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एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा: कोटा एयरपोर्ट के लिए 385 करोड़ का अगला कदम

कोटा कोटा के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया में निरंतर प्रगति हो रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने गुरुवार को 384.79 करोड़ का दूसरा टेंडर जारी किया है, जिसके अंतर्गत नए टर्मिनल भवन, एटीसी टॉवर, फायर स्टेशन, कार पार्किंग और सिटी साइड डेवलपमेंट जैसे प्रमुख कार्य शामिल हैं। टेंडर के लिए निविदाएं 15 सितंबर 2025 तक आमंत्रित की जाएंगी। निर्माण कार्यों के लिए 18 माह की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इससे पूर्व फरवरी में AAI ने कोटा एयरपोर्ट के पहले चरण के तहत एयर साइड निर्माण कार्यों जैसे रनवे, टैक्सी वे, एप्रन आदि के लिए 467.67 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था, जिसकी प्रक्रिया वर्तमान में अंतिम चरण में है। पहले और दूसरे चरण को मिलाकर अब तक कोटा एयरपोर्ट के लिए कुल 850 करोड़ से अधिक के कार्य टेंडर प्रक्रिया में आ चुके हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अनुसार कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण दिसंबर 2027 तक पूर्ण कर यहां से नियमित विमान सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। लोकसभा कैंप कार्यालय और उड्डयन मंत्रालय की ओर से लगातार प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग की जा रही है।  

यात्रियों को राहत: भोपाल-सागर मार्ग पर रफ्तार और सुविधा दोनों मिलेगी

भोपाल/सागर  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सागर का सफर जल्द ही आसान और आरामदायक होगा। भोपाल-सागर के बीच हाईवे निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। कुल 6 टुकड़ों में बन रहे इस हाईवे का मोरीकोड़ी से विदिशा तक बन रहे खंड का काम लगभग 85 फीसदी पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि इस पर से नए साल के पहले महीने से आवागमन भी शुरू हो जाएगा। बाकी बचे तीन खंडों में भी जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। एनएचएआइ व तीन नई ठेका कंपनियों के बीच निर्माण कार्य को लेकर अनुबंध कर लिया गया है। 6 टुकड़ों में बन रहा भोपाल-सागर हाईवे भोपाल-सागर हाईवे के निर्माण कार्य को छह खंडों में विभाजित कर पूर्ण करने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में दो खंडों में कार्य चल रहा है। विदिशा जिले के तीन खंडों में कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया था। निविदा सहित अन्य प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद अब जल्द ही कार्य शुरू होगा। चौथा खंड सागर जिले में है। वहां के लिए भी प्रक्रिया शुरू है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएचएआइ) के परियोजना निदेशक सिद्धांत सिंघई के अनुसार विदिशा जिले में विदिशा से ग्यारसपुर, ग्यारसपुर से राहतगढ़ और राहतगढ़ से बेरखेड़ी का कार्य अधिकतम एक अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। बाकी चौथे खंड बेरखेड़ी से सागर तक का कार्य भी जल्द ही शुरू होगा। जबकि बेरखेड़ी से सागर तक लिंक रोड का निर्माण कार्य भी पूरा होने वाला है। मोरीकोड़ी-विदिशा बायपास तक काम पूरा रायसेन जिले के मोरीकोड़ी से विदिशा तक 20.5 किलोमीटर के खंड में फोरलेन सड़क का निर्माण 85 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। जबकि मोरीकोड़ी से विदिशा बायपास तक 95 प्रतिशत से अधिक कार्य कर लिया गया है। ज्यादातर कार्य विदिशा बायपास से मिर्जापुर तक बाकी है। इस हिस्से में अभी पांच से छह महीने का वक्त लगेगा। जबकि मोरीकोड़ी से विदिशा बायपास तक के हिस्से में अधिकतम तीन से चार महीने में आवागमन शुरू हो जाएगा। करीब 320 करोड़ से स्वीकृत इस कार्य के पूर्ण होने पर न केवल विदिशा से रायसेन की बल्कि भोपाल की दूरी भी सांची व सलामतपुर से होकर जाने की तुलना में 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।

पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा जनहित में सशक्त भूमिका निभा रही

भोपाल  पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा जनहित में सशक्त भूमिका निभा रही है। आपातकाल में उन्नत चिकित्सा सेवा मुहैया कराने में बहुमूल्य समय की बचत कर जीवन संरक्षण किया जा रहा है। सिंगरौली जिले के श्री लाल कृष्ण वैश्य (31 वर्ष) को गंभीर अवस्था में जबलपुर से इंदौर स्थित आयुष्मान भारत से सम्बद्ध अस्पताल में एयर एम्बुलेंस सेवा से सफलतापूर्वक एयर लिफ्ट किया गया। श्री लाल कृष्ण सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे, जिससे उनके पूरे शरीर का पक्षाघात (पैरालिसिस) हो गया। मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण सड़क या रेल मार्ग से परिवहन जोखिमपूर्ण था। इस स्थिति में एयर एम्बुलेंस सेवा ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प था, जिसने समय रहते उन्हें उन्नत उपचार के लिए इंदौर पहुँचाया और उनकी जान बचाई जा सकी। पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक हादसों एवं प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित मरीजों को त्वरित एवं सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। यह सेवा राज्य के नागरिकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवन रक्षक सुविधा बन चुकी है। सेवा के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड धारकों को निःशुल्क वायु परिवहन की सुविधा दी जाती है, अन्य नागरिकों के लिए भी निर्धारित परिस्थितियों में सुलभ दरों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। एयर एम्बुलेंस सेवा: पात्रता एवं स्वीकृति प्रक्रिया आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को राज्य के भीतर या बाहर शासकीय एवं आयुष्मान सम्बद्ध अस्पतालों में निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध है। गैर-आयुष्मान कार्डधारकों को राज्य में निःशुल्क तथा राज्य के बाहर अनुबंधित दरों पर सशुल्क परिवहन सुविधा दी जाती है। सड़क, औद्योगिक दुर्घटनाओं या प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित सभी नागरिकों को राज्य के भीतर या बाहर निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सेवा मिलती है। यह सेवा राज्य के सभी जिलों से जिला अस्पतालों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। नागरिकों को उनके जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या मेडिकल कॉलेज अधिष्ठाता की अनुशंसा पर जिला कलेक्टर द्वारा राज्य के भीतर निःशुल्क परिवहन की अनुमति दी जाती है। राज्य के बाहर के लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा, भोपाल, तथा सशुल्क मामलों में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल स्वीकृति प्रदान करते हैं।  

यात्रियों को बड़ी राहत: भोपाल से सागर तक बिना रुकावट चलेगा सफर

विदिशा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सागर का सफर जल्द ही आसान और आरामदायक होगा। भोपाल-सागर के बीच हाईवे निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। कुल 6 टुकड़ों में बन रहे इस हाईवे का मोरीकोड़ी से विदिशा तक बन रहे खंड का काम लगभग 85 फीसदी पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि इस पर से नए साल के पहले महीने से आवागमन भी शुरू हो जाएगा। बाकी बचे तीन खंडों में भी जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। एनएचएआइ व तीन नई ठेका कंपनियों के बीच निर्माण कार्य को लेकर अनुबंध कर लिया गया है। 6 टुकड़ों में बन रहा भोपाल-सागर हाईवे भोपाल-सागर हाईवे के निर्माण कार्य को छह खंडों में विभाजित कर पूर्ण करने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में दो खंडों में कार्य चल रहा है। विदिशा जिले के तीन खंडों में कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया था। निविदा सहित अन्य प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद अब जल्द ही कार्य शुरू होगा। चौथा खंड सागर जिले में है। वहां के लिए भी प्रक्रिया शुरू है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएचएआइ) के परियोजना निदेशक सिद्धांत सिंघई के अनुसार विदिशा जिले में विदिशा से ग्यारसपुर, ग्यारसपुर से राहतगढ़ और राहतगढ़ से बेरखेड़ी का कार्य अधिकतम एक अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। बाकी चौथे खंड बेरखेड़ी से सागर तक का कार्य भी जल्द ही शुरू होगा। जबकि बेरखेड़ी से सागर तक लिंक रोड का निर्माण कार्य भी पूरा होने वाला है।

उज्जैन: नागचंद्रेश्वर मंदिर में इस बार विशेष दर्शन व्यवस्था, जारी हुई समयसारिणी

उज्जैन उज्जैन में श्रावण मास (shravan month) के पावन अवसर पर आगामी मंगलवार 29 जुलाई को नागपंचमी पर्व के उपलक्ष्य में श्री महाकालेश्वर मंदिर (mahakal mandir) के मुख्य शिखर में विराजमान नागचंद्रेश्वर मंदिर (nagchandreshwar mandir darshan) के पट खुलेंगे। दर्शन का सिलसिला 28 जुलाई की रात 12 बजे शुरु होकर अगले दिन 29 जुलाई की रात 12 बजे खत्म होगा। इस विशेष दिन पर लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्ष में केवल एक दिन के लिए दर्शनार्थ खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन का सौभाग्य सभी प्राप्त हो, इसके लिए अधिकारियों ने बैठक बुलाई। ये है मंदिर खुलने और बंद होने का समय जिला और मंदिर प्रशासन के अनुसार 28 जुलाई की रात 12 बजे से 29 जुलाई की रात 12 बजे तक मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना जताई जा रही है। पर्व की तैयारियों को लेकर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसपी प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, महंत विनीत गिरि, नगर निगम, स्वास्थ्य, पीएचई, लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं के लिए होंगी ये व्यवस्थाएं     एयरो ब्रिज का तकनीकी परीक्षण कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बनाए गए एयरो ब्रिज की तकनीकी क्षमता और मजबूती की जांच कर प्रमाण-पत्र लिया जाए।     साफ-सफाई एवं पेयजल व्यवस्था मंदिर परिसर और उसके आसपास नगर निगम द्वारा सफाई सुनिश्चित की जाएगी।     साथ ही पेयजल पाइंट, टैंकर, और मोबाइल लॉकर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।     दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हील चेयर, जूता स्टैंड और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जाएगी।     यातायात, पार्किंग एवं सुरक्षा पार्किंग के लिए कर्कराज पार्किंग, बड़ा गणेश, और अन्य स्थानों पर समुचित व्यवस्था की जाएगी। दर्शन मार्ग पर बैरिकेडिंग, पुलिस बल, और फायर स्टेशन, खोया-पाया केन्द्र भी तैनात किए जाएंगे। दर्शन मार्ग निर्धारित     श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग में वाहन पार्क कर, भील समाज धर्मशाला में जूते उतारेंगे।     वहां से गंगा गार्डन, चारधाम पार्किंग, हरसिद्धि चौराहा, रुद्रसागर की दीवार, विकम टीला, बड़ा गणेश मंदिर होते हुए द्वार कमांक- 4 से प्रवेश करेंगे।     दर्शन के उपरांत विश्रामधाम, एयरो ब्रिज, मार्बल गलियारा से होते हुए हरसिद्धि चौराहा की ओर निकलेंगे।

बालाघाट देश में अटल पेंशन योजना में पहले स्थान पर, 10 जिले टॉप पर

भोपाल  देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को 60 वर्ष की आयु के बाद एक निश्चित पेंशन राशि प्रदान करने के लिए अटल पेंशन योजना चलाई जा रही है। योजना में अधिक से अधिक असंगठित क्षेत्र के लोगों को जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा इस वर्ष 1 मई से 15 जुलाई 2025 तक पूरे देश में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में नए लोगों को जोड़ने और उनका पंजीयन कराने में मध्यप्रदेश के 10 जिलों ने देश के टॉप टेन जिलों में स्थान बनाया है। इसमें बालाघाट जिले ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि राज्य के साथ ही बालाघाट के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। इस अभियान का फाइनल स्कोर पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के द्वारा 18 जुलाई को जारी किया गया। इस अभियान में बालाघाट जिले ने 2992 लक्ष्य के विरूद्ध 12 हजार 507 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़कर 418 प्रतिशत उपलब्धि हासिल किया है। श्योपुर जिले ने 836 के विरूद्ध 2538 लोगों को जोड़कर 304 प्रतिशत उपलब्धि के साथ दूसरे, अलीराजपुर जिले ने 880 के विरूद्ध 1705 लोगों को जोड़कर 194 प्रतिशत उपलब्धि के साथ तीसरे, उज्जैन जिले ने 5676 के विरूद्ध 10813 लोगों को जोड़कर 191 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे, अनूपपुर जिले ने 1342 के विरूद्ध 2542 लोगों को जोड़कर 189 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पांचवे, उमरिया जिले ने 990 के विरूद्ध 1819 लोगों को जोड़कर 184 प्रतिशत उपलब्धि के साथ छटवें, छिंदवाड़ा जिले ने 4994 के विरूद्ध 9148 लोगों को जोड़कर 183 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सातवें, डिंडोरी जिले ने 946 के विरूद्ध 1720 लोगों को जोड़कर 182 प्रतिशत उपलब्धि के साथ आठवें, शहडोल जिले ने 1936 के विरूद्ध 3445 लोगों को जोड़कर 178 प्रतिशत उपलब्धि के साथ नौवें और दमोह जिले ने 1870 के विरूद्ध 3314 लोगों को जोड़कर 177 प्रतिशत उपलब्धि के साथ देश में दसवां स्थान हासिल किया है। अभियान के अंतर्गत अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों के नाम जोड़ने मे देश में प्रथम 10 स्थान पर रहे इन जिलों को अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया जाएगा। बालाघाट जिले में कलेक्टर मृणाल मीणा के नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ के साथ समन्वय कर इस योजना में लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अग्रणी बैंक प्रबंधक संजीव कुमार ने इस संबंध में बताया कि सम्पूर्ण देश में अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। बालाघाट जिले में अभियान के बाद भी जिले में पात्र लोगों को इस योजना से जोड़ने का काम निरंतर जारी रहेगा और 50 हजार के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। अटल पेंशन योजना भारत सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जो मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए तैयार की गई है। यह योजना उन लोगों को पेंशन प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रहना चाहते हैं। इसके लिए 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक, जो असंगठित क्षेत्र के कामगार जैसे दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, आदि पात्र हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का किसी बैंक या डाकघर में बचत खाता होना चाहिए, जो आधार से लिंक हो। इस योजना का लाभ उन लोगों को दिया जाता है जो आयकर दाता नहीं हैं। इसी के साथ आवेदक को किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना जैसे एनपीएस, ईपीएस का लाभार्थी नहीं होना चाहिए। यह योजना 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन प्रदान करती है, जो 60 वर्ष की आयु के बाद मिलती है।  

दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही, हजारों किलो कबाड़ का उपयोग

सिवनी  दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही है, जिसे सिवनी जिले के स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार किया जा रहा है।हजारों किलो कबाड़ (स्क्रैप) से तैयार हो रही बाघ की आकृति का दीदार पेंच पहुंचने वाले पर्यटक व आम नागरिक 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस से कर सकेंगे। पेंच प्रबंधन का दावा है कि खवासा में अनपयोगी कबाड़ से तैयार हो रही बाघ की प्रतिमा दुनिया में अब तक बनी बाघ प्रतिमाओं में सबसे बड़ी होगी।पेंच टाईगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार स्क्रैप से बनाई जा रही बाघ प्रतिमा की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिशन लाइफ से ली गई है। पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश सिंह ने बताया कि मिशन लाइफ के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के तीन आर (3R) सूत्रों में रिड्यूस (Reduce), रियूस (Ruse) एवं रिसाईकल (Recycle) भावना के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व में लोहे के स्क्रैप मटेरियल से एक विशालकाय बाघ प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। जनवरी माह में लोहे के अनुपयोगी सामग्रियों जैसे पुरानी साईकिल, पाइप, जंग लगी लोहे की चादरें आदि विविधतापूर्ण सामग्रियों से प्रतिमा का निर्माण प्रारंभ किया गया था, जो अब वह लगभग अपनी पूर्णता पर है। जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह एक सिंह को बनाया था और वह सिंह भी अनुपयोगी लोहे की सामग्री से बना डिजाइन था उसी से प्रेरणा लेकर लोहे के स्‍क्रैप मटेरियल के इस बाघ कलाकृति की संकल्पना की गई है। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि इंटरनेट में उपलब्ध वल्र्ड रिकार्ड एकेदमी के अनुसार दुनिया में सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अमेरिका के जार्जिया राज्य में है जो 8 फिट ऊंची और 14 फिट लंबी है। जबकि पेंच टाइगर रिजर्व में बन रही लोहे के स्क्रैप मटेरियल की यह बाघ कलाकृति पूर्ण होने के बाद 16 फिट से अधिक उंची व 36 फिट से भी अधिक लंबी होगी। उल्लेखनीय है कि मठ मंदिर में कबाड़ से महादेव की आकर्षक प्रतिमा तैयार करने वाले कलाकार विक्की और उनके साथियों द्वारा इस विशालकाय प्रतिमा को तैयार किया जा रहा है।  

उज्जैन महाकुंभ में पहली बार AI का कमाल, यूपी की विशेषज्ञ टीम संभालेगी मोर्चा

उज्जैन  साल 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ आस्था का सुपर हाईटेक मेला होने वाला है। जिसकी तैयारियां पुलिस महकमे द्वारा अभी से ही शुरू कर दी गई है। सबसे खास बात यह है कि सिंहस्थ मेले का पूरा क्राउड मैनेजमेंट ही एआइ तकनीक के जरिए किया जाएगा। भीड़ प्रबंधन के लिए एआई इनेबल कैमरा, आरएफआईडी रिस्टबैंड, ड्रोन सर्विलांस और मोबाइल एप ट्रैकिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। सिंहस्थ महाकुंभ मेला में पहली बार साइबर मॉनिटरिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। साइबर यूनिट डिजिटल माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों से लेकर ऑनलाइन ठगी की कोशिशों पर नियंत्रण का काम करेंगी। साथ ही इस यूनिट द्वारा सोशल मीडिया कंटेंट और डिजिटल गतिविधियों की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। वहीं मोबाइल नेटवर्क बाधित नहीं हो इसके लिए अस्थायी मोबाइल टॉवर, हाई- स्पीड डेटा कनेक्टिविटी की योजना गई है। यूपी का दल जल्द आएगा उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर यूपी का एक दल जल्द उज्जैन का दौरा करने वाला है। जिसके दौरे में प्रबंधन की बारीकियां समझी जाएंगी। दल में वह अधिकारी शामिल होंगे जिन्होंने प्रयागराज महाकुंभ मेले में महत्वपूर्ण जिमेदारियां निभाई है। बता दें, इससे पहले डीजीपी कैलाश मकवाना ने भी अधिकारियों की बैठक लेकर महाकुंभ में तकनीकी मदद लेने पर जोर दिया था।

स्वस्थ पर्यावरण की ओर कदम: इंदौर में शुरू होगा मध्यप्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन

     इंदौर में बनेगा प्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन, लगेंगे लाखों पौधे     अगले एक साल में 50 टन कचरा कम करने का लक्ष्य।     तीन साल पहले सूखा कचरा 650-750 टन था।     अब शहर में सूखा कचरा 450-500 टन हो गया है। इंदौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत देशभर में अब तक 141 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। पीएम मोदी के आव्हान पर यह पर्यावरणीय जनांदोलन निरंतर प्रगति पर है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश सरकार के नेतृत्व में यह संकल्प तेजी से धरातल पर साकार होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा और मार्गदर्शन तथा जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की सक्रिय पहल से प्रदेश में पहली बार "ऑक्सीजन गार्डन" की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया जा रहा है।   इंदौर शहर अब ग्रीन सिटी बनने की तैयारी में जुटा है। दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण के सम्मान समारोह के बाद हुई राउंड टेबल कांफ्रेंस में इंदौर निगम ने अपने ग्रीन सिटी बनने वाले का भविष्य का रोडमैप बताया। इसमें कचरे के साथ पानी व ऊर्जा के माडल पर काम किया जाएगा। शहर की लगातार बढ़ती आबादी, भौगोलिक स्तर पर शहर को होते विस्तार के कारण इंदौर बढ़ते कचरे को कम करने के लिए अभी से प्रयासरत है। इंदौर में हर दिन 1250 टन गीला व सूखा कचरा उत्पन्न होता है। पिछले तीन साल में इंदौर ने 250 टन सूखा कचरा कम किया। तीन साल में 19 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम किया गया। वहीं अगले एक साल में इंदौर नगर निगम 21 से 22 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस तरह इंदौर में अगले एक साल में 250 टन के अलावा 50 टन अतिरिक्त कचरा कम करने की तैयारी है। इंदौर में 11 एकड़ में विकसित होगा ऑक्सीजन गार्डन इंदौर के कनाडिया क्षेत्र स्थित गुलमर्ग परिसर के पीछे 11 एकड़ के पहाड़ी क्षेत्र में इस विशाल हरित परियोजना की शुरुआत की जाएगी। इस संबंध में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यावरणीय केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा, अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, इंदौर जनपद अध्यक्ष विश्वजीत सिंह सिसोदिया सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। औषधीय पौधों और पक्षी विहार से सजेगा हरित क्षेत्र इस पहाड़ी क्षेत्र पर नीम, पीपल, बरगद, अशोक, आम, महुआ, रेन ट्री, जामुन, उंबर सहित लाखों की संख्या में औषधीय एवं छायादार प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। यह ऑक्सीजन गार्डन न केवल नागरिकों को शुद्ध वायु प्रदान करेगा, बल्कि पक्षियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के आगमन से यह स्थल एक प्राकृतिक पक्षी विहार और पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा। पौधों की सिंचाई के लिए गुलमर्ग परिसर स्थित ट्रीटमेंट प्लांट से पाइपलाइन के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी मंत्री सिलावट ने दिए हैं। जन भागीदारी से बनेगा पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसमें पद्मश्री एवं पद्मभूषण सम्मानित नागरिकों, व्यापारी संगठनों, समाजसेवियों, धर्मगुरुओं, किसान संगठनों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। यह ऐतिहासिक पहल आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसी अवसर पर सिलावट ने कनाडिया क्षेत्र की गौशाला का भी निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।  तीन साल में 190 टन गीले कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड जाने से रोका शहर के घरों व प्रतिष्ठानों से पिछले तीन साल में 190 टन कचरा ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचने से रोका गया। इसके लिए इंदौर में 56 हजार घरों के लोगों का विशेष सहयोग मिला। इन घरों में होम कंपोस्टिंग यूनिट के माध्यम से घरों में ही गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। वही शहर के उद्यानों में पिट कंपोस्टिंग, आर्गेनिक वेस्ट वाटर व ड्रम कंपोस्ट के माध्यम से हरित कचरे का निपटान गार्डन परिसर में ही किया जा रहा है। 287 संस्थानों ने 30 टन प्रतिदिन कचरा किया कम शहर में 287 संस्थाएं ऐसी हैं जो प्रतिदिन 30 किलो से ज्यादा कचरा देती हैं। ऐसे संस्थानों में होटल, मैरिज गार्डन, शैक्षणिक संस्थान हैं। इन संस्थानों ने गीले कचरे के खाद बनाने के उपक्रम लगाए और सूखे कचरे की छंटाई की यूनिट लगाई। परिणामस्वरूप प्रतिदिन 30 टन कचरा नगर निगम को मिलना कम हुआ। इस तरह कचरे का परिवहन हुआ कम मोबाइल कंपोस्टिंग वैन : चार वाहनों के माध्यम से प्रतिदिन आठ से नौ टन गीला कचरा एकत्र कर उससे खाद बनाई जा रही है। बायोसीएनजी प्लांट : कबीटखेड़ी व चोइथराम मंडी में बायोसीएनजी प्लांट में 35 टन कचरे से गैस बनाई जा रही है। यह कचरा शहर में खत्म हो रहा है। बढ़ते कचरे के नियंत्रण के लिए भविष्य की तैयारी वर्तमान में ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 550 टन प्रतिदिन गीले कचरे से खाद बनाने का संयंत्र लगाया गया है। इसकी क्षमता बढ़ाकर 800 टन प्रतिदिन करने की योजना है। इस तरह यह विश्व का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट बन जाएगा। ग्रीन इंदौर के लिए ये भी हो रहे प्रयास     इंदौर नगर निगम शहर की वायु गुणवत्ता का स्तर 50 से कम करने के लिए अलग-अलग प्रयास कर रहा है।     सोलर मित्र योजना के तहत अगले तीन साल में शहर के शत-प्रतिशत घरों में सोलर पैनल से बिजली बनाने के संयंत्र लगाने की योजना। फिलहाल एक माह में एक करोड़ से अधिक विद्युत यूनिट बचाई गई।     1 लाख 70 हजार घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे। अगले तीन साल में छह लाख घरों में लगवाने की योजना।     हरित क्षेत्र बढ़ा रहे हैं। अभी शहर में छह स्थानों पर सिटी फारेस्ट विकसित किए गए हैं। शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष पौधे लगाए जाएंगे। इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे     ग्रीन इंदौर बनाने के लिए इंदौर निगम लगातार काम कर रहा है। भविष्य में इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे। हमने … Read more

MP में हाईटेक सुरक्षा की शुरुआत: 15 अगस्त से सक्रिय होगी सेंट्रलाइज्ड 112 सेवा

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब आपातकालीन सेवाएं और भी आसान और तेज हो जाएगी। 15 अगस्त 2025 से प्रदेश में इमरजेंसी सर्विसेज के लिए एक नया एकीकृत नंबर 112 शुरू होने जा रहा है। अब आपको पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। बस एक नंबर 112 डायल करें, और मदद तुरंत आपके दरवाजे पर पहुंचेगी। इस नई पहल के तहत मध्यप्रदेश सरकार डायल 112 सेवा को हाईटेक और सेंट्रलाइज्ड बनाने जा रही है। इसके लिए एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर तैयार किया जा रहा है, जो सीधे सेंट्रल सर्वर से जुड़ा होगा। इस सेवा के तहत सड़कों पर बोलेरो नियो और स्कॉर्पियो जैसी हाईटेक इमरजेंसी गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी, जो आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। 1200 नए वाहन मिलेंगे नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में 1200 नए बोलेरो नियो “फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल” तैनात किए जाएंगे. ये वाहन जीपीएस, वायरलेस, डिजिटल नेविगेशन सिस्टम और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस की मदद पहले से कहीं तेज़ और सटीक हो सकेगी. 10 साल तक चली ये सेवा बता दें कि डायल-100 सेवा वर्ष 2015 में सिर्फ पांच साल के लिए शुरू की गई थी, लेकिन विभिन्न तकनीकी समस्याओं, निविदा प्रक्रिया में देरी, कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक कारणों के चलते यह सेवा 10 वर्षों तक चली. अब बीवीजी कंपनी के बजाय जीवीके कंपनी को नई डायल-112 सेवा का संचालन सौंपा गया है. पुलिस का ये दावा पुलिस विभाग का दावा है कि नई सेवा के माध्यम से प्रदेशवासियों को और भी अधिक भरोसेमंद, तेज़ व स्मार्ट सुरक्षा मिलेगी. नई तकनीक के इस्तेमाल से घटना स्थल तक पहुंचने का औसत समय भी घटेगा, जिससे आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. इस ऐलान के बाद से लोगों में नई सेवा को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. 112 के साथ शुरू होगा मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय  फिलहाल, प्रदेश में इमरजेंसी सेवाओं के लिए डायल 100 नंबर का उपयोग होता है, जिसकी स्कीम 2015 में शुरू हुई थी और यह 5 साल के लिए थी। अब डायल 112 के साथ मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। तो, 15 अगस्त से तैयार रहें, क्योंकि मध्यप्रदेश में आपकी सुरक्षा और सहायता के लिए सिर्फ एक कॉल काफी होगी- डायल 112.