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BPSC, DGP और BPSSC के शीर्ष पदों पर अस्थायी बदलाव, अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था

पटना  बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में 15 सितंबर 2026 से कई अहम पदों की जिम्मेदारियों में अस्थायी बदलाव हुआ है. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई, बिहार के डीजीपी विनय कुमार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी अलग-अलग अवधि के लिए अवकाश पर हैं. इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में संबंधित पदों पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की गयी है. BPSC अध्यक्ष रवि परमार 9 अक्टूबर तक छुट्टी पर BPSC अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई 15 सितंबर से 9 अक्टूबर 2026 तक अवकाश पर रहेंगे. उनकी अनुपस्थिति में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा को BPSC अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. हरजोत कौर 1992 बैच की IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं. BPSC की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उनके सामने आयोग के नियमित प्रशासनिक कामकाज के साथ भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी. पहले क्या जिम्मेदारी संभाल रहे थे रवि परमार परमार रवि मनुभाई वर्तमान में बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं. BPSC अध्यक्ष के रूप में आयोग की भर्ती परीक्षाओं, परीक्षा प्रक्रिया और आयोग के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े प्रमुख निर्णयों की जिम्मेदारी उनके पास रही है. उनके अवकाश के दौरान यह जिम्मेदारी हरजोत कौर बम्हरा संभालेंगी. DGP विनय कुमार भी अवकाश पर बिहार के DGP विनय कुमार भी 15 सितंबर से 21 दिनों के अवकाश पर गये हैं. उनकी अनुपस्थिति में प्रीता वर्मा को पुलिस महानिदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. प्रीता वर्मा वर्तमान में होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवा से जुड़ी वरिष्ठ जिम्मेदारी संभाल रही हैं. अतिरिक्त प्रभार के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस मुख्यालय से जुड़े नियमित प्रशासनिक और विभागीय कामकाज की निगरानी करेंगी. यह व्यवस्था विनय कुमार के अवकाश से लौटने तक रहेगी. BPSSC अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी छुट्टी पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी भी करीब एक महीने के अवकाश पर हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पारिवारिक कारणों से छुट्टी ली है. उनकी अनुपस्थिति भी ऐसे समय हुई है, जब पुलिस भर्ती से जुड़ी प्रक्रियाएं आयोग के स्तर पर चल रही हैं. भर्ती परीक्षाओं के बीच बदली जिम्मेदारियां BPSC और BPSSC दोनों आयोग राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन करते हैं. ऐसे समय में शीर्ष पदों पर अस्थायी जिम्मेदारी में बदलाव हुआ है. BPSC अध्यक्ष के अवकाश के दौरान हरजोत कौर बम्हरा आयोग का कामकाज देखेंगी, जबकि DGP के अवकाश के दौरान प्रीता वर्मा पुलिस विभाग की कमान संभालेंगी. अधिकारियों का अवकाश निर्धारित अवधि के लिए है. उपलब्ध रिपोर्टों में इन छुट्टियों को नियमित अवकाश के तौर पर बताया गया है; इसलिए इसे अधिकारियों के पद से हटाये जाने या किसी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा.  

रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना: यूपी की 40 हजार छात्राओं को फ्री स्कूटी, टेंडर जारी

लखनऊ यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 40 हजार मेधावी छात्राओं के हाथ में स्कूटी की चाबी सौंपी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्कूटी की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। जनवरी में स्नातक की मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरित की जाएगी। मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरण के लिए विश्वविद्यालयों के स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं में से टॉप पांच प्रतिशत की मेरिट जारी कर उनसे डाक्युमेंट लिए जा रहे हैं। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में यूपी की मूल निवासी उन मेधावी छात्राओं को लाभ मिलेगा, जिन्होंने प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, एडेड व निजी डिग्री कॉलेजों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। यही नहीं उनके परिवार की सालाना आय 12 लाख रुपये तक होगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से योजना के तहत पात्र छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराने की बिड प्रकाशित की गई है। जिसका मूल्य करीब 320 करोड़ रुपये है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से 21 सितंबर को ऑनलाइन प्री बिड बैठक भी होगी। फिर आगे की प्रक्रिया पूरी कर जनवरी तक स्कूटी वितरण करेगा। दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में अपने व संबद्ध महाविद्यालयों के डाटा एकत्र कर मेरिट के आधार पर स्नातक उत्तीर्ण टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की सूची तैयार की गई है। इसके अनुसार छात्राओं का आधार, निवास व आय प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लेकर पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। उच्च शिक्षा निदेशालय, जिला प्रशासन के सहयोग से इनका सत्यापन कराएगा। इन छात्राओं को मिलेगी स्कूटी योजना के अंतर्गत सरकारी विश्वविद्यलयों, निजी विश्वविद्यालयों, इन विश्वविद्यलयों से जुड़े कॉलेज, एडेड कॉलेज, स्ववित्त पोषित कॉलेज सभी को रखा गया है। इन संस्थान से पिछले साल यानी 2025-26 में ग्रेजुएशन करने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। छात्राओं को यूपी का निवासी होना भी जरूरी किया गया है। छात्राओं की पारिवारिक आय 12 लाख रुपए तक होनी चाहिए। केवल निराश्रित, दिव्यांग और शहीद परिवारों की बेटियों की मेरिट नहीं देखी जाएगी। उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्कूटी दी जाएगी। रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार कराकर देगी सरकार की तरफ से स्कूटी के साथ ही आईएसआई मार्का वाला हेलमेट, एसेसरीज, पांच लीटर पेट्रोल भी मिलेगा। आरटीओ में रजिस्ट्रेशन और बीमा भी सरकार ही कराकर देगी। यानी स्कूटी हासिल करने वाली किसी छात्रा को कोई खर्च नहीं करना होगा।

अनुदान प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता की नई पहल, 230 प्रतिनिधियों को पोर्टल संचालन की ट्रेनिंग

अनुदान प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता की नई पहल 230 प्रतिनिधियों को दिया गया पोर्टल संचालन का प्रशिक्षण महिलाओं और बच्चों का सर्वोत्तम हित सर्वोच्च प्राथमिकता : आयुक्त संदीप भोपाल  महिला एवं बाल विकास विभाग ने मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य से जुड़ी अशासकीय संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग द्वारा विकसित ‘अनुदान पोर्टल’ का ऑनलाइन शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने 15 सितम्बर को किया था। पोर्टल के प्रभावी संचालन के लिए बुधवार को भोपाल के राष्ट्रीय होटल प्रबंधन संस्थान, शाहपुरा में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 230 प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सहभागिता की। नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अशासकीय संस्थाएं अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन से लेकर दस्तावेज अपलोड करने, प्रस्ताव परीक्षण, स्वीकृति, अनुदान वितरण और प्रगति की निगरानी तक की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकेंगी। इससे अनुदान प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा तथा भुगतान एवं स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने में सहायता मिलेगी। महिलाओं और बच्चों के हित में संवेदनशीलता के साथ काम करें संस्थाएं आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने कहा कि विभागीय योजनाओं की सफलता का वास्तविक आकलन उनके फील्ड स्तर पर दिखाई देने वाले प्रभाव से होता है। उन्होंने सभी अशासकीय संस्थाओं और विभागीय अधिकारियों से महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, परामर्श और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय घटनाओं और उनके बदलते ट्रेंड का चिन्हांकन कर संवेदनशील क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से अनुदान पोर्टल का गंभीरता से अध्ययन कर उसका अधिकतम और सार्थक उपयोग करने तथा पोर्टल को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव देने को कहा। ऑनलाइन होगी अनुदान की पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षण के दौरान मिशन वात्सल्य के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अमिताभ अवस्थी ने पोर्टल की उपयोगिता, विभिन्न मॉड्यूल और अशासकीय संस्थाओं द्वारा इसके उपयोग की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। मिशन शक्ति की प्रभारी डॉ. प्रज्ञा अवस्थी ने पोर्टल के माध्यम से विभिन्न रिपोर्ट तैयार करने तथा आवश्यक सूचनाओं को अद्यतन रखने की प्रक्रिया समझाई। तकनीकी सत्र में पोर्टल संचालन, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड सहित विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। मिशन शक्ति में 14 शक्ति सदन, मिशन वात्सल्य में 130 बाल देखरेख संस्थाएं प्रदेश में मिशन शक्ति अंतर्गत 13 जिलों में 14 शक्ति सदन संचालित हैं, जहां कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाली महिलाओं को आश्रय, संरक्षण और पुनर्वास सहित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विगत वर्ष 2,386 महिलाएं इन सेवाओं से लाभान्वित हुई हैं। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत प्रदेश में 130 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं, जिनमें वर्तमान में 2,377 बच्चे निवासरत हैं। इनमें 79 अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं को वर्तमान में अनुदान प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण में मिशन शक्ति की 11 और मिशन वात्सल्य की लगभग 68 अशासकीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ विभागीय अधिकारियों एवं डेवलपमेंट पार्टनर्स सहित लगभग 230 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।  

ड्रग तस्करों पर और कसेगा शिकंजा, राजस्थान में 3 साल की नई नारकोटिक्स रणनीति तैयार

सीकर राजस्थान में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए अब तीन साल की नई रणनीति तैयार होगी। अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी की जब्ती में देश में पहले स्थान पर पहुंचे प्रदेश में सरकार नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29 तैयार कर रही है। नारकोटिक्स विभाग का पूरा ध्यान मादक पदार्थ पकड़ने और तस्करों को गिरफ्तार करने तक नहीं रहेगा, विभाग की ओर से सिंथेटिक ड्रग के निर्माण, उसकी सप्लाई चेन, ड्रग की मांग कम करने और नशे की चपेट में आए लोगों को इलाज व पुनर्वास से जोड़ने पर भी रहेगा। प्रदेश में एक साल में अब तक करीब 730 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जब्त हो चुके हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 93 ड्रग किंगपिन ( अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क और संगठनों का मालिक या संचालक) गिरफ्तार किए हैं और एमडी ड्रग बनाने वाली 34 फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है। 5,626 केस दर्ज, अब दोहराने वाले अपराधियों पर भी नजर मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक 5,626 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट ( प्रिवेंशन ऑफ इललिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1988 ) के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में 73 करोड़ 64 लाख 64 हजार 948 रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क, फ्रीज और सीज की गई हैं। कार्रवाई में मकान, दुकान, कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और कार, पिकअप, ट्रैक्टर व मोटरसाइकिल सहित विभिन्न संपत्तियां शामिल हैं। चित्तौड़गढ़ में 20.35 करोड़, बारां में 18.48 करोड़, झालावाड़ में 12.65 करोड़ और प्रतापगढ़ में 8.24 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। नागौर, जोधपुर ग्रामीण व हनुमानगढ़ में भी 3.05 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। चार मोर्चों पर चलेगा अभियान नए विजन में ड्रग के खिलाफ कार्रवाई को चार प्रमुख हिस्सों में रखा जाएगा। इसमें प्रवर्तन, आसूचना एवं अभियान, प्रिकर्सर व सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण, मांग एवं हानि न्यूनीकरण,क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं। खासतौर पर एमडी (मेथिलीन डाइऑक्सी मेथैम्फेटामाइन) जैसी सिंथेटिक ड्रग के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रिकर्सर पदार्थों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रदेश के 12 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है। इन जिलों में नशामुक्ति शिविर लगाए जा रहे हैं और ड्रग हॉटस्पॉट पर निगरानी मजबूत की जा रही है। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री बनाने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। ड्रग पकड़ने के बाद वैज्ञानिक जांच जरूरी मादक पदार्थों के मामलों में फॉरेंसिक जांच को भी मजबूत किया जाएगा। ड्रग की पहचान, उसके स्रोत और नेटवर्क तक पहुंचने में वैज्ञानिक जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकार्ड) की नियमित बैठकें कर पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग सहित संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा। इनका कहना है पुलिस की कार्रवाई केवल एक मामले में गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, ड्रग के कारोबार में लगातार सक्रिय रहने वालों पर लंबी अवधि तक शिकंजा कसा जाएगा।नशे का कारोबार करने वाले मुख्य सप्लायर और तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान चलाकर नशे का उपभोग करने वालों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक किया जाएगा।

हाजीपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा, ट्रैक्टर पर सवार दिखे शिवराज और सम्राट चौधरी

हाजीपुर बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक टीम बिहार पहुंची. इस दौरान यह देखा गया कि हाजीपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्र की टीम के अन्य सदस्य ट्रैक्टर पर सवार होकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए निकल पड़े. शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा? बिहार में बाढ़ को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, जो कुछ भी बाढ़ की वजह से नुकसान हुआ है, उसे लेकर केंद्र सरकार सहायता करेगी. साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, बाढ़ प्रभावित इलाकों में रह रहे लोगों की मदद कैसे की जाए, इस पर लगातार चर्चा की जा रही है. फसल और सड़क की स्थिति को देखा गया है और लगातार मुआयना किया जा रहा है. दूसरे जिलों में भी जायजा लेने के लिए जायेंगे. निरीक्षण के बाद की जाएगी समीक्षा-बैठक इस दौरान मीडिया के सामने सीएम सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि, बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद समीक्षा बैठक की जाएगी. राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता शुरू कर दिया गया है. साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को केंद्र की विशेष टीम को बिहार भेजने के लिए धन्यवाद कहा. अन्य टीम भी बिहार में आयेंगे. बाढ़ का आकलन करेंगे और जो सहायता होगी, वह की जाएगी. बिहार के 15 जिलों के 49.74 लाख लोग प्रभावित बिहार में अलग-अलग नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य के 15 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया,मधेपुरा और कटिहार के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में 49.74 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं. खतरे के निशान से ऊपर नदियां केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त सूचना के मुताबिक गंडक नदी मुजफ्फरपुर के डुमरिया घाट, कोसी खगड़िया के बलतारा और कुरसेला, जबकि गंगा गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. पुनपुन नदी श्रीपालपुर में और बागमती नदी बेनीबाद और सोनाखान में खतरे के निशान से ऊपर है.  

ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था पर संकट, हरियाणा में 2.38 लाख जमीन इंतकाल सिस्टम में अटके

कैथल प्रदेश के रेवेन्यू पोर्टल में आ रही तकनीकी कमी के कारण पूरे जमीन के 2,38,688 इंतकाल (म्यूटेशन) लंबित हैं। सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के बाद 11वें दिन अपने आप इंतकाल दर्ज होने वाली ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था शुरू की थी, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इस व्यवस्था में सुधार लाने और साफ्टवेयर की कमियों को दूर करने के लिए प्रदेशभर के पटवारी और कानूनगो भी विरोध जता चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल सिस्टम में उलझे है। प्रदेश में 2,07,560 इंतकाल पटवारियों की ओर से लंबित है। इनके अलावा 10,537 कानूनगो की तरफ से लंबित है। पटवारियों का तर्क है कि मंजूर करने के बाद भी लंबित दिखाई दे रहे हैं। इंतकाल नहीं हो रहा दर्ज: महेंद्र पट्टी अफगान के महेंद्र ने बताया कि दो माह पहले उसकी रजिस्ट्री हो गई थी, लेकिन अब इंतकाल नहीं हो रहा है। रकबा गलत उठा रहा है। इसकी कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। सोमवार को पूरा दिन पोर्टल नहीं चला, मंगलवार को पोर्टल तो चला, लेकिन गलत रकबा उठाने के कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। इंतकाल पौने एकड़ का दिखाया: वीरभान चौधरी पट्टी के वीरभान ने बताया कि उसके मां के नाम जमीन ली थी। उन्होंने एक एकड़ जमीन की खरीद की थी, लेकिन इंतकाल में पौना एकड़ दिखा रहा है। पटवारी का कहना है कि पोर्टल की खामियों के कारण ऐसा हो रहा है। वह एक माह से पटवारखाने के चक्कर लगा रहा है। राजस्व विभाग को इसके लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र खटकड़ ने बताया कि साफ्टवेयर अब भी कुछ खामिया बची है, इसमें सुधार किया जा रहा है।सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं, रकबा गलत दिखा रहा है। जानिये, जिलों की स्थिति सोनीपत में 17,486 इंतकाल लंबित हैं। इसी तरह अंबाला में 14,486,भिवानी में 10,879, चरखी-दादरी में 5215, फरीदाबाद में 13,786, फतेहाबाद में 7663, गुरुग्राम में 12,603, हांसी में 5837, हिसार में 8484, झज्जर में 12,528, जींद में 13,856, कैथल में 10,255, करनाल में 9397, कुरुक्षेत्र में 10,461, महेंद्रगढ़ में 6826, नूंह में 9196, पलवल में 13,000, पंचकूला में 4225, पानीपत में 14,486, रेवाड़ी में 12,510, रोहतक में 7825 और सिरसा में 9574 इंतकाल लंबित हैं। असली मालिकों के नाम गायब कई इंतकालों में प्रिंट निकालने पर वे खाली आ रहा हैं या रजिस्ट्री में दर्ज जमीन की मात्रा कम दिखाई दे रही है। साफ्टवेयर के झोल के कारण कुछ जमीनों के रिकार्ड से असली मालिकों के नाम ही गायब हो गए हैं। पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं। पटवारी मंजूर करता है तो, एक खेवट में एक इंतकाल है। लोगों ने बताया कि सोमवार को पूरा दिन साइट नहीं चली। इस कारण इंतकाल में हिस्से गलत हो रहे हैं। नए साफ्टवेयर में दस पेज की कमांड देते है तो दो पेज का रिकार्ड मिलता है, रिकार्ड अधूरा मिल रहा है।  

स्वास्थ्य क्षेत्र में झारखंड की बड़ी पहल, कैंसर-डायबिटीज समेत रोगों की एक साथ होगी जांच

रांची झारखंड में कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी बीमारियों से निपटने के लिए अब अलग-अलग योजनाओं की जगह एकीकृत व्यवस्था के तहत उपचार और रोकथाम की पहल होगी. राज्य सरकार की ओर से तैयार एकीकृत मॉडल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही झारखंड देश में इस मॉडल को लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है. समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर रहेगा जोर नयी व्यवस्था में बीमारी होने के बाद इलाज के साथ उसकी समय पर पहचान, जांच और रोकथाम पर विशेष जोर रहेगा. नयी दिल्ली के कर्तव्य भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव सह मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मॉडल को मंजूरी देते हुए झारखंड में इसे लागू करने का निर्देश दिया. पहले चरण में होगी राज्य स्तरीय कार्यशाला पहले चरण में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी. इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ, तकनीकी संस्थान और संबंधित प्रतिनिधि शामिल होंगे. सफल क्रियान्वयन के बाद मॉडल का मूल्यांकन कर इसे देशभर में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाया जायेगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एनसीडी प्रभाग के डीडीजी डॉ एल स्वास्तिचरण ने मॉडल की रूपरेखा और तकनीकी व्यवस्था के बारे में जानकारी दी. निजी संस्थाओं को भी जोड़ा जायेगा सरकारी व्यवस्था के साथ ही इसमें जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी है. इसका उद्देश्य खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की पहुंच को बढ़ाना है. पांच योजनाएं होंगी एक साथ नयी व्यवस्था में पांच प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों को साथ लाने की योजना है. इनमें एनपी-एनसीडी, राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय उपशामक देखभाल कार्यक्रम और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल है. मरीजों को सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा मरीजों को नये मॉडल में अलग-अलग योजनाओं और सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. शुरुआती जांच, इलाज, रेफरल और निगरानी को एक व्यवस्था से जोड़ा जायेगा. मरीजों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, तंबाकू सेवन और मानसिक स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा जायेगा. कैंसर की शुरुआती पहचान पर विशेष जोर होगा.

श्रमिकों को मिलेगा सम्मान और 2 लाख रुपये का पुरस्कार, 5 अक्टूबर तक करें आवेदन

श्रमिक सुरक्षा और उत्कृष्ट कार्य को मिलेगा सम्मान, 2 लाख रुपये का ‘श्रम यशस्वी पुरस्कार’ श्रम जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले श्रमिक एवं संस्थाएं 5 अक्टूबर तक कर सकेंगे आवेदन श्रमिकों और संस्थाओं को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र सहित मिलेगा पुरस्कार रायपुर,  छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग ने श्रम के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले श्रमिकों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्व. रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार-2025-26 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पुरस्कार के तहत चयनित श्रमिक अथवा संस्था को 2 लाख रुपये की पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार उन श्रमिकों एवं संस्थाओं को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि में श्रम के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट कार्य किया हो। विशेष रूप से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनसे मजदूरों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए प्रभावी उपाय किए गए हों और जिनके परिणामस्वरूप पूरे वर्ष में कोई गंभीर दुर्घटना न हुई हो। इसके साथ ही कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा सुरक्षित कार्य वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान करने वाले श्रमिकों एवं संस्थाओं को भी पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा। ऐसे प्रयास, जिनसे प्रदेश का नाम श्रम जगत में गौरवान्वित हुआ हो, पुरस्कार के लिए महत्वपूर्ण आधार होंगे। 5 अक्टूबर तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन श्रम विभाग द्वारा पात्र श्रमिकों एवं संस्थाओं से 5 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इच्छुक श्रमिक एवं संस्थाएं श्रम विभाग की वेबसाइट shramevjayate.cg.gov.in/alankaran.aspx के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। पुरस्कार से संबंधित नियम, पात्रता, प्रक्रिया एवं आवेदन प्रपत्र भी इसी वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। सुरक्षित कार्य संस्कृति को मिलेगा प्रोत्साहन ‘श्रम यशस्वी पुरस्कार’ श्रम के क्षेत्र में उत्कृष्टता, श्रमिक सुरक्षा और स्वस्थ कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पुरस्कार के माध्यम से उन श्रमिकों एवं संस्थाओं के प्रयासों को सार्वजनिक पहचान मिलेगी, जो कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, श्रमिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने और सुरक्षित कार्य वातावरण के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर 105 टीमों ने पेश किए तकनीकी समाधान

धनबाद धनबाद हैकाथॉन एंड कोडिंग क्लब (एचएनसीसी), बीआइटी सिंदरी ने इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (आइआइसी 9.0) के सहयोग से 15 सितंबर को स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआइएच) 2026 के लिए आंतरिक हैकाथॉन का आयोजन किया. इसमें 105 टीमों के कुल 648 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. प्रतिभागियों में 184 छात्राएं और 464 छात्र शामिल रहे. आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना था. आंतरिक हैकाथॉन में प्रथम वर्ष से लेकर अंतिम वर्ष तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़े विभिन्न समस्या विवरणों पर काम करते हुए अपने विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत किये. ‘स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत’ रही केंद्रीय थीम इस वर्ष के आयोजन की केंद्रीय थीम “स्वदेशी फॉर आत्मनिर्भर भारत” रही. इसके तहत विद्यार्थियों ने विभिन्न तकनीकी समस्याओं पर काम किया. टीमों ने रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और समस्या-समाधान क्षमता का इस्तेमाल करते हुए अपने प्रोजेक्ट तैयार किये. आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को टीमवर्क के साथ वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने का अवसर मिला. संस्थान के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों में नवाचार और तकनीकी प्रयोग की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है. अनुभवी मार्गदर्शकों ने किया सहयोग कार्यक्रम का आयोजन डॉ. ख़ुश्तर अंसारी, प्रोफेसर-इन-चार्ज, एचएनसीसी एवं एसपीओसी, एसआइएच 2026, बीआइटी सिंदरी के मार्गदर्शन में किया गया. आयोजन टीम और मार्गदर्शकों में डॉ. एससी दत्ता, डॉ. राहुल कुमार, विजय कुमार बेसरा, जितेंद्र कुमार, विकास कुमार सिंह, डॉ. मुकेश चंद्र, संजय पाल, डॉ. प्रवीण कुमार साहू, इज़हार हुसैन और डॉ. सुमित कुमार शर्मा शामिल रहे. मार्गदर्शकों ने प्रतिभागी टीमों को समस्या की पहचान, समाधान की रूपरेखा और तकनीकी प्रस्तुति से जुड़े पहलुओं पर सहयोग दिया. 45 टीमों का अगले चरण के लिए चयन बीआइटी सिंदरी के निदेशक प्रो. पंकज राय कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बीडी यादव भी उपस्थित रहे. उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और नवाचार आधारित गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया. आंतरिक हैकाथॉन के प्रदर्शन के आधार पर 45 टीमों का एसआइएच 2026 के अगले चरण के लिए चयन किया जायेगा, जबकि पांच टीमों को प्रतीक्षा सूची में रखा जायेगा. चयनित टीमों को एसआइएच पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के अगले चरण में बीआइटी सिंदरी का प्रतिनिधित्व करेंगी. संस्थान के इस आयोजन में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी से परिसर में नवाचार, कोडिंग, तकनीकी प्रयोग और टीम आधारित समस्या-समाधान को लेकर सक्रियता देखने को मिली.  

शहडोल में सेवा संकल्प अभियान की तैयारी तेज, डिप्टी सीएम शुक्ल ने लिया जायजा

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने शहडोल में सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों की समीक्षा की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने एवं पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश शिविरों में संकलित रक्त का व्यवस्थित संधारण एवं सुरक्षित रख-रखाव किया जाये सुनिश्चित भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शहडोल जिले में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों एवं विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाली सभी गतिविधियों का व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालन सुनिश्चित किया जाए। सभी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। 17 सितम्बर को रक्तदान शिविरों का आयोजन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 17 सितम्बर को आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि शिविरों में संकलित रक्त का व्यवस्थित संधारण एवं सुरक्षित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने रक्तदान शिविरों के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्व से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसेवा संकल्प यात्रा में जनसंवाद एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जनसेवा संकल्प यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान निर्धारित सभी आयोजन व्यवस्थित रूप से संपन्न किए जाएं। यात्रा में शामिल दल एवं स्थानीय जनता के बीच प्रभावी संवाद सुनिश्चित किया जाए। यात्रियों के ठहरने एवं भोजन की समुचित व्यवस्था के साथ निर्धारित रूट एवं कार्यक्रम के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय से पूर्ण करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निबंध एवं रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन प्रतियोगिताओं का व्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित किया जाए। आंगनवाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन का मिलन’ की गतिविधियां हों उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आंगनवाड़ी केन्द्रों में आयोजित होने वाले ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित सभी गतिविधियों का व्यवस्थित रूप से आयोजन किया जाए। आंगनवाड़ी केन्द्रों में कार्यक्रमों की नियमित निगरानी एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर पार्थ जायसवाल एवं सीईओ जिला पंचायत शिवम प्रजापति ने सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान विधायक जैतपुर जयसिंह मरावी, जिला योजना समिति सदस्य श्रीमती अमिता चपरा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।