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ट्विशा मौत मामले के आरोपी समर्थ सिंह की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में पुलिस निगरानी बढ़ाई गई

भोपाल  भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में हैं। जेल में पहले दिन गिरिबाला सिंह ज्यादातर खामोश रहीं। उन्होंने पीने को साफ पानी मांगा। इधर समर्थ सिंह को इलाज के लिए मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। उसके पैर में चोट है जिसका इलाज चल रहा है। वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई है। चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब भोपाल पुलिस की कथित लापरवाही भी जांच के दायरे में आ गई है। सीबीआइ ने लिगेचर से संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं। गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया जेल सूत्रों के अनुसार ट्विशा केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जिला जज गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया। वे जेल में आम कैदियों की तरह रहीं। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को मंगलवार शाम को यहां लाया गया था। अपनी बैरक में गिरिबाला सिंह ने कढ़ी-पकौड़े और रोटियां खाईं। पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं जेल अधिकारियों के अनुसार गिरिबाला सिंह पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं। उन्होंने साफ पानी की मांग भी की। विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस की संवेदनशीलता को देखते हुए गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अलग- अलग रखा गया है। जेल अधिकारियों के अनुसार शाम दोनों को जेल लाने के बाद से ही उन्हें विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सामान्य सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया न्यायिक हिरासत में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को महिला वार्ड में रखा गया है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके पैर में चोट लग गई थी जिसके कारण खंड-बी स्थित मेडिकल वार्ड में भर्ती कराकर इलाज किया जा रहा है। समर्थ सिंह, कड़ी निगरानी में है। उन्हें भी आम बंदियों के समान नाश्ते के रूप में सुबह दलिया और नमकीन के साथ चाय भी दी गई। 14 दिन की न्यायिक हिरासत जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने यह फैसला दिया. इससे पहले 29 जून को कोर्ट ने दोनों को 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था. आज यानी 2 जून को दोनों की रिमांड खत्म हो रही थी।  27 मई को हुई थी गिरिबाला की गिरफ्तारी सीबीआई ने गुरुवार (27 मई) को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में गिरिबाला सिंह के घर पर सात घंटे से ज्यादा की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी गुरुवार (27 मई) को तब हुई, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. समर्थ सिंह को 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद, लगभग एक सप्ताह तक लापता रहने के बाद, भोपाल पुलिस ने 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था।  समर्थ सिंह को सबसे पहले 23 मई को भोपाल में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत में पेश किया गया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 29 मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था. मध्य प्रदेश सरकार की सिफारिश पर जांच का जिम्मा संभालने के बाद सीबीआई ने आगे की पूछताछ के लिए समर्थ की हिरासत की मांग की थी. कोर्ट के आदेश के बाद वह 16 जून तक हिरासत में रहेंगे।  कथित तौर पर ट्विशा शर्मा अपने ससुराल कटारा हिल्स में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. बाद में उनके परिवार ने उनके पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच की मांग उठी थी. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. रिमांड के दौरान सीबीआई समर्थ को कथित अपराध स्थल पर ले गई और विस्तृत फॉरेंसिक जांच की. सीबीआई टीम ने कटारा हिल्स स्थित घर पर कई घंटे बिताए. इस दौरान उन्होंने फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की और सबूत इकट्ठा किए, साथ ही समर्थ से 12 मई की रात की घटनाओं के बारे में पूछताछ भी की। 

संस्कृत शिक्षकों की सेवा समाप्ति पर कोर्ट की नाराजगी, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा टीजीटी संस्कृत भर्ती के संशोधित परिणाम जारी किए जाने के बाद चयन सूची से बाहर हुई कई शिक्षकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सिरसा जिले की लक्ष्मी व अन्यों ने याचिका दाखिल कर मांग की है कि लगभग दो वर्ष से सेवाएं दे रहे टीचर्स को नौकरी से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और उनको सेवा में बनाए रखने के आदेश दिए जाएं। याचिका के अनुसार लक्ष्मी व अन्यों ने वर्ष 2023 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी टीजीटी संस्कृत भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। वह आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और एचटेट पात्रता रखती हैं। भर्ती प्रक्रिया के बाद अंतिम परिणाम भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने 27 जुलाई 2024 को अंतिम परिणाम घोषित किया, जिसमें उनका चयन मेवात कैडर के लिए हुआ। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया और उन्होंने 14 अगस्त 2024 को नूंह जिले के एक सरकारी विद्यालय में टीजीटी संस्कृत के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। याचिका में कहा गया कि बाद में विभिन्न न्यायिक आदेशों के अनुपालन में आयोग ने 28 मई 2026 को संशोधित परिणाम जारी किया। इस संशोधित परिणाम में याची लक्ष्मी चयन सूची से बाहर हो गईं, जबकि वह लगभग दो वर्षों से नियमित रूप से सेवाएं दे रही हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में उनकी ओर से किसी प्रकार की धोखाधड़ी, तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने का आरोप नहीं है। नियुक्ति के बाद केवल संशोधित परिणाम के आधार पर सेवा समाप्त करना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। हाईकोर्ट के सामने क्या दलील? याचिकाकर्ता वकील जसबीर मोर ने हाई कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई मामलों में यह माना है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति उसकी किसी गलती के बिना हुई हो और वह लंबे समय से सेवा दे रहा हो, तो उसे अचानक नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य में टीजीटी संस्कृत के अनेक पद अभी भी रिक्त हैं, इसलिए सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों को हटाने के बजाय समायोजन जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल ही में इसी प्रकार के मामलों में हाई कोर्ट ने कुछ अन्य शिक्षकों को अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। लक्ष्मी ने भी समान आधार पर संरक्षण की मांग की है। हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि अंतिम सुनवाई तक उनकी सेवाएं समाप्त करने पर रोक लगाई जाए और नियुक्ति की स्थिति यथावत रखी जाए। सभी पक्षों को सुनने का बाद कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न कोर्ट सरकार के आदेश पर रोक लगा दे।

नियमितीकरण पर फिलहाल ब्रेक, हाईकोर्ट के आदेश से PRTC कर्मचारियों की बढ़ी चिंता

चंडीगढ़. पंजाब रोडवेज एवं पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) के कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के एकल पीठ के आदेश पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए 31 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है और तब तक संबंधित कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। डिवीजन बेंच के समक्ष पीआरटीसी की ओर से अपील में 22 अप्रैल 2026 को पारित उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें एकल पीठ ने कर्मचारियों की याचिका स्वीकार करते हुए निगम को छह सप्ताह के भीतर उन्हें नियमित करने का निर्देश दिया था। एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कर्मचारियों को नियमित माना जाएगा। 21 मई के आदेशों का दिया गया हवाला सुनवाई के दौरान पीआरटीसी की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि नियमितीकरण से जुड़ा समान कानूनी प्रश्न पहले से ही एक अन्य मामले में हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने 21 मई 2026 को पारित एक अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन बनाम जसदीप सिंह व अन्य मामले में भी यही मुद्दा लंबित है और उस प्रकरण की सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित है। दलीलों पर विचार करने के बाद डिवीजन बेंच ने मामले में नोटिस जारी कर दिया और वर्तमान अपील को भी उसी तारीख पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया, जिस दिन समान प्रकृति का दूसरा मामला सुना जाएगा। अदालत ने आदेश दिया कि इस अपील को एलपीए-1410-2026 के साथ सुना जाएगा ताकि नियमितीकरण के मुद्दे पर एक समान दृष्टिकोण अपनाया जा सके। यथास्थिति बनाए रखने के दिए आदेश सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि निजी प्रतिवादियों यानी कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में संबंधित विभाग यथास्थिति बनाए रखे। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल न तो कर्मचारियों को नियमित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और न ही उनकी मौजूदा सेवा स्थिति में कोई बदलाव किया जाएगा। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश से एकल पीठ के नियमितीकरण संबंधी निर्देशों के क्रियान्वयन पर रोक लग गई है और अंतिम निर्णय आने तक स्थिति यथावत बनी रहेगी।

बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति

पद्मजागेश्वर यादव का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श — मंत्री टंक राम वर्मा बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति ​रायपुर     राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री वर्मा को पद्मजागेश्वर यादव जी के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मजागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री  वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया। ​पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा            मुलाकात के दौरान मंत्री टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मजागेश्वर यादव जी द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मजागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। ​1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष      ​गौरतलब है कि पद्मजागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ​युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति       ​लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।      ​मंत्री टंक राम वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

​NEP के सपनों को साकार करेगी व्यावहारिक शिक्षा रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा नई पुस्तक 'मानचित्र निर्माण के सिद्धांत',पद्मजागेश्वर यादव भी रहे साक्षी ​रायपुर     राजस्व एवं  उच्च शिक्षा मंत्री माननीय टंक राम वर्मा ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अद्यतन पाठ्यक्रम पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पुस्तक 'मानचित्र निर्माण के सिद्धांत' का विमोचन किया। उच्च शिक्षा एवं भूगोल के विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली इस बेहद उपयोगी पुस्तक का लेखन प्रदेश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल द्वारा किया गया है।     ​विमोचन के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने दोनों विद्वान लेखकों को उनके इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों को मानचित्र कला (Cartography) जैसी महत्वपूर्ण विधा के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को सरलता से समझने में अत्यंत सहायक और उपयोगी सिद्ध होगी।       उच्च शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और मातृभाषा व सरल भाषा में ऐसी उच्च स्तरीय अकादमिक पुस्तकों का आना एक सराहनीय कदम है। ​युवा पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा: पद्मजागेश्वर यादव    ​इस अवसर पर उपस्थित प्रख्यात समाजसेवी एवं पद्मसे सम्मानित जागेश्वर यादव  ने भी इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए दोनों लेखकों को अपनी आत्मीय शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लेखकों के भगीरथ प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, ज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में किए गए ऐसे रचनात्मक प्रयास समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी को एक नई, सकारात्मक और प्रगतिशील दिशा प्रदान करते हैं।     ​पुस्तक के लेखक डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल ने इस अवसर पर बताया कि इस पुस्तक को विशेष रूप से नई शिक्षा नीति (NEP) के मापदंडों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भूगोल और मानचित्रण के जटिल व तकनीकी सिद्धांतों को बहुत ही सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में आधुनिक मानचित्र निर्माण की तकनीकों,अक्षांश-देशांतर के व्यावहारिक उपयोग और भौगोलिक आंकड़ों के सटीक प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। ​

ब्लड की कमी बनी मौत की वजह? अस्पताल पहुंची जांच टीम, कर्मचारियों से पूछे सवाल

दुर्ग. जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती सिकलिन पीड़ित 22 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा के इलाज के दौरान सोमवार को हुई मौत को लेकर कलेक्टर अभिजीत सिंह 2 सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जांच टीम में अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी शामिल है। दोनों बुधवार को सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए। शाम 5.30 बजे तक उन्होंने घटना के सभी पहलुओं जांचा परखा। सिविल सर्जन के कक्ष में मामले में कथित रूप से जिम्मेदार चिकित्सक, स्टाफ नर्स तथा कर्मचारियों के बारी बारी से बयान लिए। यानी करीब 8 घंटे तक पूछताछ की गई। सभी से बयान लेने के बाद जांच टीम द्वारा रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर कांग्रेस ने जिला अस्पताल में प्रदर्शन करते हुए सिविल सर्जन आशीषन मिंज को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मामले में दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने दीपिका की मौत के लिए जिला अस्पताल दुर्ग के चिकित्सकों तथा स्टाफ नर्स की लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में दीपिका को ब्लड चढ़ाया जाना था, इसके उलट परिजनों को ही ब्लड का इंतजाम करने कहा गया। ब्लड का इंतजाम करने में हुई देरी की वजह से दीपिका की मौत हो गई। मामले में ब्लड बैंक के अधिकारियों ने चौंकाने वाली बात सामने रखी है कि जब परिजनों को ब्लड के लिए कहा गया, तो महिला मेडिसिन वार्ड से ब्लड सैंपल तथा मांग पत्र भेजा जाना था। ऐसा नहीं किया गया। केवल आवेदन लेकर ब्लड बैंक भेज दिया गया। वहीं दूसरी ओर लाइफ़ सेविंग की स्थिति निर्मित होती है, तो बिना डोनेटर के ब्लड उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार सिकलिन मरीजों को भी बिना देरी किए ब्लड दिया जाता है। ऐसा लगता है कि दीपिका के मामले में ब्लड इंतजाम करने के इस तरह के प्रयास ही नहीं किए गए। परिजनों की शिकायत पर जांच कमेटी मृतक दीपिका की माता नीमा बाई गाड़ा पति मन्नू राम गाड़ा का निवास एचएचसीएल कॉलोनी, वार्ड नं. 17 स्टेशन मड़ोदा भिलाई है। दीपिका की तबीयत खराब होने पर उसे 30 मई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 1 जून को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही पर रखने का आरोप लगाया। कलेक्टर से इसकी शिकायत की गई, जिसे संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने जांच करने समिति बैठाई । कलेक्टर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट : जांच टीम के सदस्य अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि दीपिका की मौत के मामले को लेकर अलग-अलग विभागों के चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के बयान लिए गए हैं। इसके बाद जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसे कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

ग्रीन मोबिलिटी की ओर कदम, इलेक्ट्रिक कार अपनाएंगे CM मोहन यादव; नंबर प्लेट का भी है खास महत्व

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इलेक्ट्रिक कार से सफर करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा की गई पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील पर अमल करते हुए सीएम मोहन यादव ने इलेक्ट्रिक कार में सफर करने का फैसला लिया है। सीएम के फैसले के बाद अब उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल कर लिया गया है और ऐसा बताया जा रहा है कि शाम को पहली बार सीएम मोहन यादव इलेक्ट्रिक कार में सफर कर सकते हैं। सीएम के काफिले में शामिल हुई इलेक्ट्रिक कार सीएम मोहन यादव के द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत करने का फैसला लिए जाने के बाद उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल किया गया है। सीएम के काफिले के लिए नई इलेक्ट्रिक कार महिंद्रा XEV 9e खरीदी गई है, जो कि एक बार की चार्जिंग में करीब 500 किलोमीटर की रेंज देती है। सीएम मोहन यादव आज शाम को पहली बार सीएम हाउस से स्टेट हैंगर जाते वक्त इस इलेक्ट्रिक कार की सवारी कर सकते हैं। कार के नंबर में छिपा है बड़ा संदेश सीएम मोहन यादव के काफिले में जो इलेक्ट्रिक कार शामिल की गई है उसका नंबर MP 02VB 2047 है। सीएम हाउस से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार के नंबर में भी एक बड़ा संदेश छिपा है। कार के नंबर में विकसित भारत का संदेश है, V का मतलब विकसित और B का मतलब भारत है। 2047 नंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दर्शाता है। मोदी के संदेश पर मोहन का अमल..अब EV पर होंगे सवार मध्य प्रदेश के डॉ मोहन यादव बीजेपी शासित राज्यों के उन मुख्यमंत्रियों में से हैं, जिन्होंने पीएम की अपील का अमल सबसे पहले किया. वे मध्य प्रदेश के इकलौते मुख्यमंत्री होंगे, जो अब इलेक्ट्रिकल व्हीकल से सफर करेंगे. सीएम आज से ही इस पर अमल करेंगे. जानकारी के मुताबिक . बीजेपी प्रवक्ता डॉ हितेष वाजपेयी का कहना है कि "मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की ये पहल अनुकरणीय है और मिसाल बनेगी।  मोहन यादव ईवी कार में चलेंगे जिस तरह से उन्होंने पहले काफिले को सीमित किया और अब ईवी वाहन से चलने का निर्णय लिया है. निश्चित तौर पर पार्टी के भीतर ही नहीं बाकी समाज में भी ईंधन बचाने के साथ पर्यावरण को बचाने का जो संकल्प है, उससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी।  ईवी कार में दर्ज विकसित भारत और 2047 इस ईवी कार का नंबर भी बेहद खास है. एमपी 03 सीरीज की इस कार का जो नंबर है, वो वी बी 2047 है. वीबी (VB) के मायने हैं विकसित भारत. जो 2047 का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तय किया है. मोहन यादव प्रदेश के इस लिहाज से पहले मुख्यमंत्री होंगे, जिन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन की सवारी का निर्णय लिया. हालांकि भारत के अन्य राज्यों में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले ही अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन शामिल कर लिए थे. इसी तरह से मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा भी अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं।  13 गाड़ियों से अब केवल पांच गाड़ियों का काफिला मोहन यादव ने इससे पहले अपने काफिले की गाड़ियों को कम किया था. उनके काफिले में 13 गाड़ियां थी, जिन्हें कम करके 8 किया गया और फिर सीमित करके पांच गाड़ियों का काफिला ही बचा. कारकेड कम करने के बाद बीती दिल्ली यात्रा में सीएम डॉ मोहन यादव ने आम आदमी की तरह मेट्रो में यात्रा की थी. अब उसमें भी मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिलक वाहन से यात्रा करने का निर्णय लिया. सभी उच्च तकनीक से लैस महिन्द्रा कंपनी से बनी इस कार के फीचर हैं, एक बार की चार्जिंग में ये औसत 500 किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर तय कर लेती है।  इस कार के टॉप मॉडल की कीमत करीबन 31 लाख 25 लाख है. इसमें आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. इस गाड़ी में पैनोरमिक सनरूफ है, जिससे केबिन में भरपूर प्राकृतिक रोशनी आती है और यात्रियों को खुले आसमान का शानदान नजारा मिलता है. इसमें 360 डिग्री घूमने वाला कैमरा और कई दूसरे सुरक्षा फीचर्स होते हैं. इस गाड़ी में 79 किलोवॉट की लिथियम आयन बैटरी होती है, जो 20 मिनट में 80 परसेंट तक चार्ज हो जाती है. सिर्फ 6.8 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंच जाती है।  एक महीने में बचेगा 6 हजार लीटर डीजल गाड़ियों की संख्या कम करने से डीजल-पेट्रोल की खपत में बड़ी कमी आएगी. स्टेट गैरेज के सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 2026 में वीआईपी वाहनों में करीबन 24 हजार लीटर डीजल की खपत हुई थी, जो मई माह में घटकर 18 हजार लीटर रह गई है. इस तरह एक माह में करीबन 6 हजार लीटर डीजल की कमी आई है।  पीएम की अपील पर सीएम मोहन यादव ने किया अमल बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल की बचत की अपील करने के बाद सीएम मोहन यादव ने इस पर अमल किया है। सबसे पहले सीएम मोहन यादव ने अपने काफिले से गाड़ियों की संख्या कम कराई थी और एक गाइडलाइन भी जारी की थी। इसके साथ ही बीते दिनों सीएम मोहन यादव खुद इंदौर से उज्जैन तक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बस में यात्रा कर पहुंचे थे और सादगीपूर्ण प्रशासन का संदेश दिया था। इस दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्था के लिए केवल तीन अन्य वाहन ही उनके साथ थे। इतना ही नहीं बस में यात्रा के दौरान ही सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई विकासकार्यों और जनहित की योजनाओं पर चर्चा भी की थी।

सुगंधित चावल की वैश्विक डिमांड का मिलेगा फायदा, छत्तीसगढ़ में शुरू होगी बासमती धान मिशन की पहल

किसानों की आय बढ़ाने छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन की तैयारी अंतराष्ट्रीय बाजार में सुगंधित चावल की है बड़ी डिमांड कृषि मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में  इंडियन राईस एक्सपोर्ट फेडरेशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक, पायलट प्रोजेक्ट पर बनी सहमति     रायपुर, छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बासमती धान की खेती के विस्तार पर राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कृषि विकास मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन  के पदाधिकारी उपस्थित थे।      बैठक में कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वाेपरि हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। सामान्य धान की खेती के फसल विविधिकरण तथा राज्य में बासमती का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।     बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है तथा इनके बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।     बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और रकबे में वृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

मनरेगा से जल संरक्षण को मिली रफ्तार, रोजगार और आजीविका सशक्त बनाने का महाअभियान

महात्मा गांधी नरेगा से जल संरक्षण का महाअभियान, रोजगार और आजीविका को मिली नई ताकत पानी, रोजगार और समृद्धि का संगम: ‘मोर गांव-मोर पानी’ से बदल रहे गांव *मनरेगा अंतर्गत प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार, 57 प्रतिशत महिलाएं *  1610 करोड़ रुपये से एक लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों का निर्माण रायपुर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। 24 अप्रैल 2025 से प्रारंभ ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से महात्मा गांधी नरेगा के तहत प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।         अभियान के अंतर्गत लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों से जहां जल सुरक्षा मजबूत हो रही है, वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह संगम छत्तीसगढ़ को सतत ग्रामीण विकास की दिशा में नई पहचान दे रहा है। जल संरक्षण से आजीविका का सृजन        राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे आजीविका से जोड़ते हुए कई अभिनव पहलें शुरू की हैं। वर्तमान में  समाज के संवेदनशील एवं कमजोर वर्गो की निजी भूमियों पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नवा तरिया-आय के जरिया’ के अंतर्गत विकसित हो रहे 624 सामुदायिक तालाब      इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। क्लस्टर स्तर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इन जल संरचनाओं से जोड़कर स्थायी आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे जल संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम भी बन रहा है। 1.50 लाख से अधिक आवासों में हितग्राहियों ने स्वेच्छा से लगाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम        इसके साथ साथ अन्य जल सरंक्षण, संवर्धन कार्य भी व्यापक सामुदायिक भागीदारी से किए जा रहे है। प्रधान मंत्री आवास ग्रामीण अंतर्गत निर्मित 1.50 लाख से अधिक आवास में हितग्राहियों द्वारा अपने खर्च पर स्वेच्छा से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है ।  तकनीक से जल संरक्षण को मिली नई दिशा         ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप के माध्यम से स्थल चयन तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। जलदूत प्रणाली से भू-जल स्तर की हो रही नियमित निगरानी       भू-जल स्तर की नियमित निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भू-जल स्तर का लेखन कर स्थानीय स्तर पर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे जल प्रबंधन अधिक प्रभावी और समुदाय आधारित बन सके। पारदर्शिता का अभिनव मॉडल         मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश ने तकनीक आधारित नवाचारों को अपनाया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत एवं पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से योजना में पारदर्शिता एवं जनविश्वास को और सुदृढ़ किया गया है। जनभागीदारी से “भागीदारी से साझेदारी “(Participation to Partnership) की ओर          अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता है। जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्राम सभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास किया गया है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार का अभिनव मॉडल        छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की अवधारणा को धरातल पर साकार करता दिखाई दे रहा है। जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता और अभिसरण का यह मॉडल राज्य को भागीदारी से साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय लिख रहा है।

‘इकोसिस्टम इंजीनियर्स’ की अहम भूमिका, पक्षी प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में निभा रहे बड़ा योगदान

झज्जर/चंडीगढ़. भोर की पहली किरण के साथ चहकने वाले पक्षी केवल आकाश की सुदंरता नहीं हैं, बल्कि ये धरती के वे मूक और सच्चे ''इकोसिस्टम इंजीनियर्स'' हैं, जो बिना किसी वेतन या स्वार्थ के ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर जंग लड़ रहे हैं। जब ये पंख वाले संरक्षक उड़ते हैं, तो अपने साथ जीवन का बीजारोपण करते हैं, बंजर हो चुकी जमीनों को घने वनों में तब्दील कर देते हैं, कीटों से जंगलों की रक्षा करते हैं और वनस्पतियों को नया जीवनदान देते हैं। पर्यावरणविद एवं डीएफओ सुंदर सांभरिया बताते है जब तक हम इन मूक बागवानों के आशियानों, शाखाओं और उनकी आर्द्रभूमियों को महफूज नहीं करते, तब तक ''क्लाइमेट एक्शन'' का हमारा हर संकल्प अधूरा रहेगा। दिवस विशेष की पावन वेला में इन बेजुबान संरक्षकों को बचाने का विचार ही हमारे सुरक्षित और हरे-भरे कल की असली नींव है। क्योंकि, वे सीधे तौर पर 'प्रकृति से प्रेरित' समाधानों को धरातल पर उतारते हैं। प्राकृतिक बीजारोपण और वनों का पुनर्जीवन जलवायु परिवर्तन से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका कार्बन को सोखना है, और इसमें पक्षी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसे विज्ञान में ''एंडोजूकोरी'' कहा जाता है। कार्बन सोखने वाले विशाल पेड़ों का रोपण: बड़े आकार के पक्षी (जैसे हार्नबिल या टूकेन) घने और भारी कार्बन सोखने वाले पेड़ों के फल खाते हैं। जब ये पक्षी उड़ते हैं, तो दूर-दराज के बंजर क्षेत्रों या कटे हुए जंगलों में बीजों को मल के रूप में छोड़ देते हैं। प्राकृतिक खाद और त्वरित अंकुरण: जब कोई बीज पक्षी के पाचन तंत्र से गुजरता है, तो उसके पेट के एंजाइम बीज की कठोर बाहरी परत को हल्का कर देते हैं। इससे वह बीज सामान्य से अधिक तेजी से अंकुरित होता है। साथ ही, पक्षियों की बीट प्राकृतिक नाइट्रोजन युक्त खाद का काम करती है, जिससे पौधों को शुरुआती पोषण मिलता है। वनस्पतियों का जीवन चक्र: पक्षियों द्वारा होने वाले परागण को विज्ञान की भाषा में ''आर्निथोफिली'' कहा जाता है। जैव विविधता का संरक्षण: हमिंगबर्ड, सनबर्ड और हनीईटर जैसे पक्षी जब फूलों का रस चूसते हैं, तो परागकण उनकी चोंच और पंखों पर चिपक जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार विश्व की लगभग 15% से 25% जंगली पौधों की प्रजातियां पूरी तरह से पक्षियों द्वारा होने वाले परागण पर निर्भर हैं। यदि ये पक्षी न हों, तो जलवायु परिवर्तन के इस दौर में कई दुर्लभ औषधीय और जंगली वनस्पतियां हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ने से हानिकारक कीड़ों और महामारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। पक्षी इस संतुलन को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक रक्षक का कार्य करते हैं। लाखों टन कीड़ों का खात्मा: दुनिया भर के कीटभक्षी पक्षी (जैसे स्वैलो, ब्लू बर्ड और गौरैया) मिलकर हर साल 40 से 50 करोड़ टन कीड़े खाते हैं। वनों और फसलों की सुरक्षा: पक्षी पेड़ों की पत्तियों को चट करने वाले कैटरपिलर और टिड्डियों को खाकर वनों को नष्ट होने से बचाते हैं। यदि पक्षी इन कीड़ों को न खाएं, तो घने जंगल समय से पहले ही सूख जाएंगे, जिससे पृथ्वी की कार्बन सोखने की क्षमता आधी रह जाएगी। संक्रमण और ग्रीनहाउस गैसों पर लगाम: मृत जीवों के अवशेषों को खाकर ये पक्षी पर्यावरण में रैबीज, एन्थ्रेक्स जैसी जानलेवा बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मृत जानवर खुले में सड़ते हैं, तो उनसे बड़ी मात्रा में मीथेन और अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं, लेकिन ये पक्षी उन्हें खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। जलवायु परिवर्तन के जैविक संकेतक: पक्षी पर्यावरण में आ रहे बदलावों को सबसे पहले भांपने की क्षमता रखते हैं। तापमान में मामूली वृद्धि होने पर भी पक्षियों के प्रवास और उनके व्यवहार में तुरंत बदलाव देखा जाता है। वैज्ञानिक पक्षियों की घटती-बढ़ती आबादी को देखकर यह सटीक अनुमान लगाते हैं कि कौन सा पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है, जिससे समय रहते ''क्लाइमेट एक्शन'' लिया जा सके।