व्यवसाय को मिलेगी नई दिशा – मुख्यमंत्री साय इस एक्वा पार्क की स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के मछली पालकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि इस एक्वा पार्क से न केवल मछली पालन की नई उन्नत तकनीकें लोगों तक पहुंचेंगी, बल्कि प्रोसेसिंग-पैकेजिंग यूनिट से छत्तीसगढ़ के मछली व्यवसाय को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की तिलपिया मछली की विदेशों में बहुत मांग है और इस एक्वा पार्क में इस मछली के उत्पादन से छत्तीसगढ़ के मछली पालकों के लिए अब सात समुन्दर पार भी व्यापार के द्वार खुलेंगे। उन्होंने एक्वा पार्क की स्थापना को मछली पालन के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने वाला निर्णय बताया है। अभी लगभग 800 केज में हो रहा मछली उत्पादन, 160 से अधिक मछुआरें उठा रहे लाभ हसदेव बांगो जलाशय के डुबान क्षेत्र में वर्तमान समय में लगभग 800 केज लगे हैं। जहां मछली पालन विभाग के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में लगभग 9  मछुआ समितियों के 160 सदस्य मछली पालन कर रहे हैं। उन्हें पांच-पांच केज आबंटित किए गए हैं। केज कल्चर से इन सदस्यों को औसतन 90 हजार रूपए सालाना शुद्ध आमदनी मिल रही है। मछुआ समिति के सदस्य दीपक राम मांझीवार, अमर सिंह मांझीवार और श्रीमती देवमति उइके ने बताया कि केज कल्चर से उन्हें न केवल रोजगार मिला है, बल्कि मछलियों का उत्पादन बढ़ जाने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। इस क्षेत्र में हर साल लगभग 1600 मेट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है। केज कल्चर से मछली पालन में 70 से 80 लोग सीधे तौर पर रोजगार पा रहे हैं, वहीं 20 से 25 पैगारों-चिल्हर विक्रेताओं को बेचने के लिए हर दिन मछली मिल रही हैं। यहां मछली पालन के विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को उन्नत तकनीकों से प्रशिक्षित किया है। हसदेव बांगो डुबान केज कल्चर में मुख्यतः तिलपिया और पंगास मछली का उत्पादन किया जा रहा है। तिलपिया प्रजाति की मछली की अमेरिका में विशेष मांग है और इसका सीमित मात्रा में अभी निर्यात किया जा रहा है। एक्वा पार्क स्थापित कर इस मछली का उत्पादन बढ़ाकर अमेरिका सहित दूसरे यूरोपीय देशों में भी इसका निर्यात बढ़ाने की योजना है। इस मछली का निर्यात बढ़ने से बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर ग्रामीणजन इस व्यवसाय से जुडे़ंगे और उनकी आमदनी बढ़ने से क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। एतमा नगर के साथ ही सतरेंगा में एक्वा पार्क के विस्तार तथा डिमोस्ट्रेशन यूनिट स्थापित हो जाने से पर्यटन बढ़ेगा। देश-प्रदेश से लोग यहां मनोरंजन के साथ-साथ स्वादिष्ट मछलियों के कई प्रकार के व्यंजनों का भी लुफ्त उठा सकेंगे, इससे भी स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी।  

मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई

पालकी में भगवान चन्द्रमोलेश्वर व मनमहेश हाथी पर विराजित होकर भक्तों का कुशल-क्षेम लेने उज्जैन नगर भ्रमण पर निकले मुख्यमंत्री डॉ. यादव डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पूरे सवारी मार्ग पर चले पैदल मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई अलग-अलग स्थानों पर 8 जनजातीय दलों के द्वारा दी गई प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में हुए शामिल उज्जैन  श्रावण माह का दूसरा सोमवार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में शामिल हुए। भगवान महाकालेश्वर पालकी में चन्द्रमोलेश्वर के रूप में तथा हाथी पर मनमहेश के स्वरूप में विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देने और अपनी प्रजा का कुशल-मंगल जानने नगर भ्रमण पर निकले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सवारी निकलने के पूर्व सभा मंडप में पालकी का पूजन-अर्चन किया। सर्वप्रथम भगवान महाकालेश्वर भगवान का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन कर आरती की गई। भगवान श्रीमहाकाल की सवारी धूमधाम से निकाली गई जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर 08 जनजातीय दलों के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संपूर्ण सवारी मार्ग पर बाबा महाकाल की आराधना और भजन-कीर्तन करते हुए नंगे पांव चले। इस दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालुहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, संजय अग्रवाल आदि ने भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए। भगवान महाकालेश्वर की दूसरी सवारी के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव पूरे सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पैदल चले। स्कूली विदयार्थियों द्वारा घोष वादन किया गया और श्रध्दालुओं के भोले शंभु भोलेनाथ के जयकारों से संपूर्ण उज्जैन नगरी गुंजायमान हुई। एम्बुलेन्स को निकलने के लिए जगह दी सवारी के दौरान रोगी को ले जा रही एम्बुलेन्स को सवारी मार्ग के बीच से निकलने के लिए श्रध्दालुओं द्वारा ढाबा रोड व कमरी मार्ग पर रास्ता प्रदान किया गया। सम्पूर्ण सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के उद्घोष के साथ पुष्प वर्षा की।   महाकाल के चन्द्रमोलेश्वर स्वरूप को गार्ड ऑफ ऑनर भगवान चन्द्रमोलेश्वर पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में सवार चन्द्रमोलेश्वर भगवान को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दिया गया। सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के घोष के साथ अवन्तिका नगरी के राजाधिराज पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमोलेश्वर व हाथी पर आरूढ़ भगवान मनमहेश पर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर सवारी में पुलिस बैंड की प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरुप 350 पुलिस के जवानों द्वारा पुलिस बैंड के माध्यम से नम: शिवाय ॐ नमः शिवाय, हर हर शंभू देवा महादेवा, मेरे घर राम आए है, देवा हो देवा गणपति देवा, ॐ जय शिव ओमकारा ,सत्यम शिवम सुन्दरम आदि शिवभजनों की सु-मधुर धुनों की प्रस्तुतियां दी गई जिस पर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर झूमे। बाबा महाकाल की एक झलक के लिए असंख्य श्रद्धालु हुए आतुर भगवान श्रीमहाकाल की सवारी के दौरान पूरी उज्जैन नगरी शिवमय हो गई। महाकालेश्वर भगवान की सवारी में हजारों भक्त झांझ, मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। साथ ही उज्जैन के बाहर से आये हुए भक्तगण भी बाबा की एक झलक पाने के लिए उत्सुक थे। महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान चन्द्रमोलेश्वर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा माँ क्षिप्रा के जल से अभिषेक पूजन किया गया। रामघाट के दूसरी तरफ दत्त अखाडा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। साथ ही कलाकार सुलक्ष्मी तलरेजा के द्वारा भगवान शिव पर आधारित भजन प्रस्तुत किए गए। भगवान महाकालेश्वर की पालकी के रामघाट पहुंचने पर शंखनाद और भगवान महाकालेश्वर की आरती की गई। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने यहां भगवान महाकालेश्वर का पूजन अर्चन कर प्रदेश की सुख समृद्धि और विकास की कामना की। पूजन – अर्चन के उपरांत भगवान महाकाल की सवारी रामघाट से रामानुज कोट ,  मोढ की धर्मशाला, कार्तिकचौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। जहाँ परंपरानुसार सिंधिया स्टेट की ओर से गोपाल मंदिर के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित चन्द्रमोलेश्वर का पूजन किया गया। सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। जहाँ पुनः आरती उपरांत सवारी का विश्राम हुआ। 8 जनजातीय कलाकारों के दल ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप बाबा महाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए 08 जनजातीय कलाकारों के दल ने महाकालेश्वर भगवान की दूसरी सवारी में सहभागिता की। जनजातीय दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर कला संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। छवीलदास भावली के नेतृत्व में नासिक महाराष्ट्र के जनजातीय सौगी मुखोटा नृत्य एवं अजय कुमार के नेतृत्व में हरियाणा का लोकनृत्य हरियाणवी घुमर के दल ने महाकालेश्वर मंदिर परिसर व शहनाई द्वार के पास अपने साथियों के साथ प्रस्तुति दी। खेमराज के नेतृत्व में राजस्थान का गैर-घूमरा जनजातीय नृत्य व रवि अहिरवार के नेतृत्व में मध्यप्रदेश छतरपुर के बरेदी लोकनृत्य की कोट मोहल्ला चौराहे पर प्रस्तुति दी गई। अज्जू सिसोदिया के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में झाबुआ का भगोरिया नृत्य एवं बनेसिंह भाई के नेतृत्व में गुजरात जनजातीय राठ नृत्य दल ने रामानुजकोट पर अपनी संस्कृति व कला का प्रदर्शन लोकनृत्य के माध्यम से किया। माँ क्षिप्रा के तट रामघाट पर उडीसा के लोकनृत्य शंख ध्वनि सुनील कुमार साहू के नेतृत्व में व छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य लोकपंथी का दिनेश कुमार जागड़े के नेतृत्व में दलों ने महाकालेश्वर भगवान के सवारी के आगमन पर प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। चलित रथ में लगी एलईडी से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए सवारी के आगे और पीछे एलईडी लगे 2 रथ चले, जिस पर सवारी के लाइव प्रसारण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सुगमता पूर्वक दर्शन किए। 

यूपी स्कूल मर्जर विवाद: एकल पीठ के फैसले को दी चुनौती, आज डबल बेंच में होगी सुनवाई

लखनऊ प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के विलय मामले में एकल पीठ के फैसले को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दो न्यायाधीशों की खंडपीठ में विशेष अपीलें दाखिल कर चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष आज विशेष अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। अपीकर्ताओं के अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने बताया कि पहली विशेष अपील 5 बच्चों ने, और दूसरी 17 बच्चों ने अपने अभिभावकों के जरिए दाखिल की है। इनमें स्कूलों के विलय में एकल पीठ द्वारा बीती 7 जुलाई को दिए गए फैसले को रद्द करने का आग्रह किया गया है। इसके बाद मामले में दाखिल एक जनहित याचिका को भी खंडपीठ ने बीती 10 जुलाई को खारिज कर दिया था। एकल पीठ खारिज कर चुकी है याचिका बीती 7 जुलाई को स्कूलों के विलय मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली थी। एकल पीठ ने प्रथामिक स्कूलों के विलय आदेश को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्रथामिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बीती 16 जून को जारी उस आदेश को चुनौती  देकर रद्द करने का आग्रह किया गया था, जिसके तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया है। याचियों ने इसे मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला कहा था। साथ ही मर्जर से छोटे बच्चों के स्कूल दूर हो जाने की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया था। याचियों की ओर से खास तौर पर दलील दी गई थी कि स्कूलों को विलय करने का सरकार का आदेश, 6 से 14 साल के बच्चों के मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने वाला है। सरकार स्पष्ट कर चुकी है अपना रुख राज्य सरकार की ओर से याचिकाओं के विरोध में प्रमुख दलील दी गई कि विलय की कारवाई, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए बच्चों के हित में की जा रही है। सरकार ने ऐसे 18 प्रथामिक स्कूलों का हवाला दिया था जिनमें एक भी विद्यार्थी नहीं है। कहा कि ऐसे स्कूलों का पास के स्कूलों में विलय करके शिक्षकों और अन्य सुविधाओं का बेहतर उपयोग किया जाएगा। कहा था कि सरकार ने पूरी तरह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिहाज से ऐसे स्कूलों के विलय का निर्णय लिया है।  

MPBSE ने द्वितीय परीक्षा की कॉपियां जांची, अब छात्रों को रिजल्ट का इंतजार

भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की ओर से बोर्ड 10वीं व 12वीं की द्वितीय परीक्षा का दो चरणों में मूल्यांकन कार्य पूरा हो गया है। पहला चरण दो से 11 जुलाई तक और दूसरा 12 से 20 जुलाई तक चला। 28 या 29 जुलाई को परिणाम जारी कर दिया जाएगा। इस परीक्षा में साढ़े तीन लाख अभ्यर्थियों की नौ लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। उधर, माशिमं भोपाल के एक केंद्र पर 12वीं के विद्यार्थियों द्वारा 10वीं का प्रश्नपत्र हल करने के मामले में मूल्यांकन किस तरह होगा। इस संबंध में मंडल की परीक्षा समिति 24 जुलाई को निर्णय लेगी। गलत प्रश्नपत्र हल करने वाले उत्तरपुस्तिकाओं को समिति में भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में समिति निर्णय लेगी। तीसरी बार परीक्षा के तनाव से नहीं गुजरना होगा मंडल के सचिव केडी त्रिपाठी का कहना है कि विद्यार्थियों का नुकसान नहीं होगा, उन्हें फिर से तीसरी बार परीक्षा के तनाव से नहीं गुजरना होगा। इस प्रकरण में दोषी केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं अब तक स्कूल शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं की है। स्कूल शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक को निलंबित नहीं किया है। बता दें, कि अरेरा कॉलोनी स्थित शासकीय नवीन उमावि के परीक्षा केंद्र पर 19 जून को 12वीं के विद्यार्थियों को 10वीं कक्षा का अंग्रेजी का पर्चा दे दिया था। उसे उन्होंने हल करा लिया।

MP पंचायत चुनाव में तकनीकी कदम: IPBMS से होगा सरपंच व जनपद सदस्य चयन

मतदान 22 जुलाई को सुबह 7 बजे से दमोह पंचायत उप निर्वाचन-2025 में त्रि-स्तरीय पंचायतों में रिक्त पद के लिये 22 जुलाई को सुबह 7 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक मतदान होगा। सरपंच पद के लिये 49 और जनपद पंचायत सदस्य के 5 पदों के लिये मतदान होगा। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग अभिषेक सिंह ने जानकारी दी है कि इनमें से सागर जिले की 4 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिये 9 मतदान केन्द्रों और दमोह जिले के वार्ड-16 के जनपद सदस्य के निर्वाचन के लिये 9 मतदान केन्द्रों में इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीबीएमएस) से मतदान कराया जायेगा। इन मतदान केन्द्रों की मतदान प्रकिया का सीधा प्रसारण भी किया जायेगा। इसके लिये राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय के सामने तथा सागर और दमोह में एक-एक स्क्रीन लगाई जायेगी। सागर जिले के जनपद पंचायत जैसीनगर की ग्राम पंचायत अगरा, औरिया, जनपद पंचायत खुरई की ग्राम पंचायत मुहासा और जनपद पंचायत राहतगढ़ की ग्राम पंचायत सेमरालहरिया के मतदान केन्द्रों में इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम से मतदान कराया जायेगा। शेष पदों पर पूर्व की भांति मतदान कराया जायेगा।   इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पेपरलेस बूथ की नवीन पहल की गई है। इसमें मतदान केन्द्रों में मतदाता और मतदानकर्मियों द्वारा किये जाने वाला पूरा काम डिजिटल माध्यम से किया जाता है। उल्लेखनीय है कि इस नवीन पहल के तहत वर्ष 2024 में भोपाल जिले के बैरसिया तहसील की ग्राम पंचायत रतुआ रतनपुर और रीवा जिले के अतरैला ग्राम पंचायत के सरपंच पद के लिये मतदान सफलतापूर्वक किया जा चुका है। जनपद पंचायत सदस्य के लिये पहली बार इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम से मतदान करवाया जा रहा है।   

सरकारी भर्तियों में बड़ा सुधार, एक परीक्षा से खुलेंगे कई विभागों के द्वार

भोपाल  सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें एक ही पद के लिए बार-बार परीक्षाएं नहीं देनी होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने नई भर्ती प्रणाली को लेकर प्रारूप तैयार किया है। यह प्रस्ताव मुख्य सचिव अनुराग जैन के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंजूरी ली जाएगी। इस प्रस्ताव के अमल में आने से न केवल परीक्षार्थियों का समय और धन बचेगा, बल्कि भर्ती प्रणाली भी अधिक दक्ष और पारदर्शी बनेगी। यह बदलाव खासतौर पर युवाओं के लिए बड़ा राहत भरा साबित होगा। भर्ती प्रक्रिया में ये होंगे अहम बदलाव  नए प्रस्ताव के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) केवल 6 प्रकार की परीक्षाएं आयोजित करेगा, जिसमें प्रशासनिक सेवा और वन सेवा शामिल होंगी। MPESB (पूर्व में व्यापमं) 5 प्रमुख श्रेणियों की परीक्षाएं आयोजित करेगा, जिसमें इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, स्नातक एवं परास्नातक डिग्रीधारकों के लिए परीक्षाएं होंगी। एक मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर नियुक्तियां होंगी। उम्मीदवारों को आवेदन के समय विभागों के वैकल्पिक नाम भरने होंगे, जिससे चयन के बाद विभाग बदलने की समस्या नहीं रहेगी। परीक्षार्थियों को क्या होगा लाभ  अब हर पद के लिए अलग-अलग परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। परीक्षा शुल्क की बचत होगी। चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होगी। परीक्षा परिणामों को लेकर होने वाले विवाद भी कम होंगे। वर्तमान में पीएससी सालभर में 25 और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ( MPESB) करीब 30 प्रकार की परीक्षाएं आयोजित करता है, जिससे अभ्यर्थियों को बार-बार आवेदन और परीक्षा देने की परेशानी होती है। नई नीति के लागू होते ही यह दोहराव खत्म होगा।  चार प्रमुख श्रेणियों में परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी है स्नातक स्तरीय परीक्षा- सभी ग्रुप-सी के पदों के लिए हायर सेकेंडरी स्तरीय परीक्षा- 12वीं पास योगयता पर आधारित पदों के लिए तकनीकी पदों के लिए परीक्षा- इंजीनियरिंग,आइटीआइ आदि तकनीकी योग्यता वाले पद शिक्षक पात्रता परीक्षा- उच्च माध्यमिक,माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक पदों के लिए आवेदन के समय करेंगे अभ्यर्थी करेंगे च्वाइस फिलिंग विभिन्न विभागों की एक जैसी भर्ती के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा होगी, लेकिन पेपर एक जैसा तैयार किया जाएगा। अभ्यर्थियों को आवेदन करते समय च्वाइस फिलिंग करनी होगी कि वे किसी पद के लिए आवेदन किया है और परीक्षा दी है।उसके हिसाब से मेरिट सूची तैयार होगी। इस बदलाव से लाभ एक ही परीक्षा से अनेक विभागों में चयन की संभावना। विभिन्न विभागों के लिए बार-बार आवेदन और परीक्षा की जरूरत नहीं। अभ्यर्थियों का समय, पैसा और मानसिक तनाव कम होगा। भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जल्द होगी। मेरिट के आधार पर निष्पक्ष नियुक्तियां संभव होंगी। साल 2025 की आगामी ये परीक्षाएं प्रस्तावित हैं आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा-अगस्त 2025 प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-अगस्त-सिंतबर 2025 समूह-02 उपसमूह-03 -अक्टूबर 2025 समूह-01 उपसमूह-02 -अक्टूबर 2025 संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग-सितंबर 2025 समूह-02 उपसमूह-04-नवंबर 2025 क्षेत्ररक्षक,जेल प्रहरी परीक्षा-नवंबर 2025 समूह-03 उपयंत्री-जनवरी 2026 आइटीआई में प्रशिक्षण अधिकारियों के पदों की चयन परीक्षा-फरवरी 2026 समूह-02 उपसमूह02 -मार्च 2026 सूबेदार,शीघ्रलेखक,सहायक उप निरीक्षक चयन परीक्षा-अप्रैल 2026 पुलिस आरक्षक जीडी भर्ती परीक्षा -अप्रैल 2026 सहायक उप निरीक्षक (कंप्यूटर) एवं प्रधान आरक्षक (कंप्यूटर) भर्ती परीक्षा- मई 2026 ईएसबी का क्या कहना है? ईएसबी के संचालक साकेत मालवीय ने कहा कि एक ही ग्रुप की एक जैसे समकक्ष पदों के लिए चार परीक्षाएं कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब साल भर में करीब 30 परीक्षाओं के बदले चार परीक्षाएं होंगी। अगर शासन से मंजूरी मिलती है तो इसे लागू किया जाएगा। पीएससी से केवल राज्य प्रशासनिक परीक्षाएं नए बदलावों के तहत एमपीपीएससी अब केवल राज्य प्रशासनिक सेवा, वन सेवा, इंजीनियरिंग, शिक्षा और कृषि सेवा जैसी प्रमुख परीक्षाएं आयोजित करेगा। एमपीईएसबी द्वारा स्नातक, 12वीं और पीजी स्तरीय पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। अब तक की व्यवस्था एमपीपीएससी(Government Jobs Rules Change) सालभर में 25 तो ईएसबी 30 परीक्षाएं आयोजित करता था। अब पीएससी से 6 तो एमपीईएसबी 5 होंगी। बदलाव के ये फायदे     बार-बार परीक्षा देने की जरूरत नहीं।     परीक्षा शुल्क में कमी आएगी।     एक परीक्षा से विभिन्न में चयन संभव।     आवेदन के समय इच्छित विभाग चुनेंगे।     एकीकृत मेरिट सूची बनेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सौगात: प्रदेश के बच्चों को 4.30 लाख साइकिलों का वितरण

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग इस वर्ष नि:शुल्क साइकिल प्रदाय योजना में 4 लाख 30 हजार बच्चों को नि:शुल्क साइकिल का वितरण करेगा। साइकिल वितरण की शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरू पूर्णिमा महोत्सव में भोपाल के शासकीय कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय के सर्व सुविधा युक्त भवन के लोकार्पण समारोह से की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 50 बच्चों को नि:शुल्क साइकिलें वितरित की। प्रदेश में अब तक एक लाख से अधिक बच्चों को उनकी पात्रतानुसार नि:शुल्क साइकिल का वितरण किया जा चुका है। नि:शुल्क साइकिल प्रदाय योजना में ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत विद्यार्थी जो कि शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 और 9 में अध्ययनरत हैं, वह जिस ग्राम का निवासी है उस ग्राम में शासकीय माध्यमिक या हाई स्कूल संचालित नहीं है और उसे अपने विद्यालय तक पहुचंने के लिये 2 किलोमीटर या इससे अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है, उन बच्चों कक्षा 6 या 9 में प्रथम प्रवेश पर एक बार नि:शुल्क साइकिल दिये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कन्या छात्रावास में पढ़ने वाली छात्राएं, जिनकी शाला छात्रावास से 2 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर है उन्हें भी इस योजना में नि:शुल्क साइकिल प्रदाय की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पहले सभी पात्र विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरण के निर्देश दिये हैं। संचालनालय स्तर पर नि:शुल्क साइकिल वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है। कक्षा 6 में पढ़ने वाले बच्चों को 18 इंच और कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले बच्चों को 20 इंच की साइकिल वितरित की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को साइकिल वितरण के पहले उनके उचित भंडारण के संबंध में भी निर्देश दिये गये हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष विभागीय योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को उचित समय पर दिये जाने के संबंध में कार्ययोजना तैयार की है।

युवाओं के लिए खुशखबरी! योगी सरकार की नई योजना से बड़ी कंपनियों में मिलेगा रोजगार

लखनऊ  यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने रोजगार के लिए एक नया प्लान बनाया है. जीरो पावर्टी अभियान के अंतर्गत योगी सरकार ने एक ऐसी योजना का खाका तैयार किया है जो न सिर्फ ट्रेनिंग देगी, बल्कि कई बड़ी नामी कंपनियों में सीधे नौकरियों से जोड़ेगी.  इस अभियान की शुरुआत के पहले चरण में 300 गरीब परिवारों के मुखियाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर की जाएगी. जिससे उन्हें 18,400 रुपए प्रति महीने सैलरी  वाली नौकरियों से जोड़ा जा सकेगा. खास बात यह है कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन लोगों को नौकरी के लिए परेशान नहीं होना होगा. एक न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक कंपनियां खुद इन लोगों तक पहुंचेंगी. राज्य सरकार उन्हें सीधे टॉप कंपनियों में प्लेस कराएगी. इनमें होटल ताज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एल एंड टी लिमिटेड, अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक यह देश में पहली बार है जब कोई सरकार प्रत्यक्ष रूप से गरीबों को कॉर्पोरेट सेक्टर से जोड़ने जा रही है. अब काबिलियत होगी पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि गरीबों को सिर्फ राहत की जरूरत नहीं, बल्कि अवसरों की जरूरत है. उन्हें अगर अवसर मिलें तो कोई भी परिवार आत्मनिर्भर बन सकता है. सरकार की सोच है कि दया नहीं, अवसर दें.  ताकि कमजोर वर्ग खुद पर गर्व कर सके. कौशल विकास विभाग के जिम्मे होगी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को इस अभियान की कमान सौंपी गई है. मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अनुसार, पहले चरण में 300 परिवारों को चिन्हित कर लिया गया है. इसके बाद अभियान को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा. इसके लिए एक हज़ार से अधिक ट्रेनिंग पार्टनर प्रदेश भर में चयनित किए जा रहे हैं जो व्यावसायिक प्रशिक्षण की प्रक्रिया में भाग लेंगे. नौकरी के लिए हर पहलू पर तैयारी यह योजना पारंपरिक प्रशिक्षण से एकदम अलग होगी. यहां केवल तकनीकी जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा. 360 डिग्री मॉडल के तहत जिन क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा उनमें हॉस्पिटैलिटी, बुनियादी अंग्रेजी व संवाद कौशल, कस्टमर डीलिंग, कार्यालय और शौचालय की सफाई, गेस्ट अटेंडेंट, हाउसकीपिंग के काम है. ट्रेनिंग इस तरह तैयार की गई है कि सभी प्राइवेट सेक्टर की जरूरतों के अनुरूप ढल सकें और उन्हें काम मिलने में कोई बाधा न हो. 18,400 मासिक वेतन की न्यूनतम गारंटी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चयनित और प्रशिक्षित परिवार प्रमुख को कम से कम ₹18,400 मासिक वेतन मिलेगा. यह राशि उन्हें सिर्फ नौकरी देने के नाम पर नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन देने की नीयत से तय की गई है. उद्योग जगत ने बढ़ाया हाथ अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को न केवल देशभर के बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जगत का भी समर्थन मिला है. अब तक 40 से अधिक बड़ी कंपनियों ने इन प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी देने की इच्छा जताई है.  मुख्य सचिव ने स्पष्ट करते हुए कहा, हम लोगों को हक़ दे रहे हैं काम करने का, आत्मनिर्भर बनने का. यह योजना किसी भी दृष्टि से दया या रियायत नहीं है, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम है. विकास का हिस्सा बनेगा हर नागरिक मुख्य सचिव  ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा कहते हैं  कि जब तक समाज का सबसे पिछड़ा व्यक्ति आगे नहीं बढ़ता, विकास अधूरा रहता है. इस योजना में भी वही दर्शन झलकता है. यह नारा अब नीतियों में तब्दील हो चुका है.

इंदौर की छात्राओं को बनाया जा रहा धर्मांतरण का टारगेट, ब्राह्मण युवती का शोषण और धर्मांतरण की कोशिश

इंदौर   इंदौर, जिसे मिनी मुंबई के नाम से जाना जाता है. इसी शहर में एक ब्राह्मण युवती के साथ धर्मांतरण और दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है. पीड़िता ने सुल्तान रोशन नागोरी पर संगीन आरोप लगाए हैं, जिसमें शारीरिक शोषण, धर्म परिवर्तन का दबाव, और अश्लील फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग शामिल है. लसुड़िया पुलिस ने शिकायत के आधार पर सुल्तान के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और दुष्कर्म सहित कई धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है.पीड़िता ने कहा कि सुल्तान ने उसके ऊपर जादू-टोना भी करवाया ताकि वह उसके प्रभाव में आ जाए. युवती ने आरोप लगाया कि इंदौर में मुस्लिम युवक खासकर कोचिंग में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को टारगेट करते हैं. उसने बताया कि लगभग 10 हजार हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कों के निशाने पर हैं. कॉल सेंटर और टेलीपरफॉर्मेंस के कार्यस्थलों पर भी धर्मांतरण के लिए स्लीपर सेल सक्रिय हैं. युवती ने कहा कि हिंदू लड़कियों को मुसलमान लड़कों की टीम में रखा जाता है, जहां उन्हें बताया जाता है कि “अल्लाह ने तुम्हें हमारे लिए बनाया है.” इसके बाद उन्हें खाने में नशा देकर शारीरिक शोषण किया जाता है. नशा देकर शारीरिक शोषण पीड़िता ने बताया कि सुल्तान ने 2018 से उसके साथ शारीरिक शोषण शुरू कर दिया था. उसने धमकी दी कि अगर उसने धर्म परिवर्तन नहीं किया तो उसके अश्लील फोटो और वीडियो वायरल कर देगा. होटल में शारीरिक संबंध के दौरान सुल्तान ने कई फोटो और वीडियो बनाए, जिससे दबाव बनाकर वह युवती को मुसलमान बनने के लिए मजबूर करता रहा. इस कारण पीड़िता 2019 में पंजाब चली गई और वहां नौकरी करने लगी.हालांकि, 2020 में सुल्तान की शादी के बाद, मार्च 2025 में युवती इंदौर लौटी और टेली परफॉर्मेंस में नौकरी शुरू की, लेकिन 6 जून 2025 को सुल्तान ने फिर से उससे संपर्क किया और पुराने फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाए पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए लसुड़िया थाने में शिकायत दर्ज की. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुल्तान को हिरासत में लिया. इस मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है, और जांच में स्लीपर सेल्स और धर्मांतरण के कथित नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.