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गरियाबंद के सुपेबेड़ा को मिलेगा स्वच्छ पेयजल, तेल नदी पर बनेगा एनीकट; मुख्यमंत्री साय ने मंजूर की राशि

गरियाबंद. किडनी पीड़ितों की वजह से चर्चित सुपेबेड़ा को आखिरकार साफ पानी नसीब होगा। सुशासन की समीक्षा में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तेल नदी पर एनीकेट निर्माण के लिए 7 करोड़ की न केवल मंजूरी दिया, बल्कि इसके पेपर वर्क भी बारिश से पहले तैयार करने के निर्देश दिए। दरअसल, 2024 में भाजपा सरकार ने जलजीवन मिशन के तहत सामूहिक जलप्रदाय योजना के लिए 8 करोड़ की मंजूरी दी। योजना के तहत तेल नदी से इंटेक वेल के जरिए पानी ले जाकर सुपबेड़ा में स्थापित ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए पानी साफ कर उसे 9 गांव के 2074 परिवार को आयरन फ्लोराइड रहित साफ पानी उपलब्ध कराना है। यह योजना लगभग बन कर तैयार है, लेकिन इसमें सबसे बड़ा रोड़ा निरंतर जल सप्लाई की थी, क्योंकि योजना सर्फेस वाटर पर निर्भर थी। अक्टूबर माह के बाद नदी सूख जाती है, ऐसे में तेलनदी में 12 माह जल स्थिर रखने की बड़ी चुनौती थी। दो साल पहले इंटेक वेल के ठीक नीचे 2 करोड़ लागत से डायफ्रॉम वाल खड़ा किया गया, पर वह पहली बारिश में धराशाई हो गया। जलप्रदाय योजना के लिए सपोर्ट सिस्टम की जरूरत थी। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एनीकेट मंजूरी के लिए सीएम साय के प्रति आभार प्रकट कर रहे हैं।

राजस्थान के वरिष्ठ नागरिकों की विशेष सोमनाथ यात्रा सफल, ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन से भाव-विभोर श्रद्धालु

जयपुर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत राजस्थान सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत राजस्थान से गए 1008 वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं ने शनिवार को श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य-भव्य दर्शन किए। सोमनाथ मंदिर दर्शन के दौरान श्रद्धालु संध्या आरती में सम्मिलित हुए तथा लाइट एंड साउंड शो का आनंद लिया। लाइट एंड साउंड शो में सोमनाथ महादेव मंदिर की पौराणिक और ऐतिहासिक गाथा का वर्णन किया गया। शो में बताया गया कि भारत भूमि पर स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ प्रथम ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर पर आतताइयों ने बार-बार आक्रमण किया, लूटा और खंडित किया किन्तु धर्मरक्षकों द्वारा इस मंदिर का बार-बार पुन: निर्माण करवाया गया। यह भारतीय संस्कृति है जो अटल, अमिट और अद्वितीय है। सोमनाथ मंदिर देश की इसी आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। कई बार मंदिर को तोड़ने और लूटने के बाद भी शक्ति, स्‍वाभिमान के साथ यह मंदिर पुनः स्थापित हुआ। देश के स्वतंत्र होने पर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से इस मंदिर का पुनः निर्माण करवाया गया। आतताइयों की तलवार ओमकार को हरा नहीं सकी। आस्था, विश्वास जीत गया। अरब सागर की छाती पर भारत की धर्म ध्वजा गौरव, मान-सम्मान और स्वाभिमान से आज भी लहरा रही है। मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की पहल की है, जो हमारी सांस्कृतिक चेतना का महापर्व है। इसी सांस्कृतिक चेतना को गुंजायमान करते हुए राजस्थान के एक हजार आठ वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं के गुजरात के वेरावल रेलवे स्टेशन पर 6 जून को आगमन पर गुजरात सरकार द्वारा भव्य स्वागत किया गया। वरिष्ठ नागरिकों को पुष्प-गुच्छ भेंट किए गए, स्वागत स्वरूप गुजराती लोक संस्कृति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वरिष्ठ नागरिकों में उत्साह और उमंग का संचार किया। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रियों को वेरावल से एसी बसों से गिर सोमनाथ स्थित थ्री स्टार होटल में ठहराया गया, जहाँ गुणवत्तापूर्ण रिफ्रेशमेंट, लंच और डिनर की समुचित व्यवस्था की गई। राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग द्वारा गुजरात सरकार के सहयोग से संचालित इस यात्रा में शनिवार और रविवार को गिर सोमनाथ में गोलकधाम, राम मंदिर, बाणगंगा, भालका तीर्थ के दर्शन करवाए गए। इसी के साथ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व गैलरी एवं हाट बाजार का भ्रमण भी करवाया गया। वरिष्ठ नागरिकों को सोमनाथ बीच दर्शन भी करवाए गए। आगे का कार्यक्रम यात्रा प्रभारी आशुतोष गुप्ता ने बताया कि 5 जून को जयपुर से विशेष ट्रेन से वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रियों को वेरावल तक और एसी बसों से सोमनाथ लाया गया। 6 और 7 जून को सोमनाथ में विभिन्न धार्मिक स्थानों के दर्शन के पश्चात रविवार रात्रि 10 बजे वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्री विशेष ट्रेन से द्वारका एवं नागेश्वर धाम के दर्शन हेतु रवाना होंगे। वहाँ से 9 जून को विशेष ट्रेन से जयपुर वापसी होगी। आशुतोष गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य है अधिकाधिक वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थ यात्रा का लाभ दिया जाए। वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक तीर्थाटन करवाने के राजस्थान सरकार के संकल्प को देवस्थान विभाग द्वारा पूरा किया जा रहा है। इसके लिए एसी ट्रेन, ठहरने, भोजन व परिवहन की समुचित व्यवस्था की गई है।

उच्च स्तरीय समिति ने कई जिलों से दस्तावेजों की विस्तृत मांग की

 रांची जिलों के कोषागार से अवैध वेतन निकासी मामले में चल रही उच्च स्तरीय जांच समिति की जांच का दायरा अब बढ़ गया है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव वरिष्ठ आइएएस अधिकारी डा. अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय जांच समिति के पास बोकारो व हजारीबाग के अलावा रांची, रामगढ़, देवघर व चाईबासा में भी अवैध निकासी मामले की जांच की जिम्मेदारी मिल गई है। अब जांच समिति ने इन चारों जिलों से भी जांच से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज की मांग की गई है। समिति ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों से वहां के संबंधित विभाग में स्वीकृत व कार्यरत बल, बजट एवं आवंटन संचिका, जिला बल पंजी, मास्टर रोल पंजी, वेतन ज्ञापन, विपत्र पंजी, स्थापना मद से संबंधित दस्तावेज, डीडीओ तथा लिपिकों का विवरण, भुगतान एवं बैंक खाता का विवरण सहित कई अन्य बिंदुओं की जानकारी मांगी है। अब समिति अवैध वेतन निकासी के सभी प्रमुख बिंदुओं का सूक्ष्य अध्ययन व समीक्षा करेगी, ताकि आरोपितों पर कार्रवाई हो सके, कमियों को दूर कर भविष्य में इस तरह की होने वाली घटना को रोका जा सके। किस जिलें में अवैध वेतन निकासी का क्या है मामला बोकारो : बोकारो जिले में वहां के एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में सबसे पहले अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया था। एजी की रिपोर्ट में खुलासे के बाद वित्त विभाग के आदेश पर पूरे मामले की जांच के बाद बोकारो में प्राथमिकी दर्ज हुई और लेखा शाखा से मुख्य आरोपित कौशल पांडेय को वहां की पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा। बाद में मामला सीआइडी के पास आया और सीआइडी ने तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया। इन तीन आरोपितों में लेखा शाखा का एएसआइ अशोक भंडारी, गृह रक्षक सतीश कुमार व काजल मंडल शामिल हैं। बोकारो में अब तक की जांच में करीब 11 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला उजागर हो चुका है। हजारीबाग : हजारीबाग में भी वहां के एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में करीब 31 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इस मामले में पहले हजारीबाग पुलिस ने मुख्य आरोपित सिपाही शंभू कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में इस केस में शंभू कुमार सिंह की पत्नी काजल कुमारी, उसके सहयोगी सिपाही रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह, रजनीश कुमार सिंह की पत्नी खुशबू कुमारी, सहयोगी धीरेंद्र कुमार सिंह, व रिश्तेदार सौरभ कुमार को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। चाईबासा : चाईबासा के एसपी कार्यालय के लेखा से अवैध वेतन निकासी मामले में चाईबासा मुफ्फसिल थाने की पुलिस ने मुख्य आरोपित देवनारायण मुर्मू के अलावा सरकार हेम्ब्रम, अरुण मार्डी व गोराचंद मांर्डी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। चाईबासा में करीब तीन करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। रांची : रांची के कोतवाली थाने में पशुपालन विभाग में 2.93 करोड़ रुपये की अवैध वेतन निकासी का मामला दर्ज हुआ था। इसमें इंस्टीच्यूट आफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन के दो कर्मचारी मुनिंद्र कुमार व संजीव कुमार पर हेराफेरी का आरोप लगा था। पुलिस ने मुनिंद्र कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, दूसरा आरोपित फरार है। रामगढ़ : रामगढ़ के जिला पशुपालन कार्यालय में अवैध वेतन निकासी मामले में करीब 34.25 लाख रुपये की अवैध व फर्जी निकासी का मामला सामने आ चुका है। इस मामले की भी जांच जारी है। देवघर : देवघर के सरवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 99 लाख रुपये की अवैध वेतन निकासी मामले का खुलासा हुआ है। देवघर डीसी की जांच में खुलासे के बाद इस मामले में मुख्य आरोपित स्वास्थ्य विभाग की पूर्व लेखा लिपिक सविता कुमारी को फर्जी तरीके से रुपये निकालकर गबन करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। रिमांड पर पूछताछ के बाद CID ने शेष 7 आरोपितों को भी भेजा जेल 72 घंटे तक पूछताछ के बाद सीआइडी ने बोकारो व चाईबासा के भी सभी सातों आरोपितों को शनिवार को जेल भेज दिया। जिन्हें जेल भेजा गया है, उनमें बोकारो केस में एएसआइ अशोक भंडारी, गृह रक्षक सतीश कुमार व सिपाही काजल मंडल तथा चाईबासा केस में सिपाही देवनारायण मुर्मू, सरकार हेम्ब्रम, अरुण मार्डी व गोराचंद मांर्डी शामिल हैं। सभी आरोपितों से पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर सीआइडी की एसआइटी अब आगे की पूछताछ करेगी।

विकास के एजेंडे के साथ नीति आयोग की बैठक में पहुंचेंगे CM मान, पंजाब की उपलब्धियों का करेंगे प्रस्तुतीकरण

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान 11 जून को होने वाली नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में पंजाब सरकार की शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और औद्योगिक विकास से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस अहम बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री हिस्सा लेंगे और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखेंगे। मुख्यमंत्री मान बैठक के दौरान शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों को प्रमुखता से उठाएंगे। सरकार का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में बड़े स्तर पर सुधार किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों का रुख किया है। बैठक में स्कूल आफ एक्सीलेंस की स्थापना, आधुनिक सुविधाओं से लैस स्कूलों के विकास तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की बढ़ती सफलता का भी उल्लेख किया जाएगा। नहरी पानी प्रयोजना का भी होगा जिक्र राज्य सरकार इन पहलुओं को शिक्षा क्षेत्र में बदलाव के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करने की तैयारी में है। कृषि क्षेत्र में मुख्यमंत्री सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करेंगे। सरकार का कहना है कि वर्षों से बंद या उपेक्षित पड़ी कई नहरों और जल वितरण प्रणालियों को दोबारा चालू किया गया है। इसके चलते खेती के लिए नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ी है और किसानों की ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम करने की दिशा में प्रगति हुई है। पंजाब सरकार इस पहल को जल संरक्षण और कृषि सुधारों से जोड़कर राष्ट्रीय मंच पर रखने की तैयारी कर रही है। सेहत योजना सरकार की उपलब्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री मान हाल ही में शुरू की गई मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना को सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पेश करेंगे। इसके अलावा लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए अन्य सुधारों की जानकारी भी बैठक में दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख कर सकते हैं। निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और रोजगार सृजन से जुड़े प्रयासों को भी पंजाब सरकार की उपलब्धियों के रूप में रखा जाएगा। प्राथमिकताएं राष्ट्रीय स्तर पर होगी प्रस्तुत  गौरतलब है कि नीति आयोग की यह बैठक केंद्र और राज्यों के बीच विकास संबंधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। बैठक में राज्यों के साथ पहले हुए विचार-विमर्श की समीक्षा किए जाने के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए नियमों को सरल बनाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में मुख्यमंत्री मान के लिए यह मंच पंजाब में किए गए कार्यों और सरकार की प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर होगा।

जेडीए की अभिनव पहल ‘संवाद’: जनभागीदारी और पारदर्शिता से मई माह में कुल 65 ले-आउट एवं बिल्डिंग प्लान को मिली त्वरित स्वीकृति

जयपुर जयपुर विकास प्राधिकरण शहर के सुनियोजित विकास के साथ-साथ अपनी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। जयपुर विकास आयुक्त श्री सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि जेडीए द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए अब बैठकों में संबंधित आवेदकों और हितधारकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। संवाद कार्यक्रम के तहत आवेदकों को बुलाकर उनकी आपत्तियों, समस्याओं और सुझावों को आमने-सामने सुनकर हाथों-हाथ निस्तारण किया जा रहा है। इसी पारदर्शी और जन-हितैषी कार्यप्रणाली के सकारात्मक प्रभाव से जेडीए ने मई-2026 माह में ले-आउट और बिल्डिंग प्लान के कुल 65 प्रकरणों एवं परियोजनाओं को त्वरित गति से स्वीकृति प्रदान की है। बीपीसी-एलपी समिति द्वारा 48 प्रकरणों का अनुमोदन जेडीए की बीपीसी-एलपी समिति की मई-2026 माह में आयोजित की गई बैठकों में कुल 58 प्रकरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किये गए, जिनमें से 48 प्रकरणों में बीपीसी-एलपी समिति द्वारा त्वरित अनुमोदन की कार्यवाही की गई जिसमे पुनर्गठन / उपविभाजन के 13 प्रकरण,आवासीय एकल भूखंड के 11 प्रकरण ,आवासीय योजनाओं के 7 प्रकरण, गैर-आवासीय एकल भूखंड के 4 प्रकरण एवं अन्य प्रकार के 13 प्रकरण शामिल हैं । बीपीसी-बीपी समिति द्वारा 17 परियोजनाओं को स्वीकृति शहर में विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के निर्माण को सुगम बनाने के लिए बीपीसी-बीपी समिति द्वारा मई 2026 में कुल 17 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है: आवासीय: 08 परियोजनाएं संस्थागत: 04 परियोजनाएं मिश्रित-उपयोग: 02 परियोजनाएं व्यावसायिक: 01 परियोजना होटल: 01 परियोजना रिसॉर्ट: 01 परियोजना जेडीए द्वारा 'संवाद' के माध्यम से प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा, ताकि आमजन को समयबद्ध तरीके से राहत मिल सके और जयपुर के विकास को नई ऊंचाइयां मिलें।

वीडियो बनाने का विरोध पड़ा भारी, युवक का अपहरण कर वसूली; जबलपुर में सनसनीखेज वारदात

जबलपुर. खितौला थाना क्षेत्र में दोस्त की बहन का वीडियो बनाने का विरोध करना एक युवक को भारी पड़ गया। आरोपियों ने युवक का अपहरण कर अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर बेरहमी से मारपीट की। चाकू की नोक पर उससे नकदी छीन ली और रिहाई के बदले फिरौती भी मांगी। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह आरोपीों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक नाबालिग को अभिरक्षा में लिया गया है। पुलिस के अनुसार नया मोहल्ला निवासी रंगरेज तीन जून की रात खितौला बस स्टैंड पर अपनी लोडिंग ऑटो खड़ी करने गया था। वहां उसका दोस्त अमन कोरी अपनी बहन के साथ मौजूद था। इसी दौरान विक्की उर्फ विकास कोल, ओम कोल और आशु कुमार पहुंचे और अमन की बहन का वीडियो बनाने लगे। विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और आरोपी वहां से चले गए। अपहरण कर सुनसान जगहों पर की पिटाई कुछ देर बाद आरोपी अपने अन्य साथियों अजीत कोल, दीपक कोल और संजू कोल के साथ लौटे। सभी ने मिलकर रंगरेज के साथ मारपीट की और जबरन बाइक पर बैठाकर ले गए। वहां पिटाई की गई। आरोप है कि विक्की ने चाकू दिखाकर धमकाया और मारपीट का वीडियो भी बनाया। आरोपियों ने रंगरेज की जेब से 2600 रुपये छीन लिए। छह आरोपी गिरफ्तार शिकायत के बाद खितौला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अजीत कोल, दीपक कोल, विक्की उर्फ विकास कोल, ओम कोल, आशु कुमार और संजू कोल को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपीों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया, जबकि एक नाबालिग को अभिरक्षा में रखा गया है।

CM भजनलाल शर्मा की पहल रंग लाई, गर्मी के बीच राजस्थान में पेयजल आपूर्ति हुई सुदृढ़

विशेष राज्यव्यापी अभियानों से 19 हजार से अधिक पेयजल समस्याओं का समाधान, हजारों परिवारों को मिली राहत जयपुर भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व एवं दूरदर्शी निर्देशों का सकारात्मक असर पूरे राजस्थान में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने पेयजल व्यवस्थाओं को नई मजबूती प्रदान की है तथा हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई है। सात विशेष अभियानों में 19 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्थाओं में ऐतिहासिक सुधार 5 अप्रैल से 6 जून तक आयोजित सात विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 19,072 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इनमें 3,766 हैंडपंपों की मरम्मत, 2,236 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,219 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,390 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण, 290 कम अवधि की जलापूर्ति, 688 कम सप्लाई, 181 प्रदूषित जल तथा 29 समय-सारणी संबंधी शिकायतों का समाधान शामिल है। इसके अतिरिक्त 7,466 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया गया। एक दिन में 3 हजार से अधिक कार्य, विशेष टीमों ने दिखाई तत्परता शनिवार को आयोजित सातवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय विशेष टीमों ने जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। अभियान के तहत 689 खराब हैंडपंप पुनः चालू किए गए, 592 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 241 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 246 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अलावा 60 कम अवधि की जलापूर्ति, 144 कम सप्लाई और 60 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,077 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई, जल संरक्षण को मिला नया बल जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की। सातवें अभियान के दौरान 426 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे अवैध कनेक्शन शामिल थे। गौरतलब है कि सात अभियानों के दौरान अब तक कुल 1,827 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी अंकुश लगा है और आमजन के लिए उपलब्ध पेयजल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मिली नई मजबूती हैंडपंपों एवं पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ 619 अन्य पेयजल सुधार कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से ये अभियान 30 जून तक निरंतर जारी रहेंगे।

रसोई गैस पर महंगाई का वार, सालभर में LPG सिलेंडर 89 रुपये तक महंगा

जयपुर राजस्थान में आम जनता की रसोई पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आ गया है। तेल और गैस कंपनियों ने देर रात 12 बजे घरेलू उपयोग के एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। कंपनियों द्वारा की गई इस मासिक समीक्षा (रिव्यू) के तहत आज 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 29 रुपए प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया है। जयपुर में अब कितने का सिलेंडर राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि करते हुए नई रेट लिस्ट जारी की है। इस नई सूची के अनुसार, राजधानी जयपुर में अब 14.2 किलोग्राम वाला रसोई गैस सिलेंडर 916.50 रुपए के स्थान पर 945.50 रुपए में मिलेगा। केवल बड़ा सिलेंडर ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम सिलेंडरों के दाम भी बढ़ाए गए हैं। अब 5 किलोग्राम वाला छोटा घरेलू सिलेंडर 341.50 रुपए के बजाय 352 रुपए में मिलेगा, जबकि 10 किलोग्राम वाला कम्पोजिट सिलेंडर (पारदर्शी प्लास्टिक बॉडी वाला) 655 रुपए से बढ़कर 675 रुपए का हो गया है। इस साल अब तक ₹89 की भारी बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए भी परेशान करने वाली है क्योंकि तेल कंपनियों ने इससे पहले 7 मार्च को भी घरेलू सिलेंडरों के दाम में ₹60 की बड़ी बढ़ोतरी की थी। इस तरह देखा जाए तो चालू वर्ष के भीतर ही घरेलू रसोई गैस के दाम कुल मिलाकर 89 रुपए तक बढ़ चुके हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण घरेलू बाजार में भी लगातार कीमतें बढ़ रही हैं। पहले बढ़ी थी कमर्शियल सिलेंडर की रेट इसके अलावा, कंपनियों ने महज 7 दिन पहले ही कॉमर्शियल (व्यावसायिक) उपयोग वाले सिलेंडरों की कीमतों में भी 42 रुपए का इजाफा किया था। वैश्विक संकट के कारण इस साल के भीतर कॉमर्शियल उपयोग का सिलेंडर रिकॉर्ड 1532 रुपए तक महंगा हो चुका है, जिससे अब घरेलू बजट भी पूरी तरह बिगड़ गया है।  

सेवानिवृत्ति से एक साल पहले होगा रिकॉर्ड सत्यापन, खत्म होगी भुगतान में देरी

धनबाद  कोयला कर्मियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही भविष्य निधि (पीएफ) और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ) ने बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत अब कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से एक वर्ष पहले ही उनके पीएफ एवं पेंशन संबंधी सभी अभिलेखों का सत्यापन और अद्यतन कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस संबंध में सीएमपीएफ मुख्यालय ने देशभर के अपने 23 क्षेत्रीय कार्यालयों के क्षेत्रीय आयुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सीएमपीएफ का कार्यालय कन्याकुमारी से लेकर जम्मू और कश्मीर तक फैला है। इसकी पुष्टि सीएमपीएफ के आयुक्त सजिश कुमार एन ने भी की। कहा कि इससे कई तरह के लाभ उन्हें मिलेगा। साथ ही लोगों को परेशानी भी कम होगी। आपको बता दें कि सीएमपीएफ में कोल इंडिया के साथ टाटा, सेल, अडानी सहित कोयला खनन करने वाली सरकारी व गैर सरकारी कंपनी केे कर्मियों को पीएफ व पेंशन कार्य संचालित होता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले करीब 17 हजार कोयला कर्मियों को पीएफ और पेंशन भुगतान के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। संगठन का उद्देश्य है कि कर्मचारी के सेवा निवृत्त होते ही उसका दावा पहले से तैयार रहे और उसे समय पर सभी देय लाभ प्राप्त हो सकें। सीएमपीएफ अधिकारियों के अनुसार, कोयला उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों का सेवा काल लंबा होता है और इस दौरान उनका कई बार एक परियोजना, क्षेत्र या कंपनी से दूसरी इकाई में तबादला होता रहता है। ऐसे मामलों में सेवा अभिलेख, अंशदान विवरण और नामांकन संबंधी सूचनाओं के मिलान में समय लगता है, जिसके कारण कई बार सेवानिवृत्ति के बाद पीएफ एवं पेंशन भुगतान में विलंब की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्ति से 12 माह पूर्व संबंधित कर्मचारी की पूरी सेवा पुस्तिका, अंशदान रिकार्ड, नामांकन, परिवार विवरण और पेंशन पात्रता की जांच की जाएगी। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसे समय रहते दूर कर लिया जाएगा। इससे अंतिम समय में दस्तावेजों की कमी, सेवा अवधि के मिलान अथवा तबादलों से जुड़े विवादों का समाधान पहले ही हो सकेगा। सीएमपीएफ के इस कदम से देशभर के लगभग साढ़े तीन लाख कोयला कर्मियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। ये सभी कर्मचारी नियमित रूप से सीएमपीएफ में अंशदान करते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद इसी कोष से उन्हें पीएफ तथा पेंशन का लाभ प्राप्त होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिकार्ड के पूर्व सत्यापन और डिजिटलीकृत निगरानी व्यवस्था से न केवल भुगतान प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि कर्मचारियों का संगठन पर भरोसा भी और मजबूत होगा।

एमएलसी टिकट विवाद के बाद बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल, दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर सवाल

पटना बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर मची सियासी हलचल के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस समय जबरदस्त चर्चाओं में हैं। दरअसल, चर्चाओं की सबसे बड़ी वजह यह है कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश वर्तमान में सरकार में मंत्री हैं, लेकिन इस बार एमएलसी चुनाव में एनडीए (NDA) गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है। टिकट न मिलने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह बात तेजी से फैल रही है कि दीपक प्रकाश को जल्द ही अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा या उन्हें पद से हटना पड़ेगा। इन तमाम विपरीत चर्चाओं और झटकों के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में एक बड़ा राजनीतिक दावा ठोक दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि रालोमो बिहार में सत्ता की मजबूत हिस्सेदार है और आगे भी सरकार में उनकी यह हिस्सेदारी पूरी मजबूती के साथ बनी रहेगी। हालांकि, बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश अभी बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। नियम के मुताबिक, मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के छह महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना जरुरी है। लेकिन अब एमएलसी चुनाव में एनडीए ने उन्हें सीट ही नहीं दी है। इसके बाद निकट भविष्य में चुनाव भी नहीं है। जाहिर है ऐसे में दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर बने रहना मुश्किल है। पटना महाधिवेशन में विधायक आलोक कुमार सिंह बने नए प्रदेश चीफ उपेंद्र कुशवाहा रविवार को पटना के रवींद्र भवन में आयोजित पार्टी के राज्य महाधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने गठबंधन और सत्ता में बने रहने के दावे के साथ-साथ संगठन को लेकर भी एक बहुत बड़ी घोषणा की। उपेंद्र कुशवाहा ने सार्वजनिक मंच से पार्टी के नए बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विधायक आलोक कुमार सिंह के नाम का औपचारिक ऐलान किया। आलोक कुमार सिंह को बिहार संगठन की कमान सौंपते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी अब नए तेवर और कलेवर के साथ सूबे के कोने-कोने में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। स्वास्थ्य मंत्री निशांत को मिले डिप्टी सीएम की कमान:उपेंद्र कुशवाहा इसी महाधिवेशन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार सरकार के आंतरिक समीकरणों को लेकर भी एक बड़ा और दिलचस्प बयान देकर राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू नेतृत्व को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने पुरजोर तरीके से पैरवी करते हुए कहा कि अगर निशांत को डिप्टी सीएम की कमान सौंपी जाती, तो यह पूरी तरह से खुद जेडीयू के राजनीतिक हित की बात होती। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग बिहार की सियासत में पहली बार नहीं उठी है, बल्कि इससे पहले भी जेडीयू के ही कई जमीनी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता लगातार उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी देने की वकालत करते रहे हैं।